मंडप में दूल्हे की उम्र पर उठे सवाल, बारात के साथ आए दूल्हे की उम्र लगभग 40 साल थी, सच्चाई जान दुल्हन ने किया शादी से इनकार

रायबरेली उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में एक अजीब घटना सामने आई है, जिसमें दूल्हा बदलने का मामला उजागर हुआ। यह घटना तब सामने आई जब झज्जर जिले के झुजनू गांव से बारात आई और शादी की तैयारियां चल रही थीं। इस दौरान किसी ने दूल्हा बदलने की आशंका जताई और जब बारातियों से पूछताछ की गई, तो यह शक सही साबित हुआ। 25 साल के लड़के से तय हुई शादी, बारात लेकर पहुंचा 40 साल का दूल्हा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मिल एरिया थाना क्षेत्र के राघनपुर गांव के निवासी सुनील कुमार ने अपनी बहन की शादी पानीपत में तय की थी। बीते सोमवार को बारात पानीपत से रायबरेली पहुंची, लेकिन वहां जो दूल्हा दिखाई दिया, वह वही नहीं था, जिसे पहले लड़की पक्ष ने देखा था। शादी के बिचौलियों के जरिए यह फैसला हुआ था, लेकिन जब दूल्हे का नाम पूछा गया, तो यह पता चला कि वह व्यक्ति जो पहले दिखाया गया था, वह 20-25 साल का था, जो पानीपत का निवासी था। जबकि बारात के साथ आए दूल्हे की उम्र लगभग 40 साल थी और वह झज्जर का रहने वाला था। सच्चाई जान दुल्हन ने किया शादी से इनकार बताया जा रहा है कि इस पर लड़की पक्ष ने जब शक जताया, तो पूरी सच्चाई सामने आ गई। दुल्हन और उसके परिवार के लोग बहुत हैरान हो गए। बिचौलियों ने दावा किया कि असली दूल्हे का पैर टूट गया था, इसलिए उसकी जगह दूसरे व्यक्ति को दूल्हा बना कर भेजा गया था। लेकिन यह बात सुनकर लड़की ने शादी से साफ इनकार कर दिया। सूचना मिलने के बाद घटनास्थल पर दौड़ी-दौड़ी आई पुलिस इसके बाद लड़की पक्ष ने तुरंत पुलिस को मामले की जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस ने दूल्हा और बिचौलियों को अपनी निगरानी में ले लिया और मामले का हल निकालने के लिए सुलह-समझौते की कोशिश शुरू कर दी है। अब पुलिस मामले की जांच कर रही है और जल्द ही सच्चाई सामने आ सकती है। recent visitors 31

स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के प्रयासों में लायेंगे तेजी

स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के प्रयासों में लायेंगे तेजी स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह ने विधानसभा में प्रस्तुत बजट का किया स्वागत भोपाल स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बुधवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में वर्ष 2025-26 में प्रस्तुत किये गये बजट का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि प्रस्तुत बजट में शिक्षा की गुणवत्ता वृद्धि के लिये पर्याप्त प्रावधान किये गये हैं। प्रदेश के अब तक शुरू हुए 275 सीएम राइज स्कूलों में वर्ष 2025-26 तक परिवहन सुविधा शुरू कर दी जायेंगी। इसी के साथ सीएम राइज स्कूल में 3 हजार 68 करोड़ रूपये, साइकिल प्रदाय योजना में 215 करोड़ रूपये, पीएमयोजना में 430 करोड़ रूपये, नि:शुल्क पाठ्य पुस्तक योजना में 124 करोड़ रूपये और सरकारी शाला भवनों के रख-रखाव के लिये 228 करोड़ रूपये का प्रावधान करने से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को प्रोत्साहन मिलेगा। मंत्री सिंह ने प्रदेश में नवीन मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिये बजट में प्रावधान किये जाने पर प्रशंसा व्यक्त की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस योजना से ग्रामीण नागरिकों को सस्ता एवं सुलभ परिवहन उपलब्ध होगा। यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती भी देगी।   recent visitors 20

पहली बार खादान के अंदर 5जी तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है ताकि दुर्घटनाओं को नियंत्रित किया जा सके: किशन रेड्डी

नई दिल्ली कोयला खदानों में दुर्घटनाएं कम करने के लिए मंत्री किशन रेड्डी ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि कोयला खादानों मे दुर्घटनाओं को रोकने के लिए लगातार काम किये जा रहे है जिसके अच्छे परिणाम आ रहे हैं। मंत्री रेड्डी ने प्रश्नकाल के दौरान एक पूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि खादानों में दुर्घटनाओं को कम करने के लिए अलग-अलग समिति बनाने के साथ-साथ नई तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहली बार खादान के अंदर 5जी तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है ताकि दुर्घटनाओं को नियंत्रित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों से कोयला खादानों में लगातार दुर्घटना कम हो रहे हैं और आने वाले दिनों में और कम हो उसके प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होने कहा कि खादानों में काम करने वालों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि कोयला खादानों में अवैध खनन रोकने का काम राज्य सरकार का होता है। झारखंड में 50 वर्षों से अवैध खनन होता रहा है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत शोरेन से मिलकर अवैध खनन रोकने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि इसे रोकने के लिए राज्यों को आगे आना चाहिए। मंत्री रेड्डी ने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि झारखंड के झरिया में अंग्रेजों के जमाने से ही खादान के अंदर आग लगी हुई है। इसे रोकने के लिए राज्य सरकार का सहयोग जरुरी है। सरकार आग प्रभावित इलाकों से लोगों को विस्थापित कर अलग जगह पर बसाने और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।   recent visitors 31

ग्वालियर में रील्स की सनक ने ले ली जान, लेगेसी प्लाजा ब्लास्ट में झुलसे युवक की मौत

ग्वालियर  6 दिन पहले रील बनाते समय लेगेसी प्लाजा के एक फ्लैट में ब्लास्ट हो गया था. इस घटना में एक महिला और युवक गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिनका जयरोग्य अस्पताल में इलाज चल रहा था. मंगलवार को युवक अनिल राणा ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. वहीं महिला की हालत भी गंभीर बताई जा रही है. रिश्तेदार महिला के साथ ब्लास्ट में झुलसा था युवक ये घटना गोला का मंदिर थाना क्षेत्र की है, जहां लेगेसी प्लाजा में 6 दिन पहले एक फ्लेट में ब्लास्ट हुआ था. हादसे में महिला रंजना राणा और उसके रिश्तेदार अनिल राणा गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिनका इलाज जयरोग्य अस्पताल के बर्न वार्ड में चल रहा था. दोनों की हालत गंभीर बनी हुई थी. डीप बर्न से इन्फेक्शन के चलते युवक अनिल राणा ने मंगलवार रात दम तोड़ दिया. वहीं, रंजना की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है. रील्स बनाने की सनक में हुआ था हादसा लगभग 6 दिन पहले लेगेसी प्लाजा में ये रहस्यमई विस्फोट हुआ था. विस्फोट इतना भीषण था कि पूरी बिल्डिंग इससे हिल गई थी. जिस फ्लैट में विस्फोट हुआ था उसके साथ-साथ अन्य फ्लैट भी क्षतिग्रस्त हो गए थे. इस गंभीर विस्फोट में खिड़कियां उखड़ गईं थीं. पुलिस जांच में पता चला कि रंजना राणा को रील्स बनाने का काफी शौक था, जिसमें अनिल राणा भी उसका सहयोग करता था. रंजना 7वें फ्लोर पर रहती थी और उनका एक फ्लैट पहली मंजिल पर भी था जो कुछ दिन पहले ही किरायेदारों ने खाली किया था. ग्वालियर एसपी धर्मवीर सिंह के मुताबिक विस्फोट की रात दोनों रील बनाने के लिए धुएं का इफेक्ट देने एलपीजी गैस का प्रयोग कर रहे थे. तभी गैस रिसाव से पूरे फ्लैट में एलपीजी भर गई और हैलोजन लाइट का स्विच ऑन करते ही ब्लास्ट हो गया था, जिसमें अनिल और रंजना झुलस गए. इसके बाद सोसाइटी के लोगों ने उन्हें अस्पताल भिजवाया था. गैस निकालते हुए वीडियो शूट कर रहे थे मामले का पता चलते ही उन्हें उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। जहां पर बीती रात करीब दो बजे अनिल राणा ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। बता दें यह हादसा रील बनाते समय हुआ था। रंजना और अनिल रील बनाते हुए एलपीजी गैस सिलेंडर से गैस निकालते हुए वीडियो शूट कर रहे थे। सीएफएल जलाते ही हो गया धमाका काफी मात्रा में गैस रिस जाने के बाद उन्होंने तेज रोशनी के लिए सीएफएल जलाने के लिए स्विच्ड दबाया और उसमें हुई स्पार्किंग से ब्लास्ट हो गया। इसमें पूरी बिल्डिंग के खिड़की, दरवाजे तथा ग्रिल उखड़ गए। रसोई गैस से वीडियो में डाल रहे थे स्पेशल इफेक्ट ब्लास्ट के बाद युवक अनिल को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। उसने अपने मृत्यु पूर्व अंतिम बयान में पुलिस को यही बताया था कि रंजना को धुएं के बीच से निकलते हुए एक वीडियो शूट करना था। इसमें धुंए के हल्के बादलों का इफेक्ट डालने के लिए अनिल को यह विचार आया। उसने कुछ समय पहले भी गैस लीक कर ऐसा वीडियो बनाया था। उसकी बात सुनकर रंजना भी राजी हो गई। उन्होंने तय किया कि रात को सभी के सो जाने के बाद वो ऐसा वीडियो बनाएंगे, लेकिन वीडियो को आकर्षक बनाने के चक्कर में उन्होंने अधिक गैस उड़ा दी और यह धमाका हो गया। सात किलो एलपीजी रिसी, फिर हुआ धमाका जब इस मामले की जांच हुई तो यह तथ्य सामने आए कि रील वीडियो बनाने में स्पेशल इफेक्ट देने के चक्कर में दोनों ने मिलकर सात किलो एलपीजी लीक कर दी। गैस रिस कर पूरे फ्लैट में फैल गई और लाइट जलाते ही ब्लास्ट हो गया। जब उन दोनों के मोबाइल खंगाले गए तो सामने आया कि उन्होंने कुल 23 वीडियो बनाए हैं। इसमें कुछ वीडियो 30 से 40 सेकंड के थे, वहीं कुछ सिर्फ 15 से 20 सेकेंड के वीडियो बनाए थे। रात दो बजे तक उन्होंने कुल 23 वीडियो शूट किए थे। recent visitors 37

स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि, 23 हज़ार 535 करोड़ रुपए के वित्तीय प्रावधान

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत 2025-26 का बजट सर्वसमावेशी और दूरदर्शी है। यह बजट प्रदेश की अर्थव्यवस्था को 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। बजट में औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन जैसे सभी क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है। इस वर्ष स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 15 प्रतिशत की वृद्धि कर कुल 23 हज़ार 535 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो गत वर्ष की तुलना में 2,992 करोड़ रूपये अधिक है। यह स्वास्थ्य सेवाओं को विस्तृत और सुदृढ़ बनाने में सहयोगी होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने सर्व-हितकारी और विकासोन्मुखी बजट के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उप मुख्यमंत्री (वित्त) जगदीश देवड़ा का आभार व्यक्त किया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित एवं योजनाबद्ध विकास के लिए व्यापक बजटीय आवंटन उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं उप मुख्यमंत्री (वित्त) देवड़ा के नेतृत्व में प्रस्तुत यह बजट प्रदेश के सर्वांगीण विकास का एक प्रभावी दस्तावेज है। यह बजट प्रदेश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। सरकार ने संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और अधोसंरचना विकास को भी समान रूप से प्राथमिकता दी है। प्रदेश के पारंपरिक कारीगरों, हस्तशिल्प और कला-संस्कृति को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के लिए नई योजनाएँ शुरू की जा रही हैं। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिए विशेष बजटीय प्रावधान किया गया है, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को भव्यता प्रदान की जा सके। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के संतुलित एवं योजनाबद्ध विकास के लिए व्यापक बजटीय आवंटन किया गया है। ‘सीएम केयर योजना’ के तहत कैथ लैब और कैंसर उपचार सुविधाओं का किया जा रहा है विस्तार उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। आयुष्मान भारत योजना के लिए इस वर्ष 2,039 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में 1,000 संजीवनी और 1,059 जननी एम्बुलेंस संचालित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से 22 लाख नागरिकों को आपातकालीन सेवाएँ प्रदान की गई हैं। उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 249 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं। गंभीर बीमारियों से पीड़ित नागरिकों के लिए ‘सीएम केयर योजना’ के तहत कैथ लैब और कैंसर उपचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। प्रदेश में अंगदान को प्रोत्साहित करने के लिए भी व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने व्यापक प्रयास किए हैं। इस वर्ष नीमच, मंदसौर और सिवनी में नए सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। प्रदेश में 400 एमबीबीएस और 252 पीजी सीटों की वृद्धि की गई है। रीवा जिला चिकित्सालय में 100 बिस्तरों का नया वार्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही, प्रदेश में जन-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) के तहत नए चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना की योजना बनाई जा रही है। प्रत्येक विधानसभा में प्रस्तावित खेल स्टेडियमों में पीएम एयर एम्बुलेंस सेवा के लिए बनाए जाएंगे हेलीपैड उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ‘पीएमएयर एम्बुलेंस सेवा’ की हर क्षेत्र में सहज उपलब्धता के लिये प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में प्रस्तावित खेल स्टेडियमों में हेलीपैड बनाए जाएंगे। सिकलसेल एनीमिया उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक किया जा सके। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने विश्वास व्यक्त किया कि स्वास्थ्य मानकों में प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिये सरकार संकल्पित है। बजटीय प्रावधान और चिकित्सकीय, सहायक चिकित्सकीय अमले के प्रतिबद्ध और समर्पित प्रयासों से हम मध्यप्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रदाय में आदर्श राज्य बनाने में सफल होंगे।   recent visitors 25

7 महीने में सबसे कम, सब्जियां-दालें हुई सस्ती; जनवरी में महंगाई 4.31% पर थी

नई दिल्ली  आम आदमी को महंगाई के मोर्चे पर फरवरी में थोड़ी राहत मिलती हुई दिखाई दे रही है. बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई दर फरवरी में अपने 7 महीने के निचले स्तर पर आई. फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.61 फीसदी रही है. बता दें कि फरवरी में खुदरा महंगाई दर के 4 फीसदी रहने का अनुमान था. महंगाई के बास्केट में लगभग 50% योगदान खाने-पीने की चीजों का होता है। इसकी महंगाई महीने-दर-महीने आधार पर 5.97% से घटकर 3.75% हो गई है। वहीं ग्रामीण महंगाई 4.59% से घटकर 3.79% और शहरी महंगाई 3.87% से घटकर 3.32% हो गई है। जून तक कम ही रहेंगी सब्जियों की कीमतें बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस ने कहा- सब्जियों के दाम में गिरावट आई है। सबसे ज्यादा टमाटर और आलू के भाव घटे हैं। यह स्थिति जून तक बने रहने की संभावना है। ये चीजें हुईं सस्‍ती टमाटर, प्‍याज, आलू और हरी सब्जियों के दाम में गिरावट देखी गई है, जिस कारण महंगाई दर में कटौती हुई है. वहीं कज्‍युमर प्रोडक्‍ट्स और खाने की चीजों में भी गिरावट देखी गई है. एनएसओ ने कहा कि फरवरी के दौरान महंगाई और खाद्य महंगाई में उल्लेखनीय गिरावट मुख्य रूप से सब्जियों, अंडे, मांस और मछली, दालों और उत्पादों; और दूध और उत्पादों की महंगाई में गिरावट के कारण हुई है. इसका मुख्‍य कारण सब्जियों और प्रोटीन युक्‍त वस्‍तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी में कमी आना है. आरबीआई कट कर सकता है रेपो रेट भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले मॉनेटरी पॉलिसी में रेपो रेट में कटौती की थी, जिस कारण लोन लेने वालों को बड़ी राहत मिली थी. वहीं अब महंगाई में बड़ी कमी आना ऐसा माना जा सकता है कि भारतीय रिजर्व बैंक एक बार फिर अपनी अगली मॉनिटरी पॉलिसी में ब्‍याज दर में कमी कर सकता है. एक और राहत की खबर इस बीच मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर्स के अच्छे प्रदर्शन से देश के इंडस्‍ट्रीज प्रोडक्‍शन (IIP) में इस साल जनवरी में 5 फीसदी की वृद्धि हुई. इंडस्‍ट्रीज प्रोडक्‍शन इंडेक्‍स के संदर्भ में मापा जाने वाला औद्योगिक उत्पादन जनवरी, 2024 में 4.2 प्रतिशत बढ़ा था. बुधवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने दिसंबर, 2024 में 3.2 फीसदी वृद्धि के अस्थायी अनुमान को संशोधित किया है, इसे अब संशोधित कर 3.5 प्रतिशत कर दिया गया है. क्‍यों इतनी कम हुई महंगाई? गिरावट की एक बड़ी वजह खाने की कीमतों में गिरावट थी. फरवरी में कंज्‍युमर फूड प्राइस इंडेक्‍स (CFPI) महंगाई 3.75% रही, जो जनवरी से 222 आधार अंक कम है. यह मई 2023 के बाद से सबसे कम फूड महंगाई है. आंकड़ों से पता चला कि ग्रामीण इलाकों में महंगाई शहरी इलाकों से ज्‍यादा रही. ग्रामीण इलाकों में फरवरी में कुल महंगाई दर 3.79% रही, जो जनवरी में 4.59% थी. ग्रामीण भारत में खाद्य महंगाई दर जनवरी में 6.31% से घटकर फरवरी में 4.06% हो गई. शहरी क्षेत्रों में महंगाई जनवरी के 3.87 फीसदी से घटकर फरवरी में 3.32 फीसदी हो गई. जबकि खाद्य महंगाई 5.53 फीसदी से घटकर 3.20 फीसदी हो गई. गौरतलब है कि फरवरी में आवास महंगाई 2.91% थी, जो जनवरी में 2.82% से थोड़ी अधिक थी. ईंधन और एनर्जी महंगाई जनवरी में -1.49% की तुलना में -1.33% पर नकारात्मक रही. एजुकेशन में महंगाई 3.83% पर स्थिर रही, जबकि हेल्‍थ में महंगाई 3.97% से बढ़कर 4.12% हो गई. परिवहन और संचार सेक्‍टर्स में महंगाई 2.87% रही, जो जनवरी में 2.76% थी. महंगाई कैसे प्रभावित करती है? महंगाई का सीधा संबंध पर्चेजिंग पावर से है। उदाहरण के लिए यदि महंगाई दर 6% है, तो अर्जित किए गए 100 रुपए का मूल्य सिर्फ 94 रुपए होगा। इसलिए महंगाई को देखते हुए ही निवेश करना चाहिए। नहीं तो आपके पैसे की वैल्यू कम हो जाएगी। महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। इस तरह बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों का अत्यधिक बहाव या चीजों की शॉर्टेज महंगाई का कारण बनता है। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। CPI से तय होती है महंगाई एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल मार्केट से सामान खरीदते हैं। इससे जुड़ी कीमतों में हुए बदलाव को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है। हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है। कच्चे तेल, कमोडिटी की कीमतों, मेन्युफैक्चर्ड कॉस्ट के अलावा कई अन्य चीजें भी होती हैं, जिनकी रिटेल महंगाई दर तय करने में अहम भूमिका होती है। करीब 300 सामान ऐसे हैं, जिनकी कीमतों के आधार पर रिटेल महंगाई का रेट तय होता है। recent visitors 37

राज्य के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा बजट : राज्य मंत्री अहिरवार

भोपाल वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री  दिलीप अहिरवार ने बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2025-26 का बजट सर्व-समावेशी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में गहन विचार-विमर्श के बाद तैयार हुआ यह बजट प्रधानमंत्री श्री मोदी के समग्र विकास के गरीब, युवा, अन्न्दाता और नारी के उत्थान के दर्शन पर आधारित है। इससे राज्य के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। मंत्री  अहिरवार ने कहा कि बजट में वन और पर्यावरण संरक्षण के लिये महत्वपूर्ण प्रावधान किये गये हैं। राज्य में वन्य जीव और पर्यावरण की सुरक्षा के लिये पर्याप्त दर राशि आवंटित की गई है, जिससे वन्य जीव और पर्यावरण की सुरक्षा में मदद मिलेगी। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री  अहिरवार ने कहा कि वन विभाग के लिये बजट में कार्यकारी योजना संगठन एवं कार्यकारी वन वृत्तों की स्थापना के लिये 1583 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही केम्पा में 992 करोड़ रूपये, राष्ट्रीय उद्यान स्थापना में 242 करोड़ रूपये, संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के लाभांश के लिये 190 करोड़ रूपये, इमारती लकड़ी उत्पादन के अंतर्गत 175 करोड़ रूपये, वन ग्रामों के पुनर्वास मुआवजे के लिये 100 करोड़ रूपये, वन्य जीव पर्यावास पर समन्वित विकास के लिये 168 करोड़ रूपये, वन पर्यटन से प्राप्त आय के सापेक्ष व्ययों का समायोजन के अंतर्गत 60 करोड़ रूपये और जू एवं रेस्क्यू सेंटर की स्थापना के लिये 59 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जिससे वनों के संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।   recent visitors 24