MP सरकार का बड़ा वित्तीय फैसला: केंद्रीय योजनाओं में अग्रिम खर्च पर रोक, अफसरों की तय होगी जिम्मेदारी

MP Budget Rules: No advance funds from the state treasury for central schemes; here are the details of the MP government’s new decision. भोपाल। केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य के बजट पर अनावश्यक वित्तीय दबाव रोकने के लिए वित्त विभाग ने केंद्रीय क्षेत्रीय और केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में केंद्रांश की राशि प्राप्त होने से पहले राज्य बजट से अग्रिम व्यय पर रोक लगा दी है। केवल प्रतिपूर्ति श्रेणी की योजनाओं में अपरिहार्य व्यय की अनुमति रहेगी, लेकिन खर्च के तत्काल बाद केंद्र सरकार से प्रतिपूर्ति की राशि प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव भेजना अनिवार्य होगा।केंद्र से राशि मिलने में देरीकेंद्रीय योजनाओं की समीक्षा के दौरान सामने आया कि कई मामलों में केंद्रांश की प्रत्याशा में राज्य बजट से पहले ही राशि खर्च कर दी गई। दूसरी ओर प्रतिपूर्ति के आधार पर संचालित योजनाओं में भारत सरकार से प्रतिपूर्ति राशि प्राप्त करने में देरी हो रही है। इससे राज्य के संसाधनों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ रहा है। इसे देखते हुए वित्त विभाग ने निर्देश दिए हैं कि केंद्रीय क्षेत्रीय एवं केंद्र प्रवर्तित योजनाओं में अब केंद्रांश की राशि प्राप्त होने के बाद ही राज्य बजट में संबंधित योजना के राज्यांश का उपयोग किया जाए।केंद्र सरकार को भेजेंगे प्रस्तावकेंद्रांश मिलने की उम्मीद में राज्य के बजट से अग्रिम खर्च नहीं किया जाएगा। इतना ही नहीं विभागों की जिम्मेदारी रहेगी कि वे प्रतिपूर्ति श्रेणी की योजनाओं में जैसे ही आवश्यक व्यय हो, भारत सरकार के संबंधित मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाए।केंद्रीय योजनाओं की राशि से संबंधित उपयोगिता प्रमाण-पत्र भी समय पर भेजे जाएं। यदि से लंबित हैं तो उन्हें तत्काल भेजें ताकि राशि जारी हो सके। ये ऑनलाइन भेजने होंगे। बजट नियंत्रण अधिकारी बनाएंगे सूचीसभी विभागों के बजट नियंत्रण अधिकारियों से कहा गया है कि वे ऐसी सभी योजनाओं की सूची तैयार करें जिनमें केंद्रांश की राशि अपेक्षित या लंबित है। इसके बाद संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और नोडल अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय कर लंबित राशि राज्य के पक्ष में जल्द प्राप्त करनी होगी।केंद्रीय राशि की प्राप्ति में अनावश्यक विलंब होने और इसके कारण राज्य के संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की स्थिति में संबंधित विभाग तथा बजट नियंत्रण अधिकारी जिम्मेदार होंगे। recent visitors 3

price of sugar :अचानक क्यों महंगी हो रही चीनी? 65 रुपये किलो तक पहुंचा भाव; आपकी जेब पर क्या होगा असर?

Why is the price of sugar suddenly rising? Rates have reached up to ₹65 per kg; how will it impact your pocket? देश में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। कुछ बाजारों में इसके दाम 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरें हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी बिना आयात शुल्क के मंगाने की अनुमति दी है। दस साल बाद ऐसा होगा जब भारत को चीनी का आयात करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि चीनी के दाम अचानक क्यों बढ़ रहे हैं? क्या देश में चीनी की कमी है या आपूर्ति को लेकर समस्या है? क्या मौसम भी इसकी वजह है? एथेनॉल उत्पादन से चीनी का क्या संबंध है? सरकार का क्या कहना है? भारत ने चीनी का निर्यात क्यों घटाया? भारत में चीनी सबसे ज्यादा कहां होती है? सरकार ने चीनी को नियंत्रित करने के लिए क्या-क्या नीतियां बनाई? सरकार को 10 लाख टन चीनी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी? और त्योहारों से पहले आम आदमी की जेब पर कितना असर पड़ सकता है? आइये जानते हैं… चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?चीनी की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता को लेकर बढ़ता दबाव है। देश में चीनी उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में लगातार एक जैसा नहीं रहा है। कभी उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा तो कभी इसमें गिरावट देखने को मिली। 15 अप्रैल 2026 तक देश में 273.90 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। इस दौरान देशभर में 541 चीनी मिलें चल रही थीं और उन्होंने 2,865.21 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की। गन्ने से चीनी निकलने की औसत दर 9.56 प्रतिशत रही। क्या मौसम भी है वजह?चीनी की कीमतों पर मौसम का असर भी पड़ रहा है। इस साल भारत में मानसून के 11 साल के सबसे निचले स्तर पर रहने का अनुमान जताया गया है। कमजोर बारिश ने गन्ने की बुवाई और फसल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही अल नीनो का खतरा भी बना हुआ है।विशेषज्ञ राहिल शेख, प्रबंध निदेशक, एमईआईआर कमोडिटीज इंडिया के मुताबिक भारत में चीनी की आपूर्ति पहले से दबाव में है और अब अल नीनो एक बड़ा जोखिम बनकर उभर रहा है। अगर अनुमान के मुताबिक बारिश कमजोर रहती है तो गन्ने की बुवाई प्रभावित होगी और भारत कम से कम अगले तीन साल तक चीनी के निर्यात बाजार से बाहर रह सकता है। त्योहारों का मौसम क्यों बढ़ा रहा है चिंता?चीनी की मांग पूरे साल रहती है, लेकिन त्योहारों के दौरान इसमें खास बढ़ोतरी होती है। रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के समय मिठाई की बिक्री काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा बिस्किट, टॉफी, शीतल पेय और कई खाद्य उत्पादों में भी चीनी का इस्तेमाल होता है। ऐसे समय में अगर बाजार में पहले से ही आपूर्ति का दबाव हो और मांग अचानक बढ़ जाए तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। देश में चीनी सबसे ज्यादा कहां बनती है?भारत के चीनी उत्पादन में तीन राज्यों की सबसे बड़ी भूमिका है महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक। ये तीनों राज्य मिलकर देश के कुल चीनी उत्पादन में करीब 87.48 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र में 89.80 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश में 65.60 लाख मीट्रिक टन और कर्नाटक में 41.70 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ।इसलिए इन राज्यों में गन्ने की पैदावार, बारिश और चीनी मिलों का उत्पादन पूरे देश के बाजार को प्रभावित कर सकता है। अगर इन प्रमुख राज्यों में फसल प्रभावित होती है तो इसका असर देशभर में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है। क्या एथेनॉल से भी चीनी के उत्पादन का संबंध है?चीनी की मौजूदा कहानी में एथेनॉल एक महत्वपूर्ण कड़ी है। केंद्र सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लगातार बढ़ावा दे रही है। इसके पीछे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना और किसानों की आय बढ़ाना जैसे उद्देश्य हैं। एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 में देश में एथेनॉल की संचयी आपूर्ति 800 करोड़ लीटर का आंकड़ा पार कर गई है। अखिल भारतीय आसवक संघ के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में कुल मासिक एथेनॉल आपूर्ति में करीब 76 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित कच्चे माल का था। वहीं, गन्ने पर आधारित कच्चे माल से जुलाई में 22 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई, जबकि जून में यह 28 करोड़ लीटर थी। जुलाई में कुल एथेनॉल आपूर्ति में गन्ने पर आधारित कच्चे माल की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह करीब 27 प्रतिशत थी। विशेषज्ञों की चेतावनी क्या है?विशेषज्ञों की चिंता मुख्य रूप से दो चीजों को लेकर है, मौसम और घरेलू आपूर्ति। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में चीनी की आपूर्ति पहले से दबाव में है। अगर बारिश कमजोर रहती है तो गन्ने की अगली फसल प्रभावित हो सकती है। इसका असर आने वाले चीनी मौसम में उत्पादन पर पड़ सकता है। इसके अलावा एथेनॉल नीति को लेकर भी संतुलन जरूरी है। सरकार के लिए एथेनॉल उत्पादन बढ़ाना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन खाद्य जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार का क्या कहना है?दावा किया जा रहा था कि पेट्रोल में मिश्रण के लिए चीनी को एथेनॉल उत्पादन की ओर डाइवर्ट किए जाने से घरेलू बाजार में इसकी कीमतें बढ़ रही हैं। हालांकि, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कीमतों में बढ़ोतरी का संबंध एथेनॉल से नहीं, बल्कि कम घरेलू उत्पादन, आगामी त्योहारी सीजन की मांग और जमाखोरी से है। साथ ही गन्ने की फसल को रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी से नुकसान हुआ। इस सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों का शुरुआती अनुमान करीब 343 एलएमटी था। सरकार ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया है कि एथेनॉल कार्यक्रम पर महंगाई का दोष मढ़ना पूरी तरह गलत है। आंकड़ों के मुताबिक, एथेनॉल उत्पादन के लिए डाइवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 सीजन के 12 प्रतिशत से … Read more

Gen-G को साधने भाजपा, सरकार और संघ की नई रणनीति, स्कूल-कॉलेज से सोशल मीडिया तक बढ़ेगा संवाद

BJP, Government, and Sangh’s new strategy to engage Gen-G: Outreach to expand from schools and colleges to social media. मध्य प्रदेश में युवा वोटरों, खासकर जेन-जी और जेन-अल्फा तक पहुंच बनाने के लिए भाजपा, सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। युवाओं से सीधे संवाद के साथ सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वाले युवाओं और इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। युवा पीढ़ी के बदलते रुझान और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राजनीतिक संगठन अब पारंपरिक बैठकों के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बना रहे हैं। इसका मकसद युवाओं की समस्याओं, उनकी पसंद और भविष्य से जुड़ी अपेक्षाओं को समझना भी है। बता दें मध्य प्रदेश में 1.40 करोड़ से ज्यादा 18 से 29 साल के वोटर्स हैं। यह वोटर्स आगामी नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। इसको लेकर ही राजनीति पार्टियों ने युवाओं को साधने पर अपना फोकस बढ़ा दिया हैं। स्कूल-कॉलेज और छात्रावासों तक पहुंचेगा युवा मोर्चाभाजपा संगठन ने युवाओं से संपर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी अपने युवा मोर्चे को दी है। इसके तहत स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों में संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंत्री, सांसद और विधायक भी शैक्षणिक संस्थानों में जाकर युवाओं से संवाद करेंगे। इन कार्यक्रमों में केवल सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के बजाय युवाओं की समस्याओं और रोजगार, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण जैसे मुद्दों पर बातचीत करने की कोशिश होगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर भी फोकसभाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जिलों में सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा इन्फ्लुएंसर्स से संवाद करेंगे। इसके लिए अलग-अलग जिलों में कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी नई पीढ़ी के साथ सीधे संवाद की तैयारी की है। शुरुआती चरण में सितंबर में भोपाल में संघ के पदाधिकारी युवाओं से संवाद करेंगे। एआई और स्किल ट्रेनिंग को भी बनाया आधारसरकार अगले वर्ष को युवा वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा कर चुकी है। साथ ही युवाओं को जोड़ने के लिए कौशल विकास और नई तकनीक से जुड़े कार्यक्रमों पर जोर दिया जा रहा है। इसमें एआई स्किल ट्रेनिंग, ऑनलाइन कोचिंग और रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण प्रमुख हैं। भाजपा प्रवक्ता मिलन भार्गव ने कहा कि भाजपा युवाओं के साथ लगातार संवाद करती है। इसमें अब तेजी लाई गई हैं। भाजपा ही ऐसी पार्टी है, जो हर वर्ग को साध लेकर चलने का काम कर रही हैं। recent visitors 5