किसानों के लिए राहत की खबर: गेहूं MSP 2585 रुपये, आष्टा मंडी में नीलामी शुरू

आष्टा केंद्र सरकार ने रबी विपणन सीजन के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में 160 रुपये की बढ़ोतरी करते हुए इसे 2585 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया है। बीते साल यह मूल्य 2425 रुपये था। एमएसपी की घोषणा के बाद प्रदेश सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। किसान अब खरीदी की तारीख की प्रतीक्षा कर रहे हैं।  पंजीयन की जानकारी समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसान 7 फरवरी से 7 मार्च तक पंजीयन करा सकते हैं। नई व्यवस्था के तहत किसान ऑनलाइन नि:शुल्क पंजीयन कर सकते हैं। वहीं कियोस्क या अन्य ऑनलाइन केंद्रों से पंजीयन कराने पर 50 रुपये शुल्क देना होगा। पंजीयन के लिए आधार कार्ड, भू-अभिलेख, ऋण पुस्तिका और आधार से लिंक बैंक खाता अनिवार्य है। किसान एप और ई-उपार्जन पोर्टल पर घर बैठे पंजीयन की सुविधा भी उपलब्ध है। मौसम और उत्पादन की उम्मीद इस रबी सीजन में मौसम अब तक किसानों के अनुकूल रहा है। पर्याप्त ठंड और नमी की वजह से फसल अच्छी स्थिति में है। लोकवन, तेजस, 1544 और 322 जैसी उन्नत किस्मों की बोवनी बड़े पैमाने पर की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम इसी तरह बना रहा, तो इस बार गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है, जिससे खरीदी व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ेगा। MSP का पिछले वर्षों का सफर पिछले वर्षों पर नजर डालें तो वर्ष 2024 में गेहूं का MSP 2300 रुपये था। उस पर मध्य प्रदेश सरकार ने 125 रुपये बोनस जोड़कर 2425 रुपये प्रति क्विंटल में खरीदी की थी। वर्ष 2025 में केंद्र ने MSP 2425 रुपये तय किया, जबकि राज्य सरकार ने 175 रुपये बोनस जोड़कर 2600 रुपये प्रति क्विंटल किसानों को भुगतान किया। अब 2026-27 के लिए MSP 2585 रुपये घोषित किया गया है। चुनावी वादा और किसानों की उम्मीद किसान राधेश्याम राय और कैलाश विश्वकर्मा का कहना है कि विधानसभा चुनाव 2023 के दौरान भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किसानों से 2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदी का वादा किया था। बीते वर्ष बोनस देकर सरकार इस आंकड़े के करीब जरूर पहुंची, लेकिन वादा अधूरा रहा। इस बार MSP 2585 रुपये होने के बाद किसानों को उम्मीद है कि यदि राज्य सरकार 115 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देती है, तो भाजपा अपना चुनावी वचन पूरा कर सकती है। बोनस पर टिकी निगाहें प्रदेश में भाजपा की सरकार होने की वजह से किसानों की नजरें पूरी तरह राज्य सरकार के फैसले पर हैं। पिछले वर्ष बोनस ने किसानों को बड़ी राहत दी थी। इस बार भी किसान आशा लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी लागत, मेहनत और भरोसे की कद्र करेगी। अब देखना है कि आने वाले दिनों में सरकार उनकी उम्मीदों को हकीकत में बदलती है या 2700 रुपये का वादा फिर इंतजार में रह जाएगा। आष्टा मंडी में रबी सीजन की नीलामी शुरू सीहोर जिले की आष्टा कृषि उपज मंडी में मंगलवार से नए रबी सीजन की गेहूं की आवक और नीलामी का औपचारिक शुभारंभ हो गया। मंडी परिसर में सुबह से ही किसानों की चहल-पहल और व्यापारियों की सक्रियता ने नए सीजन की शुरुआत खास बना दी। पहली नीलामी से उत्साह सीजन की पहली नीलामी में इछावर तहसील के ग्राम डाबला राय निवासी किसान राजाराम ने चार क्विंटल गेहूं मंडी में लाया। उसकी उपज को सात्विक एग्रो फूड इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड ने 2381 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा। पहले दिन मिले भाव ने न सिर्फ राजाराम का हौसला बढ़ाया, बल्कि मंडी पहुंचे अन्य किसानों में भी उत्साह भर दिया। एक दिन में 9904 क्विंटल आवक मंडी सचिव नरेंद्र कुमार मेश्राम ने बताया कि 3 फरवरी 2026 को आष्टा मंडी में कुल 9904 क्विंटल गेहूं की आवक दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में आवक और बढ़ सकती है क्योंकि आसपास के क्षेत्रों में फसल की कटाई जोरों पर है। उन्नत किस्मों को बेहतर भाव मंडी में गेहूं की अलग-अलग किस्मों को गुणवत्ता के अनुसार अच्छा भाव मिला। ‘गेहूं सुजाता 3006’ किस्म का उच्चतम भाव 3440 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। वहीं लोकवन किस्म 2602 रुपये से 2834 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिकी। अच्छी क्वालिटी वाले गेहूं की मांग ने मंडी में प्रतिस्पर्धा का माहौल बना दिया। शरबती गेहूं की साख आष्टा मंडी शरबती और उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं के लिए प्रसिद्ध है। यहां की फसल देश के कई हिस्सों में पसंद की जाती है। व्यापारियों का कहना है कि मंडी में आने वाले गेहूं की गुणवत्ता लगातार बेहतर हो रही है, जिससे बाहर के खरीदार ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं और किसानों को बेहतर भाव मिलने की संभावना मजबूत हुई है। पड़ोसी जिलों के किसानों का भरोसेमंद केंद्र सीहोर जिले की आष्टा और भैरूंदा मंडी बड़े व्यापारिक केंद्र मानी जाती हैं। यहां की साख ऐसी है कि हरदा, देवास और राजगढ़ जैसे जिलों के किसान भी अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। मंडी से खरीदा गया गेहूं महाराष्ट्र समेत देश के कई राज्यों में भेजा जाता है। बेहतर भाव और पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के कारण किसान बड़ी संख्या में आष्टा मंडी का रुख कर रहे हैं।   recent visitors 28

5000 शिक्षक पदों की भर्ती को मिली मंजूरी, छत्तीसगढ़ में जल्द शुरू होगी प्रक्रिया

रायपुर  छत्तीसगढ़ में टीचर भर्ती को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। जहां लंबे समय से स्कूल शिक्षा विभाग में भर्ती का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है। राज्य के स्कूलों में जल्द ही 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती होगी। इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से डायरेक्टरेट ऑफ़ पब्लिक इंस्ट्रक्शन को एक आदेश जारी कर दिया गया है। यदि पिछली भर्ती आदेश की बात करें तो छत्तीसगढ़ सरकार ने 28 अक्टूबर, 2025 को 4,708 शिक्षक भर्ती की अनुमति दी थी। अब, फरवरी के पहले हफ्ते ही राज्य सरकार के नया आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक 292 सहायक पदों के सृजन को भी मंजूरी दे दी गई है। इन पदों के साथ, कुल 5,000 टीचिंग पदों पर भर्ती का रास्ता साफ हो गया है। इस संबंध में लोकशिक्षण संचालनालय के संचालक को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। शिक्षा विभाग के इस फैसले से फैसले से न सिर्फ पढ़े लिखे बेरोजगार युवाओं को बड़ा लाभ मिलेगा, बल्कि राज्य के स्कूलों में टीचर की कमी भी पूरी होगी। विभागीय सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। recent visitors 29

भारतीय नौसेना की शान: INS विक्रांत 60 साल बाद अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू में, ताकत का दिखावा

नई दिल्ली भारतीय नौसेना के लिए एक ऐतिहासिक पल आने वाला है. भारत का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत 18 फरवरी 2026 को इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 में हिस्सा लेगा. यह रिव्यू बंगाल की खाड़ी में विशाखापत्तनम के तट पर होगा. लगभग 60 साल बाद कोई भारतीय एयरक्राफ्ट कैरियर फ्लीट रिव्यू में दिखेगा – पिछली बार 1966 में मूल INS विक्रांत ने ऐसा किया था. IFR 2026 क्या है? IFR एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय नौसेना कार्यक्रम है, जहां दुनिया की कई नौसेनाएं अपने युद्धपोतों के साथ जमा होती हैं. यह मैरीटाइम डिप्लोमेसी का माध्यम है. भारत ने 137 से ज्यादा देशों को निमंत्रण भेजा है. 60 से अधिक देशों ने हिस्सा लेने की पुष्टि की है.     मुख्य दिन: 18 फरवरी 2026 – राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर) फ्लीट की समीक्षा करेंगी. वे INS सुमेधा (स्वदेशी नेवल ऑफशोर पेट्रोल वेसल) से रिव्यू करेंगी, जिसे इस बार प्रेसिडेंट्स यॉट बनाया गया है.     अन्य कार्यक्रम: 15 से 25 फरवरी तक MILAN 2026 (मल्टीलेटरल नेवल एक्सरसाइज) और IONS (Indian Ocean Naval Symposium) चीफ्स कॉनक्लेव भी होंगे. INS विक्रांत क्यों सबसे बड़ा आकर्षण? आईएनएस विक्रांत भारत का पहला घरेलू एयरक्राफ्ट कैरियर है. यह 45,000 टन का है. लंबाई 262.5 मीटर, चौड़ाई 61.6 मीटर. 1600 से ज्यादा लोग इसमें काम करते हैं (महिला अधिकारी भी शामिल).     हवाई जहाज: MiG-29K फाइटर जेट, MH-60R रोमियो हेलीकॉप्टर (अमेरिका से), Chetak, Sea King, Kamov-31 आदि. फ्रांस से 26 Rafale-M नेवल फाइटर आने वाले हैं, जो इसकी ताकत बढ़ाएंगे.     डिफेंस सिस्टम: 2 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (64 Barak-8 मिसाइलें), 4 OTO Melara 76 mm गन, 4 CIWS (क्लोज-इन वेपन सिस्टम).     क्षमता: एंटी-सबमरीन वारफेयर, एंटी-शिप अटैक, एयर डिफेंस, सर्वेलेंस, सर्च एंड रेस्क्यू. इसे फ्लोटिंग एयरफील्ड कहा जाता है. ऑपरेशन सिंदूर में विक्रांत ने कमाल दिखाया: 2025 में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान अरब सागर में तैनात होकर पाकिस्तानी नौसेना को बेस से बाहर आने से रोका. इससे कैरियर बैटल ग्रुप की ताकत साबित हुई. अब IFR में यह दुनिया को भारत की समुद्री शक्ति दिखाएगा. अन्य स्वदेशी जहाज भी होंगे शामिल     नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट्स (प्रोजेक्ट 17A) – स्टेल्थ फ्रिगेट्स, 1980 के बाद पहली बार फ्लीट रिव्यू में.     विशाखापत्तनम- क्लास डेस्ट्रॉयर, अर्नाला-क्लास ASW कॉर्वेट्स आदि. भारत की फ्लीट रिव्यू की परंपरा     1953: पहला फ्लीट रिव्यू (बॉम्बे में).     1966: मूल INS विक्रांत ने हिस्सा लिया.     2001: पहला IFR (मुंबई में).     2016: दूसरा IFR (विशाखापत्तनम में, थीम United Through Oceans).     2026: तीसरा IFR – अब भारत बिल्डर नेवी बन चुका है, जहां स्वदेशी जहाजों पर जोर है. IFR 2026 भारत की मैरीटाइम पावर, आत्मनिर्भरता और इंडो-पैसिफिक में नेतृत्व को दिखाएगा. यह दोस्ताना नौसेनाओं के साथ सहयोग बढ़ाएगा और डिटरेंस (रोकथाम) का संदेश देगा. recent visitors 26

यूपी में स्वास्थ्य पहल: 9.8 करोड़ बच्चों को दी जाएगी कृमि मुक्ति दवा

लखनऊ  राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर एक से 19 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को पेट के कीड़ों से बचाव के लिए एल्बेंडाजोल दवा खिलाई जाएगी। जो बच्चे इस दिन दवा का सेवन नहीं कर पाएंगे, उन्हें 13 फरवरी को मॉप-अप राउंड के तहत दवा दी जाएगी। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के महाप्रबंधक डॉ. सतीश कुमार गौतम ने बताया कि प्रदेश में लगभग 9.8 करोड़ बच्चों को कृमि मुक्ति दवा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह अभियान वर्ष में दो बार फरवरी और अगस्त में संचालित किया जाता है, जिसे स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस और शिक्षा विभाग के संयुक्त सहयोग से लागू किया जाएगा।  अभियान चलाया जाएगा उन्होंने बताया कि प्रदेश के 21 जनपदों के 64 चयनित ब्लॉकों, शहरी क्षेत्रों और प्लानिंग यूनिट्स में राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान चलाया जाएगा। इन क्षेत्रों में कृमि मुक्ति दिवस का आयोजन नहीं होगा, क्योंकि आईडीए अभियान के तहत एल्बेंडाजोल दवा पहले से ही दी जा रही है। किसी भी बच्चे को खाली पेट दवा न दी जाए एल्बेंडाजोल दवा सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त एवं निजी विद्यालयों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को दी जाएगी। स्कूल न जाने वाले बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए दवा खिलाई जाएगी। शिक्षक और स्वास्थ्य कार्यकर्ता बच्चों को अपने सामने दवा का सेवन कराना सुनिश्चित करेंगे तथा यह विशेष ध्यान रखा जाएगा कि किसी भी बच्चे को खाली पेट दवा न दी जाए। रियल-टाइम रिपोर्टिंग की जाएगी कार्यक्रम की रियल-टाइम रिपोर्टिंग की जाएगी तथा कृमि मुक्ति दिवस से जुड़ी सभी गतिविधियों को विद्यालयों द्वारा ई-कवच पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। दवा सेवन के बाद कुछ बच्चों में मतली, चक्कर या उल्टी जैसे हल्के लक्षण दिखाई दे सकते हैं। किसी भी गंभीर या असामान्य स्थिति में आशा या एएनएम से संपर्क करें अथवा नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाएं। आवश्यकता पड़ने पर हेल्पलाइन नंबर 104 या एम्बुलेंस सेवा 108 पर कॉल की जा सकती है।    recent visitors 34

10 लाख भक्तों के लिए महाशिवरात्रि दर्शन प्लान, जानिए कहां से होगा प्रवेश और क्या रहेगी व्यवस्था

उज्जैन विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान महाकाल के मंदिर में आगामी 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का महापर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर देशभर से उमड़ने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति ने पुख्ता इंतजाम शुरू कर दिए हैं। रविवार को कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए मंदिर क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। महाशिवरात्रि महापर्व 2026 (15 फरवरी) पर भगवान महाकाल के दर्शन के लिए उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस अवसर पर सामान्य श्रद्धालुओं को लगभग डेढ़ किलोमीटर और 250 रुपए की शीघ्र दर्शन रसीद या पासधारी श्रद्धालुओं को करीब एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद भगवान महाकाल के दर्शन होंगे। भक्तों को सुलभ और सुरक्षित दर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भस्म आरती दर्शन, लड्डू प्रसाद, पूछताछ केंद्र, पार्किंग, जूता स्टैंड, पेयजल, प्रकाश, सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर मंदिर परिसर में अहम बैठक आयोजित की गईं। जिसमें कई निर्णय लिए गए। बैठक में कलेक्टर एवं मंदिर प्रशासक रौशन सिंह, प्रथम कौशिक, डीआईजी नवनीत भसीन, एसपी प्रदीप शर्मा, निगम आयुक्त अभिलाष मिश्र, सहायक प्रशासक आशीष फलवाडीया सहित मंदिर समिति के अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर ने तैयार किया सुरक्षा और दर्शन का रोडमैप कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ दर्शन मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भक्तों को कम से कम समय में सुगमता से दर्शन हों, इसके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की आवाजाही के रास्तों और मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सामान्य श्रद्धालुओं की प्रवेश-निर्गम व्यवस्था सामान्य श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला के समीप बने द्वार से प्रवेश करेंगे। वे भील समाज धर्मशाला, चारधाम मंदिर पार्किंग, शक्ति पथ, त्रिवेणी संग्रहालय के समीप, नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसेलिटी सेंटर-01, टनल, नवीन टनल-01 होते हुए गणेश मंडपम से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। दर्शन के बाद श्रद्धालु आपातकालीन निर्गम द्वार से बाहर निकलकर बड़ा गणेश मंदिर, हरसिद्धि मंदिर चौराहा होते हुए अपने गंतव्य की ओर जाएंगे। शीघ्र दर्शन व पासधारी श्रद्धालुओं की व्यवस्था शीघ्र दर्शन 250 रुपए टिकटधारी श्रद्धालुओं के लिए अलग से बैरिकेटिंग की गई है। ये श्रद्धालु भील समाज धर्मशाला, चारधाम मंदिर पार्किंग, अशोक सेतु, मानसरोवर भवन, फेसेलिटी सेंटर-01, टनल, नवीन टनल-01 होते हुए गणेश मंडपम से दर्शन करेंगे। इसके अलावा शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालु हरसिद्धि पाल पार्किंग, बड़ा गणेश गली, प्रीपेड बूथ तिराहा, शहनाई जिगजेग, द्वार क्रमांक-01 से मंदिर में प्रवेश कर दर्शन कर सकेंगे। भस्म आरती दर्शन व्यवस्था महाशिवरात्रि पर्व पर भस्म आरती के लिए पंजीयनधारी श्रद्धालुओं का प्रवेश मानसरोवर भवन और द्वार क्रमांक-01 से निर्धारित किया गया है। पार्किंग सुविधा के लिए     पार्किंग : सामान्य श्रद्धालु के लिए कर्कराज पार्किंग, मेघदूत पार्किंग में व्यवस्था की गई है।     शीघ्र दर्शन टिकटधारी श्रद्धालुओं के लिए कार्तिक मेला ग्राउंड, राणौजी की छत्रि, शगुन गार्डन, महाकाल मंडपम् पर व्यवस्था की गई है।     जूता स्टैंड : सुविधा के लिए भील समाज धर्मशाला, झालरिया मठ एवं हरसिद्धि पाल पर व्यवस्था की गई।     शीघ्र दर्शन काउंटर : कर्कराज पार्किंग, हरसिद्धि पाल पार्किंग पर की जाएगी।     लड्डू प्रसाद : काउंटरों की व्यवस्था नृसिंहघाट रोड पर एवं हरसिद्धि रोड पर की जाएगी। प्रशासन की अपील मंदिर समिति और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित मार्गों का पालन करें, सुरक्षा व्यवस्था में सहयोग करें और धैर्य बनाए रखें, जिससे सभी भक्त सुचारू रूप से भगवान महाकाल के दर्शन कर सकें। कलेक्टर ने तैयार किया सुरक्षा और दर्शन का रोडमैप कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ दर्शन मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) का अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भक्तों को कम से कम समय में सुगमता से दर्शन हों, इसके लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया जाए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं की आवाजाही के रास्तों और मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक चिकित्सा की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।   recent visitors 26

कृषि मंत्री कंषाना का बयान: दलहन नीति निर्धारण और अनुसंधान में ऐतिहासिक पहल

दलहन क्षेत्र का राष्ट्रीय सम्मेलन 7 फरवरी को सीहोर के अमलाहा में दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर होगा साबित : कृषि मंत्री  कंषाना कृषि मंत्री कंषाना का बयान: दलहन नीति निर्धारण और अनुसंधान में ऐतिहासिक पहल भोपाल प्रदेश के अमलाहा, जिला सीहोर में 7 फरवरी को दलहन उत्पादन एवं उत्पादकता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श के लिये एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में दलहन क्षेत्र की मूल संवेदनाओं, वर्तमान चुनौतियों तथा भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम में देश के प्रमुख दलहन उत्पादक राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारीगण, दलहन अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक, सरकारी बीज उत्पादक संस्थाएँ, दाल उद्योग से संबंधित प्रतिनिधि एवं अन्य सहयोगी एजेंसियाँ भाग लेंगी। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि दलहन उत्पादन को सुदृढ़ करने, किसानों की आय बढ़ाने तथा उन्नत तकनीकों के माध्यम से उत्पादकता सुधार पर अपने विचार साझा करेंगे। यह सम्मेलन दलहन क्षेत्र में नीति निर्धारण और अनुसंधान में मील का पत्थर साबित होगा। सम्मेलन का उद्देश्य किसानों तक नवीन शोध, गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक खेती पद्धतियों तथा बाज़ार से जुड़ी जानकारी पहुँचाना है, जिससे दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिल सके। साथ ही विभिन्न राज्यों के अनुभवों के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय स्तर पर दलहन विकास की दिशा में ठोस रणनीति तैयार की जाएगी।   recent visitors 25

भारतीय शोधकर्ताओं की खोज: बैक्टीरिया की मदद से मंगल की मिट्टी से बनेगी मजबूत ईंट, अंतरिक्ष मिशनों में मदद

बैंगलोर अंतरिक्ष यानी स्पेस सेक्टर में भारत लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है. इस लिस्ट में अब एक और गर्व की बात जुड़ गई है. पिछले साल इंटरनेशलन स्पेस स्टेशन जाकर लौटने वाले भारतीय एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला ने अपने करियर में एक नई और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है. उन्होंने बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस यानी IISc के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर एक ऐसी रिसर्च की है, जो भविष्य में मंगल ग्रह पर इंसानों के बसने का रास्ता आसान बना सकती है. यह स्टडी इस बात पर फोकस है कि क्या मंगल ग्रह की मिट्टी से ही वहां कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स यानी इमारतें बनाने का सामान जैसे- ईंट, सीमेंट आदि तैयार की जा सकती है. इस रिसर्च का मकसद सीमेंट जैसी कार्बन उत्सर्जन करने वाले साधानों पर निर्भरता को मंगल ग्रह के साथ-साथ पृथ्वी पर भी कम करना है. इस रिसर्च जर्नल को PLOS One में पब्लिश किया गया है. शुभांशु शुक्ला फिलहाल IISc में मास्टर डिग्री कर रहे हैं. उनका कहना है कि भविष्य की मंगल यात्राओं में अगर हमें सड़कें, लैंडिंग पैड या रोवर के लिए मजबूत ज़मीन चाहिए, तो वहां की मिट्टी का ही इस्तेमाल करना सबसे बेहतर तरीका होगा. इससे पृथ्वी से भारी कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स को लेकर जाने की जरूरत नहीं पड़ेही और मिशन ज्यादा टिकाऊं हो पाएंगे. रिसर्च में इस्तेमाल हुआ खास बैक्टीरिया इस रिसर्च में वैज्ञानिकों ने खास तरह के बैक्टीरिया का इस्तेमाल किया है, जो मिट्टी के कणों को आपस में जोड़कर ईंट जैसा स्ट्रक्चर बना सकते हैं. पहले के एक्सपेरीमेंट्स में Sporosarcina pasteurii नाम का बैक्टीरिया यूज़ किया गया था. इस बार टीम ने बेंगलुरु की मिट्टी से मिला एक ज्यादा मजबूत बैक्टीरिया चुना, जिससे बायोसीमेंटेशन का प्रोसेस बेहतर हो सके. हालांकि, मंगल ग्रह की मिट्टी में पाए जाने वाले परक्लोरेट नाम के जहरीले केमिकल ने वैज्ञानिकों के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी. जब बैक्टीरिया को सिर्फ परक्लोरेट के संपर्क में लाया गया, तो वो तनाव में आ गए और धीरे-धीरे बढ़ने लगे, आपस में चिपकने लगे. लेकिन जब वही बैक्टीरिया ईंट बनाने वाले जरूरी तत्वों के साथ मौजूद थे, तो उसके रिजल्ट्स काफी चौंकाने वाले निकले. रिसर्च की पहली ऑथर यानी लेखिका स्वाति दूबे के अनुसार, इस स्थिति में बैक्टीरिया एक खास तरह का मैट्रिक्स छोड़ते हैं, जो कमजोर बैक्टीरिया तक पोषक तत्व पहुंचाने में मदद करता है. इससे ईंट बनने का प्रोसेस और मजबूत हो जाता है. अब वैज्ञानिक इस टेक्नोलॉजी को मंगल जैसे वातावरण में, खासकर ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड वाली परिस्थितियों में टेस्ट करने की प्लानिंग कर रहे हैं. अगर ये प्लानिंग सफल रही, तो यह टेक्नोलॉजी न सिर्फ मंगल पर कंस्ट्रक्शन वर्क करने में मदद करेगी, बल्कि पृथ्वी पर भी पर्यावरण के अनुकूल एक अच्छा विकल्प बन सकती है. recent visitors 28