Mandla District Hospital’s arrangements on ventilator, responsible unconcerned
- जिम्मेदारों की कार्यशैली पर उठे सवाल
- डॉक्टरों की मनमर्जी और गंदगी के बीच पिस रही जनता
- पार्किग-ब्लड बैंक में अवैध वसूली का आरोप
मंडला। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था अपनी बदहाली के कारण एक बार फिर सवालों के घेरे में है। धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टरों की मनमानी और अव्यवस्थाओं के चलते जिला अस्पताल अब इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। सबसे गंभीर आरोप सिविल सर्जन की भूमिका पर लग रहे हैं, जिनकी निष्क्रियता के चलते पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।
जानकारी अनुसार जिला अस्पताल में ओपीडी का समय सुबह 9:30 बजे निर्धारित है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यहां पदस्थ अधिकांश डॉक्टर 10:30 या 11 बजे के बाद ही अपनी कुर्सियों पर नजर आते हैं। वहीं दोपहर 2 बजते ही केबिन सख्ती से बंद कर दिए जाते हैं। दूर-दराज के गांवों से सुबह 7 बजे आकर कतार में लगे मरीजों को अक्सर बिना इलाज के बैरंग लौटना पड़ता है।

बुजुर्गों के लिए न लाइन, न सम्मान, स्वच्छता अभियान दिखा रहा ठेंगा
निजी अस्पतालों में जहाँ वरिष्ठ नागरिकों को प्राथमिकता मिलती है, वहीं जिला अस्पताल में बुजुर्ग और दिव्यांग घंटों लाइन में धक्के खाने को मजबूर हैं। चलने में असमर्थ मरीजों के लिए व्हीलचेयर तो हैं, लेकिन वे शो-पीस बनी हुई हैं। बताया गया कि वार्डों में गंदगी और शौचालयों की बदबू ने स्वच्छ भारत अभियान की पोल खोलकर रख दी है। मरीजों को स्वस्थ माहौल देने के बजाय गंदगी के बीच रहने को मजबूर किया जा रहा है।
पार्किंग और ब्लड बैंक में वसूली का खेल :
अस्पताल परिसर में पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली और अभद्रता की शिकायतें आम हो गई हैं। वहीं जीवन रक्षक माने जाने वाले ब्लड बैंक में भी नियमों के बजाय जान-पहचान और मनमर्जी हावी है। आरोप है कि बिना सिफारिश के खून उपलब्ध नहीं होता, जो मानवता को शर्मसार करने जैसा है। सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। लोगों का सवाल है कि वर्षों से एक ही पद पर जमे जिम्मेदार पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या राजनीतिक संरक्षण जनता की सेहत से बड़ा है?
प्रमुख मांगें:
सामाजिक संगठनों और जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि सिविल सर्जन को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।
बायोमेट्रिक हाजिरी से डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित हो। अस्पताल की नियमित सफाई और बुजुर्गों के लिए अलग काउंटर की व्यवस्था हो।