Sunday, July 5, 2026 1:09 pm

मां गंगा मैया मंदिर में नवरात्रि के पर्व की धूम, निकाली भव्य चुनरी यात्रा

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बालोद बालोद जिले के ग्राम झलमला के विख्यात मां गंगा मैया मंदिर में नवरात्रि के पर्व की धूम देखने को मिल रही है। ऐसे में यहां ग्राम झलमला के निवासियों ने भव्य चुनरी यात्रा निकाली। इस चुनरी यात्रा में डीजे और धूमल की धुनों पर भक्त झूमते हुए नजर आए। पूरे गांव का भ्रमण करने के बाद यहां पर चुनरी मां गंगा मैया को समर्पित की गई। हजारों की संख्या में भक्त मौजूद रहे और इस चुनरी शोभा यात्रा को लेकर भक्तों में उत्साह देखने को मिला। जिला पंचायत सदस्य पूजा साहू ने बताया कि आस्था के इस महापर्व में खुशनसीब हूं कि इस चुनरी यात्रा में शामिल होने का मौका मिला। आयोजक समिति सदस्य आदित्य दुबे ने बताया कि प्रत्येक वर्ष यह आयोजन होता है। पहले युवाओं ने इसकी शुरुआत की थी फिर हर वर्ग का समर्थन मिला और आज पूरा गांव ने मिलकर चुनरी यात्रा निकाली। माता को समर्पित की चुनरी पूरे गांव का भ्रमण करने के बाद यह चुनरी मां गंगा मैया को समर्पित की गई। यात्रा में शामिल हुई जिला पंचायत सदस्य पूजा साहू ने बताया कि इस गौरव शाली क्षण में भक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा है। मां गंगा मैया बालोद जिले की आस्था की देवी हैं। हर व्यक्ति की आस्था माता के साथ जुड़ी हुई है और इस चुनरी यात्रा में आस्था का सैलाब देखने को मिल रहा है। जानिए मां गंगा मैया मंदिर और उसकी कहानी मां गंगा मैया की कहानी अंग्रेज शासनकाल से जुड़ी हुई है। आज से तकरीबन 110 साल पहले जिले की जीवनदायिनी तांदुला नदी की नहर का निर्माण चल रहा था। इस दौरान झलमला गांव की आबादी महज 100 थी। सोमवार के दिन ही यहां बाजार लगता था। जहां दूरस्थ अंचलों से पशुओं के विशाल समूह के साथ सैकड़ों लोग आया करते थे। पशुओं की अधिकता से पानी की कमी महसूस की जाती थी। पानी की कमी को पूरा करने के लिए तालाब बनाने डबरी की खुदाई की गई। जिसे बांधा तालाब नाम दिया गया। मां गंगा मैया के प्रादुर्भाव की कहानी इसी तालाब से शुरू होती है। जिस जगह पर वर्तमान में देवी की प्रतिमा स्थापित है, वहां पहले तालाब था, जहां पानी भरा रहता था। किवंदती अनुसार एक दिन ग्राम सिवनी का एक केवट मछली पकड़ने के लिए बांधा तालाब में गया। तब जाल में मछली की जगह पत्थर की प्रतिमा फंस गई। केवट ने अज्ञानतावश उसे साधारण पत्थर समझ फिर से तालाब में फेंक दिया। मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा गांव के गोंड़ जाति के बैगा को स्वपन में आकर कहा कि मैं जल के अंदर पड़ी हूं। मुझे जल से निकालकर प्राण प्रतिष्ठा कराओ। स्वप्न आने की जानकारी बैगा ने मालगुजार व गांव के अन्य लोगों को जानकारी दी। जाल फेंके जाने पर वही प्रतिमा फंसी। समझा साधारण पत्थर देवी मां की प्रतिमा को लेकर कई किवदंतिया प्रचलित है। केवट के जाल में बार-बार फंसने के बाद मूर्ति को साधारण पत्थर समझकर फेंकने की घटना को वर्तमान में भी यहां के निवासरत लोग अपनी पूर्वजों से मिली जानकारी अनुसार सही मानते हैं। सभी ने मिलकर प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कराई। जल से प्रतिमा निकली, इस वजह से गंगा मैया के नाम से पहचान बनी। recent visitors 23

ये बिल अल्पसंख्यकों में भय पैदा करने के लिए लाया गया : पूर्व सीएम गहलोत

जयपुर वक्फ संशोधन बिल 2024 लोकसभा में 12 घंटे की चर्चा के बाद पास हो गया। 288 सांसदों ने पक्ष में तो 232 ने विपक्ष में वोट डाला। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे पेश किया था। किरेन रिजिजू ने इसे उम्मीद (यूनीफाइड वक्फ मैनेजमेंट इम्पावरमेंट, इफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट) नाम दिया है। इसे लेकर विपक्ष सत्ता पक्ष पर हमलावर है। इसी कड़ी में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई, बेरोजगारी, शेयर बाजार में गिरावट और रुपये के अवमूल्यन जैसे अहम मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए बार-बार अल्पसंख्यक समुदाय को निशाने पर लेने वाले कानून बनाए जा रहे हैं।     ऐसा लगता है कि भारत सरकार महंगाई, बेरोजगारी, शेयर मार्केट में चल रही गिरावट, रुपये के अवमूल्यन जैसे जरूरी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बार-बार अल्पसंख्यक वर्ग को निशाने पर लेने वाले कानून बनाती है। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के दौरान भी ऐसा देखा गया। उन्होंने कहा, "यह कानून 2020 में बना, लेकिन इसके नियम 2024 में बनाए गए। फिर भी, राजनीतिक लाभ लेने के लिए इसे बार-बार उछाला गया और देश में तनाव पैदा किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री ने वक्फ को लेकर बनाए गए नए कानून पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून की कोई आवश्यकता नहीं थी, लेकिन इसे बहुसंख्यक समुदाय का ध्यान जरूरी मुद्दों से हटाने और अल्पसंख्यकों में भय पैदा करने के लिए लाया गया है। साथ ही, उन्होंने कहा कि यह कानून दोनों समुदायों के बीच तनाव पैदा करने का एक माध्यम बन सकता है।   recent visitors 34

राधा मोहन दास अग्रवाल का कांग्रेस पर तीखा हमला, यह एक क्रांतिकारी विधेयक है जो गरीब मुसलमानों की मदद करेगा

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नई दिल्ली लोकसभा में पास होने के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को आज राज्यसभा में पेश किया गया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बिल को सदन के पटल पर रखा। बता दें कि करीब 12 घंटे लंबी बहस और तीखी नोकझोंक के बाद, वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को बुधवार देर रात लोकसभा में पारित कर दिया गया। इस विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े, जबकि विपक्ष में 232 सांसदों ने मतदान किया। यह विधेयक वक्फ संपत्तियों के प्रशासन और प्रबंधन को बेहतर करने के उद्देश्य से लाया गया था, जिसे लेकर सत्तारूढ़ एनडीए और विपक्षी दलों के बीच गहरा मतभेद देखने को मिला। अब सभी की नजरें राज्यसभा पर टिकी हैं।   राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 2013 में वक्फ़ संशोधन विधेयक का समर्थन करने के बाद अपना रुख इसलिए बदल लिया क्योंकि 2024 के चुनाव में उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और वह वक्फ़ कानून के बारे में देश में तमाम तरह की भ्रांतियां फैला रही है। वक्फ़ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर उच्च सदन में हो रही चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि 2013 में जब यह विधेयक संसद में आया तो लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में भाजपा के नेताओं ने उसका समर्थन किया था लेकिन आज इसे ‘दमनकारी कानून’ करार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2024 में जब सत्तारूढ़ भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और वह 240 सीटों पर सिमट गयी तो उसे इस वक्फ़ कानून की याद आयी और वह इसे दमनकारी कानून कहने लगी। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित कई प्रदेशों में तो वक्फ़ बोर्ड गठित ही नहीं किये गये और आज अल्पसंख्यक मंत्री वक्फ़ में पारदर्शिता लाने की बात कर रहे हैं। हुसैन ने सरकार से जानना चाहा कि क्या सरकार ‘प्रैक्टिसिंग मुस्लिम’ की पहचान करने के लिए कोई अलग विभाग खोलेगी और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो लगा कर कोई प्रमाणपत्र देगी ? उन्होंने कहा कि इस विधेयक का असली मकसद यह है कि खुद सरकार की नज़र वक्फ़ की जमीन पर लगी हुई है। राधा मोहन दास अग्रवाल का कांग्रेस पर तीखा हमला भाजपा सांसद राधा मोहन दास अग्रवाल ने राज्यसभा में कहा, "जब सैयद नासिर हुसैन ने बेंगलुरु में राज्यसभा की शपथ ली, तब मैं कर्नाटक में था। उनके समर्थकों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए और विरोध करने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं को जेल में डाल दिया गया।" उन्होंने कहा, "यह एक क्रांतिकारी विधेयक है जो गरीब मुसलमानों की मदद करेगा। हम हिंदू हैं और इतिहास गवाह है कि हमने सती प्रथा और बाल विवाह पर प्रतिबंध लगाकर और विधवा विवाह की अनुमति देकर अपने समाज को बेहतर बनाने की कोशिश की है। लेकिन इस संसद में ऐसे सुधार करने की कोई कोशिश नहीं की गई जिससे गरीब मुसलमानों की मदद हो सके। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पहली बार ऐसा हो रहा है। उनकी सभी कल्याणकारी योजनाएं मुसलमानों तक पहुंची हैं।" हमें दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश की जा रही है- सैयद नसीर कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने राज्यसभा में कहा, 'वे राजनीति कर रहे हैं और देश में दंगे कराना चाहते हैं। वे पोर्टल पर पंजीकरण के लिए कागजात मांगेंगे। अगर उनके पास कागजात नहीं होंगे, तो उनके लोग हंगामा करेंगे।' 'क्या आप हमें दोयम दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश कर रहे हैं? वे 123 संपत्तियों को लेकर भ्रम पैदा कर रहे हैं। वे या तो मस्जिद हैं, कब्रिस्तान हैं या दरगाह हैं। मैं उनकी सूची प्रस्तुत करना चाहता हूं। जब अंग्रेजों ने लुटियंस दिल्ली पर कब्जा किया, तो उन्होंने क्षेत्र के निर्माण के बाद इन संपत्तियों को वक्फ को सौंप दिया था। ये संपत्तियां वक्फ के पास हैं। ये वे संपत्तियां हैं जिनका वे 2013 के संबंध में उल्लेख कर रहे हैं।" राज्यसभा में सैयद नसीर हुसैन बनाम अमित शाह संसद में सैयद नसीर हुसैन ने कहा, “वे कहते हैं कि मौजूदा वक्फ अधिनियम के तहत, अगर लोग न्यायाधिकरण के फैसले से असंतुष्ट हैं तो वे अदालत नहीं जा सकते। यह गलत है। अगर कोई भी अदालत नहीं जा सकता तो उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में इतने सारे लंबित मामले कैसे हैं?” इस पर अमित शाह ने जवाब दिया, “उन्होंने 2013 के अधिनियम में न्यायालय में सिविल मुकदमे के लिए कोई प्रावधान नहीं रखा, जिसका दायरा व्यापक है। उनके पास केवल उच्च न्यायालय में रिट क्षेत्राधिकार का प्रावधान है, जिसका दायरा बहुत सीमित है।” recent visitors 39

बैतूल:भीमपुर में एक साथ तीन बच्चों के जन्म का अनोखा मामला सामने आया, मां और बच्चे पूरी तरह से हैं स्वस्थ

बैतूल  जिले के भीमपुर में एक साथ तीन बच्चों के जन्म का अनोखा मामला सामने आया है. यहां बुधवार को महिला ने 3 बच्चों को जन्म दिया है. सभी बच्चों की नॉर्मल डिलीवरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई है. स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने मां और तीनों बच्चों को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद जिला अस्पताल रेफर कर दिया है, जिससे उन्हों और बेहतर देखभाल मिल सके. जिला चिकित्सालय में मां और उसके दो नवजात बेटी और एक नवजात बेटा पूरी तरह से स्वस्थ हैं. इस तरह के दुर्लभ प्रसव होने की खबर की इलाके में काफी चर्चा है. भीमपुर ब्लॉक के बोरी गांव का मामला दरअसल, यह मामला भीमपुर ब्लॉक के बोरी गांव का बताया जा रहा है. यहां कि रहने वाली सुशीला को प्रसव पीड़ा होने पर भीमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया. जहां उन्होंने एक साथ 3 बच्चों को जन्म दिया है. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सफल प्रसव के बाद मां और तीनों बच्चों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया. एक साथ तीन बच्चों की डिलीवरी से परिवार में खुशियों का माहौल है. डिलीवरी से पहले नहीं कराई थी सोनोग्राफी जानकारी के अनुसार, महिला ने प्रेगनेंसी के दौरान एक भी सोनोग्राफी नहीं कराई थी, जिस कारण परिवार और डॉक्टर पहले से सतर्क नहीं थे. बुधवार को महिला की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में रखा गया था. हालांकि, अब हालत सामान्य बताई जा रही है. तीनों बच्चों का वजन 2 किलोग्राम से ढाई किलोग्राम की बीच है. डॉक्टरों ने इस वजन को नॉर्मल बताया है. एक साथ तीन बच्चों के जन्म को इलाके के लोग चमत्कार भी मान रहे हैं. जिला अस्पताल की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. रूपल श्रीवास्तव ने कहा, " मां और दो लड़की समेत एक लड़का पूरी तरह स्वस्थ हैं. नॉर्मल डिलीवरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई है. तीनों बच्चों का वजन नॉर्मल है." recent visitors 20

होम ग्राउंड पर खेलने के बाद भी उन्हें फायदा नहीं मिल रहा, बीसीसीआई ने दी ये हिदायत

नई दिल्ली इस आपीएल सीजन में अबतक 14 मैच हुए हैं लेकिन कई मौके ऐसे भी आए हैं जब टीमें पिच की शिकायत करती दिखीं। शिकायत ये कि होम ग्राउंड पर खेलने के बाद भी उन्हें फायदा नहीं मिल रहा क्योंकि पिच उनके मनमाफिक क्यूरेट नहीं हुई है। ताजा मामला मंगलवार को हुए लखनऊ बनाम पंजाब मैच का है। हार के बाद लखनऊ के मेंटॉर जहीर खान तो यहां तक बोल गए कि ऐसा लगा जैसे हमारे होम ग्राउंड की पिच को पंजाब के क्यूरेटर ने तैयार किया है। अब इन शिकायतों को लेकर बीसीसीआई ने फ्रैंचाइजियों को ही हिदायत दी है कि वे अपनी जरूरतों को लेकर पिच क्यूरेटर को पहले ही बताएं, सीजन के बीच में नहीं। ऐसा लगता है कि बीसीसीआई आईपीएल मैचों की पिच को लेकर संतुष्ट है और उसे इनसे कोई दिक्कत नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने बीसीसीआई सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि बोर्ड का कहना है कि फ्रैंचाइजी पिच को लेकर अपनी जरूरतों के बारे में क्यूरेटर को अडवांस में बताएं क्योंकि ये एक हफ्ते के भीतर तो हो नहीं जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, बीसीसीआई सूत्र ने कहा, 'पिचें अबतक अच्छी रही हैं। वे ऐसी पिच की मांग कर सकते हैं जो गेंदबाजों को ज्यादा फायदा पहुंचाए लेकिन इसके लिए फ्रैंचाइजी और क्यूरेटर्स के बीच में बेहतर संवाद की जरूरत है। यह आईपीएल सीजन में एक हफ्ते के भीतर नहीं हो सकता।' बीसीसीआई की गाउडलाइंस के मुताबिक, पिच का नेचर क्या हो, इसमें न तो किसी फ्रैंचाइजी की चलेगी और न ही किसी खिलाड़ी की। क्यूरेटर को ऐसी पिच तैयार करनी है जिससे तेज गेंदबाजों को भी मदद मिले और स्पिनर्स को भी यानी इनमें अच्छा संतुलन बना रहे। कुछ टीमें होम पिच को लेकर शिकायत कर रही हैं तो इसके पीछे कहीं न कहीं, पिच क्यूरेटर्स को बीसीसीआई की तरफ से दिए गए ये निर्देश ही हैं। आईपीएल के मौजूदा सीजन के शुरुआती दौर में ही होम ग्राउंड की पिच को लेकर कई फ्रैंचाइजी ने असंतोष जताया है। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, कोलकाता नाइट राइडर्स ने भी मांग की है कि ईडन गार्डन्स की पिच ऐसी हो जो स्पिनर्स को मदद पहुंचाए। दिल्ली कैपिटल्स का मैनेजमेंट भी अपने शुरुआती दो होम मैचों की पिच को लेकर क्यूरेटर से नाखुश है। कुछ ऐसा ही हाल चेन्नई सुपर किंग्स का भी जो होम पिच को लेकर खुश नहीं है। पंजाब के खिलाफ हार के बाद लखनऊ ने मेंटॉर जहीर खान ने तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही पिच को लेकर अपनी नाखुशी का इजहार किया है। उन्होंने कहा कि वह इस बात से निराश हैं कि लखनऊ के क्यूरेटर वास्तव में यह नहीं सोच रहे थे कि यह हमारा होम मैच है। ऐसा लगा जैसे पंजाब के क्यूरेटर ने पिच तैयार की हो। recent visitors 32

पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने देश के पहले हिन्दूग्राम के सपने को साकार करने भूमिपूजन कर आधारशिला रखी

छतरपुर  बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना को लेकर लगातार कार्य कर रहे हैं। हिन्दू राष्ट्र ध्वज घोषित करने के बाद अब हिन्दू ग्राम बनाने की तैयारी शुरू कर दी। बागेश्वर धाम में हिन्दुस्तान का पहला हिन्दू ग्राम दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा। महाराजश्री ने बुधवार को भूमिपूजन करते हुए आधारशिला रखी। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने देश के पहले हिन्दूग्राम के सपने को साकार करने के लिए बागेश्वर धाम में ही वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भूमिपूजन किया। उन्होंने इस अवसर पर कन्यापूजन करते हुए आधारशिला रखी। महाराजश्री ने कहा कि हिन्दू राष्ट्र का सपना हिन्दू घर से ही शुरू होता है। हिन्दू परिवार, हिन्दू समाज और हिन्दू ग्राम बनाने के बाद हिन्दू तहसील, हिन्दू जिला और हिन्दू राज्य बनेगा तब कहीं जाकर हिन्दू राष्ट्र की परिकल्पना पूरी होगी। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर ने हिन्दू ग्राम की आधारशिला रखने के बाद अपने उद्बोधन में बताया कि धाम में ही एक हजार परिवारों का यह ग्राम तैयार कराया जा रहा है। बागेश्वर धाम जनसेवा समिति हिन्दू धर्म एवं सनातन धर्मप्रेमियों को जमीन उपलब्ध कराएगी। इस जमीन में भवन निर्माण होंगे। यहां रहने वालों के लिए कुछ बुनियादी शर्तें भी रखी गई हैं। यह भवन अनुबंध के आधार पर मिलेंगे। पहले ही दिन दो बहनों ने भवन लेने के लिए अपनी स्वीकृति देते हुए कागजी कार्रवाई पूर्ण कराई। इसके अलावा करीब आधा सैकड़ा लोग इस ग्राम में घर बनाने के लिए जुड़े हैं। भूमिपूजन के दौरान समिति के सचिव राजेन्द्र मिश्रा, रामस्वरूप पाठक के अलावा पन्ना मण्डल के अध्यक्ष कुंजबिहारी शर्मा विशेष रूप से भूमिपूजन में शामिल रहे। षडयंत्र से बचाने क्रय-विक्रय का रहेगा प्रतिबंध बागेश्वर धाम में हिन्दू ग्राम में रहने वाले व्यक्ति अनुबंधित रहेंगे। वे जिस मकान में रहेंगे उस मकान की खरीद-फरोख्त का हक उन्हें नहीं मिलेगा। इसके पीछे की वजह यह है कि विधर्मी लोभ-लालच देकर किसी भी स्तर पर जाकर किसी भी कीमत पर मकान खरीदने के प्रयास करते हैं। अक्सर ऐसा देखने में भी आता है कि लालच में आकर लोग धर्मविरोधी ताकतों के सामने खुद को सरेण्डर कर देते हैं। इसलिए बागेश्वर धाम का हिन्दू ग्राम क्रय-विक्रय से प्रतिबंधित रहेगा। recent visitors 31

छत्तीसगढ़ राज्य ने जीएसटी संग्रह में हासिल किया ऐतिहासिक मुकाम, 16,390 करोड़ का किया जीएसटी संग्रह

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम की है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में राज्य ने कुल ₹16,390 करोड़ का जीएसटी राजस्व संग्रह कर देशभर में सबसे अधिक 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को जीएसटी राजस्व वृद्धि के मामले में पूरे देश में पहले स्थान पर स्थापित करती है। इस क्रम में महाराष्ट्र 16% और तमिलनाडु 15% की वृद्धि दर के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। मार्च 2025 में पहली बार ₹2000 करोड़ से अधिक का मासिक संग्रह मार्च 2025 में  छत्तीसगढ़ को SGST मद में ₹1,301.09 करोड़ की प्राप्ति हुई, जो कि मार्च 2024 की तुलना में 72 प्रतिशत अधिक है। यह पहली बार है जब राज्य ने SGST संग्रह में ₹1000 करोड़ का आंकड़ा पार किया है। मार्च 2025 में ही IGST मद में ₹756.73 करोड़ प्राप्त हुए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है। इस प्रकार मार्च 2025 में कुल जीएसटी संग्रह ₹2,057.82 करोड़ रहा, जो मार्च 2024 के ₹1,443.66 करोड़ की तुलना में 43 प्रतिशत की प्रभावशाली मासिक वृद्धि दर्शाता है। जीएसटी आने के बाद छत्तीसगढ़ ने पहली बार एक माह में कुल जीएसटी राजस्व में 2000 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार किया है। बेहतर प्रशासन, तकनीक का समावेश और सतत निगरानी से मिली ऐतिहासिक सफलता यह उल्लेखनीय प्रगति राज्य में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और वित्त मंत्री ओ पी चौधरी के दिशानिर्देश पर वाणिज्यिक कर विभाग में किए गए व्यापक सुधार, नवाचार और नई कार्यसंस्कृति का प्रत्यक्ष परिणाम है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वाणिज्यिक कर मंत्री ओ. पी. चौधरी के मार्गदर्शन में विभाग ने जीएसटी प्रशासन को अधिक सक्रिय, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने हेतु निर्णायक कदम उठाए हैं। नॉन-फाइलर्स पर नियंत्रण रिटर्न दाखिल नहीं करने वाले व्यापारियों की निरंतर निगरानी एवं संवाद के माध्यम से अनुपालना दर में बड़ा सुधार हुआ है। नॉन-फाइलर्स की संख्या 15 प्रतिशत से घटकर मात्र 6 प्रतिशत रह गई है। फर्जी पंजीकरण की जांच 28,000 से अधिक व्यवसायों का भौतिक सत्यापन किया गया, जिनमें से 4, 252 फर्मों, जो कुल फर्मों का लगभग 15% है, को फर्जी पाया गया। इससे कर अपवंचन पर प्रभावी अंकुश लगा और कर अनुपालना में वृद्धि हुई। डेटा एनालिटिक्स आधारित कार्रवाई वर्षभर में डेटा  एनालिटिक्स के आधार पर 313 मामलों में लेखा पुस्तकों की जांच कर ₹45.13 करोड़ की वसूली की गई। वहीं, 77 प्रतिष्ठानों की तलाशी/निरीक्षण से ₹47.35 करोड़ की अतिरिक्त राशि प्राप्त हुई। सेक्टर विश्लेषण और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय जीएसटी विभाग द्वारा सेक्टर आधारित विश्लेषण और इंटर डिपार्टमेंटल डेटा का उपयोग करते हुए 49 संभावित कर अपवंचन क्षेत्रों की पहचान की गई जिससे  ₹101 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया गया। सरकारी विभागों से बेहतर अनुपालन मार्च 2025 में किए गए विशेष प्रयासों के तहत शासकीय विभागों द्वारा जीएसटीआर-7 रिटर्न दाखिल करवाकर इनके सप्लायर्स से ₹37 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व एकत्रित किया गया। व्यापक व्यापारी संपर्क अभियान राज्य भर में ऐसे 36,847 व्यापारियों से संपर्क किया गया, जिन्होंने या तो शून्य रिटर्न दाखिल किया था या व्यवसाय में नकारात्मक वृद्धि दर्शाई थी, जिससे कर अनुपालन में बढ़ोतरी  सुनिश्चित हुई। इन सभी ठोस और तकनीक आधारित उपायों का प्रत्यक्ष परिणाम है कि छत्तीसगढ़ आज देश में जीएसटी वृद्धि में शीर्ष स्थान पर है। भविष्य के लिए डिजिटल और एआई-आधारित रणनीति तैयार मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन और वित्त मंत्री ओ पी चौधरी के मार्गदर्शन में जीएसटी विभाग अब डिजिटल ट्रैकिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी प्रणाली और उन्नत अनुपालन तंत्र को लागू कर, आने वाले वर्षों में भी छत्तीसगढ़ को देश में अग्रणी स्थिति में बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। "छत्तीसगढ़ की यह ऐतिहासिक उपलब्धि केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं, बल्कि ईमानदारी, पारदर्शिता और जनभागीदारी पर आधारित सुशासन की पहचान है। हमारी सरकार ने टैक्स प्रशासन को जनकेंद्रित और टेक्नोलॉजी-संचालित बनाकर यह सिद्ध किया है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो राजस्व भी बढ़ता है और विश्वास भी। हम इसी गति को बनाए रखते हुए छत्तीसगढ़ को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और समावेशी विकास का मॉडल बनाएंगे।" – विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ recent visitors 46