सागर : नरवाई जलाने पर 35 किसानों पर FIR: 27 नामजद और 8 अज्ञात किसानों के खिलाफ हुआ केस,  अर्थदंड की भी हो सकती है कार्रवाई

Sagar: FIR against 35 farmers for burning stubble: Case filed against 27 named and 8 unknown farmers, fine action can also be taken सागर । जिले में फसल कटाई के बाद खेत में खड़ी नरवाई जलाने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्ती से कार्रवाई कर रहा है। कलेक्टर के नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगाने और नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश के बाद जिले में दोषियों पर कार्रवाई की जा रही है। नरवाई की आग फैलने से आसपास के किसानों की फसलें जलने की घटनाएं जिले में सामने आई हैं। जिसके बाद प्रशासन एक्शन मोड़ में आया। प्रशासन ने नरवाई जलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए अब तक जिले में 35 एफआईआर दर्ज कराई हैं। जिसमें 27 नामजद और 8 अज्ञात किसानों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराए गए हैं। किसान अन्य विकल्प पर करें काम- कलेक्टर कलेक्टर संदीप जीआर ने बताया कि नरवाई जलाने से पर्यावरण प्रदूषण होता है और फॉरेस्ट फायर या अग्नि दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। किसानों को नरवाई नहीं जलाकर उसके विकल्प पर काम करने की जरूरत है। नरवाई जलाने पर जिले में प्रतिबंध लगाया गया है। ऐसे में जिले के सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार को निर्देश दिए गए हैं कि वे लगातार ऐसी घटनाओं पर नजर रखें। यदि कोई नरवाई जलाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाए। किसानों पर हो सकती है आर्थिक जुर्माने की कार्रवाई  शासन के निर्देश के अनुसार, जिला दंडाधिकारी किसानों को नरवाई नहीं जलाने के लिए नियमित समझाइश दें। समझाइश के बाद भी कोई नियमों का उल्लंघन करे तो उस पर आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान है। यदि किसान का रकबा 2 एकड़ से कम है तो पर्यावरण क्षति पूर्ति राशि 2500, 2 एकड़ से 5 एकड़ होने पर 5000 और 5 एकड़ से अधिक होने पर 15000 रुपए पर्यावरण क्षति पूर्ति राशि वसूली जाएगी। कलेक्टर ने जिले के सभी किसानों से कहा है कि वे खेतों में नरवाई फसल की कटाई के बाद बचा अवशेष नहीं जलाएं। किसान नरवाई के निस्तारण के लिए वैकल्पिक उपाय जैसे हैप्पी सीडर, सुपर सीडर का उपयोग, जैविक खाद बनाने, मल्चर मशीन का उपयोग करने या कंपोस्टिंग विधि से अवशेषों को नष्ट करने का काम करें। नरवाई जलाने पर इनके खिलाफ हुई कार्रवाई  नरवाई जलाने के मामलों में सागर नगर के ग्राम पटकुई में अज्ञात के विरुद्ध, सागर ग्रामीण में ग्राम पथरिया हाट में बहादुर चौहान, रहली के ग्राम जूना और मडला में रामअवतार कुर्मी, ग्राम भैंसा में अज्ञात के विरुद्ध, खुरई के ग्राम बसाहरी में अरविंद पटेल, केसली के ग्राम पुतर्रा में यदुवीर लोधी, लक्ष्मी लोधी, ग्राम घाना में हेमराज यादव, धमेंद्र यादव, ग्राम जरूआ में चंदन राजपूत, ग्राम जैतपुर डोमा में शिखरचंद जैन, शुभम स्वामी, बांदरी के ग्राम मोठी में अज्ञात के विरुद्ध, देवरी के ग्राम नादपुर में भूपेन्द्र लोधी, ग्राम नादपुर में प्रभाबाई अहिरवार, ग्राम घोषी पट्टी में जनकरानी, राजेन्द्र और पुरुषोत्तम, बीना के ग्राम बेलई में अज्ञात के विरुद्ध, जैसीनगर के ग्राम रमपुरा में राजाभाई दांगी, गोविंद सिंह दांगी, गढ़ाकोटा के ग्राम खदरी में अमोल कुर्मी, ग्राम फुलर के प्रीतम कुर्मी, बंडा के दलपतपुर के ग्राम में अज्ञात, सुरखी के ग्राम सुल्तानपुर में अज्ञात, तरौली में अज्ञात, बांदरी के ग्राम विदवास में राजकुमार यादव, ग्राम उजनेट में मोहन, अमन, हरिराम, शैलेंद्र , राहतगढ़ के ग्राम हिरणखेड़ा के नाथूराम, बीना के ग्राम गोदना में अज्ञात, ग्राम बमोरी खुर्द में अज्ञात, बंडा के ग्राम क्वायला में अज्ञात और राहतगढ़ के ग्राम सिनेमा में माखन सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। recent visitors 120

भारत 2047 तक दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर … जर्मनी और जापान को पीछे छोड़ देगी इंड‍ियन इकोनॉमी

नई दिल्‍ली जाने-माने निवेशक मार्क मोबियस का मानना है कि भारत में दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ताकत है। अगर भारत अपनी मजबूत नीतियों पर टिका रहता है तो वह यह लक्ष्य हासिल कर सकता है। मोबियस ने ट्रेड वॉर पर कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। लेकिन, अगले कुछ महीनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप कई देशों के साथ व्यापार समझौते करेंगे। इससे बाजार शांत हो जाएगा और बड़ी मंदी का खतरा टल जाएगा। उन्होंने भारत से क्वालिटी कंट्रोल जैसी बाधाओं को हटाने और अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने की सलाह दी है। नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने भी कहा है कि भारत अगले तीन सालों में जर्मनी और जापान को पीछे छोड़ देगा। 2047 तक भारत दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। ये दावे ऐसे समय किए गए हैं जब ट्रंप की टैरिफ नीतियों से पूरी दुनिया में हलचल है। मार्क मोबियस के अनुसार, भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। कुछ सालों में भारत 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। अभी अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान ही भारत से आगे हैं। आईएमएफ के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 4.3 ट्रिलियन डॉलर की है। यह जापान (4.4 ट्रिलियन डॉलर) और जर्मनी (4.9 ट्रिलियन डॉलर) से थोड़ी ही कम है। अनुमान है कि भारत इस साल जापान से और 2027 तक जर्मनी से आगे निकल जाएगा। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में ऐसे आएगी तेजी मोबियस ईएम ऑपर्च्युनिटीज फंड चलाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर भारत आयात पर लगी रोक हटा दे तो मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में तेजी आएगी। इससे अर्थव्यवस्था और भी मजबूत होगी। उन्होंने भारतीय शेयर बाजार के बारे में कहा कि अमेरिकी टैरिफ लगने से पहले भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट आई थी। मोबियस ने कहा, 'बाजार में रिकवरी जरूर आएगी। ऐसे में अच्छे शेयरों को एवरेज करने का यह सही समय है। अगर किसी निवेशक के पास शेयर पहले से हैं तो उसे होल्ड करने का यह सबसे अच्छा समय है।' इसका मतलब है कि अगर आपके पास पहले से शेयर हैं तो उन्हें अभी बेचना नहीं चाहिए। हाल ही में भारतीय शेयर बाजार में तेजी आई है। पिछले पांच दिनों में सेंसेक्स और निफ्टी करीब 4 फीसदी बढ़ चुके हैं। 3 साल में जर्मनी और जापान से आगे निकल जाएगा भारत उधर, नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम ने भी भारत की आर्थिक तरक्की के बारे में कई बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि भारत अगले तीन सालों में जर्मनी और जापान से आगे निकल जाएगा। 2047 तक भारत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत के पास युवा लोगों की बड़ी संख्या है। यह भारत के लिए अच्छी बात है। भारत दुनिया के लिए काम करने वाले लोगों का भरोसेमंद स्रोत बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत शिक्षा का केंद्र बन सकता है। उन्होंने भारतीय कंपनियों से दुनिया में सबसे आगे रहने का लक्ष्य रखने को कहा है। मार्क मोबियस ने भारत के बारे में कुछ चिंताएं भी जताईं। उन्होंने कहा कि भारत में क्वालिटी कंट्रोल जैसी कई बाधाएं हैं। अगर भारत इन बाधाओं को हटा दे तो यह और भी तेजी से तरक्की कर सकता है। उन्होंने अमेरिका के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने की भी सलाह दी है। इससे दोनों देशों को फायदा होगा। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता करने की बात चल रही है। दोनों देश 2025 से पहले टैरिफ कम करने पर काम कर रहे हैं। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ेगा। मोबियस ने ट्रेड वार के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था में कुछ दिक्कतें आ सकती हैं। लेकिन, डोनाल्‍ड ट्रंप कई देशों के साथ व्यापार समझौते करेंगे। इससे बाजार शांत हो जाएगा और बड़ी मंदी का खतरा टल जाएगा। recent visitors 55

श्रीमती शुन्नी बाई एवं टीकम सिंह सेवता ने श्रमिक पंजीयन को पुनर्जीवित स्थिति में लाने के लिए शासन-प्रशासन को दिया धन्यवाद

रायपुर सुशासन तिहार में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जनसरोकार से जुड़े समस्याओं के समाधान के लिए तेजी से कदम बढ़ाऐ गए हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा अनुरूप जिले में सुशासन तिहार में शासन की लोकहितकारी योजनाओं को जनमानस तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्धतापूर्वक कार्य किया जा रहा है। इसकी एक बानगी दिखाई दी, श्रम विभाग में प्राप्त आवेदन में जिसमें नगर निगम राजनांदगांव के शीतला माता वार्ड निवासी श्रीमती भारती देवांगन की समस्या का गुणवत्तापूर्ण निराकरण किया गया और उन्हें तत्काल श्रमिक कार्ड बनाकर दिया गया। सुशासन तिहार अंतर्गत श्रीमती भारती देवांगन ने श्रमिक कार्ड बनाने के लिए आवेदन किया था। छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत श्रमपदाधिकारी कार्यालय राजनांदगांव में आवेदन किया गया था। इस पर श्रम विभाग में तत्काल पंजीयन किया गया एवं श्रमिक कार्ड प्रदान किया गया। श्रीमती भारती देवांगन ने कहा कि श्रमिक कार्ड मिलने से राहत मिली है और आगे इसका फायदा उन्हें मिलेगा, जिससे वे श्रम विभाग अंतर्गत शासन की अन्य योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार सरकार की एक बहुत अच्छी पहल है।     सुशासन तिहार अंतर्गत श्रीमती शुन्नी बाई एवं टीकम सिंह सेवता ने असंगठित कार्ड को रद्द करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था। श्रमपदाधिकारी कार्यालय राजनांदगांव द्वारा आवेदन पर कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल अंतर्गत आवेदकों के पंजीयन को पुनर्जीवित स्थिति में लाया गया है। डुप्लीकेसी के कारण उनका श्रमिक कार्ड निरस्त हो गया था। जिसे आधार कार्ड मंगाकर पुन: तकनीकी दिक्कतों को दूर करते हुए.   आवेदकों के पंजीयन को पुनर्जीवित स्थिति में लाया गया। समस्याओं के गुणवत्तापूर्ण निराकरण होने पर श्रीमती शुन्नी बाई एवं टीकम सिंह सेवता ने सुशासन तिहार के अवसर पर शासन-प्रशासन को धन्यवाद दिया। आवेदक मंडल अंतर्गत संचालित योजना के लिए पात्रतानुसार आवेदन प्रस्तुत कर सकते है। इसी तरह श्रीमती संगीता साहू ने श्रमिक कार्ड अंतर्गत अपने बच्चे को छात्रवृत्ति दिलाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था। श्रम विभाग द्वारा आवेदन पर कार्रवाई करते हुए हितग्राही को कार्यालय बुलाकर आगामी शैक्षणिक सत्र 2025-26 हेतु असंगठित कर्मकार के बच्चे हेतु छात्रवृत्ति योजना के तहत निर्धारित अध्ययनरत प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। आगामी शैक्षणिक सत्र हेतु नियमानुसार आवेदन करने पर छात्रवृत्ति योजना अंतर्गत लाभ दिया जा सकेगा। recent visitors 28

भारत के स्मार्टफोन मार्केट का 8% हिस्सा ऐपल का, 10 लाख नौकरियां सेमीकंडक्टर से

नई दिल्ली  आईफोन निर्माता कंपनी ऐपल आपदा में अवसर का फायदा उठाने की तैयारी में है। अमेरिका से चीन के ट्रेड वॉर को देखते हुए ऐपल भारत में आईफोन का प्रोडॅक्शन तेजी से बढ़ा रही है। अनुमान है कि मार्च 2025 में बीते 12 महीनों में भारत में करीब 22 बिलियन डॉलर यानी तकरीबन 1.90 लाख रुपए के आईफोन बनाए जा चुके हैं। यह पिछले साल की तुलना में 60% ज्यादा है। यह तब है जब ऐपल चीन से अपनी सप्लाई चेन को दूर ले जा रहा है और प्रोडॅक्शन में यह बढ़ोतरी उसी का नतीजा बताया जा रहा है। इसे लेकर चीन भी टेंशन में है, क्योंकि ऐसे में उसकी इस मामले में बादशाहत खत्म हो सकती है। जानते हैं पूरी कहानी। दुनिया में हर पांचवां आईफोन भारत में बना ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब दुनिया में बनने वाले हर पांच आईफोन में से एक भारत में बन रहा है। यह $22 बिलियन का आंकड़ा आईफोन की फैक्ट्री से निकलने वाली कीमत है। यह उसकी रिटेल बिक्री कीमत। इस उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा फॉक्सकॉन की दक्षिण भारत स्थित विशाल फैक्ट्री से आता है। टाटा ग्रुप जिसने विस्ट्रॉन और पेगाट्रॉन के ऑपरेशन्स को अपने नियंत्रण में ले लिया है वह ऐपल की भारत बेस्ड सप्लाई चेन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इन सबमें बड़ी भूमिका सेमीकंडक्टरों की है, जिसे लेकर अमेरिका और चीन के बीच बड़ी जंग छिड़ी हुई है। सेमीकंडक्टर क्या हैं, इसे समझते चलिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरूरी कंपानेंट्स में से एक अर्धचालक यानी सेमीकंडक्टर है, जिसे एकीकृत सर्किट (IC) भी कहा जाता है। सेमीकंडक्टर माइक्रोचिप्स आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, यातायात, स्वास्थ्य सेवा, सैन्य प्रणाली, संचार को सक्षम बनाते हैं। माइक्रोचिप्स इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आवश्यक हैं: रेडियो, टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप, स्मार्टफोन, वाहन और मेडिकल डायग्नोस्टिक उपकरण। माइक्रोचिप्स इतने महत्वपूर्ण हैं कि कुछ लोग उन्हें 21वीं सदी का 'नया तेल' भी कहते हैं। ऐपल आईफोन के लिए ये जरूरी चीज है। बीते साल Apple ने भारत में भी सेमीकंडक्टर चिप्स के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए चर्चा की है, जिससे भारत में भी चिप्स का निर्माण शुरू हो सके। ऐपल आईफोन के लिए 2026 मील का पत्थर ऐपल आईफोन के लिए सेमीकंडक्टर बनाने वाली प्रमुख कंपनी ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट के अनुसार, ऐपल को 2026 तक सेमीकंडक्टर चिप्स की बड़ी मात्रा में जरूरत होगी। तब तक आईफोन निर्माता अपनी वैश्विक विनिर्माण क्षमता का 26 प्रतिशत भारत में ट्रांसफर कर चुके होंगे। ऐपल की वर्तमान सेमीकंडक्टर खपत लगभग 72 बिलियन डॉलर है, क्योंकि इसके सभी हाई क्वालिटी प्रोडॅक्ट जैसे आईफोन, आईपैड, मैक, ऐपल वॉचेज और एयरपॉड्स सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में भारत की संभावना इस मामले में काफी बड़ी है। ट्रंप के टैरिफ को देखते हुए ऐपल ने बढ़ाया एक्सपोर्ट ऐपल ने पिछले वित्तीय वर्ष में भारत से 1.5 ट्रिलियन रुपए (लगभग $17.4 बिलियन) के आईफोन निर्यात किए। अमेरिका को होने वाले शिपमेंट में तब तेजी आई, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में 'रेसिप्रोकल' टैरिफ की घोषणा की। इसके बाद ऐपल ने भारत से निर्यात को तेजी से बढ़ाया। हालांकि, हाल ही में हुई घोषणा में स्मार्टफोन सहित इलेक्ट्रॉनिक्स को उन टैरिफ से छूट दी गई थी, लेकिन चीन पर लगने वाले बाकी टैक्स (कुल 245%) अभी भी लागू हैं। ट्रंप का चीन से आने वाले सामान पर 20% का अलग शुल्क, जिसका उद्देश्य फेंटानिल को लेकर बीजिंग पर दबाव डालना है, वह भी अभी जारी है। भारत में बने डिवाइस पर अमेरिका नहीं लगाता टैक्स ऐपल के लिए भारत एक अपेक्षाकृत सुरक्षित जगह है। भारत में बने डिवाइस पर अभी अमेरिका में कोई टैक्स नहीं लगता है। विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी अमेरिकी ग्राहकों के लिए अपनी भारतीय उत्पादन लाइनों पर ज़्यादा निर्भर करेगी। चीन को लेकर यह पेंच अभी तक बरकरार हालांकि एप्पल ने भारत में उत्पादन बढ़ाया है, लेकिन वह अभी भी चीन से काफ़ी जुड़ा हुआ है। कंपनी लगभग 200 सप्लायरों और दशकों से बने एक मजबूत सिस्टम पर निर्भर है। यहां तक कि ऐपल के CEO टिम कुक ने भी चीन की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को माना है। चीन से भारत मार्केट शिफ्ट में लगेगा बहुत वक्त ट्रंप अरसे से अमेरिका में आईफोन के प्रोडॅक्शन पर जोर दे रहे हैं। हालांकि, ऐपल के लिए निकट भविष्य में ऐसा करना मुश्किल है। क्योंकि अमेरिका में उपयुक्त सुविधाएं और कुशल श्रमिक उपलब्ध नहीं हैं। ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस के 2022 के एक आकलन में अनुमान लगाया गया था कि ऐपल के मैन्युफैक्चरिंग का सिर्फ 10% हिस्सा चीन से बाहर निकालने में आठ साल लगेंगे। इससे पता चलता है कि चीन का सप्लाई बेस कितना मजबूत है। क्या भारत बन पाएगा चीनी मार्केट का विकल्प भारत में लगातार ऐसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है कि वह आईफोन जैसे प्रोडक्ट का शानदार उत्पादन कर सकता है। ऐपल अब भारत में अपने सभी आईफोन मॉडल बनाता है, जिसमें प्रीमियम टाइटेनियम प्रो मॉडल भी शामिल हैं। दरअसल, नरेंद्र मोदी सरकार की प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम और इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के लिए दिए जाने वाले $2.7 बिलियन के नए सब्सिडी का भी योगदान है। PLI स्कीम का मतलब है कि सरकार उत्पादन बढ़ाने पर कंपनियों को प्रोत्साहन देती है। भारत के स्मार्टफोन मार्केट का 8% हिस्सा ऐपल का पिछले वित्तीय वर्ष में भारत में ऐपल की बिक्री लगभग $8 बिलियन थी, जिसमें ज्यादातर आईफोन शामिल थे। हालांकि कंपनी के पास अभी भी भारत के स्मार्टफोन बाजार का सिर्फ 8% हिस्सा है। मगर, कंपनी अभी भारत को रिटेल डेस्टिनेशन के बजाय अपने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग का बनाना चाहती है। माना जा सकता है कि कंपनी भारत में अपने बेहतर भविष्य की संभावनाओं की उम्मीद लगाए हुए है। ये उम्मीद है…10 लाख नौकरियां सेमीकंडक्टर से बीते साल नवंबर में आई एक रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 2026 तक भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र 10 लाख नौकरियां पैदा करेगा। टैलेंट सॉल्यूशंस कंपनी एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट में कहा गया है कि चूंकि भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब बनने वाला है, लिहाजा यह उद्योग 2026 तक अनेक क्षेत्रों में 10 लाख नौकरियां देने के लिए तैयार है।चिप सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन में अनुमानित 3,00,000 नौकरियां, एटीएमपी में करीब 2,00,000 पद और चिप डिजाइन, … Read more

फिर दाम बढ़ाने वाले हैं Airtel-Jio-Vi! कस्टमर्स की जेब पर पड़ेगा तगड़ा असर

Airtel-Jio-Vi are going to increase the price again! It will have a huge impact on the pockets of the customers भारतीय टेलीककॉम यूजर्स को जल्द एक बार फिर से टैरिफ हाइक झेलना पड़ सकता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, Airtel, Reliance Jio और Vodafone Idea (Vi) जैसे टेलिकॉम ऑपरेटर्स 2025 के अंत तक टैरिफ में बढ़ोतरी शुरू कर सकते हैं. यह उनकी हालिया टैरिफ रिपेयर स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जिसका मकसद रेवेन्यू को बेहतर करना है. 2025 में टैरिफ बढ़ोतरी ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Bernstein के एनालिसिस के हवाले से Moneycontrol की रिपोर्ट बताती है कि भारत में टेलिकॉम प्रोवाइडर्स दिसंबर 2025 तक टैरिफ में 10 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकते हैं. यह पिछले छह सालों में चौथा बड़ा प्राइस हाइक हो सकता है. हाल ही में जुलाई 2024 में टेलिकॉम कंपनियों ने 25 प्रतिशत तक टैरिफ बढ़ाया था. इस बढ़ोतरी की वजह 4G को मजबूत करने और 5G टेक्नोलॉजी के विस्तार के लिए बढ़ती पूंजी की जरूरतें हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, “हम नवंबर-दिसंबर 2025 में टैरिफ बढ़ोतरी की उम्मीद करते हैं, जो इंडस्ट्री में चल रहे टैरिफ रिपेयर प्रयासों के अनुरूप है. यह कदम सेक्टर के लिए रेवेन्यू विजिबिलिटी बढ़ाने वाला एक बड़ा कदम हो सकता है.” Bernstein का अनुमान है कि 2025-27 के दौरान Airtel और Jio को मिड-टू-हाई टीन रेवेन्यू ग्रोथ मिलेगी. जो स्टेडी सब्सक्राइबर एडिशन और मजबूत एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) ग्रोथ की बदौलत होगी. टेलिकॉम ऑपरेटर्स सिर्फ नए कंज्यूमर्स जोड़ने पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि मौजूदा यूजर्स से मिलने वाले रेवेन्यू शेयर को भी बढ़ाएंगे. दूसरी ओर, Vi की वित्तीय स्थिति मुश्किल में है, हालांकि सरकार द्वारा स्पेक्ट्रम ड्यूज को इक्विटी शेयर्स में बदलने की सहमति से कुछ राहत मिली है. इससे सरकार की हिस्सेदारी 22.6 प्रतिशत से बढ़कर 48.99 प्रतिशत हो गई है. रिपोर्ट में कहा गया है, “इक्विटी कन्वर्जन से सरकार का तीन-खिलाड़ी मार्केट स्ट्रक्चर को बनाए रखने का कमिटमेंट दिखता है और यह प्राइस डिसिप्लिन व भविष्य में टैरिफ बढ़ोतरी की संभावना को बढ़ाता है.” Bernstein को दिसंबर 2025 में 15 प्रतिशत टैरिफ बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिसके बाद 2026 से 2033 तक हर साल बढ़ोतरी हो सकती है. हालांकि, टैरिफ बढ़ोतरी नियमित हो सकती है. लेकिन 2019-2025 की तुलना में इसकी मात्रा कम हो सकती है. टैरिफ बढ़ोतरी से टेलिकॉम ऑपरेटर्स को 10 प्रतिशत टैरिफ कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल करने में मदद मिलेगी. साथ ही, Vi का कैपिटल एक्सपेंडिचर 2026 की दूसरी छमाही में यूजर बेस के घटने को स्थिर करने में मदद कर सकता है. Airtel और Jio की मजबूत पोजीशन Airtel और Jio को टैरिफ बढ़ोतरी से सबसे ज़्यादा फायदा होने की उम्मीद है. Airtel का ARPU तीसरी तिमाही FY25 में ₹245 तक पहुंच गया, जो इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा है, जबकि Jio का ARPU ₹203.3 रहा. दोनों कंपनियां 5G नेटवर्क के विस्तार और डेटा मॉनेटाइजेशन पर फोकस कर रही हैं. Bernstein का अनुमान है कि Airtel और Jio 2025-27 में मिड-टू-हाई टीन रेवेन्यू ग्रोथ देखेंगे, जिसमें Airtel की फ्री कैश फ्लो और बैलेंस शीट स्ट्रेंथ में सुधार होगा. Airtel का रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड (ROCE) FY27 तक ~18% तक पहुंच सकता है. Jio, जो 41.6% रेवेन्यू मार्केट शेयर के साथ लीडर है. 5G सब्सक्राइबर्स और डेटा यूज बढ़ाने पर ध्यान दे रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि Jio का 2025 में संभावित IPO इसे टैरिफ बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है. Vi की चुनौतियां और संभावनाएं Vodafone Idea को सब्सक्राइबर लॉस और 5G रोलआउट में देरी की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, हालिया कैपिटल इन्फ्यूजन और सरकार की इक्विटी हिस्सेदारी बढ़ने से Vi को कुछ राहत मिली है. विश्लेषकों का मानना है कि Vi की नेटवर्क डिप्लॉयमेंट से मार्केट शेयर में सुधार हो सकता है, खासकर 2026 की दूसरी छमाही में. टैरिफ बढ़ोतरी Vi के लिए रिकवरी का अहम कदम हो सकता है. मार्केट कंसॉलिडेशन और प्राइस डिसिप्लिन टैरिफ बढ़ोतरी और 5G मॉनेटाइज़ेशन से मार्केट और कंसॉलिडेट होगा. Bernstein का अनुमान है कि FY27 तक Jio का रेवेन्यू शेयर 48% और Airtel का 38% होगा. सरकार का तीन-खिलाड़ी मार्केट को बनाए रखने का कमिटमेंट प्राइस डिसिप्लिन को बढ़ावा देगा, जिससे भविष्य में टैरिफ बढ़ोतरी की संभावना बढ़ेगी. recent visitors 101

लॉकडाउन के चलते विवाह स्थगित, होटल संचालक ने एडवांस नहीं लौटाने पर आयोग ने नाराजगी जताई

रायपुर  छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने एक शिकायतकर्ता के होटल बुकिंग के पूरे पैसे वापस करने का आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि Covid-19 लॉकडाउन एक आपदा थी। यह ऐसी परिस्थिति थी, जिस पर उपभोक्ता का कोई नियंत्रण नहीं था। इस फैसले के साथ, राज्य आयोग ने बिलासपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के आदेश के खिलाफ एक उपभोक्ता की अपील को स्वीकार कर लिया। पहले, जिला आयोग ने केवल 50,000 रुपये वापस करने का आदेश दिया था। यह एडवांस राशि का आधा हिस्सा था। भाई की शादी के लिए बुक किया था होटल दरअसल, पूरा मामला होटल इंटरसिटी इंटरनेशनल, बिलासपुर से जुड़ा है। विकास कुमार गुप्ता नाम के एक व्यक्ति ने अपने भाई की शादी के लिए 21-22 अप्रैल 2021 को होटल बुक किया था। कुल बुकिंग राशि 4,91,000 रुपये थी। इसके लिए 1,00,000 रुपये का एडवांस दिया गया था, लेकिन Covid-19 महामारी के कारण सरकार ने लॉकडाउन लगा दिया। इस वजह से शादी तय तारीखों पर नहीं हो सकी। शादी की तारीख बदलने की कोशिश की गई, लेकिन होटल ने बुकिंग को मानने या एडवांस वापस करने से इनकार कर दिया। जिला आयोग ने सुनाया था फैसला जिला आयोग ने जून 2024 के अपने आदेश में माना कि लॉकडाउन एक अप्रत्याशित घटना थी। लेकिन, उन्होंने केवल 50% रिफंड की अनुमति दी। उन्होंने कहा कि होटल प्रशासनिक शुल्क के रूप में कुछ राशि रखने का हकदार है। हालांकि, राज्य आयोग ने कहा कि जिला आयोग का 50% कटौती करने का तर्क सही नहीं है। आयोग ने कहा कि कलेक्टर ने 14 अप्रैल से 6 मई, 2021 तक पूरे बिलासपुर जिले को कंटेनमेंट जोन घोषित कर दिया था। इसका मतलब है कि शादी की तारीखों के दौरान भी जिले में पाबंदी थी। आयोग ने जोर देकर कहा कि सरकारी पाबंदियों को देखते हुए, होटल उस दौरान कोई भी कार्यक्रम नहीं कर सकता था। इसलिए, होटल को नुकसान होने की संभावना नहीं है, जैसा कि उन्होंने दावा किया था। राज्य आयोग के अध्यक्ष जस्टिस गौतम चौरड़िया और सदस्य प्रमोद कुमार वर्मा की बेंच ने कहा, "लॉकडाउन की अवधि के दौरान, प्रतिवादी न तो व्यवस्था कर सकता था और न ही अन्य बुकिंग ले सकता था। प्रशासनिक शुल्क के नाम पर 50% की कटौती सही नहीं है। पूरा रिफंड देना ही न्यायसंगत है।" जिला आयोग के आदेश को बदला इसलिए, राज्य आयोग ने जिला आयोग के आदेश को बदल दिया। उन्होंने होटल को शिकायतकर्ता को 1,00,000 रुपये की पूरी एडवांस राशि वापस करने का आदेश दिया। मानसिक पीड़ा (5,000 रुपये) और मुकदमेबाजी के खर्च (2,000 रुपये) के लिए मुआवजे के पहले के आदेश को बरकरार रखा गया। यह पैसा 45 दिनों के भीतर देना होगा।   recent visitors 33

2 हजार से ज्यादा UPI करने पर देना होगा GST? सरकार ने बता दी सच्चाई, ट्रांजैक्शन करने से पहले समझ लें पूरी बात

GST will have to be paid for doing more than thousand UPI UPI से पेमेंट करना जितना आसान है, उतनी ही तेजी से इसके बारे में अफवाहें भी फैलती हैं. सोशल मीडिया पर यह चर्चा गर्म है कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन्स पर GST लगेगा. लेकिन क्या यह सच है या सिर्फ हवा में उड़ती खबर? सरकार ने इन अफवाहों पर फुल स्टॉप लगा दिया है. GST और UPI: सच क्या है? वित्त मंत्रालय ने PIB रिलीज के जरिए साफ किया कि ₹2,000 से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन्स पर Goods and Services Tax (GST) लगाने का दावा पूरी तरह गलत, भ्रामक और बिना किसी आधार के है. अभी सरकार के सामने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है. इसको लेकर लोग सोशल मीडिया पर गलत अफवाह फैला रहे हैं. मंत्रालय ने बताया कि GST कुछ खास पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स पर लगने वाले चार्ज जैसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) पर लागू होता है. लेकिन जनवरी 2020 से सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने 30 दिसंबर 2019 की गजट नोटिफिकेशन के जरिए पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI ट्रांजैक्शन्स पर MDR हटा दिया है. चूंकि UPI ट्रांजैक्शन्स पर अभी कोई MDR चार्ज नहीं होता इसलिए इन पर कोई GST भी लागू नहीं है. सरकार UPI के जरिए डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है. UPI को सपोर्ट करने की स्कीम UPI की ग्रोथ को बनाए रखने और इसे सपोर्ट करने के लिए सरकार FY 2021-22 से एक इंसेंटिव स्कीम चला रही है. यह स्कीम खास तौर पर कम वैल्यू के UPI (P2M) ट्रांजैक्शन्स को टारगेट करती है. जिससे छोटे मर्चेंट्स को ट्रांज़ैक्शन कॉस्ट से राहत मिलती है और डिजिटल पेमेंट्स में ज्यादा हिस्सेदारी और इनोवेशन को बढ़ावा मिलता है. इस स्कीम के तहत अब तक के इंसेंटिव पेमेंट्स सरकार की UPI-बेस्ड डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दिखाते हैं. स्कीम के तहत सालाना आवंटन इस प्रकार रहा है: FY2021-22: ₹1,389 करोड़ FY2022-23: ₹2,210 करोड़ FY2023-24: ₹3,631 करोड़ भारत की डिजिटल पेमेंट्स में बादशाहत ACI Worldwide Report 2024 के मुताबिक, 2023 में भारत ने ग्लोबल रियल-टाइम ट्रांजैक्शन्स का 49% हिस्सा हासिल किया. जिसने भारत को डिजिटल पेमेंट्स इनोवेशन में ग्लोबल लीडर के तौर पर स्थापित किया. UPI ट्रांजैक्शन्स की वैल्यू में जबरदस्त उछाल आया है, जो FY 2019-20 में ₹21.3 लाख करोड़ से बढ़कर मार्च 2025 तक ₹260.56 लाख करोड़ तक पहुंच गई. खास तौर पर P2M ट्रांज़ैक्शन्स ₹9.3 लाख करोड़ तक पहुंच चुके हैं, जो मर्चेंट्स की बढ़ती स्वीकार्यता और कंज्यूमर्स के डिजिटल पेमेंट्स में भरोसे को दिखाता है. recent visitors 109