CUET-PG 2026 एडमिट कार्ड जारी, एग्जाम सेंटर की जानकारी मिलेगी इस दिन

देशभर के विश्वविद्यालयों में पीजी पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए होने वाली कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट-पीजी (सीयूईटी-पीजी) 6 से 27 मार्च के बीच किया जाएगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा आयोजित परीक्षा के लिए 6 और 7 मार्च को निर्धारित परीक्षाओं के लिए प्रवेश पत्र जारी कर दिए है। संबंधित विद्यार्थी आधिकारिक वेबसाइट से अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।  इंदौर में 3 परीक्षा केंद्र बने अन्य तिथियों की परीक्षाओं के प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। इंदौर जिले में इस बार दो से तीन परीक्षा केंद्र बनाए गए है। यहां करीब 15 से 20 हजार अभ्यर्थियों के परीक्षा में शामिल होने का अनुमान है। अधिकारियों के अनुसार परीक्षा शहर की सूचना पर्ची (एग्जाम सिटी इंटिमेशन स्लिप) परीक्षा तिथि से करीब 10 दिन पहले वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि विद्यार्थी समय रहते अपनी यात्रा और ठहरने की व्यवस्था कर सकें। विषयवार परीक्षा तिथियां अलग-अलग निर्धारित एनटीए ने परीक्षा को अलग-अलग सत्रों में आयोजित करने का कार्यक्रम तय किया है। कुल 15 दिनों में 44 सत्र आयोजित होंगे। कुछ तिथियों 14, 15, 20, 21, 22, 23 और 26 मार्च को परीक्षा नहीं रखी गई है। जिन दिनों परीक्षा होगी, उन दिनों दो से तीन शिफ्ट में पेपर लिए जाएंगे। पहले दिन योग, खेल विज्ञान, संस्कृत, उर्दू और टेक्सटाइल डिजाइन जैसे विषयों की परीक्षा से शुरुआत होगी। विषयवार परीक्षा तिथियां अलग-अलग निर्धारित की गई है। बदला हुआ परीक्षा पैटर्न इस बार परीक्षा पैटर्न में संशोधन किया गया है। प्रश्नपत्र 300 अंकों का होगा, जिसे हल करने के लिए 90 मिनट का समय दिया जाएगा। देशभर में करीब 4 लाख 11 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होंगे। कुल 157 विषयों के लिए परीक्षा आयोजित की जा रही है। 41 भाषाओं में प्रश्नपत्र अभ्यर्थियों को हिंदी और अंग्रेजी के साथ कुल 41 भाषाओं में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि, कुछ पाठ्यक्रमों के लिए भाषा संबंधी विशेष प्रावधान किए गए हैं। एमटेक और उच्च विज्ञान विषयों के प्रश्नपत्र केवल अंग्रेजी में होंगे। आचार्य पाठ्यक्रम के प्रश्नपत्र केवल संस्कृत में उपलब्ध रहेंगे। भारतीय ज्ञान प्रणाली और बौद्ध दर्शन के प्रश्नपत्र त्रिभाषी (हिंदी. संस्कृत और अंग्रेजी) होंगे। हिंदू अध्ययन विषय के पेपर हिंदी और अंग्रेजी में उपलब्ध रहेंगे।  recent visitors 34

100 साल से बिना होलिका दहन की होली! छत्तीसगढ़ के इन गांवों की रहस्यमयी परंपरा

कोरबा कोरबा जिले के धमनागुड़ी और खरहरी गांवों में एक अनूठी परंपरा है। यहां कई वर्षों से होलिका दहन नहीं किया जाता है। ग्रामीण रंग गुलाल भी नहीं खेलते हैं। यह परंपरा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रहती है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्वजों की विशेष मान्यता और आस्था के कारण ऐसा होता है। गांव में लोग शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना कर पर्व मनाते हैं। हालांकि, अग्नि प्रज्वलन की परंपरा का पालन नहीं किया जाता। धमनागुड़ी निवासी गनपत सिंह कंवर ने बताया कि लगभग सौ वर्षों से होली नहीं मनाई जाती है। खरहरी के आसपास के आश्रित गांवों में बुजुर्ग और बैगा देव स्थल में पूजा करते हैं। वे रंग गुलाल चढ़ाते हैं और टीका लगाते हैं। इन गांवों में आज भी होलिका दहन और रंग गुलाल नहीं खेला जाता। आज तक होली के कारण कोई विवाद या मारपीट की स्थिति नहीं बनी है। अनहोनी की आशंका खरहरी गांव निवासी तामेश्वर सिंह पैकरा ने बताया कि पिछले कई वर्षों से होली नहीं मनाई जाती। नौ साल पहले एक परिवार ने होली मनाने की कोशिश की थी। रंग गुलाल लगाने के कुछ समय बाद उनके घर में आग लग गई। इस घटना के बाद से गांव में होली नहीं खेली जाती है। गांव वालों का मानना है कि होली खेलने से अनहोनी की आशंका बनी रहती है। यदि कोई व्यक्ति गांव से बाहर दूसरी जगह होली खेलकर आता है। उसे गांव में प्रवेश करने से पहले रंग गुलाल धोना पड़ता है। इसके बाद ही वह गांव में प्रवेश कर सकता है। यह नियम आज भी सख्ती से लागू है। गांव में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए यह परंपरा कायम है। recent visitors 93

एमपी में बढ़ी गर्मी, पारा 35 डिग्री के पार, अप्रैल-मई में और तेज गर्मी का खतरा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मार्च ने आते ही तेवर दिखा दिए हैं। महीने के पहले ही दिन प्रदेश के कई शहरों में तापमान 30 डिग्री के पार पहुंच गया, जबकि निमाड़ क्षेत्र के खरगोन में पारा 35.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। राजधानी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में भी तेज धूप ने लोगों को गर्मी का अहसास करा दिया। मौसम विभाग का अनुमान है कि अप्रैल और मई सबसे ज्यादा तपिश भरे रहेंगे। ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में पारा 45 डिग्री के पार जा सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग भी भीषण गर्मी की चपेट में रहेंगे।  अगले 4 दिन और चढ़ेगा पारा मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले चार दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 4 डिग्री तक की और बढ़ोतरी हो सकती है। यानी मार्च की शुरुआत ही तपिश भरी रहने वाली है। दिन के साथ रात का तापमान भी धीरे-धीरे ऊपर जाएगा। रविवार को पचमढ़ी को छोड़ प्रदेश के लगभग सभी शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री या उससे ज्यादा दर्ज किया गया। धार, गुना, खंडवा, श्योपुर, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर, सतना और सिवनी जैसे जिलों में पारा 33 डिग्री से ऊपर पहुंच गया। रातें भी हो रहीं गर्म फरवरी के आखिर और मार्च की शुरुआत में रात का तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है। जबलपुर में न्यूनतम तापमान 19.3 डिग्री और सतना में 18.2 डिग्री दर्ज किया गया। धार, नर्मदापुरम, छिंदवाड़ा, सागर, टीकमगढ़ और उमरिया समेत कई शहरों में रात का पारा 17 डिग्री से अधिक रहा। रंगपंचमी पर बदल सकता है मौसम गर्मी के बीच राहत की भी उम्मीद है। 4 मार्च से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में सक्रिय हो रहे नए वेस्टर्न डिस्टरबेंस का असर दो दिन बाद मध्य प्रदेश में देखने को मिल सकता है। इसके चलते रंगपंचमी के आसपास कुछ जिलों में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। यदि सिस्टम सक्रिय रहता है तो तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव भी हो सकता है। 40 डिग्री तक पहुंच सकता है पारा पिछले वर्षों के ट्रेंड पर नजर डालें तो मार्च में दिन गर्म, रातें अपेक्षाकृत ठंडी और बीच-बीच में बारिश का दौर देखने को मिलता है। इस बार भी कुछ ऐसा ही संकेत मिल रहे हैं। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में दिन का तापमान 40 डिग्री तक पहुंच सकता है, जबकि रातें 10 से 17 डिग्री के बीच रह सकती हैं। ग्वालियर में तापमान में उतार-चढ़ाव सबसे ज्यादा देखने को मिलता है।   recent visitors 31

गोवंश प्रतिषेध मामले में हाईकोर्ट का फैसला: अपीलीय आदेश खारिज, याचिकाकर्ता को राहत

जबलपुर  जबलपुर ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनवाई पूरी कर सुनाई गई सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए अपीलीय न्यायालय ने एक अन्य व्यक्ति के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत कार्रवाई के आदेश जारी किए थे। इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति ए.के. सिंह की एकलपीठ ने अपीलीय कोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। छिंदवाड़ा निवासी मोहम्मद नासिर कुरैशी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने कोमल सोलंकी को मध्य प्रदेश गोवंश प्रतिषेध अधिनियम, 2004 की धारा 9 तथा मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 सहपठित धारा 192 के तहत 9 अप्रैल 2019 को दोषी ठहराया था। उक्त निर्णय के खिलाफ कोमल सोलंकी ने अपील प्रस्तुत की थी।अपील की सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशंस जज ने वाहन मालिक एवं याचिकाकर्ता के विरुद्ध दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत कार्रवाई करने के आदेश जारी कर दिए। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि धारा 319 के अंतर्गत किसी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई तभी संभव है, जब ट्रायल के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों में उसकी स्पष्ट भूमिका सामने आए। पुलिस द्वारा कोमल सोलंकी के विरुद्ध प्रस्तुत चार्जशीट में याचिकाकर्ता की किसी भी प्रकार की भूमिका का उल्लेख नहीं था। ट्रायल के दौरान पेश तीन गवाहों ने भी याचिकाकर्ता के संबंध में कोई आरोप नहीं लगाया। एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अपीलीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश विधि-सम्मत नहीं है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसा सिद्धांत आपराधिक न्यायशास्त्र में मान्य नहीं है, अतः इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता। परिणामस्वरूप, अपीलीय कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ए. उस्मानी ने पैरवी की। recent visitors 29

तेज रफ्तार का कहर: उन्नाव में खड़े ट्रक से भिड़ी बस, 3 की मौत, 31 लोग घायल

उन्नाव लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर सिरधरपुर और देवखरी गांव के पास मथुरा और आगर डिपो की दो रोडवेज बसें एक ही ट्रक में भीड़ गईं। हादसे में तीन यात्रियों की मौत हो गई जबकि दोनों बसों के 31 यात्री घायल हो गए। पुलिस ने घायलों को बांगरमऊ सीएचसी भेजा। वहां प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है। दोनों घटनाएं चालक को झपकी आने से बताई जा रही हैं। एक्सप्रेसवे पर रविवार रात 12 बजे एक ट्रक किलोमीटर संख्या 226 सिरधरपुर गांव के सामने सड़क घेरकर खड़ा था। रात करीब 12 आगरा फोर्ट की बस खड़े ट्रक में पीछे से भिड़ गई। हादसे में 14 सवारी घायल हो गईं। हादसे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने पांच एंबुलेंस से सभी घायलों को बांगरमऊ स्वास्थ्य केंद्र भिजवाया साथ ही हाइड्रा मंगाकर क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने का प्रयास शुरू किया। पुलिस रोडवेज बस हटवाने के बाद रात्रि 2:30 बजे क्षतिग्रस्त ट्रक को प्रीतमपुरा चौकी ले जाया जा रहा था, तभी आगरा फोर्ट की ही दूसरी रोडवेज बस इस ट्रक में पीछे से टकरा गई। हादसे में तीन सवारियों की मौत हो गई उसमें बैठी 17 सवारियां घायल हो गईं। फिर पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और घायलों को स्वास्थ्य केंद्र लाई। डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों बसों के घायलों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। मृतकों की पहचान न होने पर शव पोस्टमार्टम हाउस में रखवाए गए हैं। कोतवाल अखिलेशचंद्र पांडेय ने बताया कि ट्रक सड़क के किनारे खड़ा था। दोनों बसों में 31 सवारियां घायल हुई हैं। तीन की मौत हुई है। शवों की पहचान का प्रयास किया जा रहा है। recent visitors 38

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 951 गिद्धों की पहचान, सर्वे के दौरान सात प्रजातियों की हुई पुष्टि

जबलपुर  मध्य प्रदेश वन विभाग के निर्देशानुसार वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 20 से 22 फरवरी 2026 तक गिद्धों की त्रिदिवसीय गणना सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस सर्वेक्षण का उद्देश्य टाइगर रिजर्व क्षेत्र में गिद्धों की वास्तविक संख्या, उनकी प्रजातियों और आवास की स्थिति का आकलन करना था। वन विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 20 फरवरी को 951, 21 फरवरी को 741 तथा 22 फरवरी को 844 गिद्ध दर्ज किए गए। तीन दिनों के दौरान अलग-अलग स्थलों पर की गई इस गणना में गिद्धों की उल्लेखनीय उपस्थिति सामने आई, जो क्षेत्र में अनुकूल पर्यावरण और संरक्षण प्रयासों की सकारात्मक स्थिति को दर्शाती है। वर्ष 2026 के सर्वेक्षण में कुल सात प्रजातियों की पहचान की गई। इनमें सबसे अधिक संख्या भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर) की पाई गई, जबकि व्हाइट रंप्ड गिद्ध भी बड़ी संख्या में दर्ज किए गए। इजिप्शियन गिद्ध की संख्या मध्यम स्तर पर रही, वहीं रेड-हेडेड वल्चर अपेक्षाकृत कम संख्या में मिले। इसके अलावा यूरेशियन ग्रिफॉन, हिमालयन ग्रिफॉन और सिनेरियस गिद्ध जैसी प्रवासी प्रजातियों की उपस्थिति भी दर्ज की गई। इन दुर्लभ एवं प्रवासी प्रजातियों की मौजूदगी टाइगर रिजर्व की समृद्ध जैव विविधता का प्रमाण है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, गिद्धों की नियमित मॉनिटरिंग और संरक्षण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से उनकी संख्या में स्थिरता और वृद्धि की उम्मीद है। भविष्य में भी इस तरह की वैज्ञानिक गणना जारी रखी जाएगी, ताकि गिद्धों के संरक्षण के लिए ठोस रणनीति बनाई जा सके। recent visitors 29

दीपावली, होली, नवरात्र और गणेश महोत्सव जैसे पर्वों में खुदरा व्यापार में भी हुई उल्लेखनीय वृद्धि

यूपी में ‘फेस्टिवल इकोनॉमी’ बनी आर्थिक इंजन सुरक्षा और सुशासन से बदली तस्वीर, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था से बढ़ा भरोसा, त्योहारों के दौरान कई गुना तक बढ़ा फुटफॉल दीपावली, होली, नवरात्र और गणेश महोत्सव जैसे पर्वों में खुदरा व्यापार में भी हुई उल्लेखनीय वृद्धि कुम्हार, मूर्तिकार और हस्तशिल्प कारीगरों को बड़े ऑर्डर, स्वयं सहायता समूहों का त्योहार आधारित कारोबार तेज भव्य आयोजनों से बढ़ा धार्मिक पर्यटन, अयोध्या-वाराणसी-मथुरा बने आर्थिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से आयोजन हुए व्यवस्थित, स्थानीय विकास कार्यों को भी मिली गति लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में बीते नौ वर्षों में पर्व-त्योहारों के आयोजन का स्वरूप बदला है। सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक तैयारी और राजनीतिक स्तर पर बढ़ी सक्रियता के चलते प्रमुख पर्वों-त्योंहारों पर सांस्कृतिक आयोजनों का दायरा कहीं ज्यादा व्यापक हो गया है। इसका सीधा असर प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। योगी सरकार के प्रयासों से 9 वर्षों में बदले परिदृश्य ने प्रदेश में इस फेस्टिवल इकॉनमी को जन्म दिया है, जिसके माध्यम से न सिर्फ राज्य स्तर पर, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी बाजार में कारोबार कई गुना तक बढ़ रहा है। सुरक्षा के भरोसे ने त्योहारों को बनाया आर्थिक इंजन उत्तर प्रदेश में फेस्टिवल इकॉनमी को गति देने में योगी सरकार में सुदृढ़ कानून-व्यवस्था निर्णायक कारक बनी है। प्रमुख पर्व-त्योहारों पर राज्य से लेकर जिला स्तर तक विशेष सुरक्षा प्लान लागू किए जाते हैं। संवेदनशील जिलों और धार्मिक नगरों में अतिरिक्त पुलिस व पीएसी बल की तैनाती, महिला सुरक्षा दल और दंगा नियंत्रण इकाइयों की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित की जाती है। ड्रोन से रियल टाइम निगरानी, प्रमुख बाजारों व आयोजन स्थलों पर व्यापक सीसीटीवी कवरेज और इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम के जरिए 24×7 मॉनिटरिंग की व्यवस्था की गई है। यातायात के लिए पूर्व निर्धारित डायवर्जन प्लान और अतिरिक्त सार्वजनिक परिवहन भी लागू होता है। प्रशासन और व्यापारी संगठनों के अनुसार बेहतर सुरक्षा माहौल का सीधा असर बाजार पर दिखा है। होली, दीपावली और नवरात्र जैसे अवसरों पर कई प्रमुख बाजारों में सामान्य दिनों की तुलना में 30 से 50 प्रतिशत तक अधिक फुटफॉल दर्ज किया गया। अधिकारियों का मानना है कि भरोसेमंद कानून-व्यवस्था ने न सिर्फ लोगों को खुलकर पर्व-त्योहारों का उत्सव मनाने का अवसर दिया, बल्कि व्यापार व सेवा क्षेत्र में विश्वास का वातावरण भी तैयार किया है, जिससे त्योहार आर्थिक गतिविधियों का सशक्त माध्यम बन रहे हैं। बाजार गतिविधियों का बढ़ा दायरा व्यापार मंडल पदाधिकारियों का कहना है कि पिछले नौ वर्षों में त्योहारों के दौरान बाजार गतिविधियों का दायरा स्पष्ट रूप से बढ़ा है। दीपावली, होली और नवरात्र जैसे प्रमुख अवसरों पर खुदरा बाजार में सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक कारोबार दर्ज किया जा रहा है। कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, सर्राफा, मिठाई, सजावटी सामग्री और पूजा उत्पादों की मांग में लगातार उछाल आया है। व्यापारिक संगठनों का दावा है कि संगठित प्रबंधन और बेहतर कानून-व्यवस्था के कारण ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है, जिससे बिक्री के आंकड़े मजबूत हुए हैं। त्योहारों ने बढ़ाया फुटफॉल, सेवा क्षेत्र को मिला व्यापक लाभ त्योहारों के सांस्कृतिक आयोजनों के विस्तार का प्रभाव पर्यटन और सेवा क्षेत्र में भी दिखाई देता है। अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और मथुरा जैसे शहरों में बड़े आयोजनों के दौरान होटल ऑक्यूपेंसी दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। परिवहन, टूर ऑपरेटर, टैक्सी, ई-रिक्शा और खानपान कारोबार में भी उछाल आया है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार संगठित और सुरक्षित आयोजनों के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे अस्थायी और स्थायी दोनों प्रकार के रोजगार के अवसर बढ़े हैं। अधिकारियों का मानना है कि कानून-व्यवस्था की सख्ती, प्रशासनिक समन्वय और त्योहारों के योजनाबद्ध विस्तार ने इन आयोजनों को केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों का सशक्त माध्यम बना दिया है। कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा आर्थिक लाभ त्योहारों के विस्तारित स्वरूप का प्रभाव परंपरागत कारीगरों पर स्पष्ट दिखाई देता है। अयोध्या के दीपोत्सव के दौरान लाखों दीयों की मांग ने आसपास के जिलों के कुम्हारों को बड़े स्तर पर ऑर्डर उपलब्ध कराए। कई स्थानों पर प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों के माध्यम से स्थानीय कुम्हारों से सीधे खरीद की व्यवस्था की गई, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसी तरह, वाराणसी की देव दीपावली और प्रयागराज के माघ मेले जैसे आयोजनों में हस्तशिल्प, पूजा सामग्री और पारंपरिक सजावटी वस्तुओं की बिक्री में तेज उछाल दर्ज किया गया। मथुरा-वृंदावन की होली के दौरान गुलाल, पारंपरिक परिधान और धार्मिक उपहार सामग्री के कारोबार में बढ़ोतरी देखी गई। नवरात्र और दुर्गा पूजा के समय मूर्तिकारों, पंडाल निर्माताओं, लाइटिंग और साउंड सिस्टम से जुड़े व्यवसायों को बड़े पैमाने पर काम मिला। कई जिलों में स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को प्राथमिकता देने की पहल से क्षेत्रीय रोजगार को बल मिला। महिला स्वयं सहायता समूहों ने भी इस अवसर को आय के स्रोत में बदला। दीपावली पर दीये और मोमबत्ती, नवरात्र में प्रसाद पैकिंग, होली पर हर्बल गुलाल, पापड़-चिप्स जैसे पारंपरिक खाद्य उत्पाद और त्योहार आधारित गिफ्ट पैक्स तैयार कर समूहों ने शहरी बाजारों और सरकारी मेलों में स्टॉल के माध्यम से उल्लेखनीय बिक्री की। ग्रामीण उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच मिलने से कुटीर उद्योगों को स्थायी बाजार आधार मिला है। पारंपरिक आयोजनों का पुनर्जागरण प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान कई ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन हुए हैं, जो पहले सीमित दायरे में होते थे, लेकिन अब उनका विस्तार राज्य स्तर तक दिखाई देता है। अयोध्या का दीपोत्सव और वाराणसी की देव दीपावली के अलावा रंगभरी एकादशी का आयोजन अब बड़े पैमाने पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के साथ होता है। इसी प्रकार कृष्ण जन्मोत्सव (मथुरा-वृंदावन) में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यापक प्रबंधन व्यवस्था लागू की गई है। श्रावणी मेले और कांवड़ यात्रा के आयोजन का स्वरूप भी बदला है। गणेश महोत्सव, जो पहले मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर सीमित था, अब कई शहरों में बड़े सांस्कृतिक आयोजनों के रूप में उभरा है। पंडाल निर्माण, मूर्ति निर्माण, लाइटिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दायरा बढ़ा है। इसके अतिरिक्त रामोत्सव, कृष्णोत्सव, बुद्ध महोत्सव, महाशिवरात्रि मेले, चित्रकूट दीप महोत्सव जैसे आयोजनों को भी संगठित रूप से बढ़ावा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन आयोजनों को पर्यटन कैलेंडर से जोड़ने और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के … Read more