पुलिस लाइन में दिया गया सब इंस्पेक्टर नाथूराम को गार्ड ऑफ ऑनर

टीकमगढ़ टीकमगढ़ जिले के पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई ने शुक्रवार की सुबह बताया कि टीकमगढ़ जिले के बड़ागांव पुलिस थाने में सब इंस्पेक्टर के पद पर नाथूराम कोल पदस्थ थे, जो विभागीय काम से टीकमगढ़ से अपनी बाइक से बड़ा गांव जा रहे थे। तभी सागर रोड पर एक ट्रक की टक्कर से वह घायल हो गए थे और उनके साथ एक रक्षा समिति का सिपाही भी था। दोनों घायलों को प्राथमिक उपचार बड़गांव में दिया गया। इसके बाद टीकमगढ़ जिला चिकित्सालय लाया गया था, जहां हालात गंभीर होने पर दोनों को झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान रात्रि में सब इंस्पेक्टर नाथूराम की मौत हो गई। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को टीकमगढ़ जिला चिकित्सालय लाया गया, जहां पर शुक्रवार की सुबह पोस्टमार्टम हुआ और पोस्टमार्टम के बाद उनके पार्थिव शरीर को पुलिस लाइन टीकमगढ़ लाया गया। पुलिस लाइन में दिया गया गार्ड ऑफ ऑनर टीकमगढ़ के पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई ने बताया कि ड्यूटी के दौरान शहीद हुए सब इंस्पेक्टर नाथूराम को पुलिस लाइन टीकमगढ़ में गार्ड ऑफ होना दिया गया, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के साथ-साथ जिला पुलिस बल के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को उनकी जन्म भूमि के लिए रवाना किया गया। मैहर में होगा अंतिम संस्कार टीकमगढ़ जिले के पुलिस थाना बड़ागांव में पदस्थ सब इंस्पेक्टर नाथूराम मैहर के रहने वाले थे पुलिस अधीक्षक ने बताया कि पुलिस एंबुलेंस के माध्यम से उनके पार्थिव शरीर को मैहर भेजा गया है जहां पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। शहीद का मिलेगा दर्ज पुलिस अधीक्षक मनोहर सिंह मंडलोई ने बताया कि मृतक सब इंस्पेक्टर नाथूराम को शहीद का दर्जा दिया जाए क्योंकि नाथूराम विभागीय काम से ऑन ड्यूटी टीकमगढ़ से बड़ा गांव जा रहे थे तभी वह दुर्घटना में घायल हो गए थे और इलाज के दौरान उनकी झांसी में मौत हो गई रक्षा समिति के जवान की हालत नाजुक टीकमगढ़ जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीताराम ने बताया कि सब इंस्पेक्टर के साथ बाइक पर सवार रक्षा समिति के सदस्य जवान रईस वंशकार की हालत भी गंभीर बनी हुई है और पुलिस अधिकारी लगातार उसपर निगरानी रख रहे हैं उन्होंने बताया कि उसका इलाज झांसी में चल रहा है और पुलिस अधिकारी लगातार उनके परिवार और डॉक्टर के संपर्क में है   recent visitors 21

मध्य प्रदेश में अब जमानत मिलने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई, अब अपराधियों को आसानी से जमानत नहीं मिल पाएगी

इंदौर  मध्य प्रदेश में अब जमानत मिलने के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है. अब अपराधियों को आसानी से जमानत नहीं मिल पाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने जमानत को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट समेत सभी खंडपीठ के लिए फार्मेट जारी किया है. हाईकोर्ट में अब जमानत याचिका लगाने वाले संबंधित व्यक्ति को अपने आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी भी कोर्ट के सामने रखनी पड़ेगी. सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश से जुड़े जमानत के मामलों में यह महत्वपूर्ण आदेश दिया है. 1 मई से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी. जमानत देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर समेत इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ को जमानत याचिका या अलग-अलग तरह के मामलों की सुनवाई करने को लेकर एक फॉर्मेट जारी किया है. इसके चलते जिस भी व्यक्ति को किसी मामले में सजा हो गई है या फिर वह जमानत या अग्रिम जमानत को लेकर कोर्ट के समक्ष याचिका लगता है, तो उसे अपने पिछले आपराधिक रिकॉर्ड की पूरी जानकारी जमानत याचिका के साथ कोर्ट के सामने प्रस्तुत करनी होगी. इसके बाद कोर्ट उस पूरे मामले में सुनवाई कर तय करेगा कि जमानत दी जाए या नहीं. अपराधियों को ऐसे मिल जाता था फायदा अभी तक जो भी व्यक्ति अग्रिम जमानत, जमानत या सजा पर रोक के लिए याचिका कोर्ट के सामने प्रस्तुत करता है तो कोर्ट संबंधित थाना पुलिस को निर्देश जारी कर उनसे संबंधित जानकारी मांगती है. जिसके चलते पुलिस कई बार इस तरह की जानकारी कोर्ट के समक्ष तय समय में उपलब्ध नहीं करवा पाती है. जिसका फायदा संबंधित आरोपी को हो जाता है और उसे कई बार आसानी से जमानत मिल जाती है. ऐसे में कई अपराधी ऐसे भी होते हैं जिनके पिछले आपराधिक रिकॉर्ड में गंभीर मामले दर्ज होते हैं. इंदौर के कुख्यात गुंडे को मिल गई थी जमानत बता दें कि पिछले दिनों इंदौर के एक कुख्यात गुंडे हेमंत यादव पर तकरीबन एक दर्जन से अधिक प्रकरण दर्ज थे लेकिन पुलिस ने हेमंत यादव से संबंधित जानकारियां कोर्ट के सामने प्रस्तुत नहीं की. जिसके चलते उसे आसानी से सजा के एक मामले में जमानत मिल गई. इस तरह की घटनाओं को देखते हुए अब सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर समेत इंदौर और ग्वालियर खंडपीठ को नए फॉर्मेट पर सुनवाई करने के आदेश दिए हैं. 1 मई से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी. यह व्यवस्था लागू होने के बाद कुख्यात आरोपियों को हाईकोर्ट से आसानी से जमानत नहीं मिल पाएगी. recent visitors 35

मध्यप्रदेश में 9 साल बाद भी स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए उपकरण खरीदी नहीं होने पर हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया

 जबलपुर मध्यप्रदेश में 9 साल बाद भी स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए उपकरण खरीदी नहीं होने पर हाईकोर्ट ने सख्त रवैया अपनाया है। हाईकोर्ट ने तुरंत टेंडर जारी कर कैंसर इंस्टीट्यूट के लिए उपकरण खरीदी के निर्देश दिए हैं। शासन की ओर से 6 मई को टेंडर खोलने की अंडरटेकिंग दी गई है। मेडिकल एजुकेशन विभाग के प्रमुख सचिव और मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य सेवा निगम के एमडी कोर्ट में हाजिर हुए। पिछली सुनवाई में हाइकोर्ट ने स्वास्थ्य सेवा निगम के एमडी और चिकित्सा शिक्षा प्रमुख सचिव को तलब किया था। बता दें कि 84 करोड रुपए मिलने के बाद भी 9 साल में जबलपुर स्थित स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में उपकरण नहीं आ पाए है। तीन बार टेंडर बुलाकर निरस्त कर दिया गया था। जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की बैंच में सुनवाई हुई हैं। अब 13 मई को मामले की अगली सुनवाई होगी। जबलपुर निवासी एडवोकेट विकास महावर ने मामले में याचिका लगाई है। याचिका में जबलपुर स्थित स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में पर्याप्त साधन नहीं होने की बात कही है। याचिका में कहा गया उपकरण के अभाव में पीड़ितों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा है। खरीदी के लिए 84 करोड़ रुपए मिलने के बाद खरीदी नहीं की गई। उपकरण खरीदी के लिए साल 2016 में 84 करोड़ रुपए मिले थे। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया था कि तकनीकि कारण से दो-तीन बार टेंडर प्रक्रिया को निरस्त किया गया है। उपकरण खरीदी मप्र लोक सेवा स्वास्थ्य निगम के द्वारा की जानी है। युगलपीठ ने मप्र लोक सेवा स्वास्थ्य निगम के एमडी को अनावेदक बनाने के निर्देश याचिकाकर्ता को दिए थे। टेंडर किन कारणों से निरस्त किये गये थे, इस संबंध में जानकारी प्रदान करने लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव मप्र लोक सेवा स्वास्थ्य निगम के एमडी को युगलपीठ ने व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया था। याचिका की सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर युगलपीठ को बताया कि पूर्व में जारी टेंडर में एक-दो प्रतिभागी ने हिस्सा लिया था। जिसके कारण उन्हें निरस्त किया गया है। तकनीकी बोली 29 अप्रैल को खोली जानी है, जिसमें जबलपुर केन्द्र के लिए उपकरण एवं मशीन भी जोड़ दी गई है। लोक स्वास्थ्य सेवा निगम के प्रबंध निदेशक की तरफ से बताया गया कि टेंडर 6 मई को खोलना संभव हो पाएगा। युगल पीठ ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में उक्त बोली में अंतिम निर्णय लेने के आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई 13 मई को निर्धारित की गई है। recent visitors 30

18 अप्रैल का दिन आईपीएल के लिए है बेहद खास, आज के ही दिन हुआ था आगाज, ब्रैंडन मैक्कुलम की चली थी आंधी

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट के दशकों पुराने इतिहास में 18 अप्रैल का दिन बेहद खास है. इसी दिन साल 2008 में दुनिया की सबसे बड़ी टी20 लीग यानी इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की शुरुआत हुई थी. आईपीएल का उद्घाटन मुकाबला रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के बीच खेला गया था. बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में आयोजित उस पहले ही मैच में न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान ब्रैंडन मैक्कुलम का जलवा देखने को मिला था. मैक्कुलम की आंधी में ढह गई थी आरसीबी ब्रैंडन मैक्कुलम कोलकाता नाइट राइडर्स के लिए ओपनिंग करने उतरे और रनों का अंबार लगा दिया. मैक्कुलम ने सिर्फ 73 गेंदों पर नाबाद 158 रनों की धुआंधार पारी खेली थी. इस दौरान उनके बल्ले से 13 छक्के और 10 चौके निकले. मैक्कुलम की यादगार पारी के दम पर सौरव गांगुली की अगुवाई वाली केकेआर ने तीन विकेट पर 222 रनों का स्कोर खड़ा किया. जवाब में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की पूरी टीम 15.1 ओवर्स में महज 82 रनों पर ढेर हो गई और उसे 140 रनों से करारी हार का सामना करना पड़ा. उस मैच में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की कप्तानी राहुल द्रविड़ कर रहे थे, जो आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स (RR) के मौजूदा हेड कोच हैं. मैक्कुलम को उनकी ऐतिहासिक इनिंग्स के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया था. आईपीएल का पहला सीजन राजस्थान रॉयल्स ने जीता था. ऑस्ट्रेलिया के महानतम स्पिनर शेन वॉर्न की कप्तानी में राजस्थान रॉयल्स चैम्पियन बनने में कामयाब रही थी. तब राजस्थान रॉयल्स ने फाइनल में चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) को 3 विकेट से शिकस्त दी थी. वह मुकाबला 1 जून 2008 को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी में खेला गया. उस मुकाबले में चेन्नई सुपर किंग्स की कप्तानी महेंद्र सिंह धोनी के हाथों में थी. धोनी मौजूदा आईपीएल सीजन में भी ऋतुराज गायकवाड़ के बाहर होने के बाद सीएसके की कप्तानी कर रहे हैं. राजस्थान रॉयल्स बनी थी आईपीएल की पहली चैम्पियन, फोटो: X आईपीएल का पहला ही सीजन बेहद सफल एवं रोमांचक रहा. आगे चलकर फैन्स का रुझान क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट की ओर इस कदर बढ़ा कि यह लीग लोकप्रियता के शीर्ष पर जा पहुंचा. आईपीएल ललित मोदी की सोच थी. ग्लैमर और चकाचौंध के तड़के के बीच इस लीग में इतना पैसा बरसा कि दुनिया देखती ही रह गई. आईपीएल ने भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) की रेवेन्यू में चार चांद लगा दिया. ऐसे में बाकी देशों के बोर्ड आर्थिक तौर पर बीसीसीआई से कोसों पीछे छूट गए. विवादों से भी रहा है आईपीएल का नाता आगे चलकर बाकी देशों ने भी आईपीएल के मॉडल को अपनाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें उतनी कामयाबी नहीं मिली. आईपीएल के अबतक 17 सीजन हो चुके हैं और 18वां सीजन जारी है. खास बात यह है कि आईपीएल में आज बेंगलुरु के ही एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और पंजाब किंग्स (PBKS) की टक्कर होनी है. एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में ही आईपीएल का आगाज हुआ था. आईपीएल के मुकाबले तो हिट होते चले गए, लेकिन दूसरी तरफ कई विवादों में भी यह लीग घिरी रही. आईपीएल 2010 फाइनल के बाद ललित मोदी को बीसीसीआई से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. ललित मोदी पर पैसे की हेराफेरी सहित कई आरोप लगे थे. बता दें कि ललित मोदी 2008 से 2010 तक यानी पहले तीन सीजन में आईपीएल के चेयरमैन और कमिश्नर रहे थे. फिर सबसे बड़ा विवाद साल 2013 में सामने आया, जब राजस्थान रॉयल्स के खिलाड़ियों पर स्पॉट फिक्सिंग का आरोप लगा. उस समय बीसीसीआई के अध्यक्ष एन. श्रीनिवासन के दामाद को अवैध सट्टेबाजी में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. recent visitors 33

भोपाल में घटना के 6 महीने बाद स्कूल पर एक्शन, मान्यता रद्द, 324 स्टूडेंट्स अन्य स्कूलों में ले सकेंगे प्रवेश

भोपाल भोपाल के रेडक्लिफ स्कूल में तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था. अब इस मामले में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है. कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने स्कूल की मान्यता सत्र 2025-26 से रद्द करने के आदेश जारी कर दिए हैं. इस फैसले के बाद स्कूल में पढ़ने वाले छात्र अब स्वयं के खर्चे पर शासकीय या किसी अन्य निजी स्कूल में दाखिला ले सकेंगे. यह कार्रवाई उस जघन्य घटना के बाद हुई है, जिसमें 19 सितंबर 2024 को स्कूल के आईटी टीचर ने साढ़े तीन साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया था. आदेश में कहा गया है कि स्कूल सत्र 2025-26 से शाला का संचालन नहीं कर सकेगा। ऐसे में यहां पहले से पढ़ने वाले बच्चे सरकारी या अन्य प्राइवेट स्कूल में एडमिशन ले सकते हैं। आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों को अन्य सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाया जा सकेगा, जबकि अन्य छात्र-छात्राएं स्वयं के व्यय पर दूसरे स्कूल में प्रवेश ले सकते हैं। स्कूल की मान्यता सत्र 2025-26 से रद्द घटना के सामने आते ही पूरे शहर में गुस्से का माहौल बन गया था. हिंदू संगठनों ने इस घटना के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और स्कूल परिसर में तोड़फोड़ भी की थी. प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की और स्कूल की लापरवाही को लेकर यह सख्त फैसला लिया गया. स्कूल में तीन साल की मासूम से हुआ था रेप कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए यह जरूरी कदम है. अभिभावकों से अपील की गई है कि वे समय रहते अपने बच्चों के लिए वैकल्पिक स्कूल का चयन कर लें ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो. 324 बच्चों का भविष्य दूसरे स्कूलों में संवरेगा बता दें कि इस स्कूल में कुल 324 बच्चे पढ़ते हैं। पिछले साल सितंबर में स्कूल के टीचर ने ही 3 साल की बच्ची से रेप किया था। इस मामले में हंगामे के बाद स्कूल को सील कर दिया गया था। 6 सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद कलेक्टर सिंह ने सरकार को प्रस्ताव भेजा था कि स्कूल का संचालन डीईओ करें। जांच के लिए दो टीमें बनाई गई थीं। पहली जांच रिपोर्ट में बच्चियों की सुरक्षा को लेकर स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई थी। वहीं, दूसरी 7 सदस्यीय कमेटी ने स्कूल के संचालन को लेकर अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को दी थी। इसके बाद भोपाल में पहली बार किसी प्राइवेट स्कूल की कमान सरकारी हाथ में ली गई थी। संकुल प्राचार्य को संचालन की व्यवस्था सौंपी गई थी। इसके बाद स्कूल खोल दिया गया था, लेकिन अब संचालन नहीं होगा। स्कूल को कक्षा पहली से 8वीं की मान्यता नहीं दी गई है। 79 बच्चों का दाखिला आरटीई से स्कूल में कुल 324 बच्चे पढ़ते हैं। इनमें से 79 ऐसे हैं, जिनका आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के जरिए एडमिशन हुआ है। बीच सत्र में स्कूल बंद होने से सभी बच्चों को परेशानी हो सकती थी। उनका एक साल बिगड़ जाता। दूसरी ओर, जब बच्ची के साथ गलत हरकत हुई, तब स्कूल खुले पांच महीने हो चुके थे। यानी, आधा शिक्षा सत्र। ऐसे में बच्चों का कहीं एडमिशन भी नहीं हो सकता था। प्रशासन यदि स्कूल को बंद रखता तो बच्चों का एक साल खराब हो जाता। इसलिए स्कूल का संचालन सरकार ने खुद ही किया। recent visitors 34

प्रदेश में गर्मी का असर बढ़ते ही मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक जरूरत पड़ने पर ही घरों से बाहर निकलने की सलाह दी

भोपाल  मध्य प्रदेश में गर्मी का कहर बढ़ता जा रहा है। सूरज की तपिश तेज होने के कारण लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। गुरुवार को शाजापुर-सीहोर जिले में जहां बारिश हुई। वहीं, भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन समेत प्रदेश के 20 जिलों में दिन का तापमान 40 डिग्री के पार पहुंच गया। मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को नर्मदापुरम सबसे गर्म रहा। यहां अधिकतम तापमान 43.6 डिग्री दर्ज किया गया। रतलाम में 43.2 डिग्री रहा। गुना में 42.4 डिग्री, शाजापुर में 42.1 डिग्री, नरसिंहपुर-धार में 42 डिग्री, टीकमगढ़ में 41.5 डिग्री, सागर में 41.4 डिग्री, नौगांव, खजुराहो-मंडला में 41 डिग्री दर्ज किया गया। इसी तरह खरगोन में 40.6 डिग्री, खंडवा-दमोह में 40.5 डिग्री, रायसेन में 40.4 डिग्री और शिवपुरी में 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे गर्म रहा। यहां दिन का पारा 42 डिग्री रहा। भोपाल में 41.1 डिग्री, इंदौर में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 41.5 डिग्री और जबलपुर में 39.6 डिग्री रहा। गर्मी का असर बढ़ते ही मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक जरूरत पड़ने पर ही घरों से बाहर निकलने की सलाह दी है। इन्हीं 4 घंटों के दौरान धूप तेज होती है और गर्म हवाएं चलती हैं। वहीं, खाना-पान और सूती कपड़े पहनने की सलाह भी दी गई है। मौसम वैज्ञानिक वीएस यादव ने बताया, दिन के तापमान में बढ़ोतरी हुई। वहीं, रात में भी गर्मी बढ़ी है। अगले 5 दिन तक ऐसा ही मौसम रहेगा। एमपी में गर्मी का पारा बढ़ गया है। ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन सहित 20 से ज्यादा जिलों में सूरज के तेवर तीखे रहेंगे। चिलचिलाती धूप से लोग बेहाल रहेंगे। अगले 5 दिन तक MP में मौसम ऐसा ही रहेगा। दिन और रात के तापमान में बढ़ोतरी होगी। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक जरूरत पड़ने पर ही घरों से बाहर निकलने की सलाह दी है। इन जिलों में रहेगी तेज गर्मी मौसम विभाग ने 18 अप्रैल को निवाड़ी, छतरपुर, पन्ना, इंदौर, उज्जैन, श्योपुर, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, रतलाम, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, देवास, हरदा, खंडवा और बुरहानपुर में तेज गर्मी की संभावना जताई है। दिन तपिश रहेगी। रात को भी गर्मी का अहसास होगा। नर्मदापुरम सबसे गर्म नर्मदापुरम में गुरुवार को दिन का पारा सबसे ज्यादा 43.6 डिग्री रहा। रतलाम 43.2, गुना 42.4, शाजापुर 42.1, ग्वालियर 42, भोपाल 41.1, इंदौर 40.4, उज्जैन 41.5 और जबलपुर में 39.6 डिग्री तापमान रहा। नरसिंहपुर, 42, धार 42, टीकमगढ़ 41.5, सागर 41.4, नौगांव, खजुराहो-मंडला में 41 डिग्री दर्ज किया गया। खरगोन में 40.6, खंडवा 40.5, -दमोह 40.5, रायसेन 40.4 और शिवपुरी में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जानिए कल कैसा रहेगा मौसम मौसम वैज्ञानिक के मुताबिक, अप्रैल के आखिरी सप्ताह में गर्मी का कहर रहेगा। बंगाल में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम सक्रिय होगा। सिस्टम का असर एमपी भी रहेगा। अप्रैल के आखिरी 3 से 4 दिन तक लू चलेगी। दिन और रात का पारा बढ़ेगा। मौसम विभाग ने 19 अप्रैल को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर तेज गर्मी की संभावना जताई है। 20 अप्रैल को भोपाल, इंदौर, उज्जैन ग्वालियर में दिन का तापमान 40 डिग्री से ज्यादा रहने का अनुमान जताया है।    recent visitors 35

दिग्विजय ने कहा 1992 में भोपाल दंगों के दौरान दंगा-फसाद होने में हमने पूरी की कोशिश ….

शाजापुर शाजापुर में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह के एक विवादित बयान ने मध्य प्रदेश की सियासत में हलचल मचा दी है. हिंदू-मुस्लिम सद्भावना सम्मेलन में भाषण के दौरान दिग्विजय की जुबान फिसल गई और उन्होंने कह दिया, "1992 में भोपाल दंगों के दौरान दंगा-फसाद होने में हमने पूरी कोशिश की." इस बयान से सभागार में मौजूद लोग स्तब्ध रह गए. हालांकि, दिग्विजय सिंह ने इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, लेकिन उनका यह बयान चर्चा का केंद्र बन गया है. इस बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने तीखा पलटवार कर  'X' पर लिखा, "काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती… देश विरोधी कांग्रेस पार्टी के नेता चाहे कितने भी मुखौटे पहन लें, सच सामने आ ही जाता है." सिंधिया ने दिग्विजय सिंह के बयान को कांग्रेस की मानसिकता का प्रतीक बताते हुए इसे देश के खिलाफ बताया. दरअसल, शाजापुर के चौबदार वाडी में मुस्लिम समाज की ओर से आयोजित सद्भावना सम्मेलन में दिग्विजय सिंह ने 1992 के भोपाल दंगों का जिक्र किया. वे बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद हुए दंगों के दौरान अपनी भूमिका बताते हुए कहा, "जब बाबरी मस्जिद शहीद हुई थी, मैं कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष था. मैंने दो हफ्ते तक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में रातें बिताईं." लेकिन इसके बाद उनकी जुबान फिसल गई और वे बोल गए, "हिंदू-मुस्लिम को जोड़कर हमने दंगा-फसाद होने में पूरी कोशिश की." इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद बीजेपी ने इसे कांग्रेस की सांप्रदायिक राजनीति का सबूत बताया. सिंधिया और दिग्विजय का पुराना सियासी बैर ज्योतिरादित्य सिंधिया और दिग्विजय सिंह लंबे समय से मध्य प्रदेश की राजनीति में एक-दूसरे के विरोधी रहे हैं. पहले कांग्रेस में साथ रहते हुए भी दोनों के बीच तनातनी की खबरें आती थीं. 2020 में सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद यह टकराव और तेज हो गया. हाल के वर्षों में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर कई बार निशाना साधा है. दिग्विजय सिंह ने जहां सिंधिया को 'बच्चा' कहकर तंज कसा, वहीं सिंधिया ने दिग्विजय को 'राष्ट्रविरोधी मानसिकता' वाला नेता करार दिया. recent visitors 38