C+1 फॉर्मूला: भारत का बड़ा कदम, रेड कारपेट पर स्वागत, यही बनेगा सोने की चिड़ीया का भविष्य

नई दिल्ली ज‍ियोपॉल‍िट‍िक्‍स में अब खेल इकोनॉमी के जर‍िये खेला जा रहा है. आपको याद होगा, जब कोव‍िड आया तो पूरा का पूरा सप्‍लाई चेन ह‍िलने लगा. यूक्रेन संकट ने आग में घी का काम क‍िया.दुन‍िया को समझ नहीं आया क‍ि अब जाएं तो जाएं कहां.ज‍िन देशों के साथ वे कारोबार कर रहे थे,वे फंस चुके थे. रही सही कसर अमेर‍िकी टैर‍िफ ने पूरी कर दी. अब दुन‍िया को डर लग रहा क‍ि अगर चीन पर अमेर‍िकी सख्‍ती बढ़ी, ताइवान पर हमला हुआ तो मुश्क‍िल होगी. इसल‍िए ज्‍यादातर देश ‘चीन + 1’ (C+1) फार्मूला अपना रहे हैं. भारत यह भांप चुका है. इसील‍िए बजट में सरकार ने ऐसे देशों, ऐसी कंपन‍ियों के ल‍िए रेड कारपेट ब‍िछा द‍िए हैं. मोबाइल, लैपटॉप और सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों को टैक्स में छूट दी गई है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम को बजट से ताकत दी है ताकि विदेशी कंपनियां चीन छोड़कर भारत आएं. मैसेज साफ है क‍ि अगर ताइवान या चीन में संकट आता है, तो भारत दुनिया की बैकअप फैक्ट्री बनने के ल‍िए पूरी तरह तैयार है. और यहीं से फ‍िर सोने की च‍िड़‍िया बनने का रास्‍ता खुलेगा. 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का एक्सप्रेसवे दुनिया की 40% मैन्युफैक्चरिंग पर चीन का कब्जा है. यहीं से पूरी दुन‍िया में जरूरत की बहुत सारी चीजें जा रही हैं. लेकिन साल 2026 ‘टर्निंग पॉइंट’होने जा रहा है. शी जिनपिंग की विस्तारवादी नीतियों और ब्लैक बॉक्स जैसी अर्थव्यवस्था से तंग आकर ग्लोबल कंपनियां अब एक ऐसे देश की तलाश में हैं, जो न केवल लोकतांत्रिक हो बल्कि जिसके पास चीन को टक्कर देने वाला स्केल भी हो.भारत ने इसी ‘चीन प्लस वन’ (C+1) मौके को भुनाने के लिए अपना ‘रेड कारपेट’ बिछा दिया है. यह सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने का वह एक्सप्रेसवे है जो भारत को फिर से ‘विश्व गुरु’ की गद्दी पर बैठाएगा. दुनिया को आखिर भारत की जरूरत क्यों है?     सप्लाई चेन का वेपनाइजेशन: कोरोना काल में चीन ने मेडिकल सप्लाई रोककर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई. दुनिया समझ गई कि एक ही सप्लायर पर निर्भर रहना आत्मघाती है. अब एपल (Apple) और सैमसंग (Samsung) जैसी कंपनियों को अपनी सुरक्षा के लिए भारत जैसा भरोसेमंद पार्टनर चाहिए.     बूढ़ा होता चीन: चीन की वर्किंग पॉपुलेशन तेजी से घट रही है. वहां मजदूरी महंगी हो गई है. दूसरी ओर, भारत के पास 65% युवा आबादी है, जो अगले 30 साल तक दुनिया को सबसे सस्ती और कुशल लेबर दे सकती है.     ताइवान का साया: दुनिया की 90% एडवांस चिप्स ताइवान में बनती हैं. चीन की ताइवान पर नजर ने वैश्विक टेक कंपनियों को डरा दिया है. उन्हें एक ऐसा ‘बैकअप’ चाहिए जो युद्ध की स्थिति में भी ग्लोबल सप्लाई चेन को चालू रख सके. चीन की राह रुकी, तो भारत को कैसे होगा बंपर फायदा?     इलेक्ट्रॉनिक्स का नया गढ़: बजट 2026 में मोबाइल और लैपटॉप कंपोनेंट्स पर इम्पोर्ट ड्यूटी घटाना एक सोची-समझी चाल है. भारत अब केवल असेंबली नहीं, बल्कि कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग का हब बन रहा है. 2025 तक भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट 120 बिलियन डॉलर पार करने का अनुमान है.     सेमीकंडक्टर: चीन की दुखती रग: चीन चिप वॉर में अमेरिका से पिछड़ रहा है. भारत ने इसका फायदा उठाते हुए 1.5 लाख करोड़ रुपये का ‘सेमीकंडक्टर मिशन’ शुरू किया है. टाटा और माइक्रोन (Micron) जैसी कंपनियों के प्लांट भारत को उस लिस्ट में खड़ा कर देंगे, जहाँ आज केवल ताइवान और चीन हैं.     केमिकल सेक्टर में ‘प्रिवी’ जैसे खिलाड़ियों का दबदबा: चीन में पर्यावरण नियमों की सख्ती के कारण वहां के केमिकल प्लांट बंद हो रहे हैं. इसका सीधा फायदा प्रिवी स्पेशलिटी और आरती इंडस्ट्रीज जैसी भारतीय कंपनियों को मिल रहा है, जो ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन की जगह ले रही हैं. कंपनियों को क्या मिल रहा है? PLI स्कीम: जितना बनाओगे, उतना पैसा पाओगे. 14 से ज्यादा सेक्टरों में सरकार कंपनियों को कैश इंसेंटिव दे रही है. यह चीन की सब्सिडी का भारतीय जवाब है. नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम: पहले भारत में जमीन से लेकर बिजली तक के लिए 50 दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे. अब एक ही पोर्टल पर सारी क्लीयरेंस मिल रही है. ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ अब केवल कागजों पर नहीं, जमीन पर दिख रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश: बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 11.11 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. पीएम गतिशक्ति के तहत नए पोर्ट्स और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन रहे हैं, ताकि भारत से माल भेजना चीन से भी सस्ता पड़े. recent visitors 57

जबलपुर में 300 करोड़ का फ्लाईओवर बनेगा, MP बजट में जाम को कम करने की दिशा में बड़ा कदम

 जबलपुर   जबलपुर शहर के गढ़ा क्षेत्र में त्रिपुरी चौक, मेडिकल तिराहा और मेडिकल कॉलेज के सामने रोजाना लगने वाले भीषण जाम से राहत दिलाने के लिए लगभग ढाई से तीन किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की तैयारी की जा रही है। लोक निर्माण विभाग की ओर से इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। राज्य सरकार के बजट (MP Budget 2026) में स्वीकृति मिलने की स्थिति में यह जबलपुर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा। इस फ्लाईओवर के बन जाने से गढ़ा, त्रिपुरी चौक और मेडिकल क्षेत्र के रहवासियों को रोजाना लगने वाले जाम से बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही ए्बुलेंस, फायर ब्रिगेड सहित अन्य इमरजेंसी सेवाओं को भी जाम में फंसना नहीं पड़ेगा। ऐसा हो सकता है फ्लाईओवर का स्वरूप करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस फ्लाईओवर (Flyover Construction) की एक रैंप आईसीएमआर के सामने उतारे जाने की संभावना है, जबकि दूसरा रैंप सूपाताल क्षेत्र में बनाया जा सकती है। इसके अतिरिक्त साइड रैंप संजीवनी नगर और धनवंतरी नगर चौराहा की ओर उतारे जाने की योजना है। इससे मेडिकल मार्ग पर यातायात का दबाव काफी हद तक कम होगा और मरीजों, डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ व मेडिकल छात्रों को सुगम आवागमन मिलेगा। वर्तमान में त्रिपुरी चौक से पंडा की मढिय़ा होते हुए इमरती तालाब और गंगा नगर तिराहा तक प्रतिदिन जाम की स्थिति बनी रहती है। इस मार्ग से गुजरने वाली 40 से अधिक कॉलोनियों के रहवासी लंबे समय से यातायात अव्यवस्था से परेशान हैं। दो फ्लाईओवर चालू, एक निर्माणाधीन शहर में मदनमहल-दमोहनाका और कटंगा फ्लाईओवर पहले ही चालू हो चुके हैं, जबकि सगड़ा फ्लाईओवर निर्माणाधीन है। पेंटीनाका फ्लाईओवर का काम रक्षा विभाग से एनओसी मिलते ही शुरू होना है। बंदरिया तिराहासा ईं मंदिर फ्लाईओवर को पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं विजयनगर-धनवंतरी नगर फ्लाईओवर को बजट की मंजूरी मिलना बाकी है। इसके अलावा रेलवे पुल नंबर-2 से रद्दी चौकी फ्लाईओवर का प्राकलन तैयार किया जा रहा है और आईएसबीटी से आईटीआई फ्लाईओवर परियोजना पाइपलाइन में है, जिसके लिए केन्द्रीय रिजर्व निधि से फंड मिलना प्रस्तावित है। इन सबके बीच गढ़ा क्षेत्र में प्रस्तावित फ्लाईओवर शहर का सातवां फ्लाईओवर होगा। recent visitors 40

उज्जैन के सप्त सागरों की स्थिति पर एनजीटी का सख्त रुख, पर्यावरणीय संकट को लेकर उठाई आवाज

उज्जैन उज्जैन की धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय पहचान माने जाने वाले ‘सप्त सागर’ लगातार उपेक्षा, अतिक्रमण और प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। इस गंभीर स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को सीधे दखल देने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि आदेशों की अवहेलना और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सेंट्रल जोन बेंच के न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि स्थानीय प्रशासन न तो पूर्व आदेशों का समुचित पालन कर पाया और न ही समय पर संतोषजनक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक शिथिलता गंभीर परिणाम ला सकती है। अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई सुनवाई में सामने आया कि खसरा नंबर 1281 में दर्ज गोवर्धन सागर (कुल रकबा 36 बीघा) के 18.5 बीघा से अधिक हिस्से पर अवैध कब्जा हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भूमि पर किसी भी न्यायालय का कोई स्टे नहीं है, इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने शासन-प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि सप्तसागर के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य मिशन मोड में किया जाए। ट्रिब्यूनल ने प्रमुख सचिव (पर्यावरण) को मासिक निगरानी कर रिपोर्ट पेश करने और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी की गुणवत्ता की जांच कर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। पवित्र सरोवर बने नालियां आवेदक प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने माना कि उज्जैन के रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर और पुरुषोत्तम सागर, सभी की हालत दयनीय हो चुकी है। उज्जैन मास्टर प्लान-2021 के संदर्भ में ट्रिब्यूनल ने गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा कि तालाबों को कचरा डंपिंग यार्ड में तब्दील कर दिया गया है। शहर का अनुपचारित सीवेज सीधे इन जल निकायों में प्रवाहित हो रहा है। अवैध निर्माणों और गंदे पानी के कारण जल गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। जारी रहेगी सुनवाई एनजीटी ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें कलेक्टर और नगर निगम को की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई में प्रशासन को यह बताना होगा कि जमीनी स्तर पर आखिर क्या बदला। संकेत साफ है कि महाकाल की नगरी में आस्था के साथ अब पर्यावरणीय जवाबदेही भी कसौटी पर है। एनजीटी ने गेंद पूरी तरह शासन-प्रशासन के पाले में डाल दी है। एनजीटी के मुख्य निर्देश ये     अतिक्रमण हटाना : खसरा नंबर 1281 (गोवर्धन सागर) सहित सभी सातों सागरों से तत्काल और पूर्ण अतिक्रमण हटाने के निर्देश।     सीवेज पर पूर्ण रोक : बिना उपचारित (अनट्रीटेड) गंदा पानी और सीवेज किसी भी जल निकाय में बहाने पर पूरी तरह रोक।     मुख्य सचिव की सीधी भूमिका : राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर कलेक्टर और नगर निगम से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएं।     मासिक निगरानी तंत्र : प्रमुख सचिव (पर्यावरण) हर महीने प्रगति की निगरानी कर रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में पेश करेंगे।     जल गुणवत्ता की जांच : मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी के नमूने लेकर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।     अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य : कलेक्टर और नगर निगम को 20 फरवरी 2026 की अगली सुनवाई से पहले की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।   recent visitors 33

3 फरवरी राशिफल: ग्रह-नक्षत्रों के योग से चमकेगी इन राशियों की किस्मत

मेष राशि- मेष राशि वालों के लिए समय कुल मिलाकर ठीक रहने वाला है। काम करने का मन बना रहेगा और आप चीज़ों को अपने तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। हालांकि जल्दबाजी में कोई फैसला लेने से बचना जरूरी है, वरना छोटी सी बात बिगड़ सकती है। घर में माहौल सामान्य रहेगा और किसी करीबी का साथ आपको राहत देगा। पैसों के मामले में स्थिति ठीक रहेगी, लेकिन फालतू खर्च से बचना समझदारी होगी। सेहत सामान्य रहेगी, बस थकान हो तो आराम जरूर करें। वृषभ राशि- वृषभ राशि वालों के लिए धैर्य रखना सबसे जरूरी रहेगा। जो काम काफी समय से अटके पड़े हैं, उनमें अब धीरे-धीरे हलचल दिख सकती है। मेहनत रंग लाएगी, बस बीच में हिम्मत न हारें। पैसों की स्थिति संतुलित रहेगी, जरूरतें पूरी होंगी। घर-परिवार का माहौल शांत रहेगा और अपनों के साथ समय बिताने से मन हल्का होगा। खाने-पीने में लापरवाही न करें। मिथुन राशि- मिथुन राशि वालों के लिए बातचीत और लोगों से जुड़ना फायदेमंद रहेगा। काम से जुड़ी कोई नई जिम्मेदारी या जानकारी मिल सकती है। दिमाग तेज चलेगा और आप चीज़ों को जल्दी समझ पाएंगे। पैसों को लेकर ज्यादा तनाव नहीं रहेगा, लेकिन बेवजह खर्च करने से बचें। रिश्तों में साफ बात करेंगे तो गलतफहमियां दूर होंगी। खुद को जरूरत से ज्यादा बिजी न रखें। कर्क राशि- कर्क राशि वालों का मन थोड़ा भावुक रह सकता है। छोटी-छोटी बातें आपको ज्यादा सोचने पर मजबूर कर सकती हैं। परिवार का साथ मिलेगा और घर का माहौल आपको संभाले रखेगा। काम की रफ्तार थोड़ी धीमी रह सकती है, लेकिन चिंता की बात नहीं है। खर्च सोच-समझकर करें। नींद और आराम पूरा न होने पर चिड़चिड़ापन हो सकता है। सिंह राशि- सिंह राशि वालों पर काम की जिम्मेदारी बढ़ सकती है। लोग आपसे उम्मीद लगाएंगे और आपकी बातों को ध्यान से सुनेंगे। मेहनत का फायदा मिलेगा, बस अहंकार से बचें। पैसों में सुधार के संकेत हैं, लेकिन खर्च भी साथ-साथ बढ़ सकता है। घर में किसी बात पर बहस से बचें। सेहत सामान्य रहेगी, लेकिन तनाव न पालें। कन्या राशि- कन्या राशि वालों के लिए प्लान बनाकर चलना फायदेमंद रहेगा। काम में ध्यान देंगे तो अच्छे नतीजे मिलेंगे। जो लोग नौकरी या पढ़ाई में हैं, उनके लिए समय ठीक है। पैसों में संतुलन बना रहेगा और थोड़ी बचत भी हो सकती है। घर के लोग साथ देंगे। सेहत के मामले में लापरवाही न करें, छोटी दिक्कत भी बढ़ सकती है। तुला राशि- तुला राशि वालों को हर मामले में बैलेंस बनाकर चलना पड़ेगा। काम और घर दोनों को साथ संभालना होगा। कोई पुराना काम पूरा हो सकता है, जिससे राहत मिलेगी। पैसों की स्थिति सामान्य रहेगी। रिश्तों में सामने वाले की बात समझने की कोशिश करें। मन को शांत रखने के लिए खुद को थोड़ा समय दें। वृश्चिक राशि- वृश्चिक राशि वालों की मेहनत लोगों को दिखेगी। काम में भरोसा बढ़ेगा और किसी काम की तारीफ भी मिल सकती है। पैसों से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिल सकती है। रिश्तों में बात साफ रखें, मन में कुछ न रखें। ज्यादा सोचने से बचें, वरना बेवजह तनाव बढ़ेगा। धनु राशि- धनु राशि वालों के लिए कुछ नया सीखने और आगे बढ़ने का समय है। काम में नए मौके मिल सकते हैं या नई योजना बन सकती है। खर्च थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन हालात संभाल में रहेंगे। घर का माहौल सहयोग वाला रहेगा। कहीं आने-जाने या यात्रा की बात भी बन सकती है। सेहत ठीक रहेगी। मकर राशि- मकर राशि वालों को जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ना होगा। काम में स्थिरता रहेगी और धीरे-धीरे चीजें आपके पक्ष में आती दिखेंगी। पैसों को लेकर सतर्क रहना जरूरी है, उधार देने से बचें। घर की कोई जिम्मेदारी बढ़ सकती है। थकान महसूस हो तो खुद को आराम दें। कुंभ राशि- कुंभ राशि वालों के दिमाग में नए आइडिया आते रहेंगे। काम में बदलाव या कुछ नया करने का मन बनेगा। पैसों की स्थिति धीरे-धीरे सुधर सकती है। दोस्तों या जान-पहचान वालों से मदद मिलेगी। सेहत के लिए रोज़ का रूटीन ठीक रखना जरूरी रहेगा। मीन राशि- मीन राशि वालों का मन थोड़ा संवेदनशील रह सकता है। काम में रफ्तार धीमी रहेगी, लेकिन सब ठीक चलता रहेगा। खर्च जरूरत के हिसाब से करें। परिवार के लोग भावनात्मक सहारा देंगे। खुद को जरूरत से ज्यादा थकाने से बचें और आराम को समय दें। recent visitors 54

PDA की राजनीति ढोंग, असली एजेंडा परिवारवाद : मुख्यमंत्री योगी

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के 'पीडीए' नारे पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि विपक्षी दल को 'पीडीए' से ज्यादा 'परिवार' की चिंता है। योगी ने तंज कसते हुए कहा, "पीडीए तो बहाना है, असली लक्ष्य तो 'परिवार' है…!" मुख्यमंत्री ने केंद्रीय बजट में पीडीए को नजरअंदाज करने के सपा प्रमुख के आरोप पर सवाल उठाते हुए कहा, "जो लोग यह दावा करते हैं, उनसे यह पूछा जाना चाहिए कि जब सरकार ने उत्तर प्रदेश के छह करोड़ लोगों सहित पूरे देश में 25 करोड़ लोगों को गौरव और सम्मान के साथ आगे बढ़ने में मदद की, तो उनके कार्यकाल में ऐसा क्यों नहीं हो सका? पीडीए का मुद्दा तब भी जरूर रहा होगा।" उन्होंने कहा, "मैं पूछना चाहता हूं कि उस समय पीडीए पर चर्चा क्यों नहीं हुई? अपनी पार्टी (सपा) के शासनकाल में उन्हें (अखिलेश को) सिर्फ परिवार की ही चिंता क्यों थी?" योगी समेत भाजपा के शीर्ष नेताओं ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर वंशवादी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने राष्ट्र को परिवार के रूप में देखने का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। हमारा मुख्य उद्देश्य गरीबों, युवाओं और किसानों की सहायता करना है। हमारा लक्ष्य उच्च श्रेणी की अवसंरचना सुनिश्चित करना है, जो आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से बनाई गई है।" मुख्यमंत्री ने कहा, "यह दृष्टिकोण बजट में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है, लेकिन दूरदृष्टिहीन लोग, भविष्य की कोई योजना न रखने वाले लोग ऐसी निरर्थक बातों में उलझे रहते हैं।" योगी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा बजट की आलोचना को भी खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए बढ़ाए गए आवंटन से उत्तर प्रदेश को मदद मिलेगी, जो देश में रक्षा विनिर्माण का एक बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि इससे राज्य के साथ-साथ निवेशकों को भी लाभ होगा। योगी ने कहा कि केंद्रीय बजट के आधार पर प्रदेश सरकार फरवरी में बजट प्रस्तुत करेग और डबल इंजन सरकार के इस बजट का लाभ देश की सबसे बड़ी आबादी को प्राप्त होगा। recent visitors 52

मौसम पूर्वानुमान में क्रांति: NVIDIA के AI से 500 गुना तेजी से मिलेगा तूफान का अलर्ट

मौसम का सटीक अनुमान लगाने के लिए वैज्ञानिक अलग-अलग तकनीकों का इस्‍तेमाल करते हैं। भविष्‍य में आर्टिफ‍िशियल इंटेलिजेंस यानी AI इस काम में भी मददगार होगा। AI की मदद से तूफान की भविष्‍यवाणी और सटीकता से की जाएगी जिससे जानमाल का नुकसान कम करने में मदद मिलेगी। यह सब संभव होगा दिग्‍गज कंपनी एनवीड‍िया (Nvidia) के नए एआई मॉडल से, जिसका नाम Earth-2 है। कहा जा रहा है कि सुपरकंप्‍यूटर से भी फास्‍ट इन एआई मॉडलों की मदद से मौसम भी भविष्‍यवाणी और जलवायु परि‍वर्तन का अनुमान लगाना पूरी तरह से बदल सकता है। इनमें से कुछ का इस्‍तेमाल शुरू भी हो गया है। क्‍या है Earth-2 दुनिया की दिग्‍गज टेक कंपनी एनवीड‍िया ने Earth-2 नाम से एआई मॉडलों को पेश किया है। इन मॉडलों में CorrDiff, FourCastNet3, Medium Range, Nowcasting, Global Data Assimilation और PhysicsNeMo जैसे फ्रेमवर्क शामिल हैं। इनमें से PhysicsNeMo को AI-फिजिक्स मॉडलों को ट्रेनिंग देने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए लाया गया है। ये सभी मॉडल- सैटेलाइट और रडार व मौसम स्‍टेशनों से मिली जानकारी को एक जगह इंटीग्रेट करके हमारे वायुमंडल की स्‍थि‍त‍ि का सटीक आकलन करते हैं। जेनरेट‍िव एआई का इस्‍तेमाल Earth-2 एआई मॉडलों के कई फ्रेमवर्क जेनरेट‍िव एआई का इस्‍तेमाल करते हैं। इससे भविष्‍यवाणी करना ज्‍यादा फास्‍ट हो जाता है। दावा है कि मौजूदा तकनीक से 500 गुना फास्‍ट यह एआई मॉडल मौसम की भविष्‍यवाणी कर सकते हैं। अलग-अलग मॉडलों के अलग-अलग काम Earth-2 एआई मॉडलों में जितने भी फ्रेमवर्क हैं, उनके अलग-अलग काम हैं। टेक रडार की रिपोर्ट के अनुसार, CorrDiff फ्रेमवर्क, जनरेटिव AI आर्किटेक्चर का इस्‍तेमाल करके महाद्वीप के लेवल से जुड़े अनुमानों को रीजनल अनुमानों में बदल देता है। इसी तरह से FourCastNet3 का काम हवा, टेंपरेचर और नमी का सटीक अनुमान लगाना है। दावा है कि यह ट्रेड‍िशनल मॉडल से 60 गुना तेज भविष्‍यवाणी करता है। इसी तरह से PhysicsNeMo मॉडल का काम AI-फिजिक्स मॉडलों को ट्रेन करना है। रिपोर्ट के अनुसार, मौसम की भविष्‍यवाणी करने वाले संगठनों और वैज्ञानिक रिसर्च, दोनों के लिए यह उपयोगी है। इसके आगे सुपरकंप्‍यूटर भी फेल Earth-2 इतना एडवांस और होशियार है कि यह वायुमंडल में हो रहे बदलावों को चंद सेकंड में भांप लेता है। इस काम को करने में सुपरकंप्‍यूटरों को घंटों लग जाते हैं। अगर किसी बदलाव को कुछ सेकंड में भांप लिया जाए तो लोगों तक अलर्ट जल्‍दी भेजा जा सकता है। एनवीड‍िया के कुछ फ्रेमवर्क का इस्‍तेमाल कई देशों के मौसम विभाग पहले से कर रहे हैं। इस्राइल में हो रहा इस्‍तेमाल इस्राइल की मौसम बताने वाली सर्विस में CorrDiff का उपयोग किया जा रहा है। जैसाकि हमने बताया, यह महाद्वीप स्‍तर होने वाली हलचलों को से क्षेत्रीय आकलन करके एक अनुमान बना देता है। इस्राइल बहुत जल्‍द Nowcasting को भी अपनाने वाला है, जिसके बाद एक द‍िन में 8 बार मौसम की भविष्‍यवाणी हाई-रेजॉलूशन ग्राफ‍िक्‍स से की जा सकेगी। इस्राइल के अलावा, ताइवान के मौसम विज्ञानी भी एनवीड‍िया के कई फ्रेमवर्क्‍स को इस्‍तेमाल कर रहे हैं। recent visitors 50

लैंडफिल से लग्जरी बस अड्डा तक: कूड़े के पहाड़ खत्म कर नई पहचान देने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली सरकार की योजना के मुताबिक भलस्वा में बनने वाले नए अंतरराज्यीय बस अड्डे से हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के लिए बसों का संचालन किया जाएगा। वर्तमान में इन सभी राज्यों की बसें कश्मीरी गेट स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डे से चलती हैं, जहां पहले से ही यात्रियों और बसों का भारी दबाव है। भलस्वा में नया बस अड्डा शुरू होने के बाद कश्मीरी गेट ISBT पर भीड़ और ट्रैफिक का दबाव काफी हद तक कम होने की उम्मीद है। नए बस अड्डे के बनने से यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं मिलने की संभावना है। अभी कश्मीरी गेट से रोजाना सैकड़ों बसें इन राज्यों के लिए रवाना होती हैं, जिससे वहां अक्सर जाम और अव्यवस्था की स्थिति बनी रहती है। भलस्वा में बस अड्डा तैयार होने के बाद बसों को बाहरी दिल्ली के भारी ट्रैफिक से गुजरकर कश्मीरी गेट तक आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे बस संचालन अधिक सुचारू होगा और यात्रियों का समय भी बचेगा। भलस्वा बस अड्डे से होंगे कई तरह के फायदे भलस्वा बस अड्डे की एक बड़ी खासियत इसकी रणनीतिक स्थिति होगी। यह इलाका दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर के बेहद करीब स्थित है। ऐसे में यहां से चलने वाली बसें कम समय में ही दिल्ली की सीमा पार कर सकेंगी। इसके विपरीत कश्मीरी गेट से निकलने वाली बसों को दिल्ली बॉर्डर तक पहुंचने में कई बार घंटों लग जाते हैं। नए बस अड्डे के बनने से इन राज्यों की ओर जाने वाली बसों का सफर न सिर्फ छोटा होगा, बल्कि ज्यादा आसान और आरामदायक भी हो जाएगा। बायो-माइनिंग के जरिए साफ की जा रही है लैंडफिल साइट दिल्ली नगर निगम ने भलस्वा लैंडफिल साइट को पूरी तरह साफ करने के लिए इस साल के अंत तक का लक्ष्य तय किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस परियोजना को लेकर हाल ही में दिल्ली सरकार और एमसीडी के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच अहम बैठक भी हुई है। बाहरी दिल्ली में स्थित यह लैंडफिल साइट करीब 70 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई है और इसकी ऊंचाई 60 मीटर से ज्यादा हो चुकी है। नगर निगम इस कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए बायो-माइनिंग तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। इस प्रक्रिया के जरिए पुराने कचरे को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर वैज्ञानिक तरीके से उसका निपटान किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि लैंडफिल साइट के खत्म होने से न केवल आसपास के इलाकों का पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि भलस्वा में बनने वाला नया अंतरराज्यीय बस अड्डा दिल्ली के यातायात ढांचे को भी बड़ी राहत प्रदान करेगा। recent visitors 45