झूले से गिरकर बच्चे का पैर फ्रैक्चर, प्राचार्य और प्रबंधन को कोर्ट का नोटिस।

Child’s leg fractured after falling from a swing, court notice to principal and management.

  • 30 अक्टूबर को न्यायालय में हाजिर होकर पक्ष रखने के निर्देश, डेढ़ साल बाद शुरू हुई न्यायालयीन प्रक्रिया।

हरिप्रसाद गोहे 

आमला। स्कूल परिसर में झूले से गिरकर छात्र का पैर फ्रैक्चर होने का मामला करीब डेढ़ साल बाद न्यायालय पहुंचा है। अप्रैल 2025 में हुई इस घटना में पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने पर पीड़ित बच्चे के पिता ने न्यायालय की शरण ली।

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, आमला के न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन प्राचार्य और स्कूल प्रबंधन प्रमुख को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223 के तहत व्यक्तिगत उपस्थिति के नोटिस जारी किए हैं। न्यायालय ने दोनों को आगामी 30 अक्टूबर को न्यायालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

इलाज में खर्च हुए 20 हजार, प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप।

परिवादी पिता के अनुसार हादसे में उनके बच्चे के पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ था, जिसके उपचार में लगभग 20 हजार रुपए का खर्च आया। पिता ने स्कूल प्रबंधन पर बच्चों की सुरक्षा में कथित लापरवाही बरतने और हादसे के बाद उपचार खर्च में अपेक्षित सहयोग नहीं देने का आरोप लगाया है।

बताया गया कि घटना के बाद पुलिस और प्रशासन के समक्ष शिकायत की गई थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने पर पिता ने अधिवक्ता शिवम उपाध्याय के माध्यम से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। अब न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत संबंधित जिम्मेदारों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के नोटिस जारी किए गए हैं।

बच्चों की सुरक्षा स्कूलों की अहम जिम्मेदारी।

निजी स्कूलों की जिम्मेदारी बेहतर शिक्षा देने के साथ बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना भी है। खेल उपकरणों का सुरक्षित रखरखाव, समय-समय पर मेंटेनेंस और बच्चों की उचित निगरानी बेहद जरूरी है। हालांकि इस मामले में लापरवाही की वास्तविक जिम्मेदारी न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही तय होगी। यह घटना स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और हादसों की स्थिति में समय पर उचित कार्रवाई की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

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