प्रदेश की सभी शालाओं में 22 अप्रैल को दिन पृथ्वी दिवस का आयोजन किया जायेगा

भोपाल प्रदेश की सभी शालाओं में 22 अप्रैल 2025 मंगलवार के दिन पृथ्वी दिवस का आयोजन किया जायेगा। इस आयोजन के संचालन के लिए संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह ने समस्त जिला कलेक्टर्स को पत्र लिखकर निर्देश जारी किये हैं। विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा ‘’इको क्लब फॉर मिशन लाइफ’’ कार्यक्रम में विभिन्न प्रकार की गतिविधियां की जा रही हैं। पर्यावरण के प्रति जागरूकता के लिए विद्यालयों में इको क्लब का गठन भी किया गया है। प्रदेश में विद्यालयों में गठित इको क्लब से "फ्लोरा (वनस्पति) के लिए क्यूआर कोड" नामक एक शैक्षिक पहल की शुरूआत की गई है। इसका प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों में तकनीकी कौशल का विकास करना, क्यूआर कोड निर्माण और डिजिटल जानकारी प्रदान करना है। पृथ्वी दिवस के आयोजन में विद्यालय द्वारा ‘’इको क्लब फॉर मिशन लाईफ’’ पोर्टल पर पंजीयन किया जायेगा। विद्यालय के इको क्लब प्रभारी द्वारा विद्यार्थियो के समूह बनाएँ जाकर स्कूल परिसर एवं आस-पास के बाग बगीचों इत्यादि में उपलब्ध पेड़-पौधों का सर्वेक्षण कर सूची तैयार की जायेगी। विद्या‍र्थी सूची अनुसार पेड़-पौधों से संबंधित जानकारी एकत्रित कर डिजिटल डेटाबेस भी तैयार करेंगे। इसके आधार पर प्रत्येक पेड़-पौधों के लिए स्थिर (स्टेटिक) क्यूआर कोड बनायेंगे। क्यूआर कोड वाले लेबल को विद्यार्थियों द्वारा संबंधित पेंड़ पौधों के समक्ष प्रदर्शित किया जायेगा, जिससे अन्य विद्यार्थी एवं जन सामान्य भी उस पेड़ पौधे से संबंधित जानकारी सहजता से प्राप्ते कर सकेंगे। क्यू्आर कोड में उस पेड़ पौधे से संबंधित जानकारी यथा पेड़ (फ्लोरा) का नाम एवं स्थानीय नाम, पेड़ का वैज्ञानिक नाम, पेड़ का प्रकार, फलदार / औषधि / सजावट / अन्य, वनस्पति के बारे में जानकारी जैसे पोषण मूल्य, लाभ, उपयोग आदि भी उपलब्ध होगी।   recent visitors 20

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- प्रसाद योजना से संवरेगी माँ पीताम्बरा की नगरी

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि माँ पीताम्बरा की नगरी को प्रदेश का प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल बनने के लिये सुविधा संपन्न बनाया जाएगा। केंद्र सरकार की “प्रसाद योजना” (Pilgrimage Rejuvenation and Spiritual Augmentation Drive) के अंतर्गत मंदिर परिसर और उससे जुड़े क्षेत्र के विकास के लिए 44.24 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस योजना से धार्मिक स्थलों का कायाकल्प होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण होगा। "प्रसाद योजना” का उद्देश्य भारत के प्रमुख धार्मिक स्थलों को स्वच्छ, सुव्यवस्थित और पर्यटकों के लिए सुविधाजनक बनाना है। धार्मिक विरासत को मिलेगा आधुनिक स्वरूप प्रमुख सचिव, पर्यटन एवं संस्कृति और प्रबंध संचालक म.प्र. टूरिज्म बोर्ड श्री शिव शेखर शुक्‍ला ने बताया कि पीतांबरा पीठ में पर्यटन सेवाओं के विस्तार से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। सुविधाएं बढ़ने से यह विकास तीर्थयात्रियों को आसानी होगी। “प्रसाद योजना” के तहत पीताम्बरा पीठ, दतिया में होने वाले प्रमुख विकास कार्य ब्रीदिंग स्पेसेज (खुले स्थान) हाइवे से मंदिर की ओर लगभग 2 कि.मी. के मार्ग पर पैदल आने वाले दर्शनार्थियों एवं वरिष्‍ठ जनों को ताजी हवा, खुला वातावरण और आराम प्रदान करने के लिए विशेष रूप से खुले स्थानों का विकास किया जाएगा। इन क्षेत्रों में हरियाली, बेंच, पेड़-पौधे और विश्राम करने के लिए स्थान होंगे। इससे पर्यटकों को ताजगी का अनुभव होगा। सार्वजनिक सुविधाएं शहर के नागरिकों और पर्यटकों के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें स्वच्छ पेयजल, शौचालय, बैठने की व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और अन्य सार्वजनिक सेवाओं को उन्नत किया जाएगा। इससे शहर अधिक सुविधाजनक और सुगम बनेगा।         इंटरप्रिटेशन सेंटर मंदिर प्रबंधन ने उत्तर गेट के समीप इसके लिये लगभग 1000 वर्ग मी० की भूमि उपलब्‍ध कराई है, उत्तर गेट भविष्‍य का मुख्‍य द्वार होगा। उत्तर द्वार से मंदिरों में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एक इंटरप्रिटेशन सेंटर (व्याख्या केंद्र) बनाया जाएगा, जहां मंदिर के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व की जानकारी दी जाएगी। प्रथम तल पर मंदिर ट्रस्‍ट का कार्यालय एवं भीड़ नियंत्रण कक्ष भी होगा।         रोटरी डिजाइन ग्‍वालियर एवं झॉसी से आने वाले वाहनों/यात्रियों हेतु यातायात प्रबंधन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए बम-बम भोले एवं हनुमान चौक पर रोटरी की डिज़ाइन की जायेगी। यह न केवल ट्रैफिक नियंत्रण में मदद करेगा बल्कि सौंदर्यीकरण में भी योगदान देगा।         मल्टी-लेवल कार पार्किंग बढ़ती यातायात समस्या को ध्यान में रखते हुए, मंदिर के समीप बहु-स्तरीय कार पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। इससे वाहनों की अव्यवस्थित पार्किंग की समस्या कम होगी और सड़कें अधिक व्यवस्थित रहेंगी। पार्किंग के भूतल पर दुकानों की व्‍यवस्‍था होगी। इससे दुकान व्‍यवस्थित हो सकेगी एवं श्रृद्धालुओं के लिये भी सुविधाजनक होगी। भविष्‍य में मल्‍टीलेवल पार्किंग को सीधे मंदिर पाथ-वे से जोड़ा जावेगा।         फुटपाथ विकास पैदल यात्रियों की सुरक्षा और सुगमता को सुनिश्चित करने के लिए फुटपाथों का पुनर्विकास किया जाएगा। इसमें समतल और मजबूत फुटपाथ, प्रकाश व्यवस्था, छाया के लिये शेड, पौध-रोपण और बैठने की सुविधाएं जोड़ी जाएंगी ताकि लोग आराम से चल सकें।         स्मार्ट डिस्प्ले और संकेतक शहर में प्रमुख स्थानों, पर्यटन स्थलों, मंदिरों और सार्वजनिक सुविधाओं के बारे में जानकारी देने के लिए स्मार्ट डिस्प्ले और संकेतक लगाए जाएंगे। डिजिटल और इंटरैएक्टिव बोर्ड की मदद से यात्री और नागरिक आसानी से दिशाओं, सूचनाओं और आवश्यक सेवाओं की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। आधुनिकता के साथ आस्था का संगम इन सभी कार्यों का लक्ष्य दतिया स्थित मां पीताम्बरा पीठ को एक ऐसा धार्मिक गंतव्य बनाना है, जहाँ आस्था और आधुनिकता का समन्वय हो। इससे न केवल तीर्थयात्रियों को एक बेहतर अनुभव मिलेगा, बल्कि दतिया को सामाजिक, आर्थिक और पर्यटन की दृष्टि से भी नई ऊंचाइयाँ मिलेंगी। पहले भी मिल चुकी है सफलता मध्यप्रदेश के ओंकारेश्वर और अमरकंटक जैसे धार्मिक स्थलों को भी इस योजना के अंतर्गत क्रमशः 44.81 करोड़ और 50 करोड़ रुपये की सहायता प्राप्त हो चुकी है। ओंकारेश्वर में विकास कार्य पूर्ण हो गये है। अमरकंटक में विकास कार्य अप्रैल 2025 तक पूरे हो जायेंगे।   recent visitors 29

सामान्य प्रशासन विभाग की ट्रांसफर पॉलिसी 2025 बनाकर तैयार, किसको कितना रहेगा ट्रांसफर का पावर

भोपाल  तबादलों के लिए इंतजार कर रहे मध्य प्रदेश के कर्मचारी-अधिकारियों के लिए यह राहत भरी खबर है। तबादलों से बैन हटाने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने ट्रांसफर पॉलिसी 2025 बनाकर तैयार कर ली है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की सलाह पर कुछ आंशिक बदलावों के बाद अप्रैल माह में ही कैबिनेट में तबादला नीति लाने की तैयारी चल रही है। पिछले 3 साल से तबादले की बाट जोह रहे सरकारी कर्मचारी-अधिकारियों के लिए एक अच्छी खबर आई है। प्रदेश में तबादला एक्सप्रेस को जल्द ही हरी झंडी मिलने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने तबादला नीति का मसौदा तैयार कर लिया है। सीएम डॉ मोहन की सलाह पर कुछ बिंदुओं में बदलाव किया जा सकता है। इस माह के अंत तक तबादला नीति को राज्य शासन की मंजूरी मिल सकती है। अप्रैल माह में ही मंत्री परिषद की बैठक में तबादला नीति 2025 का अनुमोदन किया जा सकता है। पॉलिसी के अनुसार, करीब 15 दिन से एक महीने तक तबादलों से प्रतिबंध हटाया जा सकता है। आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में आखिरी बार तबादला नीति 2021-22 में लागू की गई थी। उसके बाद अब तक कोई नई नीति नहीं आई है। अब डॉ मोहन सरकार में नई तबादला नीति 2025 लागू होगी। तबादला नीति में ये बिंदू हो सकते हैं शामिल     तबादला नीति में इस बात का प्रावधान रहेगा कि 3 साल से ज्यादा समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारी-कर्मचारियों को हटाया जाए। ऐसे अधिकारियों को दूसरे जिलों में भी भेजा जाएगा।     माना जा रहा है कि किसी भी विभाग में अधिकतम 10 फीसदी कर्मचारियों के तबादले ही हो सकेंगे।     जो अधिकारी-कर्मचारी स्वयं के व्यव पर ट्रांसफर करवाएंगे, उन्हें किसी भी प्रकार का भत्ता नहीं दिया जाएगा।     प्रशासनिक आधार पर होने वाले तबादले में सरकार भत्ता प्रदान करेगी।     मंत्रियों को उनके विभाग के कर्मचारियों के तबादले को लेकर अधिकार प्रदान किए जाएंगे।     जिले के अंदर ट्रांसफर करने का अधिकार प्रभारी मंत्री को दिया जाएगा। प्रभारी मंत्री की अनुशंसा के आधार पर जिला कलेक्टर जिले के अंदर ट्रांसफर कर सकेंगे।     जिले के बाहर तबादला विभागीय मंत्रियों की अनुशंसा पर होंगे, लेकिन राजपत्रित अधिकारियों का तबादला करने के लिए मुख्यमंत्री समन्वय की प्रक्रिया अपनाना होगी।     स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग से जुड़े तबादलों में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।     विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को मांगी गई लोकेशन पर ट्रांसफर दिया जाएगा।   recent visitors 24

26 ट्रेनें अप्रैल और मई में रहेंगी कैंसल, तीसरी लाइन के इंटरलाकिंग कार्य के चलते ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा

भोपाल उत्तर पूर्व रेलवे के गोरखपुर मंडल के अंतर्गत तीसरी लाइन के इंटरलाकिंग कार्य के चलते ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा। इस कारण भोपाल मंडल से गुजरने वाली 26 ट्रेनों को अलग-अलग तिथियों में निरस्त किया है। रेलवे प्रशासन द्वारा जारी सूचना के अनुसार ये ट्रेनें 17 अप्रैल से 7 मई तक अलग-अलग दिनों में निरस्त रहेंगी। प्रभावित ट्रेनों में पुणे, कोचुवेली, सिकंदराबाद, यशवंतपुर, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, ओखा, पनवेल, बांद्रा टर्मिनस तथा लोकमान्य तिलक टर्मिनस जैसे गंतव्यों से चलने वाली प्रमुख लंबी दूरी की ट्रेनें शामिल हैं।   ये ट्रेनें रहेंगी कैंसल पुणे-गोरखपुर तीन मई, गोरखपुर-कोचुवेली 27 अप्रैल, 1, 2, 4 मई, कोचुवेली-गोरखपुर 30 अप्रैल, 4, 6, 7 मई, गोरखपुर-सिकंदराबाद 30 अप्रैल। सिकंदराबाद-गोरखपुर एक मई। गोरखपुर-यशवंतपुर 26 अप्रैल। सिकंदराबाद-गोरखपुर 28 अप्रैल। गोरखपुर-एलटीटी 22 एवं 29 अप्रैल। एलटीटी-गोरखपुर 23, 30 अप्रैल। एलटीटी-गोरखपुर 27 अप्रैल से तीन मई। गोरखपुर-एलटीटी 27 अप्रैल से तीन मई। गोरखपुर-यशवंतपुर 22 व 29 अप्रैल। यशवंतपुर-गोरखपुर 24 अप्रैल व एक मई। गोरखपुर-पुणे 24 अप्रैल व एक मई। पुणे-गोरखपुर 26 अप्रैल व तीन मई। गोरखपुर-ओखा 24 अप्रैल व एक मई। ओखा-गोरखपुर 27 अप्रैल व चार मई तक निरस्त रहेगी। इधर… मौसम साफ, फिर भी देरी से चल रहीं ट्रेनें भोपाल में गुरुवार को रेलवे यात्री मौसम साफ होने के बावजूद परेशान हुए। कई प्रमुख ट्रेनें 30 मिनट से लेकर 2 घंटे तक की देरी से भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंचीं। वहीं, कुछ ट्रेनों की लेटलतीफी तो 3 से 6 घंटे तक दर्ज की गई, जिससे यात्रियों को लंबा इंतजार करना पड़ा। स्टेशन पर यात्रियों की खासी भीड़ देखने को मिली, लेकिन जानकारी के अभाव और ट्रेनों के अनिश्चित आगमन समय ने उनकी परेशानी को और बढ़ा दिया। यात्रियों ने शिकायत की कि प्लेटफार्म पर ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के संबंध में समय पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की जा रही थी, जिससे उन्हें घंटों तक दुविधा में रहना पड़ा।   ट्रेनें देरी से पहुंची भोपाल     12138 पंजाब मेल : एक घंटा     12406 गोंडवाना : 24 मिनट     11058 अमृतसर : डेढ़ घंटा     12920 मालवा : 2 घंटे 06 मिनट     12156 भोपाल एक्स : आधा घंटा     12722 दक्षिण एक्स: 28 मिनट     18237 छत्तीसगढ़ : 28 मिनट     12853 अमरकंटक : 30 मिनट     22537 कुशीनगर : 35 मिनट यात्री भी हो रहे परेशान भोपाल स्टेशन पर ट्रेनों की लेटलतीफी से परेशान यात्री जब वेटिंग एरिया में बैठे तो वहां भी उन्हें राहत नहीं मिली। प्लेटफार्म एक पर बने छह नंबर वेटिंग एरिया में वाशरूम की हालत खस्ता है। वाशरूम में पानी की व्यवस्था नहीं है। recent visitors 29

मंत्री राजपूत ने किया 815.64 लाख के विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन एवं लोकार्पण

भोपाल खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री एवं प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने शुक्रवार को गुना जिले के शासकीय महाविद्यालय चाचौड़ा बीनागंज में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीण/ शहरी सशक्तिकरण और जनकल्याण को साकार करने 815.64 लाख लागत के विभिन्न विकास कार्यो का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। कार्यक्रम का शुभांरभ कन्या पूजन के साथ हुआ। मंत्री राजपूत ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत आंगनवाडी भवन निर्माण, सामुदायिक भवन निर्माण, सीसी रोड निर्माण, पंचायत भवन ग्राम पंचायत झुकरा, सामुदायिक शौचालय, स्टॉपडेम निर्माण ग्राम पंचायत नारायणपुरा, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अंतर्गत नल जल योजना तथा पोस्टल सब ऑफिस कुंभराज सहित कुल 26 कार्यो के लागत राशि 815.64 लाख के विभिन्न विकास कार्यो का शिलान्यास /लोकार्पण किया। इस दौरान मंत्री राजपूत द्वारा 5 दिव्यांगों को ट्राइसाईकिल एवं व्हीलचेयर भी वितरित की गयी। इस अवसर पर विधायक चाचौडा़ श्रीमति प्रियंका पेंची अन्य जनप्रतिनिधिगण सहित जनपद एवं पंचायत प्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।   recent visitors 26

रायपुर : छत्तीसगढ़ में गैर संचारी रोग के ईलाज में आभा आईडी है वरदान गैर संचारी

रायपुर : छत्तीसगढ़ में गैर संचारी रोग के ईलाज में आभा आईडी है वरदान रायपुर छत्तीसगढ़ में गैर संचारी रोग के ईलाज में आभा आईडी है वरदान छत्तीसगढ़ राज्य में अब गैर संचारी रोग (नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज़- एनसीडी) जैसे हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़ , कैंसर के स्क्रीनिंग , इलाज और मॉनिटिरिंग  में डिजिटल तकनीक का उपयोग बड़े स्तर पर किया जा रहा है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत शुरू की गई आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) आईडी इस दिशा में गेमचेंजर साबित हो रही है। आभा आईडी के माध्यम से मरीज अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रख सकते हैं और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से आसानी से साझा कर सकते हैं। इस आईडी की मदद से अस्पतालों, क्लीनिकों और लेबोटरी के बीच जानकारी साझा करना भी आसान हो गया है, जिससे इलाज की गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। छत्तीसगढ़ में आभा आईडी को राष्ट्रीय एनसीडी पोर्टल से जोड़ा गया है। इससे मरीजों की स्क्रीनिंग, डायग्नोसिस, इलाज और मॉनिटरिंग की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित हो गई है।  एएनएम और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर  के लिए मोबाइल और टैबलेट आधारित ऐप्स तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के लिए वेब पोर्टल उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे काम करना आसान हो गया है। संचालक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. प्रियंका शुक्ला का कहना है कि आभा आईडी बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इससे एनसीडी जैसी बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन में मदद मिलेगी। दुर्ग जिले में इस पहल का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। जनवरी 2024 से फरवरी 2025 के बीच, 12,627 आभा आईडी को एनसीडी मरीजों के रिकॉर्ड से जोड़ा गया। इसके परिणामस्वरूप, आभा से जुड़े मरीजों में फॉलोअप रेट 68 प्रतिशत तक पहुंच गया, जबकि बिना आभा आईडी वाले मरीजों में यह केवल 37 प्रतिशत रहा। इसी तरह, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ नियंत्रण में भी आभा से जुड़े मरीजों में सुधार देखा गया। 49 प्रतिशत मरीज नियंत्रण में रहे, जबकि गैर-जुड़े मरीजों में यह आंकड़ा 29 प्रतिशत रहा। डब्ल्यूएचओ की मदद से स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है। राज्य सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन की टीम इस पूरी प्रक्रिया पर सतत निगरानी रख रही है। आभा आईडी को आधार की डेमोग्राफिक जानकारी से जोड़ने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए डब्ल्यूएचओ ने हिंदी में प्रशिक्षण वीडियो भी बनाया है। छत्तीसगढ़ में यह डिजिटल पहल ना सिर्फ बीमारियों के रोकथाम में मददगार साबित हो रही है, बल्कि इससे स्वास्थ्य विभाग की सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा है। recent visitors 31

पीथमपुर के भस्मक संयंत्र परिसर में रखे 307 टन कचरे को नष्ट करने का अंतिम चरण दो सप्ताह बाद शुरू होगा

इंदौर धार जिले के पीथमपुर में विगत दिनों ट्रायल रन के तहत यूनियन कार्बाइड  के 30 टन कचरे को जलाकर नष्ट किया जा चुका है। अब पीथमपुर के भस्मक संयंत्र परिसर में रखे 307 टन कचरे को नष्ट करने का अंतिम चरण दो सप्ताह बाद शुरू होगा। यह संभावना जताई जा रही है कि 1 मई से संयंत्र में 270 किलो प्रति घंटे की दर से यूका के कचरे को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस संबंध में 21 अप्रैल को भोपाल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भस्मक संयंत्र संचालित करने वाली कंपनी एनर्जी एनवायरो के प्रतिनिधियों की बैठक भी होने वाली है।   72 दिन में नष्ट करना है पूरा कचरा हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार, 72 दिन में इस पूरे कचरे को नष्ट करने का कार्य पूर्ण किया जाएगा। गौरतलब है कि पीथमपुर के भस्मक संयंत्र में 28 फरवरी से 9 मार्च के बीच 30 टन यूका के कचरे को ट्रायल रन के तहत नष्ट किया जा चुका है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने एनर्जी इन्वयारों कंपनी को 307 टन यूनियन कार्बाइड का कचरा जलाने से पूर्व अपने प्लांट में आटोमेशन सिस्टम लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत यूका के कचरे को तौलकर निर्धारित मात्रा में भस्मक में डालने की प्रक्रिया ऑटोमेटिक वजन मापी यंत्र लगाने के लिए कहा गया है। पिछले ट्रायल रन में कचरे को मैन्युअली तौलकर कर्मचारी भस्मक संयंत्र में डाल रहे थे। वही भस्मक संयंत्र में ऑटोमेटिक मॉनिटरिंग सिस्टम भी लगाने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि अभी भस्मक संयंत्र की चिमनी पर ही ऑटोमेटिक मॉनिटरिंग सेंसर के माध्यम से निगरानी की गई थी। इसके माध्यम से कचरा जलने के बाद उत्सर्जित होने वाली गैसों की मात्रा का पता चलता था। 900 टन निकलेगी राख, लैंडफिल के लिए अनुमति लेने का प्रयास अभी 30 टन कचरा नष्ट करने के बाद 75 टन राख निकली है। 307 टन यूका का कचरा जलाने के बाद करीब 900 टन राख निकलेगी। ऐसे में इस राख को लैंडफिल में सुरक्षित तरीके से दबाया जाएगा। वर्तमान में भस्मक संयंत्र का संचालन करने वाली कंपनी के पास पांच लैंडफील साइट है। यूका के कचरे के जलाने के बाद बची राख को जमीन में दबाने के लिए अलग से लैंडफिल तैयार किया जाना है। ऐसे में कंपनी इस संबंध के नया लैंडफिल तैयार करने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति लेने का प्रयास कर रही है। अनुमति मिलने के बाद लैंडफिल तैयार करने के लिए खुदाई की जाएगी। तब तक एनर्जी इनवायरो कंपनी अपने परिसर में ही शेड में यूका कचरा जलाने के बाद बची हुई राख को रखेगी। recent visitors 26