price of sugar :अचानक क्यों महंगी हो रही चीनी? 65 रुपये किलो तक पहुंचा भाव; आपकी जेब पर क्या होगा असर?

Why is the price of sugar suddenly rising? Rates have reached up to ₹65 per kg; how will it impact your pocket? देश में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। कुछ बाजारों में इसके दाम 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरें हैं। इस बीच केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी बिना आयात शुल्क के मंगाने की अनुमति दी है। दस साल बाद ऐसा होगा जब भारत को चीनी का आयात करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि चीनी के दाम अचानक क्यों बढ़ रहे हैं? क्या देश में चीनी की कमी है या आपूर्ति को लेकर समस्या है? क्या मौसम भी इसकी वजह है? एथेनॉल उत्पादन से चीनी का क्या संबंध है? सरकार का क्या कहना है? भारत ने चीनी का निर्यात क्यों घटाया? भारत में चीनी सबसे ज्यादा कहां होती है? सरकार ने चीनी को नियंत्रित करने के लिए क्या-क्या नीतियां बनाई? सरकार को 10 लाख टन चीनी आयात करने की जरूरत क्यों पड़ी? और त्योहारों से पहले आम आदमी की जेब पर कितना असर पड़ सकता है? आइये जानते हैं… चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे हैं?चीनी की कीमतों में तेजी की सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता को लेकर बढ़ता दबाव है। देश में चीनी उत्पादन पिछले कुछ वर्षों में लगातार एक जैसा नहीं रहा है। कभी उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा तो कभी इसमें गिरावट देखने को मिली। 15 अप्रैल 2026 तक देश में 273.90 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हो चुका था। इस दौरान देशभर में 541 चीनी मिलें चल रही थीं और उन्होंने 2,865.21 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की। गन्ने से चीनी निकलने की औसत दर 9.56 प्रतिशत रही। क्या मौसम भी है वजह?चीनी की कीमतों पर मौसम का असर भी पड़ रहा है। इस साल भारत में मानसून के 11 साल के सबसे निचले स्तर पर रहने का अनुमान जताया गया है। कमजोर बारिश ने गन्ने की बुवाई और फसल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही अल नीनो का खतरा भी बना हुआ है।विशेषज्ञ राहिल शेख, प्रबंध निदेशक, एमईआईआर कमोडिटीज इंडिया के मुताबिक भारत में चीनी की आपूर्ति पहले से दबाव में है और अब अल नीनो एक बड़ा जोखिम बनकर उभर रहा है। अगर अनुमान के मुताबिक बारिश कमजोर रहती है तो गन्ने की बुवाई प्रभावित होगी और भारत कम से कम अगले तीन साल तक चीनी के निर्यात बाजार से बाहर रह सकता है। त्योहारों का मौसम क्यों बढ़ा रहा है चिंता?चीनी की मांग पूरे साल रहती है, लेकिन त्योहारों के दौरान इसमें खास बढ़ोतरी होती है। रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली के समय मिठाई की बिक्री काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा बिस्किट, टॉफी, शीतल पेय और कई खाद्य उत्पादों में भी चीनी का इस्तेमाल होता है। ऐसे समय में अगर बाजार में पहले से ही आपूर्ति का दबाव हो और मांग अचानक बढ़ जाए तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। देश में चीनी सबसे ज्यादा कहां बनती है?भारत के चीनी उत्पादन में तीन राज्यों की सबसे बड़ी भूमिका है महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक। ये तीनों राज्य मिलकर देश के कुल चीनी उत्पादन में करीब 87.48 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। 2025-26 के दौरान महाराष्ट्र में 89.80 लाख मीट्रिक टन, उत्तर प्रदेश में 65.60 लाख मीट्रिक टन और कर्नाटक में 41.70 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन हुआ।इसलिए इन राज्यों में गन्ने की पैदावार, बारिश और चीनी मिलों का उत्पादन पूरे देश के बाजार को प्रभावित कर सकता है। अगर इन प्रमुख राज्यों में फसल प्रभावित होती है तो इसका असर देशभर में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर पड़ सकता है। क्या एथेनॉल से भी चीनी के उत्पादन का संबंध है?चीनी की मौजूदा कहानी में एथेनॉल एक महत्वपूर्ण कड़ी है। केंद्र सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने को लगातार बढ़ावा दे रही है। इसके पीछे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना और किसानों की आय बढ़ाना जैसे उद्देश्य हैं। एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2025-26 में देश में एथेनॉल की संचयी आपूर्ति 800 करोड़ लीटर का आंकड़ा पार कर गई है। अखिल भारतीय आसवक संघ के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में कुल मासिक एथेनॉल आपूर्ति में करीब 76 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित कच्चे माल का था। वहीं, गन्ने पर आधारित कच्चे माल से जुलाई में 22 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हुई, जबकि जून में यह 28 करोड़ लीटर थी। जुलाई में कुल एथेनॉल आपूर्ति में गन्ने पर आधारित कच्चे माल की हिस्सेदारी करीब 24 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह करीब 27 प्रतिशत थी। विशेषज्ञों की चेतावनी क्या है?विशेषज्ञों की चिंता मुख्य रूप से दो चीजों को लेकर है, मौसम और घरेलू आपूर्ति। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में चीनी की आपूर्ति पहले से दबाव में है। अगर बारिश कमजोर रहती है तो गन्ने की अगली फसल प्रभावित हो सकती है। इसका असर आने वाले चीनी मौसम में उत्पादन पर पड़ सकता है। इसके अलावा एथेनॉल नीति को लेकर भी संतुलन जरूरी है। सरकार के लिए एथेनॉल उत्पादन बढ़ाना ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन खाद्य जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार का क्या कहना है?दावा किया जा रहा था कि पेट्रोल में मिश्रण के लिए चीनी को एथेनॉल उत्पादन की ओर डाइवर्ट किए जाने से घरेलू बाजार में इसकी कीमतें बढ़ रही हैं। हालांकि, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कीमतों में बढ़ोतरी का संबंध एथेनॉल से नहीं, बल्कि कम घरेलू उत्पादन, आगामी त्योहारी सीजन की मांग और जमाखोरी से है। साथ ही गन्ने की फसल को रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारी से नुकसान हुआ। इस सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों का शुरुआती अनुमान करीब 343 एलएमटी था। सरकार ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया है कि एथेनॉल कार्यक्रम पर महंगाई का दोष मढ़ना पूरी तरह गलत है। आंकड़ों के मुताबिक, एथेनॉल उत्पादन के लिए डाइवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 सीजन के 12 प्रतिशत से … Read more

Gen-G को साधने भाजपा, सरकार और संघ की नई रणनीति, स्कूल-कॉलेज से सोशल मीडिया तक बढ़ेगा संवाद

BJP, Government, and Sangh’s new strategy to engage Gen-G: Outreach to expand from schools and colleges to social media. मध्य प्रदेश में युवा वोटरों, खासकर जेन-जी और जेन-अल्फा तक पहुंच बनाने के लिए भाजपा, सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। युवाओं से सीधे संवाद के साथ सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वाले युवाओं और इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। युवा पीढ़ी के बदलते रुझान और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राजनीतिक संगठन अब पारंपरिक बैठकों के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बना रहे हैं। इसका मकसद युवाओं की समस्याओं, उनकी पसंद और भविष्य से जुड़ी अपेक्षाओं को समझना भी है। बता दें मध्य प्रदेश में 1.40 करोड़ से ज्यादा 18 से 29 साल के वोटर्स हैं। यह वोटर्स आगामी नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। इसको लेकर ही राजनीति पार्टियों ने युवाओं को साधने पर अपना फोकस बढ़ा दिया हैं। स्कूल-कॉलेज और छात्रावासों तक पहुंचेगा युवा मोर्चाभाजपा संगठन ने युवाओं से संपर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी अपने युवा मोर्चे को दी है। इसके तहत स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों में संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मंत्री, सांसद और विधायक भी शैक्षणिक संस्थानों में जाकर युवाओं से संवाद करेंगे। इन कार्यक्रमों में केवल सरकार की योजनाओं की जानकारी देने के बजाय युवाओं की समस्याओं और रोजगार, शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण जैसे मुद्दों पर बातचीत करने की कोशिश होगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर भी फोकसभाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जिलों में सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा इन्फ्लुएंसर्स से संवाद करेंगे। इसके लिए अलग-अलग जिलों में कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी नई पीढ़ी के साथ सीधे संवाद की तैयारी की है। शुरुआती चरण में सितंबर में भोपाल में संघ के पदाधिकारी युवाओं से संवाद करेंगे। एआई और स्किल ट्रेनिंग को भी बनाया आधारसरकार अगले वर्ष को युवा वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा कर चुकी है। साथ ही युवाओं को जोड़ने के लिए कौशल विकास और नई तकनीक से जुड़े कार्यक्रमों पर जोर दिया जा रहा है। इसमें एआई स्किल ट्रेनिंग, ऑनलाइन कोचिंग और रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण प्रमुख हैं। भाजपा प्रवक्ता मिलन भार्गव ने कहा कि भाजपा युवाओं के साथ लगातार संवाद करती है। इसमें अब तेजी लाई गई हैं। भाजपा ही ऐसी पार्टी है, जो हर वर्ग को साध लेकर चलने का काम कर रही हैं। recent visitors 12

MP में MBBS की पढ़ाई हुई महंगी: प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की फीस में 10% तक बढ़ोतरी, सरकारी कॉलेजों में कोई बदलाव नहीं

MBBS education becomes costlier in MP: Fees in private medical colleges hiked by up to 10%; no change in government colleges. भोपाल। मध्य प्रदेश में NEET-UG 2026-27 की काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही मेडिकल और डेंटल शिक्षा का नया फीस स्ट्रक्चर लागू कर दिया गया है। नए फीस ढांचे के मुताबिक प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की पढ़ाई पिछले सत्र की तुलना में करीब 10 प्रतिशत तक महंगी हो गई है। वहीं, निजी BDS पाठ्यक्रम की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फीस स्थिर प्रदेश के 20 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की सालाना फीस 1.14 लाख रुपये निर्धारित है। इसमें शिक्षण और सुरक्षा शुल्क शामिल हैं। वहीं, ESIC मेडिकल कॉलेज इंदौर में सुरक्षा शुल्क कम होने के कारण सालाना फीस करीब 1.05 लाख रुपये रहेगी। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पिछले तीन वर्षों से यही फीस लागू है और इस सत्र में इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। निजी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ा फीस का बोझ निजी मेडिकल कॉलेजों में MBBS की फीस में कॉलेज के अनुसार अलग-अलग बढ़ोतरी हुई है। भोपाल के LN Medical College में सालाना फीस में 1.58 लाख रुपये की वृद्धि हुई है। अब यहां MBBS की सालाना फीस करीब 18.08 लाख रुपये हो गई है। वहीं, भोपाल के RK Medical College में फीस में करीब 81 हजार रुपये की बढ़ोतरी हुई है। यहां MBBS की सालाना फीस 11.31 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस बढ़ोतरी से निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ना तय माना जा रहा है। NRI कोटे की फीस में बड़ा उछाल निजी मेडिकल कॉलेजों में NRI कोटे से प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए फीस में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिला है। नए फीस स्ट्रक्चर में NRI कोटे की कुल फीस कई कॉलेजों में 60 लाख रुपये से अधिक पहुंच गई है। श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज, इंदौर: 60,92,700 रुपयेLN मेडिकल College, भोपाल: 53.99 लाख रुपयेPeople’s Medical College, भोपाल: 53.33 लाख रुपये श्री अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में NRI फीस में करीब 5.5 लाख रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। BDS की पढ़ाई भी हुई महंगी MBBS के साथ निजी BDS पाठ्यक्रम की फीस में भी वृद्धि की गई है। प्रदेश के एकमात्र सरकारी डेंटल कॉलेज, शासकीय डेंटल यूनिवर्सिटी इंदौर, में BDS की फीस पिछले वर्ष की तरह 1.14 लाख रुपये रखी गई है। वहीं, निजी BDS कॉलेजों में फीस में करीब 10 हजार से 15 हजार रुपये तक की वृद्धि हुई है। नए फीस स्ट्रक्चर के अनुसार निजी BDS की सालाना फीस कॉलेज के अनुसार करीब 1.98 लाख से 2.85 लाख रुपये तक हो गई है। MP में MBBS की 5,200 सीटें NEET-UG 2026-27 सत्र में मध्य प्रदेश में MBBS की कुल 5,200 सीटें उपलब्ध होंगी। पिछले सत्र में यह संख्या करीब 5,050 सीटें थी। यानी इस बार 150 सीटों का इजाफा हुआ है। इनमें सरकारी मेडिकल कॉलेजों की 3,000 सीटें और निजी मेडिकल कॉलेजों की 2,200 सीटें शामिल हैं। सीटों में बढ़ोतरी नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों और मौजूदा कॉलेजों में सीटें बढ़ाए जाने के कारण हुई है। खरगोन, मंदसौर और रतलाम में नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 50-50 सीटें तथा सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में 50 अतिरिक्त सीटें शामिल होने से राज्य में मेडिकल सीटों की संख्या बढ़ी है। छात्रों के लिए बढ़ी चुनौती एक तरफ प्रदेश में MBBS की सीटों की संख्या बढ़ी है, वहीं निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस में बढ़ोतरी ने मेडिकल शिक्षा की लागत को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है। सरकारी कॉलेजों में फीस स्थिर रहने से कम खर्च में MBBS करने का विकल्प विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है, लेकिन सीमित सरकारी सीटों के कारण निजी कॉलेजों की ओर जाने वाले छात्रों को अब पहले से अधिक आर्थिक खर्च उठाना पड़ सकता है। NEET-UG 2026-27 के लिए छात्रों को प्रवेश लेने से पहले संबंधित कॉलेज की नवीनतम फीस, हॉस्टल, अन्य शुल्क और प्रवेश नियमों की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचनी चाहिए। recent visitors 9

दातासिंह वाला बॉर्डर सील: चार लेयर सुरक्षा में रोका गया किसानों का जत्था, 29 अगस्त तक पड़ाव का ऐलान

Datasinghwala border sealed: Farmers’ convoy halted by four-layer security; encampment announced until August 29. नई दिल्ली। पंजाब के किसानों के दिल्ली कूच के ऐलान के बाद हरियाणा प्रशासन ने दातासिंह वाला (खनौरी) बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। रविवार को बॉर्डर को चार लेयर सुरक्षा घेरे में सील कर दिया गया। पंजाब की ओर से दिल्ली जाने के लिए पहुंचे 51 किसानों के जत्थे को हरियाणा में प्रवेश नहीं दिया गया। किसानों और प्रशासन के बीच करीब डेढ़ घंटे में दो दौर की बातचीत हुई, लेकिन दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। किसान केंद्रीय कृषि मंत्री से बातचीत कराने और प्रस्तावित ट्रेड डील को रद्द करने की मांग पर अड़े रहे। किसानों ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक वे 29 अगस्त तक बॉर्डर पर ही पड़ाव जारी रखेंगे। पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से हुई बातचीत दोपहर बाद पंजाब की ओर से किसानों का जत्था हरियाणा की तरफ बढ़ा तो प्रशासन ने किसान नेताओं के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए बुलाया। प्रतिनिधिमंडल में काका सिंह कोटड़ा, बलदेव सिंह सरसा, इंद्रजीत पन्नीवाल, सुखदेव भोजराज और अमनजीत सिंह अरोड़ा शामिल रहे। जींद की डीसी डॉ. वैशाली शर्मा और एसपी कुलदीप सिंह ने किसानों की संख्या कम करने और मुख्यमंत्री से बातचीत कराने का प्रस्ताव रखा। किसान नेताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनका कहना था कि उनका मुख्य मुद्दा प्रस्तावित ट्रेड डील से जुड़ा है, इसलिए इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री के स्तर पर बातचीत होनी चाहिए। पैदल दिल्ली जाने पर अड़े किसान किसान नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य पैदल दिल्ली पहुंचना है। प्रशासन के साथ बातचीत विफल होने के बाद किसान नेता पंजाब की ओर लौट गए और खनौरी-दातासिंह वाला बॉर्डर पर दोबारा पड़ाव डाल दिया। किसानों ने ऐलान किया है कि मांगें पूरी होने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा और 29 अगस्त तक बॉर्डर पर डटे रहेंगे। हरियाणा के किसानों को भी हिरासत में लिया गया दिल्ली की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे हरियाणा के 33 किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया। वहीं, कैथल की ओर से किसान नेता अभिमन्यु कोहाड़ के नेतृत्व में बॉर्डर की तरफ पहुंच रहे 18 किसानों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। शुभकरण सिंह की मौत स्थल से मिट्टी लेकर जाएंगे दिल्ली किसानों ने आंदोलन को भावनात्मक रूप देने के लिए खनौरी में उस स्थान से मिट्टी एकत्र की, जहां 21 फरवरी 2024 को किसान शुभकरण सिंह की मौत हुई थी। किसान नेताओं के अनुसार, इस मिट्टी को दिल्ली के जंतर-मंतर तक ले जाया जाएगा। गैर-एसकेएम किसान संगठनों की ओर से जगजीत सिंह डल्लेवाल के नेतृत्व में प्रस्तावित पदयात्रा के दौरान इस मिट्टी को दिल्ली ले जाने की बात कही गई है। आंदोलन फिर गरमाने के संकेत दातासिंह वाला बॉर्डर पर बढ़ाई गई सुरक्षा और किसानों के दिल्ली कूच के प्रयास के बीच एक बार फिर किसान आंदोलन को लेकर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। एक ओर प्रशासन किसानों को हरियाणा में प्रवेश देने के पक्ष में नहीं है, वहीं किसान अपनी मांगों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में बॉर्डर पर सुरक्षा और आंदोलन दोनों को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी रह सकती है। recent visitors 17

MP NEWS खाद बिक्री बंद: पोर्टल के मिलान के नाम पर किसानों पर फिर संकट, सरकार के किसान हितैषी दावों पर उठे सवाल

MP NEWS: Fertilizer sales halted: Farmers face another crisis due to portal matching, raising questions about the government’s farmer-friendly claims. भोपाल। मध्य प्रदेश में किसानों को खेती के लिए खाद की जरूरत के बीच सरकार के एक आदेश ने नई चिंता खड़ी कर दी है। सामने आए आदेश के मुताबिक 14 अगस्त 2026 की शाम 7 बजे से प्रदेश में उर्वरक की बिक्री आगामी आदेश तक बंद कर दी गई है। आदेश में भारत सरकार के FMS पोर्टल और प्रदेश के उर्वरक विक्रेताओं के वास्तविक स्टॉक का Reconciliation यानी मिलान किए जाने का हवाला दिया गया है। आदेश के अनुसार बिक्री बंद रहने की अवधि में विपणन संघ के विक्रय केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों और अन्य संबंधित केंद्रों से किसी भी प्रकार के अनुदानित उर्वरक का विक्रय नहीं किया जाएगा। पोर्टल का मिलान जरूरी, लेकिन किसानों की परेशानी का क्या? सरकार की ओर से स्टॉक और पोर्टल के आंकड़ों का मिलान पारदर्शिता तथा वास्तविक उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि इस प्रक्रिया का सीधा असर किसान पर क्यों पड़े? खेती के मौसम में किसान को समय पर खाद नहीं मिली तो फसल प्रभावित होने का खतरा रहता है। ऐसे में बिक्री अचानक रोकने के फैसले से किसानों को खाद के लिए भटकना पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से ही खाद की उपलब्धता और वितरण को लेकर किसानों की चिंता रहती है। किसान पूछ रहे—खाद चाहिए या पोर्टल की प्रक्रिया? सरकार लगातार किसान हित और कृषि को प्राथमिकता देने की बात करती है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद बिक्री रोकने के आदेश ने सरकार की किसान-हितैषी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का सवाल है कि FMS पोर्टल का स्टॉक मिलान विभागीय स्तर पर करते हुए खाद की बिक्री जारी क्यों नहीं रखी जा सकती? यदि व्यवस्था में तकनीकी या स्टॉक संबंधी समस्या है तो उसका खामियाजा किसान क्यों भुगते? क्या यह फैसला किसान विरोधी साबित होगा? विपक्ष और किसान संगठनों को सरकार के इस फैसले पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है। किसानों के बीच यह धारणा बन सकती है कि सरकारी सिस्टम की तकनीकी प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों का बोझ आखिरकार अन्नदाता पर ही डाला जा रहा है। सरकार से किसानों के सवाल खाद बिक्री बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी? बिक्री दोबारा शुरू करने की निश्चित तारीख क्यों नहीं बताई गई? स्टॉक मिलान की प्रक्रिया कितने समय में पूरी होगी? इस दौरान जरूरतमंद किसानों को खाद कैसे मिलेगी? यदि किसी किसान की फसल खाद के अभाव में प्रभावित होती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अब निगाह इस बात पर है कि सरकार खाद बिक्री दोबारा कब शुरू करती है और किसानों को इस दौरान खाद उपलब्ध कराने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था करती है। recent visitors 12

सीएम योगी बोले- 1947 का बंटवारा कांग्रेस की कायरता का प्रमाण, पीएम मोदी होते तो कोई बाल भी बांका न कर पाता

CM Yogi said the Partition of 1947 was proof of the Congress’s cowardice; had PM Modi been in charge, no one could have caused even the slightest harm. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1947 में हुआ देश का बंटवारा कांग्रेस की कायरता का प्रमाण है। उस समय अगर सरदार पटेल देश के प्रधानमंत्री होते या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व देश के पास होता तो कोई भी हमारे देश का बाल भी बांका नहीं कर पाता पर कांग्रेस की बुजदिली के कारण देश का बंटवारा हुआ। इस दौरान लाखों की संख्या में हिंदू, बौद्ध, जैन और सिखों का कत्लेआम हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ के लोकभवन में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि दो कारणों से भारत गुलाम हुआ था जिनमें से एक कारण आपसी अंतर्विरोध था। जाति, क्षेत्र और भाषा को लेकर अंतर्विरोध और षड्यंत्रों के कारण देश कमजोर होता चला गया। इसका परिणाम गुलामी के रूप में आया। अंतर्विरोधों के कारण हम सामूहिक रूप से लड़ ही नहीं सकें। इसका दुष्परिणाम सामने आना ही था। देश गुलाम हो गया। सनातन काल से जो भारत एक भारत था वो टुकड़ों में बंट गया। आजादी के बाद शत्रु संपत्तियों की बंदरबांट हुईमुख्यमंत्री योगी ने कहा कि बंटरवारे के बाद कांग्रेस राज में शत्रु संपत्तियों की बंदरबांट हुई। निजी संपत्तियां बनाई गईं। होना तो ये चाहिए था कि पाकिस्तान से जो हिंदू, जैन, बौद्ध और सिख आए थे उन्हें बसाने के लिए मदद करनी चाहिए थी पर उनकी मदद नहीं की गई। जमीनों की बंदरबांट हुई। उन्होंन कहा कि पहले की तरह आज भी सपा और कांग्रेस की मानसिकता विभाजनकारी है। ये लोग देश को और समाज को बांटने की राजनीति करते हैं। सीएम योगी ने निकाला पैदल मार्च, डिप्टी सीएम हुए शामिलविभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर लखनऊ में पटेल प्रतिमा से लेकर लोकभवन तक पैदल मार्च निकाला गया जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व अन्य भाजपा नेता शामिल हुए। recent visitors 11

MP Board का बड़ा फैसला! अनाथ बच्चों की परीक्षा फीस माफ, 2026-27 से मिलेगा फायदा

Major decision by MP Board! Exam fees for orphaned children waived; benefits to start from the 2026-27 academic session. भोपाल। आर्थिक तंगी के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई और परीक्षा न रुके, इसे ध्यान में रखते हुए माध्यमिक शिक्षा मंडल, मध्यप्रदेश ने अनाथ विद्यार्थियों के लिए बड़ा राहतभरा फैसला लिया है। अब जिन विद्यार्थियों के माता और पिता दोनों का निधन हो चुका है, उन्हें मंडल की परीक्षाओं में शामिल होने के लिए परीक्षा शुल्क और नामांकन शुल्क नहीं देना होगा। मंडल के जारी आदेश के अनुसार, ऐसे विद्यार्थी जो माता-पिता की मृत्यु के बाद किसी रिश्तेदार के आश्रय में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं अथवा शासन द्वारा संचालित अनाथालय में रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, उन्हें मंडल द्वारा आयोजित परीक्षाओं में शामिल होने के लिए शुल्क से पूरी तरह छूट दी जाएगी। आर्थिक परेशानी के चलते पढ़ाई न छूटे, इसलिए फैसलामंडल ने आदेश में माना है कि माता-पिता दोनों को खो चुके कई विद्यार्थी रिश्तेदारों या अनाथालय के सहारे अपनी पढ़ाई जारी रखते हैं। आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण इनके सामने परीक्षा शुल्क जमा करना भी चुनौती बन सकता है। ऐसे विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित न हो, इसलिए उन्हें परीक्षा और नामांकन शुल्क से राहत देने की व्यवस्था की गई है। लाभ लेने के लिए प्रमाण-पत्र जरूरीशुल्क माफी का लाभ लेने के लिए विद्यार्थी को परीक्षा फॉर्म भरते समय माता और पिता दोनों के मृत्यु प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने होंगे। इसके साथ ही शासन द्वारा संचालित अथवा मान्यता प्राप्त संस्था की ओर से ऐसा प्रमाण-पत्र देना होगा, जिसमें यह प्रमाणित हो कि संबंधित विद्यार्थी वहां रहकर शिक्षा प्राप्त कर रहा है। मंडल ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं करने पर विद्यार्थी शुल्क छूट का पात्र नहीं होगा। 2026-27 की परीक्षाओं से लागूयह सुविधा शैक्षणिक सत्र 2026-27 की परीक्षाओं से लागू की गई है। यानी आगामी मंडल परीक्षाओं में पात्र विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल की यह पहल उन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो माता-पिता के निधन के बाद भी विपरीत परिस्थितियों में अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं। recent visitors 23