विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समावेशित शिक्षा का प्रबंध, स्कूल चलें हम अभियान में सीडब्ल्यूएसएन बच्चों का हो रहा है चिन्हांकन

भोपाल प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों 'चिल्ड्रन विद स्पेशल नीड्स' (सीडब्ल्यूएसएन) की समावेशित शिक्षा का क्रियान्वयन राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा जिला शिक्षा केन्द्रों के माध्यम से किया जा रहा है। चिन्हांकित बच्चों की प्रविष्टि केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय के प्रबंध पोर्टल पर की जा रही है। प्रविष्टि के बाद इन बच्चों को उनकी आवश्यकता अनुसार सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। विशेष अभियान के अंतर्गत वर्ष 2022-23 में एक लाख 43 हजार 439, वर्ष 2023-24 में एक लाख 31 हजार 85 सीडब्ल्यूएसएन बच्चों का चिन्हांकन किया गया। वर्ष 2024-25 में चिन्हित बच्चों की प्रविष्टि का कार्य अंतिम चरण में है। ब्रेल लिपि की पाठ्य-पुस्तकों का वितरण प्रदेश में चिन्हित किये गये सीडब्ल्यूएसएन बच्चों को भोपाल की शासकीय ब्रेल प्रेस के माध्यम से ब्रेल लिपि में मुद्रित पाठ्य-पुस्तकें उपलब्ध कराई गई। राज्‍य के 322 विकासखंडों में आईईडी संस्थान तैयार कराये गये हैं। वर्ष 2024-25 में प्रत्येक जिले की एक शाला, जहां सीडब्ल्यूएसएन छात्रावास के दिव्यांग बच्चे अध्ययनरत हैं, वहां संसाधन केन्द्र तैयार कराने की कार्यवाही तेजी से की जा रही है। दिव्यांग बच्चों को आर्थिक सहायता और प्रशिक्षण प्रदेश में दिव्यांग बच्चों को परिवहन भत्ता और स्टायफंड समेत अन्य आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। इन बच्चों की शिक्षण व्यवस्था से लगे स्त्रोत सलाहकारों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा की गई है। इसके साथ ही दिव्यांग बच्चों के अभिभावकों, जिला परियोजना समन्वयकों एवं डाइट के प्राचार्यों का उन्मुखीकरण किये जाने के लिये विशेष प्रशिक्षण भी आयोजित किये गये। दिव्यांग बच्चों के चिकित्सीय मूल्यांकन के बाद उनकी आवश्यकता के उपकरण वितरण की कार्यवाही भी की गई। दिव्यांग बच्चों के समग्र विकास के लिये खेल-कूद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी वर्ष 2024-25 में नवम्बर-दिसम्बर माह में संपन्न कराये गये। सीडब्ल्यूएसएन श्रेणी के बच्चों में ऐसे बच्चे जिन्हें गृह आधारित शिक्षा की आवश्यकता है, उन्हें 3 हजार 500 रूपये प्रति बच्चे के मान से टीएलएम किट प्रदान की गई। वर्ष 2025-26 में सीडब्ल्यूएसएन बच्चों की मदद के लिये निर्देश प्रदेश में नया शैक्षणिक-सत्र एक अप्रैल 2025 से शुरू हो गया है। विशेष आवश्यकता वाले (सीडब्ल्यूएसएन) बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए 'स्कूल चलें हम' अभियान में इन बच्चों को चिन्हित करने के निर्देश मैदानी अमले को दिये गये हैं। सर्वेक्षण के बाद इन बच्चों की शिक्षा एवं उनसे जुड़े संसाधनों को पूरा करने के लिये कार्य-योजना तैयार की जायेगी।   recent visitors 27

छत्तीसगढ़ को मिली बड़ी सौगात: खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा रेल परियोजना से खुलेगा विकास का नया द्वार

रायपुर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने भारतीय रेलवे की चार महत्वपूर्ण मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनकी कुल लागत लगभग 18,658 करोड़ रुपये है। इन परियोजनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ सहित महाराष्ट्र और ओडिशा के कुल 15 ज़िलों को जोड़ते हुए रेलवे नेटवर्क में 1247 किलोमीटर की महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। छत्तीसगढ़ के लिए विशेष रूप से स्वीकृत ‘खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा 5वीं एवं 6वीं लाइन’ परियोजना से राज्य के औद्योगिक नक्शे में ऐतिहासिक परिवर्तन की संभावनाएं बनेंगी। यह परियोजना बलौदा बाजार जैसे क्षेत्रों को सीधी रेलवे कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे सीमेंट संयंत्रों, इस्पात इकाइयों और अन्य औद्योगिक निवेश के लिए आधारभूत संरचना तैयार होगी। यह मार्ग कृषि उत्पादों, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और चूना पत्थर जैसी सामग्रियों के परिवहन में क्रांतिकारी सुधार लाएगा। इससे माल ढुलाई की लागत घटेगी, संचालन की गति बढ़ेगी और उद्योगों को निर्बाध सप्लाई चेन मिलेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को मिली यह ऐतिहासिक रेल परियोजना आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में एक ठोस कदम है। खरसिया-नया रायपुर- परमलकसा लाइन से बलौदा बाजार और आस-पास के क्षेत्रों को  रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है, जिससे यहाँ के युवाओं के लिए रोज़गार और स्वरोज़गार के नए द्वार खुलेंगे। यह परियोजना छत्तीसगढ़ में नया अध्याय लिखेगी, जिससे न केवल कोयला, सीमेंट और लौह अयस्क जैसे क्षेत्रों में उत्पादन और परिवहन को गति मिलेगी, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित होगा। उन्होंने कहा कि हम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आभारी हैं कि उन्होंने छत्तीसगढ़ की आवश्यकता और क्षमता को पहचान कर रेल परियोजनाओं के माध्यम से राज्य को ‘विकास के फास्ट ट्रैक’ पर लाने का काम किया है। उल्लखेनीय है कि खरसिया से परमलकसा तक 5वीं और 6वीं नई रेल लाइन बिछाने के लिए ₹8,741 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति मिल गई है, जिससे छत्तीसगढ़ को लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों के क्षेत्र में बड़ी बढ़त मिलेगी। मुख्य विशेषताएँ कुल लंबाई: 278 किमी लंबा रेलमार्ग, 615 किमी ट्रैक की लंबाई स्टेशनों की संख्या: 21 पुल और फ्लाईओवर: 48 बड़े पुल, 349 छोटे पुल, 14 आरओबी, 184 आरयूबी, 5 रेल फ्लाईओवर ट्रैफिक क्षमता: 21 से 38 मिलियन टन कार्गो, 8 मेल/एक्सप्रेस/सेमी हाई-स्पीड ट्रेनें ईंधन और पर्यावरण संरक्षण: 22 करोड़ लीटर डीजल की बचत प्रतिवर्ष 113 करोड़ किग्रा CO2 की कटौती – यह लगभग 4.5 करोड़ पेड़ों के लगाने के बराबर है। लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी: सड़क परिवहन की तुलना में प्रतिवर्ष ₹2,520 करोड़ की बचत इन ज़िलों को मिलेगा प्रत्यक्ष लाभ:रायगढ़, जांजगीर-चांपा, सक्ती, बिलासपुर, बलौदा बाज़ार, रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव। राज्य की प्रगति का नया युग इस परियोजना से छत्तीसगढ़ में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों में तीव्र गति आएगी। यह पहल पर्यावरणीय स्थिरता और ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर को नया आयाम देगी। recent visitors 29

राज्य आनंद संस्थान द्वारा आनंद की ओर प्रशिक्षण का आयोजन 7 से 9 अप्रैल तक

भोपाल राज्य आनंद संस्थान द्वारा 7 से 9 अप्रैल 2025 तक आरसीपीवी नरोन्हा प्रशासन अकादमी भोपाल में आनंद की ओर सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों के साथ प्रशिक्षण का आयोजन किया जाएगा। प्रशिक्षण में जन अभियान परिषद, शासकीय विभागों के अधिकारी और अशासकीय सदस्य भी शामिल होंगे। मुख्य कार्यपालन अधिकारी राज्य आनंद संस्थान श्री आशीष कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण में प्रदेश के कुल 50 प्रतिभागी शामिल होंगे, जिन्होंने संस्थान की वेबसाइट पर पंजीयन कराया है। उन्होंने कहा कि धन, पद, ऐश्वर्य आदि के पीछे भागकर इसके माध्यम से आनंदित रहने की संभावना कम ही है। मानव में निरंतर आनंद में रहने के लिए भौतिक सुविधा के साथ संबंध एवं समझ का होना आवश्यक है। इन तीनों के होने पर व्यक्ति स्वयं, परिवार, समाज तथा शेष प्रकृति की व्यवस्था के संगत में आनंदित होकर जी सकता है। 'आनंद की ओर' कार्यक्रम में प्रदेश के नागरिकों को इस विषय वस्तु के बारे में जागरूक करने का प्रयास है। संस्थान द्वारा आनंदकों को इससे जोड़ा जा रहा है, जिससे उनका जीवन आनंदमयी हो और दूसरों को आनंदित रहने की दिशा में भी प्रेरित कर सकें।   recent visitors 46

बुद्ध का संदेश : विदेश यात्राओं में पीएम मोदी का बौद्ध धर्म पर जोर, विशेष महत्व देते नजर आते हैं

बैंकॉक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और थाई पीएम पैतोंगतार्न शिनावात्रा ने शुक्रवार को थाईलैंड के प्रसिद्ध ऐतिहासिक बौद्ध मंदिर 'वाट फो' का दौरा किया। थाइलैंड के बाद पीएम मोदी श्रीलंका का दौरा करेंगे जहां वह अनुराधापुरा में महाबोधि मंदिर जाएंगे। अपनी विदेश यात्राओं में खासतौर से पीएम मोदी बौद्ध धर्म को विशेष महत्व देते नजर आते हैं। 2024 में भारत-आसियान शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री मोदी ने लाओस के राष्ट्रपति थोंगलाउन सिसोउलिथ को एक पुरानी पीतल की बुद्ध प्रतिमा भेंट की। उसी वर्ष, भारत ने भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों के कई पवित्र अवशेष थाईलैंड भेजे। भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों, अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महा मोग्गलाना के अवशेषों को एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा बैंकॉक ले जाया गया और थाईलैंड के चार शहरों में 25 दिनों तक प्रदर्शित किया गया। 2023 में, प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में बाल बोधि वृक्ष का दौरा किया, जिससे भारत और जापान के बीच गहरे बौद्ध संबंधों को मजबूती मिली। भारत ने पहले वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन की भी मेजबानी की, जिसमें बौद्ध दर्शन के माध्यम से समकालीन चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए विद्वानों को एक साथ लाया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं वैश्विक मुद्दों का समाधान प्रदान करती हैं। 2022 में, पीएम मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा पर लुम्बिनी, नेपाल का दौरा किया, भारत अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति और विरासत केंद्र की आधारशिला रखी। उसी वर्ष, भारत ने भगवान बुद्ध के चार पवित्र अवशेष, जिन्हें कपिलवस्तु अवशेष के नाम से जाना जाता है, मंगोलिया भेजे। वहां 11 दिनों तक मंगोलियाई बुद्ध पूर्णिमा समारोह के साथ उनका प्रदर्शन किया गया। 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों के साथ उलानबटार में गंडन मठ परिसर में बत्सागान मंदिर गया, जहां बौद्ध कूटनीति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला गया। 2019 में, पीएम मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति महामहिम खल्टमागिन बटुल्गा ने संयुक्त रूप से उलानबटार में ऐतिहासिक गंदन तेगचेनलिंग मठ में स्थापित भगवान बुद्ध और उनके दो शिष्यों की एक प्रतिमा का अनावरण किया। 2018 में, पीएम मोदी ने सिंगापुर में बुद्ध टूथ रेलिक मंदिर का दौरा किया, जिससे सिंगापुर की बौद्ध विरासत के प्रति भारत का सम्मान प्रदर्शित हुआ और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती मिली।2017 में श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी कोलंबो में अंतरराष्ट्रीय वेसाक दिवस समारोह को संबोधित किया और गंगारामया बौद्ध मंदिर का दौरा किया, जिससे भारत-श्रीलंका के सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध और गहरे हुए। 2016 में, वियतनाम की अपनी यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने हनोई में क्वान सु पैगोडा का दौरा किया, बौद्ध भिक्षुओं के साथ बातचीत की और दक्षिण पूर्व एशिया में बौद्ध कूटनीति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के साथ भारत के बौद्ध संबंधों को मजबूत किया। उन्होंने चीन के शीआन में दा शिंगशान मंदिर और बिग वाइल्ड गूज पैगोडा का दौरा किया, जिससे भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक बौद्ध आदान-प्रदान मजबूत हुआ। मंगोलिया में उन्होंने गंडन मठ का दौरा किया, जहां उन्होंने दोनों देशों की साझा आध्यात्मिक विरासत पर जोर दिया। श्रीलंका में उन्होंने अनुराधापुरा में श्री महाबोधि वृक्ष को श्रद्धांजलि अर्पित की, 2014 में, प्रधानमंत्री मोदी ने क्योटो, जापान का दौरा किया, जहाँ उन्होंने तोजी और किन्काकू-जी मंदिरों का भ्रमण किया, जिससे भारत-जापान बौद्ध संबंधों को मजबूती मिली। उन्होंने क्योटो बौद्ध संघ द्वारा आयोजित एक लंच में भी भाग लिया, जो वैश्विक स्तर पर बौद्ध नेताओं के साथ जुड़ने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। घरेलू स्तर पर, पीएम मोदी की सरकार ने बौद्ध विरासत को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनके नेतृत्व में विकसित बौद्ध सर्किट, भगवान बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को दर्शाता है। इन पवित्र स्थानों पर यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए, बौद्ध सर्किट पर्यटक ट्रेन (महापरिनिर्वाण एक्सप्रेस) शुरू की गई, जो भारत और नेपाल के सबसे प्रतिष्ठित बौद्ध स्थलों को कवर करते हुए एक विसर्जित तीर्थयात्रा अनुभव प्रदान करती है। इसके अलावा, कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने तीर्थ स्थलों तक पहुंच में काफी सुधार किया है। नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार ने भारत को बौद्ध शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में फिर से स्थापित किया। सरकार ने बौद्ध साहित्य के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए पाली को एक शास्त्रीय भाषा के रूप में भी मान्यता दी। पीएम मोदी का बौद्ध धर्म पर जोर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नेतृत्व के प्रति भारत के समर्पण को दर्शाता है। बौद्ध विरासत के साथ उनका गहरा जुड़ाव शांति, सद्भाव और साझा सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बौद्ध देशों के साथ संबंधों को गहरा करके और अपनी बौद्ध विरासत को पुनर्जीवित करके, भारत बौद्ध धर्म में बताए गए शांति और ज्ञान को बढ़ावा देने वाले वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करना जारी रखता है। recent visitors 30

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार आयोजन के संबंध में कलेक्टरों को दिए दिशा-निर्देश

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी करते हुए “सुशासन तिहार-2025” के आयोजन के निर्देश दिए है। यह तिहार प्रदेश में सुशासन की सशक्त स्थापना, जनसमस्याओं के त्वरित समाधान, जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा और जन संवाद को सशक्त बनाने के उद्देश्य से तीन चरणों में आयोजित किया जाएगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट किया कि सरकार शासन के प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता, प्रभावशीलता और जन-हितैषी प्रशासन की स्थापना को लेकर कटिबद्ध है। इस तिहार के माध्यम से शासन-प्रशासन सीधे आम जनता से जुड़कर, उनकी समस्याओं को समयबद्ध ढंग से सुलझाने का कार्य करेगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि हमारी सरकार राज्य में सुशासन की स्थापना को लेकर लगातार काम कर रही है। शासन-प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर शासकीय काम-काज में पारदर्शिता आए, शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो, इसका लाभ समाज के उन वर्गों को तत्परता से मिले, जिनके लिए योजनाएं संचालित की जा रही हैं, इसको लेकर शासन-प्रशासन स्तर पर प्रभावी पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री श्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों को पत्र लिखकर सुशासन तिहार-2025 के संचालन के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि “सुशासन तिहार-2025” के आयोजन के उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना तथा विकास कार्यों में गति लाने के साथ ही आम जनता, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से सीधा संवाद स्थापित करना है। सुशासन तिहार-2025 का आयोजन तीन चरणों में मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार-2025 का आयोजन तीन चरणों में होगा। पहले चरण में 08 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक आम जनता से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। दूसरे चरण में लगभग एक माह के भीतर प्राप्त आवेदनों का निराकरण किया जाएगा। तीसरे एवं अंतिम चरण में 05 मई से 31 मई 2025 के बीच समाधान शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इस तिहार को सुव्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं एवं एक पोर्टल बनाया जा रहा है। प्रत्येक जिले की परंपराओं, आवश्यकताओं और परिस्थितियों के अनुसार नवाचार भी किए जा सकते हैं, जिससे यह तिहार अधिक जनोपयोगी और प्रभावशाली बने। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि आम जनता से उनकी समस्याओं के संबंध में 08 अप्रैल से 11 अप्रैल 2025 तक ग्राम पंचायत मुख्यालयों और नगरीय निकाय कार्यालयों में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। इन स्थलों पर समाधान पेटी रखी जाएगी, ताकि लोग अपनी समस्याएं और शिकायतें निःसंकोच लिखकर उसमें डाल सकें। आवेदन प्राप्त करने के लिए समाधान पेटी की व्यवस्था जिला और विकासखण्ड मुख्यालय स्तर पर भी की जाए। आवश्यकतानुसार हाट बाजारों में भी आवेदन संग्रह किये जा सकते हैं। ऑनलाइन आवेदन प्राप्त करने की भी पोर्टल में व्यवस्था रहेगी। कॉमन सर्विस सेंटर का भी ऑनलाइन आवेदन लेने हेतु उपयोग किया जा सकता है। प्रत्येक आवेदन को एक कोड देने की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध रहेगी। निर्धारित प्रारूप में खाली आवेदन पत्र (ग्रामवार/नगरीय निकायवार कोड सहित) प्रिन्ट कराकर ग्रामीणों को उपलब्ध कराये जा सकते हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रत्येक आवेदन को पोर्टल में पंजीकृत कर ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा, साथ ही, आवेदनकर्ता को पावती दी जाएगी। जनता को आवेदन लिखने में सहायता प्रदान करने हेतु कलेक्टर आवश्यकतानुसार अधिकारियों/कर्मचारियों की ड्यूटी लगा सकते हैं। इन तिथियों का विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। आवेदनों का निराकरण मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सभी प्राप्त आवेदनों को स्कैन कर सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा और संबंधित जिला/जनपद/नगरीय निकाय के अधिकारियों को ऑनलाइन व भौतिक रूप से भेजा जाएगा। संबंधित विभाग/अधिकारी लगभग एक माह में इन आवेदनों का निराकरण सुनिश्चित करेंगे। मांग से संबंधित आवेदनों को बजट की उपलब्धता के आधार पर निराकृत किया जाएगा। इन आवेदनों के निराकरण की गुणवत्ता का विश्लेषण जिला और राज्य स्तर पर किया जाए। समाधान शिविर का आयोजन मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि 05 मई से 31 मई 2025 के दौरान प्रत्येक 08 से 15 पंचायतों के मध्य समाधान शिविर आयोजित किए जाएंगे, जिनमें आवेदकों को उनके आवेदनों की स्थिति की जानकारी दी जाएगी। नगरीय निकायों में भी आवश्यकतानुसार समाधान शिविर आयोजित होंगे। शिविरों के आयोजन की तिथि की जानकारी आवेदकों को एस.एम.एस. के माध्यम से तथा आवेदन की पावती के माध्यम से दी जाए, साथ ही इन तिथियों का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जाए। इन शिविरों में प्राप्त आवेदनों की प्रविष्टि भी पोर्टल में की जाए तथा जिन आवेदनों का निराकरण शिविर में सम्भव हो, शिविर में किया जाए, शेष आवेदनों का समाधान एक माह में कर आवेदकों को सूचित किया जाए। शिविरों में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और हितग्राहीमूलक योजनाओं के आवेदन पत्र/प्रपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रत्येक शिविर के लिए एक खंडस्तरीय अधिकारी को प्रभारी बनाया जाए, जो शिविर के समुचित संचालन को सुनिश्चित करेंगे। समाधान शिविरों में विकासखंड एवं अनुभाग स्तर के सभी अधिकारी उपस्थित रहेंगे, जिला स्तर से भी कुछ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। इसी तरह की व्यवस्था नगरीय निकायों के शिविरों में भी की जाए।   recent visitors 32

सभी बिजली कंपनियों में स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने का निर्णय: ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल सभी बिजली कंपनियों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों के लिये स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की जायेगी। यह कार्यवाही समय-सीमा में पूरी करें। ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने यह निर्देश शुक्रवार को मंत्रालय में बिजली कंपनियों के कार्यों की समीक्षा के दौरान दिये। टारगेट ओरिएंटेड करें कार्य ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने कहा कि पूरे वर्ष का टारगेट तय करें और उसी अनुरूप कार्यवाही करें। उन्होंने कहा कि मैं त्रैमासिक समीक्षा करूंगा। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि निर्धारित मापदंड के अनुसार कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जायेगा। साथ ही मापदंड अनुसार काम नहीं करने वाले अधिकारियों को दंडित किया जायेगा। इसी के आधार पर स्थानांतरण और पदोन्नति भी तय की जायेगी। जल्‍द पूरी करें भर्ती प्रक्रिया मंत्री श्री तोमर ने कहा कि जनरेशन कंपनी और ट्रांसमिशन कंपनी का नया ओ.एस. (संगठनात्मक संरचना) स्वीकृत हो चुका है। अत: भर्ती की प्रक्रिया जल्द पूरी करें। उन्होंने बिजली कंपनियों द्वारा गत वित्तीय वर्ष में किये गये उल्लेखनीय कार्यों के लिये बधाई भी दी। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि सभी कंपनियों की भर्ती एवं सेवा की शर्तें एक समान होनी चाहिए। आउटसोर्स कर्मचारियों का भी ईपीएफ जमा होना चाहिए। ऐप के माध्यम से कर्मचारी ईपीएफ की जानकारी ले सकते हैं। पीएम जन-मन और धरती आबा में स्वीकृत कार्य समय-सीमा में पूरा करें मंत्री श्री तोमर ने कहा कि पीएम जन-मन और धरती आबा योजना में स्वीकृत कार्यों को समय-सीमा में पूरा करें। जन-मन योजना में 27 हजार 230 घरों में विद्युत कनेक्शन देने का लक्ष्य है। इसमें 17 हजार 739 घरों में विद्युत कनेक्शन दिये जा चुके हैं। तीनों विद्युत वितरण कंपनियां लॉइन लॉसेस कम करने के लिये सुनियोजित कार्ययोजना बनाएं। खराब ट्रांसफार्मर समय पर बदलें। न्यायालयीन प्रकरणों में सरकारी पक्ष मजबूती से रखें। विद्युत कटौती और मेंटेनेंस की जानकारी सोशल मीडिया में भी दें। उन्होंने आरडीएसएस योजना में स्वीकृत कार्यों की भी समीक्षा कर जरूरी निर्देश दिये। मंत्री श्री तोमर ने कहा कि हम सब अधिकारी-कर्मचारी होने के साथ ही एक नागरिक भी हैं। अत: हमारा सामाजिक दायित्व भी है। इसका निर्वहन निष्ठा के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि गत वर्ष एक लाख पौधे लगाये गये थे, इनकी सुरक्षा की चिंता करें। साथ ही आगामी बरसात में पौध-रोपण की कार्ययोजना भी बना लें। अपर मुख्य सचिव ऊर्जा श्री नीरज मंडलोई ने विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि 15 अप्रैल तक नये वित्तीय वर्ष की कार्ययोजना अनिवार्य रूप से बना लें। बैठक में एमडी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी श्री अविनाश लवानिया, एमडी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी श्री क्षितिज सिंघल, एमडी पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी श्री अनूप सिंह, एमडी जनरेशन कंपनी श्री मंजीत सिंह और एमडी ट्रांस्को श्री सुनील तिवारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।   recent visitors 28

कृषि मंत्री कंषाना ने किसानों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने श्यामला हिल्स स्थित अपने शासकीय निवास बी-3 पर नवरात्रि के सप्तमी पर्व पर पूजा-अर्चना आयोजित की। उन्होंने माँ दुर्गा से प्रदेश के किसानों एवं नागरिकों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। पूजा-अर्चना में मंत्री श्री कंषाना की धर्मपत्नी श्रीमती संजू कंषाना और निवास का स्टॉफ सम्मिलित हुआ। पंडित गोविंद चतुर्वेदी द्वारा हवन कराया गया। recent visitors 37