राज्यमंत्री श्रीमती गौर निरंतर क्षेत्र का दौरा कर जनता से सीधे संवाद कर रही , इससे मौके पर ही समस्याओं का निराकरण हो रहा

भोपाल पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा है कि गोविंदपुरा क्षेत्र में 20 करोड़ रुपए की लागत से केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पास स्वीमिंग पूल और ऑडिटोरियम बनेगा। उन्होंने यह बात सोमवार को गोविंदपुरा क्षेत्र में भ्रमण के दौरान कहीं। राज्यमंत्री श्रीमती गौर निरंतर क्षेत्र का दौरा कर जनता से सीधे संवाद कर रही हैं। इससे मौके पर ही समस्याओं का निराकरण हो रहा है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने रजत विहार कॉलोनी के रहवासियों से मुलाकात कर क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं और आवश्यकताओं पर चर्चा की। उन्होंने दानिश नगर से भेल संगम चौराहा तक स्ट्रीट लाइट, कम्युनिटी हॉल में अतिरिक्त कमरों का निर्माण करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही क्षेत्रवासियों को स्विमिंगपूल एवं ऑडिटोरियम सुविधाओं की सौगात देने की बात कही। उन्होंने कहा कि स्विमिंगपूल और ऑडिटोरियम के प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति मिल चुकी है। निर्माण कार्य जल्द ही शुरू कर निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाएगा। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने दौरे के दौरान केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पास स्विमिंगपूल और ऑडिटोरियम निर्माण स्थल का निरीक्षण कर जल्द से जल्द कार्य शुरू कराने की बात कही। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने अग्रवाल नगर में रहवासियों की बताई सीवेज नेटवर्क में सुधार, और सड़कों की मरम्मत जैसी आवश्यकताओं पर चर्चा की। जनता की अपेक्षाओं को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों को तत्काल समाधान के लिये स्पष्ट निर्देश दिए। कुंजन नगर फेस-1 में रहवासियों से आत्मीय भेंट कर उनकी समस्याएं सुनीं। सीवेज व्यवस्था, सड़कों का डामरीकरण, पार्क विकास, कम्युनिटी हॉल व नर्मदा जल लाइन सहित सभी मांगों पर अधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही के निर्देश दिए। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने सुरेन्द्र गार्डन कॉलोनी के रहवासियों से भेंट कर उनकी समस्याएं सुनीं। कॉलोनी के चारों ओर बाउंड्रीवाल निर्माण एवं नालियों की सफाई, अतिक्रमण जैसी मांगों को तत्काल संज्ञान में लेते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। राज्यमंत्री ने बागसेवनिया में बनकर तैयार नई सब्जी मंडी का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि 2 जून को पूर्व मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल गौर जी की जन्मजयंती पर इसे शुरू कराया जाए। न्यू बागसेवनिया और अमराई के रहवासियों ने पेयजल संकट, सीवेज लाइन की मरम्मत, नाली निर्माण जैसी समस्याओं से अवगत कराया। इन मांगों पर अधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही के निर्देश दिए। एमराल्ड पार्क के रहवासियों ने पेयजल समस्या, अधिक बिल और नगर निगम द्वारा अधिक चार्ज वसूली जैसी समस्याओं की जानकारी दी। रहवासियों ने पार्क के विकास का मुद्दा भी मंत्री के सामने रखा, उन्होंने तुरंत पार्क में हाईमास्ट, बेंच, झूले और ओपन जिम तैयार करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। साकेत नगर सेक्टर 9 ए और बी के रहवासियों ने नाली निर्माण, ओपन जिम, लाइब्रेरी, योगा हाल की मांग रखी। रहवासियों ने बताया कि पेयजल सप्लाई का समय बढ़ाया जाए। सभी मांगों पर अधिकारियों को शीघ्र कार्यवाही के निर्देश दिए। इस दौरान पार्षद श्री जितेंद्र शुक्ला, श्री प्रताप वारे, श्रीमती शीला पाटीदार, मंडल अध्यक्ष सुश्री मोनिका ठाकुर, श्री प्रदीप पाठक, श्री किशोर पटेल, श्री रामबाबू पाटीदार, श्री विकास तिवारी सहित सैकड़ों की संख्या में रहवासी, कार्यकर्ता और विभिन्न विभागों के अधिकारी भ्रमण के दौरान मौजूद रहे। recent visitors 28

‘भय बिनु होय न प्रीति…’, एयर मार्शल एके भारती ने ‘रामचरित मानस’ से दिया PAK को जवाब

नई दिल्ली पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर निशाना बनाते हुए भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था. सोमवार को इंडियन आर्मी के तीनों सेना प्रमुखों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' और भारत पाकिस्तान के बीच बनी मौजूदा स्थिति पर जानकारी देने के लिए प्रेस ब्रीफिंग की. इस दौरान उन्होंने भारतीय सेना की कार्रवाई का पूरा ब्यौरा दिया और कई खास बातें शेयर कीं. इसी दौरान भारतीय सेना ने स्पष्ट तौर पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया कि 'भय बिन होई न प्रीति. यानी बिना डर के प्रेम नहीं हो सकता है. पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था. भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 'ऑपरेशन सिंदूर' शुरू किया. पड़ोसी मुल्क ने भी जवाबी हवाई हमले किए, जिसे भारत ने नाकाम कर दिया. दोनों देशों में बढ़ते तनाव के बीच शनिवार शाम सीजफायर पर फैसला हुआ. जिसके बाद अब हालात सामान्य हैं. प्रेस ब्रीफिंग के दौरान सेना ने यह भी कहा कि वह हर हमले के लिए तैयार है. एयर मार्शल ए.के. भारती ने कहा कि हमारे सभी मिलिट्री बेस, इक्विपमेंट्स और सिस्टम चालू हैं और किसी भी तरह की जरूरत पड़ने पर मिशन के लिए तैयार हैं. उन्होंने अपनी बात की शुरुआत रामचरित मानस के एक दोहे से की. उन्होंने कहा, 'बिनय न मानत जलधि जड़, गए तीन दिन बीत  बोले राम सकोप तब, भय बिनु होय न प्रीत. ' संत तुलसी दास ने ये दोहा उस प्रसंग पर लिखा, जहां श्रीराम समुद्र से लंका जाने के लिए राह मांग रहे हैं. हनुमान जी लंका जाकर सीता का पता लगा आते हैं. अब श्रीराम के साथ पूरी वानर सेना समुद्र तट पर पहुंच जाती है. सवाल यह उठता है कि इतनी बड़ी सेना सागर पार करके कैसे लंका तक जाएगी. तब श्रीराम सागर तट पर साधना में बैठ जाते हैं और सागर से विनती करने लगते हैं कि वह उनकी सेना को रास्ता दे और लंका तक पहुंचने में मदद करे. श्रीराम तीन दिन तक सागर तट पर यूं ही साधना में बैठे हुए विनय करते रहते हैं, लेकिन समुद्र में कोई भी हलचल नहीं होती है. तब तीन दिन बाद श्रीराम क्रोधित होकर साधना से उठते हैं और कहते हैं लक्ष्मण! ज्ञानी जनों ने सही ही कहा है, कभी-कभी बिना भय के प्रीत भी नहीं होती है. फिर वह लक्ष्मण जी से अपना धनुष बाण लाने को कहते हैं और समुद्र को सुखा डालने की घोषणा करते हैं. विद्वानों ने सही कहा है कि मूर्ख से विनती करने, कुटिल से प्रीति करने और कंजूस से नीति की अपेक्षा रखना मूर्खता ही है. लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानु॥ सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति। सहज कृपन सन सुंदर नीति॥ रामचरित मानस के सुंदर कांड में ये दोहा और चौपाई शामिल है, जिसे एयर मार्शल ए.के. भारती ने अपने संबोधन में शामिल किया. इससे पहले एक वीडियो सामने आया. इस वीडियो में ये दिखाया गया कि कैसे सेना ने पाकिस्तान के हमलों का न सिर्फ करारा जवाब दिया, साथ ही पड़ोसी मुल्क के कई नापाक इरादों को ध्वस्त भी कर दिया. इस वीडियो की जो सबसे खास बात थी, वह रही इसमें प्रयोग की गई, कविवर रामधारी सिंह 'दिनकर' की प्रसिद्ध कविता की पंक्ति,  'जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है' इस कविता के साथ इंडियन आर्मी के ऑपरेशन सिंदूर का वीडियो बहुत प्रभावी और मारक लग रहा था. यह कविता वीर रस में लिखी गई है और दिनकर की खंडकाव्य कृति 'रश्मिरथी' में तब सामने आती है, जब श्रीकृष्ण शांति दूत बनकर हस्तिनापुर पहुंचे होते हैं और यह समझाने का प्रयास कर रहे होते हैं कि 'युद्ध किसी समस्या का हल नहीं है और शांति सर्वोपरि है.' हर नुकसान के लिए पाक सेना जिम्मेदार प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान वायु सेना के डीजी ऑपरेशंस एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने बताया कि एयर फोर्स ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीनी मिसााइलों को मार गिराया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना हमारा डिफेंस सिस्टम भेद भी नहीं पाई। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन के दौरान हमने आतंकियों पर सटीक हमले किए और हमले के दौरान पाक में हुए नुकसान के लिए पाक सेना ही जिम्मेदार है। भय बिनु होय ना प्रीति जब प्रेस कॉन्फ्रेन्स खत्म हुई तो पत्रकारों के सवाल-जवाब के दौरान एक पत्रकार ने उनसे पूछा कि ब्रीफिंग शुरू होने से पहले जो वीडियो दिखाया गया, उसमें रामधारी सिंह दिनकर की पंक्ति थी, उसके क्या मायने माने जाएं। इस पर एयर मार्शल भारती ने तुलसीदास के रामचरित मानस की एक चौपाई सुनाते हुए कहा, “विनय ना मानत जलध जड़ गए तीन दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होय ना प्रीति।” हमारे सभी इक्विपमेंट्स अभी भी ऑपरेशनल एयर मार्शल भारती के इतना कहते ही वहां मौजूद लोगों ने तालियां बजानी शुरू कर दी। इसके आगे उन्होंने कहा कि आपलोग खुद समझदार हैं और इशारा ही काफी है। सेना दो टूक लहजे में कहा कि जरूरत पड़ने पर अगले मिशन के लिए हम तैयार हैं और अगर जरूरत पड़ी तो अगली बार नए तरीके से दुश्मन पर वार करेंगे। एयर मार्शल भारती ने स्पष्ट तरीके से कहा कि हमारे सभी इक्विपमेंट्स अभी भी ऑपरेशनल हैं और जरूरत पड़ने पर हम फिर से उसका जोरदार तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं।   recent visitors 29

बांधवगढ़ में आया दुर्लभ सदस्य तो मची खलबली, टाइगर भय खाते हैं जब महफिल में ये आते हैं…

उमरिया: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में इन दिनों एक ऐसे सदस्य की दस्तक नजर आई है कि टाइगरों में भी डर का माहौल है। ये डर सोन कुत्ते नाम के एक मांसाहारी जानवर का है। बाघों से भी टक्कर लेने में ये जानवर डरते नहीं हैं। बड़े शिकारी इनसे दूर रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व अपने टाइगरों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। हाल ही में यहां सोन कुत्तों का एक झुंड देखा गया है। ये कुत्ते बहुत ही अजब-गजब होते हैं और दूसरे जंगली जानवर भी इनसे डरते हैं। ये कुत्ते शिकार को जिंदा ही नोच-नोच कर खा जाते हैं। इसी खूंखार व्यवहार के कारण इनसे आमने सामने भिड़ने की कोई सोचता नहीं है। दुर्लभ प्रजाति में आते हैं सोन कुत्ते बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के साथ साथ कई दुर्लभ जीवों का घर माना जाता है। इसी के चलते हाल ही में यहां दुर्लभ सोन कुत्तों का झुंड देखा गया। ये झुंड बाकी जंगली जानवरों के लिए एक सीधा संदेश देते हुए दाखिल हुआ है कि हर इलाके में शेर से बड़ा बब्बर मिल सकता है। सोन कुत्ते की प्रजाति को अंग्रेजी में ढोले कहते हैं। इनका वैज्ञानिक नाम क्युन अल्पिनस है। गश्त लगाते दिखा पूरा परिवार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारी बताते हैं। बांधवगढ़ नेशनल पार्क के पतौर जोन की पनपथा बीट में कर्मचारियों को गश्त लगाते हुए सोन डॉग्स का एक ग्रुप मिला। पूरा परिवार लेक के किनारे पानी पी रहा था। उन्होंने आगे बताया कि एक्टिविटी के समय ये डॉग्स भोंकने की जगह सीटी की तरह आवाज निकालकर एक दूसरे से संचार करते हैं। यह अपने आप में एक गजब की चीज है। बाघ से टक्कर लेने में नहीं डरते बांधवगढ़ के उप संचालक ने बताया कि ये दुर्लभ जानवर अपने शिकार करने के तरीके के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि बाघ या चीता जैसे मांसाहारी जानवर शिकार को मारने के बाद ही उसे खाना शुरू करते हैं। लेकिन सोन कुत्ते शिकार के जिंदा रहते ही उसे खाने लगते हैं। यहां तक की बाघ के बच्चों को भी शिकार करने से पहले ये सोचते नहीं है। recent visitors 35

बरमान डयूटी पर जा रही थी, ममता तिवारी ने घायल व्यक्ति की जान बचाई, घायल व्यक्ति को जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया

नरसिंहपुर  यातायात पुलिस का मानवीय चेहरा सामने आया है। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बरमान डयूटी पर जा रही थी, ममता तिवारी ने घायल व्यक्ति की जान बचाई। यातायात थाना प्रभारी ने अपनी गाड़ी से घायल व्यक्ति को जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया। नेशनल हाईवे पर आने वाले ग्राम कठोतिया के टाटा मोटर्स के समीप सड़क पर खून से लथपथ घायल पड़ा व्यक्ति को वर्दीधारियों ने अस्पताल पहुंचाकर मानवता की मिसाल पेश कर उसकी जान बचाई। बता दें कि बरमान डयूटी पर जा रही यातायात थाना प्रभारी ममता तिवारी जब बरमान जा रही थी, इस दौरान रास्ते में नेशनल हाईवे पर एक व्यक्ति घायल अवस्था में खून से लथपथ सड़क के किनारे पड़ा हुआ दिखाई दिया। यहां से काफी लोग निकल रहे थे और कुछ खड़े होकर देख रहे थें। लेकिन किसी ने सहायता करने का प्रयास नहीं किया। मौके पर पहुंची महिला अधिकारी ममता तिवारी ने तुरंत अपनी गाड़ी से घायल व्यक्ति को जिला अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया। यातायात थाना प्रभारी ममता तिवारी ने बताया कि उस व्यक्ति के सिर में काफी चोटें थीं, तथा वह अचेत हालत में सड़क पर पड़ा था। संभवतः किसी अज्ञात वाहन की ठोकर से वह घायल हुआ हैं। होश में नहीं होने के कारण घायल, व्यक्ति का सही नाम-पता नहीं चल सका। बहरहाल खाकी वर्दी धारियों की इस मानवता के कारण समय रहते उसे अस्पताल पहुंचाने दिया गया। जहां उसका इलाज चल रहा हैं। पुलिस की इस मानवता की उपस्थितजनों से सराहना की। recent visitors 47

बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में पीजी की परीक्षाएं कल से, सीसीटीवी कैमरे से होगी निगरानी, 40 हजार विद्यार्थी देंगे परीक्षा

भोपाल राजधानी भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (बीयू) में पीजी की दूसरे और चौथे सेमेस्टर की परीक्षाएं कल से शुरू होगी। एमए, एमएससी, एमकॉम, एमए इतिहास, एमएससी होम साइंस और एमए, एमएससी मैथ्स के द्वितीय और चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षाएं 13 और 14 मई से शुरू होकर 23 और 30 मई तक चलेंगी। दोनों परीक्षाओं में नियमित और स्वाध्यायी के करीब 40 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे। यह परीक्षाएं एक ही पाली में पूरी होंगी। परीक्षाओं को नकल रोकने पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। नकल पकड़े जाने पर निरस्त होगा परीक्षा केंद्र बीयू ने सभी परीक्षा केंद्रों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं। बीयू ने सभी परीक्षा केंद्रों को निर्देशित किया है कि वे सीसीटीवी की फुटेज को एक साल तक सुरक्षित रखेंगे,ताकि गड़बड़ी होने पर उसका परीक्षण किया जा सके। कोई भी गड़बड़ी होने पर यदि उनके पास सीसीटीवी की फुटेज नहीं मिलती है, तो उनके परीक्षा केंद्रों को निरस्त किया जा सकता है। आठ जिलों में 57 परीक्षा केंद्र बनाए विश्वविद्यालय ने सेमेस्टर परीक्षाओं के लिए 8 जिलों में 57 केंद्र तैयार किए हैं। बीयू की परीक्षाओं में 40 हजार विद्यार्थी शामिल होंगे। इसमें नियमित विद्यार्थी 35 हजार और करीब 5 हजार विद्यार्थी स्वाध्यायी के रूप में शामिल होंगे। उक्त दोनों सेमेस्टर के विद्यार्थी सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक की एकल पाली में परीक्षा देंगे। परीक्षा के लिए भोपाल जिले में 9 केंद्र बनाए गए हैं। यहां दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं 13 से 30 मई तक चलेंगी। चौथे सेमेस्टर की परीक्षाएं 23 मई तक चलेंगी।  4 उड़नदस्ते करेंगे औचक निरीक्षण पूर्व में हुई प्रथम और तीसरे सेमेस्टर परीक्षाओं में उड़नदस्तों ने काफी नकल प्रकरण बने थे, इसलिए दूसरे और चौथे सेमेस्टर की परीक्षाओं के लिए चार उड़नदस्ते तैयार करेगा, ताकि निगरानी बढ़ाई जा सके और परीक्षाओं में नकल प्रकरण को रोका जा सके।   recent visitors 45

आज सुबह मादा चीता ज्वाला अपने तीन शावकों के साथ वीरपुर क्षेत्र के सीखेड़ा और मुंडापुरा गांवों के पास पहुंची

 मुंडापुरा करीब दो महीने बाद चीता फैमिली एक बार फिर कूनो नेशनल पार्क से तफरी के निकली है। सोमवार सुबह मादा चीता ज्वाला अपने तीन शावकों के साथ वीरपुर क्षेत्र के सीखेड़ा और मुंडापुरा गांवों के पास पहुंच गई है। उसने अपनी और शावकों की भूख मिटाने के लिए गाय का शिकार किया। चीता फैमिली जब वीरपुर थाने के पास वाली पुलिया पार कर रही थी उस दौरान एक बाइक सवार डर के मारे भागता नजर आया। कूनो नेशनल पार्क की टीम चीता फैमिली के मूवमेंट पर नजर रखे हुए है। बताया जा रहा है कि चीता ज्वाला अपने शावकों के साथ रविवार रात कूनो नेशनल पार्क से निकली है। पार्क प्रबंधन को जैसे इस बात की खबर लगी, उसने आसपास के ग्रामीण इलाकों में अलर्ट जारी कर दिया। ग्रामीण रविवार रात से ही सतर्क हैं। वे टॉर्च की रोशनी में चीतों पर नजर रख रहे हैं। ग्रामीणों ने मवेशियों की सुरक्षा के लिए लोगों ने समूह बनाकर रातभर पहरा दिया। ग्रामीणों के अनुसार चीते पहले भी गांव के पास आए हैं। लेकिन इस बार उनकी संख्या ज्यादा है। वन विभाग ने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। विभाग ने कहा है कि चीते इंसानों पर हमला नहीं करते हैं। ग्रामीणों से किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को देने को कहा गया है।   शहर में घुसी थी चीता फैमिली, भीड़ ने पत्थर मारे इससे पहले 23 मार्च को कूनो नेशनल पार्क से बाहर निकले 5 चीतों पर ग्रामीणों ने लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला कर दिया था। घटना का वीडियो भी सामने आया। हालांकि, मौके पर मौजूद वन विभाग की रेस्क्यू टीम ग्रामीणों से चीतों से दूर रहने का कहती रही, लेकिन वे नहीं माने। पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आई थी चीता फैमिली दरअसल, डेढ़ महीने पहले खुले जंगल में छोड़ी गई मादा चीता ज्वाला और उसके 4 शावक पहली बार पार्क की सीमा से बाहर आए थे। ये चीते वीरपुर तहसील के ग्राम श्यामपुर के पास देखे गए। वे निर्माणाधीन श्योपुर-ग्वालियर ब्रॉडगेज रेल ट्रैक से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर थे। चीतों ने​​​​ गाय पर झपट्टा मारा तो ग्रामीणों ने पत्थर मारे पांचों चीते कूनो सायफन के पास से होते हुए कूनो नदी में पहुंचे थे। वे निर्माणाधीन रेलवे पुल के नीचे काफी देर तक बैठे रहे। इस दौरान कूनो सायफन से गुजरने वाले राहगीरों की भीड़ चीतों को देखने के लिए जमा हो गई। मादा चीता और शावक एक-एक कर रास्ता पार कर रहे थे, तभी उन्होंने गाय पर झपट्टा मारा। मादा चीता और शावकों को भगाने के लिए ग्रामीण लाठी लेकर दौड़े और पत्थर मारना शुरू कर दिए। चीता ज्वाला काफी देर तक गाय का गला पकड़े रही। जैसे ही उसे पत्थर लगा उसने गाय को छोड़ दिया और शावकों के साथ भाग निकली। 21 फरवरी को खुले जंगल में छोड़े गए थे चीते ज्वाला और उसके शावकों को 21 फरवरी को खजूरी क्षेत्र के जंगल में छोड़ा गया था। एक महीने तक वे पार्क की सीमा में ही रहे। चीतों के बाहर निकलने पर क्षेत्र के चीता मित्र और उनकी टीम ने आसपास के लोगों को जागरूक किया था। चीते इंसानों से कितने फ्रेंडली होते हैं? चीते इंसानों के लिए सक्रिय रूप से कोई खतरा नहीं होते, लेकिन वे फिर भी जंगली जानवर हैं, इसलिए उनके साथ संपर्क करने से बचना चाहिए। आमतौर पर चीते मनुष्यों पर हमला नहीं करते वे अपनी प्रजाति के बाकी जानवरों के मुकाबले शांत स्वभाव के होते हैं। चीते कुशल शिकारियों के रूप में जाने जाते हैं, लेकिन वे आमतौर पर छोटे जानवरों का शिकार करते हैं, न कि इंसानों का। recent visitors 26

मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने पत्रकार डॉ. विक्रम राव के निधन पर दु:ख व्यक्त किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वरिष्ठ पत्रकार एवं पत्रकार संगठन के पदाधिकारी डॉ. के. विक्रम राव के निधन पर दु:ख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दु:ख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजन के साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से डॉ. राव की आत्मा की शांति और उनके शोकाकुल परिजन को दु:ख की इस घड़ी में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की है।   recent visitors 25