इंदौर मेट्रो ट्रेन की डेडलाइन घोषित पहले चरण में 17.5 किलोमीटर लंबी दूरी पर दौड़ेगी

इंदौर  मध्य प्रदेश के दो सबसे बड़े शहर इंदौर और भोपाल में मेट्रो ट्रेन का काम तेज गति से जारी है. इस मामले में इंदौर बाजी मारते हुए दिख रहा है. इंदौर में पहले चरण में 17.5 किलोमीटर लंबी दूरी पर मेट्रो ट्रेन दौड़ेगी. इंदौर में दीपावली तक मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी है. इसका शुभारंभ करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है. नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने ये जानकारी दी. इंदौर में मेट्रो ट्रेन का किराया क्या है दरअसल, हाल ही में कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी की स्वीकृति मिलने के बाद इंदौर मेट्रो रेल कंपनी द्वारा जल्द से जल्द मेट्रो ट्रेन शुरू करने की तैयारी की गई है. इसका किराया भी न्यूनतम ₹20 से लेकर अधिकतम 80 रुपए तक तय कर दिया गया है. पहले चरण में मेट्रो ट्रेन गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर स्टेशन तक चलेगी, जो सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक दोनों और 50-50 फेरे लगाएगी. शनिवार को मेट्रो रेल कंपनी के अधिकारियों के साथ नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मेट्रो ट्रेन चलाने की तैयारी और स्टेशनों के साथ व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया. दीपावली तक मेट्रो ट्रेन दौड़ने लगेगी कैलाश विजयवर्गीय ने बताया "पहले चरण में दीपावली तक 17.5 किलोमीटर का सफर शुरू किया जाएगा. इसके लिए सभी तैयारियां कर ली गई हैं. मेट्रो ट्रेन के शुभारंभ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमत्रण भेजा जा रहा है. ज्यादा से ज्यादा लोग मेट्रो ट्रेन का सफर कर सकें, इसलिए इंदौर में सिटी बसों की कनेक्टिविटी भी मेट्रो ट्रेन के स्टेशनों से जोड़ी जाएगी. इसकी भी प्लानिंग की जा रही है. इंदौर में एक कन्वेंशन सेंटर भी तैयार किया जाएगा, जिसकी अनुमति वन विभाग से प्राप्त हो गई है." मेट्रो स्टेशनों पर दोपहिया वाहनों की पार्किंग मेट्रो स्टेशनों पर ईवी चार्जिंग से युक्त स्टेशनों के साथ दोपहिया पार्किंग की व्यवस्था भी होगी. कैलाश विजयवर्गीय का कहना है "इंदौर शहर के जितने भी ब्रिज हैं, उनके निर्माण की भी समीक्षा की जा रही है. कोशिश की जा रही है कि उज्जैन सिंहस्थ से पहले इंदौर से उज्जैन के बीच भी मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ कर दिया जाए. इसकी भी प्लानिंग की जा रही है." इंदौर में 7 अंडरग्राउंड स्टेशन तैयार इंदौर रेलवे स्टेशन, राजवाड़ा, छोटा गणपति, बड़ा गणपति, रामचंद्र नगर, कॉलानी नगर, एयरपोर्ट अंडरग्राउंड स्टेशन में शामिल हैं. इंदौर में मेट्रो ट्रेन की येलो लाइन में 21 एलिवेटेड स्टेशन:     गांधी नगर, सुपर कॉरिडोर-6,5,4,3,2,1     भवर कुआ चौराहा     एम आर -10     आई एस बी टी     चन्द्रगुप्त चौराहा     हीरा नगर     बापट चौराहा     मेघदूत गार्डन     विजय नगर चौराहा     मालवीय नगर चौराहा     शहीद बाग     खजराना     बंगाली चौराहा     पत्रकार कॉलोनी     पलासिया recent visitors 52

मध्यप्रदेश में किसानों की आर्थिक समृद्धि का आधार बनी उद्यानिकी फसलें

भोपाल उद्यानिकी एवं खाद्य प्र-संस्करण के क्षेत्र में जिस गति से मध्यप्रदेश ने अपनी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनाई है, उससे प्रदेश की उद्यानिकी फसलों के प्रति देश और विदेशों में खासी मांग भी बढ़ रही है। इससे प्रदेश के किसानों को आर्थिक संबल भी मिल रहा है। मध्यप्रदेश उद्यानिकी के साथ खाद्य प्र-संस्करण का मुख्य हब बन कर उभरा है। गत फरवरी माह में भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में निवेशकों से उद्यानिकी क्षेत्र में 4 हजार करोड़ रूपये से अधिक का निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। यह निवेश प्रस्ताव मध्यप्रदेश के उद्यानिकी क्षेत्री में हुए नवाचारों और बड़े पैमाने पर हो रहे उत्पादन को दर्शाता हैं। मध्यप्रदेश में गत 5 वर्षों में उद्यानिकी के रकबा में 23.72 प्रतिशत वृद्धि हुई। वर्ष 2019-20 में उद्यानिकी फसलों का रकबा 21.75 लाख लाख हेक्टेयर था जो वर्ष 2023-24 में बढ़कर 26.91 लाख हैक्टेयर हो गया है। मध्यप्रदेश में गत 20 वर्षों में छोटे के साथ बड़ी कृषि-जोत रखने वाले किसान भाइयों ने 'कैश-क्रॉप' के रूप में उद्यानिकी फसलों को लेना शुरू कर दिया है इस कारण उद्यानिकी फसलों (फल, सब्जी, मसाला पुष्प एवं औषधियों) का रकबा 4 लाख 67 हजार हैक्टेयर से 27 लाख 71 हजार हैक्टेयर यानिकी लगभग 500 प्रतिशत की तथा उत्पादन 35 लाख 40 हजार मीट्रिक टन से बढ़कर 417 लाख 89 हजार मीट्रिक टन हो गया। इस तरह उत्पादन में 1000 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश उद्यानिकी के साथ खाद्य प्र-संस्करण का मुख्य हब बन रहा है। recent visitors 41

आईआईटी खड़गपुर की सहायता से प्रदेश के लोगों की खुशियां मापेगा आनंद विभाग

भोपाल  मध्य प्रदेश के लोग कितने खुश हैं और खुशी के प्रमुख कारण क्या हैं. नए साल में प्रदेश के लोगों की खुशी का ये इंडेक्स सामने होगा. लोगों की खुशी का इंडेक्स तैयार करने का बीढ़ा मध्य प्रदेश के आनंद विभाग ने उठाया है, जो आईआईटी खड़गपुर की सहायता से प्रदेश के लोगों की खुशियां मापेगा. संयुक्त राज्य अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की तर्ज पर मध्य प्रदेश में खुशियों का निर्धारण हो सकेगा. मध्य प्रदेश के लोगों का हैप्पीनेस का इंडेक्स मापने के लिए आनंद विभाग एक नवाचार करने जा रहा है. इसके लिए विभाग आईआईटी खड़गपुर की सेवाएं ले रहा है. आईआईटी खड़गपुर की मदद से एक प्रश्नावली तैयार की जा रही है. आनंद विभाग से प्रदेश के सभी जिलों में 50 हजार से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं. इन वॉलन्टियर्स को आनंदक नाम दिया गया है. आनंद विभाग के अफसरों की मानें तो प्रदेश के 20 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर खुशियां मापने की शुरुआत होगी. विभाग का कहना है कि खुशी मापने का आधार संसाधनों की बजाय लोगों के भाव होंगे. प्रश्नावली इन भाव पर आधारित रहेगी. आनंद विभाग का मानना है कि साल के अंत तक इंडेक्स तैयार हो जाएगा. recent visitors 23

विश्व में मशहूर पन्ना के हीरों को मिलेगा जीआई टैग, केंद्र कर रहा एग्जामिनेशन रिपोर्ट तैयार

भोपाल मध्य प्रदेश का पन्ना जिला हीरों के लिए प्रसिद्ध है. ऐसे में पन्ना के हीरा को जीआई टैग (Geographical Indication Tag) मिल सकता है. साल के अंत तक जीआई टैग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. जिसके लिए केंद्र एग्जामिनेशन रिपोर्ट तैयार कर रहा है. दरअसल, पत्रा के डायमंड में हल्का हरा रंग दिखता है. जबकि दुनिया के दूसरे हिस्से में मिलने वाले हीरे में या तो रंग नहीं होता या प्रकाश पड़ने पर बहुत से रंग एक साथ दिखते हैं. साथ ही पन्ना डायमंड में वीक कार्बन लाइन स्पष्ट होती है. इसके सहारे उसमें नक्काशी या डिजाइन बहुत आसान हो जाती है, जो दुनिया के दूसरे हीरों में उपलब्ध नहीं होती. सघनता और खास चमक भी पन्ना के हीरों को खास बनाती है. पन्ना के खजिन अधिकारी की मानें तो केंद्र के अधिकारी प्रेजेंटेशन के आधार पर एग्जामिनेशन रिपोर्ट तैयार करेंगे. इसमें बिंदुवार जीआई टैग से जुड़ी जानकारी मांगी जाएगी. केंद्र के अधिकारी अगर जवाब से संतुष्ट होंगे तो 6 से 8 महीने प्रक्रिया पूरी कर नोटिफिकेशन हो जाएगा. मार्च में राजधानी में प्रेजेंटेशन के बाद अब केंद्र आगे की प्रक्रिया कर रहा है. जीआई टैग मिलने पर निश्चित ही पन्ना के हीरे को नई पहचान मिलेगी. recent visitors 25

BDA रेलवे लाइन के समानांतर दोनों तरफ 60-60 फीट चौड़ी रोड विकसित करेगा

भोपाल  भोपाल विकास प्राधिकरण इस साल बावड़िया रेलवे ओवरब्रिज से मिसरोद के बीच रेलवे लाइन के दोनों तरफ नई बसाहट के लिए अधोसंरचना विकसित करेगा। रेलवे लाइन के नर्मदापुरम रोड की तरफ विद्यानगर फेस दो के साथ अब विद्यानगर फेज तीन के तहत करीब 11 हेक्टेयर में काम होगा, जबकि बावडिय़ा की ओर दानापानी से मिसरोद और बावड़िया गांव के चारों तरफ 51 हेक्टेयर में काम होगा। दोनों तरफ 60-60 फीट चौड़ी रोड सबसे खास ये कि लोगों को रेलवे लाइन के समानांतर दोनों तरफ 60-60 फीट चौड़ी रोड मिलेगी। आशिमा मॉल (MP News) से बावड़िया गांव को पार कर सेज अपोलो अस्पताल की ओर उतरने वाला रेलवे ओवरब्रिज भी इस पूरी योजना में मददगार होगा। बीडीए ने इस योजना के लिए सिविल अधोसंरचना विकसित करने 122.09 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान लगाया है। अन्य खर्च मिलाकर ये राशि 249 करोड़ रुपए बन रही है। बावड़ियाकलां गांव के आसपास रेलवे लाइन तक का क्षेत्र नई योजना में शामिल है। इस पर जल्द ही काम शुरू होगा।–संजीव सिंह, प्रशासक बीडीए ऐसे समझें स्थिति ● विद्यानगर फेस दो के तहत 39.96 हेक्टेयर क्षेत्र में योजना विकसित हो रही है। ● 84.14 करोड़ रुपए लागत है। 701 प्लॉट इसमें विकसित होंगे। ● विद्या नगर फेस तीन के तहत 10.60 हेक्टेयर क्षेत्र में योजना प्रस्तावित है। ● 28.27 करोड़ रुपए की लागत है। 34 प्लॉट विकसित होंगे। ● बावड़ियाकलां योजना- 51 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तय है।   recent visitors 58

मध्यप्रदेश में जल्द ही तबादलों पर लगा बैन हट सकता, ट्रांसफर पॉलिसी 2025 बनाकर तैयार

भोपाल  मध्यप्रदेश में लंबे समय से ट्रांसफर का इंतजार कर रहे सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के लिए एक जरूरी खबर है। मध्यप्रदेश में जल्द ही तबादलों पर लगा बैन हट सकता है। सामान्य प्रशासन विभाग ने ट्रांसफर पॉलिसी 2025 तैयार कर ली है और सीएम मोहन यादव की सलाह पर इसमें कुछ आंशिक बदलाव कर इसे अप्रैल के ही महीने में कैबिनेट में लाने की तैयारी है। बता दें कि मध्यप्रदेश में बीते 3 साल से तबादलों पर बैन लगा हुआ है। इसी महीने हट सकता है बैन ! जानकारी के मुताबिक सामान्य प्रशासन विभाग ने तबादला नीति 2025 तैयार कर ली है। इसे इस माह के अंत तक राज्य शासन की मंजूरी के लिए कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही प्रदेश में तबादलों पर लगा बैन हटाया जा सकता है। पॉलिसी के अनुसार करीब 15 दिन से एक महीने तक तबादलों से प्रतिबंध हटाया जा सकता है। बता दें कि आखिरी बार तबादला नीति 2021-22 में लागू की गई थी। किनके लिए होगी फायदेमंद? यह नई नीति खासतौर पर उन सरकारी कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आएगी, जो दो साल से ज्यादा समय से ट्रांसफर बैन के चलते एक ही जगह अटके हुए थे. अब वे स्वेच्छा से ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकेंगे और विशेष परिस्थितियों में मनचाही जगह पोस्टिंग भी मिल सकती है. शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों में तबादलों की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन की जाएगी, जिससे व्यवस्था पारदर्शी होगी और कर्मचारियों को आसानी मिलेगी. किसके लिए बनेगी परेशानी? नई पॉलिसी उन अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मुश्किल बन सकती है, जो पिछले 3 साल या उससे ज्यादा समय से एक ही पद पर जमे हुए हैं. सरकार का इरादा है कि ऐसे सभी अधिकारियों का ट्रांसफर किया जाए और जरूरत पड़ी तो उन्हें दूसरे जिलों में भी भेजा जाएगा. साथ ही, किसी भी विभाग में कुल कर्मचारियों के सिर्फ 10% का ही तबादला किया जा सकेगा. इसका मतलब ये है कि सबको ट्रांसफर नहीं मिलेगा, सिर्फ उन्हीं को मौका मिलेगा जो इस श्रेणी में आते हैं. क्या मिलेगा ट्रांसफर पर भत्ता? आपको बताते चलें कि नई नीति में ये भी तय किया गया है कि स्वेच्छा से ट्रांसफर लेने वाले कर्मचारियों को कोई भत्ता नहीं दिया जाएगा. लेकिन जिनका ट्रांसफर प्रशासनिक वजहों से किया जाएगा, उन्हें सरकार की ओर से भत्ते की सुविधा दी जाएगी. वहीं, ट्रांसफर की प्रक्रिया में मंत्रियों की भूमिका अहम होगी. अपने विभाग के कर्मचारियों का ट्रांसफर मंत्री कर सकेंगे. गजेटेड अधिकारियों ( उच्च स्तर के प्रशासनिक या प्रबंधकीय पदों पर होते हैं) के ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री की सहमति जरूरी होगी. तबादला नीति में ये बिंदू हो सकते हैं शामिल     तबादला नीति में इस बात का प्रावधान रहेगा कि 3 साल से ज्यादा समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारी-कर्मचारियों को हटाया जाए। ऐसे अधिकारियों को दूसरे जिलों में भी भेजा जाएगा।     माना जा रहा है कि किसी भी विभाग में अधिकतम 10 फीसदी कर्मचारियों के तबादले ही हो सकेंगे।     जो अधिकारी-कर्मचारी स्वयं के व्यव पर ट्रांसफर करवाएंगे, उन्हें किसी भी प्रकार का भत्ता नहीं दिया जाएगा।     प्रशासनिक आधार पर होने वाले तबादले में सरकार भत्ता प्रदान करेगी।     मंत्रियों को उनके विभाग के कर्मचारियों के तबादले को लेकर अधिकार प्रदान किए जाएंगे।     जिले के अंदर ट्रांसफर करने का अधिकार प्रभारी मंत्री को दिया जाएगा। प्रभारी मंत्री की अनुशंसा के आधार पर जिला कलेक्टर जिले के अंदर ट्रांसफर कर सकेंगे।     जिले के बाहर तबादला विभागीय मंत्रियों की अनुशंसा पर होंगे, लेकिन राजपत्रित अधिकारियों का तबादला करने के लिए मुख्यमंत्री समन्वय की प्रक्रिया अपनाना होगी।     स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग से जुड़े तबादलों में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।     विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों को मांगी गई लोकेशन पर ट्रांसफर दिया जाएगा।    मंत्रियों को उनके विभाग के कर्मचारियों के तबादले के अधिकार होंगे। जिले के अंदर ट्रांसफर करने का अधिकार प्रभारी मंत्री को दिया जाएगा। जिले के बाहर ट्रांसफर विभागीय मंत्रियों की अनुशंसा पर होंगे  राजपत्रित अधिकारियों का तबादला करने के लिए सीएम समन्वय की प्रक्रिया अपनानी होगी। 3 साल से ज्यादा समय से एक ही स्थान पर जमे अधिकारी-कर्मचारियों का ट्रांसफर किया जाएगा उन्हें दूसरे जिले में भी भेजा जाएगा।  किसी भी विभाग में अधिकतम 10 फीसदी कर्मचारियों के तबादले ही हो सकेंगे।  स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग से जुड़े तबादलों में ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। recent visitors 51

प्रदेश का पहला सम्भागीय किसान मेला उज्जैन में 3 मई से आयोजित किया जायेगा

 भोपाल मध्य प्रदेश में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के आयोजन के बाद अब सरकार संभागीय स्तर पर किसान मेलों का आयोजन करने जा रही है, शुरुआत 3 मई को उज्जैन संभाग से की जाएगी यानि पहला सम्भागीय किसान मेला उज्जैन में आयोजित किया जायेगा,  संभाग में मेलों के आयोजन के बाद अक्टूबर में राज्य स्तरीय किसान मेला आयोजित किया जायेगा। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी संभागों में किसान मेलों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। उज्जैन संभाग में 3 मई को मंदसौर में पहला किसान मेला आयोजित किया जाएगा।  इन मेलों में किसानों को कृषि, खाद्य प्र-संस्करण, उद्यानिकी और पशुपालन से संबंधित नवीनतम जानकारी दी जायेगी। साथ ही सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी के साथ किसानों की समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा। मेले में प्रदर्शनी के माध्यम से भी किसानों को कृषि तकनीकों और कृषि उपकरणों की जानकारी दी जायेगी। एक साल में 10 लाख सोलर पंप लगाने का लक्ष्य मंत्री कंषाना ने बताया कि अक्टूबर में एक राज्य स्तरीय किसान मेला भी आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा राज्य सरकार ने एक साल में 10 लाख सोलर पंप लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे किसानों को ऊर्जादाता बनने में मदद मिलेगी। सरकार ने इसके लिए अभियान शुरू कर किसानों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। मध्य प्रदेश कृषक कल्याण मिशन को मिली है सैद्धांतिक स्वीकृति कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप राज्य सरकार ने गरीब, युवा, अन्नदाता किसान और नारी कल्याण के लिए मिशन शुरू कर दिया है। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्य प्रदेश कृषक कल्याण मिशन को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है। किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास में एमपी सरकार ‘मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन’ के तहत अब कृषि से सम्बद्ध विभागों की योजनाएं एक मंच पर समन्वित रूप से क्रियान्वित होंगी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश कृषि आधारित राज्य है और इस क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं हैं। किसानों की आय, कृषि उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन में वृद्धि के साथ खाद्य प्र-संस्करण और कृषि से उत्पादित कच्चे माल पर आधारित औद्योगिक इकाई स्थापित करने जैसे हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं।   recent visitors 30