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Friday, June 26, 2026 11:27 am

35 करोड़ का गेहूं सड़ाकर 150 करोड़ का नुकसान, भाजपा सरकार की लापरवाही या संगठित भ्रष्टाचार: जीतू पटवारी

Loss of Rs 150 crore due to rotting of wheat worth Rs 35 crore, negligence of BJP government or organised corruption: Jitu Patwari

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने रायसेन जिले के दिवटिया (नूरगंज) एवं नूरगंज वेयरहाउस में हजारों टन गेहूं सड़ने और उसकी लागत 35 करोड़ रुपए से बढ़कर 150 करोड़ रुपए तक पहुंचने के मामले को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा और आक्रामक हमला बोला है।

पटवारी ने कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि प्रदेश में फैले भ्रष्टाचार, कुप्रबंधन और गैरजिम्मेदार शासन का भयावह उदाहरण है। जिस अनाज को गरीबों के घर तक पहुंचना था, वह वर्षों तक गोदामों में सड़ता रहा और अंतत: जहरीला बन गया। यह केवल अनाज की बबार्दी नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों की खुली लूट है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच समर्थन मूल्य पर खरीदा गया यह गेहूं लगभग 20 हजार टन मात्रा में वेयरहाउस में पड़ा रहा, लेकिन सरकार और संबंधित अधिकारियों ने समय पर इसका उठाव सुनिश्चित नहीं किया। न तो वितरण की कोई ठोस योजना बनाई गई और न ही भंडारण की समुचित व्यवस्था की गई। परिणामस्वरूप, करोड़ों रुपए का अनाज पूरी तरह सड़कर अनुपयोगी हो गया।

पटवारी ने कहा कि इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि 35-36 करोड़ रुपए का गेहूं किराया, मेंटेनेंस, परिवहन और कीटनाशक छिड़काव जैसे खर्चों के कारण बढ़ते-बढ़ते 150 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है या फिर जानबूझकर लागत बढ़ाने और घोटाले को छिपाने का प्रयास?

उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला एक संगठित आर्थिक अपराध की ओर इशारा करता है, जहां भंडारण की आड़ में वर्षों तक अनाज को सड़ने दिया गया और उसके नाम पर लगातार खर्च दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया। यह सीधे-सीधे जनता के टैक्स के पैसे की लूट है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह सिर्फ गेहूं नहीं सड़ा है, यह भाजपा सरकार की नीयत और व्यवस्था सड़ चुकी है। गरीब का हक गोदामों में सड़ रहा है और सत्ता के संरक्षित लोग उससे मुनाफा कमा रहे हैं।

यह घोटाला नहीं, बल्कि जनता के साथ विश्वासघात है। उन्होंने आगे कहा कि कीटनाशकों के अत्यधिक छिड़काव के कारण यह गेहूं अब जहरीला हो चुका है, जिससे बीमारी फैलने का खतरा है। यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ है। यदि समय रहते इस अनाज का उचित वितरण किया जाता, तो लाखों गरीब परिवारों को राहत मिल सकती थी।

पटवारी ने यह भी कहा कि यह घटना मध्यप्रदेश की भंडारण व्यवस्था की पूरी पोल खोलती है। जहां एक ओर किसान अपनी उपज बेचने के लिए संघर्ष करता है, वहीं दूसरी ओर खरीदा गया अनाज वर्षों तक गोदामों में सड़ता रहता है। यह प्रशासनिक असफलता के साथ-साथ नीतिगत विफलता का भी प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करना अत्यंत आवश्यक है। कौन अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार है? किसके आदेश पर अनाज को वर्षों तक रोका गया? क्यों समय पर वितरण नहीं हुआ? इन सभी सवालों का जवाब प्रदेश की जनता मांग रही है।

पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि भाजपा सरकार ने इस गंभीर मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस पार्टी प्रदेशभर में व्यापक जनआंदोलन छेड़ेगी और जनता के हक के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगी। जनता के पैसे की बबार्दी और गरीबों के हक की लूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भाजपा सरकार को हर हाल में जवाब देना होगा और दोषियों को सजा दिलानी होगी।

प्रदेश कांग्रेस की प्रमुख मांगें:

1. इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।

2. जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जाए।

3. 150 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई दोषियों से वसूली जाए।

4. प्रदेश की भंडारण एवं वितरण प्रणाली की समग्र समीक्षा कर सुधार लागू किए जाएं।

5. भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र विकसित किया जाए।

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