जबलपुर शहर में यातायात नियंत्रित बना बीमारी, चार चौराहों पर नए सिग्नल लगाने की तैयारी

Traffic management has become a problem in Jabalpur city; preparations are underway to install new signals at four intersections. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। जबलपुर शहर में यातायात नियंत्रित करने के लिए 23 प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल लगे हैं, इसके बावजूद लगभग हर प्रमुख चौराहे पर जाम की स्थिति बन रही है। कहीं सड़क किनारे अतिक्रमण और ठेले-टपरे यातायात की राह रोक रहे हैं, तो कहीं बेतरतीब पार्किंग के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। सिग्नल होने के बावजूद कई वाहन चालक लाल बत्ती की अनदेखी कर निकल जाते हैं। इससे यातायात व्यवस्था बिगड़ने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। नियम तोड़ने वालों के चालान भी किए जा रहे हैं, लेकिन सड़क पर व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बरकरार है। यातायात पुलिस के दस्तावेज के अनुसार, नगर निगम ने रानीताल चौक, रामपुर चौक, एकता चौक और बलदेवबाग चौक पर नए ट्रैफिक सिग्नल लगाने का प्रस्ताव दिया है। दूसरी ओर, दमोहनाका और दीनदयाल चौक पर रोटरी होने के कारण सिग्नल लगाने में बाधा है। इन स्थानों पर यातायात सुचारु रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत है। हालांकि, नए सिग्नल लगाने के प्रस्तावों पर अब तक की कार्रवाई और स्थापना की समयसीमा नहीं है। सिर्फ सिग्नल लगाने से नहीं सुधरेगी व्यवस्थाचौराहों पर यातायात सुधारने के लिए नए सिग्नल लगाने के साथ मौजूदा व्यवस्थाओं को भी प्रभावी बनाना जरूरी है। सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने, ठेले-टपरों को निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित करने, अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करने और लाल बत्ती तोड़ने वालों की निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। चौराहों की बनावट, डिवाइडर, सड़क संकेतक और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्तों की समीक्षा भी जरूरी है। लाल बत्ती तोड़कर निकलते वाहन, बढ़ रहे चालानट्रैफिक सिग्नल लगे होने का उद्देश्य वाहनों की आवाजाही को निर्धारित क्रम में संचालित करना है, लेकिन नियमों की अनदेखी इस व्यवस्था को कमजोर कर रही है। वाहन चालक लाल बत्ती होने के बावजूद चौराहे से निकलने का प्रयास करते हैं। इससे दूसरे मार्ग से आने वाले वाहनों के साथ टकराव का खतरा बढ़ जाता है। दमोहनाका और दीनदयाल चौक पर बड़ी चुनौतीशहर के दमोहनाका और दीनदयाल चौक पर रोटरी होने के कारण ट्रैफिक सिग्नल स्थापित करने में दिक्कत है। ऐसे में इन चौराहों पर सड़क की बनावट, यातायात संकेतक, लेन अनुशासन और पुलिस की निगरानी के जरिए यातायात नियंत्रित करने की जरूरत है। नए चौराहों में सिग्नल लगाने के लिए यातायात विभाग ने प्रस्ताव बनाया है लेकिन यह कब तक लगेंगे यह साफ नहीं है। इन चार चौराहों पर नए सिग्नल प्रस्तावितरानीताल चौक : यातायात को नियंत्रित करने के लिए सिग्नल लगाने का प्रस्ताव।रामपुर चौक : वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित करने के लिए नई व्यवस्था की जरूरत।एकता चौक : यातायात प्रबंधन के लिए सिग्नल लगाने की योजना प्रस्तावित।बलदेवबाग चौक : चौराहे पर यातायात नियंत्रण के लिए नए सिग्नल का प्रस्ताव।सिग्नल लगे, लेकिन सड़क पर व्यवस्था नदारद जबलपुर शहर के गोहलपुर चौराहा, ब्लूम चौक, नागरथ चौक, रद्दी चौकी, घमापुर चौक, तीनपत्ती चौक, लेबर चौक, मढ़ाताल तिराहा, नौदरा ब्रिज, उखरी तिराहा, पेंटीनाका, आधारताल तिराहा, अहिंसा चौक, दर्शन तिराहा, सगड़ा तिराहा और जबलपुर अस्पताल तिराहा सहित 23 प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल लगे हैं। इसके बावजूद कई चौराहों पर यातायात का दबाव बढ़ने पर जाम की स्थिति बन जाती है। इसकी एक बड़ी वजह सड़क किनारे होने वाले अतिक्रमण और अवैध कब्जे हैं। चौराहों के आसपास ठेले-टपरे लगने और वाहनों की बेतरतीब पार्किंग से सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम हो जाती है। ऐसे में सिग्नल हरा होने के बाद भी वाहन आसानी से आगे नहीं बढ़ पाते। कुछ स्थानों पर सड़क की बनावट और वाहनों के अनियंत्रित आवागमन से भी परेशानी बढ़ती है। recent visitors 33

बुधनी वन क्षेत्र में आदिवासियों के मकान तोड़े जाने के मामले में कलेक्टर ने सीएम को सौंपी रिपोर्ट

The Collector has submitted a report to the Chief Minister regarding the demolition of tribal homes in the Budhni forest area. भोपाल। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के बुधनी वन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के दौरान आदिवासियों के मकान तोड़े जाने के मामले में जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को भेजी इस रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे जिलों से आए लोगों ने सागौन के पौधे काटकर वन भूमि पर झोपड़ियां बना लीं थीं।बता दें कि इसी मामले में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके बेटे कार्तिकेय सिंह प्रभावित परिवारों के धरने में शामिल हुए थे। मंगलवार को तीसरे दिन भी वन विकास निगम के डिपो के बाहर यह धरना-प्रदर्शन जारी रहा।रिपोर्ट के मुताबिक, भैरूंदा तहसील के लाड़कुई परिक्षेत्र की कोसमी बीट स्थित रिजर्व फारेस्ट के कंपार्टमेंट 426 में वन विकास निगम की 31.48 हेक्टेयर भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई।वर्ष 2020 में 186.960 हेक्टेयर वन भूमि सामान्य वनमंडल से वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल को हस्तांतरित की गई थी। निगम ने 2021 में इसके 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3,37,500 सागौन के पौधे लगाए थे। इनमें से 78,700 पौधे काटकर 31.48 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा किया गया। गूगल अर्थ की टाइमलाइन तस्वीरों के अनुसार, 2021 तक पूरा कंपार्टमेंट खाली था।वर्ष 2022 में सुनील (पिता शैतान) और अन्य 11 लोगों ने पौधारोपण नष्ट कर अस्थायी झोपड़ियां बनाईं और खेती के लिए 31.48 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा किया।कलेक्टर की रिपोर्ट में कहा गया है कि 11 अक्टूबर को कार्रवाई के दौरान हटाए गए सभी नौ कब्जाधारियों के सिंहपुर और हबीबनगर में पहले से पक्के मकान, मकान नंबर और वोटर आइडी कार्ड दर्ज हैं।भैरूंदा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि भूमिहीन होने का दावा करने वाले इन लोगों के मूल गांवों में पक्के मकान हैं। कार्रवाई में नौ झोपड़ियां हटाई गईं और अवैध कुएं को मिट्टी-मुरम से भरकर पूरी प्रक्रिया की ड्रोन वीडियोग्राफी कराई गई।केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे और मुख्यमंत्री तथा मुख्य सचिव को फोन पर जानकारी दी थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए। सरकार की रिपोर्ट पूरी तरह गलत है। हम वर्षों से यहां रह रहे हैं और हमारे पास सभी दस्तावेज व प्रमाण हैं। सरकार आदिवासी गरीब भाई-बहनों को परेशान कर जबरन जमीन से बेदखल कर रही है। हम भी सारे प्रमाण उपलब्ध कराएंगे।— रमेश बारेला, बारेला समाज के अध्यक्ष recent visitors 22

हेड कॉन्स्टेबल निकला 6.26 करोड़ की संपत्ति का मालिक, 15 ठिकानों पर लोकायुक्त छापा

Head Constable found to own assets worth ₹6.26 crore; Lokayukta raids 15 locations. इंदौर । इंदौर और देवास जिलों में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार सुबह एक पुलिसकर्मी के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। यह कार्रवाई इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई है। लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने सुबह छह 6 बजे से देवास और इंदौर में स्थित कुल 15 ठिकानों पर एक साथ सर्चिंग अभियान चलाया। करोड़ों की संपत्ति और अनुपातहीन आय का खुलासाशुरुआती जांच के दौरान आरोपी हेड कॉन्स्टेबल के पास लगभग 6.26 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति होने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार, यह संपत्ति उसकी वैध आय से करीब 223 फीसदी अधिक है। एसपी राजेश सहाय ने जानकारी दी कि आरोपी को वेतन के रूप में लगभग 75 लाख रुपये की आय होने का अनुमान है और अन्य सभी स्रोतों को मिलाकर उसकी कुल वैध आय करीब 1.93 करोड़ रुपये आंकी गई है। पुलिस विभाग की आड़ में प्रभाव का दुरुपयोगजांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी फिरोज खान पुलिस विभाग में अपने पद का धौंस जमाकर देवास क्षेत्र के विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में अवैध रूप से हस्तक्षेप करता था। उस पर अन्य लोगों के जरिए जमीनों की खरीद-फरोख्त करने, बेहिसाब संपत्तियों में भारी निवेश करने, परिवार के सदस्यों के अलावा एक परिचित महिला के नाम पर संपत्तियां खरीदने, कई वाहन रखने और लकड़ी का अवैध कारोबार करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। फर्मों के जरिए काले धन का लेन-देन और बेनामी निवेशलोकायुक्त की प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी की मां और पत्नी के नाम पर साहिल ट्रेडिंग कंपनी नाम से एक फर्म संचालित है, जिसके बैंक खातों में करोड़ों रुपये का भारी-भरकम लेन-देन हुआ है। इसके अलावा, आरोपी की परिचित रोशनी वर्मा द्वारा रोशनी सेल्स एंड सर्विस नाम से दूसरी फर्म चलाए जाने की जानकारी भी मिली है। जमीनों की खरीद में इन सभी की संदिग्ध भूमिका सामने आने के बाद लोकायुक्त ने इन्हें भी मामले में आरोपी बनाया है। साथ ही, फिरोज खान ने रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट फर्म के माध्यम से रियल एस्टेट सेक्टर में भी भारी निवेश किया है। सांवेर में जमीन के सौदे और ठिकानों पर दबिशजांच के दौरान सांवेर तहसील के ग्राम गुरान में लगभग 21.75 बीघा कृषि भूमि से जुड़ा एक संदिग्ध मामला भी प्रकाश में आया है। इस जमीन को लेकर शिकायतकर्ता के पुत्र और पिता के बीच विवाद चल रहा था, जिसका फायदा उठाकर आरोपी ने अपनी परिचित रोशनी वर्मा के नाम पर कृषि भूमि का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करवा लिया था। लोकायुक्त की टीम इस सौदे के दस्तावेजों की गहराई से जांच कर रही है। वर्तमान में देवास में 11 और इंदौर में 4 ठिकानों पर आवासीय मकान, फ्लैट, कृषि भूमि, प्लॉट और व्यावसायिक संपत्तियों की तलाशी जारी है। इस पूरी कार्रवाई में 8 अधिकारियों की टीम बैंक खातों, निवेश के कागजातों और अन्य वित्तीय साक्ष्यों को खंगालने में जुटी हुई है। recent visitors 57

जबलपुर: कालीमठ गरबा महोत्सव का भव्य समापन, गरबा की धुन पर झूमीं महिलाएं और बच्चे

Jabalpur: Kalimath Garba Festival concludes with grand celebrations; women and children dance to the tunes of Garba. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। कालीमठ आश्रम, मदन महल में आयोजित कालीमठ गरबा महोत्सव का आज, 12 अक्टूबर को भव्य समापन हुआ। चार दिवसीय गरबा वर्कशॉप के बाद आयोजित ग्रैंड फिनाले गरबा नाइट में महिलाओं और बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे प्रतिभागियों ने गरबा की मनमोहक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में उत्सव का माहौल बना दिया। महोत्सव का आयोजन विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के लिए किया गया था। फ्लेक के अनुसार, गरबा वर्कशॉप 8 से 11 अक्टूबर तक आयोजित हुई, जिसमें प्रतिभागियों के लिए अलग-अलग बैच निर्धारित किए गए थे। इसके बाद सोमवार, 12 अक्टूबर को शाम 7 बजे से रात 11 बजे तक ग्रैंड फिनाले गरबा नाइट आयोजित की गई। कार्यक्रम में गरबा और पारंपरिक नृत्य के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी कला और उत्साह प्रदर्शित करने का अवसर मिला। आयोजन का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ना तथा सामूहिक उत्सव के लिए मंच उपलब्ध कराना रहा। स्थान: कालीमठ आश्रम, मदन महल, जबलपुर। कालीमठ गरबा महोत्सव का समापन उत्साह और सांस्कृतिक रंगों के बीच हुआ। आयोजकों की ओर से प्रतिभागियों की सहभागिता के साथ इस आयोजन को संपन्न किया गया। recent visitors 53