Thursday, July 16, 2026 2:56 pm

दिल्ली पुलिस में पहली बार परीक्षा से नियुक्त होगा SHO, 15 पदों के लिए 122 आवेदन

नई दिल्ली दिल्ली पुलिस पहली बार एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाते हुए स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) की नियुक्ति के लिए योग्यता आधारित परीक्षा शुरू करने जा रही है। अब तक एसएचओ की नियुक्ति वरिष्ठता और अनुभव के आधार पर होती थी, लेकिन इस नई प्रणाली का उद्देश्य चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है। इस पहल के रूप में दिल्ली पुलिस विशेष रूप से साइबर थानों के लिए एक परीक्षा आयोजित कर रही है, जो राजधानी में डिजिटल अपराधों से निपटने में सबसे आगे रहे हैं। कुल 122 पुलिस इंस्पेक्टरों ने सिर्फ 15 उपलब्ध साइबर एसएचओ पदों के लिए आवेदन किया है, जिससे यह एक बेहद प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया बन गई है। यह परीक्षा 18 मार्च को वजीराबाद में दिल्ली पुलिस एकेडमी में होने वाली है। साइबर खतरों के बढ़ने के साथ दिल्ली पुलिस डिजिटल क्राइम के खिलाफ अपनी लड़ाई का नेतृत्व करने के लिए सर्वश्रेष्ठ अफसरोंं की तलाश कर रही है। इस परीक्षा के माध्यम से चुने गए अफसरों को साइबर क्राइम जांच, डिजिटल फोरेंसिक और साइबर सुरक्षा प्रवर्तन का प्रबंधन सौंपा जाएगा। पश्चिमी दिल्ली के एक इंस्पेक्टर ने कहा, "प्रतियोगिता कठिन है – केवल 15 ही सफल होंगे।" उन्होंने कहा, “रोजाना पुलिस ड्यूटी और परीक्षा की तैयारी के बीच संतुलन बनाना थका देने वाला है, लेकिन हम इस भूमिका के महत्व को जानते हैं।” इस परीक्षा में उम्मीदवारों को व्यापक सिलेबस पर परखा जाएगा, जिसमें महत्वपूर्ण कानून और पुलिसिंग अधिनियम शामिल हैं, जिनमें – भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), भारतीय साक्ष्य एक्ट (बीएसए), साइबर अपराध और आईटी कौशल, एनडीपीएस एक्ट, पॉक्सो एक्ट, जेजे एक्ट, आर्म्स एक्ट, दिल्ली पुलिस एक्ट, दिल्ली आबकारी एक्ट, कंपनी एक्ट, आदि शामिल हैं। मल्टिपल चॉइस और डिस्क्रिप्टिव प्रश्नों का संयोजन उम्मीदवारों को कानूनी ज्ञान, जांच कौशल और निर्णय लेने की चुनौती देगा। इस कदम को दिल्ली पुलिस के लिए एक गेम-चेंजर के रूप में देखा जा रहा है। सीनियर अफसरों का मानना ​​है कि योग्यता आधारित यह प्रणाली सुनिश्चित करेगी कि केवल सबसे योग्य अधिकारियों को ही नेतृत्व की भूमिका दी जाए। नाम न बताने की शर्त पर एक सीनियर अधिकारी ने कहा, "इस कदम से इन्वेस्टिगेशन स्किल में सुधार के साथ पुलिसिंग के मानकों में भी सुधार होगा।" उन्होंने कहा, “यह एसएचओ की नियुक्ति का एक पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी तरीका है – जिसकी लंबे समय से प्रतीक्षा थी।” परीक्षा की डेट तेजी से पास आ रही है, ऐसे में दिल्लीभर के पुलिस थानों में उत्सुकता और आखिरी समय में होने वाले बदलावों की भरमार है। इंस्पेक्टर रात-रात भर जागकर चाय की चुस्की ले रहे हैं और सहकर्मियों के साथ रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। रोहिणी के एक इंस्पेक्टर ने कहा कि हमने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया है – अब सब कुछ भगवान के हाथ में है। बता दें कि, पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार भविष्य में सभी पुलिस थानों में एसएचओ की नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित करने पर विचार कर रही है। दिल्ली पुलिस इस ऐतिहासिक बदलाव की ओर बढ़ रही है, ऐसे में सभी की निगाहें 18 मार्च पर टिकी हैं। क्या यह परीक्षा भविष्य में एसएचओ की नियुक्तियों के लिए एक नया मानक स्थापित करेगी? यह तो समय ही बताएगा। recent visitors 30

वरुण चक्रवर्ती से मिस्ट्री स्पिनर : क्रिकेट छोड़ बने आर्किटेक्ट, नौकरी में मन नहीं लगा तो पैशन को किया फॉलो

नई दिल्ली मिस्ट्री स्पिनर के रूप में अपनी अलग पहचान बनाने वाले वरुण चक्रवर्ती (33) ने करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी चमक बिखेरी। हाल ही में सम्पन्न हुई आईसीसी चैम्पियंस ट्रॉफी में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट 9 विकेट लेने वाले खिलाड़ी रहे हैं। 30 से 40 ट्रायल दिए लेकिन सफल नहीं हुए 13 साल की उम्र में क्रिकेट की शुरूआत करते वाले चक्रवर्ती ने स्पिनर नहीं तेज गेंदबाज का बनने सपना देखा था। लेकिन उन्हें गेंदबाजी का मौका नहीं मिलता था और टीम में विकेटकीपर बल्लेबाज की कमी के कारण वह इस और चल दिए। 16 की उम्र तक उन्होंने 30 से 40 ट्रायल दिए। लेकिन चयन में सफल नहीं हुए। निराश होकर उन्होंने क्रिकेट को छोड़ने का फैसला लिया और किट अपने दोस्तों को देकर आर्किटेक्चर बनने निकल पड़े। उन्होंने आर्किटेक्चर की पढ़ाई पूरी की और उसी फील्ड में कुछ साल तक नौकरी भी की। नौकरी में मन नहीं लगा तो पैशन को किया फॉलो आर्किटेक्ट की नौकरी में मन नहीं लगा और उनका ध्यान तेज गेंदबाज बनने पर था जिस कारण उन्होंने क्रिकेट में वापसी की। लेकिन एक बार प्रैक्टिस में चोटिल हो गए और सभी विकल्प आजमाने के बाद स्पिन गेंदबाजी का रूख किया। यूट्यूब से राशिद खान, अनिल कुंबले और एडम जैम्पा की बॉलिंग देख खुद को तैयारी करने लगे। जुबली क्रिकेट वनडे से IPL और फिर नेशनल टीम तक का सफर 2017 में वरुण ने तमिलनाडु के जुबली क्रिकेट वनडे टूर्नामेंट में 7 मैच में 31 विकेट लिए जिसकी बदौलत उन्हें तमिलनाडु प्रीमियर लीग में मौका मिला। 28 की उम्र में वरुण की आईपीएल में एंट्री हुई, जब 2019 में पंजाब ने 8.4 करोड़ रुपए में खरीदा। फिर वे कोलकाता नाइट राइडर से जुड़े और उन्हें मिस्ट्री स्पिनर का तमगा मिला। इसके बाद उन्हें भारत के लिए खेलने का मौका मिला। श्रीलंका के खिलाफ 25 जुलाई 2021 को आर.प्रेमदासा स्टेडियम में उन्होंने टी20 क्रिकेट में एंट्री की। इसी दौरान साल 2021 में यूएई में हुए टी-20 विश्वकप में वरुण अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाने की वजह से उन्हें धमकियां भी मिली जिससे वरुण डिप्रेशन का शिकार हो गए थे। लेकिन उन्होंने मेहनत नहीं छोड़ी और प्रैक्टिस भी डबल कर दी। पिछले साल आईपीएल में 21 विकेट लेकर कोलकाता को ट्रॉफी जिताई। इस सीजन के लिए कोलकाता ने उन्हें 12 करोड़ रुपए में रिटेन किया है। चैम्पियंस ट्रॉफी में तीन मैच में 9 विकेट लेकर वे टूर्नामेंट के दूसरे सफल गेंदबाज और भारत के सबसे सफल गेंदबाज रहे हैं। इस साल भारत-इंग्लैंड के बीच हुई टी-20 सीरीज के 5 मैचों में 14 विकेट लेकर वे मैन ऑफ द सीरीज भी बने थे। इस दौरान उन्होंने एक द्विपक्षीय टी-20 सीरीज में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड भी बनाया। recent visitors 32

19 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ किया आत्मसमर्पण

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पुलिस को नक्सल उन्मूलन अभियान में बड़ी सफलता मिली है. सरकार की महत्वपूर्ण पुनर्वास नीति और “नियद नेल्लानार” योजना से प्रभावित होकर 19 नक्सलियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया है. इनमें से 10 नक्सलियों पर कुल 29 लाख रुपये का इनाम घोषित था. 2025 में अब तक 84 नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ता इस आत्मसमर्पण के साथ ही वर्ष 2025 में अब तक कुल 84 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. इसके अलावा अब तक 137 नक्सली गिरफ्तार किए गए हैं और 56 माओवादियों को अलग-अलग मुठभेड़ में सुरक्षाबल के जवानों ने मार गिराया गया है. आत्मसमर्पण करने वाले सभी 19 नक्सली पूर्व में फायरिंग, आईईडी ब्लास्ट, आगजनी जैसे अन्य नक्सली घटनाओं में शामिल थे. प्रत्येक नक्सली को मिली 25-25 हजार रुपये की सहायता राशि इन सभी नक्सलियों ने सीआरपीएफ डीआईजी देवेन्द्र सिंह नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, एएसपी मयंक गुर्जर (आईपीएस), डीएसपी शरद जायसवाल और अन्य अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया है. पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादियों को अधिकारियों ने 25-25 हजार रुपये नगद राशि प्रदान किया गया. recent visitors 27

हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस टाइप-1 (HSV-1) का संक्रमण बेडरूम में फैल सकता है, शोध में खुलासा

शिकागो इंसान की मानसिक सेहत से जुड़ी बीमारियों में डिमेंशिया एक गंभीर समस्या बन चुकी है। हाल ही में, इलिनोइस यूनिवर्सिटी शिकागो के वैज्ञानिकों ने एक शोध में यह चौंकाने वाला खुलासा किया है कि हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस टाइप-1 (HSV-1) का संक्रमण बेडरूम में फैल सकता है और यह डिमेंशिया जैसी मानसिक बीमारियों का कारण बन सकता है। यह शोध वायरस और मानसिक स्वास्थ्य के बीच के संबंधों को समझने के लिए किया गया था। इस अध्ययन में यह पाया गया कि बेडरूम के अंदर किस, ओरल सेक्स और अन्य फिजिकल एक्टिविटी के दौरान हर्पीज वायरस का संक्रमण फैल सकता है। वायरस दिमाग में सूजन उत्पन्न कर सकता है, जिससे मानसिक समस्याएं हो सकती हैं। शोध में क्या बताया गया है? शोध का नेतृत्व प्रोफेसर दीपक शुक्ला ने किया। शोध में यह बताया गया है कि बेडरूम में किसी भी तरह की शारीरिक क्रियाओं से वायरस फैलने का जोखिम अधिक होता है, खासकर जब किसी व्यक्ति का संपर्क वायरस से प्रभावित व्यक्ति से होता है। जब किसी व्यक्ति की नाक HSV-1 से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आती है, तो वायरस वहां से तंत्रिका तंत्र तक पहुंच सकता है, जिससे वायरस दिमाग में सूजन पैदा कर सकता है। इस सूजन के कारण व्यक्ति को मानसिक समस्याएं हो सकती हैं, जो डिमेंशिया जैसी बीमारियों को जन्म दे सकती हैं। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि HSV-1 वायरस सिर्फ मुंह के आसपास ही नहीं, बल्कि अन्य शारीरिक हिस्सों में भी फैल सकता है, जैसे कि प्राइवेट पार्ट्स में। हालांकि, इसके फैलने की संभावना कम होती है, लेकिन इस वायरस के कारण प्राइवेट पार्ट्स में दाद हो सकता है। इसके अलावा, ओरल हर्पीज (जो मुंह और होठों के आसपास होने वाले छालों से होता है) से प्रभावित व्यक्ति के चूमने से भी यह वायरस फैल सकता है। जानिए क्या है हर्पीज वायरस और डिमेंशिया के बीच संबंध यह पहला शोध है जिसमें यह पाया गया कि हर्पीज वायरस डिमेंशिया के लक्षणों को उत्पन्न कर सकता है। शोधकर्ताओं ने यह समझाया कि हर्पीज वायरस शरीर में तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) तक पहुंचकर मानसिक स्थिति पर प्रभाव डालता है। इससे शरीर के नर्वस सिस्टम में सूजन उत्पन्न होती है, जो धीरे-धीरे मानसिक विकारों का कारण बन सकती है। इस वायरस के कारण दिमागी कार्यों में गड़बड़ी हो सकती है, जो लंबे समय में डिमेंशिया जैसी गंभीर मानसिक स्थितियों का कारण बन सकती है। HSV-1 वायरस क्या है? HSV-1 (हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस टाइप-1) एक सामान्य वायरस है जो आमतौर पर मुंह और होंठों के आसपास घावों (कोल्ड सोर) के रूप में दिखाई देता है। यह वायरस तब फैलता है जब किसी व्यक्ति का संपर्क संक्रमित व्यक्ति के मुंह, त्वचा या लार से होता है। यह वायरस इतना सामान्य है कि WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार, दुनिया भर की लगभग 2-तिहाई आबादी इस वायरस से संक्रमित है। हालांकि यह वायरस सामान्यतः मुंह और चेहरे के आस-पास घावों के रूप में दिखाई देता है, लेकिन यह शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकता है, जैसे प्राइवेट पार्ट्स में। डिमेंशिया क्या है? डिमेंशिया एक सिंड्रोम है, यानी यह कोई एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह कई मानसिक स्थितियों का समूह है, जो मस्तिष्क के कार्यों को प्रभावित करती हैं। डिमेंशिया से पीड़ित व्यक्ति को अपनी याददाश्त, सोचने की क्षमता, निर्णय लेने की क्षमता, और व्यवहार में गड़बड़ी हो सकती है। डिमेंशिया के कुछ सामान्य लक्षणों में शामिल हैं: – नाम और चेहरों को पहचानने में मुश्किल – भूलने की आदतें – निर्णय लेने में समस्या – लगातार भ्रमित रहना – शारीरिक संतुलन में समस्या होना – चलते समय डगमगाना और गिर जाना – हाथों और पैरों की गतिशीलता में परेशानी डिमेंशिया का कोई सटीक इलाज नहीं है, लेकिन इसकी पहचान जल्दी होने से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है और व्यक्ति की जीवनशैली में सुधार लाया जा सकता है। बेडरूम में वायरस फैलने का खतरा क्यों है अधिक? शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला है कि बेडरूम में वायरस फैलने का खतरा अधिक होता है क्योंकि यहाँ लोग शारीरिक संपर्क करते हैं और एक-दूसरे के करीब होते हैं। जैसे कि किस करना, ओरल सेक्स करना, और अन्य शारीरिक गतिविधियों के दौरान वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है। हर्पीज वायरस का संपर्क शरीर के विभिन्न हिस्सों से हो सकता है, खासकर जब किसी व्यक्ति का मुंह या नाक किसी संक्रमित व्यक्ति के निकट आता है। किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आएं जो… यदि आप या आपका कोई करीबी व्यक्ति हर्पीज वायरस से संक्रमित है, तो आपको एहतियात बरतनी चाहिए। खासकर जब आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आएं, जिसका शरीर संक्रमित है। इसके अलावा, यदि किसी को डिमेंशिया के लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। इस तरह की मानसिक स्थिति से निपटने के लिए समय पर उपचार और देखभाल बहुत महत्वपूर्ण है।  recent visitors 27

प्रसिद्ध संगीतकार इलैयाराजा पहुंचे श्री शेषपुरीश्वर मंदिर, राहु-केतु का पूजन

तिरुवरूर, मशहूर संगीतकार इसाग्नानी इलैयाराजा ने सोमवार सुबह तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले में स्थित थिरुपमपुरम श्री राहु-केतु सन्निधि मंदिर के दर्शन किए। यह मंदिर कुडावसाल तालुका में श्री शेषपुरीश्वर मंदिर परिसर में स्थित है और तमिलनाडु के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक माना जाता है। इसे ‘दक्षिणी कालहस्ती’ के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में राहु और केतु की पूजा की जाती है और मान्यता है कि यहां दर्शन करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसाग्नानी इलैयाराजा सोमवार सुबह मंदिर पहुंचे और उन्होंने श्री शेषपुरीश्वर सन्निधि तथा श्री राहु-केतु सन्निधि के दर्शन किए। दर्शन के बाद उन्होंने अर्चना की और प्रार्थना में समय बिताया। मंदिर प्रशासन ने उनका पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। इस दौरान उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया गया। इलैयाराजा के मंदिर आने की खबर से उनके प्रशंसकों में उत्साह देखा गया। थिरुपमपुरम मंदिर धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। खास तौर पर राहु और केतु ग्रहों से संबंधित परेशानियों को दूर करने के लिए भक्त यहां आते हैं। मंदिर में साल भर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है और खास अवसरों पर यह संख्या और बढ़ जाती है। इसाग्नानी इलैयाराजा दक्षिण भारतीय संगीत जगत के दिग्गज हैं। उन्होंने सैकड़ों फिल्मों में संगीत देकर लोगों का दिल जीता है। उनकी सादगी और आध्यात्मिक रुचि भी हमेशा चर्चा में रहती है। इस दौरे के दौरान उन्होंने मंदिर में शांति से समय बिताया और भक्तों के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। मंदिर प्रशासन ने उनके इस दौरे को यादगार बनाने के लिए विशेष इंतजाम किए थे। मंदिर दर्शन के बाद इलैयाराजा ने वहां मौजूद लोगों का अभिवादन किया और फिर अपने अगले कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए। इलैयाराजा का संगीत देश में काफी पसंद किया जाता है। वे लंदन में 8 मार्च को पश्चिमी शास्त्रीय सिम्फनी ‘वैलिएंट’ के सफल प्रीमियर को लेकर चर्चा में थे। सफल प्रदर्शन के बाद चेन्नई लौटने पर संवाददाताओं से बात करते हुए, इलैयाराजा ने उन्हें मिले समर्थन के लिए आभार व्यक्त करते हुए ऐलान किया कि उनकी सिम्फनी भारत सहित 13 और देशों में प्रदर्शित की जाएगी। उन्होंने लाइव संगीत के अनुभव को अभूतपूर्व बताते हुए प्रशंसकों से खास अपील भी की थी। गुहार लगाई कि सिम्फनी को डाउनलोड न करें क्योंकि इसके 80-वाद्य यंत्रों के ऑर्केस्ट्रेशन को व्यक्तिगत रूप से सबसे अच्छा महसूस किया जाता है।   recent visitors 31

Neja Mela : संभल जिला प्रशासन ने साफ कह दिया कि वह लुटेरों के नाम पर मेले का आयोजन नहीं होने देगा

 संभल यूपी के संभल जिले में सैयद सालार मसूद गाजी के नाम पर लगने वाले 'नेजा मेले' का आयोजन अब नहीं होगा. 'नेजा मेला' कमेटी के लोग अनुमति मांगने एडिशनल एसपी श्रीशचंद्र के पास पहुंचे थे, लेकिन एडिशनल एसपी ने कमेटी को दो टूक मना कर दिया. साथ ही नसीहत देते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर को लूटने वाले, भारत में लूटमार व कत्लेआम मचाने वाले की याद में किसी भी मेले का आयोजन नहीं होना चाहिए. उन्होंने कहा कि एक लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन करके आप लोग अभी तक अपराध करते रहे हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा. आपको बता दें कि सैयद सालार मसूद गाजी विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी का भांजा और सेनापति था.  गजनवी ने 1000 से 1027 ईस्वी के बीच भारत पर 17 बार हमला किया था. इस दौरान उसने हिंदुओं की आस्था के प्रतीक सोमनाथ मंदिर सहित कई बड़े मंदिरों पर भी आक्रमण किया था. संभल पुलिस की 'नेजा मेला' कमेटी को दो टूक संभल के एसएसपी श्रीशचंद्र ने 'नेजा मेला' कमेटी के लोगों से कहा कि सोमनाथ मंदिर को लूटने वाले, लुटेरे-हत्यारे की याद में किसी भी मेले का जिले में नहीं होगा. जो कोई व्यक्ति हत्यारे और लुटेरे के साथ रहेगा वह देश के साथ अपराध कर रहा है. आप लोग लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन करके अपराध करते रहे हैं. जिसने इस लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन किया वह व्यक्ति भी फिर देशद्रोही है. एसएसपी ने कहा कि 'नेजा मेला' एक बुरी कुरीति थी. किसी भी लुटेरे के नाम पर मेले का आयोजन किया जाना पूरी तरह से गलत है.  कानून व्यवस्था के चलते इजाजत नहीं दी जा रही है. मेला लगाने की कोई अनुमति नहीं है. अगर कोई नियम तोड़ेगा तो उसपर एक्शन लिया जाएगा. संभल में होली के बाद सैयद सालार मसूद गाजी की याद में 'नेजा मेला' लगाया जाता था. इस आयोजन को लेकर पहले भी आपत्ति जताई गई थी. अब संभल जिला प्रशासन ने साफ कह दिया है कि वह लुटेरों के नाम पर मेले का आयोजन नहीं होने देगा. इस साल संभल में सैयद सालार मसूद गाजी की याद में आयोजित होने वाला 'नेजा मेला' नहीं लगेगा. इससे पहले 'नेजा कमेटी' के पदाधिकारियों ने एसडीएम डॉ. बंदना मिश्रा से मुलाकात की थी. पदाधिकारियों ने उनसे मेले के आयोजन की अनुमति मांगी थी, लेकिन तब भी एसडीएम ने साफ कर दिया था कि 'नेजा मेले' के नाम पर कोई अनुमति नहीं दी जाएगी. वहीं, पदाधिकारियों ने तर्क दिया कि 'नेजा मेला' सदियों पुरानी परंपरा है और इसे उसी स्वरूप में आयोजित किया जाना चाहिए. लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए अनुमति नहीं दी जाएगी. नेजा मेला क्यों लगाया जाता है संभल में हजारों सालों से चला आ रहे नेजा मेले का इतिहास उस समय का है जब महाराजा पृथ्वीराज चौहान की राजधानी संभल हुआ करती थी। धार्मिक नगर नेजा कमेटी संभल के अध्यक्ष शाहिद मसूदी ने निजा मेला क्यों मनाया जाता है इसके संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पृथ्वीराज चौहान की राजधानी संभल हुआ करती थी और उस समय संभल में हजरत शेख पचासे मियां रहमतुल्लाह अलैह का परिवार रहा करता था। उनकी बेटी बहुत खूबसूरत थी, पृथ्वीराज चौहान के बेटे का दिल हजरत शेख पचासे मियां की बेटी पर आ गया। पैगाम पाकर आने का लिया फैसला पिता ने बेटी को सारा माजरा बताया तो बेटी ने कुछ वक्त लेने की बात कही और एक पैगाम अफगानिस्तान में सय्यद सालार मसूद गाजी रहमतुल्ला अलैह को भेजा और मदद की ख्वाहिश जाहिर की। सय्यद सालार मसूद गाजी रहमतुल्लाह अलैह ने पैगाम पाकर संभल आने का फैसला किया। उसने यहां पृथ्वीराज चौहान को जंग में पराजित किया। इस जंग में शहीद हुए उसके साथियों के आज भी मजार संभल में हैं, जहां मेला लगाया जाता है।  नेजा मेले की खास परंपरा, यहां सजकर बैठतीं हैं दुल्हनें संभल में सैयद सलार मसूद गाजी की याद में लगने वाले नेजा मेला पर खास परम्परा के तहत दुल्हनें सजकर बैठीं और घर परिवार व मौहल्ले की महिलाओं ने उनके साज श्रंगार की सराहना कर उन्हें ईनाम दिया। नेजा मेला पर हर साल वह दुल्हनें सजकर बैठती हैं जिनकी शादी पिछले एक साल के दौरान हुई होती है। दुल्हन उसी तरह सजती संवरती है जैसे वह शादी के वक्त सजती संवरती है। शहर के मौहल्ला चौधरी सराय सहित कई मौहल्लों में दुल्हनें सजकर बैठीं। पहले बहुत ज्यादा संख्या में दुल्हनों के सजने की परम्परा था मगर अब बदले वक्त में कुछ संगठन इस पुरानी प्रथा का विरोध करने लगे हैं।   recent visitors 30

470 किमी लंबे इलाके में बहने वाली सिंध नदी कई जगहों पर सूखकर गड्ढों में तब्दील हो गई

विदिशा एमपी की एक बड़ी नदी सूख गई है। 470 किमी लंबे इलाके में बहने वाली यह नदी कई जगहों पर सूखकर गड्ढों में तब्दील हो गई है वहीं कुछ जगहों पर नदी पोखरनुमा बन गई है जहां बहुत कम पानी बचा है। नदी की दुर्दशा से इसके किनारों की बसाहटों में हाहाकार सा मच गया है। एमपी के विदिशा जिले से निकलकर यूपी के जालौन में यमुना से मिलनेवाली सिंध नदी का यह बुरा हाल हुआ है। भीषण गर्मी के कारण मार्च में ही सिंध नदी के सूख जाने से कई गांवों में पीने के पानी का संकट गहरा गया है।  सिंध नदी विदिशा जिले के सिरोंज तहसील के नैनवास कला स्थित ताल से निकलती है जोकि यमुना की सहायक नदी है। यह नदी एमपी के गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, ग्वालियर और भिंड जिलों से होकर बहती है उत्तरप्रदेश के जालौन जिले में यमुना नदी में मिलती है। इस प्रकार मालवा के पठार से उत्तर-उत्तर-पूर्व की ओर बहती हुई चंबल और यमुना के संगम के ठीक बाद यमुना में समाती है। जब हर तरफ नदियों के प्रदूषित हो जाने से लोग चिंतित हैं तब सिंध नदी एक खुशनुमा एहसास कराती रही है। यह नदी देश की सबसे साफ सुथरी नदियों में शामिल है, बहुतायत में अब भी लोग सिंध के पानी का उपयोग पीने के लिए करते हैं। यही कारण है कि सिंध नदी का सूख जाना लाखों लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है।  अशोकनगर में​ सिंध में पानी ही नहीं बचा है। जिले के अंतिम छोर पर पीलीघटा में नदी का दृश्य, सूखती सिंध की हालत के बारे में बहुत कुछ कह रहा है। यहां नदी के सूख जाने से पोखर बन गए हैं। इन हिस्सों में मवेशी अपनी प्यास बुझाने जाते हैं। अब इन पोखरों पर भी सकंट मंडरा गया है। इनमें भी आसपास के किसानों ने पाइप डाल रखे हैं और मोटर पंप से पानी खींचा जा रहा है। सिंध की कुल 470 किलोमीटर (290 मील) की लंबाई में से 461 किलोमीटर (286 मील) मध्यप्रदेश में और महज 9 किलोमीटर (5.6 मील) उत्तर प्रदेश में हैं। सिंध के सूखने से इसके किनारों पर रहनेवालों के लिए पेयजल का संकट गहरा रहा है। दतिया जिले के सेंवढ़ा तहसील के किसान और मल्लाह समुदाय के लोग अब भी सिंध नदी का पानी पीते हैं। पूरे इलाके में होनेवाली शादियों या धार्मिक कार्यक्रमों के लिए लोग सिंध का पानी ही सीधे इस्तेमाल करते हैं। नदी से टैंक में पानी स्टोर कर पेयजल के रूप मे इसका उपयोग करते हैं। सिंध किनारे स्थित खमरौली गांव के लोग कहते हैं कि यह दूसरी नदियों के पानी से कई गुना स्वच्छ है। बरसात के दिनों को छोड़ कर हम हर मौसम में सिंध का पानी पीते हैं। सिंध नदी के स्वच्छ होने की पुष्टि कई सरकारी मानकों से भी होती है। इस नदी के कम प्रदूषित होने की सबसे बड़ी वजह मानव और औद्योगिक गतिविधियों का कम होना है। सिंध के किनारे पर एक भी बड़ी आबादी वाला शहर नहीं है। ग्वालियर जिले का डबरा सबसे बड़ा शहर है जिसकी आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार महज 2.37 लाख थी। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा बेसिन में जिन 19 प्रमुख औद्योगिक इकाइयों को प्रदूषण के खतरे के मद्देनजर चिह्नित किया है उसमें एक भी सिंध नदी के तट पर नहीं है। इसके तट पर अधिकांश छोटे शहर या कस्बे हैं जहां बड़े उद्योग या कल-कारखाने नहीं हैं। सिंध किनारे के गांवों में मुख्यत: खेती और पशुपालन किया जाता है। सीमित संसाधन व कम जरूरत के कारण सिंध स्वच्छ बनी रही लेकिन इसके सूखने से चिंता व्याप्त हो गई है। recent visitors 28