भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश,भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी : मोहन भागवत

जयपुर जयपुर में हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि शक्ति हो तो दुनिया प्रेम की भाषा भी सुनती है. उन्होंने अपने भाषण में भारत की प्राचीन संस्कृति और त्याग की परंपरा को याद दिलाया. उन्होंने बताया कि भारत के इतिहास में भगवान श्री राम से लेकर भामाशाह जैसे महान व्यक्तित्वों ने त्याग और सेवा की मिसाल पेश की है. मोहन भागवत ने कहा कि विश्व को धर्म सिखाना भारत का कर्तव्य है. धर्म के माध्यम से ही मानवता की उन्नति संभव है. उन्होंने विशेष रूप से हिंदू धर्म की भूमिका को महत्वपूर्ण माना और कहा कि विश्व कल्याण हमारा प्रमुख धर्म है.  उन्होंने भारत को दुनिया का सबसे प्राचीन देश बताते हुए कहा कि भारत की भूमिका बड़े भाई की जैसी है. विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में प्रायसरत! मोहन भागवत का कहना है कि भारत विश्व में शांति और सौहार्द कायम करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है. उन्होंने कहा कि भारत किसी से द्वेष नहीं रखता लेकिन जब तक आपके पास शक्ति नहीं होगी, तब तक विश्व प्रेम और मंगल की भाषा नहीं समझेगा. इसलिए उनके मुताबिक, विश्व कल्याण के लिए शक्ति का होना आवश्यक है, और ये कि हमारी ताकत विश्व ने देखी है. शक्ति ही एक माध्यम है! मोहन भागवत ने यह भी बताया कि शक्ति ही वह माध्यम है जिससे विश्व में भारत अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकता है और वह पहले भी कह चुके हैं कि अपनी सांस्कृतिक विरासत का प्रसार भी तभी किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह स्वभाव विश्व का है, इसे बदला नहीं जा सकता. इसके साथ ही उन्होंने संत समाज की भूमिका की भी प्रशंसा की, और कहा कि ऋषि परंपरा का निर्वहन करते हुए संस्कृति और धर्म की रक्षा कर रहे हैं.   recent visitors 56

राष्ट्रपति के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदला जा सकता है? अनुच्छेद 143 और सलाहकार क्षेत्राधिकार की व्याख्या

नई दिल्ली भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट की सलाह मांगी है कि क्या राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित विधेयकों पर निर्णय लेने के लिए राष्ट्रपति और राज्यपालों के लिए निर्धारित समयसीमा देश की सर्वोच्च अदालत के द्वारा तय की जा सकती है। यह कदम तब उठाया गया जब 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति को भेजे गए विधेयकों को राष्ट्रपति को तीन माह में निपटाना होगा। क्या है अनुच्छेद 143(1)? संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत राष्ट्रपति किसी कानूनी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह ले सकते हैं। यह राय बाध्यकारी नहीं होती, लेकिन इसका संवैधानिक महत्व काफी अधिक होता है। सुप्रीम कोर्ट को यह सलाह संविधान के अनुच्छेद 145(3) के तहत पांच न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दी जाती है। राष्ट्रपति ने यह संदर्भ 13 मई को भेजा और इसमें कुल 14 कानूनी प्रश्न शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट क्या पहले भी राय देने से मना कर चुका है? सुप्रीम कोर्ट ने दो बार राष्ट्रपति की राय मांगने पर जवाब देने से इनकार किया है। 1993 में जब राम जन्मभूमि–बाबरी मस्जिद विवाद में मंदिर की पूर्वस्थिति पर राय मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने धार्मिक और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत मानते हुए खारिज कर दिया। इससे पहले 1982 में पाकिस्तान से आए प्रवासियों के पुनर्वास संबंधी कानून पर राय मांगी गई थी, लेकिन बाद में वह कानून पारित हो गया और कोर्ट में याचिकाएं दायर हो गईं, जिससे राय अप्रासंगिक हो गई। कब-कब सुप्रीम कोर्ट ने दी थी राय? संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत सबसे पहले महत्वपूर्ण मामले में दिल्ली लॉज एक्ट- 1951 में सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय दी थी. केरल शैक्षणिक बिल- 1957 पर संदर्भ को संवैधानिक तौर पर व्याख्या करने के साथ सुप्रीम कोर्ट ने अपनी राय दी थी, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर नरसिंह राव सरकार के समय भेजे गए संदर्भ पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था की ऐतिहासिक और पौराणिक तथ्यों से जुड़े मामलों में राय देना अनुच्छेद 143 के दायरे में नहीं आता है. साल 1993 में कावेरी जल विवाद मामले के संदर्भ पर भी सुप्रीम कोर्ट ने राय देने से मना कर दिया था. साल 2002 में गुजरात चुनाव के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अपील या पुनर्विचार याचिका दायर करने के बजाय 143 के तहत संदर्भ भेजा जाना सांविधानिक तौर पर गलत विकल्प है. हालांकि, पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों की तरह संदर्भ पर राय बाध्यकारी नहीं होना संविधानिक तौर पर विचित्र है. राज्यपाल मामले से जुड़े कुछ पहलू 2G मामले में यूपीए सरकार के संदर्भ से मेल खाते हैं, तब सुप्रीम कोर्ट ने 122 फर्म और कंपनियों के 2G लाइसेंस पर स्पेक्ट्रम आवंटन को रद्द कर दिया था. तब केंद्र ने उसे फैसले के खिलाफ संदर्भ भेजते हुए पूछा था कि क्या नीतिगत मामलों में सुप्रीम कोर्ट की दखलअंदाजी होनी चाहिए. दरअसल, केशवानंद भारती मामले में संविधान पीठ के फैसले के अनुसार नीतिगत मामलों में संसद और केंद्र के निर्णय पर अदालतों की दखलंदाजी नहीं होनी चाहिए. तमिलनाडु राज्य बनाम राज्यपाल मामले में क्या हुआ? राज्यपाल मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला दो जजों ने दिया था. कानूनविदों की मानें तो इस मामले में कम से कम पांच जजों की संविधान पीठ में सुनवाई होनी चाहिए थी. दरअसल, पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु राज्य बनाम तमिलनाडु के राज्यपाल मामले में ऐतिहासिक निर्णय देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 201 के तहत राष्ट्रपति को उन विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए समय-सीमा निर्धारित की थी जिन्हें राज्यपाल ने राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए आरक्षित किया. आठ अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल को राज्य विधानमंडल द्वारा पारित विधेयकों पर कार्रवाई करने के लिए एक समय-सीमा निर्धारित कर दी थी. इस फैसले के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से सुप्रीम कोर्ट से सवाल किए गए हैं कि जबकि संविधान में ऐसा जिक्र नहीं है, फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने व्यवस्था दे दी. कानूनविद दो जजों की पीठ के फैसले पर इसलिए भी सवाल उठा रहे हैं, क्योंकि पूर्व में दिया गया सर्वोच्च अदालत की बड़ी पीठ का फैसले में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका की सीमा तय की गई है. दूसरी ओर संविधान में राष्ट्रपति या राज्यपाल के पास विधायक कितने दिन लंबित रहेगा, इसका जिक्र नहीं है. संविधान में जो प्रावधान नहीं है उसकी व्याख्या करके सुप्रीम कोर्ट ने नए प्रावधान बना दिए. जबकि केशवानंद भारती फैसले के अनुसार सुप्रीम कोर्ट को कानून निर्माण या संविधान संशोधन की शक्ति नहीं है सरकार की खामियों, कानून के निर्वात को ठीक करने के लिए जजों को संरक्षक की भूमिका मिली है. लेकिन यह साफ है कि राष्ट्रपति की ओर से भेजे गए संदर्भ पर अगर सुप्रीम कोर्ट आगे बढ़ता है यानी राय देता है तो वह बाध्यकारी नहीं होगी. वह महज एक राय, सलाह या मशविरा होगा. क्या राष्ट्रपति निर्णय को पलटना चाहती हैं? सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि अनुच्छेद 143 का उपयोग किसी पहले से दिए गए निर्णय की समीक्षा या पलटने के लिए नहीं किया जा सकता है। 1991 में कावेरी जल विवाद पर कोर्ट ने कहा था कि निर्णय देने के बाद उसी विषय पर राष्ट्रपति की राय मांगना न्यायपालिका की गरिमा के विरुद्ध है। यदि सरकार चाहे तो वह पुनर्विचार याचिका या क्युरेटिव याचिका दायर कर सकती है, जो कि न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राष्ट्रपति ने पूछे कैसे प्रश्न? अधिकांश प्रश्न 8 अप्रैल के फैसले से जुड़े हैं, लेकिन अंतिम कुछ प्रश्नों में सुप्रीम कोर्ट की स्वयं की शक्तियों पर भी सवाल उठाए गए हैं। प्रश्न 12 में पूछा गया है कि क्या सुप्रीम कोर्ट को पहले यह तय करना चाहिए कि कोई मामला संविधान की व्याख्या से जुड़ा है या नहीं, ताकि उसे बड़ी पीठ को भेजा जा सके? इसी तरहा प्रश्न 13 में पूछा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की शक्ति) के प्रयोग की सीमा क्या है। प्रश्न संख्या 14 में पूछा गया है कि केंद्र-राज्य विवादों की मूल सुनवाई का अधिकार किसके पास है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास या अन्य अदालतों के पास … Read more

विस्फोटकों का पता लगाने और गश्त करने में माहिर, सीआरपीएफ के डॉग की शहादत

बीजापुर  छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा पर नक्सलियों के खिलाफ एक बड़े अभियान में सीआरपीएफ का एक वीर डॉग शहीद हो गया। के9 रोलो नाम का यह डॉग जो विस्फोटक ढूंढने और हमले करने में माहिर था 200 मधुमक्खियों के हमले में मारा गया। यह घटना कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में हुई। रोलो सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस के 21 दिन के ऑपरेशन का हिस्सा था। उसे मरणोपरांत सम्मान मिलेगा। यह दुखद घटना तब हुई जब सीआरपीएफ और छत्तीसगढ़ पुलिस की टीम कर्रेगुट्टा पहाड़ियों में तलाशी अभियान चला रही थी। के9 रोलो भी इस टीम का हिस्सा था। अचानक, मधुमक्खियों के एक झुंड ने रोलो पर हमला कर दिया। मधुमक्खियों ने उसके शरीर पर कई डंक मारे। रोलो को बचाने के लिए उसके हैंडलर ने तुरंत उसे एक प्लास्टिक शीट से ढक दिया। लेकिन मधुमक्खियां शीट के अंदर घुस गईं और उसे और भी ज्यादा काटने लगीं। दर्द और जलन से परेशान होकर रोलो बेकाबू हो गया। उसने शीट को हटा दिया, जिससे वह और भी ज्यादा मधुमक्खियों के हमले का शिकार हो गया। बेहोश हो गया था रोलो अंत में रोलो को लगभग 200 मधुमक्खियों ने काटा था। वह बेहोश हो गया। उसके साथियों ने उसे तुरंत मेडिकल सहायता देने की कोशिश की। लेकिन, रोलो ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। वेटरनरी डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। मरणोपरांत मिलेगा सम्मान के9 रोलो एक वफादार सिपाही था। उसने नक्सलियों के ठिकानों और विस्फोटक सामग्री को ढूंढने में सीआरपीएफ की मदद की। उसकी शहादत को सम्मान देने के लिए उसे गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। सीआरपीएफ के डायरेक्टर जनरल उसे मरणोपरांत कमेंडेशन डिस्क से सम्मानित करेंगे। पिछले साल मनाया था दूसरा जन्मदिन रोलो एक खूबसूरत बेल्जियन मेलिनोइस था। उसने पिछले महीने ही अपना दूसरा जन्मदिन मनाया था। उसे सीआरपीएफ के डॉग ब्रीडिंग एंड ट्रेनिंग स्कूल डीबीटीएस बेंगलुरु में प्रशिक्षित किया गया था। अप्रैल 2024 में उसे सीआरपीएफ की 228वीं बटालियन में नक्सल विरोधी ड्यूटी के लिए भेजा गया था। सीआरपीएफ के जवान रोलो को बहुत प्यार करते थे। वे उसे अपना साथी मानते थे। recent visitors 44

दिव्यांग यात्रियों के लिए : किराये में 25% से 75% तक की विशेष छूट

दिव्यांग यात्रियों के लिए : किराये में 25% से 75% तक की विशेष छूट भोपाल मंडल द्वारा अब तक जारी किए गए 1315 दिव्यांग रियायत कार्ड, जानिए कैसे उठाएं लाभ भोपाल भारतीय रेलवे, विशेष रूप से भोपाल मंडल, दिव्यांग यात्रियों को सुलभ, सुरक्षित और किफायती यात्रा का अनुभव प्रदान करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया के नेतृत्व में नवंबर 2023 से अब तक कुल 1315 दिव्यांग रियायत कार्ड जारी किए जा चुके हैं। यह पहल दिव्यांगजनों को मुख्यधारा से जोड़ने तथा उन्हें रेल यात्रा में अधिक सुविधा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। दिव्यांग रियायत प्रमाणपत्र के प्रारूप में बदलाव : अब दृष्टिहीन यात्रियों के लिए अलग प्रारूप भोपाल मंडल दिव्यांग सेल की प्रभारी डॉ. ज्योति तिवारी के अनुसार, रेलवे द्वारा दिव्यांग यात्रियों को 25% से लेकर 75% तक किराये में छूट प्रदान की जाती है। यह छूट विशेष रूप से दृष्टिहीन, मानसिक रूप से अस्वस्थ, श्रवण एवं वाणी बाधित तथा ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड यात्रियों के लिए लागू है। पूर्व में इन चारों श्रेणियों के लिए रेलवे रियायत प्रमाणपत्र हेतु एक ही प्रारूप (फॉर्म) का उपयोग होता था। परन्तु वर्ष 2025 से रेलवे ने दृष्टिहीन यात्रियों के लिए अलग प्रारूप (एनेक्सचर-1) तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ, श्रवण एवं वाणी बाधित तथा ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड यात्रियों के लिए अलग प्रारूप (एनेक्सचर-2) जारी किया है। विशेष रूप से अब दृष्टिहीनता की 90% या उससे अधिक स्तर पर भी रियायत का प्रावधान किया गया है, जो दृष्टिबाधित यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत है। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि यदि दिव्यांग यात्री के साथ एक सहयोगी (एस्कॉर्ट) यात्रा करता है, तो उसे भी समान रियायत मिलती है। जारी किए गए रियायत कार्ड की जानकारी रेलवे के सॉफ़्टवेयर में अपडेट कर दी जाती है, जिससे टिकट बुकिंग के समय कार्ड की फोटो कॉपी प्रस्तुत कर आसानी से छूट का लाभ लिया जा सकता है। यह सुविधा ई-टिकट बुकिंग पर भी उपलब्ध है। दिव्यांग रियायत कार्ड बनवाने की प्रक्रिया अब दिव्यांगजन आसानी से ऑनलाइन माध्यम से रियायत कार्ड बनवा सकते हैं। इसके लिए आवश्यक दस्तावेज हैं: * जिला चिकित्सा अस्पताल द्वारा जारी दिव्यांग प्रमाणपत्र (डिसेबिलिटी सर्टिफिकेट) * रेलवे रियायत प्रमाण पत्र जो कि पश्चिम मध्य रेल के अंतर्गत आने वाले सरकारी अस्पताल से जारी किया गया हो, जिसमें यह उल्लेख हो कि यात्री बिना सहायक (एस्कॉर्ट) के यात्रा करने में असमर्थ है। (इसका प्रारूप भारतीय रेलवे की वेबसाइट https://divyangjanid.indianrail.gov.in से डाउनलोड किया जा सकता है) * आधार कार्ड एवं जन्म प्रमाणपत्र * पासपोर्ट साइज फोटो इन दस्तावेजों को भारतीय रेलवे की वेबसाइट पर अपलोड करना होता है। सत्यापन के बाद कार्ड जारी कर दिया जाता है और आवेदक को इसकी जानकारी SMS के माध्यम से दी जाती है। आवेदन करते समय सभी जानकारी सही-सही भरना अत्यंत आवश्यक है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री सौरभ कटारिया ने बताया, "हमारा प्रयास है कि दिव्यांगजन यात्रियों को सहज, पारदर्शी और सरल प्रक्रिया के माध्यम से रेलवे की सुविधाओं का लाभ मिले। रियायत कार्ड बनने की प्रक्रिया को सरल बनाकर हम उनकी यात्रा को अधिक सम्मानजनक और आत्मनिर्भर बना रहे हैं। हमारा उद्देश्य है कि प्रत्येक दिव्यांगजन स्वयं को समाज की मुख्यधारा से जुड़ा हुआ महसूस करे।" दिव्यांग रियायत कार्ड से संबंधित जानकारी या सहायता के लिए यात्री भोपाल मंडल यात्री हेल्पलाइन नंबर 9630951262 पर संपर्क कर सकते हैं। भोपाल मंडल का यह प्रयास भविष्य में और भी अधिक दिव्यांगजनों तक पहुँच बनाने के लिए जारी रहेगा, जिससे "सबका साथ, सबका विकास" की भावना सशक्त हो। recent visitors 49

09039/09040 उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन

09039/09040 उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन   भोपाल मंडल  के इटारसी स्टेशन पर ठहराव भोपाल    रेल प्रशासन द्वारा समर के दौरान अतिरिक्त यात्री यातायात को क्लियर करने और उनकी यात्रा मांग को पूरा करने के उद्देश्य से 09039/09040 उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन विशेष किराये पर 06-06 ट्रिप चलाने का निर्णय लिया गया है। इस गाड़ी में शयनयान श्रेणी एवं सामान्य श्रेणी के कोच रहेंगे। यह स्पेशल ट्रेन पश्चिम मध्य रेल के इटारसी, जबलपुर, कटनी एवं सतना स्टेशनों से होकर गन्तव्य को जाएगी। उधना-गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन (12 सेवाएं)  गाड़ी संख्या 09039 उधना-गया साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन दिनांक 23 मई से 27 जून 2025 तक प्रत्येक शुक्रवार को उधना स्टेशन से रात 22:00 बजे प्रस्थान कर, अगले दिन इटारसी सुबह 08:30 बजे, जबलपुर 11:50 बजे, कटनी दोपहर 13:20 बजे, सतना 14:30 बजे पहुँचकर, अन्य स्टेशनों से होते हुए तीसरे दिन रविवार 03:15 बजे गया स्टेशन पहुंचेगी। (06 ट्रिप)   गाड़ी संख्या 09040 गया-उधना साप्ताहिक स्पेशल ट्रेन दिनांक 25 मई से 29 जून 2025 तक प्रत्येक रविवार को गया स्टेशन से सुबह 07:10 बजे प्रस्थान कर, सतना सायं 18:40 बजे, कटनी रात 20:00 बजे, अगले दिन जबलपुर 21:50 बजे, पहुँचकर अगले दिन इटारसी मध्यरात्रि 01:20 बजे,अन्य स्टेशनों से होते हुए सोमवार दोपहर 14:00 बजे उधना स्टेशन पहुंचेगी। (06 ट्रिप) ठहराव: चलथान, बारडोली, नंदुरबार, अमलनेर, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, जबलपुर, कटनी, सतना, मानिकपुर, प्रयागराज छिवकी, मिर्ज़ापुर, पं. दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, सासाराम और डेहरी ऑन सोन। रेल यात्रियों से अनुरोध है कि समर स्पेशल ट्रेन की विस्तृत जानकारी स्टेशन, रेल मदद 139 अथवा ऑनलाइन वेबसाइड से प्राप्त कर सकते हैं। recent visitors 38

वैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी दंपत्ति गिरफ्तार, भिलाई में ज्योति बनकर रह रही थी बांग्लादेश की शाहिदा

भिलाई छत्तीसगढ़ के दुर्ग में शुक्रवार को एक बांग्लादेशी दंपति को अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान मोहम्मद रसैल शेख (36) और उसकी पत्नी शाहिदा खातून (35) के रूप में हुई है. न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक इस दंपति को साल 2020 में भी इसी आरोप में गिरफ्तार किया गया था और फिलहाल वो जमानत पर बाहर थे. जिला पुलिस की विशेष कार्यबल (STF), जिसे छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की पहचान के लिए गठित किया गया है, उसने शुक्रवार को भिलाई के सुपेला स्थित कॉन्ट्रेक्टर कॉलोनी में किराए के मकान से दोनों को हिरासत में लिया. एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि पूछताछ के दौरान शुरुआत में महिला ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की और खुद का नाम ज्योति रसैल शेख और पति का नाम रसैल शेख बताया. उन्होंने दावा किया कि वो मूल रूप से पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के मोमिनपुर गांव के निवासी हैं और साल 2009 से 2017 तक मुंबई-ठाणे में केटरिंग का काम करते थे. 2017 में वो भिलाई आ गए और वहीं काम करने लगे. हालांकि, जब दोनों के आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की गई, तो वो फर्जी पाए गए. सख्ती से पूछताछ करने पर दंपति ने स्वीकार किया कि वो बांग्लादेश के जेसोर जिले के निवासी हैं. पुलिस के अनुसार, शाहिदा खातून साल 2009 में अवैध रूप से भारत में दाखिल हुई थी और मुंबई में एक केटरिंग यूनिट में काम करते हुए रसैल शेख से मिली. दोनों कुछ समय के लिए बांग्लादेश लौटे, शादी की और फिर 2017 में वीजा और पासपोर्ट के जरिए भारत लौट आए. बाद में उन्होंने मुंबई में फर्जी दस्तावेजों के जरिए आधार और पैन कार्ड बनवाए. 2017 में दोनों भिलाई में बस गए और यहां भी केटरिंग का काम करने लगे. खातून का वीजा सितंबर 2018 में और शेख का अप्रैल 2020 में समाप्त हो गया. 2020 में उनके खिलाफ अवैध रूप से रहने का मामला दर्ज हुआ था, जिसमें वो जमानत पर थे. शेख के खिलाफ दुर्ग में लूट का एक अन्य मामला भी दर्ज है. पुलिस ने बताया कि दंपति ने मुंबई के पते की जगह सुपेला का पता दिखाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते भी खुलवा लिए थे. अब उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, विदेशी नागरिक अधिनियम 1946 और पासपोर्ट अधिनियम 1920 की धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है.   recent visitors 27

यूपी में आसमान से बरस रही आग, अगले 3 दिन हीटवेव का अलर्ट, हीटवेव के बीच पड़ीं बारिश की बूंदें

लखनऊ यूपी के कई शहरों में आसमान से आग बरस रही है। शुक्रवार को मौसम ने दो रूपों में कहर बरपाया। बांदा, प्रयागराज, कानपुर, वाराणसी और हमीरपुर लू में झुलसे तो कुशीनगर में आंधी-बारिश से प्रदेश में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि बलरामपुर में आकाशीय बिजली की चपेट में आकर 13 वर्षीय किशोरी की मौत हुई है। एक तरफ कुल 12 शहरों में भीषण गर्मी रही तो कई शहरों में बदली के बीच बूंदाबांदी या बौछार पड़ी। बांदा 46. 2 डिग्री तापमान के साथ पूरे देश में सबसे गर्म रहा, जबकि कानपुर (आईएफ) में 45.2, वाराणसी में 45, प्रयागराज में 45.4, हमीरपुर में 45.0 डिग्री सेल्सियस पारा दर्ज किया गया। लखनऊ में बादलों की आवाजाही से तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विज्ञानियों ने अगले तीन दिन हीटवेव की चेतावनी दी है। हीटवेव के बीच पड़ीं बारिश की बूंदें ब्रज में हीटवेव के बीच चंद सेकंड की बारिश ने लोगों को भिगोया। यहां आगरा का अधिकतम तापमान 44.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 26.1 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार 19 से 21 मई के बीच बारिश और बादल छाए रहने के आसार हैं। कुशीनगर में आंधी-पानी के साथ बिजली गिरी कुशीनगर में शाम को आंधी-पानी के साथ ओले भी गिरे। इस दौरान बिजली गिरने से एक महिला की मौत हो गई, आंधी में पेड़ की डाल गिरने से दबकर साइकिल सवार ने दम तोड़ दिया। गोरखपुर हल्के बादल से तापमान में 1.6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट हुई। बिजली गिरने से किशोरी की मौत शुक्रवार दोपहर दो बजे आई तेज धूल भरी आंधी के साथ नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों में 15 मिनट तक बारिश भी हुई है। बलरामपुर में आकाशीय बिजली की चपेट में आकर 13 वर्षीय किशोरी की मौत हुई है। श्रावस्ती में सिर पर पेड़ की डाल गिरने से महिला गंभीर घायल हो गई है। आंधी बारिश से तापमान दो डिग्री नीचे आ गया। बहराइच में आंधी बारिश से चक्रवात से बिजली पोल, पेड़ उखड़ गए। आधे जिले की बिजली ठप हो गई। recent visitors 32