पांढुर्णा में बड़ी कार्रवाई: SDM और तहसीलदार ने मिलकर अवैध कॉलोनियों को किया ध्वस्त

पांढुर्णा  शहर में अवैध निर्माण पर प्रशासन एक्शन ले रहा है। अवैध लेआउट और अतिक्रमण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो अवैध कॉलोनियों पर बुलडोजर चला दिया। कलेक्टर के निर्देश पर वरुड मार्ग, अमरावती रोड और वानखड़े सभागृह के पीछे विकसित किए जा रहे अवैध लेआउट को जेसीबी और ट्रैक्टर की मदद से ध्वस्त किया गया। कार्रवाई के दौरान कॉलोनियों की सड़कें, बाउंड्री वॉल, बिजली के खंभे और अन्य निर्माण तोड़े गए। उपजाऊ जमीन पर काटे जा रहे थे प्लॉट प्रशासनिक जांच में सामने आया कि अमरावती रोड स्थित उपजाऊ कृषि भूमि को अवैध रूप से प्लॉटिंग में बदलकर बेचा जा रहा था। सौसर निवासी प्रदीप नेहारे पर बिना शासकीय अनुमति सड़क निर्माण कर लेआउट विकसित करने के आरोप हैं। शिकायत मिलने के बाद राजस्व विभाग ने जांच की और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। एसडीएम ने संभाली जेसीबी की कमान कार्रवाई के दौरान एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली, जब एसडीएम अलका इक्का ने खुद जेसीबी मशीन चलाकर अवैध निर्माण ढहाया। तहसीलदार विनय प्रकाश ठाकुर ने भी ट्रैक्टर चलाकर मौके पर पड़ी निर्माण सामग्री जब्त करवाई और उसे प्रशासनिक वाहन में भरवाया। इसी अभियान के तहत गुरु नानक वार्ड में संजय भांगे द्वारा बनाई गई अवैध बाउंड्री वॉल को भी तोड़ा गया। माप-जोख में यह निर्माण अतिक्रमण की श्रेणी में पाया गया था। आगे भी जारी रहेगा अभियान अधिकारियों ने साफ किया कि शहर में अवैध लेआउट के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। संतोषी माता वार्ड, नागपुर रोड, भोपाल रोड और अमरावती रोड सहित अन्य इलाकों में बने अवैध कॉलोनियों पर भी चरणबद्ध तरीके से सख्त कार्रवाई की जाएगी। कार्रवाई के दौरान नगर पालिका की टीम, राजस्व अमला और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा। प्रशासन की सख्ती से अवैध प्लॉटिंग करने वालों में हड़कंप की स्थिति है। recent visitors 33

निकट थाने में रखी जाएगी गोपनीय सामग्री, बोर्ड परीक्षा की 12 व 13 को बटेंगी सामग्री

दुर्ग. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा हाई स्कूल तथा हायर सेकेंडरी परीक्षा 20 फरवरी से आयोजित की जा रही है. इन परीक्षाओं के लिए गोपनीय सामग्रियों का वितरण 12 एवं 13 फरवरी को स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम शासकीय बहुउद्देशीय जेआरडी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय दुर्ग से किया जाएगा. जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि गोपनीय सामग्री प्राप्त करने के लिए मुख्य परीक्षा केंद्र के केंद्राध्यक्ष/ प्राचार्य उपस्थित होंगे. इस बार दसवीं में 16857 विद्यार्थी तथा 12वीं में 13563 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल होंगे. इस तरह बोर्ड परीक्षाओं में कुल 30420 परीक्षार्थी सम्मिलित होंगे. दुर्ग जिले में परीक्षा के लिए कुल 135 केंद्र बनाए गए हैं. इस बार फरीदनगर भिलाई को नया केंद्र बनाया गया है. वहीं इंदिरा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामनगर भिलाई स्थित परीक्षा केंद्र को बंद किया गया है. गोपनीय सामग्री को परीक्षा केंद्र के निकट 27 थाने में रखा जाएगा. recent visitors 22

राज्य की वित्तीय सेहत पर सवाल? MP सरकार 2026 में दोबारा लेगी ₹5200 करोड़ का कर्ज

  भोपाल मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर 5200 करोड़ का कर्ज लेगी। साल 2026 में सरकार दूसरी बार ऋण लेने जा रही है। जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 57,100 करोड़ का कर्ज लिया जा चुका हैं। अब यह लोन 62,300 करोड़ रुपए का हो गया है। एमपी सरकार साल 2026 में दूसरी बार कर्ज ले रही हैं। 7 फरवरी को 5200 करोड़ की राशि मिलेगी। जिसकी पहली किस्त 1200 करोड़ रुपए 7 साल के लिए ब्याज समेत भुगतान की तारीख 4 फरवरी 2033 तारीख की है। 2000 करोड़ का कर्ज 17 साल के लिए लिया जा रहा है, जो 4 फरवरी 2043 तक के लिए है। मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार लगातार कर्ज के बढ़ते बोझ तले दबती जा रही है। राज्य सरकार ने एक बार फिर 5200 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने का निर्णय लिया है। यह कर्ज इस वित्तीय वर्ष में दूसरी बार लिया जा रहा है।सरकारी जानकारी के अनुसार, इस कर्ज का भुगतान ब्याज सहित 4 फरवरी 2033 तक किया जाएगा। इसमें से 2000 करोड़ रुपये का कर्ज 17 साल की अवधि के लिए लिया गया है, जिसका भुगतान 4 फरवरी 2043 तक होगा। वहीं, 2000 करोड़ रुपये की तीसरी किस्त 22 साल की अवधि के लिए ली गई है, जिसे ब्याज सहित चुकाया जाएगा। इस वित्तीय वर्ष में कुल कर्ज 62,300 करोड़ तक पहुँचा चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक मध्य प्रदेश सरकार कुल 57,100 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी थी। ताजा 5200 करोड़ रुपये के कर्ज के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 62,300 करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। जानिए मोहन सरकार ने कब-कब लिया कर्ज? वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक लिए गए कर्ज का विवरण इस प्रकार है: 7 जनवरी 2026 – 400 करोड़ 30 दिसंबर 2025 – 3500 करोड़ 2 दिसंबर 2025 – 3000 करोड़ 11 नवंबर 2025 – 4000 करोड़ 28 अक्टूबर 2025 – 5200 करोड़ 30 सितंबर 2025 – 3000 करोड़ 23 सितंबर 2025 – 3000 करोड़ 9 सितंबर 2025 – 4000 करोड़ 26 अगस्त 2025 – 4800 करोड़ 5 अगस्त 2025 – 4000 करोड़ 30 जुलाई 2025 – 4300 करोड़ 8 जुलाई 2025 – 4800 करोड़ 4 जून 2025 – 4500 करोड़ 7 मई 2025 – 5000 करोड़ इस तरह लगातार कर्ज लेने के कारण राज्य की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्ष के निशाने पर मोहन सरकार मध्य प्रदेश पर लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर कांग्रेस भाजपा सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। उनका आरोप है कि विकास कार्यों की सही योजना न होने के कारण सरकार बार-बार कर्ज लेने को मजबूर हो रही है।   recent visitors 141

कर्नल सोफिया पर आपत्तिजनक बयान के मामले में विजय शाह पर दिल्ली करेगी सुनवाई, राहत नदारद

भोपाल  कर्नल सोफिया को लेकर बेशर्म बयान देने वाले मोहन सरकार के मंत्री विजय शाह को लेकर भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व निर्णय लेगा। माना जा रहा है कि सरकार फैसले के बाद 6 फरवरी तक कोर्ट को अपने निर्णय से अवगत कराएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि 9 फरवरी को उक्त मामले में सुनवाई होनी है। पूर्व में यह माना जा रहा था कि शाह के खिलाफ हुई एसआइटी जांच पर स़त्ता व संगठन द्वारा सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई दो हफ्ते की अवधि में निर्णय ले लिया जाएगा। मंत्री सांसत में, कहीं से नहीं मिली राहत मामला बुरी तरह फंसा है। उधर मंत्री शाह की जान सांसत में है, वे भोपाल से लेकर दिल्ली तक सभी स्तर पर अपना पक्ष रख चुके हैं। बताया जा रहा है कि  देर रात तक उन्हें किसी भी स्तर से कोई राहत नहीं मिली है। सूत्रों के मुताबिक उन्हें दो टूक कह दिया है कि जो कुछ होगा, वह दिल्ली नेतृत्व ही तय करेगा। उसके आधार पर अवगत कराया जाएगा।  वहीं, सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों का कहना है कि अभी तक उनके पास कोई निर्देश नहीं आए हैं। मामला कैबिनेट मंत्री की अभियोजन स्वीकृति का है, जिसके लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन जरूरी है। लेकिन अभी तक कोई भी दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि विजय शाह के विरुद्ध एसआईटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर लंबित अभियोजन स्वीकृति पर दो सप्ताह के अंदर निर्णय लिया जाए। यह अवधि 2 फरवरी को पूरी हो गई है। लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हो सका है। सरकार के सूत्रों को कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 9 फरवरी को है, लेकिन कार्यदिवस के आधार पर 2 सप्ताह की मोहलत 5 फरवरी तक है। इसलिए सरकार के पास अभी 3 दिन का वक्त और है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी 6 माह पहले ही अपनी अंतिम जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज चुकी है। रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि के साथ ही मुकदमा चलाने की स्वीकृति देने की सिफारिश की गई है। क्यों फंसे मंत्री शाह चुनौती देकर फंसे मंत्री शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंदौर में कर्नल सोफिया कुरैशी पर बेशर्म टिप्पणी(Minister Vijay Shah Statement Controversy) की। इस पर हाईकोर्ट के एफआइआर के आदेश को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। यहां राहत तो नहीं, उलटा एसआइटी गठित करने के आदेश हुए। कोर्ट ने सरकार से अभियोजन की स्वीकृति पर दो हफ्ते में निर्णय लेने को कहा है। recent visitors 36

साई धनशिका ने खोला राज़: ‘योगी दा’ में बिना बॉडी डबल किए किए सभी खतरनाक स्टंट

मुंबई   साउथ फिल्म इंडस्ट्री की सफल अभिनेत्री साई धनशिका अपनी अपकमिंग फिल्म 'योगी दा' की रिलीज को लेकर उत्साहित हैं। साई फिल्म में एक्शन करती नजर आएंगी। उन्होंने बताया कि फिल्म 'योगी दा' में सभी स्टंट खुद किए हैं। उन्होंने बताया कि बिना किसी बॉडी डबल के एक्शन सीन पूरे किए महिलाएं चाहें तो पुरुषों जितने शानदार स्टंट कर सकती हैं। एक इवेंट में साई धनशिका ने बताया, "मैंने पहली बार 'पेरानमाई' में एक्शन किया था और वह अनुभव आज भी मेरी मदद करता है।  'योगी दा' में हर स्टंट सीन मैंने खुद किए हैं, बिना किसी बॉडी डबल के। अगर महिलाएं मन बना लें, तो वे पुरुषों की तरह ही अच्छे स्टंट कर सकती हैं।" उन्होंने फिल्म के संदेश पर जोर देते हुए कहा, "आज महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं।  समाज अक्सर सोचता है कि एक बार अगर कोई महिला शारीरिक रूप से घायल हो जाए, तो वह फिर कभी खड़ी नहीं हो सकती। लेकिन 'योगी दा' दिखाती है कि वह इससे उबर सकती है और मजबूत होकर वापस आ सकती है। हमने यह फिल्म महिलाओं के लिए, उनकी पूरी क्षमता दिखाने के लिए बनाई है।" साई धनशिका ने फिल्म के टाइटल की रोचक कहानी भी साझा की। उन्होंने कहा कि 'योगी दा' का नाम सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म 'कबाली' से प्रेरित है। "मैंने 'कबाली' में रजनीकांत सर की बेटी का किरदार निभाया था, जिसका नाम 'योगी' था। इसी से 'योगी दा' की शुरुआत हुई। हमने 'कबाली' के लुक और एक्शन स्टाइल में समानताएं देखीं, इसलिए यह नाम चुना। 'कबाली' के लिए मैंने असल में अपने बाल कटवाए थे, लेकिन इस फिल्म के लिए विग का इस्तेमाल किया। 'कबाली' के बाद कई महिलाओं ने मेरे किरदार से प्रेरित होकर बाल कटवाए थे। तब मुझे एहसास हुआ कि एक फिल्म लोगों पर कितना गहरा असर डाल सकती है।" एक्ट्रेस ने अपनी पूरी टीम को दिल से धन्यवाद देते हुए कहा, "मेरी पूरी टीम को बहुत-बहुत शुक्रिया। यह आप सबके बिना संभव नहीं होता। मैं मानती हूं कि ज्यादा बोलने से बेहतर है कि काम बात करे, जो मेहनत फिल्मों में दिखती है।" 'योगी दा' एक एक्शन एंटरटेनर है, जिसे गौतम कृष्णा ने लिखा और डायरेक्ट किया है। फिल्म का निर्माण श्री मोनिका सिनी फिल्म्स के बैनर तले सेंथिलकुमार ने किया है। एक्शन से भऱपूर फिल्म में साई धनशिका लीड रोल में हैं। यह फिल्म 6 फरवरी को रिलीज होने वाली है। recent visitors 36

भ्रष्टाचार की शिकायत: इमली टोला पंचायत में सड़क निर्माण में अनियमितताएं, जिम्मेदारों की खामोशी

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी CC सड़क, बोल्डर डाल कर दी ढलाई गुणवत्ताविहीन सामग्री का किया उपयोग, ग्रामीणों ने सरपंच सचिव पर लगाए गंभीर आरोप घुघरी जनपद आने वाली पंचायत इमली टोला में सीसी सड़क निर्माण में जमकर हो रहा भ्रष्टाचार… जवाबदार मौन घुघरी आदिवासी बाहुल्य जिले में लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के नाम पर हो रहे निर्माण कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामले आए दिन उजागर हो रहे हैं फिर चाहे भवन, पुलिया निर्माण के मामले हो, या फिर सीसी सड़क निर्माण किए जाने के मामले हो लेकिन जिले में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और  सुस्त रवैया के चलते भ्रष्टाचार्यों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैंऔर सरपंच सचिव एवं जनपद में बैठे जवाबदारों की मिली भगत से जम कर भ्रष्टाचार किया जा रहा है  जिसका सीधा खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पढ़ रहा है ऐसा ही मामला जनपद पंचायत घुघरी अंतर्गत ग्राम पंचायत इमलीटोला के पोषक ग्राम भोका देवरी का सामने आया है जहां पांचवा वित्त मद से 3 लाख 21 हजार रूपये की लागत से मेनरोड से मुरली के घर तक सीसी रोड का निर्माण कराया जा रहा है जिसमें बिना समतलीकरण के बोल्डर  डाल कर सीसी सड़क का निर्माण कराया जा रहा है वहीं ग्रामीणों का कहना है . सरपंच, सचिव के द्वारा बोल्डर के ऊपर सीसी रोड का निर्माण कार्य कराया गया है जिसमें नियमों को ताक में रखकर भ्रष्टाचार के उद्देश्य से पूरी तरह गुणवत्ताहीन सी सी सड़क  बनाई जा रही है वही ग्रामीणों का आरोप है कि सीसी रोड का निर्माण कार्य कराया जा रहा है जहां बड़े-बड़े बोल्डर के ऊपर से ही सीसी रोड की ढलाई करा दी गई है जिससे सीसी रोड का समय से पूर्व ही टूटने की संभावना बनी हुई है जो की ग्राम विकास में क्षति है अगर गुणवत्तापूर्ण सीसी रोड बनाया जाता तो रोड अपने समय सीमा तक चल सकता था।अगर सी सी सड़क समय से पूर्व ही क्षतिग्रस्त हो जाएगा ऐसे में ग्रामीणों को आवाजाही में समस्या होगी।वही ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। ऐसा लगता है की विकासखंड घुघरी के इंजीनियर एसडीओपी सीईओ साहब पंचायत को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि परसेंट मिल सके अब देखना यह है कि प्रशासन कार्रवाई करता है या फिर भ्रष्टाचार पर चुप्पी साधे रहता है। recent visitors 32

शिकायतकर्ता शिक्षक पर गिरी गाज, दो वेतनवृद्धियाँ रोकी

बड़वानी   नरेश रायक मिली जानकारी बताया कि जिस शिक्षक ने खुद को “न्याय का योद्धा” बताकर मोर्चा खोला था, वही अब प्रशासन की फाइलों में आरोपी बनकर दर्ज हो चुका है। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय क्रमांक-01 बड़वानी में छात्र से मारपीट का आरोप लगाने वाले शिक्षक जगदीश गुजराती अब खुद फर्जी पत्राचार, दबाव बनाने और अधिकारों के दुरुपयोग के गंभीर आरोपों में घिर चुके हैं। कहते हैं — जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, वही पहले उसमें गिरता है। बड़वानी में यह कहावत अब सरकारी कागज़ों में दर्ज हो चुकी है।  शिकायत से शुरू हुआ खेल शिक्षक जगदीश गुजराती ने सहायक आयुक्त जनजातीय विभाग में शिकायत दर्ज कराई कि 18 जुलाई को कक्षा 9वीं ‘सी’ में अतिथि शिक्षक पंकज गुर्जवार ने छात्रों सहित उनकी पुत्री को लकड़ी के डंडे से पीटा, जिससे हाथ में “फ्रैक्चर” हो गया। मामला सुर्खियों में आया, पर जब जांच शुरू हुई तो कहानी की परतें खुद ही उखड़ने लगीं।  जांच में फिसली शिकायत की ज़मीन सहायक आयुक्त द्वारा गठित जांच दल ने विद्यार्थियों, स्टाफ, तत्कालीन प्राचार्य आर.एस. जाधव सहित सभी पक्षों के बयान लिए। प्रतिवेदन दिनांक 06 नवंबर 2025 में साफ लिखा गया — घटना उतनी गंभीर नहीं है जितनी दिखाई गई। रिपोर्ट में दर्ज है कि यदि हाथ में फ्रैक्चर होता तो छात्रा नियमित रूप से विद्यालय नहीं आती, हाथ में प्लास्टर होता और चिकित्सकीय प्रमाण सामने आते। यानि शिकायत की नींव ही कमजोर निकली।  फर्जी आदेश बनवाकर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। जांच बंद होते ही शिक्षक जगदीश गुजराती पर सबसे बड़ा आरोप लगा — सहायक आयुक्त के नाम से फर्जी पत्र जारी करवा कर जावक तक कराने का। सहायक आयुक्त बड़वानी ने पत्र क्रमांक 11755 दिनांक 10 दिसंबर 2025 में साफ लिखा कि शिकायतकर्ता ने अपने प्रभाव से कूट रचित पत्र क्रमांक 11555 दिनांक 08 दिसंबर 2025 जारी कराया, जिसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया गया। यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं, बल्कि सीधा-सीधा प्रशासनिक विश्वासघात है।  निलंबन की तलवार, नोटिस की चोट फर्जीवाड़ा सामने आते ही संभागीय उपायुक्त जनजातीय कार्य विभाग इंदौर ने कारण बताओ नोटिस जारी किया। पत्र में उल्लेख है कि प्रकरण के आधार पर निलंबन की कार्रवाई प्रस्तावित है और शिक्षक को इंदौर तलब किया गया। अब शिक्षक की कुर्सी डगमगा रही है और फाइलें तेजी से ऊपर बढ़ रही हैं।  पर्दे के पीछे संरक्षण का खेल सूत्र बताते हैं कि जैसे ही कार्रवाई की आहट हुई, कुछ नेता और अफसर शिक्षक के बचाव में मैदान में उतर आए। जिले के एक बीईओ तक इंदौर पहुँच गए। यानी सवाल उठता है — क्या नियम सबके लिए समान हैं या सिफारिश से गुनाह धुल जाते हैं? उत्कृष्ट स्कूल की चमक पर दाग शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय-01 बड़वानी जिले का सबसे प्रतिष्ठित स्कूल है, जहाँ प्रवेश परीक्षा से चयन होता है। यहाँ “क्रीमी लेयर” विद्यार्थी आते हैं, इसलिए परिणाम भी चमकदार रहते हैं। लेकिन सवाल यह है कि यदि यहाँ के शिक्षक इतने ही काबिल हैं, तो उन्हें सामान्य स्कूलों में भेजकर क्यों नहीं परखा जाता? कागज़ों की तारीफ और ज़मीन की हकीकत में फर्क साफ दिख रहा है।  गिरी सज़ा —  दो वेतनवृद्धियाँ जब्त सूत्रों के अनुसार पूरे मामले में शिक्षक जगदीश गुजराती की दो वेतनवृद्धियाँ रोकने का आदेश जारी हो चुका है। यह कार्रवाई फर्जी पत्राचार और विभागीय अनुशासनहीनता के आधार पर की गई। यह सिर्फ शुरुआत है या अंतिम फैसला — अब सबकी निगाहें प्रशासन पर हैं।   अब असली सवाल क्या शिक्षक कानून से ऊपर हैं? क्या फर्जी पत्र बनवाना “न्याय” कहलाता है? क्या संरक्षण से सच्चाई दबाई जा सकती है? बड़वानी का यह मामला अब सिर्फ स्कूल का नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी की खुली परीक्षा बन चुका है। recent visitors 39