भाजपा कार्यालय मंडला में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई संत रविदास जयंती

भाजपा कार्यालय मंडला में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई संत रविदास जयंती   मंडला भारतीय जनता पार्टी जिला मुख्यालय में रविवार महान संत, समाज सुधारक एवं समता के प्रणेता संत शिरोमणि गुरु रविदास जी की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में प्रदेश की कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उईके एवं भाजपा जिला अध्यक्ष श्री प्रफुल्ल मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं द्वारा संत रविदास जी के तैल्य चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उईके ने कहा कि संत रविदास जी ने अपने विचारों और कृत्यों से समाज को समानता, बंधुत्व और मानवता का मार्ग दिखाया। उनका जीवन हमें जाति, भेदभाव और असमानता से ऊपर उठकर एक समरस समाज के निर्माण की प्रेरणा देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार संत रविदास जी के विचारों को धरातल पर उतारने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। वहीं भाजपा जिला अध्यक्ष श्री प्रफुल्ल मिश्रा ने कहा कि संत रविदास जी का जीवन समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के लिए आशा की किरण है। भारतीय जनता पार्टी उनके विचारों से प्रेरणा लेकर ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। आज की युवा पीढ़ी को संत रविदास जी के आदर्शों को अपनाकर सामाजिक समरसता को मजबूत करना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने संत रविदास जी के बताए मार्ग पर चलने एवं समाज में समरसता, समानता और सद्भाव को मजबूत करने का संकल्प लिया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ संजय कुशराम, नगर अध्यक्ष रानू राजपूत, किसान मोर्चा अध्यक्ष श्री उमेश शुक्ला, वरिष्ठ कार्यकर्ता विनय मिश्रा, सुधीर कसार, मंडल अध्यक्ष ललित लोधी, शशि पटेल, अंशुमाली शुक्ला,सौरभ गुप्ता, मयंक विश्वकर्मा, बसंत चौधरी, दिनेश चौधरी, सचिन शर्मा,उमा यादव, बबीता अधिकारी, ज्योति मलिक,रितु भांगरे,नरेश सिंधिया, सावन चौरसिया,सत्यम मिश्रा, अंकित चौरसिया,विकास यादव, सुदीप चौरसिया,कैलाश जैन, सुरेंद्र क्षत्री ऋषभ सिन्हा सहित भाजपा कार्यकर्तागण उपस्थिति रहे । recent visitors 45

साप्ताहिक जनसुनवाई: कलेक्टर ने सुनी जनता की शिकायतें, तुरंत समाधान के दिए निर्देश

कलेक्टर ने सुनीं आमजन की समस्याएं, त्वरित निराकरण के दिए निर्देश साप्ताहिक जनसुनवाई में 90 आवेदनों पर सुनवाई   डिंडौरी    जिला मुख्यालय पर आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में आज बड़ी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर पहुंचे। कलेक्टर ने एक-एक कर आवेदकों से मुलाकात की और उनकी शिकायतों के निराकरण के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।            कलेक्ट्रेट सभागार में  आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में आम नागरिकों की समस्याएं सुनी गईं तथा कई आवेदनों का मौके पर ही समाधान कराया गया। जनसुनवाई में जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए नागरिकों द्वारा समस्याओं एवं शिकायतों से संबंधित कुल 90 आवेदन प्रस्तुत किए गए। जिन मामलों का तत्काल निराकरण संभव नहीं हो सका, उनमें आवेदकों को समय-सीमा निर्धारित कर आवश्यक आश्वासन प्रदान किया गया।         जनसुनवाई के दौरान ग्राम पंचायत पोंड़ी माल विकासखंड डिंडौरी की आवेदिका श्रीमती अंधियारो बाई धुर्वे (आयु 70 वर्ष) एवं श्री गनपत सिंह (आयु 75 वर्ष) द्वारा विगत 10 माह से पेंशन राशि प्राप्त नहीं होने की शिकायत प्रस्तुत की गई। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए अपर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारी को तत्काल निराकरण के निर्देश दिए।      कलेक्टर के निर्देश पर सामाजिक न्याय विभाग द्वारा दोनों हितग्राहियों की ई-केवायसी की गई, जिससे आगामी माह से उनके खाते में पेंशन राशि का नियमित भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा।       इसी क्रम में ग्राम बहेरा टोला, ग्राम पंचायत माधोपुर विकासखंड डिंडौरी के आवेदक श्री इन्द्रपाल सिंह (आयु 82 वर्ष) एवं श्रीमती उर्मिला बाई (आयु 78 वर्ष) ने भी वृद्धावस्था पेंशन न मिलने की समस्या जनसुनवाई में रखी। जांच में पाया गया कि ई-केवायसी पूर्ण न होने के कारण उनकी पेंशन बंद थी। अपर कलेक्टर के निर्देशानुसार पुनः ई-केवायसी की गई, जिससे आगामी माह से पेंशन भुगतान पुनः प्रारंभ हो जाएगा। इसी प्रकार ग्राम ईश्वरपुर बंगवार ग्राम पंचायत दामी तितराही जनपद पंचायत समनापुर के श्री प्रेमलाल झिगराम ने जनसुनवाई में आवेदन दिया कि मेरे पुत्र पवन कुमार झिगराम की मृत्यु  28 सितंबर 2025 को हुआ है जिसका ग्राम पंचायत के द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। उक्त मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने हेतु जनसुनवाई में पहुंचे जहां पर अपर कलेक्टर ने योजना एवं सांख्यिकी विभाग के श्री अभिषेक बंसल को निराकरण करने के लिए निर्देशित किया जिस पर उन्होंने समस्या को गंभीरता से लेते हुए एक घंटे के अंदर मृत्यु प्रमाण पत्र संबंधित हितग्राही को जनसुनवाई के दौरान सौंपा गया।         अपर कलेक्टर ने जिले के समस्त हितग्राहियों से अपील की है कि यदि किसी भी व्यक्ति की पेंशन राशि बंद हो गई है अथवा इस प्रकार की कोई समस्या है, तो वे अपने ग्राम पंचायत के सचिव, रोजगार सहायक, मोबिलाइज़र अथवा संबंधित जनपद पंचायत कार्यालय में संपर्क कर समस्या का समाधान करा सकते हैं, जिससे जिला मुख्यालय आने में समय व परेशानी से बचा जा सके।          जनसुनवाई में आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय भुगतान न होने पर उन्होंने जनसुनवाई में गुहार लगाई है कि ’ओम पारस मेन पावर सर्विस’ लिमिटेड, भोपाल के माध्यम से जिले के विभिन्न सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने आवेदन सौंपा। डाटा एंट्री ऑपरेटर, वार्डवॉय और सिक्योरिटी गार्ड सहित अन्य कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें नवंबर, दिसंबर और जनवरी माह का मानदेय अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। कर्मचारियों ने अपर कलेक्टर से मांग की है कि उनके मानदेय भुगतान के लिए एक निश्चित समय सीमा निर्धारित की जाए। जिस पर अपर कलेक्टर ने संबंधित विभाग को समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए तथा अपर कलेक्टर के द्वारा लिखित आवेदन भी कंपनी को मानदेय भुगतान  हेतु प्रेषित किया जाए। इसी तरह ग्राम मुंगेला विकासखंड समनापुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत बंजरा के सरपंच और ग्रामीणों ने सामुहिक रूप से लिखित आवेदन के साथ प्राथमिक शाला के जर्जर भवन की स्थिति की शिकायत की। बच्चों को स्कूल में अध्ययन में समस्या आ रहीं है। ग्रामीणों ने नए भवन निर्माण की मांग की। जिस पर अपर कलेक्टर ने समस्या को गंभीरता से लेते हुए डीपीसी, सर्व शिक्षा अभियान अधिकारी को निराकरण करने के निर्देश दिए।      ग्राम मोहगांव माल निवासी आवेदक ने अपने पिता की मृत्यु के उपरांत प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत लंबित क्लेम राशि के भुगतान हेतु आवेदन दिया। जिस पर कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारी को समस्या का निराकरण करने के निर्देश दिए।       कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित इस जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे प्राप्त आवेदनों की गंभीरता से जांच करें और समय सीमा के भीतर हितग्राहियों को लाभ दिलाना सुनिश्चित करें।     जनसुनवाई के दौरान अतिरिक्त सीईओ जिला पंचायत  पंकज जैन, एसडीएम डिंडौरी सुश्री भारती मेरावी, डिप्टी कलेक्टर  वैद्यनाथ वासनिक, डिप्टी कलेक्टर सुश्री प्रियांशी जैन, सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग श्री राजेन्द्र जाटव, एलडीएम  रविशंकर सहित अन्य संबंधित अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे। recent visitors 56

भारत में फिलिस्तीन स्टिकर विवाद: ब्रिटिश कपल पर एजेंसियों का अलर्ट, तुरंत निकाला गया देश से

अजमेर राजस्थान के अजमेर में सार्वजनिक स्थलों पर इजरायल के खिलाफ और फिलिस्तीन के समर्थन में स्टिकर चिपकाने के मामले में एक ब्रिटिश दंपति के खिलाफ कार्रवाई करते हुए भारतीय अधिकारियों ने उन्हें देश छोड़ने के निर्देश दिए हैं। खुफिया एजेंसियों ने इसे गंभीर मामला मानते हुए जिला पुलिस को सतर्क किया, जिसके बाद दोनों विदेशी नागरिकों से पूछताछ की गई। जानकारी के अनुसार, लुईस गैब्रियल डी. अपनी गर्लफ्रेंड अनुशी एम्मा क्रिस्टीन के साथ पर्यटक वीजा पर भारत आए थे और वे पुष्कर में ठहरे हुए थे। 21 जनवरी को खुफिया विभाग को सूचना मिली कि यह दंपति अजमेर के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर राजनीतिक प्रकृति के स्टिकर चिपका रहा है। इसके बाद खुफिया विभाग ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय सूचनाओं की समीक्षा कर दोनों की पहचान की। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस को शामिल किया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सीआईडी) राजेश मीणा के नेतृत्व में गठित टीम ने दोनों संदिग्धों से पूछताछ की। पूछताछ में सामने आया कि उन्होंने पर्यटक वीजा की शर्तों का उल्लंघन करते हुए राजनीतिक गतिविधियों में भाग लिया, जो वीजा नियमों के तहत प्रतिबंधित है। पुलिस की मदद से सार्वजनिक स्थानों से सभी स्टिकर हटा दिए गए। इसके बाद आव्रजन और विदेशियों से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए गए और उन्हें 'लीव इंडिया नोटिस' जारी किया गया, जिसमें देश छोड़ने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया जा सकता है, उनके खिलाफ निर्वासन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है और उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है, जिससे भविष्य में भारत में प्रवेश पर रोक लग सकती है। प्रशासन ने दो टूक कहा है कि पर्यटक वीज़ा पर भारत आए किसी भी विदेशी को राजनीतिक, विरोध प्रदर्शन या वैचारिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है। recent visitors 43

भ्रष्ट ठेकेदार का कारनामा उजागर, विधायक ने गुणवत्ताहीन निर्माण को तुड़वाया

सीतापुर. भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो कुछ दिनों से एक अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। विधायक रामकुमार टोप्पो ने अपने क्षेत्र में जारी विकास कार्यों में लापरवाही बरतने वाले और भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया हुआ है। विधायक टोप्पो मंगलवार को मैनपाट ब्लॉक के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य पाए जाने पर विधायक ने तत्काल उसे तुड़वाया और दोबारा निर्माण करने का आदेश जारी किया। इस दौरान विधायक टोप्पो ने सख्त रवैया अपनाते हुए कहा कि, निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह सीधे तौर पर क्षेत्र के विकास से जुड़ा मामला है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि, अपने क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए विधायक रामकुमार टोप्पो ग्राम ग्राम करमहा पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सड़क किनारे चल रहे रिटर्निंग वॉल के निर्माण का निरीक्षण किया और रिटर्निंग वॉल की बारीकी से जांच की। दीवार के निर्माण में गुणवत्ता की कमी और घटिया सामग्री का उपयोग देखकर विधायक आक्रोशित हो गए। विधायक रामकुमार टोप्पो ने निरीक्षण के दौरान ही अधिकारियों को इस निर्माण कार्य को पूरी तरह तोड़कर नए सिरे से मानक स्तर पर बनाने का निर्देश दे दिया। रिटर्निंग वॉल के निरीक्षण के बाद विधायक टोप्पो ग्राम करमहा में ही सड़क पर बने एक नवनिर्मित पुल का निरीक्षण पहुंचे। इस दौरान उन्हें वहाँ भी खामियां नजर आई। विधायक रामकुमार टोप्पो ने पुल को भी तत्काल प्रभाव से तोड़कर दोबारा बनाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। विधायक टोप्पो के इस अवतार को देखे क्षेत्र के ठेकेदारों और संबंधित अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।   recent visitors 39

एमपी का सफर प्रभावित, घने कोहरे से विजिबिलिटी कम, 12+ ट्रेनें लेट और शाजापुर में हादसे में जान गई

भोपाल  मध्य प्रदेश में ओले और बारिश का दौर थमने के बाद बुधवार सुबह घने कोहरे ने जनजीवन को प्रभावित कर दिया। ग्वालियर में दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली एक दर्जन से ज्यादा ट्रेनें देरी से चल रही है।  बुधवार सुबह ग्वालियर के अलावा दतिया, रीवा, रतलाम, उज्जैन, दमोह, नौगांव, सीधी, भोपाल, इंदौर, राजगढ़, खजुराहो, गुना, छिंदवाड़ा, जबलपुर, मंडला, सागर, टीकमगढ़, मलाजखंड, शाजापुर, छतरपुर, विदिशा, आगर-मालवा, सीहोर, भिंड और मुरैना समेत कई जिलों में मध्यम से घने कोहरे का असर देखने को मिला। कुछ इलाकों में विजिबिलिटी बेहद कम होने से सड़क और रेल यातायात प्रभावित हुआ। राजगढ़ सबसे ठंडा, न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस कोहरे के कारण शाजापुर जिले के अकोदिया-शुजालपुर स्टेट हाईवे पर कार और बाइक की भिड़ंत हो गई, जिसमें एक युवक की मौत हो गई। वहीं विदिशा में सुबह हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। उत्तरी मध्य प्रदेश में कोहरे के साथ सर्द हवाएं चल रही हैं, हालांकि रात के तापमान में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। प्रदेश में राजगढ़ सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल और इंदौर में न्यूनतम तापमान 14 डिग्री, ग्वालियर में 13.1, उज्जैन में 14 और जबलपुर में 14.8 डिग्री सेल्सियस रहा। अन्य जिलों में पारा 10 से 16 डिग्री के बीच दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार ग्वालियर में विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम, दतिया और रीवा में 50 से 200 मीटर, जबकि भोपाल, इंदौर और राजगढ़ में एक किलोमीटर से ज्यादा रही। रेल यातायात पर पड़े असर के चलते पंजाब मेल 3 घंटे, शताब्दी एक्सप्रेस करीब 3 घंटे, कर्नाटक एक्सप्रेस 4 घंटे से अधिक और मालवा एक्सप्रेस 8 घंटे 15 मिनट की देरी से चल रही है। recent visitors 38

बलूचिस्तान संकट: बवाल के बावजूद US और चीन क्यों बने हुए हैं गवाह?

बलूचिस्तान बलोचों के मुस्लिम भर होने से कलात (बलूचिस्तान) को पाकिस्तान का हिस्सा नहीं बन जाना चाहिए… 27 मार्च 1948 को जब पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने बलूचिस्तान को जबरन कब्जाया तो इसका काफी विरोध हुआ. जिन्ना अपनी ही बातों से मुकर गए. जिस जिन्ना ने बलूचिस्तान को स्वायत्त रहने देने की सलाह दी थी, उन्होंने ही जबरन आजाद बलूचिस्तान को पाकिस्तान में मिला लिया.  पाकिस्तानी इतिहासकार याकूब खान बंगाश अपनी किताब, 'अ प्रिंसली अफेयर' में लिखते हैं, 'आजाद रहने के प्रतिरोध को पाकिस्तान की सरकार ने कुचल दिया और बलपूर्वक कलात को अपने में मिला लिया.' पाकिस्तान जब आजाद हुआ तब कलात को अलग स्वायत्त प्रदेश की मान्यता मिली थी. 11 अगस्त 1947 को कलात और मुस्लिम लीग के बीच हुए समझौते में बलूचिस्तान एक अलग देश बना लेकिन उसकी सुरक्षा पाकिस्तान के जिम्मे दी गई. 12 अगस्त को बलूचिस्तान के शासक मीर अहमद खान ने अपनी रियासत को एक आजाद देश घोषित किया. लेकिन बलूचिस्तान की आजादी महज 227 दिनों की मेहमान थी.  27 मार्च 1948 को मीर अहमद खान से पाकिस्तान में विलय के पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए. उसी दिन से बलूचिस्तान में हिंसा और टकराव का सिलसिला शुरू हुआ, जो आज भी थमा नहीं है. बीएलए के हमलों से दहल उठा पाकिस्तान बीते शुक्रवार रात को बलूचिस्तान की आजादी के लिए लड़ रहे हथियारबंद समूह बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने प्रांत के करीब एक दर्जन ठिकानों को सिलसिलेवार तरीके से निशाना बनाया. हमले अगले दिन भी जारी रहे और एक के बाद एक हुए इन धमाकों से पाकिस्तान दहल उठा. करीब 200 बीएलए लड़ाके, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, ने छोटे-छोटे समूहों में बंटकर एक साथ आत्मघाती धमाके और गोलीबारी की. पुलिस थानों, लोगों के घरों और सेना से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया. बीएलए का दावा है कि उसके हमलों में 200 से अधिक पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं. लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कहा जा रहा है कि हमले में 17 सैनिक और 31 नागरिक मरे हैं.  पाकिस्तानी सेना की जवाबी कार्रवाई में विद्रोही लड़ाकों को भारी नुकसान पहुंचा है. सेना की कार्रवाई में 177 बीएलए लड़ाके मारे गए हैं.  पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हमले पर बोलते हुए सोमवार को कहा कि बलूचिस्तान में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती जरूरी है. पाकिस्तान की संसद में खड़े होकर आसिफ ने कहा, 'भौगोलिक रूप से बलूचिस्तान पाकिस्तान के 40 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है. इसे कंट्रोल करना किसी घनी आबादी वाले शहर से कहीं ज्यादा मुश्किल है. ऐसी जगह को कंट्रोल करने के लिए भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की जरूरत होती है. हमारे सैनिक वहां तैनात हैं और आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन इतने बड़े इलाके की निगरानी और वहां पेट्रोलिंग करना बेहद चुनौती भरा है.' ये वही बलूचिस्तान है जिसके कीमती पत्थर देख ट्रंप की आंखों में आ गई चमक पिछले साल सितंबर में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ अमेरिका पहुंचे थे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दोनों से मुलाकात की. इस दौरान मुनीर ने शहबाज शरीफ की मौजूदगी में ट्रंप के सामने एक ब्रीफकेस खोला… ब्रीफकेस खुलते ही बिजनेसमैन राष्ट्रपति ट्रंप की आंखें चमक उठीं. अंदर चमकते कीमती पत्थरों और खनिजों का एक सेट था. मुनीर का यह गिफ्ट ट्रंप को पाकिस्तान की ताजा पेशकश का हिस्सा था. मतलब साफ था कि पाकिस्तान अपने खनिज संसाधनों को अमेरिकी निवेश के लिए खोलने को तैयार है. पाकिस्तान के खनिज संसाधन यानी बलूचिस्तान के खनिज संसाधन. गैस, सोने, तांबे की खान है बलूचिस्तान बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर प्रांत है. पाकिस्तान की कुल जमीन का करीब 44 प्रतिशत हिस्सा बलूचिस्तान है जहां पाकिस्तान के गैस, कोयला, सोना, तांबा का अधिकांश रिजर्व है. बलूचिस्तान में कीमती पत्थरों की भी भरमार है और पाकिस्तान के कुल कीमती पत्थरों का 90% हिस्सा यही से निकाला जाता है. यहां के संगमरमर काफी मशहूर है जो हाई क्वालिटी के होते हैं. जियारत व्हाइट, ब्लैक एंड गोल्ड मार्बल यहां की पहचान हैं. बलूचिस्तान में रेयर अर्थ मिनरल्स के भी बड़े भंडार हैं. पाकिस्तान के कुल खनिज संसाधनों का 75% हिस्सा बलूचिस्तान से निकाला जाता है. लेकिन इन संसाधनों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की सरकार के पास जाता है. बलूचिस्तान का ईरान और अफगानिस्तान एंगल बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है बावजूद इसके, यहां की आबादी काफी कम है. पाकिस्तान की 25 करोड़ आबादी का केवल छह फीसद हिस्सा यहां रहता है. बलूचिस्तान में बलूच जनजाति की बहुलता है जो यहां के स्थानीय निवासी हैं. कुछ संख्या में पश्तून भी बलूचिस्तान में रहते हैं.  बलूचिस्तान क्षेत्र तीन देशों के बीच बंटा है जिसमें पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत, ईरान का सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत और अफगानिस्तान के निमरुज, हेलमंद और कांधार शामिल हैं. दोनों देशों से लगती बलूचिस्तान की सीमाएं हमेशा से अस्थिर रही हैं. ईरान और पाकिस्तान के बीच यूं तो भाईचारे वाला संबंध रहा है लेकिन दोनों देश एक-दूसरे पर बलूच विद्रोहियों को लेकर आरोप लगाते रहे हैं. ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में स्थित विद्रोही समूहों को लेकर पाकिस्तान और बलूचिस्तान स्थित समूहों को लेकर ईरान एक-दूसरे पर दोष मढ़ते रहते हैं. इसी लड़ाई को लेकर 16 जनवरी 2024 को ईरान ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे. ईरान का दावा था कि उसने बलोच सुन्नी मिलिटेंट समूह जैश अल-अदल के ठिकानों को निशाना बनाया क्योंकि वो ईरान पर हमले कर रहा है.  जवाब में पाकिस्तान ने भी ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान में रॉकेट और मिसाइलों से हमले किए. पाकिस्तान ने दावा किया कि ये हमले उसने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) के ईरान स्थित ठिकानों पर किए हैं. इन हमलों से दोनों देशों में भारी तनाव देखा गया था. अफगानिस्तान से लगती बलूचिस्तान की सीमा भी लंबे समय से अस्थिर बनी हुई है.  पाकिस्तान लगातार अफगानिस्तान के तालिबान शासन पर आरोप लगाता रहा है कि वो इन सीमाओं से आतंकियों की आवाजाही रोकने में नाकाम रहा है. बलूचिस्तान में अशांति को लेकर पाकिस्तान कभी अफगानिस्तान तो कभी भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाता है लेकिन वो … Read more

सिनेमा की दुनिया को कहा अलविदा, उर्मिला मातोंडकर की अपनी पसंद से बनी दूरी

मुंबई बॉलीवुड में सफलता अक्सर कलाकारों को लंबे समय तक बांध कर रखती है। जब कोई कलाकार लोकप्रियता, कमाई और दर्शकों के प्यार तीनों के शिखर पर होता है तो आमतौर पर वह उस दौर को जितना हो सके, उतना लंबा खींचना चाहता है, लेकिन हिंदी सिनेमा में कुछ नाम ऐसे भी हैं, जिन्होंने ठीक उसी वक्त फिल्मों से दूरी बनाने का फैसला लिया, और इन्हीं नामों में एक नाम है उर्मिला मातोंडकर का। जब उनका करियर अपने सबसे सुनहरे दौर में था, तभी उन्होंने पर्दे से ब्रेक ले लिया। उर्मिला मातोंडकर का जन्म 4 फरवरी 1974 को मुंबई में हुआ। उन्हें बचपन से ही अभिनय में दिलचस्पी थी। बहुत कम उम्र में उन्होंने कैमरे का सामना कर लिया था। महज तीन साल की उम्र में उन्होंने फिल्म 'कर्म' से बतौर बाल कलाकार काम शुरू किया। इसके बाद वह 'मासूम' में नजर आईं। पढ़ाई के साथ-साथ वह अभिनय करती रहीं और धीरे-धीरे फिल्मी दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा बन गईं। बतौर लीड एक्ट्रेस उर्मिला को असली पहचान साल 1995 में आई फिल्म 'रंगीला' से मिली। इस फिल्म ने उनकी पूरी किस्मत बदल दी। आमिर खान और जैकी श्रॉफ जैसे बड़े सितारों के बीच भी उर्मिला सबसे ज्यादा चर्चा में रहीं। उनके डांस, आत्मविश्वास और नए अंदाज ने दर्शकों को दीवाना बना दिया। इसी फिल्म के बाद वह 'रंगीला गर्ल' कहलाने लगीं। 'रंगीला' को कई बड़े पुरस्कार मिले और उर्मिला को भी सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का सम्मान मिला। 'रंगीला' के बाद उर्मिला ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 'सत्या', 'कौन', 'मस्त', 'दौड़' जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। वह सिर्फ ग्लैमर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने गंभीर और सशक्त भूमिकाओं में भी खुद को साबित किया। एक समय ऐसा आया जब उनकी फिल्मों की सफलता के कारण वह कई फिल्मों में अपने हीरो से ज्यादा फीस लेने लगी थीं। सबसे चौंकाने वाला फैसला तब आया, जब उर्मिला ने अपने करियर के पीक पर ही फिल्मों से दूरी बना ली। जिस उम्र में अभिनेत्रियां अपने करियर को और मजबूत करती हैं, उसी उम्र में उर्मिला ने कैमरे से पीछे हटना चुना। यह फैसला न तो किसी मजबूरी का नतीजा था और न ही असफलता का, बल्कि उनकी अपनी सोच और मानसिक शांति से जुड़ा हुआ था। फिल्मों से दूर होने के बाद उर्मिला ने साल 2016 में मोहसिन अख्तर मीर से शादी की। बाद में उन्होंने राजनीति में भी कदम रखा और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी। हालांकि, राजनीति में उन्हें वैसी सफलता नहीं मिली, जैसी फिल्मों में मिली थी, लेकिन उन्होंने अपनी पहचान खुद तय की। recent visitors 43