योगी सरकार ने चल-अचल संपत्ति छुपाने वाले कर्मचारियों के वेतन पर लगाई रोक

लखनऊ   राज्य सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद 68,236 राज्यकर्मियों ने अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण अब तक घोषित नहीं किया है। इस लापरवाही के चलते इन कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन फरवरी में नहीं मिलेगा। मुख्य सचिव एस.पी. गोयल के आदेशानुसार सभी राज्यकर्मियों को 31 जनवरी तक मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा अपलोड करना अनिवार्य था। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने समयसीमा का पालन नहीं किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्हें वेतन रोके जाने की कोई चिंता नहीं है। सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण अपलोड न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सरकार अब और कड़े कदम भी उठा सकती है। योगी आदित्यनाथ सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राज्यकर्मियों की संपत्ति का विवरण जुटाने को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर है। उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 के नियम-24 के तहत प्रदेश के कुल 8,66,261 राज्यकर्मियों को वर्ष 2025 तक की अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण 31 जनवरी तक पोर्टल पर देना अनिवार्य था। इसके लिए विभागों के नोडल अधिकारी और आहरण-वितरण अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि जो कर्मचारी तय समयसीमा तक विवरण अपलोड न करें, उनका वेतन रोक दिया जाए। इन सभी का वेतन रोका जाएगा  रात तक प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, संपत्ति विवरण न देने वालों में सबसे अधिक 34,926 तृतीय श्रेणी के कर्मचारी हैं। इसके अलावा 22,624 चतुर्थ श्रेणी, 7,204 द्वितीय श्रेणी और 2,628 प्रथम श्रेणी के अधिकारी शामिल हैं। वहीं ‘अन्य’ श्रेणी के 1,612 कर्मचारियों में से 854 ने भी संपत्ति का विवरण नहीं दिया है। इन सभी का वेतन रोका जाएगा।   recent visitors 69

नई ड्यूटी नियमावली: 75,000 रुपये से अधिक कीमत वाले सामान पर यात्रियों को देना होगा शुल्क

नई दिल्ली बीते एक फरवरी को आम बजट में कई ऐसे ऐलान हुए हैं। बजट-डे पर एक अहम ऐलान लगेज यानी सामान को लेकर हुआ है। केंद्र सरकार ने भारत में 'ड्यूटी फ्री' आयातित सामान लाने की लिमिट बदल दी है। ड्यूटी फ्री लगेज की लिमिट पहले के मुकाबले बढ़ाई गई है। पहले यह 50,000 रुपये था जिसे अब बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब 75 हजार रुपये से ज्यादा के सामान पर ड्यूटी चार्ज लगेगा। बता दें कि सरकार ने सामान नियम, 2026 को नोटिफाई किया है। इसके तहत भारत में भूमि मार्ग के अलावा किसी भी अन्य मार्ग से आने वाले भारतीय नागरिकों या भारतीय मूल के पर्यटकों को 75,000 रुपये तक का ड्यूटी फ्री सामान लाने की अनुमति होगी। कितने आभूषण लाने की होगी छूट नये नियम दो फरवरी की मध्यरात्रि से प्रभावी हो जाएंगे और एक दशक पुराने सामान संबंधी नियम की जगह लेंगे। नये नियमों के तहत भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों (शिशु को छोड़कर) को 25,000 रुपये तक के मूल्य का 'ड्यूटी फ्री' सामान लाने की इजाजत होगी। पहले यह सीमा नियम के तहत 15,000 रुपये थी। इसके अलावा, जो भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के लोग एक साल से अधिक समय से विदेश में रह रहे हैं, उनके लिए गहनों (ज्वेलरी) को लेकर अलग नियम बनाए गए हैं। 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी लाने की इजाजत भारत लौटने पर महिला यात्री 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकती हैं। वहीं, पुरुष यात्री (या महिला के अलावा अन्य) 20 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकते हैं। यह ज्वैलरी यात्री के वैध सामान का हिस्सा होनी चाहिए। ज्वैलरी में सोना, चांदी, प्लेटिनम या अन्य कीमती धातुओं से बने आभूषण शामिल हैं, चाहे उनमें रत्न जड़े हों या नहीं। सरकार का कहना है कि बैगेज नियम, 2026 आज के समय में बढ़ती यात्रा और लोगों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। recent visitors 474

संघ और दिल्ली से मंथन के बाद MP में नियुक्तियों की बड़ी सूची, निगम-मंडलों में होगी जल्द बदलाव

भोपाल  मध्यप्रदेश में लंबे समय से अटकी पड़ी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अब बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। निगम–मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियों की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। सत्ता और संगठन ने दिल्ली के निर्देश पर नामों की विस्तृत सूची तैयार कर ली है, जिस पर संघ से भी मंथन किया जा चुका है। सूत्रों के मुताबिक सूची दिल्ली भेज दी गई है और वहां से हरी झंडी मिलते ही नियुक्ति आदेश जारी किए जाने की तैयारी है। दरअसल, विधानसभा और लोकसभा चुनाव को करीब दो साल हो चुके हैं, लेकिन अब तक राजनीतिक नियुक्तियां नहीं होने से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी। इस असंतोष को देखते हुए जनवरी 2026 के पहले सप्ताह में 12 प्रमुख निगम मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में नियुक्तियों की योजना बनाई गई थी। नाम भी तय हो गए थे, लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की घोषणा के चलते प्रक्रिया बीच में ही अटक गई। दिल्ली का साफ संदेश—छोटी नहीं, बड़ी सूची लाओ सूत्र बताते हैं कि नियुक्तियों में हो रही देरी की शिकायत भोपाल से लेकर दिल्ली तक पहुंची। इसके बाद दिल्ली से साफ संदेश आया कि अब 10–12 नामों से काम नहीं चलेगा, बल्कि एकमुश्त बड़ी सूची भेजी जाए ताकि अधिकतर निगम मंडलों, प्राधिकरणों और आयोगों में एक साथ नियुक्तियां की जा सकें। सीएम हाउस में हुई मैराथन बैठक राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर मैराथन बैठक हुई, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित संगठन और सरकार के कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे। बैठक में निगम–मंडलों और प्राधिकरणों के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पदों के लिए प्रस्तावित नामों पर गहन चर्चा के बाद सूची को अंतिम रूप दिया गया।अब सबकी निगाहें दिल्ली से मिलने वाली अंतिम मंजूरी पर टिकी हैं। जैसे ही हरी झंडी मिलेगी, मध्यप्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का लंबा इंतजार खत्म हो जाएगा और सत्ता–संगठन में नई ऊर्जा का संचार होगा।   recent visitors 62

शम्भूलाल का संघर्ष और सफलता: दृष्टिहीन होते हुए भी हासिल किया पोस्ट मास्टर का पद

 आगर मालवा जीवन में जब मुसीबतें आती हे तो कई हिम्मत वाले इंसान भी अपना हौसला खो देते हैं. मगर हम आज आपको एक ऐसे युवा की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने अपने ऊपर आने वाली कठिनाइयों से ना सिर्फ लड़ाई की बल्कि वो सब कर दिखाया. जिसे देखकर हर कोई दंग है. युवक के इस हिम्मत की आसपास के क्षेत्र में भी चर्चा हो रही है.  दरअसल हम बात कर रहे हैं आगर मालवा जिले के ग्राम महुड़िया निवासी युवक शम्भूलाल विश्वकर्मा की. शम्भूलाल दृष्टिहीन हैं. उन्हें केवल एक या दो इंच की दूरी से ही दिखाई देता है. बस शम्भूलाल इसी से अपना काम चलाता है. शम्भूलाल इतनी दूरी से देखकर ही पोस्ट ऑफिस के सारे काम कर लेते हैं. मां भी दृष्टिहीन और पिता भी लकवाग्रस्त मोबाइल चलाना भी इनके लिए जैसे बाए हाथ का खेल है. इतनी ही दूरी से मोबाइल में लॉगिन करना, पासवर्ड डालना आदि सभी काम शम्भूलाल कर लेते हैं. शम्भूलाल बेहद ही गरीब परिवार से आते हैं. उनके पिता भी लकवाग्रस्त हैं. जिसके कारण वे पलंग पर लेटे-लेटे अपना जीवन गुजार रहे हैं. शम्भूलाल की मां भी जन्म से दृष्टिहीन हैं और वो भी अपने घर का काम किसी तरह करती हैं. शम्भूलाल को जितना भी समय मिलता है वे अपने पिता के पास बैठकर पिता का हौसला बढ़ाते हैं और मां के काम में भी थोड़ा हाथ बढ़ाते हैं. शम्भूलाल गांव में ही पढ़ाई करते थे. मगर परिवार की स्थिति के चलते उन्होंने जिला मुख्यालय पर आकर पढ़ाई करने का निर्णय लिया. पहले शम्भूलाल एक स्कूल में पढ़ने गए, मगर वहां उनके अनुरूप पढ़ाई नहीं थी. फिर शम्भूलाल आगर मालवा के एक निजी स्कूल में पढ़ाई करने गए. 10वीं में मिले 87 प्रतिशत अंक और फिर लगी नौकरी यहां उन्होंने बारहवीं तक पढ़ाई की. आश्चर्य की बात यह थी की शम्भूलाल ने दसवीं की परीक्षा में 87% अंक अर्जित किए. इसी दौरान स्कूल के अध्यापक ने शम्भूलाल को बताया कि दृष्टिहीन लोगों के लिए पोस्ट ऑफिस में भर्ती निकली है. जिसके बाद शम्भूलाल ने इस भर्ती के लिए आवेदन किया और उनका चयन हो गया. शम्भूलाल जिले के बाहर नौकरी करते थे. वहां अन्य सहयोगियों की मदद से एक गरीब कन्या से उनका विवाह भी हो गया और अब शम्भूलाल के घर एक छोटा सा बच्चा भी है. शम्भूलाल ने अपनी सोच और मेहनत से अपनी जिंदगी बदल दी व पोस्ट मास्टर बन गए. recent visitors 45

MP हाईवे पर 21 करोड़ खर्च, फिर भी हर दिन 33 दुर्घटनाएं और 10 जानें जाती हैं, हादसों का सिलसिला नहीं थम रहा

भोपाल. मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार पानी की तरह पैसा बहा रही है। बावजूद इसके नेशनल हाईवेज की जमीनी हकीकत आज भी डरावनी है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से पेश किए गए ताजा आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला विरोधाभास उजागर किया है।  प्रदेश में जहां हाईवे के रखरखाव और विकास पर हर दिन औसतन 21 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। आंकड़ों की मानें तो एमपी के हाईवे पर हर दिन औसतन 33 सड़क हादसे हो रहे हैं, जिनमें रोजाना 10 से 11 लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। पांच साल में खर्च हुए 38 हजार 700 करोड़ सड़क परिवहन मंत्रालय के अनुसार, साल 2020-21 से लेकर 2024-25 तक MP में हाईवे के विकास और मरम्मत के लिए कुल 38 हजार 700 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। इसका मतलब है कि सरकार हर साल औसतन 7 हजार 740 करोड़ राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण, डवलपमेंट और सुरक्षा कार्यों पर खर्च कर रही है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद सड़कों पर सुरक्षित सफर की गारंटी नहीं मिल पा रही है। लोकसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के लिखित उत्तर से सामने आया है कि मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन करीब ₹21 करोड़ हाईवे मेंटेनेंस और विकास पर खर्च हो रहे हैं , इसके बावजूद रोजाना औसतन 33 सड़क हादसे हुए और 10 से 11 लोग अपनी जान गवां रहे हैं। हर साल कितना खर्च हो रहा है? सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार 2020-21 से 2024-25 तक कुल हाइवे मेंटेनेंस व विकास बजट (MP): लगभग ₹38,700 करोड़ यानी औसतन ₹7,740 करोड़ हर साल है। सरकार के मुताबिक यह राशि राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव, चौड़ीकरण, उन्नयन और सड़क सुरक्षा पर खर्च की गई। 12 हजार से ज्यादा हादसे हर साल लोकसभा में पेश किए गए आंकड़ों को देखें तो एमपी में 2021 से लेकर 2025 तक पांच सालों में 61,176 दुर्घटनाएं हुई और इन हादसों में 19,416 मौतें हुईं। हर साल औसतन एमपी में 12,235 हादसे हो रहे हैं और 3,883 मौतें प्रति वर्ष हो रहीं हैं। हर दिन ₹21 करोड़ खर्च, फिर चूक कहां? केंद्र सरकार के अनुसार यह बजट सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत व रखरखाव, सुरक्षा कार्य, और नई परियोजनाओं पर खर्च किया गया। बीते पांच साल में मध्य प्रदेश को 4,000 किमी से ज्यादा राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं भी सौंपी गईं। इसके बावजूद हादसों की संख्या यह सवाल खड़ा करती है कि क्या मेंटेनेंस की गुणवत्ता, हाइवे डिजाइन और सुरक्षा इंतजाम जमीन पर उतने प्रभावी हैं? सरकार ने गिनाईं वजहें लोकसभा में दिए जवाब में मंत्रालय ने हादसों के लिए तेज रफ्तार, लापरवाही, ओवरलोडिंग, सड़क व वाहन की स्थिति को जिम्मेदार बताया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ब्लैक स्पॉट सुधार, साइनज, लाइटिंग, सर्विस रोड और निगरानी पर खर्च की वास्तविक असरदार मॉनिटरिंग भी जरूरी है। डेवलपमेंट और मेंटेनेंस पर खर्च हुई राशि(करोड़ रुपए) वर्ष खर्च 2020–21 8,250 2021–22 9,006 2022–23 6,210 2023–24 7,447 2024–25 7,799 पांच साल में 19 हजार से ज्यादा मौतें लोकसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच मध्य प्रदेश के हाईवे पर कुल 61 हजार 176 दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों ने प्रदेश को गहरे जख्म दिए हैं। इनमें 19 हजार 416 लोगों की मौत हो गई। अगर इसका सालाना औसत निकालें, तो प्रदेश में हर साल 12 हजार 235 हादसे हो रहे हैं। साथ ही 3 हजार 883 लोग काल के गाल में समा रहे हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि करोड़ों के निवेश के बाद भी हाईवे डेथ ट्रैप बने हुए हैं। मध्य प्रदेश: राष्ट्रीय राजमार्ग दुर्घटना रिपोर्ट (2021-2025) साल कुल हादसे (Total Accidents) कुल मौतें (Total Deaths) 2021 11,030 3,389 2022 13,860 4,025 2023 14,561 4,476 2024 13,937 4,644 2025 7,788 2,882 कुल (Total) 61,176 19,416 करोड़ों के खर्च के बाद चूक कहां? केंद्र सरकार का दावा है कि बीते पांच सालों में मध्य प्रदेश को चार हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबी नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं सौंपी गईं। बजट का बड़ा हिस्सा सुरक्षा इंतजामों और मरम्मत पर खर्च हुआ। लेकिन हादसों की बढ़ती संख्या ने मेंटेनेंस की गुणवत्ता और हाईवे डिजाइन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या साइन बोर्ड, लाइटिंग और सर्विस रोड जैसे सुरक्षा इंतजाम कागजों से उतरकर जमीन पर प्रभावी रूप से लागू हो पा रहे हैं?   recent visitors 49

Budget 2026 में एमपी के रेलवे नेटवर्क को 7500 करोड़ का समर्थन, इस मंडल को मिलेगा विशेष गिफ्ट

ग्वालियर देश के आम बजट के साथ रेलवे का बजट (Railway Budget 2026) भी पेश किया गया है। इसमें रेल मुसाफिरों की सुरक्षा पर फोकस रहा है। रेल हादसों को रोकने के लिए मुख्य रेल मार्गों पर कवच (ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम) लगाने के काम को तेज किया जाएगा। रेल अधिकारियों का कहना है इससे रेल एक्सीडेंट की आशंका को काफी हद तक खत्म किया जाएगा। इसके अलावा रेल बजट में इस बार गेज कन्वर्जन की राशी को 4284 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 4600 करोड़ रुपए किया है और सिग्नलिंग और टेलीकॉम सिस्टम को पुख्ता करने के लिए 7500 रुपए खर्च होंगे। इसमें कवच सुरक्षा भी शामिल है। क्या है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम रेल अधिकारियों का कहना है ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम एक आधुनिक कवच प्रणाली है। इस पर करीब 2012 से प्रयोग चल रहा है। इसे अनुसंधान, अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) ने तैयार किया है। इससे रेल दुर्घटनाओं की गिनती में कमी आएगी। पिंक बुक से सामने आएंगी सौगातें ग्वालियर, आगरा, झांसी, सहित दूसरे स्टेशन को रेल बजट में क्या सौगात मिली है इसका खुलासा पिंक बुक के जारी होने पर सामने आएगा। रेल अधिकारियों के मुताबिक पिंक बुक 2 फरवरी को जारी किए जाने की उम्मीद है। झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंहका कहना है पिंक बुक जारी होने पर पता चलेगा कि एनसीआर को कितना बजट मिला है इसमें ग्वालियर को क्या सहूलियतें मिलीं हैं। मिलेगा फायदा, यह भी उम्मीद     केंद्र सरकार ने बजट में 20 हजार से अधिक पशु डॉक्टरों की उपलब्धता की बात है। जिले में पशु चिक्तिसकों की काफी कमी है। स्थिति यह है कि प्रदेश की सबसे गोशाला में भी पशु नहीं है,ऐसे में जिले को भी डॉक्टर मिलने से काफी फायदा मिलेगा।     वीजीएफ/पुंजीगत सहायता के माध्यम से प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास बनाया जाएगा। इससे जिले को महिला छात्रावास मिल सकेगा।     बजट में 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और 500 महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाओं की स्थापना होगी। इसमें जिले में भी दो माध्यमिक विद्यालयों व एक महाविद्यालयों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर प्रयोगशालाएं खोलने की उम्मीद है।     ग्वालियर जिले में भी उच्च शिक्षा एसटीईएम संस्थानों में महिला छात्रावास बनाया जाएगा।  recent visitors 44

उज्जैन के सप्त सागरों की स्थिति पर एनजीटी का सख्त रुख, पर्यावरणीय संकट को लेकर उठाई आवाज

उज्जैन उज्जैन की धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यावरणीय पहचान माने जाने वाले ‘सप्त सागर’ लगातार उपेक्षा, अतिक्रमण और प्रदूषण का शिकार हो रहे हैं। इस गंभीर स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को सीधे दखल देने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि आदेशों की अवहेलना और पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सेंट्रल जोन बेंच के न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि स्थानीय प्रशासन न तो पूर्व आदेशों का समुचित पालन कर पाया और न ही समय पर संतोषजनक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि पर्यावरण संरक्षण जैसे संवेदनशील मामलों में प्रशासनिक शिथिलता गंभीर परिणाम ला सकती है। अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई सुनवाई में सामने आया कि खसरा नंबर 1281 में दर्ज गोवर्धन सागर (कुल रकबा 36 बीघा) के 18.5 बीघा से अधिक हिस्से पर अवैध कब्जा हो चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस भूमि पर किसी भी न्यायालय का कोई स्टे नहीं है, इसके बावजूद अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आगामी सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए एनजीटी ने शासन-प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं कि सप्तसागर के संरक्षण और पुनर्जीवन का कार्य मिशन मोड में किया जाए। ट्रिब्यूनल ने प्रमुख सचिव (पर्यावरण) को मासिक निगरानी कर रिपोर्ट पेश करने और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी की गुणवत्ता की जांच कर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। पवित्र सरोवर बने नालियां आवेदक प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने माना कि उज्जैन के रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर और पुरुषोत्तम सागर, सभी की हालत दयनीय हो चुकी है। उज्जैन मास्टर प्लान-2021 के संदर्भ में ट्रिब्यूनल ने गंभीर टिप्पणियां करते हुए कहा कि तालाबों को कचरा डंपिंग यार्ड में तब्दील कर दिया गया है। शहर का अनुपचारित सीवेज सीधे इन जल निकायों में प्रवाहित हो रहा है। अवैध निर्माणों और गंदे पानी के कारण जल गुणवत्ता बेहद खराब हो चुकी है, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। जारी रहेगी सुनवाई एनजीटी ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 20 फरवरी 2026 को होगी, जिसमें कलेक्टर और नगर निगम को की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। अगली सुनवाई में प्रशासन को यह बताना होगा कि जमीनी स्तर पर आखिर क्या बदला। संकेत साफ है कि महाकाल की नगरी में आस्था के साथ अब पर्यावरणीय जवाबदेही भी कसौटी पर है। एनजीटी ने गेंद पूरी तरह शासन-प्रशासन के पाले में डाल दी है। एनजीटी के मुख्य निर्देश ये     अतिक्रमण हटाना : खसरा नंबर 1281 (गोवर्धन सागर) सहित सभी सातों सागरों से तत्काल और पूर्ण अतिक्रमण हटाने के निर्देश।     सीवेज पर पूर्ण रोक : बिना उपचारित (अनट्रीटेड) गंदा पानी और सीवेज किसी भी जल निकाय में बहाने पर पूरी तरह रोक।     मुख्य सचिव की सीधी भूमिका : राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश कि वे स्वयं हस्तक्षेप कर कलेक्टर और नगर निगम से प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराएं।     मासिक निगरानी तंत्र : प्रमुख सचिव (पर्यावरण) हर महीने प्रगति की निगरानी कर रिपोर्ट ट्रिब्यूनल में पेश करेंगे।     जल गुणवत्ता की जांच : मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सभी सात सागरों के पानी के नमूने लेकर हेल्थ रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश।     अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य : कलेक्टर और नगर निगम को 20 फरवरी 2026 की अगली सुनवाई से पहले की गई कार्रवाई की विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।   recent visitors 43