Tuesday, July 7, 2026 12:19 am

आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमत में भी बड़ी गिरावट आएगी : एक्सपर्ट

नई दिल्ली  कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई है। यह अक्टूबर के बाद पहली बार हुआ है जब तेल की कीमतों में 2% से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली है। विदेशी बाजारों में कमजोर मांग को देखते हुए कच्चे तेल की कीमत में कमी आई है। अभी कई संकेत और ऐसे मिल रहे हैं जिनसे पता चलता है कि कच्चे तेल की कीमत में और कमी आ सकती है। इससे देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत भी गिर सकती है। बुधवार को तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही। ब्रेंट क्रूड वायदा 0.3 फीसदी गिरकर 70.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 0.9 फीसदी गिरकर 67.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज के मुताबिक कच्चे तेल की कीमत में गिरावट से भारत की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को फायदा हो सकता है। और कम हो सकती है कच्चे तेल की कीमत दुनियाभर में ऐसे कई संकेत मिल रहे हैं जिनके चलते आने वाले समय में कच्चे तेल की कीमत और कम हो सकती है। तीन मुख्य संकेत इस प्रकार हैं: 1. रूस पर लगे बैन में ढील इस समय अमेरिका रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने पर लगा है। ऐसे में अमेरिका ने रूस पर जो बैन लगाए हैं, उनमें वह कुछ ढील दे सकता है। अमेरिका ने विदेश और वित्त मंत्रालयों से उन बैन की लिस्ट तैयार करने को कहा है जिनमें रूस को ढील दी जा सकती है। ऐसा होने पर रूस की ओर से तेल की सप्लाई बढ़ सकती है। ऐसे में तेल की कीमत में कमी आ सकती है। 2. OPEC+ ने बढ़ाया प्रोडक्शन OPEC+ ने अपने तेल प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला लिया है। रॉयटर्स की एक खबर के मुताबिक OPEC+ ने अप्रैल में तेल प्रोडक्शन को 138,000 बैरल प्रतिदिन बढ़ाने का फैसला किया है। ऑयल प्रोडक्शन में यह वृद्धि साल 2022 के बाद पहली बार हो रही है। OPEC+ ग्रुप का कहना है कि यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ओपेक और सऊदी अरब पर कीमतें कम करने के लिए दबाव बढ़ाने के बाद उठाया गया है। 3. ट्रंप के टैरिफ का भी पड़ेगा असर डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आयातित उत्पादों पर 25% टैरिफ लगाने का फैसला किया है। जानकारों के मुताबिक ये टैरिफ ग्लोबल इकोनॉमिक एक्टिविटी और फ्यूल डिमांड को प्रभावित कर सकते हैं। इसके चलते तेल की कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है। यानी इसकी कीमत कम हो सकती है। क्या कम होगी पेट्रोल-डीजल की कीमत? कच्चे तेल की कीमत कम होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भारतीय तेल कंपनियां भी इस बारे में कुछ निर्णय ले सकती हैं। चूंकि अभी कच्चे तेल की कीमत कम हो चुकी है और आने वाले समय में इसमें और गिरावट के संकेत हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमत में भी कमी आ सकती है। हो सकता है कि पेट्रोल-डीजल की कीमत में बड़ी गिरावट आए। अगर ऐसा होता है तो इससे देश में महंगाई पर भी कुछ काबू पाया जा सकता है। recent visitors 61

छतरपुर जिला अस्पताल में आउटसोर्स कर्मियों को 5 माह से मानदेय नहीं, काम बंद होने से जरूरी सेवाएं होंगी प्रभावित

Outsourced workers have not received their remuneration for the last 5 months, essential services will be affected due to the shutdown छतरपुर। जिला अस्पताल में अति आवश्यक सेवाएं देने वाले 65 आउटसोर्स कर्मचारियों को बीते 5 माह से ठेकेदार ने मानदेय नहीं दिया है। इसलिए इन कर्मचारियों की माली हालत बिगड़ती जा रही है। यदि आउटसोर्स कर्मचारी मानदेय न मिलने के विरोध में काम बंद करने की चेतावनी दी है। कर्मचारी यदि काम देते हैं, तो जिला अस्पताल की अतिआवश्यक सेवाएं प्रभावित हो जाएंगी। बता दें कि इंदौर की कामथेन सिक्योरिटी संस्था ने जिला अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारी रखने के लिए मार्च 2023 में ठेका लिया। इसके बाद संस्था ने विद्युत पंप ऑपरेटर, लिफ्ट मैन, कंप्यूटर ऑपरेटर, ऑक्सीजन गौस प्लाट, एक्सरे और लैब टेक्नीशियन सहित 65 कर्मचारी आउटसोर्स पर रखे। जिन्हें संस्था ने समय- समय पर मानदेय का भुगतान किया। लेकिन बीते 5 माह से संस्था ने मानदेय का भुगतान नहीं किया है। इसलिए जिला अस्पताल में अतिआवश्यक सेवाएं देने वाले कर्मचारियों की माली हालत बिगड़ गई है। इसमें से कई कर्मचारी शहर के बाहर के हैं। इसलिए उन्हें किराए के मकान में रहना पड़ रहा है। जो समय पर किराया नहीं चुका पा रहे। वहीं कुछ कर्मचारी कर्ज लेकर अपना परिवार चला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी टेंडर के अनुसार जो भी संस्था आउटसोर्स कर्मचारियों को ठेके पर रखने का कार्य लेती है। वह 6 माह तक सभी कर्मचारियों को अपनी ओर से भुगतान करती है। यदि संबंधित विभाग 6 माह से अधिक समय निकल जाने के बाद भी बजट जारी नहीं करता, तो संबंधित संस्था इस कर्मचारियों का मानदेय रोक करती है। लेकिन जिला अस्पताल में कार्य कर रही संस्था को जनवरी 2025 तक का भुगतान होने के बाद भी कर्मचारियों का मानदेय नहीं दिया जा रहा। सीएस डॉ. जीएल अहिरवार का कहना है आउटसोर्स कर्मचारियों का बजट संस्था को जारी करने बीते 5 माह से स्वास्थ्य कमिश्नर को 11 पत्र लिख चुके हैं। इसके साथ ही कलेक्टर के माध्यम से 5 रिमांइडर भेज चुके हैं। लेकिन वहां से अब तक बजट का आवंटन नहीं हुआ है। इसलिए ठेकेदार आउटसोर्स कर्मचारियों का भुगतान नहीं कर रहा। इसके बाद भी कर्मचारियों का मानदेय देने के लिए संस्था को नोटिस जारी किया है। विभाग पर संस्था का सवा करोड़ रुपए बकाया संस्था ने मार्च 2023 में आउटसोर्स कर्मचारियों को रखने का टेंडर लिया। तब से अब तक लिफ्ट मैन, इलेक्ट्रीशियन, हैल्पर और पंप ऑपरेटरों के मानदेय का विभाग ने भुगतान नहीं किया है। इसलिए संस्था का स्वास्थ्य विभाग पर सवा करोड़ बकाया हो गया है। जिसके चलते संस्था कर्मचारियों का भुगतान नहीं कर पा रही। – लोकेंद्र गोस्वामी, सुपरवाइजर कामथेन सिक्योरिटी इंदौर recent visitors 131