जबलपुर: कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाली शर्तों पर हाईकोर्ट सख्त, बिजली कंपनी की टेंडर प्रक्रिया पर लगाई रोक

Jabalpur: High Court takes a strict stance on terms favoring companies; stays power company’s tender process. विशेष संवाददाता: जितेन्द्र श्रीवास्तव/अर्पिता श्रीवास्तवमध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा नौ लॉट में आउटसोर्स मैनपावर उपलब्ध कराने के लिए जारी निविदा प्रक्रिया पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक रूसिया की युगलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता उर्मिला इंटरनेशनल सर्विसेज, भोपाल सहित पांच कंपनियों की ओर से दायर याचिकाओं में कहा गया था कि निविदा में ऐसी शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिन्हें केवल कुछ कंपनियां ही पूरा करती हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि निविदा में तकनीकी मूल्यांकन में प्राप्त अंक महत्वपूर्ण हैं, जबकि मूल्य बोली निर्धारित है। मापदंड तय करने के लिए 50 अंकों का विशेष टेक्नो-कमर्शियल स्कैनिंग सिस्टम बनाया गया है। इसमें 51 करोड़ रुपए से अधिक का टर्नओवर करने वाली कंपनियों को 35 अंक दिए जाने का प्रावधान है। जिस कंपनी के पास सबसे अधिक मैनपावर सप्लाई का अनुभव होगा, उसे पांच अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। इसके अलावा प्रदेश की ऊर्जा कंपनी में दस साल का अनुभव भी अनिवार्य किया गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि वे पिछले तीन वर्षों से विद्युत वितरण कंपनी के लिए तकनीकी और गैर-तकनीकी आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इस दौरान उन्हें कार्य के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र भी मिले हैं। इसके बावजूद ऐसे प्रतिबंधात्मक मापदंड निर्धारित किए गए हैं, जिनसे उन्हें निविदा प्रक्रिया से बाहर किए जाने की आशंका है। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि देशभर में प्राप्त समान अनुभव को तकनीकी मूल्यांकन में उचित महत्व नहीं दिया गया है। ऐसे में तकनीकी अंकों और बराबरी की स्थिति में अपनाए जाने वाले मापदंडों का निविदा के परिणाम पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने इन मापदंडों को मनमाना, भेदभावपूर्ण और समान अवसर के सिद्धांत के विपरीत बताया। युगलपीठ ने याचिकाओं की सुनवाई के बाद निविदा प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता राम बिहारी गौतम और अधिवक्ता शुभम शुक्ला ने पैरवी की। recent visitors 20

फर्जी एक्सपीरियंस सार्टिफिकेट और सैलरी स्लिप से बना CEO, लिया लाखों का पैकेज… ऐसे खुली जालसाज की पोल, अरेस्ट

Became CEO using fake experience certificates and salary slips, secured a package worth lakhs… here is how the fraudster was exposed and arrested. ग्वालियर क्राइम ब्रांच ने एक शख्स को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार शख्स का नाम देवेन्द्र कुमार है. शख्स ने फर्जी सैलरी स्टेटमेंट और फर्जी एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट के आधार पर ऑटोमोबाइल कंपनी में ऊंची पोस्ट और भारी-भरकम सैलरी ऐंठी. ग्वालियर क्राइम ब्रांच पुलिस ने आरोपी को उत्तर प्रदेश के कानपुर से गिरफ्तार किया है. आरोपी ने फर्जी दस्तावेज दिखाकर नौकरी पाई. आरोपी ने आनंद टोयोटा कंपनी में लैंडमार्क ग्रुप में काम करने का फर्जी दस्तावेज दिखाया था, दस्तावेज में उसने अपनी सैलरी 2.80 लाख दिखाई थी. इसके बाद आनंद टोयोटा में उसे वाइस प्रेसीडेंट की पोस्ट मिली. फिर बाद में ग्रुप सीईओ (आफ्टर सेल्स) बनाया गया. मई 2026 में अचानक आरोपी ने नौकरी छोड़ दी. जब आरोपी के फाइनल सेटलमेंट के लिए दस्तावेज खंगाले गए तो यह पूरा फर्जीवाड़ा सामने आया. तभी से पुलिस आरोपी की तलाश में थी. आरोपी ने इस्तीफा देकर अचानक छोड़ा पदक्राइम ब्रांच से मिली जानकारी के अनुसार, देवेन्द्र कुमार दुबे (43 वर्ष) यूपी के कानपुर का रहने वाला है. अगस्त 2025 में श्रीतुलजा भवानी ऑटोमोबाइल्स प्रा.लि में आरोपी को ग्रुप वाइस प्रेसिडेंट का पद दिया गया था. ये कंपनी अनंत टोयोटा के नाम से जानी जाती है. बाद में कंपनी ने आरोपी को ग्रुप सीईओ (आफ्टर सेल्स) का प्रभार सौंप दिया था. आरोपी ने मई 2026 में अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे के बाद कंपनी जब उसका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट तैयार कर रही थी तो बैकग्राउंड वेरिफिकेशन और दस्तावेजों की गई. इसी में ये सारा फर्जीवाड़ा सामने आया. जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने लैंडमार्क ग्रुप में काम करने का जो अनुभव पत्र दिया था वो फर्जी था. उसने लैंडमार्क ग्रुप के नाम से 2,80,670 प्रति माह का फर्जी बैंक स्टेटमेंट तैयार कर कंपनी में जमा कराया था. इस पर उसके साइन थे. फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारीआरोपी ने ऐसा इसलिए किया था ताकि उसको कंपनी में अधिक सैलरी पैकेज मिले. जांच में पता चला कि लैंडमार्क ग्रुप में कभी उसकी नौकरी लगी ही नहीं थी. जिस बारे में एचआर ने कंपनी को बताया. इसके बाद क्राइम ब्रांच में शिकायत की गई थी. अगस्त 2026 में आरोपी देवेन्द्र कुमार पर फ्रॉड का केस दर्ज किया गया था. क्राइम ब्रांच की टीम फिलहाल आरोपी से पूछताछ कर रही है. क्राइम ब्रांच ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने फर्जी दस्तावेज कहां तैयार कराए और इस फर्जीवाड़े में उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति की मिलीभगत थी या नहीं recent visitors 27

जबलपुर बरगी बांध विस्थापितों ने खुद सड़क बनाने का काम किया शुरू, 40 साल इंतजार के बाद गैंती-फावड़ा लेकर उतरे ग्रामीण, बच्चे भी कर रहे मदद

Displaced residents of the Bargi Dam project in Jabalpur have started building a road themselves; after waiting 40 years, villagers have stepped out with pickaxes and shovels, and even children are helping. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव अर्पिता श्रीवास्तवजबलपुर । बरगी बांध विस्थापितों का सब्र आखिरकार टूट चुका है। दरअसल दुर्गानगर के ग्रामीणों ने सरकारी मदद का इंतजार छोड़कर अब खुद ही करीब 2 किलोमीटर सड़क बनाने का काम शुरू कर दिया है।जबलपुर बरगी बांध विस्थापितों ने खुद सड़क बनाने का काम किया शुरू, 40 साल इंतजार के बाद गैंती-फावड़ा लेकर उतरे ग्रामीण, बच्चे भी कर रहे मददजबलपुर जिले के शहपुरा जनपद के दुर्गानगर गांव में बरगी बांध परियोजना के विस्थापितों ने सड़क निर्माण की जिम्मेदारी अब खुद संभाल ली है। दरअसल करीब चार दशक पहले अपना गांव छोड़ने वाले परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वहीं सड़क नहीं बनने से परेशान ग्रामीण अब रोज सुबह गैंती, फावड़ा और तसला लेकर श्रमदान कर रहे हैं, ताकि बारिश के मौसम में गांव का संपर्क पूरी तरह न टूटे। दरअसल दुर्गानगर में करीब 100 परिवार और लगभग 1500 की आबादी रहती है। ग्रामीणों के अनुसार गांव की मुख्य सड़क हर बारिश में दलदल बन जाती है। कई दिनों तक लोगों का आना-जाना मुश्किल हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। इसी वजह से गांव वालों ने सरकारी इंतजार छोड़कर अपने स्तर पर सड़क सुधारने की शुरुआत कर दी। महिलाएं और बच्चे भी कर रहे मददवहीं ग्रामीणों के मुताबिक करीब दो किलोमीटर लंबे इस रास्ते की हालत इतनी खराब हो जाती है कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता है। कई जगह कीचड़ और गड्ढों के कारण दोपहिया वाहन फंस जाते हैं। गांव के लोग अपने खर्च से मुरम और पत्थर लाकर सड़क पर डाल रहे हैं ताकि कम से कम आवाजाही बनी रहे। ग्रामीण सोनू राजपूत ने बताया कि कई बार अधिकारियों और प्रशासन को आवेदन दिए गए लेकिन सड़क निर्माण का काम आगे नहीं बढ़ा। इसके बाद गांव वालों ने सामूहिक श्रमदान का फैसला लिया। वहीं भीमा बाई ने बताया कि गांव के लोग रोज मजदूरी पर जाने से पहले दो से तीन घंटे सड़क बनाने में लगा रहे हैं। उनका कहना है कि अब लोगों को भरोसा हो गया है कि अगर वे खुद आगे नहीं आएंगे तो समस्या खत्म नहीं होगी। हैरानी की बात है इस अभियान में महिलाएं भी पुरुषों के साथ बराबरी से हिस्सा ले रही हैं और बच्चे भी मिट्टी और पत्थर पहुंचाने में मदद कर रहे हैं। सड़क नहीं होने से हो रही परेशानीदरअसल दुर्गानगर के लोगों का कहना है कि सड़क की खराब हालत का सबसे बड़ा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। बारिश के दौरान एंबुलेंस और 108 जैसी आपातकालीन सेवाएं गांव तक नहीं पहुंच पातीं है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव से पहले दूसरे गांव में जाकर रुकना पड़ता है ताकि जरूरत पड़ने पर अस्पताल पहुंचना आसान रहे। जिला पंचायत सदस्य रामकुमार सैयाम ने बताया कि उन्होंने यह मुद्दा जिला पंचायत की बैठकों में तीन से चार बार उठाया और जिला पंचायत सीईओ को लिखित प्रस्ताव भी दिया लेकिन सड़क निर्माण शुरू नहीं हो सका। दूसरी ओर बरगी विधायक नीरज सिंह ने कहा है कि ग्रामीणों की परेशानी गंभीर है और अधिकारियों से चर्चा कर सड़क निर्माण के लिए बजट का प्रावधान किया जाएगा। recent visitors 34

मप्र जल निगम का बदलेगा नाम, अब कहलाएगा एमपी वाटर एंड सेनिटेशन कार्पोरेशन, मीटिंग में प्रस्ताव पास

MP Jal Nigam to be renamed ‘MP Water and Sanitation Corporation’; proposal passed in meeting. भोपाल: सीएम मोहन यादव की अध्यक्षता में एमपी जल निगम के संचालक मंडल की 26वीं बैठक हुई है। बैठक सीएम हाउस में हुई है। इस बैठक में एमपी जल निगम मर्यादित को पुनर्गठित कर अब मध्यप्रदेश वाटर एंड सेनिटेशन कार्पोरेशन बनाने का अहम प्रस्ताव पारित हुआ है। कैबिनेट में मंजूरी के लिए भेजादरअसल, बैठक में वर्तमान मप्र जल निगम मर्यादित (एमपीजेएनएम) को पुर्नगठित कर अब मध्यप्रदेश वाटर एंड सेनिटेशन कार्पोरेशन (एमपी-वास्को) बनाने का अहम प्रस्ताव पारित किया गया। संचालक मंडल ने यह महत्वपूर्ण प्रस्ताव अंतिम अनुमोदन के लिए मंत्रि-परिषद् को भेजने की मंजूरी दे दी। जल विकास और स्वच्छता प्रबंधन में नए लक्ष्यों पर काम करेगाबैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश जल निगम अब अपने नए नाम (एमपी-वास्को) और नई जिम्मेदारियों के साथ प्रदेश में जल विकास एवं स्वच्छता प्रबंधन में नए लक्ष्यों और अतिरिक्त संसाधनों के साथ काम करेगा। सीएम ने मप्र जल निगम द्वारा विचार और अनुमोदन के लिए रखे गए विभिन्न एजेंडा प्रस्तावों को मंजूरी दी। मोहन यादव ने जल निगम के वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए तैयार संचालक मण्डल के प्रतिवेदन और वित्तीय वर्ष 2024-25 के अनअंकेक्षित वार्षिक लेखाओं का अनुमोदन किया। बजट अनुमान 57 करोड़ रुपए करने का अनुमोदनमोहन यादव ने कैप्टिव मोड के तहत 60 मेगावॉट ग्रिड-कनेक्टेड पवन ऊर्जा परियोजना विकसित करने के लिए गठित परियोजना कंपनी में मप्र जल निगम के प्रतिनिधित्व के लिए प्रबंध संचालक को अधिकृत कर दिया। साथ ही इसी परियोजना के विकास के लिए गठित प्रोजेक्ट कंपनी में डीमैटीरियलाइज्ड रूप में 26 प्रतिशत इक्विटी शेयर रखने का अनुमोदन किया। उन्होंने मप्र जल निगम के इक्विटी शेयरों के नए पदाधिकारियों को हस्तांतरण और जल निगम द्वारा वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार किए गए बजट अनुमान 57 करोड़ रुपए का अनुमोदन किया टेंडर मंजूरी की तय सीमा बढ़ीसीएम यादव ने मप्र जल निगम के संचालक मण्डल में स्वतंत्र निदेशक के पद पर सुमित बोस की पुनः नियुक्ति का भी अनुमोदन किया। उन्होंने प्रोजेक्ट इम्प्लीमेंटेशन और एक्जी़क्यूशन मेथोडोलॉजी के अनुसार मप्र जल निगम के एमडी की टेंडर मंजूरी की तय सीमा 5 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव का भी अनुमोदन किया। recent visitors 22

मोदी के चीता प्रोजेक्ट के 4 साल : 8 चीतों में कौन-कौन जिंदा? आशा-ज्वाला ने बढ़ाया कुनबा, बाकी 6 अब कहां हैं?

Four Years of Modi’s Cheetah Project: Which of the 8 Cheetahs Are Still Alive? Asha and Jwala Have Expanded the Pride—Where Are the Other 6 Now? मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट के चार साल पूरे हो गए हैं। 17 सितंबर 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। उस समय इन आठ चीतों के साथ भारत में चीता पुनर्वास की शुरुआत हुई थी। चार साल बाद इन आठ में से तीन चीते ही जीवित हैं, जबकि पांच की अलग-अलग कारणों से मौत हो चुकी है। खास बात यह है कि शुरुआती आठ में शामिल आशा और ज्वाला ने भारत में प्रजनन कर चीता कुनबा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। बता दें अभी भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या 32 और देश में कुल चीतों की संख्या 52 पहुंच गई थी। इसमें 49 कूनो में और तीन गांधी सागर में हैं। पीएम ने इन आठ चीतों को छोड़ा था17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में पांच मादा और तीन नर थे। बाद में इनके नाम बदले गए। आशा का नाम आशा, ओबान का पवन, सवाना का नाभा, सियाया का ज्वाला, एल्टन का गौरव, फ्रेडी का शौर्य और तिब्लिसी का धात्री रखा गया। आठवां चीता साशा अपने इसी नाम से जाना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 सितंबर 2022 को कूनो में छोड़े गए आठ चीतों में अब आशा, ज्वाला और गौरव ही बचे हैं। अब कौन-कौन जिंदा है?आशा: यह शुरुआती आठ चीतों में शामिल मादा है। कूनो में इसने प्रजनन किया और भारत में जन्मे चीतों की नई पीढ़ी बढ़ाने में योगदान दिया। आशा ने पहले लीटर में तीन और दूसरे लीटर में पांच शावकों को जन्म दिया।ज्वाला: इसका पुराना नाम सियाया था। ज्वाला अब इस प्रोजेक्ट की अहम मादा चीतों में शामिल है। पहले लीटर में चार शावकों को जन्म दिया, लेकिन इसमें एक ही शाव बच पाया। दूसरे लीटर में चार शावको को जन्म दिया, जिसमें तीन जिंदा और तीसरे लीटर में पांच शावकों को जन्म दिया। यह पांचों जिंदा हैं।गौरव: इसका पुराना नाम एल्टन था। यह भी 2022 में आए आठ चीतों में शामिल है और अब जीवित तीन चीतों में है।पांच चीतों की हो चुकी है मौतसाशा: मार्च 2023 में इसकी मौत हुई। जांच में किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी सामने आई थी।धात्री: इसका पुराना नाम तिब्लिसी था। अगस्त 2023 में इसकी मौत हो गई।शौर्य: इसका पुराना नाम फ्रेडी था। जनवरी 2024 में इसकी मौत हुई।पवन: इसका पुराना नाम ओबान था। अगस्त 2024 में इसकी मौत हो गई।नाभा: इसका पुराना नाम सवाना था। जुलाई 2025 में चोटों के बाद इसकी मौत हुई।आठ से शुरू हुआ सफर, अब नई पीढ़ी संभाल रही कमानकूनो में सितंबर 2022 में पहले आठ चीते लाए गए थे। इसके बाद फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत पहुंचे। आगे चलकर चीतों का प्रजनन शुरू हुआ और भारत में ही शावकों का जन्म होने लगा। मार्च 2026 में ज्वाला के पांच शावकों के जन्म के बाद देश में चीतों की कुल संख्या 52 और भारत में जन्मे जीवित शावकों की संख्या 32बताई गई थी। यानी चार साल पहले जिन आठ चीतों से भारत में दोबारा चीते बसाने की शुरुआत हुई थी, उनमें से तीन आज भी इस सफर का हिस्सा हैं। वहीं, आशा और ज्वाला से जन्मी नई पीढ़ी ने कूनो की कहानी को एक नए दौर में पहुंचा दिया है। अप्रैल 2026 में भारत में जन्मी एक मादा चीते ने भी कूनो के जंगल में चार शावकों को जन्म दिया, जिससे प्राकृतिक परिस्थितियों में प्रजनन की एक और उपलब्धि सामने आई।कठिन अनुभवों से मिली सीखवन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पहला साल कूनो की टीम ने परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाया। पहला साल कठिन अनुभवों से मिली उम्मीद के साथ खत्म हुआ। इससे यह सीख मिली कि चीतों को दोबारा बसाना कोई एक बार में पूरा होने वाली प्रक्रिया नहीं है। इसमें लगातार सीखना, परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करना, चुनौतियों का सामना करना और उनसे उबरना शामिल है। इसके बाद सफल प्रजनन से उम्मीद बढ़ती गई। recent visitors 22

6 साल पुराने मारपीट के मामले में ₹4 हजार का इनामी वारंटी गिरफ्तार, किशोर न्याय बोर्ड में किया पेश

Warrantee with a ₹4,000 reward on his head arrested in a 6-year-old assault case; produced before the Juvenile Justice Board. छतरपुर। थाना भगवां पुलिस ने वर्ष 2020 के मारपीट के एक पुराने प्रकरण में लंबे समय से फरार चल रहे ₹4,000 के इनामी वारंटी को अभिरक्षा में लेकर न्यायालय में पेश किया। यह कार्रवाई पुलिस के “न्याय पथ अभियान” के तहत की गई। पुलिस के अनुसार, प्रकरण में किशोर न्याय बोर्ड द्वारा स्थायी वारंट जारी किया गया था। फरार वारंटी की तलाश के बाद पुलिस टीम ने उसे अभिरक्षा में लिया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे किशोर न्याय बोर्ड, छतरपुर के समक्ष पेश किया गया। कार्रवाई एसडीओपी बड़ा मलहरा रोहित अलावा के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी भगवां निरीक्षक श्रद्धा शुक्ला, प्रधान आरक्षक कल्याण सिंह, आरक्षक शीलेन्द्र सिंह, सत्येंद्र कुमार सहित पुलिस टीम द्वारा की गई। छतरपुर पुलिस के अनुसार, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और लंबित प्रकरणों के निपटारे के लिए अभियान लगातार जारी है। recent visitors 45

पन्ना में ‘चिता आंदोलन’ के दौरान बुजुर्ग महिला की मौत, पांचवें दिन भी नदी में डटे विस्थापित; बोले- ‘न्याय दो या मार दो’

Elderly woman dies during ‘Chita Andolan’ in Panna; displaced people remain camped in the river for the fifth day, declaring: ‘Give us justice or kill us.’ पन्ना। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय और रुंझ बांध के साथ सिंगरौली-ललितपुर रेलवे लाइन से प्रभावित विस्थापितों का ‘चिता आंदोलन’ बुधवार को पांचवें दिन भी जारी है। आंदोलन के दौरान टपरिया निवासी एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों में आक्रोश और बढ़ गया। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक विस्थापित परिवारों को उनका हक और उचित पुनर्वास नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा।नदी में ‘जिंदा चिता’ बनाकर प्रदर्शनआंदोलन का नेतृत्व कर रहे जय किसान संगठन के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के मुताबिक केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी परिवार नदी में ‘जिंदा चिता’ बनाकर धरना दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने कभी विकास परियोजनाओं का विरोध नहीं किया, बल्कि ग्रामसभा की भूमिका, पारदर्शी प्रक्रिया और उचित पुनर्वास की मांग की है।आरोप है कि प्रभावित परिवारों की जमीनों पर कार्रवाई के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आंदोलनकारी पानी में बनाई गई चिताओं पर लेटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।‘घर डूब रहे, सरकार परियोजना का काम आगे बढ़ा रही’भटनागर ने आरोप लगाया कि आंदोलन को रोकने के लिए पहले धारा 144 और अब धारा 163 के तहत कार्रवाई की गई तथा प्रदर्शनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए गए। उनके मुताबिक कई परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है, जबकि उनके घर डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। कुछ मकानों के गिरने और पुलिस कार्रवाई के भी आरोप लगाए गए हैं।उन्होंने कहा कि प्रभावितों की समस्या केवल मुआवजे तक सीमित नहीं है। यह जीवन, संविधान और गरिमा से जुड़ा सवाल है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि सिंचित जमीन को रिकॉर्ड में असिंचित बताकर मुआवजा कम किए जाने की स्थिति भी सामने आई है।5 लाख से 12.50 लाख के पैकेज का मुद्दाआंदोलनकारियों के अनुसार पहले पुनर्वास पैकेज के तहत 5 लाख रुपये का प्रावधान था। जुलाई में हुए आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री ने कैबिनेट में इसे बढ़ाकर 12.50 लाख रुपये करने की घोषणा की थी। हालांकि प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कई प्रभावित परिवारों को अभी तक पहले घोषित 5 लाख रुपये की राशि भी पूरी तरह नहीं मिली है।‘परियोजनाएं अलग, पीड़ा एक’आंदोलन में मझगाय, रुंझ, केन-बेतवा लिंक और सिंगरौली-ललितपुर रेलवे लाइन से प्रभावित परिवार एक मंच पर आए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि भले ही परियोजनाएं अलग-अलग हों, लेकिन विस्थापन और पुनर्वास की समस्या समान है।महिला आंदोलनकारियों दिव्या अहिरवार और हिसाबी राजपूत ने कहा कि वे बच्चों के साथ धरने पर इसलिए बैठी हैं क्योंकि उनकी समस्याएं सुनने वाला कोई नहीं है।न्याय की मांगअमित भटनागर ने कहा कि आंदोलन का नारा ‘न्याय दो या मार दो’ प्रभावित परिवारों की बेबसी को दर्शाता है। उनका कहना है कि वे मौत नहीं, न्याय की मांग कर रहे हैं और बिजली-पानी जैसी सुविधाएं रोककर उनकी आवाज दबाई नहीं जा सकती।आंदोलनकारियों ने डूब क्षेत्र के प्रत्येक परिवार का सत्यापन कराने, लंबित मुआवजे का भुगतान करने, मकान और जमीन का उचित मूल्यांकन करने तथा घोषित 12.50 लाख रुपये के पुनर्वास पैकेज को तत्काल लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक ‘चिता आंदोलन’ जारी रहेगा। recent visitors 17