Stir in the Environment Department; SEIAA Chairperson levels serious allegations against the ACS, writes to the Chief Secretary seeking a CBI probe.
भोपाल । मध्य प्रदेश राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (सिया) के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल को पत्र लिखकर पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) अनिरुद्ध मुखर्जी और सिया के सदस्य सचिव हर्षल पंचोली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चौहान ने इन दोनों अधिकारियों ने आधिकारिक कार्यों को बाधित करने, पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन और गंभीर अनियमितताएं बरतने के आरोप लगाए हैं।
अध्यक्ष ने दोनों आईएएस अधिकारियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने और पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
इंटरनेट बंद करने और स्टाफ को प्रताड़ित करने का आरोप
मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में अध्यक्ष चौहान ने आरोप लगाया है कि दोनों अधिकारियों द्वारा एक सोची-समझी साजिश के तहत प्राधिकरण के काम को ठप किया जा रहा है। उनके अनुसार, अध्यक्ष के स्वयं के कक्ष का इंटरनेट कनेक्शन बंद कर दिया गया और प्राधिकरण का मुख्य पोर्टल पिछले तीन माह से बंद पड़ा है। निष्ठा से काम करने वाले अनुभवी कर्मचारियों को हटाकर अक्षम स्टाफ की तैनाती कर दी गई है।
पत्र में उल्लेख है कि अध्यक्ष के निज सहायक के रूप में जिस पुस्तकालय सहायक को बैठाया गया है, उसे टाइपिंग तक नहीं आती। वहीं भृत्य के रूप में एक ऐसे व्यक्ति को तैनात किया गया है, जो कैंसर पीड़ित है और चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ है। एक साल में 20 से अधिक बार स्टाफ को बदला गया है।
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237 अवैध डीम्ड ईसी जारी करने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर वित्तीय और कानूनी अनियमितता का आरोप पर्यावरण क्लीयरेंस (ईसी) को लेकर लगाया गया है। पत्र में दावा किया गया है कि पर्यावरण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी और तत्कालीन व वर्तमान सदस्य सचिवों ने मिलकर नियमों को ताक पर रखकर 237 डीम्ड ईसी जारी कर दीं।
चौहान ने स्पष्ट किया है कि पर्यावरण कानून में ऐसी किसी डीम्ड ईसी का प्रावधान ही नहीं है और पर्यावरण क्लीयरेंस देने का अधिकार सिर्फ भारत सरकार और सिया को है। प्राधिकरण द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद भी महीनों तक आधिकारिक पत्र जारी नहीं किए जाते।
अध्यक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को अपराध की एक श्रृंखला और बड़ा घोटाला करार देते हुए कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।