Saturday, July 4, 2026 8:45 am

कृषि नवाचार की मिसाल: कोंडागांव जिले में शुरू हुई कसावा की खेती

कोंडागांव. कोंडागांव जिला भौगोलिक दृष्टि से वर्षा आधारित एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहाँ लंबे समय से धान एवं कुछ सीमित फसलों की खेती की जाती रही है, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता, इस आशय कृषि विज्ञान केंद्र,कोंडागांव द्वारा कसावा फसल की खेती  व मूल्य संवर्धन पर रविवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया जिसमें केशकाल  विकासखंड के अमोडा, डोंगइपारा,सलेभाट, सिंकागांव व चेरबेडा के 56 किसानों ने भाग लिया | इस कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ.सुरेश कुमार मरकाम द्वारा किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, उन्होंने बताया कि कसावा एक ऐसी फसल है जो कम पानी, कम उर्वरक एवं सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है तथा इससे खाद्य उत्पाद,स्टार्च,टैपिओका,आटा,चिप्स एवं पशु आहार जैसे अनेक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं  उन्होंने कसावा फसल की आर्थिक उपयोगिता,मूल्य संवर्धन की संभावनाओं तथा इसके माध्यम से किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में विस्तार से जानकारी दी,जिससे किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके ।   इस अवसर पर ग्राम सरपंच श्रीमती चंद्रकला सरकार ने कसावा की खेती को ग्रामीण एवं आदिवासी किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया,वहीं जिला महिला मुक्ति मोर्चा की अध्यक्ष श्रीमती सोमा दास ने इसे महिला किसानों एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए आजीविका का एक सशक्त साधन बताया। इसके साथ ही केंद्र के भूपेन्द्र ठाकुर, शस्य वैज्ञानिक,  द्वारा कसावा की उन्नत किस्म ‘ जया’ के पोषण गुणों पर प्रकाश डाला , जो विटामिन-ए से भरपूर  किस्म है तथा अतिशीघ्र तैयार होने वाली फसल है, और विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकती है। उन्होंने बताया कि इस किस्म के नियमित सेवन से बच्चों एवं महिलाओं में विटामिन-ए की कमी को दूर करने में मदद मिलती है, जिससे पोषण सुरक्षा को बल मिलता है तथा किसानों को फसल प्रबंधन, निराई-गुड़ाई एवं रोग नियंत्रण से संबंधित तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। वहीं केंद्र की डॉ.प्रिया सिन्हा, फार्म मशीनरी वैज्ञानिक ने किसानों को कसावा की कटिंग लगाने की वैज्ञानिक तकनीक,उचित रोपण दूरी,भूमि की तैयारी तथा मशीनों के माध्यम से कसावा की खेती के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी,जिससे श्रम लागत कम होती है और उत्पादन में वृद्धि संभव होती है।   नवीन किस्म  के साथ नवाचार:  डॉ.सुरेश मरकाम,द्वारा राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन (NHM) के अंतर्गत लगभग 15 हेक्टेयर  क्षेत्र में किसानों के खेतों पर कसावा की खेती करवाई जा रही है,कसावा (Cassava/टैपिओका),जिसे स्थानीय भाषा में “आलू कांदा”   कहा जाता है,सामन्यत: खुले बाजार में उबालकर बेचीं जाने वाली फसल है,  इस परियोजना में किसानो को कसावा की कटिंग ,दवाई, जैविक खाद व मशीन (समूह में )वितरित किया जायेगा जिससे किसान इस नवाचार से  स्थायी रूप से जुड़ सके , सामान्यत: किसान स्थानीय किस्म का उपयोग करते है जिसमे उपज  कम होता है तथा उसका पोषक मान  भी कम होता है , किसानो को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की केंद्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान,तिरुवनंतपुरम (तिरुअनंतपुरम), केरल की  विकसित किस्म (  जया )  वितरित की जा रही है प्रति पौधा पैदावार भी अधिक होता है। कम प्रतिस्पर्धी एवं अधिक लाभ वाली फसल आलू कांदा :- कार्यक्रम में विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ.हितेश मिश्रा द्वारा जिले में कृषि नवाचार को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया गया तथा जिले में कसावा की खेती को एक नवाचार के रूप में किसानों के खेतों में बढ़ावा दिया जा रहा है,जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, फसल विविधीकरण, पोषण सुरक्षा तथा परंपरागत कृषि से हटकर कम प्रतिस्पर्धी एवं अधिक लाभ देने वाली फसलों को अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित करना है उन्होंने बताया कि कसावा जैसी फसलें बाजार में कम उपलब्ध होने के कारण अधिक मांग रखती हैं और किसानों को अन्य पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर लाभ प्रदान कर सकती हैं। recent visitors 22

सागौन तस्करों पर शिकंजा, वन विभाग ने दो ठिकानों से 5 लाख से अधिक की लकड़ी की जब्ती

 कांकेर  उत्तर बस्तर कांकेर जिले के कापसी वनपरिक्षेत्र में वन विभाग ने अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ अब तक की बड़ी कार्रवाई की है. विभाग की टीम ने ग्राम पिपली में छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध सागौन की लकड़ी बरामद की है. इस कार्रवाई से इलाके के लकड़ी माफियाओं में हड़कंप मच गया है. वन विभाग को सूचना मिली थी कि ग्राम पिपली में सागौन की लकड़ी का अवैध भंडारण किया गया है. सूचना के आधार पर कापसी वनपरिक्षेत्र की टीम ने दो संदिग्ध आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी. तलाशी के दौरान भारी मात्रा में सागौन चिरान और सागौन लट्ठा बरामद किया गया. वन विभाग ने कुल 254 नग सागौन जब्त किया है, जिसका कुल आयतन 7.549 घन मीटर आंका गया है. बाजार में 5 लाख से ज्यादा है कीमत अधिकारियों के मुताबिक, जब्त की गई इस सागौन लकड़ी का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 5 लाख 13 हजार रुपये है. मौके पर लकड़ी परिवहन में उपयोग किए जाने वाले साधनों की भी बारीकी से जांच की गई. इस मामले में वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है. कड़ी कानूनी कार्रवाई और चेतावनी वन विभाग ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध वन अधिनियम 1927 और छत्तीसगढ़ वन उपज व्यापार विनियमन अधिनियम 1969 के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है. विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जंगलों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा. प्रशासन ने आगे भी इसी तरह की छापेमारी और निगरानी जारी रखने की बात कही है. recent visitors 24

रण उत्सव की तर्ज पर सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में विकसित होगी टेंट सिटी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में कच्छ का रण उत्सव बना भारत की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता का वैश्विक प्रतीक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रण उत्सव में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ गुजरात में रण ऑफ कच्छ का 'रण उत्सव' आज भारत की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भव्य 'रण उत्सव' में सहभागिता कर विश्व स्तरीय टेंट सिटी की व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के बाद कहा कि जहां कभी बंजर भूमि थी, वहां आज किसानों की सहभागिता से पर्यटन, आजीविका और विकास का मॉडल खड़ा हुआ है, जिसे दुनिया देख रही है। लोक कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियां और गुजरात की समृद्ध संस्कृति, इस उत्सव को विशिष्ट पहचान देती हैं। यह प्रेरक उदाहरण है। उज्जैन में वर्ष-2028 में आयोजित होने वाले 'सिंहस्थ' में 'रण उत्सव' की तर्ज पर टेंट सिटी विकसित की जाएगी। साथ ही, मध्यप्रदेश में जहां पर्यटकों की संख्या अधिक है, वहां भी टेंट सिटी की योजना पर कार्य किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिलेगा और किसान भी लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भुज में स्थित 'स्मृति वन', जो भूकंप पीड़ितों की स्मृतियों को सहेजता है, वह संवेदना और संकल्प का प्रतीक है। इसी भावना के साथ भोपाल में भी यूनियन कार्बाइड त्रासदी के पीड़ितों की स्मृति में एक समर्पित संग्रहालय विकसित करने की भी योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी का विजन ही नए भारत की सशक्त पहचान है।   recent visitors 25

चांदी का कड़ा: किन राशियों को पहनना चाहिए और किन्हें बचना चाहिए? पूरी जानकारी यहाँ

ज्योतिष शास्त्र में चांदी बहुत महत्वपूर्ण और विशेष मानी जाती है. चांदी का संबंध चंद्र और शुक्र ग्रह से माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस व्यक्ति की कुंडली में चंद्र मजबूत होता है, तो उसकी सेहत हमेशा अच्छी रहती है. साथ ही व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र ग्रह सुख, वैभव और संपन्नता प्रदान करता है. यही कारण है कि लोग चांदी की अंगूठी या कड़ा अपने हाथों में पहनते हैं, तो आइए आज हम आपको बातते हैं कि चांदी का कड़ा किन रशि के जातकों के लिए शुभ माना जाता है? साथ ही जानते हैं कि किन राशि के जातकों को चांदी का कड़ा बिल्कुल भी नहीं पहनना चाहिए? इन तीन राशि वालों के लिए चांदी का कड़ा है बहुत शुभ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को चांदी का कड़ा जरूर पहनना चाहिए. माना जाता है कि इन तीन राशि के जातकों को चांदी का कड़ा विशेष लाभ प्रदान करता है. ये तीनों ही राशियां जल तत्व की मानी जाती हैं. चांदी का संबंध भी जल तत्व से ही है. इसी वजह से तीनों राशि के जातकों के लिए चांदी का कड़ा पहनना शुभ और फलदायी होता है. चांदी का संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से बताया गया है. चंद्रमा मन, सोच और मानसिक शांति का कारक माना जाता है. वहीं शुक्र सुख, सुंदरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. कहते हैं कि व्यक्ति की कुंडली में अगर ये दो ग्रह मजबूत होते हैं, तो जीवन में शांति और संतुलन बना रहता है. किन राशि वालों को चांदी का कड़ा नहीं पहनना चाहिए? ज्योतिष के अनुसार, मेष, सिंह और धनु राशि वालों को चांदी या इसका कड़ा नहीं पहनना चाहिए. इन राशि वालों को चांदी पहनने से मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इन तीन राशि के जातकों को चांदी का कड़ा या अन्य चांदी का आभूषण पहनने से परहेज करना चाहिए. किस दिन और किस हाथ में पहनें? चांदी का कड़ा पहनने के लिए सबसे शुभ दिन सोमवार और शुक्रवार माना गया है. पुरुषों को चांदी का कड़ा दाहिने हाथ में पहनना चाहिए. जबकि महिलाओं को बाएं हाथ में पहनना चाहिए. recent visitors 35

सदन में सियासी संग्राम: देश की छवि पर बयान को लेकर राहुल गांधी घिरे, मंत्री ने लगाई फटकार

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लोकसभा में चीन पर दिए गए बयानों से लगातार हंगामा जारी है। लोकसभा स्पीकर द्वारा बार-बार रोके जाने के बाद भी नेता विपक्ष लगातार एक ही मुद्दे पर बोलते रहे, जिसके बाद सदन की कार्यवाही 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद जब कार्यवाही शुरू हुई तो उन्होंने एक बार फिर से वही बात शुरू कर दी। इस पर नाराज होते हुए संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नेता विपक्ष जो कुछ भी बोल रहे हैं, वह अपुष्ट जानकारी है। उनसे यही कहूंगा कि कोई ऐसी बात मत बोलिए, जिससे देश का और सेना का मनोबल टूटे। देश को नीचा दिखाकर क्या मिलेगा। हालांकि इसके बाद भी राहल गांधी नहीं रुके और फिर स्पीकर ने सदन की कार्यवाही चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी।   यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी बात रखने के लिए उठे कांग्रेस नेता ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के लेखों का हवाला देकर चीन पर बात रखते हुए कहा कि डोकलाम में चीनी सैनिक मौजूद थे। राहुल के इतना कहते ही सत्ता पक्ष के नेताओं ने इस पर हंगामा शुरू कर दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आखिर राहुल गांधी किसी ऐसी किताब का जिक्र सदन के पटल पर कैसे कर सकते हैं, जो कि छपी ही नहीं है। राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी लोकसभा नेता विपक्ष के बयान की निंदा की। हालांकि, इसके बाद भी वह नहीं रुके और लगातार वही बात कहते रहे। राहुल की इस हठधर्मिता पर स्पीकर ओम बिरला ने राहुल को नसीहत भी दी। इस पर नेता विपक्ष ने कहा कि फिर आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना चाहिए और क्या नहीं। इस पर नाराज होते हुए स्पीकर ने कहा कि मैं यहां आपका सलाहकार नहीं हूं। लेकिन आपको उसी मुद्दे पर बोलना चाहिए, जिस पर यहां चर्चा हो रही है और जिसके बारे में आपने सदन को जानकारी दी थी। recent visitors 28

किसान मेले में औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती बनी आकर्षण का केंद्र

रायपुर. किसान मेले में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के प्रति किसानों में बढ़ी रूझान औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती में किसानों की रुचि तेजी से बढ़ी है, जिसका मुख्य कारण पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभ, कम लागत और बाजार में मांग है। अश्वगंधा, लेमनग्रास, तुलसी और खस जैसी फसलों से किसान प्रति एकड़ अच्छी कमाई कर रहे हैं, जिसमें सरकार की सब्सिडी और तकनीकी सहायता भी मदद कर रही है।   किसान मेले में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के प्रति किसानों में बढ़ी रूझान   औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा छत्तीसगढ़ युवा प्रगतिशील किसान संघ द्वारा आयोजित किसान मेले में छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड ने सक्रिय सहभागिता की। कुम्हारी, दुर्ग में 30-31 जनवरी को आयोजित दो दिवसीय किसान मेले में बोर्ड द्वारा लगाए गए स्टॉल के माध्यम से औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा देने हेतु संचालित शासकीय योजनाओं एवं कार्यों की जानकारी दी गई।  किसान मेले में औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती के प्रति किसानों में बढ़ी रूझान कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि मंत्री  शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा, कृषि मंत्री  रामविचार नेताम, वन मंत्री  केदार कश्यप, वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी, शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव, सांसद दुर्ग  विजय बघेल सहित कृषि विभाग एवं अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। किसानों के विशेष आकर्षण का केंद्र लेमनग्रास की खेती स्टॉल पर विभिन्न आकर्षक मॉडलों के माध्यम से खेती के सफल उदाहरण प्रस्तुत किए गए। इनमें नदी किनारे की रेतीली एवं अनुपयोगी भूमि पर खस की खेती, महिला सशक्तिकरण के लिए घरों की बाड़ी में सिंदूरी, सतावर एवं ब्राह्मी का रोपण तथा धान की खेती के कन्वर्जेंस के रूप में लेमनग्रास की खेती के मिनिएचर मॉडल शामिल रहे। ये मॉडल किसानों एवं आमजनों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने। औषधीय एवं सुगंधित पौधे मच्छर एवं कीट-पतंगों को दूर भगाने में सहायक उल्लेखनीय है कि इस किसान मेले में बोर्ड द्वारा औषधीय एवं सुगंधित पौधों से तैयार उत्पादों का निःशुल्क वितरण भी किया गया। अनंतमूल की जड़ से तैयार नन्नारी शरबत किसानों एवं आमजनों परोसा गया, जो शरीर को आंतरिक रूप से ठंडक प्रदान करता है और ग्रीष्म ऋतु में लू से बचाव में सहायक है। इसके साथ ही लेमनग्रास तेल की 10 मि.ली. शीशियों का निःशुल्क वितरण किया गया। लेमनग्रास तेल का उपयोग मानसिक शांति, सुगंधित वातावरण बनाने, मच्छर एवं कीट-पतंगों को दूर भगाने तथा तेल में मिलाकर मालिश के लिए किया जाता है। किसान मेले में लगभग 1000 से 1500 किसानों एवं आमजनों ने बोर्ड के स्टॉल से जानकारी प्राप्त की तथा नन्नारी शरबत और लेमनग्रास तेल के फायदे के बारे में विस्तृत जानकारी। recent visitors 26