ग्राम घटेरा में आदिवासी चालक पर हमला: संदीप यादव और उसके भाइयों पर SC/ST एक्ट में FIR, पीड़ित ने SP से सुरक्षा मांगी

Attack on tribal driver in Ghatera village: FIR registered against Sandeep Yadav and his brothers under SC/ST Act, victim seeks protection from SP विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। थाना कटंगी क्षेत्र के ग्राम घटेरा में संदीप यादव और उसके दो भाइयों मधुसूदन यादव एवं उपेन्द्र यादव के विरुद्ध एक आदिवासी वाहन चालक पर जानलेवा हमला करने और जातिगत उत्पीड़न का मामला दर्ज हुआ है। पीड़ित बहादुर गोंड के अनुसार- 25 सितंबर को रास्ता मांगने की बात को लेकर संदीप यादव अपने भाइयों के साथ उसके घर आया। जातिसूचक गालियां देते हुए गाली-गलौज की। मना करने पर संदीप यादव ने लकड़ी के डंडे से और उसके भाइयों मधुसूदन एवं उपेन्द्र ने हाथ-मुक्कों से मारपीट की, जिससे उसे गंभीर मूंदी चोटें आईं। बीच-बचाव पत्नी रमा बाई, रोहित यादव और गोकुल गौड़ ने किया। आरोपियों ने जाते-जाते जान से मारने की धमकी भी दी। पुलिस के अनुसार – इस मामले में थाना कटंगी में पीड़ित की रिपोर्ट पर FIR क्र. 0584/2026 दिनांक 25.09.2026 धारा 3(1)(घ), 3(1)(ध), 3(2)(va) SC/ST एक्ट एवं BNS की धारा 115(2), 296(a), 3(5), 351(3) के तहत दर्ज कर विवेचना में लिया गया है। इधर, पीड़ित का आरोप है कि संदीप यादव और उसके भाइयों के राजनीतिक दबाव के कारण थाने में ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है और समझौते के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसी कारण पीड़ित ने आज SP जबलपुर को आवेदन देकर वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच, MLC, गवाहों के कथन और परिवार की सुरक्षा की मांग की है। recent visitors 30

बरगी बांध के खोले जाएंगे 9 गेट: नर्मदा नदी में छोड़ा जाएगा 2522 क्यूसेक पानी, तटीय इलाकों में अलर्ट; 6-8 फीट तक जलस्तर बढ़ने की संभावना

9 gates of Bargi Dam to be opened: 2,522 cusecs of water to be released into the Narmada River; alert issued for riparian areas; water level likely to rise by 6–8 feet. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। रानी अवन्ति बाई परियोजना सागर बरगी बांध में जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण बांध में पानी की आवक बढ़ गई है। बांध के जलस्तर को नियंत्रित और स्थिर रखने के लिए शनिवार 26 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे से 9 जलद्वार खोले जाएंगे। इन गेटों को औसतन 1.83 मीटर की ऊंचाई तक खोला जाएगा और करीब 2522 क्यूसेक पानी मां नर्मदा नदी में छोड़ा जाएगा। जलस्तर में 6-8 फीट तक वृद्धि की संभावनाजल निकासी बढ़ने के बाद नर्मदा के घाटों पर जलस्तर में मौजूदा स्तर की तुलना में करीब 6 से 8 फीट तक की वृद्धि होने की संभावना जताई गई है। इससे पहले शुक्रवार 25 सितंबर की शाम 6 बजे बरगी बांध के 5 जलद्वारों से 780 क्यूसेक पानी नर्मदा में छोड़ा गया था। इसके बाद नर्मदा के घाटों पर जलस्तर में करीब 3 से 4 फीट की वृद्धि हुई है अब बांध में पानी की बढ़ती आवक को देखते हुए जल निकासी और बढ़ाई जा रही है। बारिश के बाद बढ़ी पानी की आवकबरगी बांध के जलग्रहण क्षेत्र में शुक्रवार दिन और रात के दौरान हुई बारिश के बाद बांध में पानी की आवक लगातार बढ़ रही है। बांध की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल निकासी बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। प्रबंधन के अनुसार बांध के जलस्तर को नियंत्रित रखना जरूरी है जिसके चलते 9 जलद्वारों से पानी छोड़ा जाएगा। 2522 क्यूसेक पानी नर्मदा में छोड़ा जाएगाशनिवार सुबह 11 बजे से बांध के 9 जलद्वार औसतन 1.83 मीटर तक खोले जाएंगे। इनसे करीब 2522 क्यूसेक पानी नर्मदा नदी में प्रवाहित किया जाएगा। इससे नर्मदा के घाटों और तटीय इलाकों में जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है मौजूदा जलस्तर की तुलना में करीब 6 से 8 फीट की बढ़ोतरी का अनुमान है। पानी की आवक के अनुसार बदल सकती है निकासीबांध प्रबंधन ने बताया कि जलग्रहण क्षेत्र से पानी की आवक लगातार बदल रही है। ऐसे में नर्मदा में छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा भी परिस्थिति के अनुसार बदली जा सकती है जरूरत पड़ने पर जल निकासी की मात्रा को कम या बढ़ाया जा सकता है। recent visitors 24

जबलपुर के गणेश पंडाल का कथित अश्लील डांस वीडियो वायरल, हिंदू धर्म सेना ने उठाए सवाल

Video of alleged obscene dance at a Jabalpur Ganesh pandal goes viral; Hindu Dharma Sena raises questions. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर। जबलपुर में सोशल मीडिया पर गणेश पांडाल में कुछ युवकों द्वारा अश्लील डांस किए जाने का एक वीडियो वायरल हो रहा है। यह वीडियो शुभम बैरागी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इस कथित पोस्ट और वीडियो को लेकर हिंदू धर्म सेना ने पुलिस से जांच और कार्रवाई की मांग की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष नीरज राजपूत ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपा है। जिसमें बताया गया कि शुभम बैरागी नामक व्यक्ति की सोशल मीडिया आईडी से संबंधित यह वीडियो शेयर करने की जानकारी सामने आई है। मामला गौर चौकी के पास गणेश प्रतिमा पंडाल में कथित अश्लील डांस का वीडियो वायरल होने का है। पंडाल में फिल्मी गानों पर आपत्तिजनक डांस और कथित अश्लील गानों के वीडियो ने हिंदू संगठनों में आक्रोश पैदा कर दिया। एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाएसंगठन ने पुलिस से सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो की सत्यता, संदर्भ तथा डिजिटल साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जांच में यदि धार्मिक भावनाओं को आहत करने या किसी कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। साथ ही संबंधित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई। संगठन ने साफ चेतावनी दी है कि यदि मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। recent visitors 80

जबलपुर: बिल्डर्स से लेकर किसानों तक की टेंशन बढ़ी, 62 गांवों के भविष्य का फैसला करेगा नया मास्टर प्लान

Jabalpur: Tensions rise for everyone from builders to farmers, as a new master plan will determine the future of 62 villages. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तव  जबलपुर। जबलपुर के प्रस्तावित मास्टर प्लान 2041 को लेकर एक बार फिर जमीन के उपयोग को लेकर हलचल तेज हो गई है। वर्ष 2022 में नियोजन क्षेत्र का दायरा बढ़ाकर 62 गांवों को शामिल किए जाने के बाद अब इन क्षेत्रों के संभावित लैंड यूज को लेकर चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। पाटन, जबलपुर और पनागर तहसील के कुछ गांवों में बड़े हिस्से को अंतिम योजना में कृषि या ग्रीन बेल्ट के रूप में रखे जाने की संभावना चर्चा में है। इससे जमीन मालिकों और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों की निगाहें अंतिम लैंड यूज मैप पर टिक गई हैं। हालांकि, अभी इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। संबंधित गांवों का वास्तविक भू-उपयोग मास्टर प्लान की प्रक्रिया पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी होने वाली अंतिम अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा। इन गांवों की जमीन पर सबसे ज्यादा नजर पाटन तहसील के नुहारी, बिनेकी और टिमरी, जबलपुर तहसील के खमरिया, पिपरिया कला, नौमखेड़ा और कोसमघाट तथा पनागर तहसील के पिपरिया, मगेला, पटना और बरौदा सहित कुछ गांवों को लेकर भू-उपयोग की चर्चाएं अधिक हैं। यदि इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा कृषि या ग्रीन बेल्ट में निर्धारित होता है तो वहां आवासीय कॉलोनी, टाउनशिप अथवा अन्य गैर-कृषि विकास भू-उपयोग नियमों और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के अधीन होगा। इसके विपरीत आवासीय या मिश्रित उपयोग वाले क्षेत्रों में नियोजित विकास की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। 2022 में बढ़ा था नियोजन क्षेत्र शहर के अनियोजित विस्तार को नियंत्रित करने और भविष्य के विकास को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से वर्ष 2022 में जबलपुर के नियोजन क्षेत्र का विस्तार किया गया था। इसमें 62 गांवों को शामिल किया गया। इसके साथ इन क्षेत्रों में आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक, परिवहन और हरित क्षेत्र के नियोजन की प्रक्रिया नगर तथा ग्राम निवेश व्यवस्था के दायरे में आ गई। अब जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अंतिम योजना में उनकी भूमि किस श्रेणी में आती है। यही स्थिति भविष्य में जमीन के विकास और उपयोग की दिशा तय करेगी धारा 16 के तहत विकास योजना अहम मध्यप्रदेश नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 के तहत विकास योजना के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के नियोजित भू-उपयोग का निर्धारण किया जाता है। ऐसे में 62 गांवों के लिए तैयार किए जा रहे अंतिम लैंड यूज मैप को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जमीन मालिकों और डेवलपर्स की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि प्रस्तावित उपयोग के आधार पर भूमि पर भविष्य की विकास गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। खासकर जिन क्षेत्रों को शहरी विस्तार की संभावनाओं के आधार पर निवेश योग्य माना जा रहा है, वहां अंतिम भू-उपयोग का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा। डेवलपर्स को भी अंतिम नक्शे का इंतजार 62 गांवों के नियोजन क्षेत्र में आने के बाद रियल एस्टेट क्षेत्र की गतिविधियां भी इस बात पर निर्भर करेंगी कि किन इलाकों को आवासीय, मिश्रित, कृषि या हरित क्षेत्र में रखा जाता है। क्रेडाई सहित रियल উভয় एस्टेट क्षेत्र से जुड़े संगठन भी मास्टर प्लान को स्पष्ट रूप से लागू करने और भू-उपयोग की स्थिति जल्द सामने लाने की मांग करते रहे हैं। देरी ने बढ़ाया असमंजस मास्टर प्लान 2041 की प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में है। सितंबर 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट में भी 62 गांवों को नियोजन क्षेत्र में शामिल किए जाने, योजना के मसौदा स्तर पर होने तथा आपत्तियों और सुझावों की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया था। अंतिम स्वरूप सामने नहीं आने से जमीन मालिकों के लिए यह तय करना मुश्किल बना हुआ है कि भविष्य में उनकी भूमि का नियोजित उपयोग क्या होगा।जबलपुर के विस्तार की दृष्टि से 62 गांवों का नियोजन क्षेत्र में शामिल होना महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका वास्तविक असर तभी स्पष्ट होगा, जब अंतिम मास्टर प्लान और लैंड यूज मैप सामने आएगा। फिलहाल कृषि या ग्रीन बेल्ट से संबंधित चर्चाओं को संभावित प्रस्ताव से अधिक नहीं माना जा सकता। इस संबंध में असिस्टेंट डायरेक्टर टीएनसीपी विपुल माहुले ने कहा कि फिलहाल मास्टर प्लान से जुड़ी जानकारी उनके पास है यह कार्य शासन स्तर पर होना है। recent visitors 29

MP के इस शहर में BPL राशन का बड़ा फर्जीवाड़ा, कंपनी के डायरेक्टर समेत 4998 संपन्न परिवार मुफ्त राशन लेते पकड़े गए

Major BPL ration scam in this MP city; 4,998 affluent families—including a company director—caught availing free rations. विशेष संवाददाता जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर। गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वालों के लिए बनी राशन योजना में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। जिले में पांच हजार से अधिक ऐसे संपन्न परिवार पकड़े गए हैं, जिनकी सालाना आय छह लाख रुपये से अधिक होने के बावजूद वे सालों से सरकारी राशन डकार रहे थे। प्रशासन ने अब सख्ती दिखाते हुए इन सभी अपात्र लोगों के कार्ड निरस्त कर दिए हैं और उन्हें नोटिस थमाकर जवाब तलब किया है। लखपति और कंपनी डायरेक्टर भी ले रहे थे मुफ्त राशनजांच के दौरान जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। करीब 4,998 परिवारों की वार्षिक आमदनी छह लाख रुपये से ज्यादा पाई गई है। हद तो तब हो गई जब 525 ऐसे परिवारों की पहचान हुई जिनके सदस्य बाकायदा पंजीकृत कंपनियों में डायरेक्टर या अन्य ऊंचे पदों पर काबिज हैं। इसके अलावा 40 से 45 परिवार ऐसे भी मिले जो सालाना 25 लाख रुपये से अधिक कमाते हैं और अपने व्यापार का जीएसटी (GST) तक भरते हैं, लेकिन फिर भी वे गरीबी रेखा के कार्ड का फायदा उठा रहे थे।एसडीएम के सामने पेश होकर देनी होगी सफाईप्रशासन ने अपात्र पाए गए इन सभी हितग्राहियों के नाम आधिकारिक पोर्टल से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। नोटिस मिलने के बाद इन लोगों को एसडीएम (SDM) के सामने पेश होना होगा। उन्हें यह साबित करना होगा कि उन्होंने किस आधार पर अब तक बीपीएल कार्ड का इस्तेमाल किया, साथ ही अपनी वर्तमान आय से जुड़े पुख्ता दस्तावेज भी दिखाने होंगे। जवाब संतोषजनक न मिलने पर प्रशासन आगे की दंडात्मक कार्रवाई करेगा। केंद्र के निर्देश पर अगस्त 2025 से चल रही थी जांचफर्जी कार्डधारकों को बाहर करने का यह अभियान केंद्र सरकार के निर्देशों पर अगस्त 2025 में शुरू किया गया था। इस सर्वे में उन लोगों को चिह्नित किया गया, जिनकी आर्थिक स्थिति बीते वर्षों में सुधर गई, जिन्हें अच्छी नौकरियां मिल गईं या जिनका कारोबार चल पड़ा, लेकिन उन्होंने खुद आगे आकर अपना नाम बीपीएल सूची से नहीं कटवाया। डिप्टी कलेक्टर आर.एस. मरावी के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर अपात्रों के नाम विलोपित कर दिए गए हैं और इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जा रही है। शासन के निर्देश के बाद ही इनसे वसूली या अन्य कार्रवाई को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। प्रशासन के मुताबिक वर्ष 1998 के बाद से समय-समय पर सर्वे किए जाते रहे हैं, इसके बावजूद अपात्र लोगों के नाम सूची में बने रहे।पात्रों के नाम कटने की शिकायतों पर भी नजरइस बड़ी कार्रवाई के बीच कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां कथित तौर पर वास्तविक और पात्र बीपीएल परिवारों के नाम भी सूची से काट दिए गए हैं। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है और ऐसे मामलों की दोबारा जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी हकदार गरीब परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे।बता दें कि मौजूदा व्यवस्था के तहत जबलपुर जिले में 1,008 शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के जरिए 3,85,153 राशन कार्डधारी परिवारों (कुल 14,41,765 हितग्राही) को प्रति व्यक्ति 5 किलो प्रतिमाह की दर से राशन बांटा जाता है। recent visitors 21

भू-माफियाओं के हौसले बुलंद: मध्य प्रदेश के एकमात्र यहूदी कब्रिस्तान में तोड़फोड़ और कब्जे पर उठे सवाल

Land mafia emboldened: Questions raised over vandalism and encroachment at Madhya Pradesh’s only Jewish cemetery. विशेष संवाददाता: जितेंद्र श्रीवास्तव जबलपुर। मध्य प्रदेश का एकमात्र यहूदी कब्रिस्तान अब वैश्विक चर्चा में है। जबलपुर स्थित लगभग सौ वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक स्थल पर कथित अतिक्रमण, तोड़फोड़ और भूमि कब्जे के आरोपों का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसी बीच इजरायल में बसे भारतीय मूल के यहूदियों ने भी विरासत बचाने के लिए अपनी सरकार और राजनयिक मिशनों से हस्तक्षेप की मांग की है। इसके साथ ही यह विवाद स्थानीय सीमाओं से निकलकर अंतरराष्ट्रीय महत्व का विषय बन गया है। रानीताल की खामोश जमीन पर दफन इतिहास आज अदालत में संरक्षण की उम्मीद लगाए बैठा है। यह लड़ाई केवल कुछ कब्रों की नहीं, बल्कि उस साझा सांस्कृतिक विरासत की है, जिसने कभी जबलपुर को विविध आस्थाओं का सम्मान करने वाली संस्कारधानी के रूप में पहचान दिलाई है। अब निगाहें हाई कोर्ट की सुनवाई और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यहूदी समुदाय की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता मनीष वर्मा ने बताया कि कब्रिस्तान की सुरक्षा, अतिक्रमण हटाने और विरासत संरक्षण संबंधी याचिका हाई कोर्ट में विचाराधीन है। ब्रिटिश शासनकाल में जबलपुर में करीब 200 यहूदी परिवार रहते थे। उनके अंतिम संस्कार के लिए तत्कालीन जिला प्रशासन ने लगभग पांच हजार वर्गफीट भूमि आवंटित की थी। आज इस परिसर में 100 से अधिक कब्रें हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे यहूदियों की कब्रें भी हैं, जिन्होंने ब्रिटिश भारतीय सेना में सेवा दी थी। आजादी के बाद अधिकांश परिवार इजराइल चले गए और अब शहर में केवल तीन-चार परिवार शेष हैं। उनका आरोप है कि भू-माफिया इस ऐतिहासिक स्थल पर कब्जे की कोशिश कर रहा है। recent visitors 68

जबलपुर में 1.37 करोड़ का अनाज घोटाला बेनकाब, पोर्टल पर फर्जी एंट्री, 5167 क्विंटल गेहूं गायब मिला

Jabalpur: 1.37 crore grain scam uncovered, 5167 quintals of wheat missing after fake entry on portal जबलपुर में वेयरहाउस पर भौतिक सत्यापन के दौरान प्रशासनिक टीम को मिली गड़बड़ी, 10 लोगों के खिलाफ FIR, विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव /अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर : मझौली थाना क्षेत्र स्थित मां अन्नपूर्णा वेयरहाउस पिपरिया में गेहूं उपार्जन से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. जब प्रशासनिक टीम भौतिक सत्यापन के लिए वेयरहाउस पहुंची, तो वहां 5,167 क्विंटल गेहूं कम पाया गया. इस गेहूं की अनुमानित कीमत 1 करोड़ 37 लाख 67 हजार 800 रुपये बताई जा रही है. इसी तरह का एक मामला सिहोरा में भी सामने आया जिसमें सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. पोर्टल पर गलत मात्रा अपलोड की जानकारी के अनुसार, संबंधित उपार्जन केंद्र को मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन द्वारा 92,250 बारदाने उपलब्ध कराए गए थे. जबकि केंद्र पर मात्र 48,347 क्विंटल गेहूं की खरीदी हुई थी. इसके बावजूद खरीदी केंद्र द्वारा पोर्टल पर 96,694 बारदानों के उपयोग की जानकारी अपलोड कर दी गई. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों की योजना पोर्टल पर दर्ज मात्रा के बराबर गेहूं बाहर से खरीदकर वेयरहाउस में रखने और उसके बाद समर्थन मूल्य पर भुगतान प्राप्त करने की थी. हालांकि, इससे पहले ही प्रशासन द्वारा भौतिक सत्यापन कर लिया गया, जिसमें पोर्टल पर दर्ज जानकारी की तुलना में गेहूं कम पाया गया. घाटाले के आरोप में 10 पर FIR मामले की जानकारी मिलते ही जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूर्यकांत शर्मा ने बताया कि, ”जांच के बाद पुलिस ने उपार्जन समिति भूमि ग्राम संगठन की अध्यक्ष रीना लोधी, शुभम बर्मन, मयूरी लोधी, प्रमोद कुमार मिश्र, प्रकाश पांडे, आनंद पांडे, अमन पांडे, आकाश पांडे, अनीता पटेल और रिंकू साहू के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है.” इस मामले की जांच एसडीएम सिहोरा, जिला परियोजना प्रबंधक, जिला आपूर्ति अधिकारी तथा तहसीलदार द्वारा की गई थी. अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा घोटाला एक संगठित समूह द्वारा किसी बड़े सरगना के नेतृत्व में अंजाम दिया गया प्रतीत होता है. इसलिए सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. सिहोरा में भी सामने आई गड़बड़ी लगभग इसी तरह का मामला जबलपुर के सिहोरा में भी सामने आया है. यहां पर भी पोर्टल में गलत जानकारी दी गई. किसानों से ज्यादा पैसा वसूला गया और बाहर जाने की गड़बड़ी की गई. इस मामले में एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा का कहना है कि, ”सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और मामले की जांच की जा रही है.” पहले भी हो चुके हैं गेहूं खरीदे में घोटाले जबलपुर में गेहूं खरीदी घोटाले का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी इस प्रकार की अनियमितताएं सामने आती रही हैं. कई मामलों में बड़े अधिकारियों के तबादले हुए हैं और जिला आपूर्ति अधिकारी तक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है. हालांकि, जानकारों का मानना है कि, गेहूं और धान खरीदी घोटालों में कई प्रभावशाली लोग भी शामिल रहते हैं, लेकिन अक्सर कार्रवाई निचले स्तर के कर्मचारियों तक ही सीमित रह जाती है. recent visitors 78