Saturday, July 4, 2026 10:24 pm

इरादा एक जैसा तो गैंगरेप में सभी बराबर के दोषी… सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गैंगरेप में किसी एक के भी सेक्सुअल एक्ट (penetrative act) पर सभी को दोषी माना जाएगा, अगर उन्होंने एक मंशा से अपराध को अंजाम दिया। कोर्ट ने गैंगरेप के दोषियों की सजा को बरकरार रखा। अभियोजन पक्ष को यह साबित करना जरूरी नहीं कि हर आरोपी ने पेनेट्रेटिव एक्ट किया। भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(g) के तहत अगर गैंगरेप का मामला है, तो एक के भी कृत्य पर सभी को दोषी ठहराया जा सकता है, अगर उन्होंने कॉमन इन्टेंशन के तहत काम किया हो। यह साझा मंशा इस धारा में अंतर्निहित है। सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका इस मामले में अभियोजन पक्ष ने यह आरोप लगाया था कि उन्होंने पीड़िता का अपहरण कर उसे अवैध रूप से बंधक बनाया और उसका रेप किया। याची ने दलील दी कि उन्होंने खुद कोई सेक्सुअल एक्ट नहीं किया, इसलिए उन्हें गैंगरेप का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, ट्रायल कोर्ट और फिर हाई कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराया। इसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की दलील को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विश्वनाथन के लिखित फैसले में कहा गया कि घटनाक्रम से स्पष्ट है कि पीड़िता का अपहरण, उसे गलत तरीके से कैद करना और उसका बयान कि उसके साथ यौन हमला किया गया, ये सभी फैक्ट धारा 376(2)(g) के तत्वों को साफ सिद्ध करते हैं। क्या था मामला? घटना जून 2004 की है, जब पीड़िता एक विवाह समारोह से लौट रही थी। तभी उसका अपहरण कर लिया गया और उसे कई स्थानों पर अवैध रूप से रखा गया। पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि जलंधर कोल और अपीलकर्ता राजू नाम के दो लोगों ने उसके साथ बलात्कार किया। सरकारी वकील ने 13 गवाह पेश किए, जिनमें पीड़िता, उसके पिता और जांच अधिकारी शामिल थे। ट्रायल कोर्ट ने दोनों आरोपियों को गैंगरेप, अपहरण और अवैध बंदीकरण के आरोप में दोषी ठहराया। राजू को आजीवन कारावास और जलंधर कोल को 10 वर्ष की सजा सुनाई गई। हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, जिसके बाद राजू सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जलंधर कोल ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं दी। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एफआईआर में केवल जलंधर कोल द्वारा बलात्कार का उल्लेख होने के बावजूद, पीड़िता ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि राजू ने भी बलात्कार किया था। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही यह मान लिया जाए कि राजू ने बलात्कार नहीं किया, तब भी वह सामूहिक बलात्कार के लिए दोषी होगा यदि उसने साझा मंशा के तहत अन्य आरोपी के साथ कार्य किया हो। कोर्ट ने प्रमोद महतो बनाम बिहार राज्य (1989) के मामले का हवाला देते हुए कहा कि “ऐसे मामलों में यह आवश्यक नहीं कि प्रत्येक आरोपी द्वारा बलात्कार के पूर्ण कृत्य का स्पष्ट प्रमाण हो। यदि उन्होंने एकसाथ कार्य किया हो और पीड़िता के साथ दुष्कर्म की मंशा में सहभागी हों, तो सभी दोषी होंगे।” SC/ST एक्ट से राहत, लेकिन IPC धाराएं बरकरार हालांकि, कोर्ट ने राजू पर एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(v) के तहत दोषसिद्धि को रद्द कर दिया, क्योंकि यह साबित नहीं हो सका कि अपराध पीड़िता की जाति के आधार पर किया गया था। कोर्ट ने पाटन जमाल वली बनाम आंध्र प्रदेश राज्य के मामले का हवाला देते हुए कहा कि जाति और अपराध के बीच स्पष्ट कारण संबंध होना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीड़िता के प्रारंभिक बयान और बाद के बयान में कुछ अंतर होने के बावजूद उसकी समग्र गवाही विश्वसनीय है। पीठ ने कहा, “साक्ष्यों में छोटे-मोटे विरोधाभास उसकी विश्वसनीयता को कम नहीं करते। पीड़िता की गवाही में भरोसा किया जा सकता है, भले ही उसमें कोई प्रत्यक्ष समर्थन न हो।” "टू-फिंगर टेस्ट" को फिर बताया अमानवीय कोर्ट ने इस मामले में "टू-फिंगर टेस्ट" के उपयोग पर भी चिंता जताई और इसे एक बार फिर “अमानवीय और अपमानजनक” करार दिया। कोर्ट ने कहा, “किसी महिला का यौन इतिहास पूर्णतः अप्रासंगिक है… यह पितृसत्तात्मक और लिंगभेदी सोच है कि किसी यौन रूप से सक्रिय महिला की गवाही पर संदेह किया जाए।” हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने IPC की सभी धाराओं में दोषसिद्धि को बरकरार रखा, लेकिन सह-आरोपी जलंधर कोल को 10 साल की सजा मिलने के मद्देनजर, राजू की आजीवन कारावास की सजा को घटाकर 10 साल का कठोर कारावास कर दिया। 2004 का है मामला यह मामला मध्यप्रदेश के कटनी का है। एक लड़की 26 अप्रैल 2004 को एक शादी में गई थी, वहीं से उसे अगवा कर लिया गया था। इस मामले में दो को गिरफ्तार किया गया। सेशन कोर्ट ने दोनों के खिलाफ 25 मई 2005 को गैंग रेप और अन्य धाराओं में आरोप तय किए और बाद में दोनों को दोषी करार दिया गया। हाई कोर्ट ने दोनों की सजा कन्फर्म की और फिर मालमा सुप्रीम कोर्ट आया। recent visitors 31

जाति जनगणना: लोकतंत्र का डेटा या सत्ता की रणनीति? 🧩 जाति जनगणना: लोकतंत्र का डेटा या सत्ता की रणनीति? लेखक: बेबाक बोल | स्तंभ: माय सीक्रेट न्यूज़ प्रकाशन तिथि: 3 मई 2025 🔦 भूमिका: जातियों की गिनती या गिनती की जातियाँ? भारतीय राजनीति एक अनोखे मोड़ पर आ खड़ी हुई है… 🗳️ राहुल गांधी से ‘राह’ निकालती भाजपा सत्ता पक्ष ने जिस मुद्दे को कल तक ‘बांटने वाली राजनीति’ कहकर खारिज किया… 🔁 कांग्रेसयुक्त भाजपा: विचारधारा की धुलाई मशीन? भाजपा को पहले ऐसी पार्टी कहा जाता था जो ‘अपनों’ को प्राथमिकता देती है… 🧠 विरोध का अंत, समर्थन की शुरुआत जब संघ प्रमुख मोहन भागवत तक विपक्ष को दुश्मन नहीं… 📉 जनता की याददाश्त: एक बार देखो, फिर भूल जाओ? सरकार की कार्यशैली आजकल किसी WhatsApp की ‘View Once’ फोटो जैसी हो गई है… 🧬 जाति की परिभाषा: नाम, धर्म या पिता का गोत्र? जातिगत पहचान को लेकर अभी भी स्पष्टता नहीं है… 🧨 लक्षित हमला: चुनाव पर या चेतना पर? “लक्षित हमला” कभी आतंकवाद के जवाब में दिया जाने वाला प्रतीक था… 🧮 जातिगत आंकड़े: विकास का ब्लूप्रिंट या वोट का कैलकुलेटर? जाति जनगणना के आंकड़ों का असली उपयोग क्या होगा? ✅ निष्कर्ष: गणना से पहले मंशा तय हो भारत को जाति जनगणना से गुरेज नहीं होना चाहिए — परंतु यह जरूरी है कि मंशा साफ़ हो… 📢 क्या आप जाति जनगणना के पक्ष में हैं? नीचे कमेंट में अपनी राय लिखें। लेख पसंद आया हो तो शेयर करें — विचारों का बंटवारा हो, जातियों का नहीं। recent visitors 35

सुरक्षा में तैनात जवानों ने अयोध्या राम जन्मभूमि परिसर में महाराष्ट्र निवासी एक मुस्लिम महिला को हिरासत में लिया

अयोध्या अयोध्या राम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा में तैनात जवानों ने महाराष्ट्र निवासी एक मुस्लिम महिला को हिरासत में लिया है। पूछताछ के लिए उसे पुलिस के हवाले किया गया है। पुलिस और एजेंसियां महिला का नाम, पता आदि के सत्यापन की कवायद में जुट गई हैं। बताया गया कि मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली इरिम नामक महिला शुक्रवार को दूसरी पहर राम जन्मभूमि परिसर में अन्य श्रद्धालुओं के साथ दर्शन करने गई थी। दर्शन के बाद वह वापस लौट रही थी तो निकासी मार्ग पर सुरक्षा में तैनात जवानों ने संदिग्ध हावभाव देख महिला को रोका और उससे पूछताछ की। सिर और चेहरे पर नीला कपड़ा बांधे यह महिला पूछताछ पर सुरक्षा कर्मियों से उलझ गई। मामला संदिग्ध देख प्रकरण की जानकारी अधिकारियों को दी गई और महिला को पूछताछ तथा सत्यापन के लिए राम जन्मभूमि थाने भेज दिया गया। थाना पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने महिला से कई राउंड पूछताछ की है। सूत्रों का कहना है कि वह उल्टे सीधे जवाब दे रही है। हालांकि आरजेबी थाना प्रभारी निरीक्षक अभिमन्यु शुक्ला ने ऐसी कोई जानकारी होने से इनकार किया है। कहाकि थाने पर कोई नहीं आया था। हो सकता है परिसर में ही पूछताछ हो रही हो। क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी ने बताया कि महिला के नाम पता आदि का सत्यापन कराया जा रहा है। फिलहाल अभी तक कोई आपत्तिजनक बात सामने नहीं आई है। चश्मे वाले कैमरे के साथ प्रवेश करते युवक पकड़ा राम जन्मभूमि परिसर में कैमरा लगा चश्मा लगाकर प्रवेश करते हुए सुरक्षाकर्मियों ने एक युवक को पकड़ा है। सीओ आशुतोष तिवारी ने बताया थाना रामजन्मभूमि में युवक से पूछताछ और उसका सत्यापन कराया जा रहा है। recent visitors 32

दूध के दामों में बढ़ोत्तरी, अमूल-मदर डेयरी के बाद अब इस कंपनी ने भी बढ़ाए रेट; जानिए कितना हुआ महंगा?

मुंबई हाल ही में अमूल और मदर डेयरी ने दूध की कीमतों में इजाफा कर आम जनता को महंगाई का झटका दिया। दोनों कंपनियों ने दूध के दाम में 2 रुपए लीटर की बढ़ोतरी की थी। इन्हीं की राह पर चलते हुए अब एक और कंपनी ने दूध के दाम बढ़ा दिए हैं। उत्तर प्रदेश की प्रमुख दुग्ध आपूर्ति संस्था लखनऊ दुग्ध संघ (पराग) ने अपने दूध की कीमतों में इजाफा किया है। पराग ने आधा लीटर और एक लीटर पैकिंग वाले दूध की कीमतों में एक-एक रुपये की बढ़ोतरी की है। नई कीमतें आज यानी शनिवार (3 मई) से ही लागू कर दी गई। लखनऊ दुग्ध संघ के महाप्रबंधक विकास बालियान ने बताया कि दूध के उत्पादन, संग्रहण और वितरण की लागत में बढ़ोतरी के कारण यह कदम उठाना पड़ा. अब फुल क्रीम दूध का एक लीटर पैक 68 रुपये से बढ़ाकर 69 रुपये कर दिया गया है, जबकि आधा लीटर का पैक 34 रुपये से बढ़ाकर 35 रुपये में मिल रहा है. सभी तरह का दूध हुआ महंगा इसी तरह टोंड मिल्क की एक लीटर की कीमत 56 रुपये से बढ़ाकर 57 रुपये और आधा लीटर 28 से 29 रुपये कर दी गई है. स्टैंडर्ड दूध की कीमतें भी बढ़ाई गई हैं.आधा लीटर स्टैंडर्ड दूध अब 31 की बजाय 32 रुपये में मिलेगा. वहीं 5 लीटर वाले पैक की कीमत 280 रुपये से बढ़ाकर 290 रुपये कर दी गई है. इससे पहले अमूल और मदर डेयरी ने भी अपने दूध उत्पादों की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी, जिसका असर अब उत्तर भारत के राज्यों में दिखाई दे रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में दूध से बने अन्य उत्पादों जैसे दही, पनीर और घी की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है. यह आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है. recent visitors 39

अब सरकार द्वारा किए गए प्रयास एवं जागरूकता के कारण अब हमारी बेटियां वरदान बन गई : मंत्री राजपूत

भोपाल बेटियां वरदान होती हैं अभिशाप नहीं, बेटियों को आगे बढ़ाएं। उक्त विचार खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने सागर में जिला स्तरीय लाडली लक्ष्मी उत्सव कार्यक्रम में व्यक्त किये। खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि पहले हमारी बेटियां जब जन्म लेती थीं तब उनको अभिशाप माना जाता था किंतु अब सरकार द्वारा किए गए प्रयास एवं जागरूकता के कारण अब हमारी बेटियां वरदान बन गई हैं। आज बेटियां जहां फाइटर प्लेन उड़ा रही हैं वहीं सुप्रीम कोर्ट में वकालत भी कर रही हैं। इसी प्रकार हमारी बेटियां कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, नासा, इसरो सहित अन्य शासकीय अशासकीय संस्थानों में बड़े-बड़े पदों पर पुरुषों के बराबर कार्य कर रही हैं।मंत्री राजपूत ने कहा कि सागर जिले की एक लाख 68 हजार बेटियां लाड़ली लक्ष्मी बन गई हैं। लाडली लक्ष्मी योजना के माध्यम से सरकार बेटियों के जन्म में से लेकर उनके विवाह तक के लिए निश्चित राशि उपलब्ध कराती है। बेटियों के भविष्य को लेकर सरकार सदैव चिंतित मंत्री राजपूत ने कहा कि मध्यप्रदेश की सरकार बेटियों के भविष्य एवं उनके विवाह के लिए हमेशा चिंतित रहकर कार्य कर रही है और अनेक योजनाओं के माध्यम से उनको आगे बढ़ाने, आर्थिक रूप से समृद्ध एवं आत्मनिर्भर करने का कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि आज सागर में लाडली लक्ष्मी के नाम से चौराहे एवं पार्क का नाम रखा है। उन्होंने कहा कि आज लाडली लक्ष्मी योजना को 18 वर्ष से अधिक हो गए हैं और तब की लाडली लक्ष्मी आज अपने घर की लक्ष्मी बनाकर आगे बढ़ रही हैं। बेटियों को आत्मनिर्भर बनाएं एवं आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिलाएं : डॉ. वानखेड़े सागर सांसद श्रीमती लता वानखेड़े ने कहा कि बेटियां हैं तो कल है, बेटियां ही कल का भविष्य हैं और बेटियां ही हमारा भारत देश है, इसलिए बेटियों को आत्मनिर्भर बनाएं एवं उनको आत्मरक्षा के लिए प्रशिक्षण भी दिलाएं जिससे कि वह अपना कार्य पूरी निर्भयता के साथ कर सकें। मंत्री एवं सांसद ने किया पोषण मेले का अवलोकन कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजपूत एवं सांसद श्रीमती लता वानखेड़े सहित समस्त अतिथियों के द्वारा पोषण मेले का अवलोकन किया गया एवं पौधारोपण भी किया गया। मंत्री राजपूत ने बाल विवाह रोकने की शपथ भी दिलाई। इस अवसर पर अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में लाडली लक्ष्मी बेटियां मौजूद थीं।   recent visitors 17

मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों से वर्चुअली जुड़े हितग्राहियों से बात भी की, आवास निर्माण के लिए पहली किस्त मिलने पर दी बधाई

 मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से पीड़ितों को जारी की प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त छत्तीसगढ़ के विशेष आग्रह पर केंद्र सरकार ने ऐसे परिवारों के लिए स्वीकृत किए हैं 15 हजार आवास कुल दस करोड़ रुपए आज हितग्राहियों के खातों में अंतरित, प्रथम किस्त के रूप में 2500 परिवारों को जारी किए गए 40-40 हजार रुपए मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों से वर्चुअली जुड़े हितग्राहियों से बात भी की, आवास निर्माण के लिए पहली किस्त मिलने पर दी बधाई रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित 2500 परिवारों के बैंक खातों में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की पहली किस्त की राशि अंतरित की। उन्होंने मंत्रालय में वर्चुअली आयोजित कार्यक्रम में आवास निर्माण की पहली किस्त प्रति परिवार 40-40 हजार रुपए के मान से कुल दस करोड़ रुपए हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए। छत्तीसगढ़ के विशेष आग्रह पर केंद्र सरकार द्वारा राज्य के आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए 15 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा भी कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्यमंत्री साय ने विभिन्न जिलों से मंत्रालय से वर्चुअली बड़ी संख्या में जुड़े हितग्राहियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य शासन ने केंद्र सरकार से विशेष आग्रह कर आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के लिए जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता की शर्तों में नहीं आ पा रहे थे, उनके लिए 15 हजार आवास स्वीकृत कराया है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने संवेदनशीलता और गंभीरता से हमारे निवेदन को मंजूरी दी और वंचित परिवारों के लिए भी आवास की व्यवस्था की। साय ने नक्सल प्रभावित दूरस्थ वनांचलों के लिए स्वीकृत इस विशेष परियोजना के हितग्राहियों की हौसला अफजाई करते हुए अच्छा मकान बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इसमें सरकार हर तरह की मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने नक्सली हिंसा के शिकार परिवारों से आत्मीयता से बातकर उनका हाल-चाल पूछा। उन्होंने घर-परिवार और उनके व्यवसाय की जानकारी ली। बातचीत के दौरान विभिन्न जिला मुख्यालयों से जुड़े हितग्राहियों ने पक्का आवास मिलने पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद दिया।    उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने भी हितग्राहियों को ऑनलाइन संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। आज 2500 ऐसे परिवारों को जो नक्सलवाद छोड़कर मुख्य धारा में लौट आए हैं या नक्सल हिंसा से पीड़ित हैं, उनके पक्के आवासों के निर्माण के लिए 40-40 हजार रुपए की पहली किस्त जारी की गई है। ये ऐसे परिवार हैं जो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता में नहीं आ पा रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में विभाग ने विशेष प्रयास कर भारत सरकार से ये आवास मंजूर कराए हैं। शर्मा ने कहा कि राज्य में नक्सलवाद को समाप्त करने का अभियान अब अंतिम चरण में है। बस्तर के लोगों के मन से अब आतंक का डर हट जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे मुख्य धारा में आएं। बस्तर की शांति और विकास के लिए यह जरूरी है। उन्होंने विशेष परियोजना के तहत हितग्राहियों के चिन्हांकन और इसे अमलीजामा पहनाने के लिए विभागीय अधिकारियों की पीठ थपथपाई और उन्हें धन्यवाद दिया। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती निहारिका बारिक सिंह ने कार्यक्रम में राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के क्रियान्वयन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आवास निर्माण के लक्ष्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। योजना के अगले चरण के लिए हितग्राहियों के सर्वेक्षण का काम भी तेजी से चल रहा है। मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव पी. दयानंद, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा सहित वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी राशि अंतरण कार्यक्रम में मौजूद थे। सुकमा के सर्वाधिक 809 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को मिली आवास की पहली किस्त, बीजापुर के 594 और नारायणपुर के 316 परिवार शामिल प्रधानमंत्री आवास योजना में विशेष परियोजना के तहत आज जिन 2500 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल प्रभावित परिवारों के खातों में आवास निर्माण के लिए राशि अंतरित की गई, उनमें सर्वाधिक 809 परिवार सुकमा जिले के हैं। बीजापुर जिले के ऐसे 594, नारायणपुर के 316, बस्तर के 202, दंतेवाड़ा के 180, कोंडागांव के 166 और कांकेर के 138 परिवारों को आवास निर्माण के लिए राशि जारी की गई है। recent visitors 21

नागरिकों को सुशासन का लाभ दिलायें, जनप्रतिनिधियों के साथ करें संवाद: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनता की संतुष्टी ही हमारा ध्येय: मुख्यमंत्री डॉ. यादव अपनी दक्षता और क्षमता संवर्धन पर दें विशेष ध्यान योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये करें बेहतर प्रबंधन नागरिकों को सुशासन का लाभ दिलायें, जनप्रतिनिधियों के साथ करें संवाद मुख्यमंत्री ने समाधान ऑनलाइन में की सीधी सुनवाई भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनता की संतुष्टि ही हमारा ध्येय है। जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना ही सुशासन है, इसलिए प्रदेश के हर नागरिक को सुशासन का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें। स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करें और उनके सुझावों पर भी अमल करें। हरसंभव तरीके से अपनी दक्षता और क्षमता बढ़ायें। जिले में चल रही सभी प्रकार की घटनाओं पर पैनी नजर रखें। योजनाओं का समय-सीमा में क्रियान्वयन सुनिश्चित हों, इसके लिए बेहतर से बेहतर प्रबंधन करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी कलेक्टर्स को यह निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाधान ऑनलाईन में आए प्रदेश के 14 जिलों के विभिन्न प्रकरणों की सीधी सुनवाई की और आवेदकों से रू-ब-रू बात कर उनके मामले के निराकरण की स्थिति की जानकारी ली। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स सरकार की योजनाओं के डिलेवरी सिस्टम के मजबूती के लिये प्रयास करें। नागरिकों के काम समय पर हों और उन्हें अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिये यहां-वहां भटकना न पड़े, यह सुनिश्चित किया जाये। समाधान ऑनलाइन में मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव गृह जे.एन. कंसोटिया, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीएम हेल्पलाईन में प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों का तय समय-सीमा में ही निराकरण किया जाये। यदि कोई मसला समाधान ऑनलाईन में आ रहा है तो यह गंभीर है। सुशासन के तहत स्थानीय स्तर पर ही आवेदकों को उनकी समस्या का निदान मिल जाये, यह सुनिश्चित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा सभी योजनाओं में जिलों के प्रदर्शन की ग्रेडिंग कराई गई है। जिला एवं पुलिस प्रशासन के बारे में फीडबैक भी लिया जा रहा है। ग्रेडिंग में अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन न करने वाले जिले अपना प्रदर्शन सुधार लें और नागरिकों को बेहतर प्रशासन एवं व्यवस्थाओं को कस्टमर फ्रेंडली बनाकर उनका विश्वास हासिल करें। किसान पराली न जलायें, इसके लिये उन्हें समझाइश दें मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिले में किसानों को जागरूक करें। कलेक्टर्स किसानों को यह समझायें कि वे किसी भी स्थिति में अपने खेत में पराली या अन्य फसल अवशेष न जलायें। किसानों को पराली जलाने से पर्यावरण प्रदूषण फैलने के साथ-साथ खेत की मिट्टी के जलने से उसकी उर्वरता कम होने से जुड़े भावी नुकसान के बारे में भी बतायें। उन्होंने कहा कि पराली को जलाना ही कोई हल नहीं है। किसान दूसरे तरीकों से भी पराली का निदान या निपटान कर सकते हैं। समाधान ऑनलाईन में आये ये 14 मामले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाधान ऑनलाईन में पांढुर्णा, मुरैना, उमरिया, नीमच, भिंड, बैतूल, निवाड़ी, रायसेन, नर्मदापुरम एवं धार जिले के एक-एक मामले तथा शहडोल और सतना जिले के 2-2 मामलों (कुल 14 प्रकरणों) की सीधी सुनवाई की। पांढुर्णा जिले की आवेदिका श्रीमती कलावती हिंगवे ने शिकायत की थी कि उन्हें कपिलधारा कूप निर्माण, मेढ़ बंधान, खेत-तालाब, भूमि शिल्प, नंदन फल उद्यान के संबंध में मनरेगा की ओर से भुगतान नहीं किया गया था। कलेक्टर पांढुर्णा ने बताया‍कि इस मामले में दोषी ग्राम रोजगार सहायक को पद से पृथक कर दिया गया है। पंचायत सचिव को निलंबित कर दिया गया है। दोषी सब इंजीनियर का 15 दिन का वेतन रोका गया और दोषी पाये गये सहायक यंत्री के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव कमिश्नर जबलपुर को भेज दिया गया है। वर्तमान में आवेदिका को उसका भुगतान करा दिया गया है। मुरैना जिले के आवेदक ब्रह्मलाल सिंह ने उसके फौती नामांतरण में देरी होने की शिकायत की थी। कलेक्टर ने बताया कि इस मामले में संबंधित नायब तहसीलदार को नोटिस दिया गया है और पटवारी पर भी कार्रवाई की गई है। उमरिया जिले के आवेदक दीपक कोरी ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय नि:शक्त पेंशन योजना में उसे पेंशन न मिलने की शिकायत की थी। आवेदक ने बताया कि शिकायत करने के बाद अब उसे पेंशन मिल रही है। कलेक्टर उमरिया ने बताया कि हितग्राही को पेंशन मिलने में देरी के लिये दोषी पाये गये समग्र सामाजिक न्याय अधिकारी की एक वेतन वृद्धि रोकी गई है। ग्राम पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस दिया गया है और इस संबंध में देरी के लिये विशेष रूप से दोषी पाये गये ग्राम रोजगार सहायक से अर्थदंड की राशि तीन हजार रूपए वसूल करके आवेदक को दे दी गई है। नीमच जिले के आवेदक लालाराम भील ने उसे दिये गये वनाधिकार हक प्रमाण पत्र में वन विभाग की गलती के कारण उसे लाभ न मिलने की शिकायत की थी। अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल ने बताया कि जारी किये गये वनाधिकार प्रमाण पत्र में शाब्दिक/तकनीकी त्रुटि के कारण आवेदक के साथ यह परिस्थिति बनी। निराकरण कर अब आवेदक को उसके हक की 9 लाख 28 हजार 200 रूपए की शासकीय राशि भुगतान कर दी गई है। भिंड जिले के आवेदक (छात्र) दिनेश चरकोटा ने उसे जनजातीय कार्य विभाग की पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति न मिलने की शिकायत की थी। कलेक्टर भिंड ने बताया कि आवेदक को छात्रवृत्ति मिलने में विलंब के‍लिये दोषी क्षेत्र संयोजक पर कार्रवाई की गई है। इसके अलावा जिला संयोजक (जो पहले से ही निलंबित चल रहे हैं) के निलंबन आरोप में इस मामले के आरोप भी जोड़ दिये गये हैं। बैतूल जिले के आवेदक (किसान) अनोखीलाल यादव ने सहकारिता विभाग द्वारा जारी उसके केसीसी किसान क्रेडिट कार्ड का नवीनीकरण नहीं होने के कारण उसे कठिनाई होने की शिकायत की थी। आवेदक ने बताया कि उसने वर्ष- 2022 में शिकायत की थी। कलेक्टर बैतूल ने मामले में अद्यतन जानकारी देते हुये बताया‍कि आवेदक द्वारा जमा की गई राशि का संबंधित शाखा प्रबंधक द्वारा गबन कर लिया गया था। इसलिए प्रबंधक पर एफआईआर की गई, फिर उससे वसूली भी की गई है। निवाड़ी … Read more