बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया

बीजापुर  छत्तीसगढ़ के बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है. मंगलवार को इस मामले में एसआईटी कोर्ट में चार्जशीट पेश करेगी. पत्रकार मुकेश की हत्याकांड की जांच एसआईटी कौ सौंपी गई थी. जांच में सामने आया था कि इस केस के मुख्य आरोपी ठेकेदार सुरेश चंद्राकर ने वारदात से करीब 3-5 दिन पहले ही मर्डर की पूरी प्लानिंग कर ली थी. दरअसल, मुकेश ने सड़क निर्माण में हुए कथित भ्रष्टाचार को लेकर कुछ खबरें की थी. इसी बात से आरोपी सुरेश काफी नाराज था. फिर उसने अपने कुछ साथियों के साथ मिलने इस वारदात को अंजाम दिया. पत्रकार मुकेश चंद्राकर 1 जनवरी को लापता हो गए थे. उनकी बॉडी 3 जनवरी को बीजापुर के चट्टानपारा इलाके में सुरेश चंद्राकर की प्रॉपर्टी में बने सेप्टिक टैंक में मिला था. मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने भी एक्शन तेज कर दिया था. फिर 5 जनवरी को आरोपी सुरेश चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया था. उससे पहले उनके भाई रितेश चंद्राकर, दिनेश चंद्राकर और सुपरवाइजर महेंद्र रामटेके को गिरफ्तार किया गया था. जानें कब-कब क्या हुआ     1 जनवरी 2025 की रात पूरी प्लानिंग के बाद बीजापुर के युवा पत्रकार मुकेश की हत्या कर शव को सेप्टिक टैंक में चुनवा दिया गया था     2 जनवरी को मुकेश के भाई युकेश ने कोतवाली में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी     3 जनवरी की देर शाम मोबाइल (गूगल) लोकेशन के आधार पर मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर के चट्टान पारा स्थित बाड़ा से मुकेश की बॉडी पुलिस ने बरामद की थी      इसके बाद इस मामले में सरकार ने एसआईटी जांच के आदेश दे दिए थे     सुरेश के भाई रितेश, दिनेश और कर्मचारी महेंद्र रामटेके को गिरफ्त में लेने ने 3 दिन बाद हैदराबाद से मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया था.     मामला गंगालूर से मिरतुर 100 करोड़ की लागत वाली सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार को लेकर की गई रिपोर्टिंग से जुड़ा हुआ था     रिपोर्टिंग से खफा सुरेश चंद्राकर ने मुकेश चंद्राकर की हत्या की साजिश रची थी     अभी जेल में बंद हैं सभी आरोपी     जिस जगह से मुकेश का शव बरामद हुआ था, एसआईटी ने उसे सील कर रखा है     हत्या के बाद से सुरेश की प्रापर्टी कुर्की की लगातार मांग उठ रही है     मामले में भ्रष्टाचार के संलिप्तत को लेकर पीडब्ल्यूडी के पूर्व ईई, एसडीओ समेत 4 लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है     इन्हें कोर्ट से मिली है जमानत   recent visitors 42

टेस्ट क्रिकेट में रोहित शर्मा की फॉर्म ही नहीं, बल्कि कप्तानी भी इन दिनों सवालों के घेरे में है, परेशान हैं सौरव गांगुली

नई दिल्ली पूर्व भारतीय कप्तान और बीसीसीआई के चेयरमैन रहे सौरव गांगुली ने रोहित शर्मा की टेस्ट फॉर्म को लेकर बयान दिया है। सौरव गांगुली ने कहा है कि पिछले चार-पांच सालों से रोहित शर्मा का टेस्ट फॉर्म उन्हें हैरान कर रहा है। दादा का दावा है कि वह इस समयावधि में जिस तरह खेले हैं, उससे कहीं बेहतर खेल सकते हैं। टेस्ट क्रिकेट में रोहित शर्मा की फॉर्म ही नहीं, बल्कि कप्तानी भी इन दिनों सवालों के घेरे में है। इंडिया ने पिछले 10 टेस्ट मैचों में सिर्फ 3 मुकाबले जीते हैं। इन मैचों में रोहित 8 में खेले हैं और एक बार भी अर्धशतक नहीं जड़ पाए हैं। गांगुली ने रोहित शर्मा के टेस्ट क्रिकेट में फॉर्म को लेकर चिंता जताई। गांगुली ने रेवस्पोर्ट्ज से बात करते हुए कहा, "पिछले 4-5 सालों में लाल गेंद वाले क्रिकेट में उनके फॉर्म ने मुझे हैरान कर दिया है। उनके कद और क्षमता वाला खिलाड़ी, उन्होंने जो किया है, उससे कहीं बेहतर कर सकता है। उन्हें अपनी सोच पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि हमें इंग्लैंड के खिलाफ 5 टेस्ट खेलने हैं और यह एक और कठिन सीरीज होने वाली है।" रिपोर्ट्स की मानें तो रोहित शर्मा इंग्लैंड के दौरे पर भी टीम के कप्तान हो सकते हैं। पूर्व दिग्गज क्रिकेटर ने आगे कहा, "ठीक वैसे ही जैसे ऑस्ट्रेलिया में हुआ था। गेंद सीम करेगी, स्विंग करेगी। भारत को लाल गेंद में उनके प्रदर्शन की जरूरत है, लेकिन सफेद गेंद में वह अब तक के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक हैं।" चैंपियंस ट्रॉफी की जीत ने रोहित शर्मा की चमक में चार चांद लगा दिए हैं। वे दो आईसीसी टूर्नामेंट पिछले एक साल से भी कम समय में जीत चुके हैं। ऐसे में अगर वह कप्तान के रूप में इंग्लैंड जाते हैं तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हालांकि, अभी चीफ सिलेक्टर को इस पर फैसला लेना है। recent visitors 38

भोपाल में युवती से गलत काम का कांड उसके रिश्ते के भाई ने ही किया, अब शदी से इंकार

भोपाल  कोई अनजान व्यक्ति हैवान बने तो कहते हैं दुनिया बड़ी खराब है, लेकिन अगर कोई अपना ही दरिंदगी पर उतर आए तो क्या कहा जाए? जी हां, अगर वह रिश्ते का भाई हो तो रिश्तों का तार-तार होने से कौन रोक पाएगा। एक ऐसी ही वारदात राजधानी भोपाल में सामने आई है। यहां पर अशोका गार्डन थाना क्षेत्र में एक युवती से गलत काम किया गया है। प्राइवेट नौकरी करने वाली इस युवती से गलत काम का कांड उसके रिश्ते के भाई ने ही किया है। रिश्ते के भाई ने युवती को एक दिन अकेले मिलने के लिए बुलाया। इसके बाद उसे घुमाने के बहाने होटल के एक रूम में ले गया। वहां पर उसके साथ जबरदस्ती कर डाली। जब लड़की ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने लड़की को जल्द शादी करने का झांसा दे दिया। इसके बाद करीब दो साल तक दोनों कई बार शारीरिक संबंध बनाते रहे। अब जबकि युवक का मन भर गया तो वह युवती से दूरी बनाने लगा। युवक ने शादी करने की बात से साफ इनकार कर दिया। प्राइवेट नौकरी में है दोनों इसके बाद पीड़िता ने युवक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। अशोका गार्डन थाने के प्रभारी हेमंत श्रीवास्तव ने बताया कि युवती की उम्र 24 साल है। वह प्राइवेट जॉब करती है। आरोपी का नाम सुभाष चंद्र मेहर है और वह मुंबई में प्राइवेट नौकरी करता है। आरोपी युवक-युवती का रिश्ते का भाई है। शादी में हुई दोनों की मुलाकात बताया जा रहा है कि दोनों की मुलाकात दो साल पहले एक शादी समारोह में हुई थी। पहले फोन में बातचीत शुरू हुई और बाद में दोस्ती हो गई। बाद में मामला प्रेम प्रसंग तक पहुंच गया। इसके बाद आरोपी युवक ने लड़की को घुमाने के बहाने बुलाया। और घटना को अंजाम दिया। आरोपी को उठाने मुंबई जा सकती है पुलिस आवेदन की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। अब पुलिस आरोपी युवक को गिरफ्तार करने के लिए मुंबई जाने की तैयारी कर रही है। वहां जाकर युवक की गिरफ्तारी की जा सकती है। recent visitors 34

सांसद लालवानी ने14 अप्रैल को बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती पर महू के लिए विशेष ट्रेनिंग चलाने की मांग रखी

 इंदौर लोकसभा में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने इंदौर से दिल्ली और मुंबई तक वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलाने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि इंदौर से दोनो शहरों में रोज हजारों यात्री सफर करते है। उनका सफर आसान बनाने के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलाई जाना चाहिए। इसके अलावा पटना, रीवा, देहरादून और उदयपुर के लिए ट्रेनों को रोजाना चलाने की मांग भी सांसद लालवानी ने लोकसभा में उठाई। गौतमपुरा रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के स्टॉपेज देने का मसला भी सांसद लालवानी ने लोकसभा में उठाया।14 अप्रैल को बाबा साहेब अंबेडकर की जयंती पर महू के लिए विशेष ट्रेनिंग चलाने की मांग भी रखी गई हैै। जयंती पर लाखों अनुयायी अलग-अलग प्रदेशों से महू आते है। लालवानी ने यूपीए सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में पूरे देश में सिर्फ 240 रेलवे की लिफ्ट काम कर रही थी वही पिछले 10 सालों में रेलवे स्टेशन स्टेशनों पर 2,650 लिफ्ट लगी है। यूपीए सरकार के दौरान 588 किलोमीटर रेलवे लाइन का ही इलेक्ट्रिफिकेशन हो पाया वही प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में 44,199 किलोमीटर का इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के कारण इंदौर से दाहोद, इंदौर से खंडवा एवं बहुप्रतीक्षित इंदौर-मनमाड़ रेलवे लाइन की सौगात भी मिली है। सांसद लालवानी ने वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ के पहले इंदौर-उज्जैन के बीच मेट्रो वंदे भारत ट्रेन चलाने की मांग भी रखी है। साथ ही, महू-इंदौर-देवास-उज्जैन लोकल ट्रेन भी चलाने की मांग की है।   recent visitors 27

आज 9 महीने बाद अंतरिक्ष से धरती पर वापसी करेंगीं एस्‍ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स

वाशिंगटन भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स आज मंगलवार की शाम धरती पर लौटने वाली हैं. एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 9 महीने 13 दिन बाद पृथ्वी पर लौट रहे हैं. नासा के अनुसार, सुनीता विलियम्स और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर आने वाला अंतरिक्ष यान कुछ ही घंटों में आईएसएस अलग होगा और मंगलवार शाम 5:57 बजे (अमेरिकी समयानुसार) फ्लोरिडा के समुद्र में उतरेगा. भारतीय समय के अनुसार, यह बुधवार तड़के करीब 3 बजे होगा. नासा करेगा सीधा प्रसारण ड्रैगन नामक इस अंतरिक्ष यान का दल रात 11:15 बजे (अमेरिकी समयानुसार) यानी भारत में मंगलवार सुबह 8:45 बजे आईएसएस से अलग होने और हैच बंद करने की प्रक्रिया शुरू करेगा. नासा अपने स्पेसएक्स कार्यक्रम के तहत इस वापसी यात्रा का सीधा प्रसारण करेगा. यह नासा और एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का संयुक्त मिशन है, जिसे "स्पेसएक्स क्रू 9" कहा जाता है. स्थितियों का किया आकलन नासा और स्पेसएक्स ने एजेंसी के क्रू-9 मिशन की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से वापसी के लिए फ्लोरिडा के तट पर मौसम और स्पलैशडाउन स्थितियों का आकलन करने के लिए रविवार को मुलाकात की। मिशन प्रबंधक 18 मार्च की शाम के लिए पूर्वानुमानित अनुकूल परिस्थितियों के आधार पर क्रू-9 की पहले वापसी के अवसर को लक्षित कर रहे हैं। मिशन प्रबंधक क्षेत्र में मौसम की स्थिति की निगरानी करना जारी रखेंगे, क्योंकि ड्रैगन की अनडॉकिंग कई कारकों पर निर्भर करती है। ट्रंप और मस्क का जताया आभार     इनमें अंतरिक्ष यान की तत्परता, रिकवरी टीम की तत्परता, मौसम, समुद्री स्थितियां और अन्य कारक शामिल हैं। नासा और स्पेसएक्स क्रू-9 की वापसी के करीब विशिष्ट स्पलैशडाउन स्थान की पुष्टि करेंगे।     इस बीच, सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर ने स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति आभार व्यक्त किया है। मस्क द्वारा एक्स पर पोस्ट वीडियो में विलियम्स ने कहा कि हम जल्द ही वापस आ रहे हैं, इसलिए मेरे बिना कोई योजना न बनाएं। हम जल्द ही वापस आएंगे। ये उपलब्धि हासिल करने वाली भारतीय मूल की दूसरी एस्‍ट्रोनॉट हाल ही में फॉक्स न्यूज पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक साक्षात्कार में मस्क ने कहा, "उन्हें राजनीतिक कारणों से वहां छोड़ दिया गया, जो अच्छा नहीं है." सुनीता विलियम्स, जो इस साल सितंबर में 60 वर्ष की हुईं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध भारतीय मूल की दूसरी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं. उनसे पहले कल्पना चावला यह उपलब्धि हासिल कर चुकी थीं, लेकिन 2003 में कोलंबिया स्पेस शटल दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई थी. सुनीता विलियम्स का जन्म 1965 में हुआ था. उनके पिता दीपक पांड्या गुजरात से हैं, जबकि उनकी मां उर्सुलाइन बोनी पांड्या (जालोकर) स्लोवेनिया से हैं. सुनीता ने पहली बार 2006 में "डिस्कवरी" स्पेस शटल के जरिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की थी. 1. स्पेस स्टेशन से पृथ्वी पर लौटने में कितना समय लगेगा? इस सफर में करीब 17 घंटे लगेंगे। नासा की ओर से इस इवेंट का एक अनुमानित शेड्यूल जारी किया गया है। इसमें मौसम के कारण बदलाव भी हो सकता है। नासा के अनुसार 19 मार्च को सुबह 2:41 बजे डीऑर्बिट बर्न शुरू होगा। यानी, कक्षा से उल्टी दिशा में स्पेसक्राफ्ट का इंजन को फायर किया जाएगा। इसके बाद स्पेसक्राफ्ट की पृथ्वी के वातावरण में एंट्री होगी और सुबह फ्लोरिडा के तट पर पानी में लैडिंग होगी। 3. सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को स्पेस स्टेशन पर क्यों भेजा गया था? सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर बोइंग और NASA के 8 दिन के जॉइंट ‘क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन’ पर गए थे। इस मिशन का उद्देश्य बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट की एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन तक ले जाकर वापस लाने की क्षमता को टेस्ट करना था। एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन पर 8 दिन में रिसर्च और कई एक्सपेरिमेंट भी करने थे। मिशन के दौरान उन्हें स्पेसक्राफ्ट को मैन्युअली भी उड़ाना था। 4. बोइंग का स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट कब और कैसे लॉन्च किया गया था? 5 जून 2024 को रात 8:22 बजे एटलस V रॉकेट के जरिए बोइंग का स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट लॉन्च हुआ था। ये 6 जून को रात 11:03 बजे स्पेस स्टेशन पहुंचा था। इसे रात 9:45 बजे पहुंचना था, लेकिन रिएक्शन कंट्रोल थ्रस्टर में परेशानी आ गई थी। बोइंग का स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट एटलस V रॉकेट से 5 जून 2024 को भारतीय समयानुसार रात 8:22 बजे लॉन्च हुआ। बोइंग का स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट एटलस V रॉकेट से 5 जून 2024 को भारतीय समयानुसार रात 8:22 बजे लॉन्च हुआ। 5. सुनीता और विल्मोर इतने लंबे समय तक स्पेस में कैसे फंस गए?     स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट के 28 रिएक्शन कंट्रोल थ्रस्टरों में से 5 फेल हो गए थे। 25 दिनों में 5 हीलियम लीक भी हुए। हीलियम प्रोपलेंट को थ्रस्टरों तक पहुंचाने के लिए बहुत अहम है। ऐसे में स्पेसक्राफ्ट के सुरक्षित रूप से लौटने पर चिंताएं थी।     डेटा का विश्लेषण करने के बाद, नासा ने फैसला लिया कि स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट सुनीता और बुच विल्मोर को वापस लाने के लिए सुरक्षित नहीं है, इसलिए वो अंतरिक्ष यात्रियों के बिना ही स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट को 6 सिंतबर 2024 को पृथ्वी पर वापस ले आया।     अब स्पेसएक्स को एस्ट्रोनॉट्स को वापस लाने की जिम्मेदारी दी गई। स्पेसएक्स का ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट हर कुछ महीनों में 4 एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस स्टेशन लेकर जाता है और वहां मौजूद पिछला क्रू स्पेस स्टेशन में पहले से पार्क अपने स्पेसक्राफ्ट से वापस आ जाता है।     स्पेसएक्स ने जब 28 सितंबर 2024 को क्रू-9 मिशन लॉन्च किया तो इसमें भी 4 एस्ट्रोनॉट जाने वाले थे, लेकिन सुनीता और बुच के लिए दो सीट खाली रखी गई। इनके पहुंचने के बाद क्रू-8 स्पेस स्टेशन में पार्क अपने स्पेसक्राफ्ट से पृथ्वी पर लौट आया।     15 मार्च 2025 को SpaceX ने 4 एस्ट्रोनॉट्स के साथ क्रू-10 मिशन लॉन्च किया। 16 मार्च को ये एस्ट्रोनॉट ISS पहुंच गए। अब क्रू-9 के चारों एस्ट्रोनॉट जिम्मेदारी क्रू-10 को हैंडओवर करने के बाद स्पेस स्टेशन पर सितंबर से पार्क अपने स्पेसक्राफ्ट से लौट रहे हैं। 6. क्रू-10 मिशन को इतनी देरी से क्यों भेजा गया, पहले भी भेज सकते थे? स्पेसएक्स के पास अभी 4 ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट है। एंडेवर, रेजीलिएंस, एंड्योरेंस और फ्रीडम। पांचवें स्पेसक्राफ्ट की मैन्युफैक्चरिंग हो रही है। क्रू-10 के लिए इसी … Read more

प्रदेश सरकार ने सीएम राईज विद्यालयों में आगामी सत्र से विद्यार्थियों को प्रवेश देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी

 सीहोर जिले के सीएम राइज स्कूल में बच्चों का दाखिला कराने के लिए अभिभावकों की भीड़ उमड़ रही है। भैरुंदा के सीएम राइज स्कूल में केजी-वन में बच्चों का प्रवेश कराने के लिए अभिभावकों में होड़ मची है। कक्षा केजी-वन में प्रवेश के लिए 30 सीटें खाली हैं, जबकि एडमिशन के लिए पहले दिन ही 50 आवेदन पत्र वितरित हो गए। जबकि, आवेदन प्रक्रिया 29 मार्च तक चलनी है। दअरसल, जिले के भैरुंदा स्थित सीएम राइज स्कूल में सत्र 2025-26 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। लगातार तीसरे वर्ष सीएम राइज विद्यालय की उत्कृष्ट शिक्षा पद्धति से अभिभावक प्रसन्न नजर आ रहे हैं। विद्यालय की लोकप्रियता और उसकी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की मांग का नतीजा यह है कि हर मध्यमवर्गीय परिवार अपने बच्चे का प्रवेश सीएम राइज में कराने के लिए उत्सुक नजर आ रहा है। इसका नजारा प्रवेश प्रक्रिया के पहले दिन संस्थान पर आवेदन पत्र के वितरण के दौरान देखने को मिला। सीएम राइज विद्यालय की प्रवेश प्रभारी शिक्षिका चंद्रकला रैकवार और कुसुम श्रोत्रिय ने बताया कि संस्था में केजी-1 की 30 सीटों के लिए पहले ही दिन 50 आवेदन पत्र वितरित किए गए, जबकि कक्षा 9 (अंग्रेजी माध्यम) की 90 सीटों के लिए 31 आवेदन पत्र वितरित हो चुके हैं। आवेदन प्रक्रिया 29 मार्च तक जारी रहेगी, आने वाले दिनों में आवेदन संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है। पहले दिन केवल आवेदन पत्र वितरित किए गए थे, किसी भी आवेदन को जमा नहीं किया गया। उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और सुविधाएं स्कूल के प्राचार्य शैलेन्द्र लोया ने बताया कि विद्यालय की उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा और शासन द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं क्षेत्र के अभिभावकों के लिए पहली पसंद बना रही हैं। कक्षा नौवीं से अंग्रेजी माध्यम की उपलब्धता, निःशुल्क बस परिवहन सेवा, स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं और अन्य आधुनिक शिक्षण संसाधन पालकों के आकर्षण का प्रमुख कारण हैं। प्राचार्य शैलेन्द्र लोया ने बताया कि यदि आवेदन पत्रों की संख्या रिक्त सीटों से अधिक होती है, तो 3 अप्रैल को दोपहर 2 बजे लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से चयन किया जाएगा।   recent visitors 36

45 साल सेवा देने वाले कर्मचारी को पेंशन-ग्रेच्युटी का हक, हाईकोर्ट का सख्त आदेश

जबलपुर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने अपने एक आदेश में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि 45 वर्ष सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए सफाई कर्मी को पेंशन की फूटी कौड़ी दिए बिना गुडबाय नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने नगर पालिका दमोह की ‘योगदान नहीं, तो पेंशन नहीं’ की रवायत पर करारी फटकार लगाते हुए दिवंगत सफाई कर्मी की विधवा के हक में एक माह के भीतर छह प्रतिशत ब्याज सहित पेंशन जारी किए जाने का राहतकारी आदेश पारित कर दिया। यही नहीं 12 प्रतिशत ब्याज सहित ग्रेच्युटी राशि भी दिए जाने का आदेश सुनाया गया। याचिकाकर्ता दिवंगत सफाई कर्मी पुरुषोत्तम मेहता की दमोह निवासी विधवा सोमवती बाई वाल्मीकि की ओर से अधिवक्ता संजय कुमार शर्मा, असीम त्रिवेदी और रोहिणी प्रसाद शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि इस मामले में नगर पालिका, दमोह के सभी तर्क दरकिनार किए जाने योग्य हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि सब मनमानी को इंगित करते हैं। एक परिवार को भुखमरी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया     हाई कोर्ट को अवगत कराया गया कि पुरुषोत्तम मेहता ने 1964 से 2009 तक नगर पालिका, दमोह में सफाई कर्मचारी के रूप में सेवा दी। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन या ग्रेज्युटी नहीं मिली, जिससे परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गया।     मामला हाई कोर्ट पहुंचा, जहां याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद उनकी विधवा सोमवती बाई वाल्मीकि ने न्याय की लड़ाई को गति दी। नगर पालिका का विवादास्पद तर्क है कि कर्मचारी ने पेंशन फंड में योगदान नहीं दिया।     नगर पालिका ने दावा किया कि मध्य प्रदेश नगर पालिका पेंशन नियम, 1980 के तहत पेंशन के लिए कर्मचारी का पेंशन निधि में योगदान जरूरी है, जो मेहता ने नहीं दिया। पेंशन निधि में कर्मचारी का योगदान नहीं होने से वह पेंशन का पात्र नहीं है। हाई कोर्ट ने सख्ती प्रतिक्रिया देते हुए राहत दी हाई कोर्ट ने नगर पालिका, दमोह के रुख को अनुचित करार दिया। अपनी सख्त प्रतिक्रिया में साफ किया कि नियमों में कहीं भी कर्मचारी के योगदान का प्रावधान नहीं है। यदि योगदान आवश्यक था तो नगर पालिका को वेतन से कटौती करना चाहिए था। सेवानिवृत्ति के समय यह कहना कि 'कर्मचारी ने योगदान नहीं दिया' उसके अधिकारों का हनन है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में जहां एक ओर कानूनी बारीकियों को रेखांकित किया, वहीं नगरपालिकाओं की संवेदनहीनता पर चिंता भी जताई। पेंशन निधि में 'डीम्ड' सम्मिलन का अर्थ है कि कर्मचारी स्वतः पात्र है। हाई कोर्ट ने नगर पालिका के तर्कों को सेवा कानूनों के विपरीत बताया और स्पष्ट किया कि 1980 के नियमों में पेंशन निधि में कर्मचारी के योगदान का कोई प्रविधान नहीं है। यदि योगदान जरूरी था, तो नियोक्ता का कर्तव्य था कि वह वेतन से कटौती करते। हाई कोर्ट ने नगर पालिका द्वारा "भुगतान की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है" के तर्क को निरस्त करते हुए कहा कि जब नगर पालिका ने पेंशन स्वीकृत ही नहीं की, तो राज्य पर दोष मढ़ना विधि विरुद्ध है। नगर पालिका यह तर्क तभी दे सकती थी जब वह पेंशन स्वीकृत कर चुकी होती। recent visitors 88