रक्तदान किसी की जान बचाने के लिए तो काम आता ही है, लेकिन यह आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकता है, हुआ खुलासा

नई दिल्ली रक्तदान किसी की जान बचाने के लिए तो काम आता ही है, लेकिन यह आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।  हाल ही में किए गए एक शोध से यह पता चला है कि जो लोग नियमित रूप से रक्तदान करते हैं, उनमें कैंसर होने का खतरा कम हो सकता है। यह शोध लंदन के फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने किया। उन्होंने पाया कि लंबे समय तक रक्तदान करने वालों के खून में जेनेटिक बदलाव होते हैं, जो कैंसर के खतरे को कम करने में मदद कर सकते हैं। शोधकर्ताओं ने 60 साल के 2 समूह के रक्तदाताओं के खून की तुलना की। पहले समूह में वे लोग शामिल थे, जिन्होंने पिछले 40 सालों से हर साल 3 बार रक्तदान किया। दूसरे समूह में ऐसे लोग थे, जिन्होंने अब तक केवल 5 बार रक्तदान किया। पहले समूह के 50% लोगों के खून में खास जेनेटिक बदलाव पाए गए, जो शरीर में कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। खून में म्यूटेशन और रक्तदान का असर शोधकर्ताओं का कहना है कि समय के साथ शरीर में खून में म्यूटेशन होते रहते हैं, जो कैंसर का कारण बन सकते हैं। लेकिन रक्तदान से नया खून बनने की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे शरीर के स्टेम सेल्स अधिक सक्रिय हो जाते हैं और नया, स्वस्थ खून बनता है। रक्तदान से पुराने और हानिकारक ब्लड सेल्स कम हो जाते हैं, जिससे शरीर में स्वास्थ्य की स्थिति बेहतर होती है। आज सुबह एक बार फिर भूकंप के झटकों से धरती कांप गई। भारत और ताइवान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भारत के गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थित अमरेली शहर में लोग भूकंप के झटकों से डर गए। ताइवान में भी 5.2 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे लोग परेशान हो गए। recent visitors 28

मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों को होली की दी हार्दिक शुभकामनाएं

  रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को रंगों और उल्लास के महापर्व होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं। उन्होंने इस पावन अवसर पर सभी नागरिकों के जीवन में सुख, समृद्धि, आनंद और परस्पर प्रेम की कामना की है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करने वाला पर्व है। यह त्यौहार हमें सिखाता है कि जीवन में प्रेम, सौहार्द और भाईचारे के रंग सबसे अनमोल हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि होली का त्यौहार सदियों से भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग रहा है, जहां भेदभाव मिट जाते हैं, और लोग आपसी स्नेह, उल्लास और उमंग के रंगों में घुल-मिल जाते हैं। यह पर्व हमें बुराई पर अच्छाई की विजय, प्रेम की जीत और समाज में सौहार्द्र को और मजबूत करने का संदेश देता है। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि हम सभी होली के पावन पर्व को प्रेम, सौहार्द और आनंद के साथ मनाएं, एक-दूसरे के जीवन में खुशियों के रंग भरें और छत्तीसगढ़ की समरसता और एकता को और अधिक सशक्त बनाएं। recent visitors 20

मुख्यमंत्री साय की पहल से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर से इंद्रावती नदी में जल प्रवाह सुनिश्चित

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर में जल प्रवाह को नियंत्रित कर इंद्रावती नदी की मुख्य धारा में पानी छोड़ा गया है। ओडिशा सरकार की सहमति के बाद स्ट्रक्चर में रेत की बोरियां डालकर पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया, जिससे इंद्रावती नदी में जल स्तर में वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री श्री साय के निर्देश पर जल संसाधन मंत्री श्री केदार कश्यप ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल से इंद्रावती नदी के जल संकट के समाधान हेतु चर्चा की। इस पर केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को समस्या के निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। जिसके परिणामस्वरूप उड़ीसा राज्य की सहमति से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर को अस्थायी रूप से एक फीट ऊंचा किया गया, जिससे इंद्रावती नदी के जल प्रवाह में सुधार हुआ। इसके अतिरिक्त, इंद्रावती नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में जमा रेत को हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिसे अप्रैल के पहले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में कलेक्टर श्री हरिस एस के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर श्री सी.पी. बघेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री महेश्वर नाग और जल संसाधन विभाग के ईई श्री वेद पांडेय ने स्थानीय किसानों को जिला कार्यालय के प्रेरणा सभा कक्ष में पूरी जानकारी दी। इंद्रावती नदी और जोरा नाला की समस्या इंद्रावती नदी का उद्गम ओडिशा राज्य के कालाहांडी जिले के रामपुर धुमाल गांव से हुआ है। यह नदी 534 किलोमीटर की यात्रा के बाद गोदावरी नदी में मिलती है। नदी का कैचमेंट एरिया 41,665 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें ओडिशा में 7,435 वर्ग किमी, छत्तीसगढ़ में 33,735 वर्ग किमी और महाराष्ट्र में 495 वर्ग किमी शामिल हैं। ओडिशा राज्य की सीमा पर ग्राम सूतपदर में इंद्रावती नदी दो भागों में बंट जाती है। एक भाग इंद्रावती नदी के रूप में 5 किमी बहकर ग्राम भेजापदर के पास छत्तीसगढ़ में प्रवेश करता है, जबकि दूसरा भाग जोरा नाला के रूप में 12 किमी बहते हुए शबरी (कोलाब) नदी में मिल जाता है। पहले जोरा नाला का पानी इंद्रावती में आता था, लेकिन धीरे-धीरे इसका बहाव बढ़ने से इंद्रावती का जल प्रवाह कम हो गया। समस्या गंभीर होने पर दिसंबर 2003 में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रमुख अभियंताओं की बैठक में जोरा नाला के मुहाने पर जल विभाजन के लिए कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाने का निर्णय लिया गया। यह स्ट्रक्चर ओडिशा सरकार द्वारा बनाया गया, जिसकी डिज़ाइन केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने तैयार की। निर्माण के बाद भी जोरा नाला में अधिक पानी जाने से छत्तीसगढ़ को ग्रीष्म ऋतु में औसतन 40.71% और ओडिशा को 59.29% जल प्रवाह मिला। राज्य सरकार की पहल से समाधान की दिशा में प्रगति इंद्रावती नदी में न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कई प्रयास किए। 6 जनवरी 2021 को ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में कंट्रोल स्ट्रक्चर के अपस्ट्रीम में जलभराव रोकने के लिए रेत और बोल्डर हटाने तथा जोरा नाला के घुमाव को सीधा करने का अनुरोध किया गया। वर्ष 2018 के बाद इंद्रावती नदी में सतत जल प्रवाह कम होने की समस्या बनी हुई थी। अब राज्य सरकार के प्रयासों से ओडिशा सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ है, जिससे नदी के जल प्रवाह को संतुलित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इससे इंद्रावती नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। recent visitors 26

विधानसभा के रजत जयंती वर्ष: राष्ट्रपति के छग प्रवास के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने मुख्य सचिव ने ली बैठक

रायपुर, छत्तीसगढ़ विधानसभा के रजत जयंती वर्ष के अवसर पर भारत की राष्ट्रपति माननीय द्रोपदी मुर्मु के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के लिए मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने मंत्रालय महानदी भवन में उच्च स्तरीय बैठक ली। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में मुख्य सचिव ने सभी जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। recent visitors 29

मुख्यमंत्री ने ऑइल फील्डस बिल-2024 लोकसभा में पारित होने का किया स्वागत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऑइल फील्ड्स (रेग्युलेशन एण्ड डेवलपमेंट) बिल 2024 के लोकसभा में पारित होने का स्वागत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल और दूरदर्शी नेतृत्व में ऊर्जा क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन लाने वाला ऑइल फील्ड्स रेग्युलेशन एण्ड डेवलपमेंट बिल- 2024 भारत के ऊर्जा क्षेत्र को और भी अधिक मजबूत करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह बिल निश्चित ही रोजगार के नए अवसर के साथ ही देश की सतत् विकास यात्रा को एक नई उड़ान देगा। उन्होंने कहा कि इस बिल के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं समृद्ध भारत की कहानी का एक नया अध्याय शुरू हुआ है।   recent visitors 37

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सड़क दुर्घटना पर किया दु:ख व्यक्त

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार जिले के बदनावर-उज्जैन फोरलेन पर हुई सड़क दुर्घटना में नागरिकों के असमय काल-कवलित होने पर गहन दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी शोककुल परिजन से शोक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा है कि दुख की इस घड़ी में राज्य सरकार शोक संतप्त परिजन के साथ खड़ी है। जिला प्रशासन धार द्वारा तुरंत घटना स्थल पर पहुंचकर घायलों को मेडिकल कॉलेज रतलाम उपचार के लिए भेजा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगत आत्माओं की शांति और शोकाकुल परिजन को यह गहन दु:ख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की है।   recent visitors 22

नाविक को आयकर विभाग से टैक्स मिला नोटिस, नाविक परिवार ने महाकुंभ के दौरान30 करोड़ रुपये कमाए

नई दिल्‍ली प्रयागराज के अरैल गांव के नाविक पिंटू महरा महाकुंभ के बाद से चर्चा में हैं। उन्होंने मेले के दौरान जोरदार कमाई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि एक नाविक परिवार ने 13 जनवरी से 26 फरवरी तक प्रयागराज में चले महाकुंभ के दौरान केवल 45 दिनों में 30 करोड़ रुपये कमाए। इस खबर के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा छिड़ गई और खबरें आईं कि नाविक को आयकर विभाग से टैक्स नोटिस मिला है। इस नोटिस में उनसे 12.8 करोड़ रुपये का टैक्स मांगा गया है। यह मामला वन-टाइम हाई इनकम और उस पर लगने वाले टैक्स को लेकर कई सवाल खड़े करता है। प्रयागराज के रहने वाले नाविक पिंटू महरा की किस्मत महाकुंभ के दौरान पलट गई। रोजाना 500 रुपये कमाने वाले पिंटू ने 45 दिनों में 30 करोड़ रुपये कमाए। सीएम योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में इस बात का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 130 नावों वाले परिवार ने कुल 30 करोड़ रुपये कमाए। यानी हर नाव से रोजाना 50,000-52,000 रुपये की कमाई हुई। पहले जहां एक नाव से 1,000-2,000 रुपये रोजाना मिलते थे, वहीं महाकुंभ में यह कमाई कई गुना बढ़ गई। लेकिन, इस खुशी के बाद पिंटू पर आफतों का पहाड़ टूट पड़ा। उन्हें आयकर विभाग से 12.8 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस मिला। यह नोटिस आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 4 और 68 के तहत भेजा गया। इस घटना ने अनियोजित आय पर टैक्स के मुद्दे पर बहस छेड़ दी है। दरअसल, पिंटू ने खुलासा किया था कि उन्होंने और उनके परिवार ने महाकुंभ के दौरान नावों के बेड़े के संचालन के जरिये केवल 45 दिनों में 30 करोड़ रुपये की कमाई की। इस घटनाक्रम के बाद तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह खबर है कि कि नाविक को आयकर विभाग से एक टैक्स नोटिस मिला है। इसमें आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 4 और 68 के तहत 12.8 करोड़ रुपये का टैक्स मांगा गया है। छिड़ गई है यह बहस फाइनेंशियल प्‍लानर और सेबी रजिस्‍टर्ड रिसर्च एनालिस्‍ट एके मंधन ने बताया कि महाकुंभ मेले के दौरान अपना पूरा जीवन नाव चलाने और प्रतिदिन 500 रुपये की मामूली आय अर्जित करने में बिताने वाले नाविक ने अपनी वित्तीय परिस्थितियों में नाटकीय बदलाव का अनुभव किया है। उसने अप्रत्याशित रूप से आयोजन के दौरान 30 करोड़ रुपये की भारी कमाई की। यह अचानक धन महरा के लिए आश्चर्य के रूप में आया, जो अब एक साल के भीतर 12.8 करोड़ रुपये का टैक्स चुकाने के कठिन काम का सामना कर रहे हैं। मंधन ने कहा, 'प्रयागराज का एक नाविक, जिसने अपना पूरा जीवन नाव चलाने और मुश्किल से 500 रुपये प्रतिदिन कमाने में बिताया, अचानक उसे महाकुंभ मेले के दौरान 30 करोड़ रुपये की कमाई हुई। तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ ने अप्रत्याशित मांग पैदा कर दी और नाविक ने अपने नाव का किराया 100 रुपये से बढ़ाकर 1,000 रुपये प्रति सवारी कर दिया। कुछ ही महीनों में उसकी कुल कमाई 30 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जिसकी उसने अपने जीवन में कभी कल्पना भी नहीं की थी। लेकिन, आगे जो हुआ वह चौंकाने वाला था! आयकर विभाग ने उसे आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 4 और 68 के तहत 12.8 करोड़ रुपये का टैक्स नोटिस जारी किया। एक आदमी जो टैक्स स्लैब या रिटर्न दाखिल करने के बारे में कभी नहीं जानता था, अब एक व्यवसायी की तरह भारी टैक्स बिल के साथ फंस गया। उसकी किस्मत रातों-रात एक वित्तीय दुःस्वप्न में बदल गई। कल्पना कीजिए कि एक व्यक्ति जो कभी महीने में 15,000 रुपये कमाने के लिए संघर्ष करता था, अब उसे एक साल के भीतर 12.8 करोड़ रुपये का टैक्स चुकाना होगा। उसके लिए इतना बड़ा पैसा कमाना पहले से ही एक झटका था और अब इसका एक बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में खोना और भी दर्दनाक था।' recent visitors 32