रणबीर कपूर की ‘रामायण’ पर अरुण गोविल का बड़ा बयान

मुंबई,  प्रभास स्टारर 'आदिपुरुष' को लेकर हुए विवादों और दर्शकों की निराशा के बाद अब हर किसी की नजर रणबीर कपूर की मेगा बजट फिल्म 'रामायण' पर टिकी है। करीब 4,000 करोड़ के बजट में बन रही इस फिल्म को लेकर फैंस के मन में उत्सुकता के साथ संशय भी है। ऐसे में टीवी के प्रतिष्ठित 'राम' अरुण गोविल ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी है। खास बात यह है कि वह इस फिल्म में राजा दशरथ की भूमिका निभा रहे हैं। राम का किरदार निभाने के लिए आत्मा का शुद्ध होना जरूरी अरुण गोविल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि किसी भी कलाकार के लिए भगवान का किरदार निभाना सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक, भगवान की भूमिका निभाने के लिए इंसान की आत्मा का साफ और अच्छा होना बहुत जरूरी है। साथ ही वह एक अच्छा इंसान भी होना चाहिए। उन्होंने निर्देशक नितेश तिवारी की तारीफ करते हुए कहा कि पूरी टीम ने इस फिल्म पर बेहद मेहनत की है। रणबीर कपूर को लेकर उन्होंने सकारात्मक राय देते हुए कहा कि वे न केवल शानदार अभिनेता हैं, बल्कि अच्छे इंसान भी हैं और भगवान राम के रूप में प्रभावशाली लग रहे हैं। 'आदिपुरुष' से तुलना करना ठीक नहीं अरुण गोविल ने साफ कहा कि रणबीर कपूर की 'रामायण' की तुलना 'आदिपुरुष' से करना गलत होगा। उनके अनुसार हर निर्देशक का विजन अलग होता है और किसी एक फिल्म की असफलता के आधार पर दूसरी फिल्म को पहले से जज करना सही नहीं। उन्होंने कहा कि 'आदिपुरुष' एक अलग तरह का प्रयास था, जबकि 'रामायण' एक नया और स्वतंत्र प्रोजेक्ट है, जिसे उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। भगवान जैसा दिखना भी जरूरी अरुण गोविल ने यह भी माना कि जब एक मानक स्थापित हो जाता है तो तुलना होना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा, भगवान की भूमिका निभाने के लिए लुक बहुत मायने रखता है। दर्शकों को स्क्रीन पर देखते ही महसूस होना चाहिए कि वे सच में भगवान को देख रहे हैं। भव्य पैमाने पर बन रही है 'रामायण' 68 वर्षीय अरुण गोविल ने बताया कि उन्होंने फिल्म की शूटिंग काफी पहले पूरी कर ली थी। यह फिल्म नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियो द्वारा बनाई जा रही है, जिसमें यश की कंपनी मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस भी सहयोग कर रही है। फिल्म आधुनिक तकनीक और अत्याधुनिक वीएफएक्स की मदद से दर्शकों को हजारों साल पुराने युग में ले जाने का प्रयास करेगी। भव्य पैमाने, दमदार स्टारकास्ट और मजबूत तकनीकी टीम के साथ 'रामायण' को भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक माना जा रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह फिल्म दर्शकों की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।   recent visitors 31

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा-परेड, अनुशासन और आपसी तालमेल का बेहतरीन नमूना होती है

लोकभवन में हुआ एन.सी.सी. एट होम समारोह भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि परेड, अनुशासन और आपसी तालमेल का बेहतरीन नमूना होती है। हर देशवासी को देशभक्ति और ऊर्जा से भर देती है। हम सभी को देश सेवा की प्रेरणा देती है। गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड में शामिल प्रत्येक एन.सी.सी. कैडेट्स अनुशासन और प्रेरणा का प्रतीक है। राजधानी के कर्तव्य पथ पर आपकी अनुशासित, प्रभावी और गरिमामयी सहभागिता ने प्रदेशवासियों का मान बढ़ाया है। आप सभी हमारा गौरव हैं। राज्यपाल  पटेल सोमवार को लोकभवन के सांदीपनि सभागार में एन.सी.सी. एट होम समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड और विभिन्न प्रतियोगिताओं में पदक एवं उपलब्धियां प्राप्त करने वाले मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ निदेशालय के एन.सी.सी. कैडेट्स को सम्मानित किया। राज्यपाल  पटेल ने राष्ट्रीय स्तर पर ओवरऑल तीसरा स्थान प्राप्त करने पर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एन.सी.सी. निदेशालय को बधाई दी। भविष्य में प्रथम स्थान प्राप्त करने की शुभकामनाएं दी। समारोह में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी भी मौजूद थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि एन.सी.सी. कैडेट्स शिक्षित और अनुशासित होने के साथ संस्कारवान भी बने। आदर्श जीवन मूल्यों को धारण करें। माता-पिता, गुरुजनों, प्रशिक्षकों और वरिष्ठों का हमेशा सम्मान करें। उन्होंने कहा कि युवा संविधान के मूल्यों, न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व को जीवन में उतार कर  गरीब,  वंचित,  और  ज़रूरतमंदों के कल्याण में उपयोग करें। स्वच्छता, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण,  डिजिटल साक्षरता और स्वास्थ्य जागरूकता के क्षेत्रों में ध्वज वाहक के रूप में समाज का नेतृत्व करें। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि हर युवा “हम दिन चार रहे न रहे, माँ तेरा वैभव सदा रहे” के भाव के साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय योगदान दें। संकल्प लें कि जीवन  का  प्रत्येक  क्षण  राष्ट्र  प्रेम  और  भक्ति  के  साथ  अपने  कर्तव्यों, अधिकारों, नियमों और सामाजिक दायित्वों का आदर्श रूप में पालन करेंगे। राज्यपाल  पटेल ने समारोह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एन.सी.सी. कैडेट्स की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां जोश-जज्‍़बे और जुनून का उदाहरण है। यह भारत की विविधता में एकता को प्रस्तुत कर रही थी। राज्यपाल  पटेल के समक्ष एन.सी.सी. कैडेट्स ने “ऐ मेरे भारत की नारी, तू है महान” से नारी की महानता और “नव भारतम्-श्रेष्ठ भारतम्” पर आधारित प्रस्तुतियों के माध्यम से नए भारत को दिखाया। राज्यपाल  पटेल का मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एन.सी.सी. निदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल जे.पी. सिंह ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह-भेंट कर अभिनंदन किया। मेजर जनरल सिंह ने स्वागत उद्बोधन और रिपब्लिक डे कैम्प-2026 में प्रदेश की सहभागिता के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। सीनियर अंडर ऑफिसर सु प्रथा सिंह उमठ ने रिपब्लिक डे कैम्प- 2026 के अनुभव साझा किए। कार्यक्रम में राज्यपाल के अपर सचिव  उमाशंकर भार्गव, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ एन.सी.सी. निदेशालय के अधिकारी-कर्मचारी, एन.सी.सी. कैडेट्स और उनके परिजन मौजूद थे।   recent visitors 27

कृषि नवाचार की मिसाल: कोंडागांव जिले में शुरू हुई कसावा की खेती

कोंडागांव. कोंडागांव जिला भौगोलिक दृष्टि से वर्षा आधारित एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहाँ लंबे समय से धान एवं कुछ सीमित फसलों की खेती की जाती रही है, जिससे किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता, इस आशय कृषि विज्ञान केंद्र,कोंडागांव द्वारा कसावा फसल की खेती  व मूल्य संवर्धन पर रविवार को एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया जिसमें केशकाल  विकासखंड के अमोडा, डोंगइपारा,सलेभाट, सिंकागांव व चेरबेडा के 56 किसानों ने भाग लिया | इस कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ.सुरेश कुमार मरकाम द्वारा किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, उन्होंने बताया कि कसावा एक ऐसी फसल है जो कम पानी, कम उर्वरक एवं सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक उगाई जा सकती है तथा इससे खाद्य उत्पाद,स्टार्च,टैपिओका,आटा,चिप्स एवं पशु आहार जैसे अनेक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं  उन्होंने कसावा फसल की आर्थिक उपयोगिता,मूल्य संवर्धन की संभावनाओं तथा इसके माध्यम से किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में विस्तार से जानकारी दी,जिससे किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त हो सके ।   इस अवसर पर ग्राम सरपंच श्रीमती चंद्रकला सरकार ने कसावा की खेती को ग्रामीण एवं आदिवासी किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया,वहीं जिला महिला मुक्ति मोर्चा की अध्यक्ष श्रीमती सोमा दास ने इसे महिला किसानों एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए आजीविका का एक सशक्त साधन बताया। इसके साथ ही केंद्र के भूपेन्द्र ठाकुर, शस्य वैज्ञानिक,  द्वारा कसावा की उन्नत किस्म ‘ जया’ के पोषण गुणों पर प्रकाश डाला , जो विटामिन-ए से भरपूर  किस्म है तथा अतिशीघ्र तैयार होने वाली फसल है, और विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में कुपोषण की समस्या को कम करने में सहायक सिद्ध हो सकती है। उन्होंने बताया कि इस किस्म के नियमित सेवन से बच्चों एवं महिलाओं में विटामिन-ए की कमी को दूर करने में मदद मिलती है, जिससे पोषण सुरक्षा को बल मिलता है तथा किसानों को फसल प्रबंधन, निराई-गुड़ाई एवं रोग नियंत्रण से संबंधित तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। वहीं केंद्र की डॉ.प्रिया सिन्हा, फार्म मशीनरी वैज्ञानिक ने किसानों को कसावा की कटिंग लगाने की वैज्ञानिक तकनीक,उचित रोपण दूरी,भूमि की तैयारी तथा मशीनों के माध्यम से कसावा की खेती के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी,जिससे श्रम लागत कम होती है और उत्पादन में वृद्धि संभव होती है।   नवीन किस्म  के साथ नवाचार:  डॉ.सुरेश मरकाम,द्वारा राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन (NHM) के अंतर्गत लगभग 15 हेक्टेयर  क्षेत्र में किसानों के खेतों पर कसावा की खेती करवाई जा रही है,कसावा (Cassava/टैपिओका),जिसे स्थानीय भाषा में “आलू कांदा”   कहा जाता है,सामन्यत: खुले बाजार में उबालकर बेचीं जाने वाली फसल है,  इस परियोजना में किसानो को कसावा की कटिंग ,दवाई, जैविक खाद व मशीन (समूह में )वितरित किया जायेगा जिससे किसान इस नवाचार से  स्थायी रूप से जुड़ सके , सामान्यत: किसान स्थानीय किस्म का उपयोग करते है जिसमे उपज  कम होता है तथा उसका पोषक मान  भी कम होता है , किसानो को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की केंद्रीय कंद फसल अनुसंधान संस्थान,तिरुवनंतपुरम (तिरुअनंतपुरम), केरल की  विकसित किस्म (  जया )  वितरित की जा रही है प्रति पौधा पैदावार भी अधिक होता है। कम प्रतिस्पर्धी एवं अधिक लाभ वाली फसल आलू कांदा :- कार्यक्रम में विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ.हितेश मिश्रा द्वारा जिले में कृषि नवाचार को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया गया तथा जिले में कसावा की खेती को एक नवाचार के रूप में किसानों के खेतों में बढ़ावा दिया जा रहा है,जिसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, फसल विविधीकरण, पोषण सुरक्षा तथा परंपरागत कृषि से हटकर कम प्रतिस्पर्धी एवं अधिक लाभ देने वाली फसलों को अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित करना है उन्होंने बताया कि कसावा जैसी फसलें बाजार में कम उपलब्ध होने के कारण अधिक मांग रखती हैं और किसानों को अन्य पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर लाभ प्रदान कर सकती हैं। recent visitors 25

चांदी का कड़ा: किन राशियों को पहनना चाहिए और किन्हें बचना चाहिए? पूरी जानकारी यहाँ

ज्योतिष शास्त्र में चांदी बहुत महत्वपूर्ण और विशेष मानी जाती है. चांदी का संबंध चंद्र और शुक्र ग्रह से माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिस व्यक्ति की कुंडली में चंद्र मजबूत होता है, तो उसकी सेहत हमेशा अच्छी रहती है. साथ ही व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है. वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शुक्र ग्रह सुख, वैभव और संपन्नता प्रदान करता है. यही कारण है कि लोग चांदी की अंगूठी या कड़ा अपने हाथों में पहनते हैं, तो आइए आज हम आपको बातते हैं कि चांदी का कड़ा किन रशि के जातकों के लिए शुभ माना जाता है? साथ ही जानते हैं कि किन राशि के जातकों को चांदी का कड़ा बिल्कुल भी नहीं पहनना चाहिए? इन तीन राशि वालों के लिए चांदी का कड़ा है बहुत शुभ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कर्क, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को चांदी का कड़ा जरूर पहनना चाहिए. माना जाता है कि इन तीन राशि के जातकों को चांदी का कड़ा विशेष लाभ प्रदान करता है. ये तीनों ही राशियां जल तत्व की मानी जाती हैं. चांदी का संबंध भी जल तत्व से ही है. इसी वजह से तीनों राशि के जातकों के लिए चांदी का कड़ा पहनना शुभ और फलदायी होता है. चांदी का संबंध चंद्रमा और शुक्र ग्रह से बताया गया है. चंद्रमा मन, सोच और मानसिक शांति का कारक माना जाता है. वहीं शुक्र सुख, सुंदरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. कहते हैं कि व्यक्ति की कुंडली में अगर ये दो ग्रह मजबूत होते हैं, तो जीवन में शांति और संतुलन बना रहता है. किन राशि वालों को चांदी का कड़ा नहीं पहनना चाहिए? ज्योतिष के अनुसार, मेष, सिंह और धनु राशि वालों को चांदी या इसका कड़ा नहीं पहनना चाहिए. इन राशि वालों को चांदी पहनने से मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, इसलिए इन तीन राशि के जातकों को चांदी का कड़ा या अन्य चांदी का आभूषण पहनने से परहेज करना चाहिए. किस दिन और किस हाथ में पहनें? चांदी का कड़ा पहनने के लिए सबसे शुभ दिन सोमवार और शुक्रवार माना गया है. पुरुषों को चांदी का कड़ा दाहिने हाथ में पहनना चाहिए. जबकि महिलाओं को बाएं हाथ में पहनना चाहिए. recent visitors 41

रण उत्सव की तर्ज पर सिंहस्थ 2028 में उज्जैन में विकसित होगी टेंट सिटी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में कच्छ का रण उत्सव बना भारत की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता का वैश्विक प्रतीक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रण उत्सव में की सहभागिता भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में प्रारंभ हुआ गुजरात में रण ऑफ कच्छ का 'रण उत्सव' आज भारत की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन क्षमता का वैश्विक प्रतीक बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भव्य 'रण उत्सव' में सहभागिता कर विश्व स्तरीय टेंट सिटी की व्यवस्थाओं का अवलोकन करने के बाद कहा कि जहां कभी बंजर भूमि थी, वहां आज किसानों की सहभागिता से पर्यटन, आजीविका और विकास का मॉडल खड़ा हुआ है, जिसे दुनिया देख रही है। लोक कलाकारों की जीवंत प्रस्तुतियां और गुजरात की समृद्ध संस्कृति, इस उत्सव को विशिष्ट पहचान देती हैं। यह प्रेरक उदाहरण है। उज्जैन में वर्ष-2028 में आयोजित होने वाले 'सिंहस्थ' में 'रण उत्सव' की तर्ज पर टेंट सिटी विकसित की जाएगी। साथ ही, मध्यप्रदेश में जहां पर्यटकों की संख्या अधिक है, वहां भी टेंट सिटी की योजना पर कार्य किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार मिलेगा और किसान भी लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भुज में स्थित 'स्मृति वन', जो भूकंप पीड़ितों की स्मृतियों को सहेजता है, वह संवेदना और संकल्प का प्रतीक है। इसी भावना के साथ भोपाल में भी यूनियन कार्बाइड त्रासदी के पीड़ितों की स्मृति में एक समर्पित संग्रहालय विकसित करने की भी योजना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी का विजन ही नए भारत की सशक्त पहचान है।   recent visitors 31

सागौन तस्करों पर शिकंजा, वन विभाग ने दो ठिकानों से 5 लाख से अधिक की लकड़ी की जब्ती

 कांकेर  उत्तर बस्तर कांकेर जिले के कापसी वनपरिक्षेत्र में वन विभाग ने अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ अब तक की बड़ी कार्रवाई की है. विभाग की टीम ने ग्राम पिपली में छापेमारी कर भारी मात्रा में अवैध सागौन की लकड़ी बरामद की है. इस कार्रवाई से इलाके के लकड़ी माफियाओं में हड़कंप मच गया है. वन विभाग को सूचना मिली थी कि ग्राम पिपली में सागौन की लकड़ी का अवैध भंडारण किया गया है. सूचना के आधार पर कापसी वनपरिक्षेत्र की टीम ने दो संदिग्ध आरोपियों के ठिकानों पर दबिश दी. तलाशी के दौरान भारी मात्रा में सागौन चिरान और सागौन लट्ठा बरामद किया गया. वन विभाग ने कुल 254 नग सागौन जब्त किया है, जिसका कुल आयतन 7.549 घन मीटर आंका गया है. बाजार में 5 लाख से ज्यादा है कीमत अधिकारियों के मुताबिक, जब्त की गई इस सागौन लकड़ी का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 5 लाख 13 हजार रुपये है. मौके पर लकड़ी परिवहन में उपयोग किए जाने वाले साधनों की भी बारीकी से जांच की गई. इस मामले में वन विभाग ने दोनों आरोपियों के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है. कड़ी कानूनी कार्रवाई और चेतावनी वन विभाग ने बताया कि आरोपियों के विरुद्ध वन अधिनियम 1927 और छत्तीसगढ़ वन उपज व्यापार विनियमन अधिनियम 1969 के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है. विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जंगलों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा. प्रशासन ने आगे भी इसी तरह की छापेमारी और निगरानी जारी रखने की बात कही है. recent visitors 29

सदन में सियासी संग्राम: देश की छवि पर बयान को लेकर राहुल गांधी घिरे, मंत्री ने लगाई फटकार

नई दिल्ली कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लोकसभा में चीन पर दिए गए बयानों से लगातार हंगामा जारी है। लोकसभा स्पीकर द्वारा बार-बार रोके जाने के बाद भी नेता विपक्ष लगातार एक ही मुद्दे पर बोलते रहे, जिसके बाद सदन की कार्यवाही 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद जब कार्यवाही शुरू हुई तो उन्होंने एक बार फिर से वही बात शुरू कर दी। इस पर नाराज होते हुए संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि नेता विपक्ष जो कुछ भी बोल रहे हैं, वह अपुष्ट जानकारी है। उनसे यही कहूंगा कि कोई ऐसी बात मत बोलिए, जिससे देश का और सेना का मनोबल टूटे। देश को नीचा दिखाकर क्या मिलेगा। हालांकि इसके बाद भी राहल गांधी नहीं रुके और फिर स्पीकर ने सदन की कार्यवाही चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी।   यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी बात रखने के लिए उठे कांग्रेस नेता ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के लेखों का हवाला देकर चीन पर बात रखते हुए कहा कि डोकलाम में चीनी सैनिक मौजूद थे। राहुल के इतना कहते ही सत्ता पक्ष के नेताओं ने इस पर हंगामा शुरू कर दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आखिर राहुल गांधी किसी ऐसी किताब का जिक्र सदन के पटल पर कैसे कर सकते हैं, जो कि छपी ही नहीं है। राजनाथ सिंह और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भी लोकसभा नेता विपक्ष के बयान की निंदा की। हालांकि, इसके बाद भी वह नहीं रुके और लगातार वही बात कहते रहे। राहुल की इस हठधर्मिता पर स्पीकर ओम बिरला ने राहुल को नसीहत भी दी। इस पर नेता विपक्ष ने कहा कि फिर आप ही बता दीजिए कि मुझे क्या कहना चाहिए और क्या नहीं। इस पर नाराज होते हुए स्पीकर ने कहा कि मैं यहां आपका सलाहकार नहीं हूं। लेकिन आपको उसी मुद्दे पर बोलना चाहिए, जिस पर यहां चर्चा हो रही है और जिसके बारे में आपने सदन को जानकारी दी थी। recent visitors 37