यूनुस के प्रोजेक्ट को आर्मी चीफ ने कह दिया ‘Bloody corridor’, ढाका के गलियारों में सत्ता के लिए जोर आजमाइश!

 ढाका बांग्लादेश की राजनीति में फिर एकबार तख्तापलट की आहट सुनाई देने लगी है। खबर है कि मुहम्मद यूनुस ने इस्तीफे का मन बना लिया है। इस बीच  ढाका में एक बड़ी घटना देखने को मिली। अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस ने विदेश मंत्रालय में शीर्ष स्तर पर बदलाव करते हुए विदेश सचिव जाशिम उद्दीन को अस्थायी रूप से कार्यमुक्त कर दिया। विदेश मंत्रालय के एक आदेश के अनुसार, ‘‘यह निर्णय लिया गया है कि विदेश सचिव जाशिम उद्दीन को जिम्मेदारियों से मुक्त किए जाने की पृष्ठभूमि में अग्रिम आदेश तक एम रुहुल आलम सिद्दीक विदेश सचिव के नियमित कामकाज संभालेंगे।’’ विदेश मंत्रालय के एक महानिदेशक के हस्ताक्षर वाले संक्षिप्त आदेश में कहा गया कि यह 23 मई से प्रभावी होगा और इसे जनहित में जारी किया गया है। खबरों के मुताबिक, सरकार ने जाशिम उद्दीन को करीब दो सप्ताह पहले अज्ञात कारणों से हटाने का फैसला किया था। दो दिन पहले ‘द डेली स्टार’ अखबार ने लिखा कि विदेश मंत्रालय में इन खबरों को लेकर अनिश्चितता का माहौल है कि जाशिम उद्दीन को हटाया जाएगा, वहीं जूनियर मंत्री के ओहदे के साथ विदेश मामलों के लिए मुख्य सलाहकार के विशेष सहायक नियुक्त किए गए एक अन्य सेवानिवृत्त राजनयिक सूफीउर रहमान ने अभी तक कामकाज नहीं संभाला है। हालांकि विदेश मामलों के सलाहकार एम तौहीद हुसैन ने बुधवार को कहा कि हाशिम उद्दीन ने अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों को छोड़ने की मंशा जताई है और यह उन्हें पद से हटाने जैसा नहीं है। आपको बता दें कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि राजनीतिक दलों के बीच सहमति नहीं बन पाने के कारण उन्हें काम करना मुश्किल लग रहा है। बीबीसी बांग्ला सेवा ने देर रात नेशनल सिटिजन पार्टी के प्रमुख नाहिद इस्लाम के हवाले से यह खबर दी। इस्लाम ने बीबीसी बांग्ला से कहा, ‘‘हम आज सुबह से ही सर (यूनुस) के इस्तीफे की खबर सुन रहे हैं। इसलिए मैं इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सर से मिलने गया था। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में सोच रहे हैं। उन्हें लगता है कि स्थिति ऐसी है कि वह काम नहीं कर सकते।’’ छात्रों के नेतृत्व वाली नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) के संयोजक ने कहा कि मुख्य सलाहकार यूनुस ने आशंका जताई कि देश की मौजूदा स्थिति में वह काम नहीं कर पाएंगे। इस्लाम के मुताबिक यूनुस ने कहा, ‘‘जब तक राजनीतिक दल सहमति नहीं बना लेते, मैं काम नहीं कर पाऊंगा।’’ इस साल फरवरी में यूनुस के मार्गदर्शन में राजनीतिक पटल पर उभरे एनसीपी के नेता ने कहा कि उन्होंने यूनुस से कहा कि ‘‘देश की सुरक्षा और भविष्य के लिए मजबूत बने रहें और जन-विद्रोह की उम्मीदों पर खरा उतरें।’’ इस्लाम के मुताबिक, उन्होंने मुख्य सलाहकार से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राजनीतिक दल एकजुट होकर उनके साथ सहयोग करेंगे और ‘‘मुझे उम्मीद है कि हर कोई उनके साथ सहयोग करेगा’’। आर्मी चीफ ने कह दिया 'Bloody corridor'   बांग्लादेश की राजनीति उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है. आखिर क्या हुआ कि मोहम्मद यूनुस अपनी जिम्मेदारी छोड़ना चाह रहे हैं. बांग्लादेश के अंतरिम सरकार के प्रमुख के पद से इस्तीफा देने की उनकी पेशकश बांग्लादेश में पावर स्ट्रगल की कहानी बता रही है. बांग्लादेश आर्मी इस सत्ता संघर्ष का एक प्रमुख घटक है. बांग्लादेश आर्मी के चीफ जनरल वकार उज जमा ने मोहम्मद यूनुस को तीन ऐसे संदेश दिए जिस राजनीतिक गलियारों में चेतावनी समझा गया. वकार उज जमान ने मोहम्मद यूनुस को कहा कि दिसंबर तक देश में चुनाव कराएं, सैन्य मामलों में दखल न दें और म्यांमार के साथ Bloody corridor को बंद करें. देश की अंतरिम सरकार के चीफ के फैसले के लिए Bloody corridor जैसे शब्दों का इस्तेमाल ने मोहम्मद यूनुस को अपनी कमजोरी का एहसास करा दिया. मोहम्मद यूनुस पर ये राजनीतिक हमला तो सेना की ओर से था दूसरी ओर छात्रों के नए नए बने राजनीतिक दल एनसीपी के लगातार प्रदर्शन ने मोहम्मद यूनुस को कुंठा में डाल दिया. अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस पिछले 9 महीने से राजनेता यूनुस बनने की अपनी कोशिशों में लगातार असफल हो रहे थे. 'Bloody corridor' की कहानी क्या है? मोहम्मद यूनुस की मुश्किलों में उस कॉरिडोर का अहम रोल था जो बांग्लादेश को म्यांमार से जोड़ रहा था. इस कॉरिडोर का नाम चटगांव-राखिन कॉरिडोर है. ये कॉरिडोर बांग्लादेश से म्यांमार में रोहिंग्याओं तक सामान की सप्लाई पहुंचाने के लिए बनाए जाने की योजना है मोहम्मद यूनुस के विदेशी मामलों सलाहकार तौहीद हुसैन ने सेना को विश्वास में लिए बिना एकतरफा घोषणा कर दी थी कि अंतरिम सरकार ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रस्तावित राखिन गलियारे पर सहमति व्यक्त की है. तौहीद हुसैन का ये बयान बांग्लादेश की आर्मी को नकारने जैसा था. इससे बांग्लादेश में यह चिंता बढ़ गई कि यह गलियारा उसकी संप्रभुता पर असर डाल सकता है. बांग्लादेश में एक थ्योरी यह भी चल रही है कि अमेरिका अपने सामरिक और भू-रणनीतिक फायदे के लिए इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ा रहा है. बांग्लादेश के सुरक्षा विशेषज्ञों ने राखिन गलियारे पर चिंता जताई है. सुरक्षा विशेषज्ञों को चिंता है कि राखिन क्षेत्र में अराकान आर्मी जैसे विद्रोही समूहों की बढ़ती गतिविधियां और म्यांमार की सीमा पर उनके नियंत्रण से बांग्लादेश में अस्थिरता फैल सकती है. उदाहरण के लिए, अराकान आर्मी ने हाल ही में बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पर कई चौकियों पर कब्जा कर लिया है, जिससे सीमा पार से हथियारों, आतंकवादी गतिविधियों और घुसपैठ का जोखिम बढ़ गया है. दूसरा डर रोहिंग्या घुसपैठियों को लेकर है. सुरक्षा विशेषज्ञों को डर है कि राखिन गलियारा रोहिंग्या शरणार्थियों की स्थिति को और जटिल कर सकता है. बांग्लादेश पहले से ही 10 लाख से अधिक रोहिंग्या शरणार्थी मौजूद हैं, और गलियारे के खुलने से म्यांमार से और अधिक शरणार्थी बांग्लादेश में प्रवेश कर सकते हैं. इस गलियारे को लेकर बांग्लादेश की इस तरह की व्याख्या की जा रही है कि यूनुस और उनके वफादार चुनाव के बिना सत्ता में बने रहने की अमेरिकी मांग के आगे झुक रहे हैं. बांग्लादेश आर्मी का स्पष्ट और मुखर विरोध लेकिन बांग्लादेश की आर्मी ने इस कॉरिडोर को अंतरिम सरकार द्वारा रेड लाइन क्रॉस करना समझा और इसका … Read more

इंदौर में सिटी बस में सफर महंगा, आज से नई दरें लागू

इंदौर  इंदौर शहर में सिटी बस में सफर एक बार फिर महंगा हो गया है। एआइसीटीएस एल ने 10 माह में दूसरी बार किराया बढ़ाया है। हर कैटेगरी में 1 रुपए वृद्धि की है। शहर में 28 किमी सफर करने पर अब तक 40 रुपए चुकाने होते थे, अब 42 रुपए चुकाने होंगे।  एआइसीटीएसएल ने यह आदेश जारी कर सभी बस ऑपरेटर को बढ़ा किराया वसूलने के निर्देश दे दिए। जानकारी है कि पूर्व में हुई बोर्ड बैठक में निर्णय लिया था कि हर वित्तीय वर्ष में पांच फीसदी किराए में वृद्धि करेंगे। जानकारी अनुसार एआइसीटीएसएल घाटे में चल रहा है। करीब 60 करोड़ के घाटे में संचालन किया जा रहा है। इसके अलग-अलग कारण भी हैं। कई बार कर्मचारियों का भुगतान भी लंबित हो जाता है। कई रूट पर तो बस संचालन ही सुचारू नहीं हो रहा। जानिए कितना बढ़ा किराया दूरी (किमी में) दर पहले: 0 से 1.5 – 5 रुपए अब: 0 से 1.5 – 5 रुपए पहले: 1.5 से 3- 10 रुपए अब: 1.5 से 3- 11 रुपए पहले: 3.1 से 4.5- 15 रुपए अब: 3.1 से 4.5- 16 रुपए पहले: 4.5 से 7.5- 20 रुपए अब: 4.5 से 7.5- 21 रुपए पहले: 7.5 से 12- 25 रुपए अब: 7.5 से 12- 26 रुपए पहले: 12.1 से 18- 30 रुपए अब: 12.1 से 18- 32 रुपए पहले: 28.1 से अधिक- 42 रुपए अब: 18.1 से 28 – 37 रुपए recent visitors 44

प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन

प्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन 2.0 का प्रभावी क्रियान्वयन कचरे के सभी भागों का पूर्ण प्रसंस्करण सभी शहरों को कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य भोपाल मध्यप्रदेश में स्वच्छ भारत मिशन 2.0 (शहरी) के अंतर्गत नगरों में गतिविधियां निरंतर जारी हैं। मिशन के तहत सभी गतिविधियां एक अक्टूबर 2026 तक संचालित होंगी। इसके लिये लक्ष्य भी तय कर लिये गये हैं। इन गतिविधियों में प्रमुख रूप से उपयोगी जल के प्रबंधन के साथ स्वच्छता व्यवहारों को संस्थागत स्वरूप प्रदान करते हुए उन्हें व्यवहारिक बनाना है। आगामी वर्षों में प्रदेश के शहरों को कचरा मुक्त बनाना, खुले में शौच से मुक्ति, मानदंडों ओडीएफ+, ओडीएफ++, वॉटर+ को स्थायी बनाये रखना, इसी के साथ स्वच्छता को जन आंदोलन बनाने के लिये नागरिकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के प्रयास किये जा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सभी कार्यवाही नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत सुनिश्चित की जा रही हैं। स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के लक्ष्य स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत प्रदेश में स्त्रोत पृथक्कीकरण, निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट सहित कचरे के सभी भागों का पूर्ण प्रसंस्करण, प्लास्टिक अपशिष्‍ट और सिंगल यूज प्लास्टिक को चरणबद्ध रूप से कम करना और संपूर्ण लीगेसी वेस्ट को उपचारित करते हुए सभी शहरों को कचरा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इस मिशन में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि सीवर्स, सेप्टिक टैंक की सफाई में मानव श्रम को सीधे रूप से रोका जाये और मशीनों के माध्यम से सफाई की व्यवस्था की जाये। शहरी क्षेत्रों में उपयोगी जल को जल संरचनाओं में जाने से पूर्व उपचार और पुर्न-उपयोग के लिये सीवेज ट्रीटमेंट इकाई, नालों में इंटरसेप्शन व डायवर्जन आदि सुविधाओं का विकास करना प्रमुख है। वित्तीय प्रावधान स्वच्छ भारत मिशन 2.0 (शहरी) में मध्यप्रदेश में संचालित योजनाओं के लिये करीब 4 हजार 914 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें करीब 2200 करोड़ रूपये की राशि केन्द्र सरकार की ओर से और 1800 करोड़ रूपये राशि राज्य सरकार के अंशदान के रूप में होगी। धार्मिक एवं पर्यटन स्थल पर सुलभ कॉम्प्लेक्स की व्यवस्था स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत नगरीय क्षेत्रों में उन स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है, जिन स्थानों पर आवाजाही ज्यादा होती है। इनमें धार्मिक स्थल, पर्यटन स्थल के आस-पास सुलभ काम्प्लेक्स की सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिये नगरीय निकायों को कहा गया है।   recent visitors 40

आम के पेड़ जिनकी सुरक्षा 3 गार्ड और 9 कुत्ते करते हैं? विश्व के सबसे महंगे जापानी आम

जबलपुर संस्कारधानी जबलपुर में विदेशी आम के बागान एक बार फिर लद गए हैं। इनमें शामिल दुनिया के सबसे महंगे जापानी किस्म के आम मियाजाकी तइयो नो तमांगो(Miyazaki Mango) सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र है। जिसकी सुरक्षा भी खास है। सीसीटीवी के साथ ही एक दर्जन जर्मन शेफर्ड(German Shepherd) डॉग बाग की सुरक्षा में लगे हुए हैं। सशस्त्र गार्ड भी पहरा देते हैं। दरअसल, जबलपुर के एक युवक ने मियाजाकी तइयो नो तमांगो की किस्म को नर्मदा के तट से लगे चरगवां रोड पर स्थित बागान में तैयार कर सभी को हैरान कर दिया था। अब यह आम एक बार फिर पकने की प्रक्रिया में है। कई तरह की खासियत वाले इस आम की अंतरराष्ट्रीय बाजा में कीमत दो से ढाई लाख रुपए प्रति किलोग्राम है। बाग मालिक संकल्प सिंह परिहार ने बताया कि इस किस्म के आम की विदेश में अच्छी मांग है। जिसे पकने के बाद भेजा जाएगा। आस्ट्रेलिया व यूएसए की भी प्रजाति बगिया में आस्ट्रेलिया का आर2 ओ 2, यूएसए का सेंसेशन, जापानी जम्बोग्रीन, 2 किलोग्राम जापानी आम, जापानी हापुस व ऑल टाइम मैंगो तैयार हो रहे हैं। इसके साथ ही देसी किस्म के आम की भी बगिया में बहार आ गई है, इनमें मल्लिका, आम्रपाली, आरका अनमोल, आरका पुनीत, हापुस, केशर, चौंसा, लंगड़ा आम शामिल हैं। पेड़ के पके आम के लिए लोग एडवांस में बुकिंग करा रहे हैं। बागवान संकल्प के अनुसार इस बार 30 मई के बाद आम पकने की संभावना है। उद्यानिकी विशेषज्ञों के अनुसार आंधी-तूफान ने आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया है पर उत्पादन अच्छा रहने की उम्मीद है। अचार वाले आम का सबसे ज्यादा उत्पादन यहां देसी आम का उत्पादन सबसे ज्यादा है। अन्य सभी किस्मों के आम के उत्पादन के मुकाबले देसी आम का उत्पादन यहां चार गुना ज्यादा होता है। ये आम ज्यादाकर अचार बनाने के लिए उपयोग किया जाता है। अनुकूल जलवायु के कारण यहां अच्छी गुणवत्ता के आम का उत्पादन हो रहा है। जिनकी दूसरे राज्यों में भी मांग रहती है। सबसे ज्यादा मांग पेड के पके आम की रहती है जो जून के महीने से मिल पाते हैं। मगरमुहां, बिजना के आम उत्पादक किसानों के अनुसार यहां उत्पादित आम स्वाद और गुणवत्ता में अच्छे होते हैं। नर्मदा के कछार के आम में खास मिठास नर्मदा के कछार की वजह से जबलपुर व महाकोशल के अन्य जिलों में होने वाले आम में खास मिठास पाई जाती है। यहां अलग-अलग किस्म के आम का वृहद स्तर पर उत्पादन होता है। हापुस, राजापुरी, अमृतांग, अलफेंजो, नीलेश्वरी, सोनपरी, बॉम्बे ग्रीन, नीलम, आम्रपाली, मल्लिका, लंगड़ा, चोंसा, दशहरी, फजली, सुंदरजा, तोतापरी कई और किस्म के आम की बहार आ गई है। आंधी-तूफान से आम की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है, पर बगीचों में जो आम बचे हैं उनकी गुणवत्ता अच्छी है। संभवत: 30 मई तक पेड़ों के पके स्थानीय आम बाजार में आने लगेंगे। -एसके मिश्रा, उद्यानिकी विशेषज्ञ recent visitors 54

पार्वती नर्मदा लिक योजना से इच्छावर के 11 ग्रामों का हुआ पत्ता साफ ग्रामीण किसान हुए आक्रोशीत, निकाली पैदल रैली

इछावर सीहोर जिले के इछावर में नर्मदा लिंक परियोजना में 11 छूटे हुए गांवों को शामिल करने की मांग को लेकर सैकड़ों किसान सड़क पर उतर आए. केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्य प्रदेश के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के गृह क्षेत्र इछावर में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ पहुंचे, जिनकी लंबी कतारें दूर-दूर तक दिखाई दीं. इछावर में 11 गांवों के किसानों ने नर्मदा लिंक परियोजना में अपने गांवों को शामिल करने की मांग को लेकर पैदल रैली निकाली. किसान बड़ी संख्या में एकत्र हुए और रैली के रूप में तहसील कार्यालय तक पहुंचे. उन्होंने नारेबाजी करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा. किसानों का कहना है कि उनके 11 गांवों को नर्मदा लिंक परियोजना में शामिल नहीं किया गया है, जिसके कारण वे इस महत्वपूर्ण परियोजना के लाभ से वंचित हैं. उन्होंने सभी छूटे हुए गांवों को परियोजना से जोड़ने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मौजूदगी ने किसानों के आंदोलन की ताकत को दर्शाया. किसानों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग पूरी नहीं होने तक वे अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे.   recent visitors 55

पत्नी से विवाद के बाद आवेश में आकर फंदे पर झूला युवक

अलवर जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र के माचड़ी गांव में पारिवारिक विवाद के चलते एक हृदय विदारक घटना सामने आई है। यहां 26 वर्षीय युवक राकेश जाटव ने पत्नी से विवाद के बाद आवेश में आकर उसके सामने ही फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से गांव में शोक की लहर है। प्राप्त जानकारी के अनुसार राकेश जाटव की शादी दो साल पहले महाराष्ट्र की एक युवती से हुई थी। शादी के बाद से ही दंपति के बीच रिश्तों में खटास बनी हुई थी। गुरुवार को भी किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ, जिसके बाद राकेश ने आवेश में आकर आत्मघाती कदम उठा लिया। पति-पत्नी के बीच लंबे समय से कलह चल रही थी, जिसका अंत इतना दुखद हुआ। मृतक का एक सवा साल का मासूम बेटा भी है। घटना के समय पत्नी मौके पर मौजूद थी, लेकिन वह न तो उसे रोक सकी और न ही समय रहते किसी को बुला सकी। घटना की सूचना मिलते ही गांव में मातम छा गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस ने आत्महत्या के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पारिवारिक कलह को मुख्य कारण माना जा रहा है, हालांकि पुलिस अन्य कोणों से भी मामले की पड़ताल कर रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं पत्नी के किसी अन्य व्यक्ति से अवैध संबंध तो नहीं थे, जिसके बारे में राकेश को जानकारी हो गई हो और इसी कारण विवाद बढ़ा हो। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। गांव के लोगों का कहना है कि राकेश शांत और सरल स्वभाव का युवक था, लेकिन पिछले कुछ समय से वह मानसिक रूप से परेशान चल रहा था। घटना के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोगों के घरों में चूल्हा तक नहीं जला। recent visitors 50

पिछले दिनों Ghibli ट्रेंड, अब बेबी वर्जन वीडियो का क्रेज़

नई दिल्ली पिछले दिनों Ghibli (घिबली) फोटोज काफी ट्रेंड में थे। जिसे देखो अपने फोटोज का घिबली वर्जन बना कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहा था। अब इसी तरह का एक और ट्रेंड सोशल मीडिया पर जोर पकड़ रहा है। इस लेटेस्ट ट्रेंड में लोग अलग-अलग हस्तियों के बेबी वर्जन वाले वीडियो बना कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। कुछ लोग अपने खुद के बेबी वर्जन वाले वीडियो भी बनाकर ऑनलाइन डाल रहे हैं। अगर आप भी इस तरह के वीडियो बनाना चाहते हैं, तो चलिए आज हम आपको बताते है कि किस तरह ये ट्रेंडिंग वीडियो बनाए जा सकते हैं। इस बार लगेंगे दो AI जैसा कि अभी तक होता आया था, इस तरह के एनिमेटेड फोटो बनाने के लिए किसी न किसी AI का इस्तेमाल किया जाता था। इस बार जो ट्रेंड चल रहा है उसके लिए आपको दो AI का इस्तेमाल करना पड़ेगा। दरअसल बेबी वर्जन वीडियो के लिए पहले आपको एक AI का इस्तेमाल करके अपना या किसी किरदार का बेबी वर्जन तैयार करना होगा। इसके बाद आपको उसे वीडियो में कन्वर्ट करने के लिए एक अलग AI का इस्तेमाल करना होगा। चलिए पूरा प्रोसेस समझते हैं। पहले करें ChatGPT का इस्तेमाल सबसे पहले आपको अपनी किसी फोटो का बेबी वर्जन तैयार करना होगा। इसके लिए सबसे पहले अपनी वह फोटो चुन लें जिसे आप बेबी वर्जन के तौर पर तैयार करना चाहते हैं। इसके बाद अपनी फोटो को ChatGPT में अपलोड करके इस प्रॉम्प्ट का इस्तेमाल करें – "Create a baby version of the person in the image, maintaining similar facial features, hairstyle, and skin tone. The baby should be wearing a miniature version of the same clothes as the original person. Keep the background, lighting, and overall setting the same or closely matched to the original photo." इसके बाद आपके फोटो में मौजूद इंसान का एक बेबी वर्जन तैयार हो जाएगा। अब इमेज को बदलें वीडियो में इसके बाद आपको इस फोटो को Hedra वेबसाइट में ले जाकर उसे वीडियो में कन्वर्ट करना होगा। Hedra वेबसाइट पर आप लिख कर बता सकते हैं कि वीडियो में आप बेबी वर्जन को क्या करते देखना चाहते हैं। जैसे कि Talking on a phone या Dancing in a pub. यह वेबसाइट आपकी फोटो को आपकी कमांड के अनुसार वीडियो में बदल देगी। अगर आप किसी फेमस किरदार या फिल्म के सीन पर आधारित फोटो वीडियो बना रहे हैं, तो आपको ओरिजनल वीडियो से ऑडियो निकाल कर Hedra ऐप में डालना होगा। इससे आप हूबहू किसी फिल्म या सीरियल के सीन का बेबी वर्जन तैयार कर पाएंगे। ध्यान देने वाली बात ChatGPT ने कुछ समय पहले फोटो जेनरेट करने वाले फीचर को सभी यूजर्स के लिए फ्री कर दिया था। हालांकि फ्री यूजर्स के फोटो तैयार होने में काफी समय लेते हैं। ऐसे में अगर आप भी अपना बेबी वर्जन बनाने वाले हैं, तो याद रहे कि ChatGPT आपकी फोटो तैयार करने में कुछ समय लेगा। वहीं अगर आप पेड यूजर हैं, तो आपको इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा। recent visitors 75