Public welfare must be at the centre of poetry: Kumar Suresh
- कविता संवेदनशील ह्रदय के भावों की अभिव्यक्ति है: शाहिदा
- कविता संग्रह ‘मनसुख’ का लोकार्पण
भोपाल। कविता स्वानताय सुखाय भले लिखी जाए, लेकिन जब उसे लोक को अर्पित कर दिया तो फिर वह कवि की नहीं लोक की हो जाती है। कविता के केंद्र में लोक कल्याण का भाव होना आवश्यक है। यह उदगार वरिष्ठ साहित्यकार कुमार सुरेश ने साहित्यकार संदीप नेमा ‘दीप ‘ के प्रकाशित कविता संग्रह ‘मनसुख ‘ के लोकार्पण के दौरान कही।
दुष्यंत कुमार पाण्डुलिपि संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिक्षाविद एवं उपायुक्त केंद्रीय विद्यालय संगठन भोपाल शाहिदा परवीन ने कहा कि कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि भावों की अभिव्यक्ति है। प्रस्तुत संग्रह में जीवन के विविध अनुभवों की झलक कविता के रूप में दिखाई देती है।
इस आयोजन में रचनाकार संदीप नेमा ने अपनी सृजन यात्रा के अनुभव साझा करते हुए संग्रह से कुछ चुनिंदा कविताओं का वाचन किया, जिन्हें उपस्थित श्रोताओं द्वारा खूब सराहा गया। इस पुस्तक पर केंद्रित विमर्श में भाग लेते हुए वरिष्ठ साहित्यकार दीपक पगारे ने कहा कि इन कविताओं में आशावाद है। सहज सरल शिल्प में बुनी गई भाव प्रधान कविताएं हैं।
समीक्षक वरिष्ठ नवगीतकार मनोज जैन मधुर ने कहा कि यह कविताएं कवि के अनुभव और अंतर्मन से उपजी कविताओं का संग्रह है। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार घनश्याम मैथिल अमृत और स्वागत उद्बोधन रजनीश सक्सेना एवं आभार शिवांश नेमा ने व्यक्त किया।