मातृभाषा को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनाने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूलों को दिए निर्देश

नई दिल्ली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 22 मई को गाइडलाइंस जारी की है। बोर्ड ने स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए मातृभाषा को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनाने का निर्देश जारी किया है। नई गाइडलाइन के अनुसार, अब 3 से 11 साल तक यानी प्री-प्राइमरी से लेकर कक्षा 5वीं तक के बच्चों की पढ़ाई उनकी मातृभाषा, घरेलू भाषा या क्षेत्रीय भाषा में कराई जाएगी। सीबीएसई के इस फैसले की नींव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा स्कूल शिक्षा 2023 (NCFSE 2023) पर आधारित है, जो शुरुआती शिक्षा में मातृभाषा के उपयोग को सबसे ज्यादा प्रभावशाली मानते हैं। CBSE ने स्कूलों को दिए निर्देश सीबीएसई के 22 मई को जारी सर्कुलर में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी संबद्ध स्कूलों को छात्रों की मातृभाषा को जल्द से जल्द मैप करना होगा और इसके अनुसार शिक्षण व्यवस्था तैयार करनी होगी। जुलाई 2025 से यह नई नीति लागू हो सकती है।     प्री-प्राइमरी से कक्षा 2 तक की शिक्षा को “फाउंडेशनल स्टेज” कहा गया है। इसमें पढ़ाई मातृभाषा या घरेलू भाषा में अनिवार्य की गई है।     कक्षा 3 से 5वीं तक के छात्रों के लिए भी मातृभाषा में पढ़ाई की सलाह दी गई है, हालांकि यहां माध्यम बदलने का विकल्प खुला रखा गया है। मातृभाषा में पढाई क्यों है जरूरी? सर्कुलर में कहा गया है कि छोटे बच्चे अपने घर की भाषा में ही सबसे तेजी से और गहराई से कॉन्सेप्ट को समझ पाते हैं। इसलिए शुरुआती शिक्षा में मातृभाषा का उपयोग बच्चे की सीखने की क्षमता, आत्मविश्वास और समझ को कई गुना बढ़ा सकता है। बता दें कि, UNESCO की मार्च 2024 में ‘लैंग्वेज मैटर-ग्लोबल गाइडेंस ऑन मल्टीलिंग्वल एजुकेशन’ रिपोर्ट में बताया गया कि दुनियाभर में 40% बच्चों और युवाओं के पास उनकी मदर-टंग में पढ़ने की सुविधा नहीं है। यही वजह है कि दुनिया के कई हिस्सों में बच्चे स्कूल तो जा रहे हैं लेकिन वो सिंपल टेक्स्ट नहीं पढ़ पाते और सिंपल मैथ्स सॉल्व नहीं कर पाते। इस रिपोर्ट में बताया गया कि, साल 2016 में 617 मिलियन बच्चे फाउंडेशनल लिट्रेसी और न्यूमरेसी नहीं सीख रहे थे। इनमें से दो तिहाई स्कूल जाते थे। कोविड महामारी से पहले लो और मिडल इनकम देशों के 57% 10-वर्षीय-बच्चे सिंपल टेक्स्ट नहीं पढ़ पा रहे थे। ये आंकड़ा कोविड महामारी के बाद 70% हो गया। राजस्थान के डुंगरपुर जिले में कारगर रहा एक्सपेरिमेंट राजस्थान के डुंगरपुर जिले में गुजरात में बोली जाने वाली वागड़ी भाषा काफी बोली जाती हैं। साल 2019 में यहां टीचर्स ने बच्चों को वागड़ी भाषा में ही पढ़ाना शुरू किया। इसके कुछ दिन बाद जब बच्चों का असेसमेंट लिया गया तो सामने आया कि उनकी रीडिंग स्किल्स पहले से काफी बेहतर थी। यूरोप और अफ्रीका में भी ऐसे ही नतीजे सामने आए हैं। इसके अलावा मातृभाषा में अगर बच्चे को बेसिक एजुकेशन दी जाए तो उसके लिए दूसरी भाषाएं सीखनी भी आसान हो जाती हैं। जल्द बनेगी NCF कार्यान्वयन समिति CBSE ने सभी स्कूलों को मई 2025 के अंत तक ‘एनसीएफ कार्यान्वयन समिति’ (NCF Implementation Committee0 गठित करने को कहा है। ये समिति छात्रों की मातृभाषा की पहचान करेगी और भाषा संसाधनों की मैपिंग करेगी। साथ ही, स्कूलों को लैंग्वेज मैपिंग एक्सरसाइज भी जल्द से जल्द पूरी करने के लिए कहा गया है। recent visitors 64

आज से 28 मई तक नरसिंहपुर समागम में नवाचार, निवेश और रोजगार की संभावनाओं के खुलेंगे द्वार

भोपाल मध्यप्रदेश में "उद्योग एवं रोजगार वर्ष" के अंतर्गत "कृषि उद्योग समागम 2025" प्रदेश के कृषि क्षेत्र को उद्योग, नवाचार और निवेश से जोड़ने की ऐतिहासिक पहल बनकर सामने आया है। त्रि-दिवसीय समागम का शुभारंभ आज नरसिंहपुर में कृषि उपज मंडी के समीप उप राष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ करेंगे। इस अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादवसहित किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल, सामाजिक न्याय, दिव्यांगजन कल्याण, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत, स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री श्री राव उदय प्रताप सिंह, सूक्ष्म,लघु और मध्‍यम उद्यम मंत्री श्री चैतन्य कुमार काश्यप, स्थानीय सांसद, क्षेत्रीय विधायक, जनप्रतिनिधि, कृषि उद्यमी, निर्यातक समूह के प्रतिनिधि, कृषि नवाचार कंपनियां, एफपीओ, किसान संगठन और बड़ी संख्या में किसान भाई उपस्थित रहेंगे। समागम 28 मई तक चलेगा। समागम से खुलेंगे रोजगार के नये द्वार ‘कृषि उद्योग समागम 2025’ का उद्देश्य प्रदेश की कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन से जोड़ते हुए निवेश, नवाचार और नौकरियों के नए द्वार खोलना है। मध्यप्रदेश अब गेहूं, दलहन, तिलहन, दुग्ध उत्पादन से लेकर एग्री-टेक तक कृषि से जुड़ी संभावनाओं का राष्ट्रीय केंद्र बनता जा रहा है। नरसिंहपुर की तुअर दाल को "वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट" योजना के तहत राज्य की पहचान के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है, जो स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ने की दिशा में सार्थक कदम है। यह समागम नीतिगत घोषणाओं को जमीनी क्रियान्वयन और सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन में बदलने का सशक्त उदाहरण बनेगा। शुगर उद्यमियों से मुख्यमंत्री करेंगे संवाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गन्ना उत्पादक किसानों के हित में शुगर इंडस्ट्री निवेशकों से संवाद करेंगे। निवेशकों को नरसिंहपुर अंचल में शुगर इंडस्ट्रीज की स्थापना और उसके संबंध में राज्य शासन की प्रोत्साहन नीतियों पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को हितलाभ प्रदान करेंगे और कृषि निवेश से जुड़े समूहों से भी संवाद करेंगे। नरसिंहपुर अंचल को चीनी उद्योग का केंद्र बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम होगा। तकनीक व नवाचार का प्रदर्शन समागम स्थल पर एग्री-हॉर्टी एक्सपो के तहत आधुनिक कृषि यंत्र, ड्रोन, एआई आधारित उपकरण, पॉलीहाउस, जैविक व नैनो उर्वरक, दुग्ध एवं गौशाला उत्पाद, और जल कृषि मॉडल प्रदर्शित किए जाएंगे। प्राकृतिक व जैविक खेती के लाइव मॉडल भी लगाए जाएंगे। खेती, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात से जुड़े विषयों पर व्याख्यान आयोजित किए जायेंगे। इसके अलावा समागम में विषय विशेषज्ञों द्वारा किसानों को तकनीकी ज्ञान व परामर्श प्रदान करने के लिये औषधीय फसलों, एफपीओ और निर्यातकों के लिए विशेष नेटवर्किंग सेशन व संगोष्ठियाँ आयोजित की जाएंगी। राज्य स्तरीय 90 स्टॉल समागम में आठ विभागों द्वारा कृषि नवाचारों पर आधारित 90 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे, जो किसानों को आधुनिक तकनीक व सरकारी योजनाओं की जानकारी देंगे।नरसिंहपुर जिले के किसानों के नवाचारों को वीडियो क्लिप्स के माध्यम से भी प्रदर्शित किया जाएगा।   recent visitors 63

अब नहीं होगी UPI से ठगी, भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने FRI नाम से एक नया सिक्योरिटी सिस्टम किया लॉन्च

नई दिल्ली आज के समय में डिजिटल पेमेंट हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। Paytm, Google Pay, PhonePe जैसे UPI ऐप्स के जरिए हम रोजाना कई लेनदेन करते हैं। लेकिन जैसे-जैसे डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। इसी खतरे को देखते हुए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है, जिससे डिजिटल पेमेंट सिस्टम और ज्यादा सिक्योर हो सकेगा। सरकार की नई पहल भारत सरकार के दूरसंचार विभाग (DoT) ने Financial Fraud Risk Indicator (FRI) नाम से एक नया सिक्योरिटी सिस्टम लॉन्च किया है। इसका मकसद है – ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाओं पर समय रहते रोक लगाना। इस सिस्टम की मदद से ऐसे मोबाइल नंबरों की पहचान की जाएगी जो किसी साइबर अपराध या धोखाधड़ी में शामिल हो सकते हैं। कैसे काम करता है FRI सिस्टम? FRI एक डिजिटल निगरानी प्रणाली है जो रियल टाइम में संदिग्ध मोबाइल नंबरों की पहचान करता है। जैसे ही कोई ऐसा नंबर बैंकिंग या UPI लेनदेन में शामिल होता है जो पहले से धोखाधड़ी में लिप्त हो सकता है, तो यह सिस्टम उस नंबर को तुरंत फ्लैग कर देता है। इसके बाद संबंधित बैंक या डिजिटल पेमेंट ऐप को अलर्ट भेज दिया जाता है ताकि उस नंबर से आगे किसी तरह का फ्रॉड न हो पाए। बैंक और UPI ऐप्स को मिलेगा सीधा फायदा इस नए सिस्टम का फायदा सिर्फ बैंकों तक सीमित नहीं है। Paytm, PhonePe, Google Pay और BHIM जैसे नॉन-बैंकिंग UPI ऐप्स को भी इससे मदद मिलेगी। ये ऐप्स अब उन मोबाइल नंबरों को पहले ही पहचान पाएंगे जो फ्रॉड में शामिल हो सकते हैं, जिससे लाखों यूजर्स सुरक्षित रहेंगे। FRI किन नंबरों को फ्लैग करेगा? FRI सिस्टम खासतौर पर उन मोबाइल नंबरों पर नजर रखेगा जिनमें निम्नलिखित गतिविधियां होंगी: जिन नंबरों का KYC पूरा नहीं हुआ है जो पहले से किसी धोखाधड़ी या फ्रॉड में इस्तेमाल हो चुके हैं जिन पर बार-बार नियमों का उल्लंघन हो रहा है जिन नंबरों से फर्जी कॉल या लिंक भेजे जा रहे हैं ऐसे नंबरों को पहचानकर या तो सतर्क किया जाएगा या जरूरत पड़ने पर ब्लॉक कर दिया जाएगा। FRI सिस्टम क्यों है जरूरी? पिछले कुछ वर्षों में UPI के जरिए फ्रॉड के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। कहीं किसी बुजुर्ग से OTP पूछकर पैसे उड़ा लिए जाते हैं, तो कहीं किसी फेक लिंक पर क्लिक कर यूजर्स का खाता खाली कर दिया जाता है। FRI जैसी प्रणाली की मदद से अब ऐसे मामलों में पहले से सतर्कता बरती जा सकेगी, जिससे धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी। यूजर्स के लिए जरूरी सलाह सरकार ने यह तो सुनिश्चित किया है कि सिस्टम लेवल पर सुरक्षा मजबूत की जाए, लेकिन आपकी सतर्कता भी उतनी ही जरूरी है। नीचे दिए गए सुझावों को अपनाकर आप भी सुरक्षित रह सकते हैं:     हमेशा अपने मोबाइल नंबर और UPI ऐप्स को वेरिफाई करें     अनजान नंबरों से आए कॉल या SMS पर यकीन न करें     किसी भी लिंक पर क्लिक करने से पहले सोचें और जांचें     कोई भी संदिग्ध लेनदेन दिखे तो तुरंत अपने बैंक या ऐप कस्टमर केयर से संपर्क करें     ऐप्स को हमेशा अपडेटेड वर्जन में रखें     फर्जी ऑफर्स और इनाम जैसी बातों से सावधान रहें DoT की यह पहल डिजिटल इंडिया को एक सुरक्षित इकोसिस्टम की ओर ले जा रही है। इससे जहां आम लोगों का भरोसा डिजिटल लेनदेन पर बढ़ेगा, वहीं धोखेबाजों की गतिविधियों पर भी लगाम लगेगी। अगर आप भी UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो यह जरूरी है कि आप खुद भी जागरूक और सतर्क रहें।   recent visitors 78

देवी अहिल्या की जयंती पर भोपाल में बड़ा सम्मेलन, पीएम मोदी होंगे शामिल

इंदौर देवी अहिल्या की जयंती पर भोपाल में बड़ा सम्मेलन हो रहा है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हो रहे है। प्रधानमंत्री उनकी जयंती पर 300 रुपये का एक विशेष सिक्का भी जारी कर रहा है। इसका नोटिफिकेशन हो चुका है देवी अहिल्या की 300 वीं जयंती 31 मई को आ रही है। इसे लेकर 28 मई से 31 मई तक शहर में अलग-अलग आयोजन होने जा रहे है। नगर निगम इस जयंती को इंदौर गौरव दिवस के रूप में बना रहा है। गौरव दिवस पर गायक जुबिन नौटियाल का एक शो भी इंदौर में होने जा रहा है। इसके अलावा अहिल्या बाई के जीवन पर आधारित एक नाटिका का मंचन भी इंदौर में होगा। देवी अहिल्या की जयंती पर भोपाल में बड़ा सम्मेलन हो रहा है। जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हो रहे है। प्रधानमंत्री उनकी जयंती पर 300 रुपये का एक विशेष सिक्का भी जारी कर रहा है। इसका नोटिफिकेशन हो चुका है। इंदौर में उल्लेखनीय काम करने वालों को नगर निगम की तरफ से इंदौर गौरव सम्मान भी दिया जाएगा। इसके अलावा गौरव दिवस पर प्रमुख स्थानों पर आतिशबाजी भी होगी। मेट्रो का संचालन होगा शुरू देवी अहिल्या की जयंती पर इंदौर मेट्रो ट्रेन का संचालन भी होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर इसकी शुरुआत करेंगे। मेट्रो ट्रेन शहर के सात किलोमीटर हिस्से में चलेगी। शहर के अन्य सामाजिक संगठन व संस्थाएं भी अलग-अलग आयोजन 28 मई से करने जा रहे है। इंदौर के राजवाड़ा पर प्रदेश सरकार 20 मई को कैबिनेट बैठक भी कर चुकी है।   recent visitors 76

1 जुलाई से दिल्ली में पुरानी गाड़ियों को तेल मिलना होगा बंद

 नई दिल्ली  दिल्ली सरकार ने वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए बड़े कदम उठा रही है। सरकार 1 जुलाई 2025 से दिल्ली में 10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल गाड़ियों और 15 साल से पुरानी पेट्रोल वाहनों को पेट्रोल पंपो पर फ्यूल नहीं मिलेगा। यह फैसला कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के निर्देशों के तहत लिया गया है। आइए इसके मुख्य नियमों के बारे में जानते हैं। नियम की प्रमुख बातें CAQM के निर्देशों के तहत 10 साल से ज्यादा पुरानी डीजल वाहन और 15 साल से ज्यादा पुरानी पेट्रोल वाहनों को पेट्रोल पंप पर फ्यूल नहीं दिया जाएगा। इसकी निगरानी के लिए पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को लगाया जा रहा है, जो गाड़ियों की उम्र की पहचान करने के साथ ही उन्हें फ्यूल नहीं देने में मदद करेगा। इस नियम का उल्लंघन करने पर वाहन को जब्त किया जा सकता है और मोटर वाहन अधिनियम, 1989 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। क्या है मामला? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में दिल्ली में 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों पर प्रतिबंध लगाया था। NGT ने 2014 में ऐसे वाहनों को सार्वजनिक स्थानों पर पार्क करने पर भी रोक लगाई थी। अब, ऐसी गाड़ियों को फ्यूल देने से रोकने के लिए यह नया कदम उठाया गया है। वहीं, इस कदम को दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए उठाया गया है। यह उन वाहन मालिकों के लिए एक चुनौती भी है, जिन्हें अब अपने पुराने वाहनों के ऑप्शन देखने होंगे। इस नियम के लागू होने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। ऐसे में वाहन मालिकों क्या करना होगा? 10 साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों के मालिकों को अपनी पुरानी गाड़ी को स्क्रैप करने के लिए आधिकारिक स्क्रैपिंग सेंटर्स से संपर्क करना होगा। वहीं, अगर आप अपनी गाड़ी को दिल्ली-एनसीआर से बाहर लेकर जाना चाहते हैं, तो उसके लिए आपको NOC लेना होगा। क्या है नियम? दरअसल, अप्रैल 2025 में 'कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट' (CAQM) ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि 1 जुलाई से सभी 'एंड ऑफ लाइफ' (EoL) यानी तय उम्र पार कर चुकी गाड़ियों को फ्यूल देना बंद किया जाए. इसमें डीजल गाड़ियों के लिए 10 साल और पेट्रोल गाड़ियों के लिए 15 साल की समयसीमा तय की गई है. कैमरे की भूमिका ANPR कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट पढ़कर उसकी उम्र की पहचान करेंगे. अगर कोई गाड़ी तय समय सीमा से ज्यादा पुरानी पाई गई, तो उसे ईंधन नहीं दिया जाएगा. आगे क्या होगा? – पुरानी गाड़ियों के मालिकों को एनओसी लेना होगा या गाड़ी को स्क्रैप करना होगा. – मोटर व्हीकल एक्ट, 1989 के तहत कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. परिवहन विभाग ने एक सार्वजनिक सूचना में कहा है कि अगर कोई वाहन कैमरे से या किसी अन्य निगरानी प्रणाली से पुराने वाहन के रूप में चिह्नित होता है, तो उसे फ्यूल नहीं मिलेगा. इसके अलावा वाहन मालिक को या तो उस गाड़ी एनओसी लेना होगा. कैमरा इंस्टॉलेशन की स्थिति अब तक लगभग सभी पेट्रोल और सीएनजी पंपों पर कैमरे लगाए जा चुके हैं. सिर्फ 10-15 पंप ही बचे हैं, जहां ये काम बाकी है. दिल्ली में लगभग 400 पेट्रोल पंप और 160 सीएनजी स्टेशन हैं. recent visitors 77

पश्चिम रेलवे ने लिया फैसला, अब रेलवे चलाएगा सुपरफास्‍ट तेजस स्‍पेशल ट्रेन

नई दिल्ली भारतीय रेलवे मुंबई सेंट्रल-राजकोट और मुंबई सेंट्रल-गांधीधाम के बीच सुपरफास्ट तेजस स्‍पेशल ट्रेनें चलाने जा रहा है. यात्रियों की सुविधा के लिए और खासतौर से गर्मी के मौसम में यात्रा की मांग को पूरा करने के लिए पश्चिम रेलवे ने ये फैसला लिया है. इसके अलावा, यात्रियों की मांग को पूरा करने के लिए पश्चिम रेलवे ने स्‍पेशल किराए पर दो जोड़ी स्पेशल ट्रेनों के फेरे भी बढ़ाए हैं. 1. ट्रेन सं. 09005/09006 मुंबई सेंट्रल – राजकोट तेजस सुपरफास्ट द्वि-साप्ताहिक विशेष [18 यात्राएं] ट्रेन नंबर 09005 मुंबई सेंट्रल-राजकोट स्पेशल हर बुधवार और शुक्रवार को मुंबई सेंट्रल से 23.20 बजे रवाना होगी और अगले दिन 11.45 बजे राजकोट पहुंचेगी. यह ट्रेन 30 मई से 27 जून, 2025 तक चलेगी. इसी तरह, ट्रेन नंबर 09006 राजकोट-मुंबई सेंट्रल स्पेशल हर गुरुवार और शनिवार को राजकोट से 18.30 बजे रवाना होगी और अगले दिन 07.30 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी. यह ट्रेन 31 मई से 28 जून, 2025 तक चलेगी. 2. ट्रेन नं. 09017/09018 मुंबई सेंट्रल – गांधीधाम तेजस सुपरफास्ट साप्ताहिक स्पेशल [10 ट्रिप] ट्रेन संख्या 09017 मुंबई सेंट्रल-गांधीधाम स्पेशल हर सोमवार को मुंबई सेंट्रल से 23.20 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 12.55 बजे गांधीधाम पहुंचेगी. यह ट्रेन 02 जून से 30 जून, 2025 तक चलेगी. इसी तरह, ट्रेन संख्या 09018 गांधीधाम-मुंबई सेंट्रल स्पेशल हर मंगलवार को गांधीधाम से 18.55 बजे प्रस्थान करेगी और अगले दिन 07.30 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी. यह ट्रेन 03 जून, 2025 से 01 जुलाई, 2025 तक चलेगी. कुछ ट्रेनों का विस्तार भी किया गया है 1. ट्रेन संख्या 09067 उधना-जयनगर अनारक्षित स्पेशल को 29 जून, 2025 तक विस्तारित किया गया है 2. ट्रेन संख्या 09068 जयनगर-उधना अनारक्षित स्पेशल को 30 जून, 2025 तक विस्तारित किया गया है 3. ट्रेन संख्या 09069 उधना-समस्तीपुर स्पेशल को 28 जून, 2025 तक विस्तारित किया गया है 4. ट्रेन संख्या 09070 समस्तीपुर-उधना स्पेशल को 30 जून, 2025 तक बढ़ा दिया गया है. ट्रेन संख्या 09005, 09006, 09017 और 09018 के लिए बुकिंग 25.05.2025 से शुरू होगी और ट्रेन संख्या 09069 की विस्तारित यात्राओं के लिए बुकिंग 27.05.2025 को सभी पीआरएस काउंटरों और आईआरसीटीसी वेबसाइट पर शुरू होगी.   recent visitors 84

उज्जैन जिला पंचायत सीईओ द्वारा शुरू किया गया ‘तीन रंगों वाला हैंडपंप मॉडल’ अब पूरे प्रदेश में लागू होने जा रहा

उज्जैन जल संकट की समस्या से निजात पाने के लिए प्रदेश को उज्जैन से एक नई राह मिली है। यहां की जिला पंचायत सीईओ जयति सिंह द्वारा शुरू किया गया ‘तीन रंगों वाला हैंडपंप मॉडल’ अब पूरे प्रदेश में लागू होने जा रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरी ने इसे राज्यव्यापी नीति के तौर पर अपनाने के निर्देश दिए हैं। यह मॉडल महज रंगों का खेल नहीं है, बल्कि वर्षों से उपेक्षित हैंडपंपों की हालत बताने और सुधार की ठोस कार्ययोजना की नींव है। बंद हैंडपंपों को चालू कर देना हो या सीमित जल वाले पंपों की गहराई बढ़ाकर उन्हें उपयोगी बनाना, यह सब अब रंग देखकर तय हो रहा है। नवाचार के सकारात्मक परिणामों से ग्रामीण बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि ये नवाचार पूरे राज्य के लिए एक मिसाल है।   जल संकट समाधान की ओर तीन रंगों का चमत्कार जयति सिंह ने मार्च-अप्रैल 2025 के बीच ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के सहयोग से जिले के शासकीय हैंडपंपों की जियो टैगिंग करवाई। इसके बाद इन सभी को तीन रंगों में श्रेणीबद्ध किया। हरा हैंडपंप, जिनमें सालभर जल उपलब्ध रहता है। पीला हैंडपंप जिनमें गर्मी के महीनों में जल स्तर घटता है और सुधार की जरूरत होती है। लाल हैंडपंप जो पूरी तरह बंद हो चुके हैं और जिन्हें रिचार्ज या अन्य तकनीकी हस्तक्षेप की आवश्यकता है। अब विभाग इन्हीं रंगों के आधार पर मरम्मत, गहराई बढ़ाने, जल रिचार्ज जैसी जरूरी कार्यवाही कर रहा है। यह मॉडल जलप्रबंधन को सिर्फ वैज्ञानिक ही नहीं, व्यावहारिक भी बना रहा है।   9440 हैंडपंपों पर सफलता, अब पूरे प्रदेश में विस्तार उज्जैन जिले की 609 पंचायतों में 1101 गांव हैं, जिनमें 9440 हैंडपंप हैं। इनमें 8500 चालू और 940 बंद हालात में हैं। पहले इनमें से किसमें पानी है, किसमें नहीं, इसका कोई व्यवस्थित रिकार्ड नहीं होता था, लेकिन अब रंगीन कोडिंग के कारण न केवल ग्रामीणों को जानकारी मिल रही है, बल्कि प्रशासनिक मानिटरिंग भी आसान हो गई है। जियो टैगिंग और गूगल अर्थ आधारित निगरानी से प्रत्येक हैंडपंप का यूनिक कोड तैयार किया गया है। इससे रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो गई है। जलस्तर, उपयोगिता और सुधार की ज़रूरत जैसी सूचनाएं अब एक क्लिक पर उपलब्ध हैं। रिपोर्ट के अनुसार 6500 हैंडपंप हरे श्रेणी के, दो हजार हैंडपंर पीले श्रेणी के और 940 हैंडपंप लाल श्रेणी के पाए गए हैं। जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने की ठोस कार्ययोजना पानी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने शोक पिट, वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, परकोलेशन टैंक और कुआं रिचार्ज जैसे उपायों को भी अपनाया है। खासतौर पर पीले रंग वाले हैंडपंप, जो गर्मियों में सूखने लगते हैं, उनके पास जलस्रोत पुनर्भरण कार्य तेजी से चल रहे हैं। इस मॉडल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह समस्या की पहचान से लेकर समाधान तक की एक पूर्ण श्रृंखला बनाता है- मूल्यांकन, वर्गीकरण, सुधार और मॉनिटरिंग। कंट्रोल रूम से 24 घंटे में निवारण ग्रामीण क्षेत्रों में जल से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए जिला और जनपद स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं, जहां नल-जल और हैंडपंप से जुड़ी शिकायतों का 24 घंटे के भीतर समाधान किया जा रहा है। recent visitors 66