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Tuesday, April 7, 2026 3:58 pm

सतना
 मध्य प्रदेश से एक अच्छी खबर आई है। एक घायल गिद्ध को इलाज के बाद जंगल में छोड़ा गया था। अब वह गिद्ध किर्गिस्तान पहुंच गया है। यह गिद्ध पहले सतना में घायल मिला था, जिसके बाद वन विभाग ने उसका इलाज कराया फिर उसे भोपाल के वन विहार में रखा गया। वहां से उसे छोड़ा गया था।

छोड़ने से पहले लगाया गया था ट्रैकर

गिद्ध के शरीर पर जीपीएस ट्रैकर लगाया गया था। इससे पता चला कि वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान होते हुए किर्गिस्तान पहुंच गया है। मध्य प्रदेश सरकार गिद्धों को बचाने के लिए कई काम कर रही है, जिससे इनकी संख्या भी बढ़ रही है।
जनवरी में मिला था घायल

जनवरी महीने में सतना जिले के एक खेत में घायल गिद्ध की सूचना वन विभाग को मिली थी। वन विभाग ने इलाज देने के बाद गिद्ध को बचा लिया। फिर उसे भोपाल के वन विहार के वल्चर कंजर्वेशन सेंटर में भेजा गया। यहां दो महीने तक उसका इलाज और प्रशिक्षण हुआ। 29 मार्च को उसे हलाली डैम क्षेत्र में खुले आकाश में उड़ने के लिए छोड़ दिया गया।

गिद्ध ने बना दिया उड़ने का रिकॉर्ड

इस गिद्ध ने उड़ते ही एक नया रिकॉर्ड बना दिया। यह विदिशा की पहाड़ियों से राजस्थान होते हुए पाकिस्तान और अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ तक पहुंच गया। जीपीएस ट्रैकर से पता चला कि फिलहाल यह गिद्ध किर्गिस्तान में सुरक्षित है। वन्यजीव चिकित्सक डॉ. श्रवण मिश्रा ने बताया कि गिद्ध थोड़ा परेशान था और रास्ता भटक गया था। इलाज के बाद जीपीएस टैगिंग की गई थी। अब उसकी लोकेशन किर्गिस्तान में ट्रैक हो रही है।

वल्चर स्टेट बन रहा मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश को अब 'वल्चर स्टेट' भी कहा जाने लगा है। यहां पन्ना टाइगर रिजर्व से लेकर गांधी सागर तक गिद्धों के लिए अच्छा वातावरण बनाया गया है। केरवा डैम में गिद्ध प्रजनन केंद्र बनाया गया है। यहां से अब तक सैकड़ों गिद्धों को खुले वातावरण में छोड़ा जा चुका है। हाल ही में भोपाल के हलाली जंगल क्षेत्र से छह गिद्धों को छोड़ा गया था। इन पर सौर ऊर्जा से चलने वाले जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं। इन गिद्धों का जन्म केरवा के गिद्ध संवर्धन और प्रजनन केंद्र में हुआ था।

एमपी में अब कितने गिद्ध हैं

2019 में राज्य में 8397 गिद्ध थे। 2024 में इनकी संख्या बढ़कर 10,845 हो गई है। पन्ना क्षेत्र में सबसे ज्यादा गिद्ध हैं। यहां 900 से ज्यादा गिद्ध पाए गए हैं। राज्य में गिद्धों की सात प्रजातियां देखी गई हैं। इनमें चार स्थानीय और तीन प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं। 16 सर्कल के 64 डिवीजन में जो गिनती हुई, उसके मुताबिक आज की तारीख में प्रदेश में 12,981 गिद्ध हैं।

गिद्ध बचाने के लिए सावधानी जरूरी

गिद्धों को बचाने के लिए सावधानी बरतना भी जरूरी है। जानवरों में इस्तेमाल होने वाली 'डायक्लोफेनाक' दवा गिद्धों के लिए खतरनाक है। इस दवा पर रोक लगा दी गई है लेकिन जहरीले भोजन का खतरा अभी भी बना हुआ है। पर्यावरणविद रशीद नूर ने चेतावनी दी है कि 'गौशालाओं और खुले मैदानों में जहरीले इंजेक्शन लगे मृत जानवर अब भी मौजूद हैं। इनके सेवन से गिद्धों की मौत हो सकती है. इसलिए लगातार निगरानी रखना बहुत जरूरी है।'

धरती के सफाई कर्मी कहलाते हैं गिद्ध

गिद्धों को धरती का सफाई कर्मी कहा जाता है। इनका संरक्षण करना बहुत जरूरी है। इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहता है। जब गिद्ध उड़ते हैं, तो उनके साथ जीवन का चक्र भी चलता रहता है। सतना से उठी एक छोटी सी उम्मीद आज किर्गिस्तान तक पहुंच गई है। पन्ना के जंगलों में, सतना के खेतों में, हलाली के आसमान में, हर जगह गिद्ध दिखाई दे रहे हैं।

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