Sunday, July 5, 2026 7:25 am

पति ने पत्नी की वर्जिनिटी पर उठा दिया सवाल, हाई कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला

 बिलासपुर  छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महिला को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि किसी भी महिला को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। यह फैसला जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने एक आदमी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। पति ने अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट कराने की मांग की थी। वह साबित करना चाहता था कि उसकी पत्नी का किसी और के साथ अफेयर है। अदालत ने क्या सुनाया फैसला? कोर्ट ने कहा कि वर्जिनिटी टेस्ट की इजाजत देना महिला के मौलिक अधिकारों, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और उसकी निजी गरिमा के खिलाफ होगा। जज अरविंद कुमार वर्मा ने व्यक्ति द्वारा दायर आपराधिक याचिका के जवाब में यह टिप्पणी की। आदमी का कहना था कि वो अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट कराना चाहता था क्योंकि वो यह साबित करना चाहता था कि उसका पत्नी के साथ किसी के साथ अफेयर है। आदमी ने फैमिली कोर्ट के 15 अक्टूबर 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी अर्जी खारिज कर दी गई थी। पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसका पति नपुंसक है और वह उसके साथ रिश्ते बनाने से इनकार करता है। कोर्ट ने आदमी से कहा कि वह अपनी नपुंसकता के आरोप को गलत साबित करने के लिए मेडिकल टेस्ट करा सकता है। पत्नी ने आरोप लगाया था कि उसका पति नपुंसक है और उसने सहवास करने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर याचिकाकर्ता यह साबित करना चाहता है कि नपुंसकता के आरोप निराधार हैं, तो वह संबंधित मेडिकल टेस्ट करा सकता है या कोई अन्य सबूत पेश कर सकता है। उसे पत्नी का कौमार्य परीक्षण कराने की अनुमति नहीं दी जा सकती। हाई कोर्ट द्वारा 9 जनवरी को पारित आदेश को हाल ही में उपलब्ध कराया गया। हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा अपनी पत्नी के कौमार्य परीक्षण की मांग करना असंवैधानिक है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है, जिसमें महिलाओं के सम्मान का अधिकार शामिल है। भारत के संविधान का अनुच्छेद 21 न केवल जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है, बल्कि सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी देता है, जो महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी महिला को अपना कौमार्य परीक्षण कराने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। अनुच्छेद 21 के तहत दिया गया व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार अपरिवर्तनीय है और इसके साथ किसी भी तरह से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। हाई कोर्ट ने कहा, "चाहे जो भी हो, लेकिन किसी भी मामले में प्रतिवादी को कौमार्य परीक्षण की अनुमति देना उसके मौलिक अधिकारों, प्राकृतिक न्याय के प्रमुख सिद्धांतों और एक महिला की शील के विरुद्ध होगा। पीठ ने आगे कहा कि दोनों पक्षों द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ लगाए गए आरोप साक्ष्य का विषय हैं। साक्ष्य के बाद ही कोई निष्कर्ष निकाला जा सकता है। हाई कोर्ट का विचार है कि फैमिली कोर्ट का आदेश न तो अवैध है और न ही विकृत है। इस जोड़े ने 30 अप्रैल 2023 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह किया। महिला कोरबा जिले में पति के पारिवारिक आवास पर साथ रहती थी। याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि पत्नी ने कथित तौर पर अपने परिवार के सदस्यों से कहा कि उसका पति नपुंसक है। उसने अपने पति के साथ सहवास करने से इनकार कर दिया। उसने 2 जुलाई 2024 को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 144 के तहत रायगढ़ जिले के फैमिली कोर्ट में अपने पति से 20000 रुपए के भरण-पोषण की मांग करते हुए एक अंतरिम आवेदन दायर किया। भरण-पोषण दावे के अंतरिम आवेदन के जवाब में याचिकाकर्ता ने अपनी पत्नी का कौमार्य परीक्षण कराने की मांग की। आरोप लगाया कि वह अपने देवर के साथ अवैध संबंध में थी। दावा किया कि उसने कभी अपनी पत्नी से शारीरिक संबंध नहीं बनाए। 15 अक्टूबर 2024 को रायगढ़ की फैमिली कोर्ट ने पति के अनुरोध को खारिज कर दिया। इसके बाद पति ने हाई कोर्ट में आपराधिक याचिका दायर की। मामला फिलहाल फैमिली कोर्ट में साक्ष्य के स्तर पर है। HC- नहीं दी जा सकती वर्जिनिटी टेस्ट की अनुमति     हाई कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता यह साबित करना चाहता है कि नपुंसकता के आरोप निराधार हैं, तो वह संबंधित चिकित्सा टेस्ट करवा सकता है या कोई अन्य सबूत प्रस्तुत कर सकता है।     हाल ही में उपलब्ध कराए गए 9 जनवरी को पारित हाई कोर्ट के आदेश में कहा गया है, "उसे संभवतः पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट करवाने और अपने साक्ष्य में कमी को पूरा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। मामला क्या है? इस कपल की शादी 2023 में हुई थी। पत्नी ने कथित तौर पर अपने परिवार के सदस्यों से कहा कि उसका पति नपुंसक है, और उसने वैवाहिक संबंध स्थापित करने से इनकार कर दिया। उसने अपने पति से ₹20,000 का भरण-पोषण मांगा। याचिकाकर्ता ने जवाब दिया, फिर अपनी पत्नी का वर्जिनिटी टेस्ट कराने की मांग की और आरोप लगाया कि वह अपने देवर के साथ अवैध संबंध में है। recent visitors 27

नवरात्रि पर MP सरकार ने लिया फैसला, मैहर, भोपाल और इंदौर में भी नहीं बिकेगा मांस

भोपाल नवरात्रि के दौरान मध्य प्रदेश के मैहर में मांसाहार खाद्य पदार्थों पर प्रतिबंध लगा दिया है। मैहर में शक्तिपीठ मां शारदा का मंदिर है। ‘मां शारदे चैत्र नवरात्रि मेले’ के दौरान मैहर में हजारों भक्त आते हैं। अधिकारियों की मानें तो इसके अलावा सूबे के भोपाल और इंदौर शहर में मीट की दुकानें चैती चांद (30 मार्च), राम नवमी (6 अप्रैल), महावीर जयंती (10 अप्रैल) और बुद्ध पूर्णिमा (12 मई) के मौकों पर बंद रहेंगी। नगर निगम के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दुकानों ने प्रशासन के आदेश का उल्लंघन किया तो उनके लाइसेंस रद्द भी किए जा सकते हैं। नगर निगम के अधिकारियों ने दी चेतावनी दोनों शहरों में प्रतिबंध को लागू करने के लिए, नगर निगम के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर वे आदेशों का उल्लंघन करते हैं तो दुकानों का लाइसेंस रद भी किया जा सकता है। इससे पहले, लोकसभा में पार्टी के पूर्व सचेतक और मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह सहित कई भाजपा सांसदों ने मांग की थी कि नवरात्रि के दौरान सूबे में मीट की दुकाने बंद रखने का आदेश जारी किया जाए। वहीं राज्य सरकार ने घोषणा की है कि एक अप्रैल से मैहर समेत राज्य के 17 शहरों में शराब की दुकानें हमेशा के लिए बंद कर दी जाएंगी। वहीं एमपी के सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को यहां ‘वीर भारत संग्रहालय’ की नींव रखी। यह संग्रहालय 2028 तक विरासत इमारत कोठी महल में 20 करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि संग्रहालय भारत की महान विभूतियों की वीरता और प्रतिभा को प्रदर्शित करेगा और देश की परंपराओं, दर्शन और मूल्यों को दिखाएगा। वहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य संग्रहालय को राष्ट्र के सभी सकारात्मक पहलुओं का प्रतिनिधित्व करने वाला बनाना है। भोपाल और इंदौर में भी नहीं बिकेगा मांस राजधानी भोपाल और इंदौर में मांस की दुकानों को चैती चांद (30 मार्च), राम नवमी (6 अप्रैल), महावीर जयंती (10 अप्रैल) और बुद्ध पूर्णिमा (12 मई) के त्योहारों पर बंद रहने का आदेश दिया गया है. दोनों शहरों में प्रतिबंध को लागू करने के लिए, नगर निगम के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर वे आदेशों का उल्लंघन करते हैं तो दुकानों का लाइसेंस भी रद्द कर दिया जाएगा. लोकसभा में पार्टी के पूर्व सचेतक और मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह समेत कई बीजेपी विधायकों ने मांग की थी कि नवरात्रि के दौरान राज्य में मांस की दुकानें बंद रखने का आदेश दिया जाए. सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि 1 अप्रैल से मैहर समेत राज्य भर के 17 पवित्र शहरों में शराब की दुकानें हमेशा के लिए बंद कर दी जाएंगी. लोकसभा में पार्टी के पूर्व सचेतक और मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह सहित कई भाजपा विधायकों ने मांग की थी कि राज्य में मीट की दुकानों को नवरात्रि के दौरान बंद रखने का आदेश दिया जाए। सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है कि 1 अप्रैल से मैहर समेत राज्य के 17 पवित्र शहरों में शराब की दुकानें हमेशा के लिए बंद कर दी जाएंगी भोपाल में हर रोज 80 टन मांस की बिक्री होती है उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रतिदिन 80 टन मांस की बिक्री होती है। इसमें 40 टन मटन, 20 टन भैंस का मांस और 20 टन चिकन शामिल होता है। भोपाल शहर में करीब 500 दुकानों पर मांस की बिक्री की जाती है। इनमें 70 से अधिक दुकानें ऐसी हैं जिनके पास कोई लाइसेंस नहीं है। किसी प्रकार का कोई रजिस्ट्रेशन अथवा गुमास्ता भी नहीं है। नगर निगम के स्थानीय अधिकारियों के संरक्षण में इन दुकानों पर मांस का अवैध कारोबार किया जाता है।  recent visitors 29

22 साल का महिला का पहला बेटा, 50 की उम्र मे 14वें बच्चे का जन्म

 हापुड़ उत्तर प्रदेश के हापुड़ से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक 50 साल की मुस्लिम महिला ने 14वें बच्चे को जन्म दिया है. महिला के सबसे बड़े बेटे की उम्र 22 वर्ष है जबकि वहीं सबसे छोटे बच्चे की उम्र 3 साल है. 14वें बच्चे के जन्म की पूरे क्षेत्र में खूब चर्चा हो रही है. महिला के परिजनों ने बताया कि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं. हापुड़ के पिलखुवा कोतवाली इलाके के मोहल्ला बजरंगपुरी के रहने वाले इमामुद्दीन के घर एक बार फिर बच्चे की किलकारी गूंजी है. इमामुद्दीन की पत्नी गुड़िया ने 14वें बच्चे को जन्म दिया है. इमामुद्दीन ने बताया कि गुरुवार को प्रसव पीड़ा के बाद उनकी पत्नी को पिलखुवा के सरकारी सीएचसी अस्पताल ले जाया गया था, जहां से गंभीर हालत को देखते हुए गुड़िया को हापुड के जिला अस्पताल रेफर कर दिया था. गुड़िया को एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले जाया जा रहा था कि इस दौरान उसने अस्पताल के गेट पर ही सरकारी एंबुलेंस में एक लड़की को जन्म दिया है. इसके बाद अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्य कर्मचारियों और डॉक्टरों ने गुड़िया को स्ट्रेचर पर लेटाकर एंबुलेंस से उतारकर भर्ती कराया और उसका इलाज किया. इसके अलगे दिन जच्चा बच्चा दोनों को डॉक्टरों ने डिस्चार्ज कर दिया. जिला अस्पताल की चिकित्सा अधीक्षक डॉ. हेमलता ने बताया, "गर्भवती महिला को लेबर पेन के साथ एंबुलेंस में लाया गया था. बच्चा आधा बाहर आ चुका था. हमने तुरंत अस्पताल में डिलीवरी पूरी की. जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं और उन्हें घर भेज दिया गया है. यह उनकी 14वीं संतान है, जो एक लड़की है." प्रसूता गुड़िया के 22 साल के सबसे बड़े बेटे ने बताया, "अब हम 11 भाई-बहन हैं. तीन बच्चों की पहले मृत्यु हो चुकी है. कुल 14 बच्चे हुए हैं. सबसे छोटे भाई की उम्र 3 साल है."   बेटे ने कहा कि डिलीवरी के दौरान वह अपनी मां के साथ अस्पताल में मौजूद था. गुड़िया के बच्चों की डिलीवरी में एक साल का अंतर भी नहीं है, जो इस मामले को और भी चर्चा का विषय बनाता है. इस घटना की पूरे इलाके में जमकर चर्चा हो रही है. एक तरफ सरकार 'हम दो और हमारे दो' का नारा दे रही हैं. तो वहीं दूसरी ओर इस मामले ने लोगों को हैरानी में डाल दिया है. स्थानीय लोगों में इसे लेकर आश्चर्य और बहस छिड़ गई है. जिला प्रशासन ने अभी इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है. recent visitors 27

Bhopal में काली पट्टी बांधकर Namaz अदा करने पहुंचे नमाजी, वक्फ बोर्ड की जायदाद के लिए दुआ भी

भोपाल देशभर में ईद-उल-फितर का त्योहार आज सोमवार को मनाया जा रहा है। सुबह से ही बड़ी संख्या लोग नमाज पढ़ने ईदगाह और मस्जिदों में पहुंचे। भोपाल की ताज उल मसाजिद, जामा मस्जिद और मोती मस्जिद सहित दूसरी मस्जिदों में भी ईद की नमाज अदा कर देश और मध्य प्रदेश में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी। भोपाल में ईदगाह पर होने वाली मुख्य नमाज सुबह 7:30 बजे अदा की गई। हर साल की तरह इस बार भी नमाज की सूचना तोप से गोले दागकर दी गई। नमाज ए खास से पहले शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने तकरीर में नौजवानों से कहा कि कैरेक्टर और क्वालिटी पैदा करो। नशे से दूरी रखो, हलाल कमाई पर ध्यान दो। हलाल और हराम में फर्क करना सीखो। शहर काजी ने कहा कि अपने रोजमर्रा के खर्चों को कम करो लेकिन बच्चों की अच्छी तालीम पर खास ध्यान दो। इससे पहले रविवार शाम रूअत-ए-हिलाल कमेटी ने चांद नजर आने की पुष्टि कर दी थी। शहर काजी सैय्यद मुश्ताक अली नदवी की अगुवाई में मोती मस्जिद में चांद का दीदार किया गया। प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों से भी इसकी तस्दीक हुई। भोपाल के ईदगाह और अन्य मस्जिदों में नमाज पढ़ने पहुंचे मुस्लिम धर्मावलंबी बांह पर काली पट्टी बांधकर नमाज पढ़ने पहुंचे। वे वक्फ अमेंडमेंट बिल का विरोध कर रहे थे। बता दें कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुस्लिम समुदाय से काली पट्‌टी बांधकर शांतिपूर्ण और मौन विरोध प्रदर्शन की अपील की थी। बोर्ड ने कहा था कि अगर ये बिल पारित हो गया तो मस्जिद, दरगाह, मदरसे, कब्रिस्तान और कई अन्य संस्थान उनके हाथ से चले जाएंगे। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने देशवासियों को ईद की शुभकामनाएं दी है। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, 'देश के समस्त मुस्लिम भाइयों एवं बहनों को ईद-उल-फितर की दिली मुबारकबाद। इस अवसर पर, मैं देश में अमन, शांति, और आपसी भाईचारे की कामना करता हूं। ईद का यह त्योहार हमें प्रेम, सद्भाव, और एकता की भावना को मजबूत करने का संदेश देता है।' भोपाल में ईदगाह पर होने वाली मुख्य नमाज सुबह 7:30 बजे अदा की गई। हर साल की तरह इस बार भी नमाज की सूचना तोप से गोले दागकर दी गई। नमाज-ए-खास से पहले शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने तकरीर में नौजवानों से कहा- कैरेक्टर और क्वालिटी पैदा करो। नशे से दूरी रखो, हलाल कमाई पर ध्यान दो। हलाल और हराम में फर्क करना सीखो। शहर काजी ने कहा- अपने रोजमर्रा के खर्चों को कम करो लेकिन बच्चों की अच्छी तालीम पर खास ध्यान दो। भोपाल में फिलिस्तीन के समर्थन में बैनर भोपाल में ईदगाह के बाहर कुछ युवा फिलिस्तीन के समर्थन में बैनर लेकर खड़े नजर आए। यहां नमाज के बाद फिलिस्तीन के लोगों के लिए दुआ भी पढ़ी गई। मोती मस्जिद में भी दुआ के दौरान मुफ्ती अब्दुल कलाम साहब ने यमन और फिलिस्तीन में मासूमों के कत्ल-ए-आम के खिलाफ दुआ कराई। यहां वक्फ बोर्ड की जायदाद की हिफाजत के लिए भी दुआ पढ़ी गई। रविवार को नजर आया था चांद रविवार शाम को रूअत-ए-हिलाल कमेटी ने चांद दिखने की पुष्टि कर दी थी। इसके बाद, मोती मस्जिद में शहर काजी की अगुवाई में चांद का दीदार किया गया और ईद-उल-फितर मनाने की घोषणा हुई। जिसके बाद आज 31 मार्च को ईद मनाई जा रही है। ईद से पहले बाजारों में भारी भीड़ देखने को मिली। कपड़े, सेवइयां, मेवे और मिठाइयों की दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई। मस्जिदों और घरों में खास पकवान तैयार किए गए। प्रदेशभर में ईद के अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल तैनात किया गया और ड्रोन से निगरानी भी की गई ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से मनाया जा सके। recent visitors 22

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना कार्य का शुभारंभ

रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार बिलासपुर  आगमन के दौरान छत्तीसगढ़  राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीजीसीएल) की 15,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली पहली सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर परियोजना (2X660एमडब्ल्यू) का कार्य का  शुभारंभ  किया।    यह परियोजना छत्तीसगढ़ के ऊर्जा क्षेत्र की बड़ी आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा । यह परियोजना छत्तीसगढ़ को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बढ़ा कदम है । उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के लिए निदेशक मंडल के अनुमोदन के उपरांत 12 फरवरी 2024 को विस्तृत निविदा जारी की गई थी । परियोजना के लिए पर्यावरणीय अनुमति 26 मार्च 2025 को मिली और निदेशक मंडल की अनुमति के पश्चात सार्वजनिक क्षेत्र की ईकाई  भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड को 27 मार्च को इसका कार्यादेश जारी किया गया । छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव सरकार ने 30 मार्च को बिलासपुर में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से इस महत्वपूर्ण परियोजना का कार्य  का  शुभारंभ कराया गया। recent visitors 16

सोमारी पुनेम, दल्लुराम बैगा और जगतपाल राम को प्रधानमंत्री ने अपने हाथों से सौंपी नए आवास की चाबी

रायपुर : 'पक्का मकान बन गया है?' – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सवाल पर मुस्कराए दल्लु राम बैगा, कहा – “हां, बन गया है” 'पक्का मकान बन गया है प्रधानमंत्री जनमन योजना बनी आत्मसम्मान की छत – एक सजीव संवाद की प्रेरक कहानी तीन लाख गरीबों का सपना हुआ पूरा, पहुंचे खुद के पक्के मकानों में सोमारी पुनेम, दल्लुराम बैगा और जगतपाल राम को प्रधानमंत्री ने अपने हाथों से सौंपी नए आवास की चाबी दूरस्थ वनांचलों में भी गरीबों और वंचितों के अब खुद के पक्के घर, सुरक्षा और सम्मान के साथ चिंतामुक्त रह रहे अपने सपने के आशियानों में रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब बिलासपुर जिले के ग्राम मोहभट्ठा में आयोजित आमसभा एवं विकास कार्यों के लोकार्पण-शिलान्यास समारोह के दौरान हितग्राहियों से संवाद किया, तो मंच पर एक विशेष क्षण आया – प्रधानमंत्री और दल्लु राम बैगा के बीच सरल, संक्षिप्त किन्तु सजीव, आत्मीय एवं सारगर्भित संवाद। प्रधानमंत्री ने मुस्कराकर पूछा – “पक्का मकान बन गया है?” दल्लु राम ने हाथ जोड़कर जवाब दिया – “हां, बन गया है।” प्रधानमंत्री मोदी ने फिर स्नेहपूर्वक पूछा – “अच्छा लग रहा है की नहीं?” भावुक दल्लु राम ने जवाब दिया “अच्छा लग रहा है।” प्रधानमंत्री ने अंत में पूछा – “बाकी सब ठीक है?” दल्लु राम ने आत्मविश्वास के साथ कहा – “ठीक है।” यह संवाद कोई औपचारिक प्रश्नोत्तर नहीं था, बल्कि विश्वास, संवेदना और साझेदारी का साक्षात चित्रण था। छत्तीसगढ़ के तीन लाख गरीब परिवारों के लिए आज का दिन बेहद खास और अविस्मरणीय है। आज चैत्र नवरात्रि के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें उनके सपनों के आशियानों में गृहप्रवेश कराया। इनमें बड़ी संख्या में दूरस्थ वनांचलों के गरीब और वंचित परिवार भी शामिल हैं। ये ऐसे परिवार हैं जो प्रधानमंत्री आवास जैसी योजना नहीं होती तो शायद ही कभी अपने खुद के पक्के मकान का सपना पूरा कर पाते। यह योजना प्रदेश के लाखों गरीब परिवारों का बड़ा सपना पूरा कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बिलासपुर के मोहभट्ठा में दूरस्थ अंचलों के तीन आदिवासी परिवारों को खुद अपने हाथों से नए आवासों की चाबी सौंपी। बीजापुर जिले के चेरपाल पंचायत की श्रीमती सोमारी पुनेम, कबीरधाम जिले के ग्राम हाथीडोब के दल्लुराम बैगा और जशपुर जिले के करदना पंचायत के पहाड़ी कोरवा जगतपाल राम को जब प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतीक रूप में मंच से उनके नवनिर्मित पक्के आवासों की चाबी सौंपी तो उनकी खुशियां देखते ही बनती थी। रोटी, कपड़ा और मकान हर इंसान की सबसे बुनियादी जरूरतें हैं। पिछड़े ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में जहां आज भी संसाधनों की भारी कमी है, वहां एक पक्का घर सिर्फ एक दीवार और छत नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास का प्रतीक है। विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के दल्लुराम बैगा कभी कच्ची मिट्टी और खपरैल के घर में भय और असुरक्षा के साये में रहते थे। बरसात में छत से टपकते पानी, कमजोर मिट्टी की दीवारें और रात के सन्नाटे में रेंगते जहरीले जीव-जंतु… ऐसे हालात में पूरे परिवार के साथ रहना रोज का संघर्ष था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत दल्लुराम का आवास स्वीकृत होने के बाद उसके सपनों के घर का सफर शुरू हुआ। आवास निर्माण के लिए दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता के साथ ही 95 दिनों की मनरेगा मजदूरी के रूप में 23 हजार रुपए भी मिले। अन्य योजनाओं से रसोई गैस, शौचालय और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी मिलीं। अब दल्लुराम और उसका परिवार न केवल सुरक्षित मकान में रह रहा है, बल्कि आत्मसम्मान और गर्व के साथ समाज में अपनी पहचान भी बना रहा है। दीवारों की नहीं सपने के पूरे होने की मुस्कान राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले पहाड़ी कोरबा समुदाय के जशपुर जिले के सुदूर अंचल में बसे ग्राम करदना के जगतपाल राम वर्षों से एक टूटी-फूटी झोपड़ी में अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। बरसात के मौसम में छत से पानी टपकता था, चारों ओर कीचड़ और भीतर डर का माहौल बना रहता था। सांप-बिच्छुओं का डर, हर साल झोपड़ी की मरम्मत का बोझ, और बिजली जैसी मूलभूत सुविधा का भी अभाव था। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान के अंतर्गत प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना जगतपाल के लिए उम्मीद की रोशनी लेकर आई। योजना के तहत मिली दो लाख रुपए की सहायता से जगतपाल ने साफ-सुथरा, मजबूत पक्का घर बनवाया जहां न केवल रहने के लिए कमरे हैं, बल्कि शौचालय और बिजली भी है। अब उनका परिवार मूसलाधार बारिश के थपेड़ो, जंगली जानवर और रात के अंधेरे के खतरों से सुरक्षित है। आज जब जगतपाल अपने घर के सामने बैठते हैं, तो उनके चेहरे पर संतोष की मुस्कान होती है। यह मुस्कान सिर्फ दीवारों की नहीं, बल्कि सपने के पूरे होने की मुस्कान है। जगतपाल की ही तरह हजारों गरीब और वंचित आदिवासी परिवारों की भी ऐसी ही कहानी है जिनका जीवन प्रधानमंत्री आवास योजना ने खुशियों से भर दिया है। टूटे सपनों को मिला सहारा और मिट्टी के आंगन में उग आई उम्मीद की छत वर्षों तक संघर्ष करते हुए सोमारी पुनेम ने कभी नहीं सोचा था कि उसके सिर पर एक दिन पक्की छत होगी। पति के निधन के बाद वह अपने बेटे के साथ एक छोटे से टपकते छप्पर के नीचे जीवन की अनगिनत कठिनाइयों के बीच अपना जीवन-यापन कर रही थी। नियद नेल्ला नार योजना शुरू होने के बाद जब उसे प्रधानमंत्री आवास योजना की जानकारी मिली, तो उसकी आंखें चमक उठी। वह बताती है – "मैंने अपने पास जो थोड़ी-बहुत बचत थी, वही लगाई। हर दिन मजदूरों के साथ बैठकर खुद ईंटें उठाई। घर बनता गया… और मेरा आत्मविश्वास भी। आखिरकार महीनों की मेहनत के बाद पक्का आवास बनकर तैयार हो गया। अब बारिश की बूंदें डर नहीं, राहत देती हैं… रातें भी सुकूनभरी लगती हैं। धूप से अब सिर्फ दीवारें नहीं, सम्मान भी बचता है।" बीजापुर के चेरपाल में रहने वाली 60 साल की सोमारी कहती है – "आज जब मैं अपने घर के दरवाजे से अंदर जाती हूं, तो लगता है कि मैं अकेली नहीं हूं। मेरे साथ मेरे स्वर्गीय पति का सपना भी इस घर में सांस ले रहा है।" प्रधानमंत्री आवास योजना ने सोमारी को सिर्फ एक मकान नहीं दिया। यह योजना उसके … Read more

मुख्यमंत्री साय ने श्रद्धा और उल्लास के साथ शामिल होकर समूचे सिंधी समाज को पर्व की शुभकामनाएं दीं

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान झूलेलाल की शोभायात्रा का फूलों से किया भव्य स्वागत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान झूलेलाल की शोभायात्रा का फूलों से किया भव्य स्वागत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान झूलेलाल की शोभायात्रा का फूलों से किया भव्य स्वागत छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जयस्तंभ चौक, रायपुर में भगवान झूलेलाल की जयंती और चेट्रीचण्ड्र (चैतीचांद) पर्व पर आयोजित शोभायात्रा का पुष्पवर्षा कर आत्मीय स्वागत किया। यह शोभायात्रा नगर भ्रमण के बाद जयस्तंभ चौक पहुंची, जहां मुख्यमंत्री साय ने श्रद्धा और उल्लास के साथ शामिल होकर समूचे सिंधी समाज को पर्व की शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने इस पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को भगवान झूलेलाल जयंती, चेट्रीचण्ड्र पर्व, हिंदू नववर्ष एवं नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान झूलेलाल केवल सिंधी समाज के आराध्य नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, साहस और सेवा भाव के प्रतीक हैं। चेट्रीचण्ड्र का यह पर्व नए वर्ष की उम्मीद, विश्वास और विजय की शुरुआत है। मुख्यमंत्री साय ने भगवान झूलेलाल और मां भवानी से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए कहा किnनवरात्रि के साथ प्रारंभ हो रहे इस शुभ समय में हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि समाज और देश के लिए मिलकर काम करें।” मुख्यमंत्री ने सिंधी समाज के संघर्षों, परिश्रम और उपलब्धियों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि देश के विभाजन के बाद जब सिंधी समाज को अपना सबकुछ छोड़कर नए सिरे से जीवन शुरू करना पड़ा, तब भी आपने हार नहीं मानी। आपकी कर्मठता, एकजुटता और आत्मबल ने आपको देश के हर कोने में सम्मानजनक स्थान दिलाया है। मुख्यमंत्री ने भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी जी का विशेष रूप से स्मरण करते हुए कहा कि आडवाणी जी जैसे महान नेता सिंधी समाज की प्रेरणा हैं, जिन्होंने उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री जैसे दायित्वों को निभाकर राष्ट्रनिर्माण में अविस्मरणीय योगदान दिया। उन्होंने आगे कहा कि सिंधी समाज का योगदान व्यापार, संस्कृति, शिक्षा और राष्ट्रसेवा के हर क्षेत्र में अनुकरणीय है। आपकी एकजुटता और पारिवारिक मूल्य आज भी नई पीढ़ी को रास्ता दिखाते हैं। इस अवसर पर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक किरण देव, पुरंदर मिश्रा, सिंधी काउंसिल के अध्यक्ष ललित जयसिंघ, श्रीचंद सुंदरानी, संजय श्रीवास्तव, पार्षद अमर गिदवानी, फिल्म अभिनेत्री श्रीमती भाग्यसहित अनेक गणमान्यजन, जनप्रतिनिधि और समाज के पदाधिकारी उपस्थित थे। recent visitors 20