एमबी पावर ने सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहलों के माध्यम से ग्रामीण आधारभूत संरचना को सशक्त बनाया

अनूपपुर,  एमबी पावर (मध्य प्रदेश) लिमिटेड अपने पावर प्लांट से लगे गांवों में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत लगातार विकासात्मक कार्य कर रहा है। कंपनी द्वारा ग्रामीण आधारभूत संरचना और स्थानीय समुदायों के जीवनस्तर को बेहतर बनाने के लिए कई उल्लेखनीय पहलें की गई हैं। ग्राम पंचायतों की मांग पर कंपनी की सीएसआर टीम ने चार गांवों—चांदपुर (दो रंगमंच), महुदा, मुरा और गुंवारी में कुल पांच सांस्कृतिक रंगमंचों का निर्माण पूर्ण किया है। ये मंच धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों पर बनाए गए हैं, जो अब दुर्गा पूजा, गणेश उत्सव तथा अन्य पारंपरिक आयोजनों के लिए प्रमुख स्थल बन चुके हैं। इस पहल के लिए ग्रामीणों ने कंपनी का आभार व्यक्त करते हुए सहयोग की निरंतरता की आशा जताई है। इसके अतिरिक्त, मुरा गांव में वर्षों पहले एमबी पावर द्वारा बनाए गए गणेश पंडाल का जीर्णोद्धार भी कंपनी द्वारा किया गया है। इस कार्य ने न केवल एक सांस्कृतिक धरोहर को पुनर्जीवित किया है, बल्कि कंपनी और समुदाय के बीच संबंधों को भी और प्रगाढ़ किया है। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में इस वर्ष मुरा गांव के जुनवानी तालाब का गहरीकरण एवं सफाई कार्य एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप रहा। समय के साथ तालाब में गाद भर जाने से यह दैनिक उपयोग, मवेशियों के पीने के पानी, अंतिम संस्कार आदि जैसे कार्यों के लिए अनुपयोगी हो गया था। ग्राम पंचायत के सहयोग से सीएसआर टीम ने सफलतापूर्वक इसका कायाकल्प किया। आगामी मानसून में यह तालाब भरकर आस-पास के गांवों के लोगों को घरेलू, सिंचाई और धार्मिक उपयोग के लिए पर्याप्त जल प्रदान करेगा। सीएसआर प्रमुख सत्यम सलील ने कहा, “एमबी पावर में हमारा मानना है कि सीएसआर केवल संरचना निर्माण तक सीमित नहीं है, यह समुदायों के साथ स्थायी संबंध और दीर्घकालिक मूल्य निर्माण का माध्यम है। रंगमंचों का निर्माण और तालाब का पुनर्जीवन स्थानीय ग्रामीणों के साथ साझेदारी का परिणाम है।” पूर्व में भी कंपनी द्वारा गांवों में सड़कों का निर्माण, सार्वजनिक शौचालय, विद्यालय और मंदिर परिसरों की चारदीवारी, आंगनवाड़ी केंद्र, हैंडपंप, सोलर और पारंपरिक लाइटिंग जैसी कई जनहितकारी परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। जल संरक्षण के लिए तालाबों के गहरीकरण जैसे कार्यों को भी कंपनी ने प्राथमिकता दी है। एमबी पावर की इन निरंतर पहलों से ग्रामीणों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना मजबूत हुई है और वे कंपनी को अपने विकास के प्रति एक प्रतिबद्ध भागीदार के रूप में देखते हैं। recent visitors 30

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बसों का किया उद्घाटन, दिल्लीवालों को 400 नई इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिली

नई दिल्ली दिल्लीवालों को 400 नई इलेक्ट्रिक बसों की सौगात मिली है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इन बसों का उद्घाटन किया। सीएम ने कहा कि यह यह ट्रिपल इंजन वाली सरकार की ताकत है। तीनों अंग एक साथ मिलकर अथक काम कर रहे हैं। कहा कि इस साल के अंत तक 2080 और इलेक्ट्रिक बसें जोड़ी जाएंगी। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल इनिशिएटिव (डीईवीआई) के तहत 400 नई इलेक्ट्रिक बसों का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 45 प्रतिशत प्रदूषण वाहनों के कारण होता है। हम अगले साल तक 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिक सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की दिशा में काम कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि उनकी सरकार राजधानी के परिवहन को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति पर भी काम कर रही है। गुप्ता ने शुक्रवार की सुबह राष्ट्रीय राजधानी में हुई बारिश के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि सुबह से ही मंत्री और अधिकारी स्थिति पर नजर रखने के लिए जमीन पर थे। उन्होंने कहा, “हमारे कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा सुबह 6 बजे मिंटो रोड पर थे और अधिकारी सुबह 5 बजे से काम कर रहे थे।” सीएम ने कहा, "हमें याद नहीं है कि किसी पूर्व मुख्यमंत्री या मंत्री ने बाढ़ या सीवर की स्थिति का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण किया हो। हम यह सुनिश्चित करने के लिए यहां हैं कि दिल्ली को पिछली उपेक्षा के कारण नुकसान न उठाना पड़े।" सीएम ने प्री-मानसून बारिश को शहर के बुनियादी ढांचे के लिए एक चेतावनी संकेत और विकास में एक दशक से चल रहे पिछड़ेपन का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि यदि दिल्ली में योजनाबद्ध विकास नहीं होगा तो ऐसी समस्याएं उत्पन्न होती रहेंगी। हालांकि आज पूरा प्रशासन इन चुनौतियों से निपटने के लिए तत्पर है। recent visitors 43

लाइफ में कैसी भी हो सिचुएशन खुद को शांत

लाइफ में कई बार आप मुश्किल और अनजानी मुसीबत में फंस जाएंगे। इन सारी सिचुएशन से खुद को निकालने के लिए घबराकर रिएक्ट करने की बजाय खुद के माइंड को शांत कर रिएक्ट करना सिखाएं। जानें कैसे माइंड को कंट्रोल किया जा सकता है। किसी भी परिस्थिति में कंट्रोल करना जरूरी है। पर ये कंट्रोल दूसरों पर ना होकर खुद पर होना जरूरी है। अपने आप को और दिमाग को इस तरह से ट्रेनिंग दे कि मुश्किल, विपरीत और बिल्कुल अलग तरह की सिचुएशन में कैसे खुद को शांत रखें। क्योंकि ज्यादातर गलतियां हम तभी करते हैं जब हमारी सोच, फिजिकल एक्टीविटी और हमारे शब्द जल्दी से रिएक्ट कर देते हैं। जब अपने दिमाग पर हमारा कंट्रोल होगा तो इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना आसान होगा। जानें कैसे विपरीत सिचुएशन में खुद को कूल रखें। खुद पर कंट्रोल खोने से बचाना जब भी सामने वाला आपको प्रोवोक करे, नीचा दिखाए तो खुद से यहीं कहना है कि मेरा रिएक्शन मेरी ताकत है और मैं इसे ऐसे ही नहीं दूंगा। क्योंकि गुस्से में खुद पर कंट्रोल खो देने से पावर भी चली जाती है। धीरे से रिएक्ट करें जब भी बहुत ही गंभीर, डिप्रेशन और स्ट्रेसफुल सिचुएशन आए तो तीन बार गहरी सांस लें और सोचें क्या मेरा इस जगह पर रिस्पांड करना जरूरी है। जो इंसान शांत रहते हैं वो अपनी प्रतिक्रिया देने के मामले में जल्दीबाजी नहीं दिखाते। और, जो लोग जल्दी प्रतिक्रिया देते हैं अक्सर वो कमजोर ही होती है। सिचुएशन नहीं माइंड पर कंट्रोल करें अक्सर लोग सिचुएशन को कंट्रोल करने में लग जाते हैं लेकिन सिचुएशन नहीं खुद के माइंड पर कंट्रोल करने की जरूरत होती है। मेंटली स्ट्रांग लोगों से इन बातों को सीखें। जैसे ही कोई निगेटिव सिचुएशन आए तो सोचें कि हर समस्या का समाधान होता है। इससे पहले भी कई मुश्किल परिस्थितियां संभाली हैं। इसे भी संभाल लेंगे और ज्यादा सोचने से नहीं बल्कि अपने ऐक्शन में क्लियरिटी लाएं। जिससे प्रॉब्लम सॉल्व की जा सके। बॉडी लैंग्वेज पर कंट्रोल जब भी निगेटिव सिचुएशन आती है तो अपने बॉडी लैंग्वेज पर भी कंट्रोल करें। स्पाइन को सीधा करें, चेस्ट को ओपन करें और सांसों को धीरे से लें। ऐसा करने से बॉडी लैंग्वेज कंट्रोल में दिखेगी। निगेटिव विचारों को रोकें मन में जैसे ही निगेटिव विचार आएं तो खुद से बात करें कि क्या जो मैं सोच रहा हूं वो सही है या केवल मन का भ्रम। अपने विचारों को लिखें, ऐसा करने से ज्यादा क्लियर होगा माइंड। recent visitors 47

जेनेटिक इंजीनियरिंग में करियर

    जेनेटिक इंजीनियरिंग विज्ञान का एक अत्याधुनिक ब्रांच है। जिसमें सजीव प्राणियों के डीएनए कोड में मौजूद जेनेटिक को अत्याधुनिक तकनीक केजरिए परिवर्तित किया जाता है। यह क्षेत्र बायोटेक्नोलॉजी के अंतर्गत ही आता है। जेनेटिक इंजीनियरिंग का कमाल कुछ वर्ष पहले ही दुनिया देख चुकी है, जब इयान विल्मुट और उनके सहयोगी रोसलिन ने जेनेटिक तरीके से भेड़ का बच्चा तैयार किया, जिसे डोली दिया था। यह हुबहु भेड़ का जेनेटिक कॉपी था। इन दिनों जेनेटिक इंजीनियर की डिमांड इंडिया के साथ-साथ विदेश में तेजी से बढ़ रहा है। क्या है जेनेटिक इंजीनियरिंग जेनेटिक तकनीक के जरिए जींस की सहायता से पेड़-पौधे, जानवर और इंसानों में अच्छे गुणों को विकसित किया जाता है। जेनेटिक तकनीक के द्वारा ही रोग प्रतिरोधक फसलें और सूखे में पैदा हो सकने वाली फसलों का उत्पादन किया जाता है। इसके जरिए पेड़-पौधे और जनवरों में ऐसे गुण विकसित किए जाते हैं, जिसकी मदद से इनके अंदर बीमारियों से लडने की प्रतिरोधिक क्षमता विकसित की जाती है। इस तरह के पेड़-पौधे जीएम यानी जेनेटिकली मोडिफाइड फूड के रूप में जाने-जाते हैं। बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में जेनेटिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल बृहत पैमाने पर होता है, क्योंकि यह इंडस्ट्री फॉमास्युटिकल प्रोडक्ट जैसे कि इंश्युलीन और दूसरे दवाइयों के लिए एक हद तक जेनेटिक पर ही निर्भर रहती है। योग्यता और कोर्स योग्य जेनेटिक इंजीनियर उसे ही माना जा सकता है, जिनके पास जेनेटिक और इससे संबंधित फील्ड में ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डिग्री हो, जैसे कि बायोटेक्नोलॉजी, मोलिक्युलर बायोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री। इस कोर्स में एंट्री के लिए 12वीं बायोलॉजी, केमिस्ट्री और मैथ से पास होना जरूरी है। इस समय अधिकतर यूनिवर्सिटी और इंस्टीट्यूट में जेनेटिक इंजीनियरिंग के लिए अलग से कोर्स ऑफर नहीं किया जाता है, लेकिन इसकी पढ़ाई बायोटेक्नोजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री में सहायक विषय के रूप में होती है। बायोटेक्नोलॉजी के अडंर ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट में जेनेटिक इंजीनियरिंग में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं। गेेजुटए कोर्स, बीईध्बीटेक में एंट्री प्रवेश परीक्षा के आधार पर होता है। एमएससी इन जेनेटिक इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिए जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी हर साल 120 सीटों के लिए संयुक्त परीक्षा का आयोजन करती है। तकरीबन 20 हजार छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं। उगा अंको के आधार पर 20 छात्र को जेएनयू परिसर, नई दिल्ली में एडमिशन दे दिया जाता है। जेनेटिक डिग्री कोर्स के लिए भी यहां कुछ सीटें निश्चित हैं। इसके लिए भी एंटे्रस टेस्ट में बैठना जरूरी है। रोजगार के अवसर जान-मानी करियर एक्सपर्ट परवीन मलहोत्रा कहती हैं कि जेनेटिक इंजीनियर के लिए भारत के साथ-साथ विदेश में भी जॉब के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इनके लिए मुख्यत रोजगार के अवसर मेडिकल व फार्मास्युटिकल कंपनी, एग्रीकल्चर सेक्टर, प्राइवेट और सरकारी रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर में होते हैं। टीचिंग को भी करियर ऑप्शन के रूप में आजमा जा सकता है। इसके अलावा, इनके लिए रोजगार के कई और भी रास्ते हैं। बायोटेक लेबोरेटरी में रिसर्च, एनर्जी और एंवायरनमेंट से संबंधित इंडस्ट्री, एनिमल हसबैंड्री, डेयरी फार्मिंग, मेडिसन आदि में भी रोजगार के खूब मौके हैं। कुछ ऐसे संस्थान भी हैं, जो जेनेटिक इंजीनियर को हायर करती है, जैसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, नई दिल्ली, सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंट ऐंड डाइग्नोस्टिक, हैदराबाद, बायोकेमिकल इंजीनियरिंग रिसर्च ऐंड प्रोसेस डेवलॅपमेंट सेंटर, चंडीगढ़, द इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक ऐंड इंटेग्रेटिव बायोलॉजी, दिल्ली आदि। सैलॅरी पैकेज जेनेटिक इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएट की डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स को शुरुआती दौर में आठ से 12 हजार रुपये प्रति माह सैलॅरी मिलने लगती है। यदि आपके पास डॉक्ट्रोरल डिग्री है, तो सैलॅरी 15-25 हजार रुपये शुरुआती महीनों में हो सकती है। इंस्टीट्यूट वॉच… -इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मद्रास, खडगपुर -आईआईटी गुवाहाटी -आईआईटी, दिल्ली -दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली -उस्मानिया यूनिवर्सिटी, हैदराबाद -पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना -राजेंद्र एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, समस्तीपुर, बिहार -जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली -बनारस हिंदु यूनिवर्सिटी, वाराणसी -ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, नई दिल्ली     recent visitors 36

कुछ नेचुरल चीजों से आप घर पर भी तैयार कर सकते हैं फेस टोनर

धूप की तपिश, पसीने की चिपचिपाहट और चेहरे पर चढ़ती धूल- गर्मियां आते ही हमारी स्किन मानो मदद के लिए पुकारने लगती है। महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स की एक लंबी लिस्ट हो सकती है आपके पास, लेकिन असली निखार तो तब आता है जब आप अपनी त्वचा को नेचर के करीब लाते हैं। सोचिए, अगर हर सुबह आप आईने में खुद को एक दमकते चेहरे के साथ देखें- जैसे शीशे पर चमक आ गई हो! तो चलिए इस बार गर्मी को हराते हैं 3 ऐसे नेचुरल फेस टोनर से, जो न सिर्फ आपकी स्किन को ठंडक देंगे बल्कि हर दिन बढ़ाएंगे उसका ग्लो, वो भी बिना किसी साइड इफेक्ट और बिना जेब पर भारी पड़े! सबसे अच्छी बात? ये टोनर आप खुद अपने किचन की कुछ चीजों से घर पर ही बना सकत हैं। आइए जानें। खीरे और एलोवेरा का कूलिंग टोनर खीरा स्किन को ठंडक देता है और ऑयल बैलेंस में मदद करता है। वहीं एलोवेरा त्वचा को हाइड्रेट करता है और चमक लाता है। कैसे बनाएं:     1 खीरा छीलकर छोटे टुकड़ों में काट लें।     उसे ब्लेंड कर लें और रस निकाल लें।     अब उसमें 2 बड़े चम्मच एलोवेरा जेल मिलाएं।     थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें।     इस मिश्रण को स्प्रे बॉटल में भर लें और फ्रिज में रखें। कैसे इस्तेमाल करें: दिन में दो बार चेहरे पर स्प्रे करें या कॉटन से लगाएं। गर्मियों में ये स्किन को ठंडक देने के साथ-साथ उसे फ्रेश भी बनाए रखेगा। ग्रीन टी और नींबू का डीटॉक्स टोनर ग्रीन टी में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो स्किन से टॉक्सिन्स हटाते हैं। नींबू स्किन को साफ और टाइट बनाता है। कैसे बनाएं:     1 कप पानी में ग्रीन टी बैग डालें और 10 मिनट तक छोड़ दें।     ठंडा होने पर उसमें 1 चम्मच नींबू का रस मिलाएं।     चाहें तो इसमें कुछ बूंदें टी ट्री ऑयल की भी मिला सकते हैं। कैसे इस्तेमाल करें: हर बार चेहरा धोने के बाद इस टोनर को कॉटन से लगाएं। इससे चेहरे के रोमछिद्र (pores) साफ होंगे और स्किन में निखार आएगा। गुलाब जल और चंदन का क्लासिक टोनर गुलाब जल त्वचा को हाइड्रेट करता है और चंदन से स्किन ग्लो करती है। ये टोनर गर्मियों में पसीने और जलन की समस्या से भी बचाता है। कैसे बनाएं:     3 बड़े चम्मच गुलाब जल लें।     उसमें 1 चम्मच चंदन पाउडर मिलाएं।     अच्छी तरह मिलाएं और छान लें ताकि चंदन के कण न रहें।     इसे एक बोतल में भरकर फ्रिज में रखें। कैसे इस्तेमाल करें: रोज सुबह और रात को सोने से पहले इसे चेहरे पर लगाएं। ये स्किन को ठंडक देगा और गहराई से निखार लाएगा। इन जरूरी बातों का भी रखें ध्यान     होममेड टोनर 5-7 दिनों तक ही फ्रिज में स्टोर करें।     किसी भी टोनर का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें।     नियमित इस्तेमाल से ही बेहतर रिजल्ट्स मिलते हैं। गर्मियों में त्वचा की देखभाल थोड़ा-सा समय मांगती है, लेकिन अगर आप हर दिन इन घरेलू टोनर का इस्तेमाल करेंगे तो आपकी स्किन न सिर्फ हेल्दी रहेगी बल्कि उसपर शीशे जैसी चमक भी देखने को मिलेगी।   recent visitors 32

एमपी में भीषण गर्मी के बीच हुई बारिश, अगले 4 दिन तक बूंदाबादी के आसार

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम के दो रंग देखने को मिल रहे है। प्रदेश में कहीं तेज गर्मी पड़ रही है तो कही बारिश और ओले गिर रहे है। गुरुवार को करीब 25 से ज्यादा जिलों में मौसम बदला रहा। राज्य में आज शुक्रवार को भी कई जिलों में बूंदाबांदी होने की संभावना है। जबकि 5 जिले-छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट में ओले गिर सकते हैं। वहीं कई इलाकों में भीषण गर्मी का असर जारी रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, साइक्लोनिक सर्कुलेशन (चक्रवात) के एक्टिव होने से मध्यप्रदेश में ओले-बारिश का दौर जारी है। पिछले 6 दिन प्रदेश के आधे हिस्से में मौसम बदला हुआ है। कहीं तेज आंधी-बारिश हो रही है तो कहीं ओले भी गिर रहे हैं। भिंड में शुक्रवार सुबह से तेज हवा के साथ बारिश हुई। इसके चलते शहर की बिजली बंद हुई। हालांकि, सुबह के समय होने वाली बारिश से तापमान भी कम हुआ है। इसके साथ ही मुरैना में भी तेज बारिश हुई। आज शुक्रवार को कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, जबलपुर, नरसिंहपुर में हवा की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रतिघंटा तक रह सकती है। वहीं, भोपाल, ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, सीहोर, रायसेन, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक और हल्की बारिश होने के आसार है। मौसम विभाग के अनुसार 5 मई तक प्रदेश में बारिश का दौर बना रहेगा। कुछ जिलों में दिन में गर्मी रहेगी, जबकि शाम के बाद मौसम बदलेगा। इससे पहले, गुरुवार को भी कुछ जिलों में बारिश हुई। करीब 25 से ज्यादा जिलों में मौसम बदला रहा। डिंडौरी में तेज बारिश के साथ ओले भी गिरे। वहीं, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, मैहर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, छिंदवाड़ा, पन्ना, शहडोल, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, रतलाम, उज्जैन और राजगढ़ में हल्की गरज के साथ हल्की बारिश हुई। मई के पहले ही दिन उज्जैन, शाजापुर, रतलाम, गुना और नरसिंहपुर में तापमान 43 डिग्री के पार पहुंच गया। शाजापुर सबसे गर्म रहा। यहां पारा 43.7 डिग्री सेल्सियस रहा। रतलाम में 43.6 डिग्री, उज्जैन में 43.4 डिग्री और गुना-नरसिंहपुर में 43.2 डिग्री दर्ज किया गया। धार, खरगोन, खंडवा, शिवपुरी, रायसेन, टीकमगढ़, सागर, दमोह, बैतूल, खजुराहो और नर्मदापुरम में पारा 41 डिग्री या इससे अधिक रहा। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 42.5 डिग्री, इंदौर में 42 डिग्री, ग्वालियर में 39.6 डिग्री और जबलपुर में 40.2 डिग्री रहा। इन जिलों में आज बारिश ओले का अलर्ट  मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार कोकटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, जबलपुर, नरसिंहपुर में हवा की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रतिघंटा तक रह सकती है। वहीं, भोपाल, ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, सीहोर, रायसेन, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक और हल्की बारिश होने के आसार है।छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट में ओले गिर सकते हैं। 5 मई तक बारिश का दौर रहेगा मौसम विभाग के अनुसार, 5 मई तक प्रदेश में बारिश का दौर बना रहेगा। कुछ जिलों में दिन में गर्मी रहेगी, जबकि शाम के बाद मौसम बदलेगा। गुरुवार को डिंडौरी में ओले गिरे। वहीं, अनूपपुर, उमरिया, कटनी, मैहर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, छिंदवाड़ा, पन्ना, शहडोल, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, रतलाम, उज्जैन और राजगढ़ में हल्की गरज के साथ हल्की बारिश हुई। इधर, शाजापुर, रतलाम, गुना और नरसिंहपुर में पारा 43 डिग्री के पार पहुंच गया। शाजापुर सबसे गर्म रहा। यहां पारा 43.7 डिग्री सेल्सियस रहा। रतलाम में 43.6 डिग्री, उज्जैन में 43.4 डिग्री और गुना-नरसिंहपुर में 43.2 डिग्री दर्ज किया गया। धार, खरगोन, खंडवा, शिवपुरी, रायसेन, टीकमगढ़, सागर, दमोह, बैतूल, खजुराहो और नर्मदापुरम में पारा 41 डिग्री या इससे अधिक रहा। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में 42.5 डिग्री, इंदौर में 42 डिग्री, ग्वालियर में 39.6 डिग्री और जबलपुर में 40.2 डिग्री रहा। प्रदेश में अगले 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम 2 मई: छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला और बालाघाट में ओले गिर सकते हैं। वहीं, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, जबलपुर, नरसिंहपुर में हवा की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रतिघंटा तक रह सकती है। भोपाल, ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, राजगढ़, विदिशा, सीहोर, रायसेन, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक और हल्की बारिश होने के आसार है। 3 मई: उमरिया, शहडोल, अनूपपुर और डिंडौरी में ओले गिरने का अलर्ट है। जबलपुर, कटनी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा पांढुर्णा में तेज आंधी चलेगी। भोपाल, ग्वालियर, नीमच, मंदसौर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, आगर-मालवा, राजगढ़, शाजापुर, सीहोर, हरदा, बैतूल, नर्मदापुरम, रायसेन, विदिशा, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में भी मौसम बदला रहेगा। 4 मई: सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में हवा की रफ्तार 50 से 60 किमी प्रतिघंटा तक रह सकती है। नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सागर, दमोह, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, जबलपुर, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल और हरदा में गरज-चमक, बारिश होने की संभावना है। 5 मई: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर समेत प्रदेश के अधिकांश हिस्से में मौसम बदला रहेगा। कहीं, गरज-चमक और आंधी चलेगी तो कहीं बारिश भी हो सकती है। झाबुआ, अलीराजपुर, धार, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में आसमान साफ रह सकता है।   recent visitors 50

वजन कम करना चाहते हैं, तो 7 फूड्स को कर दें लंच से बाहर

वजन कम करने के लिए सही डाइट प्लान फॉलो करना बहुत जरूरी है। अक्सर लोग एक्सरसाइज तो करते हैं, लेकिन डाइट में गलत फूड्स का शामिल करके अपना वेट लॉस गोल पूरा नहीं कर पाते। लंच दिन का सबसे जरूरी मील होता है। इसलिए इसमें अगर हेल्दी और लो-कैलोरी फूड्स न खाएं, तो वजन कम करना मुश्किल हो सकता है। आइए जानते हैं कि वजन घटाने के दौरान लंच में किन फूड्स से परहेज करना चाहिए। रिफाइंड कार्ब्स वाले फूड्स सफेद चावल, मैदा से बनी रोटी, ब्रेड, नूडल्स और पास्ता जैसे रिफाइंड कार्ब्स ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाते हैं और जल्दी भूख लगने का कारण बनते हैं। इनकी जगह ब्राउन राइस, क्विनोआ, बाजरा या मल्टीग्रेन आटे की रोटी खाना बेहतर विकल्प है। डीप-फ्राइड और प्रोसेस्ड फूड्स समोसे, कचौरी, पकोड़े, फ्रेंच फ्राइज और चिप्स जैसे तले हुए स्नैक्स हाई कैलोरी और अनहेल्दी फैट से भरपूर होते हैं। ये न सिर्फ वजन बढ़ाते हैं बल्कि पाचन को भी धीमा कर देते हैं। अगर तला हुआ खाने का मन करे, तो एयर फ्रायर या कम तेल में शैलो-फ्राई करके खाएं। शुगरी ड्रिंक्स और पैकेज्ड जूस कोल्ड ड्रिंक्स, एनर्जी ड्रिंक्स और पैकेट वाले जूस में ज्यादा शुगर और कैलोरीज होती हैं, जो वजन घटाने में मुश्किल खड़ी कर सकती हैं। इनकी जगह नारियल पानी, नींबू पानी या ग्रीन टी पीना फायदेमंद होगा। हाई-फैट डेयरी प्रोडक्ट्स पनीर, चीज, मक्खन और फुल-क्रीम दूध जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स में सैचुरेटेड फैट की मात्रा ज्यादा होती है, जो वजन बढ़ा सकते हैं। इनकी जगह लो-फैट दही, स्किम्ड मिल्क या टोफू का इस्तेमाल करें। रेड मीट और प्रोसेस्ड मीट बर्गर, सॉसेज, बेकन और रेड मीट में संतृप्त वसा और सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है, जो मोटापे और दिल की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। प्रोटीन के लिए मछली, चिकन या दालें बेहतर ऑप्शन हैं। हाई-कैलोरी सॉस और ड्रेसिंग मेयोनीज, टोमेटो केचप और क्रीम बेस्ड सॉस में कैलोरीज और प्रिजर्वेटिव्स होते हैं। इनकी जगह घर में बनी हुई हरी चटनी, दही या ऑलिव ऑयल का इस्तेमाल करें। ज्यादा नमक वाले फूड्स अचार, चिप्स, नमकीन और प्रोसेस्ड फूड्स में सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे शरीर में वॉटर रिटेंशन होता है और वजन कम करने में दिक्कत आती है।   recent visitors 31