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कर्नाटक
कर्नाटक कांग्रेस के नेताओं के बीच काफी खींचतान की खबरें हैं। वहीं जब महाशिवरात्रि के मौके पर उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ईशा फाउंडेशन के कार्यक्रम में शामिल हुए और सद्गुरु जग्गी वासुदेव से मुलाकात की तो तहलका ही मच गया। कांग्रेस के कई नेताओं ने उनके इस कदम की आलोचना की और नाराजगी जाहिर की। वहीं शिवकुमार ने कहा है कि यह उनका व्यक्तिगत मामला था और वह सद्गुरु के आमंत्रण पर गए थे।

शिवकुमार ने कहा, यह मेरा निजी विश्वास और आस्था का सवाल है कि मैं ईशा फाउंडेशन के कार्यक्रम में शामिल हुआ। मैं इस मामले में सोशल मीडिया पर जवाब नहीं दे सकता। वहीं मेरे इस कदम का स्वागत करने की कोई जरूरत नहीं है। यह शुद्ध रूप से मेरी व्यक्तिगत आस्थ का सवाल है। सद्गुरु ने व्यक्तिगत तौर पर मुझे मैसूर के इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया था। वहीं कांग्रेस के सचिव पीवी मोहन ने कहा कि उनकी इस तरह की हरकतों से पार्टी को नुकसान होगा।

डीके शिवकुमार ने कहा, मैं जन्म से हिंदू हूं और मरते दम तक हिंदू ही रहूंगा। उन्होंने कहा, मैं अकसर नोनाविनाकरे मठ जाता हूं। मेरी जहां भी आस्था होती है वहां जाता हूं। उन्होंने कहा कि 99 फीसदी ब्राह्मण मुझे मेरे विधानसभा क्षेत्र में वोट देते हैं। मैं सिद्धातों की राजनीति करता हूं, जाति की नहीं। उन्होंने कहा कि मेरे खिलाफ गलत अफवाह उड़ाई जा रही है कि मैं बीजेपी के करीब जा रहा हूं। यह मेरे खिलाफ केवल साजिश है।

कोयंबटूर दौरे के बारे में शिवकुमार के पोस्ट का एक स्क्रीनशॉट साझा करते हुए मोहन ने लिखा, ‘धर्मनिरपेक्ष पार्टी के अध्यक्ष होने के बावजूद एक ऐसे व्यक्ति के निमंत्रण के लिए धन्यवाद देना जो देश की उम्मीद आरजी (राहुल गांधी) का मखौल उड़ाता है और जिसके आख्यान आरएसएस के अनुरूप हैं, पार्टी कार्यकर्ताओं को गुमराह करता है, पार्टी का विकास समझौते के बजाय दृढ़ विश्वास से सुनिश्चित होता है। अन्यथा, आधार को क्षति पहुंचती है।’

शिवकुमार ने बुधवार को कहा था, ‘मैं हिंदू हूं। मैं हिंदू पैदा हुआ हूं और हिंदू के रूप में ही मरूंगा, लेकिन मैं सभी धर्मों से प्यार करता हूं और उनका सम्मान करता हूं।’ बुधवार को संवाददाता सम्मेलन के दौरान कोयंबटूर दौरे के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा था, ‘हमारे कांग्रेस अध्यक्ष का नाम मल्लिकार्जुन खरगे है। मल्लिकार्जुन कौन हैं? यह शिव ही हैं। क्या उन्हें अपना नाम बदलना चाहिए?’ हालांकि, शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि वह नहीं चाहते कि भाजपा या कांग्रेस इसका स्वागत करे और न ही उन्हें उनके बारे में बोलने की कोई जरूरत है।

महाशिवरात्रि के दौरान ईशा फाउंडेशन में उनके दौरे को लेकर उठे विवाद के बारे में उन्होंने कहा, ‘हजारों लोग इसका विरोध करें, मुझे अपनी आस्था पर पूरा भरोसा है।’ उनके अनुसार, सद्गुरु ‘मिट्टी बचाओ’ अभियान के तहत कावेरी को बचाने के लिए लड़ रहे हैं और उन्होंने राज्य में बहुत अच्छा काम किया है। कांग्रेस नेता ने कहा कि वह इस कार्यक्रम में इसलिए शामिल हुए क्योंकि सद्गुरु व्यक्तिगत रूप से उनके घर आए थे और उन्हें महाशिवरात्रि में शामिल होने के लिए सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया था।

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