विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से बस्तर को मिलेगी अंतर्राष्ट्रीय पहचान- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर छत्तीसगढ़ के  कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (KVNP) को यूनेस्को की विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में प्राकृतिक श्रेणी के अंतर्गत शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि ये छत्तीसगढ़ के लिये बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि ये हर्ष का विषय है कि यूनेस्को द्वारा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को विश्व धरोहर की सूची में शामिल किया गया है । कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान न केवल जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, बल्कि यह स्थानीय जनजातीय संस्कृति और इको-टूरिज्म को भी बढ़ावा देता है। इस सूची में शामिल होने से बस्तर क्षेत्र को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी एवं पर्यटन को और भी बढ़ावा मिलेगा । यह उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है । उल्लखेनीय है कि यह उद्यान तीन महत्वपूर्ण मापदंडों—प्राकृतिक सौंदर्य, भूवैज्ञानिक विशेषताएँ, और जैव विविधता पर खरा उतरता है।  कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन द्वारा उद्यान को  यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार को प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था,  जिसे यूनेस्को द्वारा अपने अस्थाई सूची में चयन किया गया है। कांगेर घाटी में प्राकृतिक सौंदर्य और अनूठी संरचनाएँ कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपने मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों, हरी-भरी घाटियों, गहरी खाइयों और झरनों के लिए प्रसिद्ध है। तीरथगढ़ जलप्रपात, जो कांगेर नदी से निकलता है, 150 फीट की ऊंचाई से गिरता हुआ एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। कांगेर नदी अपने स्वच्छ जल और अनूठी चट्टानी संरचनाओं के कारण महत्वपूर्ण पर्यटन  स्थल है। इसके अलावा, कोटमसर, कैलाश, दंडक और ऐसी १५ से अधिक गुफाएँ अपने अद्वितीय प्राकृतिक स्वरूप और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश और विदेश के पर्यटकों और वैज्ञानिकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। भूवैज्ञानिक विशेषताएँ और जैव विविधता यह उद्यान अपनी भूवैज्ञानिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की कार्स्ट संरचनाएँ, चूना पत्थर की गुफाएँ, जल संरचनाएँ और चट्टानी परतें वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का एक महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इस क्षेत्र में भूवैज्ञानिक परिवर्तन देखे जाते हैं।  चूना पत्थर की गुफाएँ पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है |  जैवविविधता से भरपूर यह उद्यान में विभिन्न वनस्पति, वन्यजीव और विशेष प्रजाति के प्रजातीय पाए जाते है| 963 प्रकार की वनस्पतियाँ, जिनमें 120 फ़ैमिली  और 574 प्रजातियाँ शामिल हैं। यहाँ दुर्लभ ऑर्किड की 30 प्रजातियाँ दर्ज की गई हैं। 49 स्तनपायी, 210 पक्षी, 37 सरीसृप, 16 उभयचर, 57 मछलियाँ और 141 तितली प्रजातियाँ है । बस्तर हिल मैना (छत्तीसगढ़ का राज्य पक्षी), ट्रैवणकोर वुल्फ स्नेक, ग्रीन पिट वाइपर, मोंटेन ट्रिंकेट स्नेक जैसी दुर्लभ प्रजातियाँ है । बस्तर क्षेत्र में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करता है। यहाँ गोंड और धुरवा जनजातियाँ रहती हैं, जो अपनी पारंपरिक रीति-रिवाजों, नृत्य, लोकगीतों और त्योहारों के लिए प्रसिद्ध हैं। इस क्षेत्र में स्थानीय आदिवासियों द्वारा हस्तशिल्प कला जैसे  बांस शिल्प कलाकृतियाँ विशेष रूप से लोकप्रिय हैं।  यहाँ के आदिवासी समुदाय प्रकृति से गहराई से जुड़े हुए हैं और जंगलों से जुड़ी अनेक कहानियाँ और मान्यताएँ पीढ़ियों से चली आ रही हैं। इको-टूरिज्म और साहसिक पर्यटन गतिविधियों में  जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, ट्रेकिंग ,कयाकिंग बम्बू राफ्टिंग , कैम्पिंग , होमस्टे , गुफा भ्रमण और फोटोग्राफी के  बेहतरीन अवसर मिलते हैं, जिससे यह रोमांचक पर्यटन स्थल बनता है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक गुफाएँ, वन्यजीव, और सांस्कृतिक विरासत इसे छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करते हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान  के विशेषता को देखते हुए इसे यूनेस्को ने अस्थायी सूची में शामिल किया गया है । उद्यान को यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया जाने से बस्तर क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 19

एबी डिविलियर्स ने माना- रोहित शर्मा ने अपनी बल्लेबाजी में बदलाव किया और उनके रिटायर होने का कोई तुक नहीं बनता

नई दिल्ली चैंपियंस ट्रॉफी 2025 को खत्म हुए 4 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक इस पर चर्चा जारी है कि रोहित शर्मा को वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट से रिटायरमेंट लेना चाहिए या नहीं। रोहित शर्मा ने निजी तौर पर तो इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि वे रिटायरमेंट नहीं ले रहे, लेकिन कुछ क्रिकेट पंडित चाहते हैं कि फिटनेस को ध्यान में रखते हुए और युवाओं का मौका देने के लिए उनको रिटायर हो जाना चाहिए। हालांकि, साउथ अफ्रीका के पूर्व कप्तान एबी डिविलियर्स ने कहा है कि रोहित शर्मा को किसी भी आलोचना को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। वह संन्यास क्यों लेंगे? वे एक बेहतरीन कप्तान हैं। रोहित का वनडे क्रिकेट में सभी कप्तानों के बीच सर्वश्रेष्ठ जीत प्रतिशत है और वह अब एक से ज्यादा आईसीसी टूर्नामेंट जीतने वाले केवल दूसरे भारतीय कप्तान बन गए हैं। अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए एबी डिविलियर्स ने कहा, "दूसरे कप्तानों की तुलना में रोहित की जीत का प्रतिशत देखें, यह लगभग 74% है, जो कि अन्य किसी भी कप्तान से काफी ज्यादा है। अगर वह आगे बढ़ते रहें तो वह अब तक के सबसे बेहतरीन वनडे कप्तानों में से एक के रूप में जाने जाएंगे।" पूर्व क्रिकेटर ने आगे कहा, "रोहित ने यह भी कहा है कि वह रिटायर नहीं हो रहे हैं और उन्होंने अनुरोध किया है कि अफवाहें फैलने से रोका जाए। वह रिटायर क्यों होंगे? सिर्फ कप्तान के रूप में ही नहीं, बल्कि बल्लेबाज के रूप में भी इस तरह के रिकॉर्ड के साथ उन्हें आगे भी खेलना चाहिए। फाइनल में 83 गेंदों पर 76 रन बनाकर भारत को उन्होंने शानदार शुरुआत दिलाई। उन्होंने टीम की सफलता की नींव रखी और दबाव के चरम पर होने पर आगे बढ़कर नेतृत्व किया।" एबी डिविलियर्स ने माना है कि रोहित शर्मा ने अपनी बल्लेबाजी में बदलाव किया और उनके रिटायर होने का कोई तुक नहीं बनता। उन्होंने कहा, "रोहित शर्मा के पास संन्यास लेने का कोई कारण नहीं है। किसी भी आलोचना को सहने का कोई कारण नहीं है। उनका रिकॉर्ड खुद ही सब कुछ बयां करता है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने खेल को भी बदल दिया है। अगर हम पावरप्ले में उनके स्ट्राइक रेट को देखें तो 2022 से यह पहले पावरप्ले में 115 हो गया है और यही अच्छे और बेहतरीन के बीच का अंतर है।" Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 24

ओडिशा सरकार की सहमति के बाद स्ट्रक्चर में रेत की बोरियां डालकर पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर में जल प्रवाह को नियंत्रित कर इंद्रावती नदी की मुख्य धारा में पानी छोड़ा गया है। ओडिशा सरकार की सहमति के बाद स्ट्रक्चर में रेत की बोरियां डालकर पानी का प्रवाह सुनिश्चित किया गया, जिससे इंद्रावती नदी में जल स्तर में वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री साय के निर्देश पर जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से इंद्रावती नदी के जल संकट के समाधान हेतु चर्चा की। इस पर केंद्रीय मंत्री ने छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा के मुख्यमंत्रियों को समस्या के निराकरण हेतु आवश्यक निर्देश दिए। जिसके परिणामस्वरूप उड़ीसा राज्य की सहमति से जोरा नाला कंट्रोल स्ट्रक्चर को अस्थायी रूप से एक फीट ऊंचा किया गया, जिससे इंद्रावती नदी के जल प्रवाह में सुधार हुआ। इसके अतिरिक्त, इंद्रावती नदी के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में जमा रेत को हटाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिसे अप्रैल के पहले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस संबंध में कलेक्टर हरिस एस के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर सी.पी. बघेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग और जल संसाधन विभाग के ईई वेद पांडेय ने स्थानीय किसानों को जिला कार्यालय के प्रेरणा सभा कक्ष में पूरी जानकारी दी। इंद्रावती नदी और जोरा नाला की समस्या इंद्रावती नदी का उद्गम ओडिशा राज्य के कालाहांडी जिले के रामपुर धुमाल गांव से हुआ है। यह नदी 534 किलोमीटर की यात्रा के बाद गोदावरी नदी में मिलती है। नदी का कैचमेंट एरिया 41,665 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें ओडिशा में 7,435 वर्ग किमी, छत्तीसगढ़ में 33,735 वर्ग किमी और महाराष्ट्र में 495 वर्ग किमी शामिल हैं। ओडिशा राज्य की सीमा पर ग्राम सूतपदर में इंद्रावती नदी दो भागों में बंट जाती है। एक भाग इंद्रावती नदी के रूप में 5 किमी बहकर ग्राम भेजापदर के पास छत्तीसगढ़ में प्रवेश करता है, जबकि दूसरा भाग जोरा नाला के रूप में 12 किमी बहते हुए शबरी (कोलाब) नदी में मिल जाता है। पहले जोरा नाला का पानी इंद्रावती में आता था, लेकिन धीरे-धीरे इसका बहाव बढ़ने से इंद्रावती का जल प्रवाह कम हो गया। समस्या गंभीर होने पर दिसंबर 2003 में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के प्रमुख अभियंताओं की बैठक में जोरा नाला के मुहाने पर जल विभाजन के लिए कंट्रोल स्ट्रक्चर बनाने का निर्णय लिया गया। यह स्ट्रक्चर ओडिशा सरकार द्वारा बनाया गया, जिसकी डिज़ाइन केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने तैयार की। निर्माण के बाद भी जोरा नाला में अधिक पानी जाने से छत्तीसगढ़ को ग्रीष्म ऋतु में औसतन 40.71% और ओडिशा को 59.29% जल प्रवाह मिला। राज्य सरकार की पहल से समाधान की दिशा में प्रगति इंद्रावती नदी में न्यूनतम जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने कई प्रयास किए। 6 जनवरी 2021 को ओडिशा और छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण किया। इस निरीक्षण में कंट्रोल स्ट्रक्चर के अपस्ट्रीम में जलभराव रोकने के लिए रेत और बोल्डर हटाने तथा जोरा नाला के घुमाव को सीधा करने का अनुरोध किया गया। वर्ष 2018 के बाद इंद्रावती नदी में सतत जल प्रवाह कम होने की समस्या बनी हुई थी। अब राज्य सरकार के प्रयासों से ओडिशा सरकार का सहयोग प्राप्त हुआ है, जिससे नदी के जल प्रवाह को संतुलित करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इससे इंद्रावती नदी में जल प्रवाह बढ़ेगा और किसानों को सिंचाई के लिए पानी की बेहतर उपलब्धता सुनिश्चित होगी। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 20

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ – 2028 के सुव्यवस्थित आयोजन के संबंध में बैठक लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश

सिंहस्थ – 2028 के लिए अभी से करें माइक्रो प्लानिंग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ प्रबंधन से जुड़े सभी कार्य जून 2027 तक करें पूर्ण क्राउड मैनेजमेंट पर दें विशेष ध्यान महाकाल लोक में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के हिसाब से करें सिंहस्थ की तैयारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सिंहस्थ – 2028 के सुव्यवस्थित आयोजन के संबंध में बैठक लेकर अधिकारियों को दिए निर्देश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सिंहस्थ – 2028 मध्यप्रदेश का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। लाखों-करोड़ों श्रद्धालु सिंहस्थ के दौरान उज्जैन आएंगे। किसी भी श्रद्धालु को स्नान व देव दर्शन में कोई कठिनाई हो, इसके लिए व्यापक प्रबंध किए जाएं। पुराने सिंहस्थ आयोजन से सीख लें और आगामी सिंहस्थ के सुव्यवस्थित आयोजन के लिए अभी से माइक्रो प्लानिंग कर व्यवस्थाओं को अंजाम देना प्रारंभ करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में पूर्व में सम्पन्न हुए सिंहस्थ में प्राप्त अनुभवों को केन्द्र में रखते हुए सिंहस्थ – 2028 के योजनाबद्ध आयोजन के संबंध में बैठक की अध्यक्षता कर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबसे बेहतर यह होगा कि सिंहस्थ की व्यवस्थाओं और प्रबंधन से जुड़े सभी कार्य जून 2027 के पहले ही पूरे कर लिए जाएं। इससे रह गई कमोबेशी को दुरुस्त करने या व्यवस्थाओं को और भी अधिक बेहतर करने का समय भी मिल सकेगा। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, संस्कृति एवं पर्यटन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, मुख्यमंत्री कार्यालय में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह जे.एन. कंसोटिया, अपर मुख्य सचिव नगरीय‍विकास एवं आवास संजय कुमार शुक्ल, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, सिंहस्थ की व्यवस्थाओं से जुड़े अन्य विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव सहित सचिव एवं आयुक्त जनसम्पर्क डॉ. सुदाम खाड़े व अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ – 2028 की व्यवस्थाओं एवं प्रबंधन के लिए मंजूर किए गए सभी कार्य जून 2027 तक पूरे कर लिए जाएं। चल रहे कार्यों की मासिक प्रोग्रेस रिपोर्ट की समीक्षा की जाए। प्रबंधन में किसी भी प्रकार की कमी न रहे। मंजूर किए गए सभी काम प्रारंभ हो जाएं और तय समय-सीमा में ही पूरे किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि महाकाल लोक बनने के बाद प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की दिनों-दिन बढ़ती संख्या के हिसाब से ही सिंहस्थ की तैयारी की जाए, क्योंकि जो श्रद्धालु सिंहस्थ में आएंगे, वे बाबा महाकाल सहित अन्य देव स्थलों पर भी अवश्य ही जाएंगे। भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए। प्रयास यह हो कि श्रद्धालुओं को ई-बस या ई-ऑटो से महाकाल मंदिर के नजदीक ही छोड़ा जाए, ताकि उन्हें महाकाल दर्शन के लिए अधिक पैदल न चलना पड़े और प्रबन्धन में भी आसानी हो। सिंहस्थ से पहले अंदरूनी गलियों का भी चौड़ीकरण करें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ में लाखों-करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन शहर में आएंगे। बड़े मार्गों के अलावा उज्जैन शहर की अंदरूनी गलियों व रास्तों का भी और अधिक चौड़ीकरण करें ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन का वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध रहे और वे आसानी से आ-जा सकें। उन्होंने कहा कि उज्जैन शहर में क्षिप्रा नदी व शहर के अंदर सिंहस्थ के लिए जितने भी सेतु निर्माण कार्य जरूरी हैं, वे अभी से प्रारंभ कर लिए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन शहर के सभी छोटे-बड़े मंदिरों में भी श्रद्धालुओं के देवदर्शन के लिए समुचित व्यवस्थाएं की जाए। उन्होंने कहा कि यदि संभव हो तो रूद्र सागर में भी घाट बनाने पर विचार कर प्रारंभिक सर्वे भी कर लें। आपदा/अग्नि प्रबंधन पर दें विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि छोटी-छोटी व्यवस्थागत कमियों की वजह से आयोजन के दौरान ही प्राकृतिक आपदा व अग्नि दुर्घटना से अप्रिय स्थिति निर्मित न हों। सिंहस्थ वर्ष 2028 में है, इसलिए किसी भी प्रकार की आपदा और अग्नि दुर्घटना प्रबंधन पर विशेष ध्यान देकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये वॉलिंटियर्स को प्रापर ट्रेनिंग भी दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ-2028 के लिए बेहतर से बेहतर प्लानिंग अमल में लाई जाए। विशेष ध्यान रहे कि कार्यों में विलंब न हो। मुख्यमंत्री ने बताया कि उज्जैन शहर पहुंचने वाले 7 प्रमुख मार्गों को फोरलेन और एक प्रमुख मार्ग सिक्स लेन रोड के रूप में मंजूरी दे दी गई है। इस पर तेजी से काम प्रारंभ किया जाए, ताकि समय रहते सभी मार्ग तैयार हो जाएं। बैठक में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी वर्ष 2016 के सिंहस्थ के व्यक्तिगत अनुभवों पर सिंहस्थ-2028 के लिए और अधिक बेहतर और व्यापक इंतजाम की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सभी काम अभी से प्रारंभ कर दिए जाएं, क्योंकि शाही स्नान के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालुओं की एक ही वक्त में एक साथ एक ही स्थान पर मौजूदगी बनी रहने की संभावना रहती है। इसीलिये भीड़ प्रबंधन के‍लिए अत्याधुनिक प्रबंधन किए जाएं। अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास शुक्ल ने बताया कि मंत्रि-मंडलीय समिति द्वारा सिंहस्थ – 2028 के लिए 7 प्रमुख विभागों द्वारा 7379.75 करोड़ रूपए की लागत से किए जाने वाले कुल 74 अधोसंरचना विकास कार्य मंजूर किए गए हैं। इनमें से 54 विकास कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है, 15 निर्माण कार्य निविदा प्रक्रिया में है और 5 कार्य प्रारंभ हो चुके हैं। सिंहस्थ – 2028 के पड़ाव क्षेत्र का टाउन प्लानिंग स्कीम (टी.पी.एस.) के माध्यम से विकास किया जाएगा। सिंहस्थ मेला क्षेत्र नगर विकास योजना 8,9,10,11 टी.पी.एस. (सम्मिलित रकबा 2378 हेक्टेयर) को राज्य शासन द्वारा 7 मार्च 2025 को मंजूरी दे दी गई है। सिंहस्थ की व्यवस्थाओं से जुड़े सभी विभागों द्वारा अपनी-अपनी कार्ययोजना की जानकारी दी गई। बैठक में सिंहस्थ – 2028 के दौरान यातायात प्रबंधन, पार्किंग व सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, मानव संसाधन प्रबंधन एवं प्रशिक्षण, आवास, विद्युत, जल प्रदाय एवं सीवरेज, स्वास्थ्य एवं साफ-सफाई व्यवस्था, उपचार, स्नान, प्रचार-प्रसार, देव दर्शन की व्यवस्था, खाद्य आपूर्ति व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, आई.टी. इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास, सी.एस.आर. सेल, टूरिज्म सर्किट के निर्माण आदि विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। अधिकारियों ने हाल ही में सम्पन्न हुए प्रयागराज महाकुंभ के फील्ड विजिट … Read more

बस्तर के असल जीवन को करीब से जानने-समझने का मिलेगा अवसर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर : मुख्यमंत्री ने किया 'बस्तर पंडुम 2025' का लोगो अनावरण मुख्यमंत्री ने किया 'बस्तर पंडुम 2025' का लोगो अनावरण बस्तर में शांति स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा बस्तर पंडुम : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बस्तर के असल जीवन को करीब से जानने-समझने का मिलेगा अवसर बस्तर पंडुम 2025: लोकसंस्कृति और परंपराओं का भव्य उत्सव बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की अनूठी पहल है बस्तर पंडुम रायपुर बस्तर के लोग जीवन का हर पल उत्सव की तरह जीते हैं और अपनी खुशी की अभिव्यक्ति के लिए उनके पास समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। बस्तर में शांति स्थापना के लिए हम तेजी से अपने कदम बढ़ा रहे हैं और बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर के लोकजीवन और लोकसंस्कृति को सहेजने के साथ ही उनकी उत्सवधर्मिता में हम सहभागी बनेंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित समिति कक्ष में मांदर की थाप पर नाचते कलाकारों की मौजूदगी में बस्तर पंडुम 2025 के लोगो का अनावरण किया और यह बातें कही। उन्होंने बस्तर पंडुम के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह आयोजन सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ ही बस्तर के प्रतिभाशाली कलाकारों को सशक्त मंच प्रदान करेगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने बस्तर पंडुम के बुकलेट का विमोचन किया।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार बनने के बाद बस्तर का विकास और वहां के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल रहा है। बस्तर को माओवाद से मुक्त करने की दिशा में हमने तेजी से अपने कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक और हाल ही में आयोजित अबूझमाड़ पीस हॉफ मैराथन में भी बस्तर वासियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। यह दर्शाता है कि बस्तर वासियों का विश्वास लगातार शासन के प्रति बढ़ा है और वे क्षेत्र में शांति और अमन-चैन चाहते हैं।         मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमने बजट में नक्सली हिंसा से ग्रसित रहे पुवर्ती गांव में भी अस्पताल खोलने का बड़ा निर्णय लिया है। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से हम बस्तर वासियों के मूलभूत जरूरत को तेजी से पूरा कर रहें हैं।         मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोग अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं और हर मौके को अपने खास अंदाज में सेलिब्रेट करते हैं । बस्तर पंडुम के माध्यम से बस्तर के असल जीवन को और करीब से देखा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम में नृत्य, गीत, लोककला, लोकसंस्कृति, नाट्य, शिल्प, रीति- रिवाज, परंपरा और व्यंजन सहित विभिन्न 7 विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएगी। साय ने कहा कि बस्तर में खुशहाली हो, लोग भयमुक्त होकर अपने अंदाज में जिये और उन्हें शासन की सभी सुविधाओं का लाभ मिले।        इस मौके पर उप मुख्यमंत्री अरूण साव, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, विधायक किरण देव, विधायक सुलता उसेंडी, विधायक विनायक गोयल, संस्कृति विभाग के सचिव अन्बलगन पी. और संचालक संस्कृति विवेक आचार्य मौजूद रहे। बस्तर की पहचान को दर्शा रहा है बस्तर पंडुम का लोगो      बस्तर पंडुम के लोगो में बस्तर के लोकजीवन को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है और यह उनकी सांस्कृतिक पहचान से गहरे से जुड़ा हुआ है। बस्तर के विरासत को बहुत ही कलात्मक ढंग से दिखाने का प्रयास इसमें किया गया है।  "बस्तर पंडुम" गोंडी का शब्द है जिसका अर्थ है बस्तर का उत्सव। प्रतीक चिन्ह में बस्तर की जीवनरेखा इंद्रावती नदी, चित्रकूट जलप्रपात, छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु वनभैंसा, राजकीय पक्षी पहाड़ी मैना, बायसन हॉर्न मुकुट, तुरही, ढोल, सल्फी और ताड़ी के पेड़ को शामिल गया है। इस प्रतीक चिन्ह के माध्यम से सरल, सहज और उम्मीदों से भरे अद्वितीय बस्तर को आसानी से जाना और समझा जा सकता है। नृत्य, गीत समेत 07 प्रमुख विधाओं पर केंद्रित होगा आयोजन ‘‘बस्तर पंडुम 2025’’ में जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषण, शिल्प-चित्रकला और जनजातीय व्यंजन एवं पारंपरिक पेय से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। ये स्पर्धाएं तीन चरणों में संपन्न होंगी। जनपद स्तरीय प्रतियोगिता 12 से 20 मार्च, जिला स्तरीय प्रतियोगिता 21 से 23 मार्च, संभाग स्तरीय प्रतियोगिता दंतेवाड़ा में 1 से 3 अप्रैल तक सम्पन्न होगी। प्रत्येक स्तर पर प्रतिभागियों को विशेष पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे। बस्तर के लोकजीवन और परंपराओं पर आधारित आयोजन होंगे प्रमुख आकर्षण     बस्तर पंडुम में बस्तर की पारंपरिक नृत्य-शैली, गीत, रीति-रिवाज, वेशभूषा, आभूषण और पारंपरिक व्यंजनों का शानदार प्रदर्शन होगा। प्रतियोगियों के प्रदर्शन को मौलिकता, पारंपरिकता और प्रस्तुति के आधार पर अंक दिए जाएंगे। आयोजन में समाज प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नागरिकों को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाएगा। प्रतियोगिता के विजेताओं के चयन के लिए एक विशेष समिति बनाई गई है, जिसमें प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ आदिवासी समाज के वरिष्ठ मुखिया, पुजारी और अनुभवी कलाकार शामिल रहेंगे। इससे प्रतियोगिता में पारदर्शिता बनी रहेगी और पारंपरिक लोककला को न्याय मिलेगा। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. 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होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का अवसर भी: मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का अवसर भी है। यह पर्व हमें छोटी-छोटी अनबन को भुलाकर नए सिरे से दोस्ती की शुरुआत करने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायपुर प्रेस क्लब द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में यह बात कही। रंगों के बीच पत्रकारों संग झूमे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री श्री साय का रायपुर प्रेस क्लब के सदस्यों ने अनूठे अंदाज में भिंडी की माला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रेस क्लब के होली विशेषांक ‘सेंसलेस टाइम्स’ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब में पर्वों को मिल-जुलकर मनाने की एक गौरवशाली परंपरा है। हर साल इस होली उत्सव में शामिल होने का अवसर मिलता है। मैं रायपुर प्रेस क्लब परिवार का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। हर्ष और उल्लास से भरा यह पर्व आप सभी के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करे, यही मेरी मंगलकामना है। मुख्यमंत्री ने बजाया नगाड़ा, रंगों के उल्लास में झूमे पत्रकार रायपुर प्रेस क्लब के होली मिलन समारोह में रंगों और उमंग का अनोखा नज़ारा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने खुद नगाड़ा बजाकर उत्सव का जोश दोगुना कर दिया। मुख्यमंत्री के नगाड़ा बजाते ही समारोह में मौजूद पत्रकारों और गणमान्यजनों ने तालियों से उत्साह बढ़ाया और पूरे माहौल में उल्लास की लहर दौड़ गई। पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की धुन पर मुख्यमंत्री भी पत्रकारों के साथ फाग गीतों और होली की मस्ती में झूमते नजर आए। होली के इस रंगीन माहौल में संगीत, उत्सव और आपसी भाईचारे का अनूठा संगम देखने को मिला। पत्रकारों के लिए बड़ी सौगात, प्रेस क्लब के लिए 1 करोड़ का बजट प्रावधान मुख्यमंत्री श्री साय ने रायपुर प्रेस क्लब की परंपरा को सराहते हुए कहा कि इस वर्ष के बजट में पत्रकारों के हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज का दर्पण होते हैं, जो लोकतंत्र की मजबूती में अहम भूमिका निभाते हैं। रायपुर प्रेस क्लब को राजधानी की गरिमा के अनुरूप विकसित करने के लिए 1 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जिससे इसके भवन का रिनोवेशन और विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा पत्रकारों के लिए एक्सपोजर विजिट की भी मांग उठी थी, जिसे पूरा करते हुए 1 करोड़ रुपये का अलग से बजट प्रावधान किया गया है।मुख्यमंत्री श्री साय ने वरिष्ठ पत्रकारों के कल्याण की चिंता करते हुए कहा कि लंबे समय तक पत्रकारिता के क्षेत्र में जनसेवा करने वाले साथियों को सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े, इसके लिए सरकार ने सम्मान निधि को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह कर दिया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मुझे लगता है कि यह होली केवल रंगों और फाग की मस्ती का पर्व नहीं, बल्कि पत्रकार मित्रों के लिए भी बड़ी सौगात लेकर आई है। महिला पत्रकारों के योगदान को सराहा मुख्यमंत्री ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आयोजित विशेष कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवसर पर उन्होंने महिला पत्रकारों का सम्मान किया और उनके संघर्ष व उपलब्धियों को करीब से समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारिता में चुनौतियाँ बहुत हैं, लेकिन उनके हौसले और संकल्प भी उतने ही ऊँचे हैं। लोकतंत्र के प्रहरी के रूप में पत्रकारों की अहम भूमिका मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी होते हैं, जिनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है। ऐसे में उनके लिए इस तरह के सांस्कृतिक और मिलन समारोह जरूरी हैं, जिससे कार्य के दबाव से अलग हटकर परस्पर सौहार्द को बढ़ावा मिले। रायपुर प्रेस क्लब वर्षों से होली मिलन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करता आ रहा है। यह परंपरा आगे भी जारी रहनी चाहिए। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री अनुज शर्मा, विधायक श्री सुनील सोनी, रायपुर नगर निगम की महापौर श्रीमती मीनल चौबे,मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार श्री पंकज झा, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी श्री आलोक सिंह, श्री अमित चिमनानी, श्री अनुराग अग्रवाल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक  और अधिकारीगण कार्यक्रम में शामिल हुए। रायपुर प्रेस क्लब की ओर से अध्यक्ष श्री प्रफुल्ल ठाकुर सहित प्रेस क्लब के सदस्यगण उपस्थित थे। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 20

मंत्री-विधायकों के फाग गीतों पर झूमे सदस्य, डॉ. सुरेंद्र दुबे की कविताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांधा

रायपुर विधानसभा परिसर में आज होली मिलन समारोह का रंगारंग आयोजन हुआ, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित तमाम विधायकों ने एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। आयोजन का पूरा माहौल होली के उल्लास में सराबोर रहा। मंत्रियों और विधायकों ने पारंपरिक फाग गीतों की मनमोहक प्रस्तुति दी, जिस पर विधानसभा सदस्य झूमते नजर आए। मंत्री-विधायकों के फाग गीतों से गूंजा विधानसभा परिसर होली मिलन समारोह में लोक परंपरा का विशेष रंग देखने को मिला। मंत्री-विधायकों द्वारा गाए गए फाग गीतों से विधानसभा परिसर में सांस्कृतिक समृद्धि की झलक दिखी।   राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मुख मुरली बजाए, छोटे से श्याम कन्हैया गीत की मधुर प्रस्तुति दी।विधायक अनुज शर्मा ने का तैं मोला मोहिनी डाल दिये रे और रंग बरसे गीत गाकर समां बांध दिया। विधायक कुंवर सिंह निषाद ने फागुन मस्त महीना और चना के डार राजा गीत गुनगुनाया। विधायक दिलीप लहरिया ने नदिया के पार म, कदली कछार म गीत सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विधायक रामकुमार यादव और श्रीमती चातुरी नंद ने भी फाग गीतों से समां बांधा। डॉ. सुरेंद्र दुबे की कविताओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बढ़ाया रंग     लोकप्रिय कवि डॉ. सुरेंद्र दुबे ने अपनी हास्य और होली की रंगीन कविताओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा राकेश तिवारी और उनकी टीम ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने डॉ. सुरेंद्र दुबे, राकेश तिवारी व उनकी टीम को सम्मानित किया।     इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव, वनमंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन, विधायक अजय चंद्राकर, धर्मलाल कौशिक, पुरंदर मिश्रा, धर्मजीत सिंह, मोतीलाल साहू, सुशांत शुक्ला, संदीप साहू, गुरु खुशवंत साहेब, भैयालाल राजवाड़े, ईश्वर साहू, कुंवर सिंह निषाद, रिकेश सेन, रामकुमार यादव, श्रीमती भावना बोहरा, योगेश्वर राजू सिन्हा, अटल श्रीवास्तव, ललित चंद्राकर सहित विधानसभा के अधिकारी, कर्मचारी एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे। Pushpendra“माय सीक्रेट न्यूज़” यह एक ऑनलाइन वेबसाइट है, जो आपको देश – दुनिया और आपके आसपास की हर छोटी-बड़ी खबरों को आप तक पहुंचाती है। इस वेबसाइट का संचालन वरिष्ठ पत्रकार पुष्पेन्द्र जी कर रहे हैं। उन्होंने पत्रकारिता में BJC (बेचलर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) और MJC (मास्टर ऑफ़ जर्नलिज्म एंड कम्युनिकेशन) की डिग्री 2011 में हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मप्र से हासिल की है। उन्होंने भोपाल के स्वदेश, राज एक्सप्रेस, राष्ट्रीय हिंदी मेल, सांध्य प्रकाश, नवदुनिया और हरिभूमि जैसे बड़े समाचार पत्र समूहों में काम किया है।  और पढ़ें इस वेबसाइट का संचालन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हो रहा है, जहाँ से प्रदेश की राजनीति से लेकर विकास की योजनाएं तैयार होती हैं।दे श व प्रदेश जिले की ताजा अपडेट्स व राजनीतिक प्रशासनिक खबरों के लिए पढ़ते रहिए हमारी वेबसाइट (my secret news. Com )👈 ✍️ पुष्पेन्द्र , (वरिष्ठ पत्रकार) भोपाल, मप्र  mysecretnews.com recent visitors 23