कांग्रेस निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाकर सक्रिय कार्यकर्ताओं को देगी जिम्मेदारी

श्रीगंगानगर कांग्रेस पार्टी ने संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी शुरू कर दी है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव और सादुलशहर विधानसभा क्षेत्र के समन्वयक मूलाराम भादू ने संकेत दिए हैं कि निष्क्रिय पदाधिकारियों को जल्द ही हटाया जाएगा। उनकी जगह पर संगठन में सक्रिय और मेहनती कार्यकर्ताओं को अवसर मिलेगा। भादू ने सादुलशहर और मिर्जावाला ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की बैठकों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश नेतृत्व ने निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाने का निर्णय लिया है। आने वाले स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी की तैयारियों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। बैठक में जिला कांग्रेस कमेटी, श्रीगंगानगर के प्रवक्ता अमित नागपाल ने जानकारी दी कि जिला स्तर पर लगभग 50% पदाधिकारी निष्क्रिय पाए गए हैं, जिन्हें हटाने की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। उन्होंने कहा कि जो लोग संगठन में रहकर भीतरघात कर रहे हैं और अन्य राजनीतिक दलों के लिए काम कर रहे हैं, उन पर भी नजर रखी जा रही है। ऐसे पदाधिकारियों के खिलाफ प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट भेजी जा रही है। सादुलशहर में आयोजित बैठक की अध्यक्षता जिलाध्यक्ष अंकुर मगलानी ने की। इस दौरान ब्लॉक अध्यक्ष अंतराम कारगवाल, संगठन महामंत्री श्यामलाल शेखावटी, महासचिव शंकर असवाल, अजय गौड़, सचिव मुकेश मिड्डा और संजय जांगिड़ सहित कई नेता मौजूद रहे। मिर्जावाला ब्लॉक कमेटी की बैठक में ब्लॉक अध्यक्ष लालचंद मिर्जावाला और पंचायत समिति श्रीगंगानगर के प्रधान सुरेंद्रपाल सिंह बराड़ ने भाग लिया। बैठकों के इस दौर के बाद कांग्रेस पार्टी मंडल और बूथ स्तर की बैठकों का आयोजन करेगी। पार्टी के बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) को विशेष जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि वे मतदाता सूची की जांच और चुनावी प्रक्रियाओं में प्रभावी भूमिका निभा सकें। कांग्रेस द्वारा किए जा रहे इस संगठनात्मक बदलाव से पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलने की उम्मीद है। recent visitors 44

इटारसी-बुदनी-खातेगांव होकर बन रही नई रेल लाइन, इंदौर -देवास रेल लाइन में मांगलिया गांव के पास जुड़ेगी, रास्ते में भोपाल नहीं पड़ेगा

जबलपुर जबलपुर से इंदौर के बीच नई रेल लाइन गाडवारा-बुदनी होकर नहीं इटारसी-बुदनी-खातेगांव होकर बन रही। ये लाइन इंदौर-देवास रेल लाइन में मांगलिया गांव के पास जुड़ेगी। इस रास्ते में भोपाल नहीं पड़ेगा। इस नई लाइन के बनने के बाद जबलपुर से इंदौर के सफर का समय दो घंटे तक कम हो जाएगा। जबलपुर-इंदौर (गाडरवारा एवं बुदनी होकर) नई रेल लाइन की प्रगति पर नर्मदापुरम सांसद दर्शन सिंह चौधरी द्वारा पूछे गए सवाल पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में ये जानकारी दी। रेल मंत्री ने बताया कि बुदनी से इंदौर के बीच नई रेल लाइन निर्माण कार्य प्रक्रिया में है। इस परियोजना के गाडरवारा-बुदनी रेलखंड के दोनों अंतिम स्टेशन पूर्व से इटारसी होकर रेलमार्ग से जुड़े हुए हैं। आठ साल पुरानी परियोजना दोनों के मध्य नवीन रेल लाइन से उनकी दूरी में ज्यादा अंतर नहीं आ रहा है। इसलिए गाडरवारा-बुदनी के मध्य नई रेल लाइन बिछाना तर्कसंगत नहीं है। आठ वर्ष पुरानी परियोजना- जबलपुर(गाडरवारा)-इंदौर (मांगलियागांव) नई रेल लाइन की घोषणा वर्ष 2016-17 के बजट में हुई थी। उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में था। वर्ष 2021-22 के बजट में एक हजार रुपये के आवंटन से परियोजना की बंद फाइल फिर खुल गई। उसके बाद के बजट में भी परियोजना को आवंटन जारी हुए। गत दो बजट में आवंटन बढ़ने के बाद परियोजना के इंदौर-बुदनी रेलखंड में रेल लाइन निर्माण प्रक्रिया ने गति पकड़ी। इंदौर-बुदनी का कार्य जारी लोकसभा में रेल मंत्री ने बताया कि इंदौर (मांगलियागांव) और बुदनी के बीच (205 किलोमीटर) नई रेल लाइन का कार्य 3261.82 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृत किया गया है। मार्च-2024 तक 948.37 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं। वर्ष 2024-25 के लिए इस परियोजना को 1107.25 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है। रेल लाइन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया की जा रही है। चार किमी का अंतर इटारसी होकर गाडरवारा से बुदनी रेल मार्ग से जुड़ा है, जिसकी दूरी 141 किमी है। इंदौर नई रेल लाइन परियोजना में प्रस्तावित गाडवारा-बुदनी रेलखंड की दूरी 137 किमी है। मात्र चार किलोमीटर की दूरी कम करने के लिए अलग से लाइन बिछाना रेलवे को अब खर्चीला लग रहा है। recent visitors 55

सिंहस्थ 2028 में 25 करोड़ श्रद्धालु के उज्जैन आने की संभावना :मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव

उज्जैन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने एबीपी न्यूज़ से खास बातचीत के दौरान कहा कि सिंहस्थ 2028 ऐतिहासिक बनाने के लिए सरकार पूरी कोशिश कर रही है. सिंहस्थ 2028 में 25 करोड़ श्रद्धालु के उज्जैन आने की संभावना है, जिसे देखते हुए अभी से व्यवस्था की जा रही है. सीएम मोहन यादव ने सिहंस्थ 2028 को लेकर से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि सिंहस्थ 2028 को अद्भुत और ऐतिहासिक बनाने के लिए सरकार अभी से कार्य कर रही है. सिंहस्थ 2028 के लिए 2000 करोड़ का बजट इसी साल जोड़ा गया है. प्रदेश सरकार सिंहस्थ को पूरी तरह सफल बनाने की कोशिश कर रही है. कितने करोड़ आएंगे श्रद्धालु? मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से जब पूछा गया कि कितने श्रद्धालुओं की सिंहस्थ 2028 में आने की संभावना है? तो उन्होंने कहा कि कम से कम 25 करोड़ श्रद्धालुओं के सिंहस्थ 2028 में आने की संभावना है. इसी बात को दृष्टिगत रखते हुए सरकार 25 करोड़ श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाएं जुटा रही है. सिंहस्थ को लेकर साधु-संत से वादा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रविंद्रपुरी महाराज ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने साधु संतों से वादा किया है कि सिंहस्थ 2028 का स्नान शिप्रा नदी के जल से ही होगा. शिप्रा नर्मदा लिंक योजना के बाद शिप्रा नदी में पर्व और त्योहारों के दौरान नर्मदा का जल भी प्रवाहित किया जाता है. शिप्रा नदी के जल से सिंहस्थ के अमृत स्नान को लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि सरकार सिंहस्थ को सफल बनाने के लिए हर संभव कोशिश करेगी. बता दें कि सिंहस्थ भले ही साल 2028 में हो लेकिन सूबे की मोहन यादव सरकार अभी से इसकी तैयारियों में जुट गई है. मुख्यमंत्री का दावा है कि सिंहस्थ का भव्य आयोजन किया जाएगा. recent visitors 38

मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को मोहन सरकार की तरफ से एक बाद एक बड़ी खुशखबरी मिल रही

भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को मोहन सरकार की तरफ से एक बाद एक बड़ी खुशखबरी मिल रही हैं, हाल ही में सरकार ने 7वें वेतनमान के हिसाब से महंगाई भत्ते देने का ऐलान बजट में किया था, जो 1 अप्रैल से लागू होने वाला है, जबकि अब सरकार ने प्रमोशन का रास्ता भी साफ कर दिया है. मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को 9 साल बाद फिर से पदोन्नति मिलेगी, क्योंकि सीएम मोहन यादव ने 9 साल से पदोन्नति व्यवस्था पर लगी रोक को फिर से बहाल करने का फैसला कर दिया है, जिससे प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों में खुशी की लहर देखी जा रही है. मध्य प्रदेश में कर्मचारियों को मिलेगा प्रमोशन दरअसल, मध्य प्रदेश में सीएम मोहन यादव ने सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति व्यवस्था बहाल करने के साथ-साथ रिटायर कर्मचारियों को राज्य पुनर्गठन की धारा-49 से मुक्त करने का ऐलान कर दिया है. सीएम मोहन के इस ऐलान से प्रदेश के सरकारी कर्मचारी खुश नजर आ रहे हैं. क्योंकि पिछले 9 साल से प्रमोशन की राह देख रहे कर्मचारियों का इंतजार अब खत्म हो जाएगा. जिसके लिए मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों ने सीएम मोहन यादव का धन्यवाद भी जताया है. सीएम मोहन यादव ने मंगलवार को भोपाल में न्यू मार्केट में सरकरी कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवासों का शिलान्यास किया था, इस दौरान उन्होंने यह घोषणा की है. जिसमें सरकारी कर्मचारियों के मंडलों के प्रमुख भी थे. यह इलाका भोपाल की दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में आता है, जहां राजधानी के सबसे ज्यादा सरकारी कर्मचारी रहते हैं, ऐसे में कर्मचारी संगठन लंबे समय से पदोन्नति व्यवस्था पर लगी रोक को हटाने की मांग भी कर रहे थे, जिसे सीएम मोहन यादव ने पूरा कर दिया है. 7वें वेतनमान के हिसाब से मिलेगा भत्ता बता दें कि इससे पहले बजट में भी मोहन सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा ऐलान किया था, अब 1 अप्रैल से राज्य के सभी कर्मचारियों को 7वें वेतनमान के हिसाब से ही महंगाई भत्ते दिए जाएंगे. अब तक पुरानी पद्धति चल रही थी, लेकिन 7वें वेतनमान के हिसाब से महंगाई भत्ते मिलने से सरकारी कर्मचारियों को बड़ा फायदा होगा. जबकि अब प्रमोशन का रास्ता भी साफ हो गया है.  recent visitors 39

UFBU ने 24-25 मार्च को देशव्यापी बैंक हड़ताल का ऐलान, चार दिन तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी

मुंबई अगर आप अगले हफ्ते बैंक जाने की योजना बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए! यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने 24 और 25 मार्च को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इससे देशभर में सार्वजनिक और निजी दोनों बैंकों की सेवाएं बाधित हो सकती हैं। हड़ताल का आह्वान भारतीय बैंकों के संगठन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के साथ बातचीत असफल होने के बाद किया गया। किन बैंकों पर पड़ेगा असर? हालांकि SBI, PNB, BoB, ICICI और HDFC बैंक ने हड़ताल को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन ANI की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हड़ताल का असर सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks) पर पड़ सकता है। इससे ग्राहकों को चार दिन तक बैंकिंग सेवाओं में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। क्या है UFBU और कौन से बैंक यूनियन इसमें शामिल हैं? यूनाइटेड फ़ोरम ऑफ़ बैंक यूनियन्स (UFBU) एक संगठन है जिसमें 9 प्रमुख बैंक यूनियन्स शामिल हैं। यह 8 लाख से अधिक बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है। इसमें शामिल प्रमुख यूनियन्स हैं- ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज (NCBE), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA)। बैंक यूनियनों की मांगें क्या हैं? बैंक यूनियनों ने अपनी कई मांगें सरकार और IBA के सामने रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:     बैंकों में सभी पदों पर पर्याप्त भर्ती की जाए, ताकि शाखाओं में स्टाफ की कमी न हो और ग्राहक सेवा बेहतर हो सके।     बैंकों में काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।     सभी बैंकों के लिए पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जाए, जैसे कि RBI, बीमा कंपनियों और सरकारी विभागों में लागू है।     परफॉर्मेंस रिव्यू और परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को वापस लिया जाए, जिससे नौकरी की सुरक्षा बनी रहे और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्वायत्तता कमजोर न हो।     बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्राहकों द्वारा किसी भी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार से बचा जा सके। मैनपावर घटने से बैंकिंग सेवाएं हो रहीं प्रभावित बैंक कर्मी संगठनों ने कहा कि पिछले 11 साल में देश के सार्वजनिक बैंकों में एक लाख 39 हजार 811 कर्मी घट गए हैं। ये पद्द रिक्त हैं। सरकारी बैंकों में ग्राहकों की सेवा के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। बैंक शाखाओं में कर्मियों की बड़ी कमी के कारण संतोषजनक सेवाएं नहीं मिलने से अनियंत्रित लोगों कर्मियों पर हमला कर देते हैं। इस लिए बैंकों में पर्याप्त संख्या में कर्मियों की नियुक्ति की जाए और कर्मियों की सुरक्षा की व्यवस्था की जाय, ताकि ग्राहकों को संतोषजनक सेवाएं प्रदान की जा सकें और कर्मचारियों पर अनावश्यक कार्यभार कम किया जा सके। बैंककर्मियों की मांग     सभी संवर्गों में पर्याप्त भर्ती, अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने     बैंकिंग क्षेत्र में सप्ताह में पांच दिन काम का नियम लागू करने     परफॉर्मेंस रिव्यू और पीएलआई संबंधित सरकारी निर्देश वापस हो     अनियंत्रित जनता के हमले से बचाने के लिए बैंक कर्मियों की सुरक्षा     सरकारी बैंकों में कामगार, अधिकारी और निदेशकों के रिक्त पदों की नियुक्ति     सरकारी कर्मियों के तर्ज पर 25 लाख रुपए की सीमा बढ़ाने के लिए ग्रेच्युटी अधिनियम में संशोधन     सरकारी बैंकों में खाली पदों को जल्द भरा जाए।     ग्रेच्युटी एक्ट में संशोधन कर इसकी अधिकतम सीमा ₹25 लाख की जाए, जैसा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू है।     बैंकिंग क्षेत्र में स्थायी नौकरियों की आउटसोर्सिंग को बंद किया जाए।     बैंकिंग सेक्टर में किसी भी प्रकार की अनुचित श्रम नीतियों पर रोक लगाई जाए। चार दिन तक बैंक सेवाएं रहेंगी प्रभावित 22 मार्च को महीना का चौथा शनिवार है, जो सभी सरकारी और निजी बैंकों के लिए अवकाश होता है। 23 मार्च को रविवार होने के कारण बैंकों की छुट्टी रहेगी। 24 और 25 मार्च को दो दिवसीय हड़ताल होने के कारण बैंक बंद रहेंगे। इसका मतलब है कि बैंकिंग सेवाएं लगातार चार दिन तक प्रभावित रहेंगी। किन सेवाओं पर पड़ेगा असर? ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC) के उपाध्यक्ष पंकज कपूर ने ANI को बताया कि हड़ताल के कारण चेक क्लीयरेंस, नकद लेन-देन, ऋण सेवाएं और धन प्रेषण जैसी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी। हालांकि, ATM, UPI और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन बड़ी राशि के ट्रांजेक्शन और चेक क्लीयरेंस में देरी हो सकती है।   recent visitors 56

जब पुरुषों में हस्तमैथुन को सार्वभौमिक माना जाता है तो महिलाओं के हस्तमैथुन को कलंकित नहीं किया जा सकता : मद्रास हाईकोर्ट

चेन्नई मद्रास हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया जिसमें कहा गया था कि एक महिला द्वारा अकेले में पोर्न देखना और हस्तमैथुन करना उसके पति के प्रति क्रूरता नहीं हो सकती है। फैमिली कोर्ट ने इस आधार पर एक व्यक्ति को तलाक देने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति आर पूर्णिमा की खंडपीठ ने बुधवार को कहा, "जब पुरुषों में हस्तमैथुन को सार्वभौमिक माना जाता है तो महिलाओं द्वारा हस्तमैथुन को कलंकित नहीं किया जा सकता है। पुरुष हस्तमैथुन करने के तुरंत बाद संभोग में शामिल नहीं हो सकते हैं, लेकिन महिलाओं के मामले में ऐसा नहीं होगा। यह भी सिद्ध नहीं किया गया है कि अगर पत्नी को हस्तमैथुन की आदत है तो पति-पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध प्रभावित होंगे।" इस मामले पर सुनवाई करते हुए जज ने कहा, "अगर शादी के बाद कोई महिला विवाहेतर संबंध बनाती है तो यह तलाक का आधार बन सकता है। लेकिन आत्म-सुख में लिप्त होना विवाह विच्छेद का कारण नहीं बन सकता है। किसी भी तरह से यह नहीं कहा जा सकता कि यह पति पर क्रूरता है। केवल निजी तौर पर पोर्न देखने में प्रतिवादी (पत्नी) का कृत्य अपीलकर्ता (पति) के प्रति क्रूरता नहीं माना जा सकता है। यह देखने वाले पति या पत्नी के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।'' कोर्ट ने आगे कहा, ''अगर कोई पोर्न देखने वाला दूसरे पति या पत्नी को अपने साथ शामिल होने के लिए मजबूर करता है तो यह निश्चित रूप से क्रूरता माना जाएगा। अगर यह दिखाया जाता है कि इस लत के कारण किसी के वैवाहिक दायित्वों के निर्वहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो यह कार्रवाई योग्य आधार प्रदान कर सकता है।" आपको बता दें कि अदालत करूर जिला के फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाले व्यक्ति (अपीलकर्ता) द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने तलाक की मांग करने वाले उसके आवेदन को खारिज कर दिया था। दोनों की शादी जुलाई 2018 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार एक मंदिर में हुई थी। यह दोनों की दूसरी शादी थी और इस विवाह से कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। वे दिसंबर 2020 में अलग हो गए। पत्नी ने जहां वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए आवेदन दायर किया, वहीं पुरुष ने तलाक मांगा। फरवरी 2024 में फैमिली कोर्ट ने पुरुष की याचिका खारिज कर दी। आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने 2024 में वर्तमान अपील को प्राथमिकता दी थी। पत्नी के खिलाफ क्या-क्या लगाए आरोप पति के मुताबिक, वह एक खर्चीली है। पोर्न देखने की आदी है। अक्सर हस्तमैथुन करती है। घर के काम करने से इनकार करती है। अपने ससुराल वालों के साथ बुरा व्यवहार करती है। फोन पर लंबे समय तक बात करती है। पत्नी ने हालांकि सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि अगर वे सच होते तो वे करीब दो साल से एक साथ नहीं रह रहे होते। जजों ने माना कि पति क्रूरता से संबंधित अन्य आरोपों को साबित करने में सक्षम नहीं है। पत्नी द्वारा उठाया गया दूसरा आधार यह है कि उसकी पत्नी यौन रोग से पीड़ित है। हालांकि उसने कहा था कि वह शारीरिक रूप से पीड़ित है। recent visitors 36