Sunday, July 5, 2026 4:28 am

119 साल पुरानी ग्वालियर की धरोहर नैरोगेज ट्रेन की अब यादों में ही रह गई

ग्वालियर  119 साल पुरानी ग्वालियर की धरोहर (119 year old Gwalior heritage) नैरोगेज ट्रेन (Narrow Gauge) की अब यादों में ही रह गई है। शहर के लिए हेरिटेज ट्रेन चलाने का सपना अब सपना बनकर रह जाएगा, लेकिन रेलवे अपने नैरोगेज सेक्शन में रखे इंजनों का मेंटेनेंस हर दिन करके इन्हें आज भी जिंदा रखे हुए है। इन इंजनों के लिए तैनात कर्मचारी हर दिन इनको स्टार्ट करके इनकी देखरेख कर रहे हैं। रेलवे बोर्ड के आदेशानुसार चालू हालत में इंजनों की देखरेख करते रहना है। इसको देखते हुए यहां पर पांच कर्मचारियों की ड्यूटी इन इंजनों के मेंटेनेंस के लिए ही लगाई गई है। नैरोगेज सेक्शन में तो अब ब्रॉडगेज का काम तेजी से चल रहा है। जिससे अगले वर्ष तक श्योपुर तक तेज स्पीड से ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी। वहीं नैरोगेज का नामोनिशान धीरे- धीरे बंद हो जाएगा। पांच इंजन भेजे जाना है दूसरे शहर जब नैरोगेज ट्रेन बंद हुई तो यहां के इंजनों को दूसरे जोन में रेलवे द्वारा भेजने का काम शुरू किया गया। इसमें अभी भी पांच इंजनों को भेजने के लिए आदेश एक साल पहले हो चुके हैं। इसमें झांसी के लिए दो, बेंगलुरु, रेवाडी़ और भुवनेश्वर को एक- एक इंजन भेजा जाना है। यह सभी इंजन इन शहरों की शान बढ़ाएगे। 13 में से 8 इंजन बचे हैं कोरोना काल से ही नैरोगेज ट्रेन बंद हो गई है। उस समय नैरोगेज सेक्शन में 13 नए व पुराने इंजन थे। इसमें से 4 इंजन पहले ही बाहर भेजे जा चुके है। जिसमे दो इंजन मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली, एक इंजन जबलपुर मंडल और एक चितरंजन भेजा गया है। वहीं एक इंजन काफी समय से कंडम हो चुका है। इसके चलते यहां पर अभी 8 इंजन रखे हुए है। पटरियों पर हो गए कब्जे नैरोगेज के बंद होने के साथ शहर के बीच में बिछी नैरोगेज की पटरियों पर अब कब्जा होने लगा है। ग्वालियर रेलवे स्टेशन से लेकर मोतीझील तक नैरोगेज इस रेलवे ट्रैक पर ज्यादा पटरियों के ऊपर आसपास के लोगों ने कब्जा कर लिया है। वहीं कई जगहों पर तो अब पटरी दिखाई ही नहीं दे रही है। recent visitors 50

मेट्रो ट्रैन : बेरिकेडिंग करने से पहले ट्रैफिक के लिए कोई योजना नहीं बनाई, आम जनता हो रही परेशान

 भोपाल मेट्रो की एम्स से करोद तक ओरेंज लाइन व भदभ्दा से रत्नागिरी तक की ब्ल्यू लाइन निर्माण ने इन दिनों डेढ़ किमी लंबाई की सडक़ को खत्म कर दिया है। ये रोड ब्ल्यू लाइन में भदभदा से रत्नागिरी तक सर्वे के लिए की बेरिकेडिंग व जिंसी पुल बोगदा से रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म छह से लेकर सिंधी कॉलोनी, करोद तक बेरिकेडिंग में है। सामान्य स्थिति में यहां से 300 पीसीयू ट्रैफिक गुजरता था, लेकिन बेरिकेडिंग करने से पहले इस ट्रैफिक के लिए कोई योजना नहीं बनाई, जिससे ये कि पास की बची संकरी रोड पर शिफ्ट हो गया, जिससे मिंटो हॉल से लेकर पुल बोगदा, रायसने रोड से लेकर करोद तक ट्रैफिक जाम के हालात बना रहा है। ठेकेदार को करना थी व्यवस्था     मेट्रो रेल कारपोरेशन ने ट्रैफिक की सुगम आवाजाही का जिम्मा संबंधित ठेकेदार को दिया है। बंद चौराहा, सडक़ के ट्रैफिक को शिफ्ट करने का जिम्मा ठेकेदार पर था, लेकिन ठेकेदार ने जिम्मेदारी नहीं उठाई। मेटो रेल कारपोरेशन ने भी ठेकेदार पर जिम्मेदारी देकर पल्ला झाड़ लिया। अब आमजन रोड पर मेट्रो काम की वजह से परेशान हो रहे हैं। अगले दो साल में पांच किमी की सडक़ मेट्रो में     मेट्रो टे्रन प्रोजेक्ट में सर्वे व पीलर्स के लिए बेरिकेडिंग लगातार बढ़ाई जा रही है। अगले दो साल में करीब शहर के अलग-अलग हिस्से में 35 से अधिक जगह पर रास्ते व सडक़ बंद होगी। पांच किमी लंबाई की सडक़ें एक समय में प्रोजेक्ट की वजह से बंद होगी। इससे संबंधित क्षेत्र में गुजरने की जगह घटेगी, आमजन परेशान होंगे। इनका कहना प्रोजेक्ट में हम ब्ल्यू लाइन का काम भी तेज कर रहे हैं। हमारी एजेंसियां तय है और समय सीमा भी तय की है। साप्ताहिक निरीक्षण के दौरान दिक्कतों को देखकर दूर कराया जाता है। कोशिश की जा रही है कि बेरिकेडिंग ज्यादा समय पर न रहे। recent visitors 33

एयरफोर्स के लिए 70 एचटीटी-40 ट्रेनर एयरक्राफ्ट की डील हुई, ट्रेनर एयरक्राफ्ट लीज पर लेने का विचार

नई दिल्ली  इंडियन एयरफोर्स के पास फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ ही ट्रेनर एयरक्राफ्ट की भी कमी है। जिसे दूर करने के लिए हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से ट्रेनर एयरक्राफ्ट खरीदने की डील साइन हुई है और ये ट्रेनर एयरक्राफ्ट इस साल सितंबर से मिलने की उम्मीद है। ट्रेनर एयरक्राफ्ट की कमी पूरी करने के लिए एयरफोर्स ट्रेनर एयरक्राफ्ट को लीज पर लेने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। रक्षा मंत्रालय की तरफ से रक्षा मामलों की संसदीय कमेटी को यह जानकारी दी गई है। संसदीय कमिटी ने जब रक्षा मंत्रालय से एयरफोर्स के ट्रेनर एयरक्राफ्ट और सिमुलेटर की संख्या के बारे में पूछा तो रक्षा मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि एयरफोर्स के पास जो ट्रेनर एयरक्राफ्ट हैं उनमें बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट, इंटरमीडिएट जेट ट्रेनर और एडवांस्ड जेट ट्रेनर हैं। सभी मॉर्डन एयरक्राफ्ट के सिमुलेटर्स हैं। एयरफोर्स के पास ट्रेनिंग के लिए कुल 14 सिमुलेटर उपलब्ध हैं। बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट लीज पर लेने का विकल्प रक्षा मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में एयरफोर्स के पास ट्रेनर एयरक्राफ्ट की कमी है। इस कमी को पूरा करने के लिए HAL के साथ 70 एचटीटी-40 इंडिजिनियस ट्रेनर एयरक्राफ्ट की डील साइन हुई है। जिसकी डिलवरी इस साल सितंबर से होनी है। जब ये ट्रेनर एयरक्राफ्ट एयरफोर्स में ऑपरेशनलाइज हो जाएंगे उसके बाद 36 अतिरिक्त एचटीटी-40 लिए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि एयरफोर्स बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट लीज पर लेने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। अभी ट्रेनर एयरक्राफ्ट की संख्या करीब 260 करीब दो साल पहले कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी ने एयरफोर्स के लिए 70 HTT-40 बेसिक ट्रेनर एयरक्राफ्ट लेने को मंजूरी दी थी। तब कहा गया था कि छह साल में ये सभी 70 ट्रेनर एयरक्राफ्ट एयरफोर्स को मिल जाएंगे। सूत्रों के मुताबिक एयरफोर्स के पास अभी ट्रेनर एयरक्राफ्ट की संख्या करीब 260 है जबकि स्वीकृत संख्या 388 है। एयरफोर्स के पास ट्रेनर एयरक्राफ्ट के तौर पर 75 एयरक्राफ्ट पीसी-7 मार्क-2 बेसिक ट्रेनर हैं। 86 किरण मार्क-1 और मार्क 1 ए हैं जो इंटमीडिएट जेट ट्रेनर हैं। 99 हॉक मार्क-132 एडवांस्ड जेट ट्रेनर हैं और 42 किरण मार्क टू हैं। प्रोफेशनल मिलिट्री एजुकेशन का पूरा प्रोग्राम एयरफोर्स की तरफ से संसदीय कमेटी को बताया गया कि एयरफोर्स तकनीकी रूप से संवेदनशील सेवा है। इसलिए एयर वॉरियर्स की ट्रेनिंग और स्किल डिवेलपमेंट मानव संसाधन विकास का अहम हिस्सा है। इसके लिए सर्विस से जुड़े कोर्स में प्रोफेशनल मिलिट्री एजुकेशन का पूरा प्रोग्राम है। एयरफोर्स की तरफ से बताया गया कि ट्रेनिंग में सिमुलेटर के इस्तेमाल पर काफी जोर दिया गया है। अब जो अधिकतर सिमुलेटर एयरफोर्स में शामिल किए जा रहे हैं वे स्वदेशी सोर्स से हैं। recent visitors 34

ठाकुरताल से लगी पहाड़ी पर शहर का पहला सिटी फॉरेस्ट विकसित किया जा रहा

जबलपुर शहर के ठाकुरताल से लगी पहाड़ी पर शहर का पहला सिटी फॉरेस्ट विकसित किया जा रहा है। वन विभाग ने मार्च तक सभी कार्य पूरे करने का लक्ष्य रखा था। लेकिन बजट में देरी से निर्माण कार्य थम गए हैं। अभी इसे पूरा होने में दो माह और लगेंगे। कई काम अधूरे, मार्च में तय की गई थी डेड लाइन जानकारों के अनुसार सिटी फॉरेस्ट में पुलिया निर्माण का कार्य अधूरा है। पर्यटकों को फॉरेस्ट की जैव विविधता समझाने के लिए लगने वाले साइन बोर्ड तैयार नहीं हुए हैं। कई वन प्रजातियों की पहचान भी बाकी है। परिसर में विश्राम स्थल का निर्माण भी प्रस्तावित किया गया है।  पेड़ों की मिलेगी जानकारी वन विभाग के अनुसार सिटी फॉरेस्ट में पर्यटक विभिन्न पेड़-पौधों की जानकारी देख सकेंगे। हर पौधे और वृक्ष के पास सूचना पट लगाए जाएंगे। जिनमें उस प्रजाति की वैज्ञानिक व आम जानकारी होगी। इसके लिए वन विभाग और एसएफआरआई के विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। 125 एकड़ में वन भ्रमण पथ सिटी फॉरेस्ट 125 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है। यहां वन भ्रमण पथ भी तैयार किया जा रहा है। यहां से प्रकृति और वन्य जीवों को भी देखा जा सकेगा।  सिटी फॉरेस्ट निर्माण के कुछ काम अभी शेष रह गए हैं। हमारी कोशिश है कि इसे खोलने से पहले सभी काम पूरा कर लिए जाएं।     ऋषि मिश्रा, वन मंडल अधिकारी recent visitors 33

समूचे प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं को डिजिटल प्लेटफार्म पर शिफ्ट करते हुए पेपरलेस बनाया

भोपाल स्कूल शिक्षा विभाग ने एजुकेशन पोर्टल की तर्ज पर समूचे प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग की विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं को डिजिटल प्लेटफार्म पर शिफ्ट करते हुए पेपरलेस बनाया है। विभाग का यह एक अभिनव प्रयोग है, जो खेलों की पारदर्शी प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिये महत्वपूर्ण कदम है। मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित मान्यता प्राप्त एमपी बोर्ड के समस्त विद्यालय, सीबीएसई के ऐसे विद्यालय, जो स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के एवं स्कूल शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित विभिन्न खेलों की प्रतियोगिताओं में शामिल होना चाहते हैं, वे इस पोर्टल पर निश्चित पंजीयन शुल्क के साथ आवश्यक अभिलेख अपलोड करते हुए पंजीयन करा सकते हैं। पंजीयन 14 से 19 वर्ष से कम आयु वर्ग की प्रतियोगिता के लिये एक ही बार कराना होगा। सिस्टम में प्रति वर्ष आवश्यकतानुसार अपग्रेड किये जाने की सुविधा प्रदाय की गई है। विद्यालय में अध्ययन कर रहे नियमित खिलाड़ियों की दर्ज संख्या के मान से निर्धारित खेल शुल्क का संकलन इसी पोर्टल के माध्यम से किया जा सकेगा, जो स्वत: ही संचालनालय, संयुक्त संचालक संभाग और जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में शासन द्वारा निर्धारित प्रतिशत अनुसार अंतरित हो जायेगा। यह सिस्टम खेलों में निष्पक्षता, पारदर्शिता एवं खिलाड़ियों की आयु के बारे में प्रमाणीकरण के साथ अपात्र खिलाड़ी को किसी भी स्तर पर प्रतियोगिता में शामिल होने से रोकता है। खेल-कूद गतिविधियों का आयोजन स्कूल शिक्षा विभाग में कार्यरत अधिकारी शिक्षक संवर्ग कर्मचारी एवं व्यायाम शिक्षकों के जिला स्तर से राज्य स्तर की विभागीय खेल-कूद प्रतियोगिता नियमित रूप से की जा रही है। विभागीय प्रतियोगिताओं में क्रिकेट (लेदर बॉल), वालीबॉल, कबड्डी, बेडमिंटन, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स (महिला-पुरूष) खेल शामिल हैं। उक्त प्रतियोगिता में जिले से राज्य स्तर की प्रतियोगिता चयन प्रक्रिया में टीम चयन तक करीब 8 हजार स्कूल के विद्यार्थी सहभागिता करते हैं। इस प्रक्रिया में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी प्राप्त हुए हैं। मध्यप्रदेश के 11 खिलाड़ियों ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स को किया क्वालीफाई मध्यप्रदेश के शालाओं में पढ़ने वाले 11 खिलाड़ियों ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2025 की प्रतियोगिता में शामिल होने के लिये क्वालीफाई किया है। जिन खिलाड़ियों का चयन हुआ है, उनमें जूडो में नितिन बलहारा, सुभावना जोशी, सुनैन्सी, सुएंजिल कोठारी-बॉक्सिंग, सुश्रीवल्ली श्रीवास्तव-शूटिंग, सुनव्या गुप्ता-शूटिंग, युगप्रताप सिंह राठौर-शूटिंग और एथलेटिक्स में अवधेष, प्रिंस यादव, सुसृष्टि एवं सुवर्षा का चयन भी हुआ है।   recent visitors 24

जबलपुर में इलेक्ट्रिक बसों के लिए JCTSL का बड़ा फैसला, इन 10 रूट्स पर चलेंगी 100 बसें

जबलपुर  शहरवासियों को जल्दी ही इलेक्ट्रिक एसी बसों की सौगात मिलेगी। 10 प्रमुख रूट पर बसों का संचालन होगा। जेसीटीएसएल ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। शहर को 100 इलेक्ट्रिक बस मिलने के बाद उनके संचालन की व्यवस्था इस प्रकार होगी कि निर्धारित मार्गों के प्रमुख स्टॉप पर हर पांच मिनट में बस उपलब्ध होगी। इलेक्ट्रिक बस उपलब्ध कराने के लिए वेंडर तय होने के बाद आइएसबीटी में चॉर्जिग स्टेशन स्थापित करने समेत संचालन की प्रक्रिया की तैयारियां शुरू हैं।  सेंट्रलाइज होगा सिस्टम पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सेंट्रलाइज सिस्टम विकसित करने के लिए आइएसबीटी का एक्सटेंशन किया जाएगा। बसों के संचालन के लिए प्लेटफॉर्म विकसित करने के साथ ही चार्जिंग स्टेशन भी तैयार किया जाएगा। ताकि, बसों को यहां से संचालित करने के साथ समय पर उनकी चार्जिंग भी हो सके। वर्तमान में आइएसबीटी से साढ़े तीन सौ बसों का संचालन हो रहा है। सौ ई-बसों का संचालन शुरू होने पर यहां से संचालित बसों की संया बढ़कर साढ़े तीन सौ हो जाएगी।  36 सीटर होंगी ई-बस पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम में जुड़ने वाली एयरकंडीशन इलेक्ट्रिक बस 32-36 सीटर होंगी। पीएम ई-बस योजना के तहत केंद्रीय शासन से नगर सौ इलेक्ट्रिक बस मिलनी हैं। ई-बस निर्माता कंपनी ज्वाइंट वेंचर के माध्यम से बसों का संचालन करेंगी। इन ऑपरेटर पर ही संचालन से लेकर 12 साल तक मेंटेंनेंस का जिमा होगा। इन मार्गों पर होगा संचालन     तीन पत्ती से रांझी-घाना     तीन पत्ती से गोसलपुर     रेलवे स्टेशन से पनागर     रेलवे स्टेशन से भेड़ाघाट     दीनदयाल चौक से बरेला     दमोहनाका से भेड़ाघाट     त्रिमूर्ति नगर से ग्वारीघाट     रेलवे स्टेशन से भेड़ाघाट वाया सगड़ा     दमोह नाका से मेडिकल     रेलवे स्टेशन से बरगी केंद्र सरकार उपलब्ध कराएंगी बस पीएम ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत नगर में ई-बसों का संचालन सार्वजनिक, निजी भागीदारी पद्धति पर किया जाएगा। ये बस केंद्र सरकार उपलब्ध कराएगी। निर्धारित अवधि में रखरखाव की जो लागत आएगी, वह भी केंद्र सरकार ही देगी।  प्रदूषण होगा कम विशेषज्ञों के अनुसार शहरवासियों को इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिलने पर शहरमें प्रदूषण मुक्त पब्लिक यातायात की सुविधा भी सुलभ होगी। शहर में सिटी बस सेवाओं के बुनियादी ढांचे के विस्तार और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना है।  70 से ज्यादा बस संचालित शहर में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के नाम पर केवल मेट्रो बस ही उपलब्ध हैं। वर्तमान में 70 से ज्यादा मेट्रो बस नगर में 14 रूट पर संचालित हैं। सिटी ट्रांसपोर्ट कंपनी जेसीटीएसएल के अनुसार नई बसों की उपलब्धता होने पर नए रूट में बस संचालित की जाएंगी। इससे शहर का पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम को और बेहतर बनाया जा सके।  यह है स्थिति     100 बस संचालन के लिए आइएसबीटी में बनाई जाएगी जगह     350 बस आइएसबीटी से संचालित     2015 में बनकर तैयार हुआ था     2016 में शुरू हुआ संचालन  इलेक्ट्रिक बस मिलते ही प्रमुख 10 रूट उनका संचालन शुरू किया जाएगा। हालांकि, प्रक्रिया पूरी होने से लेकर बसों का संचालन शुरू होने में छह महीने लगेंगे।     सचिन विश्वकर्मा, सीईओ, जेसीटीएसएल     recent visitors 24

हनुमान जयंती पर इस शुभ मुहूर्त में करें बजरंगबली की पूजा

देश भर में हनुमान जयंती बड़े ही धूम धाम से मनाई जाती है. कथाओं के अनुसार, हनुमान जी की जन्म चैत्र माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को राजा केसरी और माता अंजनी के घर हुआ था. कहते हैं हनुमान जी अराधाना करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है. दरअसल, बजरंगबली को अष्ट सिद्धियां और नौ निधि का वरदान प्राप्त है, जिससे वह अपने सभी भक्तों की विपत्तियों को समाप्त कर देते हैं. मान्यता है कि हनुमान जन्मोत्सव के दिन भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी की पूजा करने व्यक्कि की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. हनुमान जयंती शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, हनुमान जन्मोत्सव पर पूजा करने का शुभ अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 56 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इस दौरान भक्त बजरंग बली की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं. हनुमान जयंती पूजा विधि हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी के साथ भगवान राम और माता सीता की पूजा की जाती है. इस दिन सुबह उठकर स्नान कर लाल रंग के वस्त्र पहने. उसके बाद हनुमान जी को सिंदूर, लाल रंग के फूल, तुलसी दल, चोला और बूंदी के लड्डू का प्रसाद अर्पित करें. उसके बाद मंत्र जाप करें. फिर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें. अंत में आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें. इन चीजों का लगाएं भोग हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली को प्रसन्न करने से लिए पान का प्रसाद, गुड़ और चना, नारियल, केले, केसर का मीठा चावल, खीर और जलेबी का भोग लगाना शुभ होता है. हनुमान जी के मंत्र     ऊं हं हनुमते नम:     ऊं हं पवन नन्दनाय स्वाहा     ऊं नमो भगवते हनुमते नम:     ऊं हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट     ॐ नमो भगवते पंचवदनाय पूर्वकपिमुखाय ठं ठं ठं ठं ठं सकल शत्रु संहारणाय स्वाहा ||     अंजनी गर्भ संभूताय कपीन्द्र सचिवोत्तम रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमान रक्ष रक्ष सर्वदा     जल खोलूं जल हल खोलूं खोलूं बंज व्यापार आवे धन अपार। फुरो मंत्र ईश्वरोवाचा हनुमत वचन जुग जुग सांचा।     अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता हनुमान जी की आरती आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके। अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुधि लाए। लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे। लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आनि संजीवन प्राण उबारे। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। पैठी पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे। बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संत जन तारे। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें। कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई। जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की। आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। हनुमान जयंती का महत्व हिंदू धर्म में हनुमान जी को 8 चिरंजीवियों में से एक माना जाता है. कहते हैं वह आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, जिससे उसके जीवन के सभी कष्ट और संकट दूर होते हैं. इस दिन पूजा में उन्हें फूल, माला, सिंदूर चढ़ाने के साथ बूंदी या बेसन के लड्डू, तुलसी दल अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं. recent visitors 38