Sunday, July 5, 2026 6:38 am

कलेक्टर की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई समय सीमा बैठक

बड़वानी /कलेक्टर सुश्री गंुचा सनोबर की अध्यक्षता में बुधवार को शाम 4 बजे कलेक्टर कार्यालय बड़वानी के सभागृह में समय सीमा बैठक का आयोजन हुआ। बैठक के दौरान कलेक्टर ने शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रम एवं सेवाओं की समीक्षा कर समय सीमा एवं प्रभावी क्रियान्वयन हेतु संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये। कलेक्टर द्वारा दिये गये निर्देश ऽ    सीएम हेल्प लाईन मंे लंबित शिकायतों के निराकरण के संबंध में समस्त विभाग अधिकारियों को निर्देशित किया कि पूरी जिम्मेदारी से गंभीरतापूर्वक ध्यान देकर शिकायतों को संतुष्टिपूर्वक बंद करवाये। अन्यथा पुरानी शिकायतों को बंद न करवाने वाले अधिकारियों के वेतन कटौती की कार्यवाही की जायेगी। ऽ    जल संरक्षण एवं जल संवर्धन का उद्देश्य लेकर 30 मार्च से 30 जून तक जल गंगा संवर्धन अभियान सम्पूर्ण राज्य सहित जिले में संचालित किया जा रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान से संबंधित विभाग सप्ताहवार कार्ययोजना बनाये। प्रति सप्ताह होने वाली समय सीमा बैठक में इसकी प्रगति की समीक्षा की जायेगी। ऽ    जनसुनवाई में जिले के दूर-दराज क्षेत्रों से आवेदक अपनी समस्याओं एवं शिकायतों को लेकर आते है। इसे औपचारिकता न बनाते हुए विभागीय अधिकारी आवेदनों का शीघ्र निराकरण करे। ऽ    जिले में बढ़ रही गर्मी के मद्देनजर धीरे-धीरे लू का प्रकोप भी बढ़ेगा। अतः लू से बचाव हेतु समय-समय पर एडवाईजरी जारी की जाये। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया कि वे लू से पीड़ित व्यक्तियांे के उपचार हेतु जिले के स्वास्थ्य केन्द्रों पर सभी व्यवस्थाएं पूर्ण रखे। ऽ    क्षेत्र की आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सीएचओ, एएनएम के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लू के प्राथमिक उपचार के संबंध में जानकारी दी जाये। ऽ    जिले में पेयजल की उपलब्धता की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने पीएचई विभाग के अधिकारी को निर्देशित किया कि जिले में पेयजल की उपलब्धता कोई कमी नही होनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाये कि जिले में दूषित पानी पीने से कोई बीमार न हो। बैठक में जिला पंचायत सीईओ सुश्री काजल जावला, अपर कलेक्टर श्री केके मालवीय, संयुक्त कलेक्टर श्री सोहन कनाश सहित विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी एवं वीसी के माध्यम से खण्ड स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे। recent visitors 23

मध्य प्रदेश में अब तक कर्मचारियों को छठे वेतनमान के अनुसार ही भत्तों का भुगतान किया जा रहा था

भोपाल वर्ष 2016 में सातवां वेतनमान लागू करने के नौ वर्ष बाद मध्य प्रदेश के कर्मचारियों को अब परिवहन, गृह भाड़ा (हाउस रेंट अलाउंस/ एचआरए) बढ़ी हुई दर से मिलेगा। राज्य सरकार ने सातवें वेतनमान के अनुरूप भत्तों में वृद्धि की है। बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए भले ही आठवें वेतनमान का गठन करने की घोषणा हो चुकी है लेकिन मध्य प्रदेश में अब तक कर्मचारियों को छठे वेतनमान के अनुसार ही भत्तों का भुगतान किया जा रहा था। recent visitors 21

GT ने 18वें ओवर में ही आरसीबी के 170 रनों के लक्ष्य को हासिल कर लिया, सुदर्शन का जलवा

बेंगलुरु आईपीएल 2025 के 14वें मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 8 विकेट से करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. गुजरात टाइटन्स (GT) की टीम ने 18वें ओवर में ही आरसीबी के 170 रनों के लक्ष्य को हासिल कर लिया. आरसीबी अपने घरेलू मैदान पर इस सीजन का पहला मैच खेल रही थी. जिसमें उसे हार का सामना करना पड़ा.  गुजरात की टीम ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी थी. आरसीबी की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 8 विकेट खोकर 169 रन बनाए थे. 170 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात की टीम ने 17.5 ओवर में ही इसे चेज कर लिया. आरसीबी बिना बदलाव के मैदान पर उतरी थी. जबकि गुजरात में एक बदलाव हुआ है. कगिसो रबाडा बाहर हुए और उनकी जगह अरशद खान को जगह दी गई थी.   ऐसे रही आरसीबी की बल्लेबाजी पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरसीबी की शुरुआत बेहद खराब रही. दूसरे ही ओवर में आरसीबी को विराट कोहली के रूप में पहला झटका लगा.कोहली केवल 7 रन बनाकर अरशद खान का शिकार हुए. इसके बाद तीसरे ही ओवर में देवदत्त पडिक्कल को सिराज ने बोल्ड किया. फिर 5वें ओवर में खतरनाक दिख रहे फिल सॉल्ट को सिराज ने आउट किया. 7वें ओवर में कप्तान रजत पाटीदार को ईशांत ने अपना शिकार बनाया. इसके बाद जितेश शर्मा ने मोर्चा संभाला और 33 रनों की पारी खेली. लेकिन वो भी 13वें ओवर में आउट हो गए. लेकिन इसके बाद लिविंगस्टन ने तूफानी पारी खेली और अर्धशतक जड़ा. वहीं, टिम डेविड ने भी शानदार बल्लेबाजी की. इसके दम पर आरसीबी ने 20 ओवर में 8 विकेट खोकर 170 रन बनाए. ऐसी रही गुजरात की बल्लेबाजी 170 रनों के जवाब में उतरी गुजरात की शुरुआत काफी शानदार रही. गिल और साई सुदर्शन ने ठोस शुरुआत दिलाई. हालांकि, गिल 14 रन बनाकर आउट हो गए. लेकिन इसके बाद साई सुदर्शन और जोश बटलर ने मोर्चा संभाला. साई सुदर्शन 49 रन बनाकर आउट हुए लेकिन उन्होंने मोमेंटम गुजरात की ओर शिफ्ट कर दिया. इसके बाद बटलर ने शानदार फिफ्टी जड़ी. बटलर ने नाबाद 73 रनों की पारी खेली और 18वें ओवर में ही गुजरात ने ये मैच जीत लिया. आईपीएल 2025 के 14वें मैच में गुजरात टाइटन्स की टीम ने  रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) को 8 विकेट से हराया. इस मैच के हीरो साई सुदर्शन और जोश बटलर रहे. जोश बटलर नाबाद रहे और उन्होंने 73 रनों की पारी खेली. लेकिन साई सुदर्शन ने गुजरात का मोमेंट सेट किया और 49 रनों की पारी खेली. लेकिन साई सुदर्शन आईपीएल में लगातार अपना जलवा बिखेर रहे हैं. पिछली 7 पारियों पर डालें नजर साई सुदर्शन की पिछली सात आईपीएल पारियों पर अगर नजर डालेंगे तो उन्होंने इसमें एक शतक जड़ा और 4 फिफ्टी लगाई है. जबकि एक बार वो फिफ्टी से चूके हैं. यानी सिर्फ एक बार ऐसा हुआ है जब साई 10 से कम स्कोर पर आउट हुए हैं. 7 पारियों में साई सुदर्शन ने 444 रन बनाए हैं. यानी साई ने 8.5 करोड़ की कीमत में आईपीएल में वो कमाल किया है, जो मोटी-मोटी रकम में भी बड़े क्रिकेट के सितारे नहीं कर सके हैं. यहां देखें पिछली 7 पारियां 65(39) 84*(49) 6(14) 103(51) 74(41) 63(41) 49(36) इस सीजन  दूसरे नंबर पर साई सुदर्शन इस सीजन आईपीएल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की बात करें तो साई सुदर्शन दूसरे नंबर पर हैं. पहले नंबर पर लखनऊ के निकोलस पूरन हैं. जिन्होंने 3 मैच में अबतक 189 रन बनाए हैं. जिसमें दो फिफ्टी जड़ी है. वहीं साई सुदर्शन ने 3 मैच में 186 रन बनाए हैं. तीसरे नंबर पर जोश बटलर हैं जिन्होंने 166 रन बनाए हैं. recent visitors 43

भोपाल नगर निगम का 2025-26 का बजट आज पेश होगा

भोपाल भोपाल नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2025-26 का बजट गुरुवार को पेश होगा। नगर निगम की परिषद का साधारण सम्मेलन सुबह 11 बजे से कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आइएसबीटी) स्थित परिषद सभागृह में आहूत किया गया है। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी की अध्यक्षता में आहूत सम्मेलन में कार्यसूची में सम्मिलित विषयों पर चर्चा की जाएगी। महापौर मालती राय द्वारा वर्ष 2025-26 के प्रस्तावित बजट और वर्ष 2024-25 का पुनरीक्षित बजट सदन के विचारार्थ और अनुमोदनार्थ प्रस्तुत किया जाएगा। इस बजट बैठक से पहले बुधवार शाम को भाजपा और कांग्रेस पार्षद दल बैठक हुई। दोनों ही राजनीतिक पार्टी के नेताओं ने बजट बैठक को लेकर रणनीति फाइनल की। बैठक में जहां निगमायुक्त हरेंद्र नारायन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव आ सकता है। कांग्रेस टैक्स वृद्धि का करेगी विरोध कांग्रेस पार्षद टैक्स वृद्धि को लेकर महापौर को घेरने की तैयारी कर चुके हैं। जानकारी के अनुसार संपत्तिकर में 10 प्रतिशत और जलकर व सीवेज में 15 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी बजट बैठक में हंगामा का कारण बनेगी। अब देखना यह है कि क्या विपक्ष टैक्स में वृद्धि को रोक पाती है या नहीं। भाजपा और कांग्रेस पार्षद मिलकर निगमायुक्त के अड़ियल रवैया को लेकर खासे नाराज है। लिहाजा उनके खिलाफ भाजपा और कांग्रेस पार्षद निंदा प्रस्ताव लाने की मांग करेंगे।   recent visitors 27

बाग प्रिंट केवल एक हस्तशिल्प नहीं, यह संस्कृति, परंपरा और आत्म-अभिव्यक्ति का संगम है- ताहिर अली

बाग प्रिंट: एक विरासत, एक पहचान मध्यप्रदेश के धार जिले का छोटा सा कस्बा "बाग" केवल भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि एक समृद्ध हस्तकला का केंद्र है। यहां विकसित हुई "बाग प्रिंट" की कला सदियों पुरानी विरासत को जीवित रखते हुए वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है।  यह हस्तशिल्प कला प्राकृतिक रंगों और हाथ से तराशे गए लकड़ी के ब्लॉकों के माध्यम से कपड़ों पर एक अनोखी छाप छोड़ती है। इस कला को पुनर्जीवित करने और इसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मोहम्मद यूसुफ खत्री और उनका परिवार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके अथक प्रयासों ने बाग प्रिंट को भारत और वैश्विक मंच में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। बाग प्रिंट: ऐतिहासिक धरोहर का पुनर्जागरण बाग प्रिंट की परंपरा सदियों पुरानी है और यह मूल रूप से खत्री समुदाय द्वारा संरक्षित और संवर्धित की गई। पहले यह कला केवल स्थानीय जरूरतों तक सीमित थी, लेकिन समय के साथ आधुनिक तकनीकों और मिलावट भरे रंगों के चलते इसकी पारंपरिक पहचान खतरे में पड़ने लगी। बाग प्रिंट को विलुप्त होने से बचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्वर्गीय इस्माईल खत्री की रही। उन्होंने इस कला को पुनर्जीवित करने के लिए परंपरागत तकनीकों में नवाचार किए और प्राकृतिक रंगों के उपयोग को बढ़ावा दिया। बाग प्रिंट के जनक स्वर्गीय इस्माईल खत्री द्वारा स्थापित इस कला की विरासत को आज भी उनके परिवार के सदस्य पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। बाग प्रिंट की इस समृद्ध परंपरा को जीवित रखने में मो. यूसुफ़ खत्री, स्व. मो. अब्दुल क़ादर खत्री, श्रीमती रशीदा बी खत्री, बिलाल खत्री, मो. रफ़ीक खत्री, उमर मो. फारूख खत्री, मो. काज़ीम खत्री, मो. आरिफ खत्री, अब्दुल करीम खत्री, गुलाम मो. खत्री, कासिम खत्री, अहमद खत्री और मोहम्मद अली खत्री जैसे शिल्पकारों का उल्लेखनीय योगदान है।यह परिवार कला, नवाचार और परंपरा के संतुलन को बनाए रखते हुए, बाग प्रिंट को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बाग प्रिंट को जीवंत रखने और वैश्विक पहचान दिलाने में खत्री परिवार दशकों से दे रहा है योगदान बाग प्रिंट को आज के दौर में जीवित रखने और आगे बढ़ाने में खत्री परिवार की कई पीढ़ियों का योगदान रहा है। उनके परिश्रम और समर्पण ने इस कला को एक नए मुकाम तक पहुंचाया है। एक समय था जब बाग प्रिंट की चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी थी। आधुनिकता के प्रभाव में हस्तशिल्प उद्योग सिकुड़ने लगा था, लेकिन स्वर्गीय इस्माईल खत्री ने इसे पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया। उन्होंने पारंपरिक तकनीकों को संरक्षित रखते हुए, नए प्रयोग किए, जिससे बाग प्रिंट को नया जीवन मिला। स्वर्गीय अब्दुल कादर खत्री और मोहम्मद यूसुफ खत्री ने इस यात्रा को आगे बढ़ाया और इस कला को वैश्विक मंचों तक पहुंचाया। उनके प्रयासों से यह प्रिंटिंग तकनीक सिर्फ धार जिले तक सीमित नहीं रही, बल्कि भारत और विदेशों में भी प्रसिद्ध हो गई। कलाकारों का दृष्टिकोण – बाग प्रिंट को संजोने और वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में खत्री परिवार की कई पीढ़ियों का योगदान रहा है। जब इस कला के संरक्षण और भविष्य को लेकर खत्री परिवार के सदस्यों और अन्य कलाकारों से चर्चा की गई, तो उनके विचारों से पता चला कि यह केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन है। मो. यूसुफ़ खत्री का कहना है कि – "हमारे पिता ने हमें सिखाया कि कला केवल जीविका का साधन नहीं, बल्कि आत्मा की अभिव्यक्ति है। स्वर्गीय अब्दुल कादर भाई ने इस सीख को आत्मसात किया और बाग प्रिंट को नई ऊंचाइयों तक ले गए। हमें गर्व है कि हमारी कला आज एक पहचान बन चुकी है। हमारी आने वाली पीढ़ियाँ भी इस कला को जीवित रखने में लगी हुई हैं।" श्री बिलाल खत्री (मो. यूसुफ़ खत्री के बेटे) कहते हैं: "पिता जी का सपना था कि बाग प्रिंट को एक ब्रांड के रूप में पहचाना जाए। आज, जब हम इसे वैश्विक स्तर पर देख रहे हैं, तो हमें गर्व महसूस होता है। लेकिन हमारी जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं होती, हमें इसे और आगे ले जाना है।" श्रीमती रशीदा बी खत्री (स्वर्गीय श्री अब्दुल कादर खत्री की पत्नी) कहती हैं कि: "हम सब इस कला के लिए एकजुट हैं। यह सिर्फ हमारा व्यवसाय नहीं, बल्कि हमारी परंपरा और पहचान है। जब हम किसी कपड़े पर हाथ से छपाई करते हैं, तो उसमें हमारी आत्मा झलकती है।" एक अमूल्य धरोहर की यात्रा बाग प्रिंट केवल एक हस्तशिल्प नहीं, बल्कि यह संस्कृति, परंपरा और आत्म-अभिव्यक्ति का संगम है। यह एक ऐसी कला है, जो समय की कसौटी पर खरी उतरी है और आधुनिकता की चुनौतियों के बावजूद अपनी मौलिकता बनाए रखने में सफल रही है। इस यात्रा को करीब से देखने के बाद, यह स्पष्ट होता है कि बाग प्रिंट को जिंदा रखना केवल एक परिवार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यह एक ऐसी धरोहर है, जिसे अगर समय रहते संरक्षित नहीं किया गया, तो यह केवल संग्रहालयों की वस्तु बनकर रह जाएगी। खत्री परिवार इस कला को जीवित रखने के लिए जिस जुनून और समर्पण के साथ काम कर रहे हैं, वह काबिले-तारीफ है। लेकिन यह भी जरूरी है कि सरकार और समाज मिलकर इस कला को और अधिक समर्थन दें। आर्ट फंडिंग, डिज़ाइन इनोवेशन और डिजिटल मार्केटिंग जैसी नई रणनीतियों को अपनाकर इसे और अधिक व्यापक रूप से प्रचारित किया जा सकता है। बाग प्रिंट को लेकर उनका क्या अनुभव रहा? श्री उमर फ़ारूख़ खत्री इस सवाल के जवाब में कहते हैं, "शुरुआत में लोगों को समझाना बहुत मुश्किल था कि यह केवल एक परंपरागत कला नहीं, बल्कि एक जीवंत धरोहर है। धीरे-धीरे जब हमारे डिज़ाइनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली, तो हमें लगा कि हम सही दिशा में जा रहे हैं। आज, जब विदेशों में लोग हमारे प्रिंट पहने हुए दिखते हैं, तो खुशी का अहसास होता है।" भविष्य की संभावनाएं बाग प्रिंट आज दुनिया के कई देशों में अपनी पहचान बना चुका है। स्पेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली, अमेरिका, कोलंबिया, थाईलैंड, रूस, चीन, अर्जेंटीना और बहरीन में इस कला का प्रदर्शन किया जा चुका है। श्री आरिफ़ खत्री कहते हैं: "हमारी अगली पीढ़ी को बाग प्रिंट को केवल संरक्षित नहीं, बल्कि इसे और अधिक वैश्विक बनाना होगा। नई तकनीकों … Read more

सौगात ए मोदी–सौजन्य सौहार्द सद्भाव का संदेश

 नीरज मनजीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बार ईद के मुबारक मौके पर 32 हजार मस्जिदों में 32 लाख ग़रीब पसमांदा मुस्लिम परिवारों को "सौगात-ए-मोदी" की किट भेजी है। इस किट में खाने-पीने की चीज़ों के अलावा कपड़े, ख़जूर, ड्राई फ्रूट्स, दूध और चीनी रखी गई थी। महिलाओं के लिए सूट का कपड़ा और पुरुषों के लिए कुर्ता-पायजामा रखा गया था। भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीक़ी के मुताबिक़ "रमज़ान का पाक महीना चल रहा था और हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ईद के पवित्र त्यौहार पर "सौगात-ए-मोदी" का मीठा उपहार देकर देश के तमाम मुसलमानों को प्यार का संदेश दिया है कि वे भारत के समूचे 140 करोड़ वासियों के प्रधानमंत्री हैं। जमाल सिद्दीक़ी ने आगे और बताया कि ईद के बाद इस योजना के तहत सिख और ईसाई समुदाय के त्यौहारों के मौके पर भी जरूरतमंद लोगों तक सौगात की ऐसी किट भिजवाई जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम पर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। विपक्ष के बहुत से नेताओं ने इसे नेगेटिव नज़रिए से देखते हुए छलावा बताकर अपने-अपने तरीक़े से मोदी की काफी आलोचना की है। विपक्ष के हिमायती और मोदी के अंध विरोधी इकोसिस्टम के कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया था कि मुसलमानों को यह किट लेनी ही नहीं चाहिए। ये वही लोग हैं, जो कुछ भड़काऊ मजहबी नेताओं के साथ मिलकर मुसलमानों का ब्रेनवॉश करते रहते हैं और उन्हें भारत की मुख्यधारा से दूर रखने की तमाम कोशिशें करते रहते हैं। इन्हें मुसलमानों की दशा सुधारने, उन्हें आगे ले जाने, उन्हें तरक़्क़ी के रास्ते पर डालने में कोई रूचि नहीं है। वे केवल यही चाहते हैं कि मुसलमान हर क़ीमत पर भारतीय जनता पार्टी की ख़िलाफ़त करते रहें और मोदी के विरुद्ध विपक्षी पार्टियों को वोट देते रहें। ये वही इकोसिस्टम है, जिसने सीएए के ख़िलाफ़ मुस्लिम समुदाय को भड़काकर यह असत्य नैरेटिव खड़ा कर दिया था कि इस कानून के लागू हो जाने के बाद मुसलमानों की नागरिकता छीन ली जाएगी। नतीजा यह निकला था कि शाहीन बाग में कई महीनों तक प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली वासियों को सांसत में डालकर रखा था। आज हम अच्छी तरह देख रहे हैं कि सीएए के बाद किसी भी मुसलमान की नागरिकता नहीं छीनी गई है। यही लोग ख़ुद को  मुसलमानों का हितैषी बताकर औरंगज़ेब जैसे क्रूर शख़्स को अकबर से भी बड़ा और महान बादशाह बता देते हैं। तुष्टीकरण की घातक नीति पर चलकर मुस्लिम वोटबैंक का चैंपियन बनने की होड़ इस क़दर जारी है कि विपक्ष के कुछ नेता तो सारी हदें पार करके अपने ही पुरखों और अपने ही सनातन धर्म को गालियाँ देने लगते हैं। ऐसे नेताओं के प्रति मुसलमानों के दिल में कितनी इज़्ज़त होगी, इसका अंदाज़ा आसानी से लगाया जा सकता है। ऐसे नेताओं और दलों को समझना होगा कि आज़ादी के बाद, जब न्याय और समानता की जरूरत थी, तुष्टीकरण की भयावह नीति ने देश और देश के बहुसंख्यक समुदाय का कितना नुक़सान किया है। इस नीति ने मुस्लिम समुदाय का भी भला नहीं किया है। ये वही इकोसिस्टम है जो आज वक़्फ़ संशोधन बिल को लेकर मुस्लिम समुदाय को भड़काकर सड़क पर उतारना चाहता है। असदुद्दीन ओवैसी जैसे कुछ नेता इनके साथ मिलकर यह नैरेटिव सेट कर रहे हैं कि वक़्फ़ बिल के पास होने के बाद मुस्लिम समुदाय से उनकी मस्जिदें, मजारें और कब्रिस्तान छिन जाएँगे। यह नैरेटिव भी पूरी तरह असत्य की बुनियाद पर खड़ा किया गया है। कितनी बड़ी विडंबना है कि ओवैसी और विपक्ष के नेता इस संशोधन बिल को असंवैधानिक बता रहे हैं। जबकि सच तो यह है कि वक़्फ़ बोर्ड को जिस तरह से असीमित अधिकार दे दिए गए हैं, वे ही अपने-आप में संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ है। कोई भी संस्था जिसे सुप्रीम कोर्ट से भी ज़्यादा अधिकार दे दिए गए हों, जो सेक्युलरिज्म की मूल अवधारणा के विरुद्ध असमानता की बुनियाद पर खड़ी हो, उसे संवैधानिक कैसे माना जा सकता है? ओवैसी और विपक्ष के कुछ नेता इस बिल की पेशकदमी को भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन एनडीए में विभाजन का एक अवसर भी मान रहे थे। वे लगातार नीतीश कुमार और चन्द्रबाबू नायडू पर दबाव डाल रहे थे कि वक़्फ़ बिल के ख़िलाफ़ उनकी पार्टियों–जनता दल यूनाइटेड और तेलुगू देशम पार्टी–को भाजपा से समर्थन वापस ले लेना चाहिए। मगर नीतीश और चन्द्रबाबू ने भाजपा और मोदी के साथ पूरी दृढ़ता से खड़े होकर ओवैसी और विपक्ष की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है। सच कहा जाए तो नीतीश और चन्द्रबाबू ने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए विपक्ष के छद्म धर्म निरपेक्षता के तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। इसके अलावा यह भी साफ़ हो गया है कि  प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार अपना पाँच साल का कार्यकाल अवश्यमेव पूरा करेगी। दरअसल वक़्फ़ बिल की ख़िलाफ़त करते हुए कुछ मुस्लिम नेताओं और मौलानाओं ने बड़ा ही आक्रामक रवैया अपनाकर पूरे देश में मुस्लिम समुदाय को सड़कों पर उतारने की पूरी कोशिश की थी। शुक्र है कि मुसलमानों का एक बहुत बड़ा तबका और बहुत से मौलाना इस बिल के पक्ष में खड़े हैं। लगता है कि मुस्लिम समुदाय को धीरे-धीरे समझ में आने लगा है कि कौन उनका वास्तविक हितैषी है और कौन उन्हें सिर्फ़ एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने समन्वय और सौजन्य की नीति पर चलते हुए "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास" के मूलमंत्र को धरातल पर उतारा है। मोदी सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं का फ़ायदा समान रूप से हर समुदाय के हितग्राही तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी सामाजिक समरसता बढ़ाने के उद्देश्य से पसमांदा मुसलमानों के सम्मेलन में शामिल हो चुके हैं। "सौगात-ए-मोदी" इसी दिशा में सद्भाव सौजन्य समन्वय सौहार्द कायम रखने का एक छोटा सा प्रयास है। recent visitors 35

स्कूलों ने अभिभावकों से किताबों व यूनिफार्म के नाम पर मोटी रकम वसूलना शुरू किया, प्राइवेट स्कूलों की मनमानी

नई दिल्ली राजधानी के निजी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही अभिभावकों की जेब पर तगड़ी मार पड़ने लगी है। स्कूलों ने अभिभावकों से किताबों व यूनिफार्म के नाम पर मोटी रकम वसूलना शुरू कर दिया है। शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को किसी खास विक्रेता से किताबें व यूनिफार्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं करने और स्कूल की वेबसाइट पर किताबें खरीदने के लिए स्कूल के नजदीक की कम से कम पांच दुकानों का पता और टेलीफोन नंबर भी प्रदर्शित करने को कहा था। ताकि अभिभावक अपनी सुविधानुसार उन दुकानों से किताबें व यूनिफार्म खरीद सकें। इसके बावजूद निजी स्कूल कैंपस के अंदर ही निजी प्रकाशकों की किताबें, स्टेशनरी और यूनिफार्म मंहगें दामों पर बेच रहे हैं। इतना ही नहीं स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों से मोटी रकम वसूलने के लिए अलग-अलग कक्षा के अनुसार यूनिफार्म भी अलग कर दी है। यूनिफार्म की डिजाइन के बारे में भी बाहर के किसी वेंडर को जानकारी नहीं दी ताकि अभिभावकों को मजबूरन कैंपस के अंदर से ही यूनिफार्म लेनी पड़े। कोई पांच तो कोई आठ हजार में स्कूल के अंदर से बेच रहा किताबें निजी स्कूलों हर बार की तरह इस बार भी शिक्षा निदेशालय के आदेश की अवहेलना करते हुए स्कूल कैंपस के अंदर से बढ़े हुए दामों पर निजी प्रकाशकों की किताबें, कापी और स्टेशनरी का समान दे रहे हैं। प्री-प्राइमरी, केजी में महज तीन किताबें, आर्ट क्राफ्ट का सामान, स्टेशनरी और नोट बुक पांच से छह हजार की पड़ रही है। अशोक विहार स्थित महाराजा अग्रसेन स्कूल में कैंपस के अंदर से प्री-स्कूल की कापी-किताब व स्टेशनरी का सेट 4940 रुपये, पहली कक्षा की किताब, कापी व स्टेशनरी का सेट 6345 रुपये, पांचवीं कक्षा का 8239 रुपये, सातवीं का 8311 रुपये, आठवीं का 8935 रुपये में बेचा जा रहा है। इसमें किताबों पर कवर चढ़ाने के रुपये अलग से लिए जा रहे हैं। वसंत कुंज स्थित मैसोनिक पब्लिक स्कूल में आठवीं की कापी-किताब और स्टेशनरी का सेट 5598 रुपये का पड़ रहा है। करीब हर निजी स्कूल का यही हाल जनकपुरी स्थित सुमेरमल जैन पब्लिक स्कूल में पांचवीं की कॉपी-किताब और स्टेशनरी का सेट 4931 रुपये का बेचा जा रहा है। श्रीजन स्कूल में आठवीं की कापी-किताब व स्टेशनरी का सेट आठ हजार में बेचा जा रहा है। लगभग हर निजी स्कूल का यही हाल है। राजधानी के ये निजी स्कूल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को धता बता एनसीईआरटी की किताबों से ज्यादा निजी प्रकाशकों की किताबों को स्कूल में पढ़वा रहे हैं। स्कूलों में बेचे जा रहे सेट में अधिकतर किताबें निजी प्रकाशकों की ही हैं। इक्का-दुक्का किताब ही एनसीईआरटी की ली गई हैं। उसमें भी कहा गय है कि सेट में लिखी एनसीईआरटी की किताबें अभिभावकों को स्वयं ही बाहर से खरदनी पड़ेगी। कुछ स्कूलों में पूरा सेट लेने पर छूट जैसे आफर देकर अभिभावकों को लुभाने की भी कोशिश हो रही है। एनसीईआरटी की जो किताबें 30 रुपये से लेकर 100 रुपये तक मिलती है, उसी विषय की निजी प्रकाश की किताब की कीमत 300 से 700 रुपये तक में बेची जा रही है। यूनिफॉर्म को बार-बार बदला जाता स्कूलों में सिर्फ लूट का ये काम कापी-किताब और स्टेशनरी तक ही सीमित नहीं रखा है। बहुत से स्कूलों ने अब यूनिफार्म के नाम पर लूटने के अलग-अलग तरीके ढूंढे़ हैं। कुछ स्कूलों ने अलग-अलग कक्षाओं के लिए यूनिफार्म ही अलग कर रखी है ताकि बच्चे को कक्षा बदलते ही यूनिफार्म भी बदलनी पड़े। यूनिफॉर्म के लिए भी निदेशालय ने स्कूलों को आदेश दिया है कि वो पांच वेंडरों की सूची चस्पा करें जहां से अभिभावक यूनिफॉर्म खरीद सकें। लेकिन स्कूलों ने कैंपस के अंदर ही विक्रेता बैठाए हुए हैं और यूनिफॉर्म का डिजाइन भी बदल दिया और बाहर के विक्रेताओं को डिजाइन के बारे में जानकारी ही नहीं दी। मजबूरन अभिभावकों को स्कूल के अंदर बैठे विक्रेता से महंगे दाम पर यूनिफार्म खरीदनी पड़ रही है। recent visitors 35