छतरपुर: अंबेडकर की मूर्ति चोरी: तीन दिन पहले ही हुई थी स्थापना; ग्रामीण बोले- गांव के दबंग जमीन कब्जाना चाहते हैं

Chhatarpur: Ambedkar’s statue stolen: It was installed just three days ago; Villagers said that the village bullies want to occupy the land छतरपुर । बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति की चोरी हो गई। घटना गढ़ीमलहरा के बारी गांव में बुधवार रात की है। आज सुबह मूर्ति नहीं दिखने पर ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए। एएसपी विदिता डांगर ने बताया कि ग्रामीणों ने कुछ संदिग्धों के नाम बताए हैं। पुलिस इस दिशा में जांच कर रही है। जांच के बाद मुकदमा दर्ज किया जाएगा। रहवासी जयप्रकाश ने बताया, कुछ लोग पहले से ही मूर्ति स्थापना का विरोध कर रहे थे। ओमप्रकाश अहिरवार ने खुलासा किया कि कुछ लोग जमीन पर अतिक्रमण करना चाहते थे। इस मामले में पहले कलेक्टर की जनसुनवाई में शिकायत भी की गई थी मूर्ति चोरी होने पर अहिरवार समाज के लोग आक्रोशित हैं। उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। जमीन का कुछ हिस्सा अंबेडकर के नाम जमीन से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, विवादित भूखंड का कुल रकबा 3.237 हेक्टेयर है, जिसमें से 0.650 हेक्टेयर जमीन डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम दर्ज है। वर्तमान में गांव के कुछ दबंग लोग इस जमीन पर कब्जा करना चाहते थे, जिसका ग्रामीण विरोध कर रहे थे। 10 मार्च को अहिरवार समाज ने गांव के स्कूल के पास हर्रई रोड पर डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की मूर्ति स्थापित कर दी। स्थापना के दौरान ढोल-नगाड़ों के साथ बड़ी संख्या में आसपास और जिले के लोग मौजूद थे। recent visitors 111

MP में सड़कों पर नहीं दौड़ेंगे 15 वर्ष से अधिक पुराने वाहन, ऐसे वाहनों के स्क्रैप होने से पर्यावरण का संरक्षण हो सकेगा

भोपाल बजट में 15 वर्ष आयु पूरी कर चुके सभी तरह के वाहनों को स्क्रैप कराना अनिवार्य किया गया है। पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फेसिलिटी(आरवीएसएफ)के तहत वाहनों का स्क्रैप कराया जा सकता है। यदि कोई शासकीय व निजी वाहन स्क्रैप कराता है तो उसे नया वाहन खरीदने पर टैक्स में छूट दी जाएगी। परिवहन विशेषज्ञ श्यामसुंदर शर्मा का कहना है कि इससे भोपाल सहित प्रदेश भर में बढ़ रहे वहनों की संख्या कमी आएगी। ट्रैफिक व्यवस्था ठीक होगी। साथ ही पेट्रोल, डीजल के ऐसे वाहन जिनकी उम्र 15 वर्ष हो चुकी है, वो स्क्रैप होने से पर्यावरण का संरक्षण हो सकेगा। कई ऐसे वाहन हैं, जो धुंआ छोड़कर वायु प्रदूषण फैलाते हैं। इससे आसपास का वातावरण अशुद्ध होता है, लेकिन इसमें वाहनों की स्थिति भी देखी जानी चाहिए। यदि वाहन टीक है तो उसे स्कैप के दायरे से बाहर किया जाए। कई ऐसे लोग होते हैं, जो आत्मीय रूप से वाहनों से जुड़ जाते हैं और उनके वाहनों की पीयूसी व फिटनेस ठीक रहती है। बजट में सबसे अच्छी बात यह है पुराने वाहनों को स्क्रैप कराकर नया वाहन खरीदने पर मोटरयान कर यानि टैक्स में छूट मिलेगी। परिवहन वाहनों में 15 प्रतिशत और गैर परिवहन वाहनों में 25 प्रतिशत तक की टैक्स में छूट देने का प्रविधान किया गया है।   recent visitors 19

केंद्रीय बजट 2024-25 में शुरू की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का दूसरा चरण शुरू, 31 मार्च तक कर सकते हैं अप्लाई

इंदौर केंद्रीय बजट 2024-25 में शुरू की गई प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (पीएमआईएस) के अंतर्गत 21 से 24 वर्ष की आयु के एक करोड़ युवाओं को इंटर्नशिप प्रदान की जानी है। यह योजना 12 महीने की अवधि के लिए विभिन्न उद्योगों में वास्तविक जीवन के कारोबारी माहौल से रूबरू कराएगी। इस योजना को कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और भारतीय कॉर्पोरेट कानून सेवा (आईसीएलएस) कैडर के अधिकारियों ने कार्यान्वित किया है। अधिकारियों के मुताबिक योजना का उद्देश्य भारत को ‘विश्व की कौशल राजधानी’ बनाना है।   आवेदनों की प्रक्रिया शुरू हुई योजना के पायलट चरण को लेकर आवेदनों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। दूसरे चरण में भारत के 730 से अधिक जिलों में शीर्ष कंपनियों में एक लाख से भी अधिक इंटर्नशिप के अवसर युवाओं को प्रदान किए जाएंगे। आवेदन करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 तक बढ़ा दी गई है। तीन इंटर्नशिप के लिए आवेदन आवेदक अधिकतम तीन इंटर्नशिप के लिए आवेदन कर सकता है। कोई भी उम्मीदवार भारत में कहीं भी किसी भी इंटर्नशिप के लिए आवेदन करने के लिए स्वतंत्र है। क्षेत्रीय कार्यालय अहमदाबाद में आने वाले चार राज्यों में शीर्ष कंपनियों ने 25 हजार 338 इंटर्नशिप अवसर प्रदान किए हैं। 5220 इंटर्नशिप के अवसर अकेले मध्य प्रदेश में ही कुल पांच हजार 220 इंटर्नशिप अवसर हैं, जो देश की शीर्ष कंपनियों द्वारा अलग-अलग जिलों में पेश किए जा रहे हैं। पावर ग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, एचडीएफसी बैंक लिमिटेड, जुबिलेंट फुडवर्क्स लिमिटेड और एनएचडीसी लिमिटेड जैसी अग्रणी कंपनियां इस दौर में मध्य प्रदेश में इंटर्नशिप के प्रस्ताव रख रही हैं। recent visitors 18

21 साल के बेटे ने की पिता की हत्या, पिता का कंकाल मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित बेटे को गिरफ्तार कर लिया

उमरिया, नौरोजाबाद उमरिया जिले के नौरोजाबाद थाना इलाके में इक्कीस वर्षीय बेटे ने पहले अपने पिता की हत्या कर दी और फिर उसकी लाश को ठिकाने लगाने के बाद गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। इस मामले में पिता का कंकाल मिलने के बाद पुलिस ने आरोपित बेटे को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना में आरोपित के स्वजनों ने भी उसकी सहायता की है। छोटे भाई ने पिता की लाश को ठिकाने लगाने में बड़े भाई की मदद की और मोटर साइकिल से शव को नदी किनारे झाडि़यों में फेंक दिया गया।   कंकाल मिलने से खुला राज उमरिया जिले के नौरोजाबाद थाना अंतर्गत जरहा तिराहे से महज 100 मीटर दूर घुलघुली रोड में सुखनारा पुल के बगल मे स्थित झाड़ियों के बीच लाश मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। लाश मिलने की जानकारी के बाद नौरोजाबाद पुलिस घटना स्थल पर पहुंच कर उसकी शिनाख्त में जुट गई। काफी देर बाद मृतक की पहचान रायसेन सिंह गौड़ उम्र 44 वर्ष निवासी बुढ़ान के रूप रूप मे हुई। शव की हालात देखकर नौरोजाबाद पुलिस के द्वारा यह कयास लगाया जा रहा था कि उसकी हत्या कर शव को झाड़ियों के बीच फेंक दिया गया। शक पर की पूछताछ शक के आधार पर पुलिस के द्वारा मृतक के बड़े बेटे मुनेश्वर सिंह उम्र 21 वर्ष से गहन पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान मृतक के बेटे ने स्वीकार किया किया उसने ही अपने पिता की हत्या की है। आरोपित ने पुलिस को जानकारी देते हुए बताया कि दिनांक 1 मार्च 2025 को रात को उसके पिता शराब के नशे में घर आए और मां और उसकी पत्नी से मारपीट करने लगा। मारपीट के दौरान जब वह बीच बचाव करने गया, तो पिता ने उसके साथ भी मारपीट की। इसके बाद उसके एक साल के बच्चे को उठाकर फेंक दिया। इसके बाद उसने अपने पिता पर डंडे से कई वार किए जिससे उनकी मौत हो गई। भाई के साथ ठिकाने लगाई लाश आरोपित बेटे ने पुलिस को बताया कि पिता की मौत के बाद उसने अपने छोटे भाई के साथ शव को बाइक पर लादकर सुखनारा पुल के पास झाड़‍ियों में फेंक दिया था। घटना के बाद उसने 6 मार्च को पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी नौरोजाबाद थाने में दर्ज कराई थी। आरोपी द्वारा दिए गए बयान के अनुसार नौरोजाबाद पुलिस के द्वारा मुनेश्वर सिंह गोंड पिता रायसेन उम्र 21 वर्ष एवं उसके छोटे भाई अपचारी बालक के विरुद्ध धारा 103(1),238(क )3, 5 बीएनएस की धारा के तहत कार्रवाही की गई है। recent visitors 13

शहरों में बदलता परिदृश्य: कॉर्पोरेट में सक्रिय महिलाएँ, संघर्षरत पुरुष, क्या खड़ी होने वाली बड़ी समस्या?

(Changing scenario in cities) शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती रोजगार भागीदारी और पुरुषों में बेरोजगारी की बढ़ती दर, दोनों ही समाज के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हैं. जहां एक तरफ महिलाओं ने पारंपरिक सामाजिक बाधाओं को पार करते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में अपने कदम मजबूत किए हैं, वहीं दूसरी तरफ पुरुषों के लिए रोजगार के अवसरों की कमी बढ़ती जा रही है. यह असंतुलन न सिर्फ परिवारों के भीतर आर्थिक संरचना को प्रभावित कर रहा है, बल्कि समाज में नए सामाजिक और मानसिक दबावों को भी जन्म दे रहा है. ऐसे में इस रिपोर्ट में विस्तार से समझते हैं कि आखिर शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के रोजगार में बढ़ रही भागेदारी का क्या कारण है और इस असंतुलन का भविष्य में हमारे समाज और अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा? क्या यह स्थिति समाज में नई समस्याओं को जन्म दे सकती है? Changing scenario in cities क्या कहता है आंकड़ा हाल ही में ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (GLIM) के शोधकर्ताओं ने एक रिपोर्ट जारी की है. जिसके अनुसार साल 2023-24 में 20 से लेकर 24 साल की उम्र के बीच पुरुषों में बेरोजगारी की दर 10% देखी गई, जबकि महिलाओं में यही दर पुरुषों से कम यानी 7.5% देखा गया है. इसी तरह, 25-29 साल की उम्र में भी पुरुषों की बेरोजगारी दर 7.2% है, जो महिलाओं से ज्यादा है. बेरोजगारी का ये आंकड़ा दर्शाता है कि शहरी इलाकों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, लेकिन पुरुषों के लिए यह अवसर घटते जा रहे हैं. ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (GLIM) के शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि पिछले कुछ सालों में शहरी भारत में महिलाओं का रोजगार 10% बढ़ा है. जबकि साल 2017-18 से लेकर 2023-24 तक, शहरी महिलाओं में रोजगार की दर 28% तक पहुंच गई है. दिलचस्प बात ये है कि इसी साल 40 साल और उससे ऊपर की उम्र वाली शहरी महिलाओं में रोजगार दर सबसे ज्यादा 38.3% दर्ज की गई. जिससे यह संकेत मिलता है कि महिलाएं अब बच्चों के बड़े होने के बाद अपने करियर पर ज्यादा ध्यान दे पा रही हैं. महिलाओं को नहीं है नौकरी की तलाश इसी रिपोर्ट के अनुसार भले ही देश में महिलाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ रहे हैं, लेकिन बावजूद इसके भारत की 89 मिलियन से ज्यादा शहरी महिलाएं अभी भी नौकरी की तलाश में नहीं हैं. यह संख्या जर्मनी, फ्रांस या यूनाइटेड किंगडम की पूरी जनसंख्या से भी ज्यादा है. इसका मतलब है कि अभी भी लाखों महिलाएं कामकाजी जीवन में शामिल नहीं हो पाई हैं. इस स्थिति में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर पुरुषों को पर्याप्त नौकरी के मौके नहीं मिलेंगे और महिलाएं बेहतर रोजगार के अवसरों का लाभ उठाएंगी, तो आने वाले समय में समाज में असंतुलन बढ़ सकता है. एक ओर जहां महिलाओं के लिए रोजगार बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुरुषों की बेरोजगारी बढ़ने से समाज में तनाव और असंतोष का माहौल बन सकता है. महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर सपोर्ट सिस्टम तैयार इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कई कंपनियां महिला कर्मचारियों के लिए बेहतर सपोर्ट सिस्टम तैयार कर रही है, जैसे स्कूल और ऑफिस के घंटों को मिलाना और बच्चों के लिए चाइल्डकेयर की सुविधा देना. इसके अलावा ज्यादातर कंपनियां महिलाओं को घर से काम करने का विकल्प दे रही है, जिससे वे अधिक आराम से काम कर पा रही हैं, लेकिन घर से काम करने के दौरान नेटवर्किंग की समस्या भी खड़ी हो रही है, जिससे उनकी करियर ग्रोथ में रुकावट आ सकती है. इस शोध में यह भी बताया गया है कि अगर हम सिर्फ महिलाओं के रोजगार पर ध्यान देंगे और पुरुषों के रोजगार की चिंता नहीं करेंगे, तो भविष्य में इसे लेकर समाज में समस्याएं आ सकती हैं. इसलिए, महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से रोजगार के मौके बढ़ाने की जरूरत है, ताकि कोई भी समुदाय इससे प्रभावित न हो. पुरुषों में क्यों बढ़ रही है बेरोजगारी आजकल शहरी इलाकों में महिलाओं का रोजगार बढ़ रहा है, लेकिन पुरुषों के लिए बेरोजगारी एक बड़ी चिंता बन चुकी है. खासकर, जो पारंपरिक काम जैसे निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग और कम कौशल वाला काम करते है. इसका मतलब है कि पहले जो काम पुरुषों के लिए आम थे, अब उनमें नौकरी के मौके कम हो गए हैं. इसके अलावा, नई तकनीकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने पुरुषों के लिए और भी मुश्किलें पैदा की हैं. पहले जो लोग मैन्युअल (हाथ से काम करने वाले) या कम कौशल वाले काम करते थे, उनके लिए अब इन कामों की जगह मशीनों और रोबोट्स ने ले ली है. अब ये लोग अपनी नौकरी छूट जाने के खतरे से जूझ रहे हैं. शहरी इलाकों में यह समस्या और भी गंभीर हो रही है क्योंकि यहां रोजगार के मौके कम हो गए हैं और युवा पुरुषों को नौकरी ढूंढने में कठिनाई हो रही है. इसे एक बड़ी समस्या के रूप में देखा जा सकता है, जिसका समाधान समय रहते करना जरूरी है. Read more: लाडली बहनों से लेकर किसानों को एमपी के बजट में क्या मिला? पढ़ें बड़ी बातें असंतुलन का क्या होगा समाज पर असर? अगर यह असंतुलन जारी रहता है तो इसका समाज और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. पहले तो, यह पारिवारिक संरचनाओं को प्रभावित करेगा. पारंपरिक समाज में पुरुषों को कमाने वाले के रूप में देखा जाता रहा है, लेकिन अब महिलाएं भी कमाने वाली बन रही हैं. इससे परिवारों के भीतर भूमिकाओं में बदलाव आएगा और कई पुरुष इस बदलाव को स्वीकार करने में मुश्किल महसूस कर सकते हैं. इसके अलावा, बेरोजगारी की बढ़ती दर से पुरुषों के बीच निराशा और मानसिक दबाव बढ़ सकता है. बेरोजगारी और आर्थिक तंगी के कारण अपराधों में वृद्धि हो सकती है और समाज में अस्थिरता पैदा हो सकती है. महिलाओं के बढ़ते रोजगार का प्रभाव पुरुषों पर महिलाओं के बढ़ते रोजगार का प्रभाव पुरुषों पर सीधा और अप्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है. कुछ पुरुषों को यह बदलाव चुनौतीपूर्ण लग रहा है, क्योंकि पहले वे ही परिवार के मुख्य कमाने वाले होते थे. अब जब महिलाएं भी … Read more

बिहान से जुड़ी महिलाओं ने दिन-रात हर्बल गुलाल तैयार किया

बेमेतरा इस बार होली को लेकर बिहान समूह से  जुड़े महिलाओं के द्वारा हर्बल गुलाल तैयार किया गया है । स्व सहायता समूह की स्वरोजगार से जुड़ी महिलाएं दिन-रात हर्बल गुलाल तैयार करने में लगी है। इस गुलाल को लगाने से जहां चेहरे पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है । महिला स्वयं सहायता समूह के जरिए तैयार किए जा इन हर्बल गुलाल और हर्बल रंग की कई विशेषताएं हैं । इसमें फूलों के रंग का इस्तेमाल किया जाता है । इतना ही नहीं गुलाल और रंग में महक के लिए भी फूलों का ही इस्तेमाल किया जाता है. इसमें किसी भी तरह का केमिकल नहीं मिलाया जाता है, जो नुकसान करें। यही वजह है कि इस गुलाल और रंग की डिमांड ज़िले सहित आसपास के ज़िलो में से भी आ रही है। वहीं, महिलाओं को घर बैठे स्वरोजगार भी उपलब्ध हो रहा है ।      बेमेतरा ज़िले के ब्लॉक साजा ग्राम पंचायत महीदही जय मां सिद्धि महिला स्व-सहायता समूह की महिलायें भी हर्बल गुलाल बनाने में जुट हैं । समूह की सचिव श्रीमती पार्वती साहू ने बताया कि पिछले साल होली में  30 किलो हर्बल गुलाल महिलाओं ने बनाया ।जिसकी काफ़ी माँग रही।उन्होंने कहा कि पिछले,20 और 50 रुपए के हर्बल गुलाल के पैकेट बनाए थे।  इस बार समूह की महिला सदस्यों ने हर्बल गुलाल ज़्यादा बनाए जाने का लक्ष्य रखते हुए 95  किलो   हर्बल गुलाल  बनाया गया है। इस बार 50 और 110 रुपये का पैकेट बनाया गया है। उन्होंने बताया कि पालक,लालभाजी, हल्दी.जड़ी, बुटी व फूलों से हर्बल गुलाल बनाने का कार्य कर रही ।     इसके अलावा मंदिरों फूलों के बाजार से निकलने वाली इस्तेमाल किए हुए फूल पत्तियों को सुखाकर प्रोसेसिंग यूनिट में पीसकर गुलाल तैयार किया जाता है। गुलाब, गेंदे, स्याही फूल के साथ चुकंदर, हल्दी, आम और अमरूद की हरी पत्तियां को भी प्रोसेस किया जाता है।     महिलाओं ने बताया कि एक किलो हर्बल गुलाल बनाने में करीब 75 रुपये खर्च आ रहा है। गुलाल को बनाने में वे पालक, चुकंदर, सिंदूर आदि का उपयोग करती है। इस गुलाल के प्रयोग से किसी तरह का त्वचा को नुकसान नहीं होगा। इसलिए क्षेत्र के लोग भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि लोगों को हर्बल गुलाल के फायदे को समझाएं ताकि लोग इन्हें अपनाएं।      महिला स्व सहायता समूह द्वारा इस वर्ष की होली के लिए पालक,लालभाजी, हल्दी. फूलों से हर्बल गुलाल बना रही है। उनके द्वारा वर्तमान मे पीला, संतरा, लाल एवं चंदन रंग के गुलाल का निर्माण किया जा रहा है, जिसका विक्रय स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा  कलेक्ट्रेट सहित अन्य स्थानों पर स्टॉल लगाकर किया जा रहा है । recent visitors 34

Holi Eyes Care Tips : होली खेलते समय आंखो को रंगो से बचाना हैं? तो अपनाएं ये नुस्खे

होली का त्योहार खुशियों और रंगों का प्रतीक होता है, और इस दिन सभी लोग जमकर होली खेलते हैं। हालांकि, इस रंगीन उत्सव के दौरान अपनी सेहत का भी ध्यान रखना जरूरी है, खासकर आंखों की सुरक्षा। केमिकल युक्त रंगों का इस्तेमाल न केवल हमारी त्वचा पर असर डालता है, बल्कि यह आंखों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। इसलिए, होली के दौरान कुछ खास उपायों का पालन करना चाहिए, ताकि आपकी आंखें सुरक्षित रहें। आंखों को साफ पानी से धोए होली के दौरान अगर आंखों के आस-पास रंग लग जाए, तो इसे तुरंत पानी से धो लेना चाहिए। इसके अलावा, गुलाब जल का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, क्योंकि यह आंखों से रंग और गंदगी हटाने में मदद करता है। गुलाब जल की ताजगी और शीतलता आपकी आंखों को आराम पहुंचाती है और जलन को कम करती है। सनग्लासेस पहनें, आंखों को सुरक्षित रखें केमिकल युक्त रंगों से बचने के लिए होली के दिन सनग्लासेस का इस्तेमाल बेहद जरूरी है। ये आपकी आंखों को रंगों से होने वाले नुकसान से बचाते हैं और केमिकल्स के प्रभाव को कम करते हैं। अगर आप संपर्क लेंस (कंटेक्ट लेंस) पहनते हैं, तो कोशिश करें कि डेली डिस्पोजेबल लेंस का उपयोग करें, क्योंकि इससे आंखों में संक्रमण का खतरा कम होता है। आंखों के साथ क्या न करें: इन बातों का रखें ध्यान     आंखों को बार-बार न रगड़ें: होली खेलते समय अगर आपकी आंखों में रंग लग जाए तो इसे बार-बार रगड़ने से बचें। हाथों पर लगे रंगों के कारण आंखों में जलन और संक्रमण हो सकता है। अगर आंखों में जलन या खुजली हो, तो आई टिश्यू वाइप्स का इस्तेमाल करें या साफ पानी से आंखों को धोएं।     आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल न करें: अगर होली के दौरान आपकी आंखों में कोई परेशानी हो, तो बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप्स का उपयोग न करें। स्टेरॉयड वाली आई ड्रॉप्स से बचें, क्योंकि ये तुरंत राहत देती हैं, लेकिन लंबे समय में आंखों की समस्या पैदा कर सकती हैं। recent visitors 36