Sunday, July 5, 2026 12:45 am

संभल के दबंग CO अनुज चौधरी का तबादला, हिंसा के बाद होली-जुमा बयान से हुए थे चर्चित, अब मिली ये जिम्मेदारी

संभल  संभल हिंसा के पांच महीने बाद मीडिया की सुर्खियां बने सीओ अनुज चौधरी (Anuj Chaudhary) का तबादला हो गया है। संभल सीओ की जिम्मेदारी अब आलोक भाटी को दी गई। वहीं अनुज को जिले में ही चन्दौसी सर्किल का सीओ बनाया गया है। अनुज बीते साल हुई हिंसा के बाद से लगातार चर्चा में बने हुए थे। होली के दौरान जुमे की नमाज पर बयान को लेकर उनपर जांच चल रही है। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने शनिवार को अनुज चौधरी सहित अन्य पुलिस ऑफिसर्स का तबादला किया। ट्रांसफर आदेश के तहत सीओ संभल अनुज चौधरी का तबादला चंदौसी किया गया है। उनकी जगह ट्रेनी आईपीएस आलोक भाटी को संभल का नया क्षेत्राधिकारी बनाया गया है। वहीं संभल के बहजोई में तैनात सीओ प्रदीप कुमार सिंह को यातायात प्रभारी बना दिया गया है। अभी तक यातायात की जिम्मेदारी देख रहे संतोष कुमार को सीओ लाइन कार्यालय भेजा गया है। चंदौसी के सीओ रहे आलोक सिद्धू को बहजोई सीओ की जिम्मेदारी दी गई है। दरअसल पूर्व आईपीएस और आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने अनुज चौधरी को जुमा वाले बयान मामले में क्लीन चिट दिए जाने पर ऐतराज जताया था। ठाकुर ने 9 अप्रैल को अनुज चौधरी के खिलाफ एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (IGRS) पोर्टल पर शिकायत की थी। सीओ के सेवा आचरण नियमावली का उल्लंघन करने की शिकायत दर्ज में उन्होंने कहा था कि अनुज सेवा और वर्दी नियमों का उल्लंघन करते हैं। वह बिना अधिकार के बयानबाजी करते हैं। अपने कार्यों को सांप्रदायिक रंग देते हैं। इससे माहौल तनावपूर्ण होता है और कुछ वर्गों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। डीजीपी प्रशांत कुमार ने पुलिस मुख्यालय में तैनात एसपी लॉ एंड ऑर्डर मनोज कुमार अवस्थी को जांच सौंपी थी। मनोज ने संभल के ASP उत्तरी श्रीश्चंद्र के साथ जांच की और जांच रिपोर्ट विशेष सचिव गृह विभाग को भेज दी थी। 17 अप्रैल को एएसपी संभल श्रीश्चंद्र ने सीओ को क्लीन चिट दे दी थी। अमिताभ ने डीजीपी को पत्र लिखकर अपनी बात रखने का मौका नहीं मिलने की बात कही। इसके बाद इस मामले की फिर से जांच करने की निर्णय लिया गया है। एएसपी संभल ने अमिताभ ठाकुर को लिखे पत्र में फिर से जांच करने की जानकारी दी और बताया कि उनको अपने आरोपों में सबूत देने के लिए 3 दिन का समय दिया है। इसके बाद आज तबादले की खबर आ गई है। recent visitors 36

आतंकी हमले में मारे गए हिंदूओं की आत्मा की शांति हेतु तर्पण, मुंडन और सामूहिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित

ओंकारेश्वर  जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में मृत श्रद्धालुओं को हिंदू महासभा ने ओंकारेश्वर गौमुख घाट पर तर्पण, मुंडन करवाकर सामूहिक श्रद्धांजलि दी। हिन्दू परंपरा अनुसार शोक व्यक्त कर समाज में जागरूकता और राष्ट्ररक्षा का संकल्प भी लिया गया। आयोजन हिन्दू समाज के आत्मबोध का प्रतीक आयोजन संत सौमित्रदास त्यागी बापू (प्रदेश पदाधिकारी, संत महासभा) के सानिध्य में हुआ। नर्मदा जल से तर्पण और शास्त्र विधि से मुंडन कर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में हिन्दू महासभा के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। त्यागी बापू ने कहा, “कश्मीर में हुई घटना केवल पीड़ा ही नहीं, चेतना का संदेश भी है। जब तक हिन्दू समाज एकजुट होकर आत्मरक्षा के लिए सजग नहीं होगा, तब तक ऐसी घटनाएं होती रहेगी। यह आयोजन हिन्दू समाज के आत्मबोध का प्रतीक है। राष्ट्ररक्षा और सामाजिक संकल्प प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व सैनिक प्रदीप सिंह ठाकुर ने कहा, देश की सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ अब समय है कि समाज के भीतर फैले आतंकवाद के विरुद्ध भी सजग रहा जाए। हिन्दू महासभा समाज के प्रत्येक वर्ग की सुरक्षा व अधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है। जिला संगठन मंत्री पं. जीतू दुबे ने कहा, यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि हिन्दू समाज को एकजुट कर इस्लामिक कट्टरवाद के विरुद्ध चेतना जगाने का माध्यम है। हम सरकार से भी अपेक्षा करते हैं कि देश में रह रहे अवैध घुसपैठियों पर त्वरित कार्यवाही हो। अंत में सभी उपस्थितजनों ने नर्मदा तट पर राष्ट्र और धर्म की रक्षा हेतु कार्यरत रहने का संकल्प लिया। recent visitors 26

जबलपुर ऑर्डिनेंस फैक्ट्री ने रद्द की छुट्टियां, वापस बुलाए सभी कर्मचारी, गोला-बारूद बनाने का आया है बड़ा ऑर्डर

जबलपुर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद देश में तनाव बढ़ गया है। ऐसे में मध्य प्रदेश के जबलपुर की आयुध निर्माण फैक्ट्री खमरिया ने अपने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं। यह फैसला तुरंत लागू हो गया है। फैक्ट्री ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि इस साल का उत्पादन लक्ष्य समय पर पूरा किया जा सके। फैक्ट्री को डर है कि अगर छुट्टियां दी गईं तो सेना के लिए गोला-बारूद बनाने का काम पिछड़ जाएगा। गोला बारूद बनाने का मिला बड़ा टारगेट दरअसल, OFK को इस साल गोला-बारूद बनाने का एक बड़ा टारगेट मिला है लेकिन, अप्रैल के महीने में फैक्ट्री उतना काम नहीं कर पाई जितना उसने सोचा था। इसलिए, फैक्ट्री के बड़े अधिकारियों ने यह फैसला लिया है कि सभी कर्मचारियों को बिना छुट्टी के काम करना होगा। इससे फैक्ट्री ज्यादा गोला-बारूद बना पाएगी और सेना को समय पर गोला-बारूद मिल जाएगा। जनसंपर्क अधिकारी ने दी जानकारी आयुध भंडार के जनसंपर्क अधिकारी अविनाश शंकर ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'अधिकारियों और कर्मचारियों की दो दिन से अधिक की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द की गई हैं ताकि हम इस वित्तीय वर्ष का निर्धारित उत्पादन लक्ष्य हासिल कर सकें। 4000 कर्मचारी करते हैं काम खमरिया आयुध निर्माण फैक्ट्री भारतीय सेना के लिए गोला-बारूद बनाती है। इस फैक्ट्री में लगभग 4,000 कर्मचारी काम करते हैं। यह फैक्ट्री देश की सुरक्षा के लिए बहुत ही जरूरी है। यहां बनने वाला गोला-बारूद सेना को दुश्मनों से लड़ने में मदद करता है। पहलगाम हमले के बाद सरकार और सेना सावधान यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब देश की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार और सेना दोनों ही सावधान हैं। ऐसे में, गोला-बारूद की फैक्ट्री में उत्पादन बढ़ाना जरूरी है ताकि सेना को किसी भी हालत से निपटने के लिए तैयार रखा जा सके। recent visitors 31

गावस्कर का मानना है कि पाकिस्तान का एशिया कप में भी हुक्का-पानी बंद होगा, खतरे में ACC, भारत का कड़ा प्रहार

नई दिल्ली पहलगाम आतंकी हमले के बाद देश में गम और गुस्सा है। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए हैं। वहीं, भारत के पूर्व कप्तान और दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने एक बड़ी भविष्यवाणी की है। गावस्कर का मानना है कि पाकिस्तान का एशिया कप में भी हुक्का-पानी बंद होगा। उन्होंने एशियन क्रिकेट काउंसिल (एससीसी) के भविष्य को भी खतरे में करार दिया। उन्होंने कहा कि ना सिर्फ पाकिस्तान को एशिया कप से बाहर किया जा सकता है बल्कि एससीसी को भी भंग किया जा सकता है। बता दें कि एशिया कप 2025 की मेजबानी भारत के पास है, जिसका आयोजन टी20 फॉर्मेट में होना है। 'बीसीसीआई का रुख वही रहा…' गावस्कर ने स्पोर्ट्स टुडे से कहा, "भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) का रुख हमेशा से वही रहा है, जो भारत सरकार उन्हें करने के लिए कहती है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि एशिया कप के मामले में इसमें कोई बदलाव होगा। एशिया कप के इस संस्करण के लिए भारत और श्रीलंका मेजबान हैं, इसलिए यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या चीजें बिल्कुल बदली हैं? लेकिन अगर चीजें नहीं बदली हैं तो मैं पाकिस्तान को अब एशिया कप का हिस्सा बनते नहीं देखता, जिसकी मेजबानी भारत और श्रीलंका करने जा रहे हैं।" शिया कप का आयोजन सितंबर 2025 में प्रस्तावित है। 'केवल तीन-चार देशों का टूर्नामेंट' उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता कि यह कैसे होगा। हो सकता है कि एशियन क्रिकेट काउंसिल को भंग कर दिया जाए और केवल तीन देशों या चार देशों का टूर्नामेंट हो सकता है, जिसमें हांगकांग या यूएई को आमंत्रित किया जा सकता है। एसीसी को भंग किया जा सकता है। लेकिन मुझे लगता है कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि अगले कुछ महीनों में क्या होता है।" इस साल की शुरुआत में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान का दौरा नहीं किया था और अपने सभी मैच दुबई में खेले थे, जिसमें फाइनल भी शामिल था। भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर खिताब जीता था। 'अगर दो देश लड़ रहे हैं तो…' पूर्व कप्तान ने कहा, "ऐसा हो सकता है कि भारत एसीसी से बाहर निकलने का फैसला ले ले। हम कह सकते हैं कि हम बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान में 4 देशों का टूर्नामेंट या 5 देशों का टूर्नामेंट आयोजित करने जा रहे हैं। ऐसा हो सकता है टूर्नामेंट बांग्लादेश या श्रीलंका में आयोजित जाए लेकिन जाहिर है कि भारत भारत इसकी मेजबानी करेगा।" उन्होंने कहा, "जो कुछ हो रहा है, उसके मद्देनजर मुझे बिल्कुल भी आश्चर्य नहीं होगा अगर एसीसी को भंग कर दिया जाए। मेरा मतलब है कि अगर दो देश एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं तो एक-दूसरे के साथ खेल खेलना थोड़ा मुश्किल है।" recent visitors 38

विवादों में घिरीं डॉ. अरुणा कुमार बनी डीएमई, जूडा ने सीएम यादव को पत्र लिखकर नियुक्ति आदेश निरस्त करने की मांग

 भोपाल  डॉ. अरुणा कुमार को डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन (DME) बनाए जाने के फैसले ने एक बार फिर नया विवाद खड़ा कर दिया है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (जूडा) और मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (एमटीए) ने इस नियुक्ति का विरोध करते हुए सरकार को 24 घंटे में आदेश निरस्त करने की चेतावनी दी है। दोनों संगठनों ने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं होने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी है। साथ ही सीएम डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर उनकी नियुक्ति आदेश निरस्त करने की मांग की है। डॉ. अरुणा पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने औऱ गाली गलौज करने आरोप लगे हैं। डॉ अरुणा कुमार का विवादों से पुराना नाता रहा है , दो बार उन्हें गांधी मेडिकल कॉलेज के गायनी डिपार्टमेंट के HOD पद से हटना भी पड़ा था। वहीं एक बार उन्हें डीन पद से इस्तीफा भी देना पड़ा था। डॉ अरुणा कुमार को हटवाने के लिए मेडिकल टीचर्स डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला से भी मुलाकात कर चुके हैं। बीते सालों डॉ. अरुणा कुमार के कार्यकाल में एक महिला जूनियर डॉक्टर ने आत्महत्या की थी और आरोप लगाया था कि उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। आज डॉ अरुणा कुमार को पदस्थ करने के विरोध में गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के सभी चिकित्सक, जूनियर डॉक्टर्स आज दोपहर हमीदिया अस्पताल मर विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस वजह से हटी थी डॉ अरुणा 31 जुलाई 2023 को गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की थर्ड ईयर पीजी स्टूडेंट बाला सरस्वती ने आत्महत्या कर ली थी। 27 वर्षीय मेडिकल स्टूडेंट ने एनेस्थीसिया इंजेक्शन का ओवरडोज लेकर जान दी थी। घटना के बाद जीएमसी परिसर में हड़कंप मच गया था। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जूडा) ने इस आत्महत्या के लिए डॉ. अरुणा कुमार को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया और उनके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए हड़ताल पर चले गए थे। संगठन ने आरोप लगाया था कि छात्रा को थीसिस सबमिशन को लेकर लगातार मानसिक दबाव और प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। जिसके बाद डॉ. अरुणा कुमार को जीएमसी से हटाकर डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीएमई) में स्थानांतरित कर दिया था, जहां से वे अब तक कार्यरत थीं। अब उसी डायरेक्टोरेट में उन्हें डायरेक्टर पद पर पदोन्नत किया गया है, जिससे एक बार फिर विरोध हो रहा है। recent visitors 34

जगद्गुरू रामभद्राचार्य को मानद उपाधि से विभूषित करेगा डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय

सागर सागर . डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय में में जल्द ही एक बड़ा दीक्षांत समारोह होने वाला है। इस बार का कन्वोकेशन खास होगा क्योंकि इसमें जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज को मानद उपाधि से सम्मानित किया जाएगा ।विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. नीलिमा गुप्ता ने इसके लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखकर अनुमति मांगी। राष्ट्रपति से अनुमति मिलने के बाद अब मई माह में दीक्षांत समारोह आयोजित करने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से भी समारोह में शामिल होने की अनुमति मांगी गई है। मई के दूसरे सप्ताह में तारीख का ऐलान विवि प्रबंधन करेगा।  जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने 80 ग्रंथों की रचना जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज जब दो महीने के थे, तब उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी। इसके बावजूद उन्होंने जो उपलब्धियां हासिल कीं, वे अद्वितीय हैं। वे शिक्षाविद, बहुभाषाविद, कथाकार और प्रवचनकर्ता के रूप में जाने जाते ह। स्वामी को 22 भाषाएं आती हैं और उन्होंने लगभग 80 ग्रंथों की रचना की है, जिनमें हिंदी और संस्कृत के चार महाकाव्य भी शामिल है। उन्हें 1988 में जगद्गुरु पद पर प्रतिष्ठित किया गया था। उन्होंने विकलांग विश्वविद्यालय की स्थापना भी की है, जिसके वे आजीवन संस्थापक कुलाधिपति हैं। उन्हें 2015 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था। तैयारियां चल रही हैं विवि में दीक्षांत समारोह के आयोजन की तैयारी में चल रही है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद अब अतिथियों की अनुमति मिलने का इंतजार है। मई के दूसरे सप्ताह में तारीख की घोषणा हो जाएगा। इस वर्ष आयोजन को अच्छा और बृहद बनाने का हम प्रयास कर रहे हैं। जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज को मानद उपाधि से सम्मानित करने की अनुमति हमें राष्ट्रपति से मिल गई है। प्रो. नीलिमा गुप्ता, कुलपति, डॉ. हरिसिंह गौर विवि उपाधि देने के फैसले का विरोध, प्रोफसर, शिक्षाविद सहित तमाम लोगों ने जताई आपत्ति. डॉ. हरिसिंह गौर यूनिवर्सिटी अपने 33वें दीक्षांत समारोह में जगद्गुरु रामभद्राचार्य को डी. लिट की मानद उपाधि देने जा रही है. इसके लिए विश्वविद्यालय को राष्ट्रपति से भी मंजूरी मिल गई है. ये बात सामने आते ही फोरम ऑफ प्रोग्रेसिव एकेडेमिया के बैनर तले देश भर के शिक्षाविद, कानूनविद, पत्रकार, समाजसेवी, पूर्व छात्र और शोध छात्र विरोध में उतर आए हैं. वो जिला और विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष विरोध जता रहे हैं. उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इस फैसले पर विरोध प्रकट किया है. उनका कहना है कि ये फैसला लोकतांत्रिक, सामाजिक न्याय और संवैधानिक नैतिकता के मूल्यों को कमजोर करता है. साथ ही वंचित समुदाय के लिए पीड़ादायक संदेश भी है. रामभद्राचार्य पर लगा रहे हैं गंभीर आरोप जगद्गुरु रामभद्राचार्य को दी जा रही डी. लिट की मानद उपाधि का विरोध करने वालों का तर्क है कि "रामभद्राचार्य विद्वान होने के साथ-साथ विवादास्पद भी हैं. उन्होंने कई बार अपने भाषण और वक्तव्यों में डाॅ. भीमराव अंबेडकर, बौद्ध धर्म और दलित समुदाय के विरुद्ध आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां की है. उनके बयान समाज में विभाजन पैदा करने वाले, जातिवादी और अपमानजनक होते हैं. ऐसे बयान हमारे संविधान के बंधुत्व, समानता और गरिमा के प्रतिकूल हैं." सुप्रीम कोर्ट के वकील ने इस फैसले को बताया विवादास्पद इसके अलावा उनका कहना है कि "इस यूनिवर्सिटी के संस्थापक डाॅ. हरीसिंह गौर प्रगतिशील सुधारक, विधि विशेषज्ञ और बौद्ध चेतना से युक्त व्यक्ति थे. जिन्होंने दलितों, महिलाओं और पिछड़ों के लिए संघर्ष किया और वैज्ञानिक सोच, लैंगिक समानता और सामाजिक उत्थान को अपने जीवन का आधार बनाया. ऐसे में यूनिवर्सिटी द्वारा ऐसे व्यक्ति को सम्मान देना, उनके मूल्यों के विपरीत, विडंबना पूर्ण और यूनिवर्सिटी की मूल आत्मा का अपमान है." रामभद्राचार्य के बयानों को बताया नफरती इस फैसले के विरोध में उतरे लोगों का कहना है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य को मानद उपाधि देना छात्रों, विद्वानों, दलित संगठनों, समाजिक समूहों के साथ देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में गहरे आक्रोश को जन्म देने वाला है. चारों तरफ प्रदर्शन, याचिकाएं और सार्वजनिक बयान जारी किए गए हैं, जो बताते हैं कि ये मानद उपाधि जातिगत पूर्वाग्रह और सामाजिक विभाग को वैधता प्रदान करती है. उनका कहना है कि मानद उपाधियां ऐसे लोगों को दी जाती है जो ज्ञान, सेवा, मानव अधिकार और समावेशी प्रगति जैसे सार्वभौमिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं. ऐसे व्यक्ति को सम्मान देना जिनके जातिवादी वक्तव्य सार्वजनिक हैं. विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा को नुकसान पहुंचाता है. यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर भी विरोध में उतरे गौर यूनिवर्सिटी के कई प्रोफेसर, शोध छात्र और छात्र इस फैसले के विरोध में हैं. यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर यूनिवर्सिटी की आचार संहिता का हवाला देते हुए नाम न छापने की शर्त पर ईटीवी भारत से कहते हैं कि "फोरम ऑफ प्रोग्रेसिव एकेडेमिया द्वारा शुरू की गई राष्ट्रव्यापी विरोध मुहिम को मैं एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और डॉ. गौर के बौद्धिक उत्तराधिकारी के नाते पूरी प्रबलता के साथ समर्थन करता हूं. यह निर्णय न केवल चिंताजनक है बल्कि शर्मनाक भी है. इसके पीछे विश्वविद्यालय प्रशासन की बौद्धिक दिवालियापन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है." उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि • इस निर्णय को अविलंब निरस्त किया जाए. • एक स्वतंत्र समिति द्वारा इस निर्णय की समीक्षा की जाए. • भविष्य में मानद उपाधि प्रदान करने के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और मूल्यों-आधारित नीति बनाई जाए. उन्होंने कहा, "यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई नहीं की तो हम इस विरोध को राष्ट्रव्यापी अकादमिक असहयोग आंदोलन तक ले जाने के लिए बाध्य होंगे. विश्वविद्यालयों को प्रतिगामी विचारधाराओं के प्रचारक नहीं बल्कि वैज्ञानिक, समावेशी और प्रगतिशील चेतना के केंद्र बनाना हमारी ऐतिहासिक जिम्मेदारी है." recent visitors 33

‘जख्मी’ धोनी ब्रिगेड को चाहिए बदला, माही से आगे विराट कोहली, RCB vs CSK में किसका पलड़ा भारी?

नई दिल्ली रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु वर्सेस चेन्नई सुपर किंग्स आईपीएल 2025 का 52वां मुकाबला आज खेला जाएगा। दोनों टीमें शाम साढ़े सात बजे से बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में आमने-सामने होंगी। आरसीबी 10 मैचों में से सात जीतकर प्लेऑफ की दहलीज पर है। आरसीबी के खाते में 14 अंक हैं। वहीं, पांच बार की चैंपियन सीएसकी की हालत खस्ता है। उसने 10 मैचों से केवल दो जीते हैं। सीएसके महज 4 अकों के साथ तालिका में दसवें पायदान पर है और प्लेऑफ की रेस से बाहर हो चुकी है। जानिए, आरसीबी वर्सेस सीएसके हेड-टू-हेड रिकॉर्ड। चेन्नई को चाहिए 50 वाला बदला आरसीबी और सीएसके की मौजूदा सीजन में दूसरी बार भिड़ंत होगी। दोनों की जब 28 मार्च को चेन्नई के चेपॉक स्टेडियम में टक्कर हुई थी, तब आरसीबी ने 50 रनों से विजय परचम फहराया था। आरसीबी को चेपॉक के 'अभेद्य किले' में 17 साल बाद जीत नसीब हुई थी। 'जख्मी' धोनी ब्रिगेड शनिवार को आरसीबी के घर में बदला लेने की फिराक में होगी। दोनों ने आईपीएल में आपस में कुल 35 मैच खेले हैं। इस दौरान सीएसके का पलड़ा भारी रहा। चेन्नई ने 21 बार बेंगलुरु को धूल चटाई। आरसीबी को सीएसक के सामने केवल 12 मर्तबा जीत मिली है। एक मुकाबला बेनतीजा रहा। RCB के घर में CSK का रिकॉर्ड चिन्नास्वामी स्टेडियम में आरसीबी और सीएसके में कड़ी टक्कर रही है। चेन्नई और बेंगलुरु ने अब तक यहां 11 मुकाबले खेले हैं, जिसमें से पांच-पांच अपने नाम किए। एक मैच का नतीजा नहीं निकला। दूसरी ओर, चिन्नास्वामी में आरसीबी के आईपीएल रिकॉर्ड की बात करें तो यहां उसने 95 मैच खेले हैं। आरसीबी ने 44 मैचों में जीत दर्ज की है जबकि 46 में हार का मुंह देखा है। एक मैच टाई हुआ और चार मुकाबले बेनतीजा रहे। उच्चतम स्कोर 287/3 है, जो एसआरएच ने आईपीएल 2024 में आरसीबी के विरुद्ध खड़ा किया। लोएस्ट स्कोर 82/10 है, जो आरसीबी ने 2008 में केकेआर के सामने बनाया। एमएस धोनी से आगे विराट कोहली आरसीबी वर्सेस सीएसके आईपीएल मैचों सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड विराट कोहली के नाम दर्ज है। उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ 34 मैचों में 36.60 की औसत से 1098 रन बनाए हैं। लिस्ट में दूसरे नंबर पर सीएसके कैप्टन धोनी हैं, जिनके बल्ले से 31 मुकाबलो में 806 रन निकले। उनका औसत 40.30 का है। सर्वाधिक विकेट का रिकॉर्ड चेन्नई के रविंद्र जडेजा के नाम है, जिन्होंने 21 मैचों में 18 शिकार किए। सीएसके के पूर्व ऑलराउंर ड्वेन ब्रावो ने 17 मुकाबलों में 17 विकेट हासिल किए। recent visitors 27