शिक्षा विभाग ने स्कूलों को 31 मार्च तक फीस स्ट्रक्चर और कोर्स की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा, आदेश जारी

भोपाल  निजी स्कूलों ने शुल्क ढांचे (फीस स्ट्रक्चर) में मनमानी की या यूनिफॉर्म, कॉपी-किताब को किसी विशेष दुकान से खरीदने का दबाव बनाया तो उन पर कार्रवाई हो सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। स्कूलों को 31 मार्च तक अपना फीस स्ट्रक्चर और कोर्स की जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया है, ताकि पेरेंट्स को इसकी जानकारी हो जाए। भोपाल के अधिकांश निजी स्कूलों द्वारा किताबों की सूची और फीस की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इसके साथ ही स्कूलों द्वारा निश्चित दुकानों से कॉपी-किताबें व यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बनाया जाने लगा है।  जारी हुआ आदेश  निजी स्कूलों की इस मनमानी पर रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने कॉपी-किताब व ड्रेस खरीदने का दबाव बनाने पर कार्रवाई करने का आदेश जारी किया है।     संयुक्त संचालक अरविंद चौरगड़े की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले निजी स्कूल लेखक एवं प्रकाशक के नाम और मूल्य के साथ कक्षावार पुस्तकों की सूची विद्यालय में प्रदर्शित करें।     ऐसी सूची मांगने पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि विद्यार्थी या अभिभावक इनको खुले बाजार से भी खरीद सकें। प्रत्येक स्कूल प्रबंधक, प्राचार्य स्कूल में हर कक्षा की पाठ्यपुस्तकों और प्रकाशकों की जानकारी को डीईओ की वेबसाइट पर अनिवार्य अपलोड करें।     किसी भी प्रकार की शिक्षण सामग्री पर स्कूल का नाम अंकित नहीं होना चाहिए। स्कूल के सूचना पटल पर यह भी अंकित किया जाए कि अभिभावक किसी दुकान विशेष से खरीदने के लिए बाध्य नहीं हैं। डीईओ पर निगरानी की जिम्मेदारी आदेश में जिला शिक्षा अधिकारी को निगरानी और आदेश लागू करने की जिम्मेदारी दी गई है। कहा गया है कि डीईओ सुनिश्चित करें कि जिले के सीबीएसई, आईसीएसई, एमपी बोर्ड समेत सभी प्री प्राइमरी से लेकर 12वीं तक स्कूल में संचालित की जाने वाली किताबों, कॉपियों व यूनिफॉर्म की सूची 31 मार्च तक विद्यालय के सूचना पटल पर लग जाएं। एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य आदेश में स्कूल शिक्षा विभाग ने पहली से 12वीं तक की कक्षाओं में एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य कर दिया है। कहा गया है कि इस आदेश का कड़ाई से पालन किया जाए, नहीं तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। recent visitors 47

बीजेपी नेता का टूटा पैर तो अस्पताल को बना दिया पार्टी दफ्तर, बेड के पीछे पोस्टर लगाकर हुई मीटिंग

कानपुर पार्टी विद डिफरेंस के नेता गजब की स्टाइल में सियासत करते हैं और जब सत्ता हो तो अस्पताल का वार्ड भी पार्टी का कार्यालय बन जाता है। यह मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से है, जहां कानपुर महानगर उत्तर में जिला अस्पताल के वार्ड में ही कार्यकर्ताओं की बैठक ले ली गई। कानपुर के भाजपा जिला अध्यक्ष कौन हैं? कानपुर भाजपा जिलाध्यक्ष अध्यक्ष अनिल दीक्षित ने अपने टूटे पैर के इलाज के दौरान अस्पताल में कार्यकर्ताओं की बैठक की। बैठक के दौरान अस्पताल के बेड के पीछे पार्टी का बैनर टांगा सामने और अगल-बगल वार्ड के कमरे की बेंच पर बेड पर कार्यकर्ताओं को बैठाया गया। 10 मिनट की इस बैठक में नेताजी बेड पर लेटे लेटे कार्यकर्ताओं में उत्साह भरते रहे। अब इसे आप समर्पण कहें या रुतबा या फिर राजनीतिक तमाशा जहां कैमरा भी बुलाया गया था। अस्पताल में क्यों हुई जिलाध्यक्ष की बैठक? कानपुर के आर्य नगर स्थित मेदांता अस्पताल के वार्ड में हुई इस बैठक में जिला अध्यक्ष अनिल दीक्षित ने सरकार के 8 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रमों की चर्चा की और वहीं कार्यकर्ताओं में जिम्मेदारी भी बांटी। जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने बताया कि पार्टी की तरफ से 14 अप्रैल तक होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की सूची आई थी। यह उसी के संबंध में बैठक बुलाई गई थी।   निजी अस्पताल के वार्ड में ही पार्टी का झंडा बैनर लगाकर हुई इस बैठक में समर्पण की नेताजी को तारिफ भी मिल सकती है। क्योंकि नेताजी को अपनी चोट से ज्यादा खुशी इस बात पर है कि कार्यकर्ताओं का प्रेम इनको पैर में पेन महसूस ही नहीं होने दे रहा है। recent visitors 105

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कर्मचारियों की निलंबन अवधि को माना जाएगा ड्यूटी का हिस्सा, एक अहम फैसला सुनाया

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करने वाला एक अहम फैसला सुनाया है। रायगढ़ वन मंडल में कार्यरत वनपाल दिनेश सिंह राजपूत की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने राज्य शासन के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें उसकी निलंबन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना गया था और शत-प्रतिशत वेतन रिकवरी का निर्देश दिया गया था। न्यायमूर्ति बीडी गुरु ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के फैसलों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया कि निलंबन की अवधि को ड्यूटी के रूप में ही गिना जाएगा। उन्होंने निर्णय में यह भी उल्लेख किया कि इसी तरह की स्थिति वाले अन्य कर्मचारियों की निलंबन अवधि को ड्यूटी के रूप में मान्यता दी गई, लेकिन याचिकाकर्ता के मामले में भेदभाव किया गया। यह है मामला याचिकाकर्ता दिनेश सिंह 2 जनवरी 2015 से 2 जुलाई 2019 तक एतमानगर रेंज के पोंडी सब-रेंज के अंतर्गत कोंकणा बीट के अतिरिक्त प्रभार के साथ बीट गार्ड बरौदखर के पद पर कार्यरत थे। 2 जुलाई 2019 को उन्हें तथ्यों को छिपाने और गुमराह करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। बाद में 8 मई 2020 को मुख्य वन संरक्षक, बिलासपुर वन वृत्त ने उनका निलंबन निरस्त कर दिया। मगर, विभागीय जांच लंबित रहने के दौरान उन्हें कटघोरा रेंज कार्यालय में विशेष ड्यूटी पर नियुक्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता को 312 दिनों यानी 10 माह 7 दिनों तक निलंबित रखा गया। विभागीय जांच में आंशिक दोषी पाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के तहत उनके वेतन से 17,467 रुपये की वसूली और तीन वेतन वृद्धि रोकने का आदेश जारी किया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि अन्य कर्मचारियों पर भी समान आरोप लगे थे। मगर, उनके मामले में निलंबन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा माना गया। हालांकि, याचकिकर्ता की निलंबन की अवधि को ड्यूटी का हिस्सा नहीं माना गया था।   निर्णय और उसका प्रभाव हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने इस मामले में राज्य शासन के आदेश को खारिज करते हुए निलंबन अवधि को ड्यूटी का हिस्सा मानने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि अन्य कर्मचारियों की निलंबन अवधि को ड्यूटी में जोड़ा गया है, तो याचिकाकर्ता के साथ भेदभाव क्यों किया गया। सुप्रीम कोर्ट के समानता के सिद्धांत का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि समान परिस्थितियों में सभी कर्मचारियों को समान अधिकार मिलना चाहिए। सरकारी सेवा में अनुशासन अनिवार्य: बर्खास्तगी सही वहीं, एक अन्य मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने जनजातीय कल्याण विभाग के दैनिक वेतनभोगी चौकीदार की सेवा समाप्ति को सही ठहराते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी सेवा में अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामला दुर्ग जिले के पोस्ट मैट्रिक आदिवासी छात्रावास में कार्यरत कार्य-भारित कर्मचारी (वर्क चार्ज कर्मचारी) दीपक जोशी से जुड़ा है। उसे अनुशासनहीनता और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों के चलते साल 2017 में बर्खास्त कर दिया गया था। याचिकाकर्ता दीपक जोशी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी बर्खास्तगी को चुनौती दी थी। उनका दावा था कि उन्हें विभागीय जांच प्रक्रिया में उचित अवसर नहीं दिया गया। इसके साथ ही उन्हें आरोपों का खंडन करने के लिए जरूरी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद याचिकाकर्ता ने अपनी सफाई नहीं दी। फैसले का क्या होगा असर फैसले से स्पष्ट हो गया है कि सरकारी सेवाओं में अनुशासनहीनता और कर्तव्यहीनता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का पालन करें अन्यथा कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। फैसले ने सरकारी विभागों में अनुशासन और कार्य नैतिकता को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है। recent visitors 31

तलाक के बाद दोबारा प्यार में पड़ने के लिए तैयार नताशा

हार्दिक पांड्या से तलाक के बाद नताशा स्तांकोविक लाइफ में मूव ऑन कर गई हैं। वह सोशल मीडिया पर भी अपनी नई जर्नी की झलक दिखाती रहती हैं। अब तलाक के काफी समय बाद नताशा ने अपनी पर्सनल लाइफ पर बात की और कगहा कि वह दोबारा प्यार में पड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछला साल उनके लिए काफी चैलेंजिंग था। क्या बोलीं नताशा टाइम्स एंटरटेनमेंट से बात करते हुए नताशा ने कहा कि पिछला साल मेरे लिए काफी चैलेंजिंग था, लेकिन वह शुक्रगुजार हैं कि इससे वह और समझदार हुई हैं। अब मैं नए साल को नए एक्सपीरियंस, नए मौके और शायद प्यार के साथ शुरू कर रही हूं। मैं प्यार में पड़ने के खिलाफ नहीं हूं। मैं लाइफ में जो भी मिलता है, उसे स्वीकार करना चाहती हूं। मेरा मानना ​​है कि सही समय आने पर सही कनेक्शन अपने आप बनते हैं। रिलेशनशिप की करती हूं वैल्यू नताशा आगे बोलती हैं, मैं मीनिंगफुल रिलेशनशिप की वैल्यू करती हूं जो विश्वास और समझदारी से बनते हैं। मुझे लगता है प्यार मेरी जर्नी को कॉम्पलीमेंट करता है। नताशा और हार्दिक तलाक के बाद भी साथ में मिलकर बेटे की परवरिश कर रहे हैं। कभी अगस्तय हार्दिक के पास रहता है तो कभी मां नताशा के साथ। recent visitors 46

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने 5258 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया

तिरुपति  तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष बीआर नायडू हैं। उनकी अध्यक्षता में बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट को मंजूरी दी है। यह बजट 5258 करोड़ रुपये का है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट से यह थोड़ा ज्यादा है। पिछले साल का बजट 5179 करोड़ रुपये था। इस बार बजट में 79 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। बजट में मंदिर की आय और व्यय का विवरण दिया गया। हर साल की तरह, तिरुपति ट्रस्ट को सबसे ज्यादा उम्मीद दान से है। मंदिर को उम्मीद है कि इस साल दान से 1729 करोड़ रुपये मिलेंगे। पिछले साल यह आंकड़ा 1671 करोड़ रुपये था। इसका मतलब है कि दान में बढ़ोतरी होने की संभावना है। मिलेगा 1310 करोड़ ब्याज तिरुपति ट्रस्ट को बैंकों में जमा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से भी ब्याज मिलता है। ट्रस्ट के पास लगभग 18000 करोड़ रुपये से ज्यादा की FD है। इस पर उन्हें 1310 करोड़ रुपये का ब्याज मिलने का अनुमान है। प्रसाद से होगी 600 करोड़ कमाई पिछले साल तिरुपति ट्रस्ट ने प्रसाद बेचकर 550 करोड़ रुपये कमाए थे। इस साल ट्रस्ट को उम्मीद है कि वे प्रसाद बेचकर 600 करोड़ रुपये कमाएंगे। प्रसाद की बिक्री से मंदिर को अच्छी आमदनी होती है। 310 करोड़ रुपये टिकट बिक्री से मंदिर को दर्शन टिकटों की बिक्री से भी पैसे मिलते हैं। इस साल अनुमान है कि टिकट बेचकर 310 करोड़ रुपये आएंगे। इसके अलावा, अर्जिता सेवा टिकटों से 130 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। ट्रस्ट के रूम से 157 करोड़ कमाई भक्तों के रहने के लिए कमरे और कल्याण मंडपम भी हैं। इनसे ट्रस्ट को 157 करोड़ रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। कल्याणकट्टा से 176.5 करोड़ रुपये मिलेंगे। ट्रस्ट को अन्य स्रोतों से भी आय होती है, जैसे कि दान से 90 करोड़ रुपये, किराए और बिजली-पानी के बिल से 66 करोड़ रुपये, प्रकाशनों से 31 करोड़ रुपये और अन्य साधनों से 170 करोड़ रुपये मिलेंगे। कर्मचारियों के वेतन पर होगा सबसे ज्यादा खर्च खर्च की बात करें तो, तिरुपति ट्रस्ट इस साल कर्मचारियों के वेतन पर बहुत बड़ी रकम खर्च करेगा। यह राशि 1773.75 करोड़ रुपये है। हर साल की तरह, TTD का वेतन खर्च दान से मिलने वाली राशि से ज्यादा है। इस साल दान से 1729 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है, जबकि वेतन का खर्च 44.75 करोड़ रुपये ज्यादा है। 800 करोड़ का कॉर्पस फंड TTD ने 800 करोड़ रुपये कॉर्पस और अन्य निवेशों के लिए रखे हैं। मंदिर ट्रस्ट सामग्री खरीदने पर 768.5 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इंजीनियरिंग के कामों के लिए 350 करोड़ रुपये और इंजीनियरिंग के रखरखाव के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। तिरुपति ट्रस्ट ने SVIMS (श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) के इंजीनियरिंग के कामों के लिए 60 करोड़ रुपये और SVIMS को अनुदान के रूप में 60 करोड़ रुपये दिए हैं। TTD ने अन्य संस्थानों को अनुदान के रूप में 130 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है। 117.62 करोड़ रुपये लोन देगा TTD हिंदू सनातन धर्म को बढ़ावा देने के लिए भी काम करता है। इसके लिए ट्रस्ट ने HDPP (हिंदू धर्म प्रचार परिषद) और अन्य परियोजनाओं के लिए 121 करोड़ रुपये रखे हैं। TTD लोन और एडवांस के तौर पर 117.62 करोड़ रुपये देगा। अन्य खर्चों में ये शामिल हैं। सुविधा प्रबंधन सेवाओं के लिए 80 करोड़ रुपये, पेंशन और ग्रेच्युटी फंड में योगदान के लिए 100 करोड़ रुपये, राज्य सरकार को योगदान के लिए 50 करोड़ रुपये आदि। recent visitors 47

इजरायली सेना ने गाजा पर पूरी तरह से कब्जा और सैन्य शासन स्थापित करने के लिए बड़े आक्रमण की योजना बनाई

वॉशिंगटन  इजरायल ने गाजा पर पूरी तरह से कब्जा करने का प्लान बनाया है। इजरायल की योजना है कि गाजा पर बड़े पैमाने पर हमला करने के बाद पूरे क्षेत्र को नियंत्रण में ले लिया जाए और सेना की मदद से यहां शासन किया जाए। फाइनेंशियल टाइम्स और हारेत्ज की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की सरकार गाजा पर पूरी तरह से कब्जा करने के बाद बड़ी तादाद में वहां सैनिकों की तैनाती करेगा। ये तैनाती 50 हजार सैनिकों की हो सकती है। वहीं गाजा की स्थानीय आबादी को भी बड़े पैमाने पर स्थानांतरित करने का प्लान है। इससे फिलिस्तीनियों और अरब देशों की मुश्किल बढ़ सकती है। इजरायल ने गाजा में अक्टूबर, 2023 के बाद से लगातार भीषण हमले किए हैं। इससे पहले भी इजरायल ने बार-बार गाजा में हमले किए हैं। हालांकि वह गाजा को पूरी तरह से नियंत्रण में लेने में कामयाब नहीं हो सकती है। अभी तक इजरायली सेना लड़ाई के बाद अस्थायी रूप से पीछे हट गई लेकिन अब उसकी योजना वापसी की नहीं है। वह पूरी तरह से गाजा पर नियंत्रण चाहती है। इजरायल ने बनाया नया प्लान इजरायल की नई योजना में गाजा पर कब्जा करने के लिए 50,000 सैनिकों (5 कॉम्बेट डिविजन) को तैनात करना शामिल है। प्लान में गाजा में सैन्य शासन स्थापित करने और यहां की आबादी को जबरदस्ती अल-मावासी क्षेत्र में स्थानांतरित करना भी शामिल है। अल-मावासी एक छोटा मानवीय क्षेत्र है। यानी एक छोटी जगह में बड़ी तादाद में लोगों को रहने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव इजरायल के सुरक्षा मंत्रिमंडल के सामने है, अभी इसे मंजूर नहीं किया गया है। FT ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि गाजा के लिए यह योजना इजरायली सेना के नए चीफ ऑफ स्टाफ ने बनाई गई है। इस प्लान पर उनको धुर दक्षिणपंथी मंत्रियों का समर्थन भी मिल गया है। इस योजना पर इजरायल बढ़ता है तो गाजा में बड़े पैमाने पर खून खराबा देखने को मिल सकता है और बड़ी मानवीय त्रासदी खड़ी हो सकती है। गाजा में और बिगड़ सकते हैं हालात गाजा के लिए इजरायल और अमेरिका की ओर से हालिया समय में जो प्लान आए हैं, उनमें यहां की स्थानीय आबादी को हटाने की बात कही जा रही है। ऐसे में इसका ना सिर्फ फिलिस्तीनी बल्कि अरब देश भी विरोध कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में कहा था कि गाजा के लोगों को यहां से निकालकर पड़ोस के अरब देशों में भेज दिया जाए। इसका कड़ा विरोध अरब मुल्कों और गाजावासियों ने किया। ऐसे में साफ है कि गाजा के लोगों को हटाना इजरायल के लिए आसान नहीं होगा। recent visitors 49

छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए खुशखबरी, अब छुट्टी के दिन भी सरकारी ऑफिस में जनता का काम होगा

रायपुर  छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए खुशखबरी है। अब छुट्टी के दिन भी सरकारी ऑफिस में जनता का काम होगा। तकनीकी सशक्तिकरण के माध्यम से सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार ने कई फैसले लिए हैं। इसी कड़ी में तय किया गया है कि सभी जिलों में रजिस्ट्री ऑफिस अब अवकाश के दिनों में भी खुले रहेंगे जिससे जनता के काम में किसी तरह की मुश्किलें नहीं हो। वित्त मंत्री का सख्त निर्देश राज्य सरकार के मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश के बाद महानिरीक्षक पंजीयन एवं मुद्रांक पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने सोमवार को सभी जिलों के कलेक्टरों को लेटर लिखा है। लेटर में कहा गया है कि मार्च महीने में अवकाश के दिनों में भी रजिस्ट्री ऑफिस खुले रहेंगे। लेटर में कहा गया है कि मार्च महीने के सार्वजनिक अवकाश के दिनों 25, 29, 30 एवं 31 मार्च को भी सभी रजिस्ट्री कार्यालय खुले रहेंगे जिससे आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो। शाम 7 बजे तक मिलेगा अपॉइंटमेंट इसके अलावा नागरिकों की सुविधा के लिए रजिस्ट्री के लिए अपॉइंटमेंट का समय शाम 5 बजे से बढ़ाकर शाम 7 बजे तक कर दिया गया है। रजिस्ट्री विभाग के सॉफ्टवेयर एनजीडीआरएस में तकनीकी समस्या आने के कारण सर्वर अस्थायी रूप से डाउन हो गया, जिससे कुछ समय के लिए रजिस्ट्री कार्य बाधित हुआ था। सॉफ्टवेयर का संचालन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC), पुणे द्वारा किया जाता है। शाम 6 बजे के बाद शुरू हुआ सर्वर जैसे ही सर्वर डाउन होने की सूचना प्राप्त हुई तुरंत एनआईसी पुणे और एनआईसी रायपुर की तकनीकी टीम से समन्वय स्थापित कर तत्काल सुधार की प्रक्रिया शुरू की गई। शाम 6 बजे तक सर्वर सुचारू रूप से कार्य करने लगा और रजिस्ट्री कार्य शुरू किया गया। आगे ऐसी कोई तकनीकी समस्या उत्पन्न नहीं हो इसके लिए एनआईसी के साथ लगातार तकनीकी समन्वय सुनिश्चित किया जा रहा है। recent visitors 23