तीन बहनों की आत्महत्या ने खड़े किए सवाल, क्या है ‘कोरियन लवर’ गेम का सच?

 गाजियाबाद गाजियाबाद से सनसनीखेज मामला सामने आया है. जहां तीन सगी नाबालिग बहनों ने देर रात 9वीं मंज़िल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. घटना बीती रात करीब 2:30 बजे की बताई जा रही है. घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है. मृतक तीनों बहनें नाबालिग थीं. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार तीनों बहनें एक गेमिंग ऐप की आदी हो गई थीं. बताया जा रहा है कि वे ऑनलाइन टास्क-बेस्ड कोरियन लवर गेम खेला करती थीं. तीनों ने सामूहिक आत्महत्या क्यों की, इसका कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाया है. सुसाइड नोट में लिखा है मम्मी-पापा सॉरी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. मामला गाजियाबाद के थाना टीला मोड़ क्षेत्र स्थित भारत सिटी का है. पुलिस का कहना है कि परिजनों से पूछताछ की जा रही है और मोबाइल फोन व डिजिटल गतिविधियों की भी जांच की जा रही है. फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की गहन जांच में जुटी है. मृतक लड़कियों ने नाम निशिका 16 साल, प्राची 14 साल, पाखी 12 साल है. पुलिस को एक पेज का सुसाइड नोट भी मिला है. जिस पर मम्मी- पापा सॉरी लिखा है.  स्थानीय लोगों का कहना है कि तीनों बहनें रात में एक साथ 9वें फ्लोर से कूद गईं. ऐसे में किसी चीज के नीचे गिरने और तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे. इस दौरान डराने वाला नजारा था. क्योंकि तीन डेडबॉडी जमीन पर पड़ी थीं और खून बह रहा था. जिसके बाद लड़कियों के परिजन भी मौके पर पहुंच गए. पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस भी मौके पर पहुंच गई. इसके बाद पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा.  पुलिस ने क्या बताया? शालीमार गार्डन, पुलिस आयुक्त अतुल कुमार सिंह ने बताया कि रात्रि करीब 02.15 बजे पीआरवी द्वारा सूचना प्राप्त हुई. जिसमें कहा गया कि थाना टीलामोड़ स्थित भारत सिटी में टावर बी-1 फ्लैट नं0 907 की नवीं मंजिल की बालकनी से तीन बच्चियां कूद गईं. जिससे तीनों की मौत हो गई है. मौके पर पहुंचकर जांच की गई तो तीन बच्चियां क्रमश निशिका उम्र करीब 16 वर्ष, प्राची उम्र लगभग 14 वर्ष, पाखी उम्र लगभग 12 वर्ष पुत्रियां चेतन कुमार की जमीन पर गिरने के कारण मृत्यु हो गई है. जिनको एम्बुलेंस द्वारा 50 शैय्या अस्पताल लोनी भेजा गया. जहां पर डॉक्टरों द्वारा तीनों बच्चियों को मृत घोषित कर दिया गया. मामले में पुलिस द्वारा अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा रही है.  क्या है 'कोरियन लवर' गेम का रहस्य? गाजियाबाद के थाना टीला मोड़ स्थित भारत सिटी में देर रात करीब 2:30 बजे निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने नौवीं मंजिल से छलांग लगा दी. चेतन कुमार की ये तीनों बेटियां 'कोरियन लवर' नामक ऑनलाइन टास्क-बेस्ड गेम की आदी थीं. प्रारंभिक जांच में इस जानलेवा गेम की लत को ही सामूहिक आत्महत्या की वजह माना जा रहा है. पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर परिजनों से पूछताछ और मोबाइल फोन की डिजिटल जांच शुरू कर दी है. आधी रात को पसरा मातम सन्नाटे को चीरती हुई चीखों ने पूरी सोसाइटी को झकझोर कर रख दिया. तीनों बहनें एक साथ मौत के आगोश में समा गईं. पुलिस को घटनास्थल से एक पेज का सुसाइड नोट मिला है, जिस पर सिर्फ 'मम्मी पापा सॉरी' लिखा था. यह साधारण शब्द उस गहरे मानसिक दबाव की ओर इशारा कर रहे हैं, जो शायद उस गेम के टास्क ने पैदा किया था. क्या है 'कोरियन लवर' गेम का रहस्य? जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें अपनी डिजिटल दुनिया में खोई रहती थीं. वे एक कोरियन गेम के टास्क पूरा कर रही थीं. पुलिस अब उन मोबाइल फोन्स को खंगाल रही है, जिनमें छिपे टास्क ने इन मासूमों को इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया.  फिलहाल, परिवार और पड़ोसियों के लिए यह यकीन करना मुश्किल है कि स्क्रीन के पीछे बैठा कोई अदृश्य खेल तीन जिंदगियां छीन लेगा. वहीं, गाजियाबाद पुलिस हर एंगल से जांच-पड़ताल में जुट गई है.  पिता ने कही ये बात  मृतक बहनों के पिता चेतन कुमार के मुताबिक, बेटियां कोरियन गेम खेलती थीं. कल आखिरी टास्क था. जांच के लिए पुलिस उनके फोन अपने साथ ले गई है. गेम में कुल कुल 50 टास्क थे, घटना वाले दिन यानी कल आखिरी था. कूदने के लिए बेटियों ने दो स्टेप वाली सीढ़ी का इस्तेमाल किया था. पुलिस का बयान  इस मामले में एसीपी अतुल कुमार ने बताया कि रात करीब 2.15 बजे पीआरवी द्वारा थाना टीलामोड़ स्थित भारत सिटी में टावर बी-1 फ्लैट नंबर 907 की नवीं मंजिल की बालकनी से तीन बच्चियों के कूदने की और मौके पर ही उनकी मृत्यु होने की सूचना प्राप्त हुई. फ़ौरन घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की गई तो तीन बच्चियां- निशिका, प्राची, पाखी ग्राउंड पर बेसुध पाई गईं. उनको एम्बुलेंस द्वारा 50 शैय्या अस्पताल लोनी भेजा गया जहां पर डॉक्टरों द्वारा तीनों बच्चियों को मृत घोषित किया गया. अब पुलिस द्वारा आगे की वैधानिक कार्यवाही की जा रही है.  recent visitors 34

240 कल्याणकारी योजनाओं के साथ 145 करोड़ जनता के हितों के लिए कार्य कर रही केन्द्र सरकार – डॉ. महेन्द्र सिंह

 प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में समग्र भारत के चतुर्दिक विकास का बजट प्रस्तुत किया गया  केंद्रीय बजट जनता के प्रति सरकार के कर्तव्यों को पूरा करने वाला डॉक्यूमेंट   240 कल्याणकारी योजनाओं के साथ 145 करोड़ जनता के हितों के लिए कार्य कर रही केन्द्र सरकार  – डॉ. महेन्द्र सिंह भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह ने मंगलवार को सागर में केंद्रीय बजट को लेकर व्यापारी व प्रबुद्धजन संवाद कार्यक्रम को संबोधित किया भोपाल/सागर   भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने मंगलवार को सागर जिले के होटल वरदान में केंद्रीय बजट-2026 को लेकर आयोजित व्यापारी व प्रबुद्धजन संवाद कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदीजी के नेतृत्व में समग्र भारत के चतुर्दिक विकास का बजट प्रस्तुत किया है। केंद्रीय बजट 2026 देश की जनता के प्रति सरकार के कर्तव्यों को पूरा करने वाला डॉक्यूमेंट है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में 240 कल्याणकारी योजनाओं के साथ केंद्र सरकार देश की 145 करोड़ जनता के हितों के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आजाद भारत के बाद यह पहला बजट है जब कर्तव्य भवन में बैठकर तीन कर्तव्यों वाला बजट बनाया गया है। कार्यक्रम को प्रदेश शासन के मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत, पूर्व मंत्री व विधायक श्री गोपाल भार्गव, विधायक श्री शैलेन्द्र जैन एवं जिला अध्यक्ष श्री श्याम तिवारी ने भी संबोधित किया। इस दौरान पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्री गौरव रणदिवे मंचासीन रहे।  प्रधानमंत्री जी भारत के पुराने वैभव को वापस दिलाने, विश्व गुरू बनाने के लिए कार्य कर रहे भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भारत के पुराने वैभव को वापस दिलाने, देश को विश्व गुरू बनाने के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब दुनिया के देश पढ़ना नहीं जानते थे, तब भारत में तक्षशिला विश्वविद्यालय था। दुनिया में सबसे पहले भारत में वेदों की रचना की गई। सनातन काल से भारत व्यापार में अग्रणी रहा है, इसीलिए भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्रिक देश भारत है। विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता हमारे देश के प्रभारी श्री नरेन्द्र मोदी जी हैं। प्रधानमंत्री जी भारत की अर्थव्यवस्था को विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना चुके हैं। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्त में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से अग्रसर है।  भारत विश्व के सबसे संपन्न देशों से विकास में सीधा मुकाबला कर रहा है भाजपा के प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत विश्व के सबसे आर्थिक संपन्न व विकसित राष्ट्रां का विकास में सीधा मुकाबला कर अपना स्थान वैश्विक स्तर पर बना रहा है। अमेरिका में भारत से कई गुना अधिक खेती की जमीन है। इसके साथ ही अमेरिका की जनसंख्या भी भारत से बहुत कम है। भारत की जनसंख्या लगभग 145 करोड़ है, जबकि अमेरिका की जनसंख्या लगभग 35 करोड़ है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदृष्टि और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की उनकी परिकल्पना से हमारा देश आज विश्व के सबसे बड़े और विकसित देशों का विकास के मामले में सीधा मुकाबला कर रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2013 में भारत का बजट 16.65 लाख करोड़ का प्रस्तुत किया गया था। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने 17.95 लाख करोड़ का बजट प्रस्तुत किया। इस साल 53 लाख 50 हजार करोड़ का बजट केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया है। यह बजट राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ देश को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा। पद्मश्री भगवानदास रैकवार के निवास पहुंचकर किया सम्मान भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने मार्शल आर्ट्स के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए पद्मश्री पुरस्कार हेतु चयनित श्री भगवानदास रैकवार से उनके निवास पर भेंटकर उन्हें आत्मीय बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। भाजपा प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह ने इससे पहले प्रदेश शासन के पूर्व मंत्री व विधायक श्री भूपेन्द्र सिंह के निवास पहुंचकर भगवान श्री हनुमान जी प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा एवं श्री रामकथा में शामिल होकर श्रवण किया।  recent visitors 31

इंदौर पुलिस का नया ट्रैफिक कैंपेन: चौराहे पर 6-7 फीट ऊंचा हेलमेट, पर्यावरण और सुरक्षा का संदेश

इंदौर वाहन चालकों को हेलमेट के प्रति जागरूक करने के लिए इंदौर की ट्रैफिक पुलिस द्वारा रोजाना अलग-अलग तरह के जतन किए जा रहे हैं. जहां इंदौर के विभिन्न चौराहों पर पुलिस द्वारा हेलमेट नहीं लगाने वाले वाहन चालकों पर चालानी कार्रवाई की जा रही है. वहीं दूसरी ओर हेलमेट के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान भी चलाया जा रहा है. इसी कड़ी में अब इंदौर पुलिस द्वारा वेस्ट मटेरियल के माध्यम से हेलमेट बनाए गए हैं. जिसे लेकर पुलिस जनता को जागरूक कर रही है. वेस्ट मटेरियल से बनाया हेलमेट इंदौर पुलिस हेलमेट के प्रति वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए रोजाना अलग-अलग तरह के अभियान चला रही है. इसी कड़ी में इंदौर की ट्रैफिक पुलिस ने तकरीबन 6 से 7 फीट ऊंचा एक हेलमेट बनाया है. इस हेलमेट की खासियत यह है कि इसे वेस्ट मटेरियल के माध्यम से तैयार किया गया है. इसे बनाने के लिए वेस्ट मटेरियल में मुख्य रूप से कार और बाइक में से निकले हुए विभिन्न तरह के उपकरणों का प्रयोग किया गया है. इसे बनाने में तीन से चार लोगों की टीम के द्वारा दो से तीन सप्ताह में बनाया गया है. चौराहों पर लगाया जाएगा हेलमेट इसे पूरी तरीके से हेलमेट की तरह बनाया गया है, फिलहाल इस वेस्ट मटेरियल से तैयार हेलमेट को इंदौर के पलासिया चौराहे पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा हेलमेट के प्रति वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए रखा गया है. आने वाले दिनों में इसे अन्य चौराहों पर भी लगाया जाएगा. वाहन चालकों को इसके माध्यम से भी हेलमेट लगाने के प्रति जागरूक किया जाएगा. इंदौर ट्रैफिक पुलिस का अनूठा प्रयास इंदौर में पुलिस हेलमेट के प्रति वाहन चालकों को जागरूक करने के लिए रोज चालानी कार्रवाई करने के साथ ही उन्हें जागरूक करने के लिए अभियान चला रही है. इसी कड़ी में इंदौर की ट्रैफिक पुलिस के द्वारा इस तरह का अनूठा प्रयास किया है. इंदौर की ट्रैफिक पुलिस के इस तरह के प्रयास करने से अब वाहन चालक हेलमेट के प्रति कितने जागरूक होते हैं यह देखने लायक रहेगा. recent visitors 37

अनोखी खोज: IIIT DM छात्र ने विकसित किया यंत्र, पसीने से स्वास्थ्य जांच संभव

जबलपुर  आजकल यूथ एक से बढ़कर एक एक्सपेरीमेंट कर रही है, जो सफल भी हो रही है. खास बात यह है कि उनका यह इनोवेशन आम लोगों के लिए भी होता है. जो उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में काम कर सकता है. कुछ इसी तरह का कमाल जबलपुर ट्रिपल आईटी डीएम (IIITDM) कॉलेज के एक छात्र ने कर दिखाया है. छात्र ने आम एलाइनमेंट स्वेट बैंड बनाया है. यह डिवाइस पसीने में होने वाले परिवर्तन से शरीर में होने वाली बीमारी की जानकारी दे देगा. छात्र की इस खोज को पेटेंट भी मिल गया है. पसीने से बीमारी पता लगाने वाली डिवाइस का आया ख्याल जबलपुर में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इनफर्मेशन टेक्नोलॉजी डिजाइन इन मैन्युफैक्चरिंग (IIITDM) जबलपुर केंद्र सरकार के इस कॉलेज में इंजीनियरिंग के 2700 से ज्यादा छात्र पढ़ते हैं. इसी संस्थान के एक छात्र मयूर पाटील ने एक आइडिया तैयार किया. जिसमें मयूर ने देखा कि अभी तक मानव शरीर में बीमारियों की जांच के लिए खून का इस्तेमाल किया जाता है. मयूर ने मेडिकल की कुछ पुस्तक पढ़ी थी. जिसमें उसने पाया था कि बीमारी के दौरान जिस तरह खून में परिवर्तन होता है. उसी तरह का परिवर्तन पसीने में भी आता है और पसीने के माध्यम से भी बीमारियों का पता लगाया जा सकता है. इसके बाद मयूर पाटील ने जानकारी ली कि क्या अभी कोई ऐसी डिवाइस है, जिसे पसीने के जरिए शरीर में होने वाले परिवर्तन का पता लगाया जा सके. मयूर का आइडिया आया पसंद मयूर पाटील ने यह बात कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अविनाश रविराजन से चर्चा की. मयूर पाटील ने एक सिनॉप्सिस जमा की. जिसमें उन्होंने एक स्वेट बैंड के बारे में जानकारी दी. वह एक इस तरह का स्वेट बैंड बनाना चाहते हैं. जिसे शरीर पर लगाने के बाद वह पसीने के आधार पर एक डेटाबेस तैयार करेगा. उसके बाद यदि पसीने में कोई परिवर्तन होता है, तो उसकी जानकारी मिलेगी और शरीर में होने वाले हार्मोनल चेंज भी इसके जरिए देखे जा सकेंगे. मयूर पाटील का आइडिया डॉक्टर अविनाश रवि राजन को पसंद आया. उन्होंने एक टीम के जरिए तैयारी शुरू की. मयूर पाटील ने बताया कि "हमने लंबी तैयारी के बाद एक घड़ीनुमा बेल्ट और कई सेंसर लगाए, जिनमें नैनो तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इन्हें शरीर के उसे हिस्से पर लगाया गया. जहां का पसीना हमें टेस्ट करना है. लंबी मेहनत के बाद स्वेट बैंड तैयार हो गया." R एलाइनमेंट बैंड डॉ अविनाशा रवि राजन ने बताया कि "हमने इस बैंड का नाम आर एलाइनमेंट बैंड रखा है. इसमें 3 लेयर तैयार की गई है, इसमें लगे कैपेसिटर पसीने से चार्ज होते हैं. फिर उससे मिले डाटा को मैग्नीफाइंग डिवाइस में डालकर पहले से प्रूवन डाटा से मैच किया जाता है. इसमें पसीने की पीएच वैल्यू भी देखी जाती है. हमने इसे आर्म के लिए तैयार किया था, लेकिन इस शरीर के किसी भी दूसरी ग्रंथि के लिए तैयार किया जा सकता है, क्योंकि हर ग्रंथि से अलग किस्म का पसीना निकलता है. बिना नुकसान पहुंचाए, शरीर की परेशानी बताएगा बैंड उन्होंने बताया कि यह एक किस्म का प्रेडिक्शन मॉडल है, लेकिन इसमें शरीर को बिना हानि पहुंचाए इस्तेमाल किया जा सकता है. यदि इससे निकलने वाली किसी जानकारी से शरीर के किसी परिवर्तन का पता लगता है, तो उसकी जांच आगे की जा सकती है. सामान्य लोगों के साथ ही यह एथलीट के लिए बहुत काम का है. मयूर पाटील का कहना है कि बैंड बनाने के बाद हमने इसका मेडिकल टेस्ट भी शुरू किया. जबलपुर के कई जाने-माने डॉक्टर के साथ इसका टेस्ट किया गया. उन सभी ने हमें जो रिपोर्ट दी, उसने हमारा हौसला बढ़ाया. बैंड का मिला पेटेंट डॉ अविनाश रवि राजन ने बताया कि "बैंड तैयार होने के बाद इसे पेटेंट के लिए भेजा गया. बहुत जल्दी ही हमारी इस खोज को पेटेंट भी मिल गया." मयूर पाटील ने बताया कि "इस आर्म एलाइनमेंट बैंड की वजह से उन्हें बहुत इज्जत मिली. देश के कई जाने-माने प्रोफेसर ने उनकी खोज की सराहना की. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज बेंगलुरु से इस खोज को सेकंड प्राइज मिला है. इसके साथ ही डीआरडीओ के डायरेक्टर ने भी इस खोज की सराहना की है. फिलहाल यह बैंड लगभग ₹30000 की लागत में तैयार हुआ था, लेकिन अब भी इसकी लागत कम करने वाले हैं, हालांकि अभी उनकी पढ़ाई चल रही है, लेकिन उनकी कोशिश इसे एक स्टार्टअप बनाने की है. यह बैंड स्वस्थ आदमी को पहले ही अलर्ट कर देगा कि उसके शरीर में कोई तकलीफ आने वाली है." recent visitors 32

Royal Enfield का धमाका: 10 लाख बाइक्स बेचीं, इस मॉडल ने जीता 8 लाख दिल

नई दिल्ली रॉयल एनफील्ड ने 2025 में अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की है, जिसमें रिकॉर्ड 10,71,809 बाइक बेची गईं। चेन्नई स्थित इस कंपनी ने पहली बार घरेलू बाजार में एक कैलेंडर वर्ष में दस लाख यूनिट का आंकड़ा पार किया है। यह 2024 में हासिल की गई 8,57,378 यूनिट की तुलना में 25 प्रतिशत की शानदार वार्षिक वृद्धि है। कंपनी ने पिछले वर्ष 1,32,132 मोटरसाइकिलों का निर्यात भी किया, जो 2024 की 97,371 यूनिट की तुलना में 36 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि है। वर्तमान में, रॉयल एनफील्ड चार अलग-अलग इंजन प्लेटफॉर्म पर 14 मॉडल बेचती है। रॉयल एनफील्ड की 2025 में होने वाली बिक्री का विवरण तालिका प्रारूप में दिया गया है। पिछले 13 वर्षों के रॉयल एनफील्ड के थोक बिक्री आंकड़ों (ऊपर दी गई तालिका देखें) का गहन विश्लेषण करने पर पता चलता है कि 2025 लगातार तीसरा वर्ष है जब बाइक निर्माता ने 8,00,000 का आंकड़ा पार किया है। वार्षिक बिक्री पहली बार 2018 में 8,00,000 (8,37,669 यूनिट) तक पहुंची थी, लेकिन अगले वर्ष इसमें 17 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 6,90,913 यूनिट रह गई, जबकि महामारी से प्रभावित 2020 में यह अपने सबसे निचले स्तर (5,38,889 यूनिट) पर पहुंच गई। तब से, कंपनी ने नए मॉडलों और प्रीमियम मोटरसाइकिलों के लिए बाजार में आए पुनरुत्थान के दम पर वापसी की है। 2022 में मांग में 28 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई और यह 7,03,156 यूनिट तक पहुंच गई, 2023 में 17 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 8,22,295 यूनिट और 2024 में 4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ पिछले वर्ष एक नए उच्च स्तर पर पहुंच गई। 2025 में, अगस्त से अक्टूबर तक लगातार तीन महीनों तक मासिक बिक्री 1,00,000 यूनिट से अधिक रही, जिसमें रॉयल एनफील्ड ने अक्टूबर में 1,16,844 यूनिट की अपनी अब तक की सबसे अधिक मासिक थोक बिक्री दर्ज की। भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में जीएसटी 2.0 की दर में कमी का पूरा लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने की घोषणा करने वाली पहली कंपनियों में से एक, इस कंपनी ने अपने सबसे अधिक बिकने वाले 350 सीसी मॉडल की कीमतों में 22,000 रुपये तक की कटौती की। रॉयल एनफील्ड की सबसे अधिक बिकने वाली बाइक क्लासिक 350 बनी हुई है और अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान इस श्रेणी में बेची गई मोटरसाइकिलों में इसकी हिस्सेदारी 37 प्रतिशत थी । 350-650cc श्रेणी में रॉयल एनफील्ड का दबदबा है। रॉयल एनफील्ड की मिडसाइज़ मोटरसाइकिल बाज़ार में मज़बूत पकड़ उसके 350cc मॉडलों से ही आती है, यह बात आंकड़ों से स्पष्ट है। वित्त वर्ष 2026 की पहली तीन तिमाहियों (अप्रैल-दिसंबर 2025) के लिए SIAM उद्योग थोक बिक्री आंकड़ों के अनुसार, कंपनी की बिक्री में पिछले वर्ष की तुलना में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 8,21,908 यूनिट तक पहुंच गई। रॉयल एनफील्ड की 250-350cc श्रेणी पर मज़बूत पकड़ है – चालू वित्त वर्ष में बेची गई 7,58,458 बाइक (पिछले वर्ष की तुलना में 29 प्रतिशत की वृद्धि) ने इस श्रेणी की कुल 8,01,250 मोटरसाइकिलों की घरेलू बाज़ार बिक्री में 95 प्रतिशत की अजेय हिस्सेदारी हासिल कर ली है। इसके पांच मॉडलों में से, क्लासिक 350 40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद बुलेट 350 (25 प्रतिशत हिस्सेदारी) का स्थान आता है। हंटर 350 और मेटियोर 350 शेष 35 प्रतिशत का योगदान करते हैं। रॉयल एनफील्ड की इन 3 बाइक्स का युवाओं में क्रेज आम तौर पर टॉप सेलिंग बाइक्स की लिस्ट में रॉयल एनफील्ड की क्लासिक 350 टॉप 10 में रहती ही है, लेकिन साल 2025 के आखिरी महीने दिसंबर में तो इस देसी कंपनी की 3-3 बाइक्स ने सबसे ज्यादा बिकने वाली मोटरसाइकल की टॉप 10 लिस्ट में रही। इनमें जहां क्लासिक 350 छठे स्थान पर रही और इसकी 34,958 यूनिट बिकी, वहीं रॉयल एनफील्ड बुलेट 350 आठवें स्थान पर रही और इसकी 24,849 यूनिट बिकी। टॉप 10 बेस्ट सेलिंग बाइक्स की लिस्ट में आखिरी पायदान पर रॉयल एनफील्ड हंटर रही और इसकी 20,654 यूनिट बिकी। रॉयल एनफील्ड की इन बाइक्स की बिक्री में बीते दिसंबर सालाना तौर पर अच्छी-खासी बढ़ोतरी दिखी। क्लासिक 350 की बिक्री में सालाना तौर पर करीब 18 फीसदी, बुलेट 350 में करीब 77 फीसदी और हंटर 350 की सेल में 50 फीसदी की एनुअल ग्रोथ दर्ज की गई। रॉयल एनफील्ड की क्लासिक, बुलेट और हंटर की कीमतें अब आपको रॉयल एनफील्ड की 3 सबसे ज्यादा बिकने वाली मोटरसाइकल्स की कीमतों के बारे में बताएं तो Hunter 350 की एक्स शोरूम प्राइस 1.38 लाख रुपये से शुरू होकर 1.67 लाख रुपये तक जाती है। इसके बाद रॉयल एनफील्ड की आइकॉनिक बाइक Bullet 350 की एक्स शोरूम प्राइस 1.62 लाख रुपये से शुरू होकर 2.04 लाख रुपये तक जाती है। कंपनी की टॉप सेलिंग बाइक Classic 350 की एक्स शोरूम प्राइस 1.83 लाख रुपये से शुरू होकर 2.18 लाख रुपये तक जाती है। क्लासिक का एक खास मॉडल Goan Classic 350 भी है, जिसकी एक्स शोरूम प्राइस 2.20 लाख रुपये से शुरू होकर 2.23 लाख रुपये तक जाती है। recent visitors 38

बड़ा फैसला आने वाला है! अग्निवीरों को अर्धसैनिक बलों में शामिल करने पर विचार

नईदिल्ली  देश की सुरक्षा में चार साल तक पसीना बहाने वाले हजारों अग्निवीरों के भविष्य को लेकर अब बड़ी उम्मीद जगी है. अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए अग्निवीरों का पहला बैच इस साल के अंत में अपनी सेवा पूरी करने जा रहा है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि चार साल की सैन्य सेवा के बाद इन युवाओं का आगे क्या होगा. सरकार ने पहले ही साफ किया था कि चार साल बाद सिर्फ 25 फीसदी अग्निवीरों को ही सेना में स्थायी नियुक्ति मिलेगी, जबकि बाकी 75 फीसदी युवाओं को सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा. अब जब रिटायरमेंट का समय नजदीक आ रहा है तो इन युवाओं के रोजगार और भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. इसी बीच केंद्र सरकार, खासकर गृह मंत्रालय एक ठोस और व्यापक एडजस्टमेंट नीति पर काम कर रहा है. माना जा रहा है कि इस नीति के तहत रिटायर होने वाले अग्निवीरों को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (CAPF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों में बड़ी संख्या में मौका दिया जाएगा. अगर यह योजना लागू होती है तो यह हजारों युवाओं के लिए एक बड़ा राहत पैकेज साबित हो सकती है.  पहले बैच के करीब 46 हजार अग्निवीर होंगे रिटायर अग्निपथ योजना की शुरुआत जून 2022 में की गई थी. इसके तहत इंडियन आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में चार साल के लिए युवाओं की भर्ती हुई. पहली भर्ती प्रक्रिया सितंबर 2022 में पूरी हुई थी, जिसमें 60 हजार से ज्यादा युवा अग्निवीर बने. नियमों के अनुसार, इनमें से लगभग 75 फीसदी यानी करीब 46 हजार अग्निवीर इस साल के अंत तक अपनी चार साल की सेवा पूरी कर लेंगे. इन्हें ग्रेच्युटी और पेंशन जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी, हालांकि सेवा निधि (Seva Nidhi) दी जाएगी. इसी वजह से इनके आगे के करियर को लेकर चिंता लंबे समय से बनी हुई थी.  गृह मंत्रालय ने शुरू की तैयारी, बनी आंतरिक समिति मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,रिटायर होने वाले अग्निवीरों को दोबारा रोजगार देने के लिए गृह मंत्रालय ने कमर कस ली है. मंत्रालय ने CAPF के वरिष्ठ अधिकारियों की एक आंतरिक समिति बनाने का निर्देश दिया है. यह समिति इस बात पर काम कर रही है कि अग्निवीरों को किस तरह से बीएसएफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी जैसे अर्धसैनिक बलों में समायोजित किया जा सकता है. समिति अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रही है ताकि अग्निवीरों के सैन्य अनुभव का सही यूज हो सके.  CAPF में 50 प्रतिशत कोटा, उम्र और फिजिकल में मिल सकती है राहत सूत्रों के अनुसार, सरकार जिस एडजस्टमेंट नीति पर काम कर रही है, उसके तहत CAPF में सीधी भर्ती की 50 प्रतिशत सीटें अग्निवीरों के लिए आरक्षित की जा सकती हैं. भर्ती में ऊपरी आयु सीमा में छूट दी जा सकती है. फिजिकल टेस्ट में कुछ रियायत मिल सकती है. पहले से सैन्य प्रशिक्षण होने के कारण ट्रेनिंग अवधि कम की जा सकती है. इससे अग्निवीरों को दोबारा नई शुरुआत करने में काफी आसानी होगी. केंद्र सरकार के साथ-साथ कई राज्य सरकारों ने भी पूर्व अग्निवीरों को नौकरी में प्राथमिकता देने का ऐलान किया है. कुछ राज्यों ने पुलिस, होमगार्ड और अन्य विभागों में सीटें आरक्षित करने की घोषणा की है. इससे साफ है कि अग्निवीरों को सिस्टम में बनाए रखने की कोशिशें हर स्तर पर चल रही हैं. इससे पहले भी इस तरह के संकेत सामने आ चुके हैं. जनवरी में CISF के महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा था कि नेवी से रिटायर होने वाले अग्निवीरों को बंदरगाहों और तटीय सुरक्षा से जुड़े कामों में तैनात किया जा सकता है. यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि सरकार पहले से ही इस दिशा में सोच रही है.  मार्च-अप्रैल 2026 तक हो सकता है बड़ा ऐलान माना जा रहा है कि आंतरिक समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को सौंप देगी. इसके बाद केंद्र सरकार इस पर अंतिम फैसला ले सकती है. उम्मीद है कि अग्निवीरों के पहले बैच के रिटायर होने से पहले, यानी मार्च-अप्रैल 2026 तक, इस नीति की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी.  recent visitors 32

एमपी में नया पर्यटन प्रोजेक्ट: कच्छ की तरह टेंट सिटी, शहर में बढ़ेगी पर्यटक संख्या

उज्जैन  गुजरात के कच्छ में रण उत्सव चल रहा है। इसमें दुनिया भर के लाखों लोग शामिल हो रहे हैं, जिन्हें टेंट सिटी मॉडल खूब लुभा रहा है। वहीं टेंट सिटी मॉडल को मप्र सरकार भी उज्जैन सिंहस्थ और राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए अपनाएगी। ताकि इन स्थलों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ठहरने की सुविधा और स्थानीय लोगों, कलाकारों, युवाओं, समुदायों के लोगों को स्वरोजगार तथा रोजगार से जोड़ा जा सके। सीेम मोहन यादव ने दी सहमति मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर सहमति दे दी है। वे सोमवार को रण उत्सव में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने बाहर से आने वाले लोगों की सुविधाओं के लिए की गई व्यवस्थाओं को देखा, इसके बाद राज्य के अधिकारियों से चर्चा की। गैस पीड़ितों की याद में बनाएंगे स्मारक गुजरात के भुज में भूकंप ने बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचाया। वहां के पीड़ितों की स्मृतियों को सहेजने व मानवीय संवेदना को सहेजने के लिए स्मृति वन बनाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ठीक उसी तरह भोपाल में भी गैस पीड़ितों की स्मृति में एक समर्पित संग्रहालय विकसित करेंगे। recent visitors 30