Sunday, July 5, 2026 9:21 am

जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे तब क्यों चुप थे जब गरीब का हक वक्फ माफिया मार रहे थे: कशि वारसी

मुंबई वक्फ संशोधन बिल को लोकसभा में पेश कर दिया गया है। अब वक्फ बिल पर सियासत तेज हो गई है। कई दलों का विरोध जारी है। वक्फ बिल पर मुस्लिम संगठनों का विरोध भी जारी है। वहीं कुछ ने बिल का समर्थन किया। इस बीच भारतीय सूफी फाउंडेशन पर भी रिएक्शन आ गया है। भारतीय सूफी फाउंडेशन के सदर कशिश वारसी ने कहा कि जो लोग इस बिल की मुखालफत कर रहे हैं, ये तब क्यों चुप थे जब गरीब मुसलमानों का हक वक्फ माफिया मार रहे थे। आज ये हालात क्यों आए? कशिश वारसी ने कहा कि पीएम मोदी ने कहा कि यह बिल कल्याण के लिए है। संसद में कहा गया कि वक्फ के पास करोड़ों की आय और संपत्ति है। उन्होंने सवाल किया कि जब अगर ऐसा होता तो मुसलमान गरीब क्यों रहते? वक्फ बोर्ड और वक्फ माफियाओं ने गरीब मुसलमानों के लिए स्कूल, अस्पताल और घर क्यों नहीं बनाए? वे कह रहे हैं कि वे कोर्ट जाएंगे। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि जब वक्फ माफिया गरीब मुसलमानों के अधिकार छीन रहे थे, तब वे चुप क्यों थे? वारसी ने सवाल किया कि आप कह रहे हैं कि सरकार की मंशा ठीक नहीं है। नीयत खराब है। अगर सरकार की नीयत खराब है तो आप कहते हैं आप हाईकोर्ट जाएंगे। आप हाईकोर्ट जाइए दरवाजा खुला है लेकिन पहले वक्फ बिल को पढ़िए। अगर उसमें कुछ कुछ गलत है तो संसद बहस के लिए खुली है। संसद में सवाल उठा सकते हैं। आप हाईकोर्ट जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। मैं तो कहूंगा इससे पहले आपकी जुबान क्यों बंद थी? जब हक मारा जा रहा था। आपको बता दें कि लोकसभा में पास होने के बाद वक्फ (संशोधन) विधेयक के सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया। उच्च सदन में भी विधेयक पर पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस हुई। सत्ता पक्ष ने वक्फ जमीनों के दुरुपयोग और अवैध कब्जों का मुद्दा उठाते हुए संशोधनों की जमकर पैरवी की। recent visitors 32

राज्यसभा में फिल्म एल2 एमपुरान को लेकर विवाद पर सुरेश गोपी का चढ़ गया पारा, रिजिजू ने बढ़कर किया शांत

नई दिल्ली राज्यसभा में उस वक्त माहौल गरमा गया जब केंद्रीय मंत्री और मशहूर एक्टर सुरेश गोपी ने फिल्म एल2 एमपुरान को लेकर उठे विवाद पर खुलकर जवाब दिया। जैसे ही सीपीआई सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि फिल्म पर 2002 के गुजरात दंगों की झलक दिखाने की वजह से राजनीतिक दबाव डाला गया, सुरेश गोपी भड़क उठे और अपनी कुर्सी से खड़े होकर सफाई पेश की। सुरेश गोपी को तमतमाया देख केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में दखल देकर उन्हें शांत कराया। जॉन ब्रिटास को जवाब देते हुए सुरेश गोपी ने कहा, “ये सिर्फ एक सच्चाई है, जिसे मैं हर भारतीय को बताना चाहता हूं। फिल्म के निर्माताओं पर सेंसर बोर्ड या किसी अन्य संस्था की कोई दबाव नहीं था। सुरेश गोपी ने ये भी खुलासा किया कि फिल्म के थैंक यू कार्ड से उनका नाम हटाने का फैसला खुद उनका था। जॉन ब्रिटास के आरोपों का सुरेश गोपी ने दिया जवाब गोपी उन्होंने कहा, “मैंने खुद फोन करके निर्माताओं से कहा कि मेरा नाम हटा दें। ये मेरा फैसला था और अगर ये झूठ निकले तो मैं हर सजा भुगतने को तैयार हूं।” उन्होंने बताया कि फिल्म से 17 हिस्से हटाने का निर्णय निर्देशक और मुख्य अभिनेता की सहमति से निर्माताओं ने खुद लिया था। इससे पहले भी सुरेश गोपी इस मुद्दे पर मीडिया से मुखातिब हो चुके हैं। इससे पहले उन्होंने तंज कसते हुए कहा था, “तो विवाद है क्या? कौन विवाद खड़ा कर रहा है? ये सब बिजनेस है, लोगों की मानसिकता से खिलवाड़ कर पैसा कमाने का तरीका है।” क्यो मचा है मोहनलाल की फिल्म एल2 एमपुरान पर बलाल दरअसल, मोहनलाल स्टारर फिल्म एल2 एमपुरान में 2002 के गुजरात दंगों को एक काल्पनिक रूप में दिखाया गया है, जिसमें पृथ्वीराज का किरदार जायेद मसीद इन घटनाओं से प्रभावित दिखता है। इस पर सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में आपत्ति जताई गई, जिसके बाद निर्माताओं ने सेंसर बोर्ड से संपर्क कर स्वेच्छा से 24 कट लगाए। इनमें एक किरदार का नाम बदलना, महिलाओं के खिलाफ हिंसा के दृश्य और धार्मिक स्थलों से जुड़े सीन हटाना शामिल है। recent visitors 14

भारत समेत इन देशों में बॉयकॉट USA मुहिम तेज, ट्रंप के लिए जी का जंजाल बना ‘टैरिफ दांव’

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को विभिन्न देशों के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ (जवाबी शुल्क) की घोषणा करते हुए एक चार्ट दिखाया था, जिसमें भारत, चीन, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ जैसे देशों पर लगाई जाने वालीं नई टैक्स दरों का उल्लेख था। इस चार्ट के मुताबिक, भारत पर 26 फीसदी तो चीन पर 34 फीसदी (कुल 54 फीसदी) कर लगाया गया है। यूरोपीय देशों पर भी भारी भरकम टैक्स लगाया गया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि नई दरें तब तक लागू रहेंगी जब तक कि अमेरिका पिछले साल दर्ज किए गए 1.2 ट्रिलियन डॉलर के व्यापार असंतुलन को कम नहीं कर लेता। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप के इस कदम से दुनियाभर में खलबली है। अमेरिकी स्टॉक मार्केट में हाहाकार मचा हुआ है। गुरुवार को ही अमेरिकी बाजार नैस्डैक करीब 6% टूट गया और Dow Jones इंडेक्स में 1600 अंकोंकी गिरावट दर्ज की गई। अमेरिका पर मंदी का खतरा मंडराने की भी आशंका जताई जा रही है। कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि नए टैरिफ का बोझ अमेरिकी कंपनियों पर ही पड़ेगा और अंतत: अमेरिकी उपभोक्ताओं पर ही वे बोझ डाले जाएंगे। दूसरी तरफ कई देश जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे रहे हैं। इस बीच, अब सोशल मीडिया पर अमेरिकी वस्तुओं और खुद संयुक्त राज्य अमेरिका के बहिष्कार का आह्वान किया जाने लगा है। ट्रंप की घोषणा के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर #BoycottUSA ट्रेंड करने लगा है। इतना ही नहीं गूगल सर्च में भी इसे दुनियाभर में सर्च किया जाने लगा है। Google सर्च डेटा के अनुसार, भारत समेत करीब एक दर्जन देशों में लोग BoycottUSA के बारे में सर्च कर रहे हैं। ऐसे देशों में भारत के अलावा कनाडा, यूके, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्विटजरलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। गूगल पर लोग क्या सर्च कर रहे? न्यूजवीक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत से लेकर यूरोप और आस्ट्रेलिया तक लोग गूगल पर "अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार करें (us products to boycott)", "अमेरिकी उत्पादों की सूची का बहिष्कार करें (list of American products to boycott)", "अमेरिकी ब्रांडों का बहिष्कार करें (American brands to boycott)" और "अमेरिकी उत्पादों का बहिष्कार कैसे करें (how to boycott American products)" जैसे सवाल खोज रहे हैं। इतना ही नहीं, कई लोग अपनी वैकेशन ट्रिप कैंसल कर रहे हैं और अमेरिका नहीं जाने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। कनाडाई लेखक जेफरी लुस्कोम्ब ने एक्स पर #BoycottUSA के साथ पोस्ट किया, "हमने पिछले महीने के लिए बुक की गई फ्लोरिडा की होली डे ट्रिप रद्द कर दी है। कनाडा में ही रहने का फैसला किया। सुना है कि कुछ अन्य कनाडाई लोगों ने भी ऐसा ही किया है। इसी तरह एक अन्य यूजर ने एक्स पर लिखा, "मैं अब कभी अमेरिका नहीं जाऊँगा। जहाँ तक संभव होगा, मैं अमेरिकी वस्तुओं और कंपनियों का बहिष्कार करूँगा।" अमेरिका में पर्यटकों की संख्या में गिरावट का अंदेशा रिसर्च फर्म टूरिज्म इकोनॉमिक्स ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि 2025 में अमेरिका की यात्रा में 5.5 फीसदी तक की गिरावट आने का अनुमान है। हालांकि, #BoycottUSA का ट्रेंड पहली बार नहीं चला है। जब डोनाल्ड ट्रम्प मे इस साल जनवरी में शपथ ग्रहण किया था, तभी से #BoycottUSA शब्द ऑनलाइन ट्रेंड करने लगा था। मार्च में, कनाडा, मैक्सिको, भारत और चीन समेत करीब पांच दर्जन देशों पर ट्रंप के टैरिफ दांव के बाद यूरोपीय संघ और कनाडा में इस तरह के हैशटैग और सर्च में तेजी से उछाल आया है। recent visitors 17

राज्यपाल की केंद्रीय सहकारिता और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल से मुलाकात

जयपुर, राज्यपाल  हरिभाऊ बागडे की शुक्रवार को नई  दिल्ली में केंद्रीय सहकारिता और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल से मुलाकात हुई।  इस दौरान दोनों ने विभिन्न विषयो पर चर्चा की। राज्यपाल और केंद्रीय मंत्री श्री मोहोल की यह शिष्टाचार भेंट थी। recent visitors 24

घरेलू विद्युत उपकरण सुधार व चार पहिया वाहन का निःशुल्क प्रशिक्षण के लिए 15 अप्रैल तक करा सकते है पंजीयन

महासमुंद बड़ौदा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान, महासमुन्द द्वारा जिले के 18 से 45 वर्ष के युवाओं के लिए घरेलू विद्युत उपकरण सुधार व चार पहिया वाहन का निःशुल्क प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इच्छुक हितग्राही 15 अप्रैल तक पंजीयन करा कर इस सुनहरे अवसर का लाभ उठा सकते हैं। प्रशिक्षण के लिए आवश्यक दस्तावेजों में बी.पी.एल. राशन कार्ड की दो फोटो कॉपी, आधार कार्ड की दो फोटोकॉपी, पासपोर्ट साइज की 5 फोटो, शैक्षणिक योग्यता की अंकसूची की फोटो कॉपी शामिल है। प्रशिक्षण से संबंधित अधिक जानकारी के लिए प्रतीक साहेब गुप्ता के मोबाइल नंबर +91-93402-81974 पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क कर सकते हैं। recent visitors 37

मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को खनिज राजस्व में ऐतिहासिक सफलता

 वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद के निर्देशन में छत्तीसगढ़  ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व प्राप्ति में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश में संचालित खनन संक्रियाओं से 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त हुआ है, जो विगत वर्ष 2023-24 के 12,795 करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 11% की वृद्धि (1400 करोड़ रुपये अधिक) दर्शाता है। प्रदेश में खनिज राजस्व प्राप्ति में दंतेवाड़ा अव्वल वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्रदेश के खनिज राजस्व संग्रहण में जिला दंतेवाड़ा ने सर्वाधिक 6580 करोड़ रुपये का योगदान देकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा, कोरबा से 2148 करोड़, रायगढ़ से 2027 करोड़, बालोद से 1313 करोड़, सरगुजा से 585 करोड़, बलौदाबाजार से 354 करोड़, कांकेर से 328 करोड़, तथा सूरजपुर से 155 करोड़ रुपये की उल्लेखनीय राजस्व भागीदारी दर्ज की गई है। खनिज संसाधनों में राष्ट्रीय भागीदारी छत्तीसगढ़ खनिज संसाधनों की दृष्टि से देश में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र में मात्र 4% की हिस्सेदारी होते हुए भी छत्तीसगढ़ का  देश के कुल खनिज उत्पादन मूल्य में 16% से अधिक की भागीदारी है। यहां मुख्य रूप से लौह अयस्क, कोयला, चूनापत्थर और बाक्साइट के विशाल भंडार हैं, जो खनिज राजस्व के प्रमुख स्रोत हैं। इसके अलावा, राज्य में सामरिक महत्व के खनिजों सहित कुल 28 प्रकार के खनिज भंडार की पुष्टि हुई है। ई-नीलामी प्रणाली से अतिरिक्त राजस्व वर्ष 2015 से खनिज विभाग द्वारा खनिजों का ई-नीलामी के माध्यम से आबंटन की कार्यवाही की जा रही है, जिससे रॉयल्टी के अलावा प्रीमियम के रूप में अतिरिक्त राजस्व की प्राप्ति हो रही है। खनिज राजस्व में हो रही बढ़ोत्तरी में ई नीलामी के माध्यम से स्वीकृत खदानों का योगदान अब स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है। खनिज विकास मद से अधोसंरचना को बल राज्य शासन द्वारा खनिज राजस्व की कुल प्राप्ति की 5% राशि "खनिज विकास मद" में अंतरित की जाती है। इससे प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में खनिज संसाधनों के विकास और अधोसंरचना निर्माण का कार्य किया जा रहा है। आगामी वर्ष 2025-26 के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में केवल रेल कॉरिडोर निर्माण हेतु प्रावधानित किए गए हैं। समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान प्रदेश की खनन संक्रिया केवल औद्योगिक संस्थानों को कच्चा माल प्रदान करने तक सीमित नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सामाजिक और आर्थिक विकास का मजबूत स्तंभ बन चुकी है। "छत्तीसगढ़ की धरती केवल खनिज संपदा से नहीं, विकास की असीम संभावनाओं और जनकल्याण के संकल्प से भी समृद्ध है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,195 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड खनिज राजस्व प्राप्त कर प्रदेश ने एक नई ऊँचाई को स्पर्श किया है। यह उपलब्धि हमारी दूरदर्शी नीतियों, पारदर्शी प्रशासन, और ईमानदार कार्यसंस्कृति का प्रतिफल है। ई-नीलामी प्रणाली, तकनीकी नवाचार और सुशासन के माध्यम से हम खनिज क्षेत्र को केवल राजस्व संग्रहण का माध्यम नहीं, बल्कि दूरस्थ अंचलों के लिए विकास के इंजन के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं।" recent visitors 33

सरकार द्वारा दी गई जानकारी, भारतीय रेलवे के ट्रैक नेटवर्क के विस्तार के लिए चार परियोजनाओं को दी मंजूरी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने भारतीय रेलवे के ट्रैक नेटवर्क के विस्तार के लिए 18,658 करोड़ रुपये के निवेश से चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है। शुक्रवार को सरकार द्वारा यह जानकारी दी गई। तीन राज्यों (महाराष्ट्र, ओडिशा और छत्तीसगढ़) के 15 जिलों को कवर करने वाली चार परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 1,247 किलोमीटर की वृद्धि होगी। इन परियोजनाओं में संबलपुर-जरापड़ा तीसरी और चौथी लाइन, झारसुगुड़ा-सासोन तीसरी और चौथी लाइन, खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा पांचवीं और छठी लाइन और गोंदिया-बल्हारशाह रेलवे लाइन का दोहरीकरण शामिल हैं। आधिकारिक बयान में कहा गया कि बढ़ी हुई लाइन क्षमता से मोबिलिटी में सुधार होगा, जिससे भारतीय रेलवे की दक्षता बढ़ेगी। ये मल्टी-ट्रैकिंग प्रस्ताव परिचालन को आसान बनाएंगे और भीड़भाड़ को कम करेंगे, जिससे भारतीय रेलवे के सबसे व्यस्ततम खंडों पर इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास होगा। ये परियोजनाएं पीएम मोदी के नए भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो क्षेत्र के लोगों को "आत्मनिर्भर" बनाएंगी, जिससे उनके लिए रोजगार/अवसरों में वृद्धि होगी। ये परियोजनाएं मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान का हिस्सा हैं, जिसमें एकीकृत योजना की आवश्यकता होती है और ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी। इन परियोजनाओं के साथ, 19 नए स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा, जिससे दो आकांक्षी जिलों (गढ़चिरौली और राजनांदगांव) की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना से लगभग 3,350 गांवों और लगभग 47.25 लाख आबादी की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। खरसिया-नया रायपुर-परमलकासा लाइन बलौदा बाजार जैसे नए क्षेत्रों को सीधी कनेक्टिविटी प्रदान करेगी और इससे क्षेत्र में सीमेंट संयंत्रों सहित नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की संभावनाएं पैदा होंगी। सरकार ने बयान में आगे कहा कि ये लाइनें कृषि उत्पादों, उर्वरक, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और चूना पत्थर जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक मार्ग हैं। नए ट्रैक बनने से 88.77 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी। recent visitors 25