Friday, July 10, 2026 1:16 am

साबिर हुसैन नाम के इस शख्स ने इस्लाम धर्म को त्यागने का फैसला किया, बंगाल के एक स्कूल टीचर ने बड़ा कदम उठाया है

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले को देश कभी नहीं भुला पाएगा। आतंकियों ने बैसरन की खूबसूरत पहाड़ियों का लुत्फ उठा रहे बेकसूर लोगों पर बेरहमी से गोलियां चला दीं। इस हमले में 26 लोगों की मौत हो गई जिनमें से अधिकतर सैलानी थे। वहीं कई लोग घायल भी हुए हैं। जानकारी के मुताबिक आतंकियों ने लोगों को मारने से पहले यह भी सुनिश्चित किया कि वे किस धर्म के हैं। लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा फूट पड़ा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच पश्चिम बंगाल के एक स्कूल टीचर ने बड़ा कदम उठाया है। साबिर हुसैन नाम के इस शख्स ने इस्लाम धर्म को त्यागने का फैसला किया है। पहलगाम आतंकी हमले से आहत बदुरिया के साबिर हुसैन ने इस्लाम छोड़ने के लिए कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया है। न्यूज 18 से बात करते हुए साबिर हुसैन ने कहा है कि हिंसा फैलाने के लिए बार-बार धर्म का इस्तेमाल किया जाता है जो सही नहीं है। उन्होंने अपने फैसले के बारे में बताते हुए कहा, "मैं किसी धर्म का अनादर नहीं कर रहा हूं। यह मेरा निजी फैसला है। मैंने देखा है कि किस तरह हिंसा फैलाने के लिए एक हथियार के रूप में धर्म का इस्तेमाल किया जाता है। कश्मीर में ऐसा कई बार हुआ है। मैं अब इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता।” उन्होंने आगे कहा, “मैं सिर्फ एक इंसान के रूप में जाना जाना चाहता हूं, किसी धार्मिक पहचान की वजह से नहीं। इसलिए मैं कोर्ट में आवेदन करने आया हूं।" साबिर ने आगे कहा, “पहलगाम जैसी हिंसक घटनाओं में महजब का गलत इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा, “किसी को उसके धर्म की वजह से मारना कैसे ठीक है? ये मुझे बहुत आहत करता है।” मौजूदा माहौल पर टिप्पणी करते हुए हुसैन ने कहा कि वह ऐसी दुनिया में नहीं रहना चाहते हैं जहां सब कुछ मजहब के इर्द-गिर्द घूमता रहता है। उन्होंने कहा, "आजकल सब कुछ धर्म के इर्द-गिर्द घूमता हुआ लगता है। मैं ऐसी दुनिया में नहीं रहना चाहता।" साबिर हुसैन के मुताबिक उन्होंने यह फैसला स्वतंत्र रूप से लिया है और कहा है कि उनकी पत्नी और उनके बच्चे जो भी रास्ता चुने वह उन्हें पूरी आजादी देंगे। recent visitors 28

वक्फ कानून पर नहीं लगा सकते पूरी तरह रोक, सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज करने की मांग की और कहा कि इस कानून पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती क्योंकि संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की परिकल्पना लागू होती है। 1,332 पन्नों के प्रारंभिक जवाबी हलफनामे में सरकार ने विवादास्पद कानून का बचाव करते हुए कहा कि चौंकाने वाली बात यह है कि 2013 के बाद वक्फ भूमि में 20 लाख हेक्टेयर (ठीक 20,92,072.536) से अधिक की वृद्धि हुई है। हलफनामे में कहा गया है, "मुगल काल से ठीक पहले, आजादी से पहले और आजादी के बाद के दौर में भारत में कुल 18,29,163.896 एकड़ जमीन वक्फ की थी।" इसमें निजी और सरकारी संपत्तियों पर अतिक्रमण करने के लिए पहले के प्रावधानों के "दुरुपयोग" का दावा किया गया है। हलफनामा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में संयुक्त सचिव शेरशा सी शेख मोहिद्दीन द्वारा दायर किया गया था। इसमें आगे कहा गया, "कानून में यह तय स्थिति है कि संवैधानिक अदालतें किसी वैधानिक प्रावधान पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रोक नहीं लगाएंगी और मामले पर अंतिम रूप से निर्णय लेंगी। संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर संवैधानिकता की धारणा लागू होती है।'' केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि संसद ने अपने अधिकार क्षेत्र में काम करते हुए यह सुनिश्चित किया कि वक्फ जैसी धार्मिक व्यवस्था का प्रबंधन किया जाए और उसमें जताया गया भरोसा कायम रहे। वक्फ कानून की वैधता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं के प्रयास न्यायिक समीक्षा के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। केंद्र ने उच्चतम न्यायालय से कहा, ''जब वैधता की परिकल्पना की जाती है तो प्रतिकूल परिणामों के बारे में जाने बिना ही पूरी तरह रोक लगाना अनुचित है। वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 वैध, विधायी शक्ति का उचित प्रयोग है। केंद्र ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट विधायी क्षमता और अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर कानून की समीक्षा कर सकता है। recent visitors 36

सरकार जल्द बढ़ा सकती है प्रदेश के 7 लाख नियमित अधिकारियों-कर्मचारियों का 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता

भोपाल प्रदेश के 7 लाख नियमित अधिकारियों-कर्मचारियों का 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता सरकार जल्द बढ़ा सकती है। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों को 1 जनवरी 2025 से 55 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता देने का निर्णय हाल ही में लिया है। प्रदेश के कर्मचारियों को 50 प्रतिशत की दर से ही महंगाई भत्ता मिल रहा है। कर्मचारी संगठन लंबे से भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों का महंगाई भत्ता 17 अप्रैल को जारी आदेश में एक जनवरी 2025 से 53 से बढ़ाकर 55 प्रतिशत कर दिया गया है। जनवरी, फरवरी और मार्च का एरियर अप्रैल के वेतन में दिया जाएगा। उधर, राज्य के कर्मचारियों को अभी भी 50 प्रतिशत की दर से ही महंगाई भत्ता मिल रहा है। इसकी घोषणा भी अक्टूबर 2024 में की गई और 9 माह का एरियर तीन किस्तों में दिया गया। इस बीच केंद्र सरकार ने अपने कर्मियों का दो बार महंगाई भत्ता बढ़ा दिया। इसका लाभ पेंशनरों को भी मिला। मुख्यमंत्री से हरी झंडी मिलने का इंतजार सूत्रों का कहना है कि वित्त विभाग ने अपनी ओर से महंगाई भत्ता बढ़ाने की तैयारी कर ली है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की हरी झंडी मिलते ही एकमुश्त 5 प्रतिशत भत्ता बढ़ा दिया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बजट में 64 प्रतिशत महंगाई भत्ते के हिसाब से विभागों के स्थापना व्यय में प्रविधान करके रखा गया है, जिससे वित्त के प्रबंधन में कोई परेशानी न हो। वाहन और दिव्यांग भत्ता बढ़ाने के आदेश नहीं हुए जारी प्रदेश सरकार ने लंबे समय बाद कर्मचारियों के वर्षों से लंबित विभिन्न भत्ते बढ़ाने का निर्णय लिया है। कुछ भत्तों में वृद्धि के आदेश भी जारी हो गए पर सामान्य प्रशासन विभाग ने वाहन और दिव्यांग भत्ते में वृद्धि के अभी तक आदेश जारी नहीं किए हैं। जबकि, वित्त विभाग ने आदेश का प्रारूप तक उपलब्ध करा दिया है। सूत्रों का कहना है कि अब अगले सप्ताह दोनों भत्तों में वृद्धि के आदेश जारी करने की तैयारी हो गई है।   recent visitors 32

पाकिस्तानी प्रोफेसर ने लताड़ा पाक सेना के प्रमुख आसिम मुनीर को जमकर लताड़ा, यही है हमले का जिम्मेदार

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तानी मूल के प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने अपनी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जनरल आसिम मुनीर ने हिंदू और मुस्लिम को अलग बताया और फिर एक सप्ताह के अंदर ही आतंकियों ने ऐसा हमला कर दिया। हिंदू और मुसलमानों के अलग होने वाले बयान के मद्देनजर यह ध्यान देना जरूरी है कि आतंकियों ने लोगों को मारने से पहले चेक किया कि वे हिंदू या मुसलमान हैं। ऐसे में यह सवाल तो उठता ही है कि आखिर आसिम मुनीर के बयान के बाद ही ऐसा क्यों हुआ। उन्होंने कहा कि आसिम मुनीर को इस तरह का बयान नहीं देना था। इस बीच उन्होंने भारत की ओर से सिंधु जल समझौता रोके जाने पर भी बात की। इश्तियाक अहमद ने कहा कि मेरे एक दोस्त लियाकत अली ने सिंधु जल समझौते को लेकर एक लेख लिखा था। उन्होंने बताया था कि 1960 में समझौते से पहले नदियों के पानी को लेकर खूब विवाद हुआ था। प्रोफेसर ने कहा कि जब विभाजन हुआ तो बड़े पैमाने पर तैयार नहरें और नदियां भारत के हिस्से में चली गईं। इससे पाकिस्तान की स्थिति खराब थी। भारत के पक्ष में कई ताकतें थीं और उसका पॉइंट भी सही माना गया, फिर भी भारत ने सिंधु जल समझौते को मंजूरी दी थी। उन्होंने इसे भारत का बड़प्पन करार दिया। प्रोफेसर अहमद ने कहा कि तीन से 4 जंगों के बाद भी इस समझौते को किसी ने नहीं छेड़ा था। नरेंद्र मोदी ने चुनाव में जीतने के बाद पाकिस्तान का दौरा किया था, लेकिन फिर पठानकोट हमला हुआ। ऐसे में भारत सरकार ने तय कर लिया कि हम पाकिस्तान को बख्शेंगे नहीं। उन्होंने कहा कि समझौते के अनुसार 5 पंजाब की नदियां और एक मुख्य सिंधु नदी है। चिनाब, रावी और झेलम नदियां कश्मीर से होते हुए आते हैं। फिर भी भारत ने किसी भी तरह इन नदियों के प्रवाह को नहीं रोका। इस संधि को वर्ल्ड बैंक ने कराया था। अमेरिका, जापान, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश इसमें शामिल हैं। इनके कई प्रोजेक्ट्स हैं। भारत में जब हमले हुए हैं तो सवाल उठे हैं कि आखिर हम क्यों इस समझौते को बनाए रखे हैं। फिर भी उन्होंने इसे पूरी तरह खारिज नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने जिस तरह का बयान दिया है, उसके चलते ही ऐसी स्थिति पैदा हुई। उन्होंने कहा कि अब हम फंस गए हैं। यदि सिंधु जल समझौते पर भारत ने ऐक्शन लिया तो नुकसान हमारा ही होगा। टू नेशन थ्योरी पर भी उठाया सवाल, बोले- 1947 से पहले तो नहीं बंटा देश उन्होंने कहा कि मैं तो कहूंगा कि पाकिस्तान पहले खुद अपने अंदर के हालात सुधारे। सिंध में आंदोलन चल रहा है और उनका कहना है कि पंजाब में सिंधु नदी का जल रोका जा रहा है। नहरें बनाई जा रही हैं और हमारा पानी चोरी हो रहा है। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख ने कश्मीर को लेकर बयान दिया, लेकिन सोचना चाहिए कि 4 जंगों में वे कुछ नहीं कर पाए। उलटे अपना मुल्क और तुड़वा बैठे। इसलिए अच्छी बात यही है कि ऐसे बयान न दिए जाएं। उन्होंने पाक सेना चीफ आसिम मुनीर के द्विराष्ट्र सिद्धांत की भी तीखी आलोचना की। प्रोफेसर ने कहा कि 1947 में भारत का विभाजन होना ही गलत था। आज भारत में उतने ही मुसलमान हैं, जितनी पाकिस्तान की आबादी है। आखिर इससे किसका फायदा हुआ? उन्होंने कहा कि 1947 से पहले किसी का भी शासन हुआ, लेकिन सांप्रदायिक आधार पर कोई विभाजन नहीं हुआ था। recent visitors 36

पहलगाम आतंकी हमला: ताशकंद समझौता रद्द कर अपनी ही कब्र खोदेगा पाक, क्या है हाजी पीर दर्रा

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर से रिश्ते तल्ख हो गए हैं। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त ऐक्शन लेते हुए सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया है और बॉर्डर सील करने समेत कई अन्य कदम उठाए हैं। इससे पड़ोसी देश बौखला उठा है। पाकिस्तान ने शिमला समझौता निलंबित करने का फैसला किया है और ताशकंद समझौते को भी रद्द करने की सोच रहा है। ताशकंद समझौता 10 जनवरी, 1966 को उज्बेकिस्तान में हुआ था। 1965 की जंग के बाद सोवियत संघ की मौजूदगी में यह समझौता हुआ था, जिसमें भारत की तरफ से तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान की तरफ से तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने दस्तखत किए थे। इसी समझौते के तहत भारत ने हाजी पीर दर्रा पर से अपना कब्जा हटा लिया था और 5 अगस्त 1965 से पहले की यथास्थिति बहाल करने पर तैयार हो गया था। इसे 60 साल पहले भारत की एक बड़ी चूक कहा जाता है। अब जब फिर से पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत पाकिस्तान की नकेल कसना चाह रहा है तो हाजी पीर दर्रा की बात अनायास सामने आ जा रही है क्योंकि यह वही दर्रा है, जहां से पाकिस्तान भारत में अपनी आतंकियों की सप्लाई करता है। अगर 60 साल पहले भारत ने वह चूक नहीं की होती, तो आज कश्मीर में पाकिस्तान आतंक न फैला रहा होता। क्या है हाजी पीर दर्रा? हाजी पीर दर्रा हिमालय पर्वतमाला की पीर पंजाल श्रेणी में स्थित है। यह जम्मू-कश्मीर स्थित पूंछ को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट से जोड़ता है। 2,637 मीटर यानी 8,652 फीट की ऊंचाई पर अवस्थित यह रणनीतिक दर्रा न केवल पूरे पाक अधिकृत कश्मीर घाटी पर नजर रखता है बल्कि कश्मीर घाटी में पाकिस्तानी आतंकियों की घुसपैठ का मुख्य मार्ग भी यही है। अगर भारत ने 60 साल पहले इस दर्रे को पाकिस्तान को नहीं सौंपा होता तो पाक आतंकियों की कश्मीर में सप्लाई रोक सकता था और इस्लामाबाद की नकेल भी कस सकता था। इसके अलावा इस दर्रे पर भारत का कब्जा होने से पूंछ और उरी के बीच की दूरी भी 282 किलोमीटर से घटकर सिर्फ 56 किलोमीटर रह जाती। देश का बंटवारा होने से पहले जम्मू घाटी और कश्मीर घाटी को जोड़ने वाली मुख्य सड़क इसी दर्रे से होकर गुजरती थी लेकिन 1948 में पाकिस्तान द्वारा PoK और हाजी पीर दर्रे पर कब्जा कर लेने के बाद से यह रास्ता अनुपयोगी हो गया है। पूरी रात बारिश के बीच की थी चढ़ाई 1965 के भारत-पाक जंग में भारतीय सेना ने हाजी पीर दर्रे के पास स्थित तीन ऊंची पहाड़ियों पूर्व में बेदोरी (3760 मीटर), पश्चिम में सांक (2895 मीटर) और दक्षिण-पश्चिम में लेडवाली गली (3140 मीटर) पर कब्जा कर लिया था, जो इस दर्रे से मात्र 10 से 14 किसोमीटर की दूरी पर था। 27 अगस्त 1965 को मेजर रणजीत सिंह दयाल ने पूरी रात बारिश होने के बावजूद भारी बाधाओं को पार करते हुए तीव्र पहाड़ी पर चढ़ाई की थी और 28 अगस्त, 1965 को इस रणनीतिक दर्रे पर कब्जा कर लिया था। 29 अगस्त को पाकिस्तानी सेना ने फिर से इसे अपने कब्जे में करने की कोशिश की लेकिन भारतीय जवानों ने पाकिस्तानियों को खदेड़ दिया था। 1920 वर्ग किलोमीटर भूभाग लौटाना पड़ेगा हालांकि, जब 10 जनवरी 1966 को ताशकंद में भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता हुआ तो भारत ने हाजी पीर दर्के पर से अपना कब्जा छोड़ दिया और समझौते के मुताबिक 5 अगस्त, 1965 की यथास्थिति पर लौट गया। इस तरह एक बार फिर इस रणनीतिक दर्रे पर पाकिस्तान का कब्जा हो गया। भारत ने उस जंग में पाकिस्तान के 1920 वर्ग किलोमीटर भूभाग पर भी कब्जा कर लिया था। इसके तहत सियालकोट, लाहौर और कश्मीर घाटी के उपजाऊ क्षेत्र और हाजी पीर दर्रा शामिल था लेकिन सब कुछ लौटाना पड़ गया। अगर पाकिस्तान ने ताशकंद समझौता तोड़ा तो एक बार फिर इस पर भारत का कब्जा हो जाएगा। recent visitors 37

राजा भैया के चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह की मौजूदगी में दोनों बेटों को जनसत्ता दल की सदस्यता दिलाई

कुंडा यूपी बाहुबली कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को दोनों बेटों की भी राजनीति में एंट्री हो गई है। राजा भैया के चचेरे भाई अक्षय प्रताप सिंह की मौजूदगी में दोनों बेटों शिवराज प्रताप सिंह उर्फ बड़े राजा और बृजराज प्रताप सिंह उर्फ छोटे राजा को जनसत्ता दल की सदस्यता दिलाई गई। कुंडा के बाबूगंज स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय पर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉक्टर केएन ओझा और प्रदेश अध्यक्ष विनोद सरोज की उपस्थिति में जिलाध्यक्ष राम अचल वर्मा ने बड़े और छोटे राजा को पार्टी की सदस्यता का कूपन भरवाने के बाद प्राथमिक सदस्यता ग्रहण कराई। राजा भैया के दो बेटियां और दो बेटे हैं। दोनों बेटियां और दोनों बेटे जुड़वा हैं। पत्नी भानवी सिंह से विवाद के बाद दोनों बेटियां मां के साथ रहती हैं। दोनों बेटे राजा भैया के साथ रहते हैं। जनसत्ता दल में शामिल होने से पहले भी राजनीति आयोजनों में दोनों बेटे राजा भैया के साथ अक्सर दिखाई देते रहते थे। कुंडा से लखनऊ भी राजा भैया के साथ आना जाना लगा रहता था। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान तो दोनों पिता के प्रचार के लिए काफी सक्रिय भी दिखाई दिए थे। दोनों बेटों शिवराज प्रताप और बृजराज प्रताप का जन्म 2003 में तब हुआ था जब राजा भैया को मायावती ने पोटा के तहत गिरफ्तार कर जेल में डाला था। राजा भैया तब दस महीने तक जेल में रहे और दोनों बेटों का लंबे समय तक मुंह नहीं देख सके थे। तब मायावती भाजपा के सहयोग से प्रदेश की मुख्यमंत्री थीं। उसी समय अचानक ही प्रदेश की राजनीति बदली थी और भाजपा ने मायावती से समर्थन हटाया तो मुलायम सिंह ने कई निर्दलीय और बसपा के बागियों के सहयोग से अपनी सरकार बनाई थी। मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के आधे घंटे के अंदर ही राजा भैयासे पोटा के तहत लगे सभी मुकदमे खारिज करने का आदेश दिया था। बाद में राजा भैया को मुलायम सिंह ने मंत्री भी बनाया था। recent visitors 37

महासमुंद : शीघ्रता से निराकृत हुआ ऋण पुस्तिका का आवेदन, श्रीमती पुरी हरपाल ने जताई खुशी

महासमुंद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में संचालित यह अभियान, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को ज़रूरतमंदों तक पारदर्शिता और त्वरित प्रक्रिया  के माध्यम से पहुँचाने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का त्वरित लाभ दिलाना और शासन-जनता के बीच सेतु का कार्य करना है, जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग तक विकास की किरण पहुँच सके।                                 कलेक्टर विनय कुमार लंगेह के मार्गदर्शन सुशासन तिहार के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों का संबंधित विभागों द्वारा तत्परता से निराकरण किया जा रहा है। इसी क्रम में सुशासन तिहार अंतर्गत श्रीमती पुरी हरपाल पति पंकज हरपाल निवासी तेंदुलोथा खुर्द द्वारा ऋण पुस्तिका (किसान किताब) हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था जिसे तत्काल निराकरण किया जाकर आवेदक को किसान किताब प्रदान किया गया। लंबे इंतजार के पश्चात ऋण पुस्तिका प्राप्त होते ही श्रीमती हरपाल के चेहरे पर संतोष और प्रसन्नता साफ झलक रही थी। उन्होंने समाधान मिलते ही मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए शासन की त्वरित कार्यप्रणाली की सराहना की। recent visitors 38