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जशपुरनगर

प्रधानमंत्री आवास योजना से गांव की झोपड़ी में रहने वाले अनेक परिवारों का पक्के मकान का सपना पूरा हो रहा है। राज्य में शासन की योजनाओं का लाभ सभी पात्र हितग्राहियों को मिले और लोगों की सपने पूरे हो इस आशा से मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव के दिशा-निर्देशन में शत् प्रतिशत प्रधानमंत्री आवास उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा सार्थक पहला किया जा रहा है।

         ऐसी कहानी है दुलदुला विकासखण्ड के ग्राम पंचायत छेरडांड़ निवास शांति बाई की। जिनके सपनों का महल प्रधानमंत्री आवास योजना से बना है। अब शांति बाई और उनका परिवार पक्के मकान में आराम से रहते है। शांति बाई ने राज्य शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री ने गरीबों को उनके सपने पूरे करने का अवसर दिया। आज उन्ही के कारण हमारे पास अपना पक्का मकान है।

शांति बाई की कहानी उनकी जुबानी
शांति बाई ने बताया कि मेरे पति मजदूरी करते है। बचपन से ही शांति बाई ने गरीबी को देखा है। उनका पूरा परिवार कच्चे मकान में रहता है। मनरेगा के तहत ग्राम पंचायत में किये जा रहे कार्यों में मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। उन्होंने कहा कि गरीबी के कारण हम लोग अपना स्वयं का मकान नहीं बनवा सके तथा सदैव यह सपना होता था कि हमारा भी एक पक्का मकान हो जिसमें हम अपने परिवार के साथ रह सके। परंतु आर्थिक तंगी के चलते वह सपना पूर्ण नहीं हो पा रहा था। अंदर से मन खिन्न हो चला था उसी समय कुछ लोगों ने हमें बताया कि प्रधानमंत्री ने गरीब असहाय लोगों के लिए घर बनवाने की एक योजना चलाई है, जिसके द्वारा गरीब असहाय लोगों के अपने पक्के घर का सपना साकार हो रहा है। मुझे इसका विश्वास न हुआ परंतु प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण योजना अंतर्गत आवास स्वीकृत हुआ और आज हमारा पक्का बना गया।

        शांति बाई ने बताया कि पक्के मकान नहीं होने से पहले झोपड़ी में जिंदगी गुजर रही थी। धूप, बरसात और कीड़े, जानवरों के डर के साये में जिना पड़ता था। छप्पर झोपड़ी की जिंदगी से परेशान थे। नातेदार रिश्तेदार के सामने भी बेइज्जती होती थी। परंतु मजबूरी से सब कुछ सहन करना पड़ता था। बरसात में तो खाना बनाने और रात में सोने में बहुत कठिनाई होती थी। परंतु अपनी गरीबी पर रोते थे जब उन्हें पता चला कि उनका नाम भी आवास सूची में है और प्रधानमंत्री आवास आबंटित हुआ उनका सपना पूरा होता नजर आया। जिसे वे बड़ी लगन व मेहनत से बना कर तैयार किया। वर्तमान में आवास बनकर तैयार हो गया है। उन्होंने बताया कि वे निर्धन व मजदूरी पेशा होने के चलते कभी सोच भी नहीं सकते थे कि इतना सुंदर घर अपने जीवन में बना पाएगे।   

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