बस्तर में सुरक्षाबल के जवानों की लगातार कार्रवाई से नक्सली संगठन खौफ, शाह की रणनीति का दिखा असर

रायपुर  छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ लगातार एक्शन हो रहे हैं। सुरक्षाबल के जवान नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले अबूझमाड़ में घुसकर कार्रवाई कर रहे हैं। जिसके बाद नक्सली खौफ में आ गए हैं। ऐसे में नक्सली संगठन की तरफ से शांति की पहल का एक लेटर जारी किया गया है। शांति की पहल को लेकर दावा किया जा रहा है कि नक्सली संगठन अब कमजोर हो गए हैं। केंद्र सरकार भी नक्सलवाद के खात्मे के लिए लगातार सपोर्ट कर रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लगातार नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति बना रहे हैं और उसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अमित शाह के डेडलाइन क्या है? छत्तीसगढ़ में नक्सवाद के खात्मे की कमान खुद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने हाथों में ले रखी है। अमित शाह लगातार नक्सल विरोधी अभियानों की समीक्षा कर रहे हैं और रणनीति भी बना रहे हैं। अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे के लिए एक डेडलाइन तक की है। शाह ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को खत्म करने की डेट तय की है। यह डेडलाइन तय होने के बाद सुरक्षाबल के जवान ताबड़तोड़ एक्शन कर रहे हैं। सेना की पहुंच उन इलाकों में हो गई है जहां कभी नक्सलियों की बिना इजाजत के कोई बाहरी व्यक्ति कदम नहीं रख सकता था। गृहमंत्री ने दिया है दो टूक जवाब नक्सली संगठन का एक लेटर सामने आया है। इस लेटर में उन्होंने कहा कि सरकार को युद्ध विराम की घोषणा करनी चाहिए। वह शांति से वार्तालाप करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने उसके लिए शर्त रखी है कि सरकार सेना की कार्रवाई रोके। नए इलाकों में बनाए गए कैंप को हटा दिया जाए। नक्सलियों की शर्त पर राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा दो दो टूक जवाब दे चुके हैं कि नक्सली संगठन हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटें उन्होंने कहा कि किसी भी शर्त पर बातचीत नहीं होगी। क्यों शांति चाहते हैं नक्सली नक्सलियों की शांति पहल को लेकर बस्तर के रहने वाले वरिष्ठ साहित्यकार रजीव रंजन ने नवभारत टाइम्स डॉट कॉम को बताया कि- ऐसा पहली बार हुआ है जब नक्सली इतने कमजोर हैं। जिस तरह से 2024 में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन हुए उसके बाद इस साल की शुरुआत में जवानों ने माओवादियों के बड़े कैडर को मार गिराया हो उससे वह खौफ में आ गए हैं। उन्होंने कहा कि यह शांति पहल नक्सलियों का एक ट्रैप है। इस ट्रैप का फायदा उठाकर वह अपने लिए समय की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह खुद को और अपने संगठन के टॉप लीडरों की बचाने की नक्सलियों की एक साजिश है। इस साजिश के जरिए नक्सली सरकार को शांतिवार्ता में उलझाकर जवानों की कार्रवाई रोकना चाहते हैं। वह जिस युद्ध विराम की बात कर रहे हैं वह खुद उन्हें करना चाहिए। सरेंडर करके सरकार की जो पुनर्वास नीति है उसका लाभ उठाना चाहिए। हथियारों और लीडरों की कमी उन्होंने कहा कि सुरक्षाबल के जवानों ने अबूझमाड के उन इलाकों में कैंप स्थापित कर लिए हैं जिन्हें नक्सली अपना सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते थे। नक्सलियों के खिलाफ जवान लगातार कार्रवाई ही नहीं कर रहे हैं उनके हथियार और विस्फोटकों को भी जब्त कर रहे हैं जिससे संगठन के पास आधुनिक हथियारों की भी कमी हो गई है। ऐसे में वह शांति का ट्रैप बिछाने की कोशिश में हैं। वह अपने टॉप लीडरों को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाना चाहते हैं। पहली बार ऐसा एक्शन उन्होंने कहा कि इससे पहले हम बस्तर में देखते थे कि सरकार और जवान शांति के लिए पहल करते थे। लेकिन इस बार उल्टा है। जवान और सरकार ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहे हैं और नक्सली शांति की बात कर रहे हैं। वह भारी दबाव में हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को शांति पहल करनी चाहिए लेकिन बस्तर में जवानों की कार्रवाई तब तक नहीं ठहरनी चहिए जब तक की नक्सलवाद पूरी तरह से घुटने नहीं टेक देता है। recent visitors 51

भारत में नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटकर 6 हुई : अमित शाह

रायपुर गृहमंत्री अमित शाह 4 अप्रेल को फिर से छत्तीसगढ़ जाने वाले हैं. इससे पहले उन्होंने एक्स पर एक बड़ी जानकारी दी. छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा दौरे से पहले शाह ने कहा देश में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में सरकार को बड़ी सफलता मिली. देश में नक्सली हिंसा से प्रभावित जिलों की संख्या 12 से घटकर 6 हो गई है. 31 मार्च 2026 तक भारत में नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने का लक्ष्य सरकार ने रखा है. मोदी 3.0 के मिशन में ये सबसे महत्वपूर्ण मु्द्दा है. इसे लेकर केंद्र सरकार का प्लान कारगर होते भी दिख रहा है. अमित शाह साफ कह चुके हैं कि 31 मार्च 2026 के बाद देश में नक्सलवाद केवल इतिहास बनकर रह जाएगा. इसे पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ की साय सरकार का प्लान पर एक्शन तारीफ के लायक है. नक्सलवाद को इतिहास बना देंगे- शाह 2 दिन पहले अमित शाह ने 50 नक्सलियों के सरेंडर के खुशी जाहिर करते हुए कहा था 'ये बहुत हर्ष का विषय है कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर में 50 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया. हिंसा और हथियार छोड़कर विकास की मुख्यधारा में शामिल होने वालों का मैं स्वागत करता हूँ. मोदी जी की नीति स्पष्ट है कि जो भी नक्सली हथियार छोड़कर विकास का मार्ग अपनाएँगे, उनका पुनर्वास कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा.  बाकी लोगों से भी मैं पुनः अपील करता हूँ कि वे हथियार त्याग कर मुख्यधारा में आएं. 31 मार्च 2026 के बाद देश में नक्सलवाद केवल इतिहास बनकर रह जाएगा, यह हमारा संकल्प है'. अब 6 जिलों में ही बचा है नक्सलवाद, 10 सालों में 29 जिले मुक्त इन जिलों को ‘सबसे अधिक प्रभावित जिले’ के रूप में उप-वर्गीकृत किया गया है। यह 2015 में लाई गई शब्दावली है। इसके अलावा एक उप वर्ग ‘चिंताजनक जिलों’ की श्रेणी का है। यह उप श्रेणी 2021 में बनाई गई थी। पिछली समीक्षा के अनुसार ‘सर्वाधिक प्रभावित जिले’ 12 थे। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 2015 में ऐसे 35 जिले, 2018 में 30 जिले और 2021 में 25 जिले थे। अब यह आंकड़ा तेजी से कम होता जा रहा है। साफ है कि बीते 10 सालों में 29 जिलों से नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और अब सिर्फ 6 जिलों में ही यह बचा है। कमांडर्स से मुलाकात इस बीच छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने पीसी कर जानकारी दी. उन्होंने बताया  बस्तर पंडुम समापन में बस्तर की सांस्कृतिक विषयों पर कार्यक्रम होंगे.  3 अप्रैल को कवि कुमार विश्वास “बस्तर के राम“ की प्रस्तुति देंगे.  डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 4 अप्रैल को छत्तीसगढ़ आएंगे और 5 अप्रैल की सुबह दंतेवाड़ा जाएंगे. अमित शाह मां दंतेश्वरी माता के दर्शन करेंगे और बस्तर पंडुम के समापन कार्यक्रम में शामिल होंगे. इसके अलावा स्थानीय चुनाव के जनप्रतिनिधियों से भी मिलेंगे. बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, नारायणपुर के जनप्रतिनिधियों से शाह की मुलाकात होनी है. नक्सलवाद को लेकर लगातार चल रही कार्रवाई के बीच अमित शाह बस्तर में कमांडर्स से मुलाकात करेंगे. बस्तर से लौटकर रायपुर में शाह प्रशासनिक बैठक भी करेंगे.  recent visitors 42

‘370 हटाने के बाद आतंकी घटनाओं में कमी आई’,10 साल में कश्मीर में 12 हजार करोड़ का निवेश: अमित शाह का दावा

नई दिल्ली गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर हुई चर्चा का जवाब दे रहे हैं. गृह मंत्री शाह ने उरी और पुलवामा हमले का जिक्र करते हुए कहा कि 10 दिन में बदला लिया और हमने भारत को इजरायल-अमेरिका वाली लिस्ट में ला दिया. ताजा अपडेट के लिए पेज को रिफ्रेश करते रहें। जहां मरते हैं, वहीं दफना दिए जाते हैं आतंकी- अमित शाह गृह मंत्री अमित शाह ने तीन समस्याएं दशकों से नासूर की तरह बन गई थीं. एक वामपंथी उग्रवाद, दूसरा पूर्वोत्तर का उग्रवाद और तीसरा आतंकवाद. पहले जम्मू कश्मीर में आतंकी आते थे और कोई त्योहार नहीं होता था जब हमले नहीं होते थे. मोदीजी के आने के बाद भी हमले हुए. उरी और पुलवामा में हमला हुआ. 10 दिन में पाकिस्तान में घर में घुसकर एयर स्ट्राइक कर जवाब दिया गया. दुनिया में इजरायल और अमेरिका की सूची में महान भारत का नाम जुड़ गया. अमित शाह ने कश्मीर में जी-20 बैठक के सफल आयोजन का जिक्र करते हुए कहा कि कन्याकुमारी से कश्मीर तक मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में यात्रा निकली थी. हमें लाल चौक जाने की परमिशन नहीं मिल रही थी. हमने जिद की तो सेना की सुरक्षा में जाना पड़ा और आनन-फानन में तिरंगा फहराकर आना पड़ा. उसी लाल चौक पर कोई घर ऐसा नहीं था जिस पर हर घर तिरंगा अभियान में तिरंगा न हो. हमने कई ऐसे कदम उठाए जिसकी वजह से आतंकियों से भारतीय बच्चों के जुड़ने की संख्या करीब-करीब शून्य हो गई है. आतंकी जब मारे जाते थे, बड़ा जुलूस निकलता था. आज भी आतंकी मारे जाते हैं और जहां मारे जाते हैं, वहीं दफना दिए जाते हैं. घर का कोई आतंकी बन जाता था और परिवार के लोग आराम से सरकारी नौकरी करते थे. हमने उनको निकालने का काम किया. आतंकियों के परिवार के लोग बार काउंसिल में बैठे थे और प्रदर्शन होने लगता था. आज वो श्रीनगर या दिल्ली की जेल में हैं. उन्होंने पथराव से लेकर ऑर्गेनाइज हड़ताल की घटनाओं के आंकड़े भी गिनाए. 10 साल में परिवर्तन कर राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने का काम किया- अमित शाह गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा का जवाब दे रहे हैं. गृह मंत्री ने कहा कि चर्चा के दौरान कुछ उपयोगी सुझाव भी आए हैं, कुछ हमारी कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया, कुछ राजनीतिक टिप्पणियां भी की गईं, कुछ राजनीतिक आक्षेप भी लगाए गए. सभी का संसदीय भाषा में जवाब देने का प्रयास करूंगा. उन्होंने कहा कि देश की सरहदों को सुरक्षित करने के लिए अपना बलिदान दिया है, केंद्रीय बलों और स्टेट पुलिस के उन हजारों जवानों को भी नमन करता हूं. गृह मंत्रालय एक प्रकार से बहुत विषम परिस्थिति में काम करता है. कानून-व्यवस्था का जिम्मा राज्यों के पास है और सरहदी सुरक्षा गृह मंत्रालय के जिम्मे है. इसमें बदलाव की जरूरत भी नहीं है. 76 साल बाद ऐसी परिस्थिति खड़ी हो गई है कि कई अपराध राज्यों की सीमा तक सीमित नहीं होते. कई अपराध ऐसे होते हैं जो देश की सीमा के बाहर से भी हमारे यहां होते हैं. 10 साल में नरेंद्र मोदी जी ने एक साथ परिवर्तन कर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का काम किया है. 'नई लाशें बिछाने के लिए गड़े मुर्दे उखाड़ दिए', संजय राउत ने नागपुर दंगे पर सरकार को घेरा शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने राज्यसभा में कहा कि आज क्या दिन आ गया है कि उच्च सदन में औरंगजेब पर चर्चा हो रही है. इसके लिए गृह मंत्रालय जिम्मेदार है. देश को एक-अखंड रखना गृह मंत्रालय का काम है. देश को कुछ समय से पुलिस स्टेट बना दिया गया है. एक मणिपुर कल तक जल रहा था, अब महाराष्ट्र को भी जला दिया. नई लाशें बिछाने के लिए आपने गड़े मुर्दे उखाड़ दिए और वह भी औरंगजेब के नाम पर. नागपुर में तीन सौ साल में कभी दंगा नहीं हुआ था. दंगा हो गया वह भी मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में. आपको औरंगजेब की कब्र तोड़नी है तो जाओ तोड़ो ना हाथ में फावड़ा-वावड़ा लेकर. मुख्यमंत्री आपका है, गृह मंत्री आपका है. जाओ ना. लेकिन अपने बच्चों को भेजो, हमारे बच्चों को मत भेजो. आपके बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं. मुसलमान में बाबर का डीएनए तो तुम राणा सांगा की औलाद- रामजी सुमन बहुजन समाज पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी सुमन ने कहा कि बीजेपी के लोगों का एक तकिया कलाम हो गया है कि मुसलमान में बाबर का डीएनए है. भारत का मुसलमान बाबर को तो अपना आदर्श मानता है नहीं, वह तो मोहम्मद साहब को अपना आदर्श मानता है. बाबर को लाया कौन था. इब्राहिम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा ने बाबर को लाया. मुसलमान में बाबर का डीएनए है तो तुम राणा सांगा की औलाद हो. राणा सांगा की गद्दारी की चर्चा तो होती नहीं. इस पर आसन से हरिवंश ने राम जी सुमन को रोकते हुए कहा कि आपका समय खत्म हो गया. अब आप बैठिए. डिप्टी चेयरमैन हरिवंश ने ये भी कहा कि जो भी संसदीय मर्यादा के अनुकूल नहीं होगा, वह रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा. पंजाब के किसानों को हरियाणा सरकार रोक देती है, ये मामूली बात नहीं- धर्मेंद्र यादव लोकसभा में जलशक्ति मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा के बाद अब कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा चल रही है. चर्चा की शुरुआत आजमगढ़ से समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने की है. धर्मेंद्र यादव ने स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश के अनुरूप एमएसपी की गारंटी देने की मांग की और कहा कि हम किसी पर टिप्पणी नहीं करते लेकिन बीजेपी के ही लोग कहते हैं कि मोदी की गारंटी. उन्होंने गन्ना किसानों के मूल्य भुगतान के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि छुट्टा जानवर भी बड़ी समस्या है. पूरा उत्पादन जब तक बिक नहीं जाता, किसान का पूरा परिवार जाड़ा-गर्मी-बरसात खेत में पड़ा रहता है. प्रधानमंत्री जी की भी सरकार में बैठे लोग नहीं सुनते. इस समस्या का स्थायी समाधान निकालिए. कृषि क्षेत्र से 60 फीसदी लोगों को रोजगार मिलता है. 30 फीसदी बजट ही ले आते. देश के किसान, परिवार में … Read more

शाह ने तय कर दिया है टारगेट, 22 नक्सलियों के ढेर होने के बाद डेप्युटी सीएम ने कहा- इंद्रावती नदी के किनारे पर चाय पिएंगे

रायपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों की ओर से 22 नक्सलियों को मार गिराए जाने को ‘बड़ी सफलता’ करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने अगले बड़े ऑपरेशन की तारीख भी इशारों में बता दी है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच बृहस्पतिवार सुबह हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 18 नक्सलियों को और कांकेर जिले में चार नक्सलियों को मार गिराया। इन घटनाओं में एक जवान की जान भी चली गई। शाह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'नक्सलमुक्त भारत अभियान’ की दिशा में आज हमारे जवानों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में हमारे सुरक्षा बलों के 2 अलग-अलग ऑपरेशन्स में 22 नक्सली मारे गए।' उन्होंने कहा, 'मोदी सरकार नक्सलियों के विरुद्ध बिना कोई रहम किए से आगे बढ़ रही है और समर्पण से लेकर समावेशन की तमाम सुविधाओं के बावजूद जो नक्सली आत्मसमर्पण नहीं कर रहे हैं, उनके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। अगले साल 31 मार्च से पहले देश नक्सल-मुक्त होने वाला है।' 31 मार्च 2026 का टारगेट गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘नक्सलमुक्त भारत अभियान’ की दिशा में आज हमारे जवानों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में हमारे सुरक्षा बलों के 2 अलग-अलग ऑपरेशन्स में 22 नक्सली मारे गए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार नक्सलियों के विरुद्ध रुथलेस अप्रोच से आगे बढ़ रही है और समर्पण से लेकर समावेशन की तमाम सुविधाओं के बावजूद जो नक्सली आत्मसमर्पण नहीं कर रहे, उनके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। अगले साल 31 मार्च से पहले देश नक्सलमुक्त होने वाला है। बीजापुर में ठोके गए 18 नक्सली छत्तीसगढ़ के डेप्युटी सीएम और गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि बीजापुर और दंतेवाड़ा के बीच में गंगालूर क्षेत्र है, जहां सुबह 7 बजे फायरिंग हो रही थी। इस मुठभेड़ में कुल 18 नक्सली मारे गए हैं। साथ ही डीआरजी जवान राजू ओएम शहीद हुए हैं। शहीद परिवार के साथ पूरी सरकार खड़ी है। छत्तीसगढ़ महत्तारी की सेवा के लिए उन्होंने सर्वोच्चय बलिदान दिया है। हम जवानों को शुभकामना देते हैं। यह उनकी भुजाओं की ताकत है। कांकेर में भी चार नक्सली मारे गए हैं। इंद्रावती नदी के किनारे पर पीएंगे चाय विजय शर्मा ने कहा कि यह बड़ी सफलता है। अब बीजापुर से बामेड़ तक बस चल रही है। पहले तेलंगाना होते हुए जाना पड़ता था। अब समूचा बस्तर बदल रहा है। आने वाले समय में पूरा बस्तर लाल आतंक से मुक्त होगा। आगे चलकर आप भी किसी शाम इंद्रावती नदी के किनारे आराम से बैठकर चाय पी सकते हैं। गौरतलब है कि मुठभेड़ के बाद जवानों ने नक्सलियों के शव और हथियार बरामद कर लिए हैं। छत्तीसगढ़ में जवान लगातार लाल आतंक के खात्मे के लिए काम कर रहे हैं। साथ ही नक्सलियों पर प्रहार जारी है। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के खात्मे का लक्ष्य रखा गया है। छत्तीसगढ़ में ऑपरेशन अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार सुबह सुरक्षाबलों की टीम बीजापुर और दंतेवाड़ा के सरहदी में थाना गंगालूर इलाके में नक्सली विरोध ऑपरेशन पर निकली थी। इसी दौरान सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई। टीम ने दो अलग-अलग ऑपरेशन में 22 नक्सलियों को मार गिराया है। सुरक्षाबल की टीम ने बीजापुर में 18 तो कांकेर में चार नक्सली मार गिराया है। इस मुठभेड़ में बीजापुर डीआरजी के एक जवान राजू ओयामी शहीद हो गए। गृह मंत्री विजय शर्मा ने 18 नक्सलियों के शव बरामद होने की पुष्टि की है वहीं अन्य क्षेत्रों से अभी शव प्राप्त होने की सूचना आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हुई है। recent visitors 38

सरकार की सख्त नीतियों और सुरक्षा बलों की प्रभावी रणनीति के चलते नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति लौट रही है- CM विष्णुदेव साय

रायपुर छ्त्तीसगढ़ सीएम विष्णुदेव साय ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इस दौरान मुख्य तौर पर राज्य में नक्सलवाद को लेकर चर्चा हुई. मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री साय ने बताया बस्तर में नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. सरकार की सख्त नीतियों और सुरक्षा बलों की प्रभावी रणनीति के चलते नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति लौट रही है. इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके निवास पर मुलाकात की. इस बैठक में नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने, बस्तर के विकास को तेज करने और पर्यटन व आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर विस्तार से चर्चा हुई. मुख्यमंत्री श्री साय ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह को अवगत कराया कि नक्सलवाद अब अपने आखिरी पड़ाव पर है और सरकार इसे पूरी तरह खत्म करने के लिए निर्णायक कदम उठा रही है. राज्य और केंद्र के संयुक्त प्रयासों से नक्सली संगठनों की पकड़ कमजोर हो चुकी है. अब अंतिम चरण की रणनीति तैयार कर बस्तर को स्थायी शांति की ओर ले जाने पर जोर दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 का असर दिखने लगा है. हाल ही में बीजापुर जिले में 9 ईनामी नक्सलियों समेत कुल 19 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया. आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार द्वारा आर्थिक सहायता और पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, ताकि वे समाज में सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें. बैठक में बस्तर में विकास कार्यों को तेज करने पर विशेष ध्यान दिया गया. सरकार की नई आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति-2025 का असर दिखने लगा है। हाल ही में बीजापुर जिले में 9 ईनामी नक्सलियों समेत कुल 19 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार द्वारा आर्थिक सहायता और पुनर्वास योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है, ताकि वे समाज में सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। बैठक में बस्तर में विकास कार्यों को तेज करने पर विशेष ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और जल जैसी बुनियादी सुविधाओं को मजबूत कर रही है। इसके साथ ही, बस्तर के समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक सौंदर्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाओं पर भी विचार किया गया। बस्तर के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल विकास, स्वरोजगार और नए रोजगार के अवसर तैयार किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर सिर्फ संघर्ष की भूमि न रहकर शांति, विकास और संभावनाओं का नया केंद्र बने। recent visitors 46

Modi Government ने Jammu Kashmir के दो संगठनों पर बैन लगाया

श्रीनगर केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के दो संगठनों 'जम्मू-कश्मीर इत्तिहादुल मुस्लिमीन' और 'आवामी एक्शन कमेटी' को गैरकानूनी संगठन घोषित कर दिया है. गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर यह जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि ये संगठन लोगों को भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं, जिससे देश की एकता और अखंडता को खतरा हो सकता था. UAPA के तहत प्रतिबंध क्यों? गृह मंत्रालय के अनुसार, इन संगठनों की गतिविधियों से यह साफ हुआ कि वे जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने की साजिश रच रहे थे. उनके बयानों और कार्यों से लोगों को हिंसा के लिए उकसाया जा रहा था, जिससे कानून-व्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा था. वहीं, अमित शाह ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी. देश की शांति, व्यवस्था और संप्रभुता के खिलाफ काम करने वालों को करारा जवाब दिया जाएगा. सरकार के अनुसार उमर फारूक के नेतृत्व वाली अवामी एक्शन कमेटी जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में अलगाववाद को प्रोत्साहन देते हुए आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और भारत विरोधी प्रचार-प्रसार में शामिल रही है। अधिसूचना में कहा गया है कि उक्त समूह भारत की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में लिप्त रहा है। सरकार ने ए.ए.सी. पर गैरकानूनी गतिविधियों के लिए धन जुटाने, अलगाववादियों को समर्थन प्रदान करने तथा संविधान के प्रति अनादर दिखाने का आरोप लगाया है। recent visitors 46

विजयवर्गीय जी आप कहां जा रहे हैं? अमित शाह के फोन मिलाते ही दौड़े आए मंत्री; MP में सियासी पारा बढ़ा

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दो दिनों तक चले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के समापन समारोह में शामिल होने पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कार्यक्रम खत्म होने के बाद इंदौर के लिए रवाना हुए। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान उन्होंने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बारे में पूछा, तब उन्हें बताया गया कैलाश विजयवर्गीय इंदौर निकल चुके हैं। इसके बाद अमित शाह का कॉल कैलाश विजयवर्गीय के पास पहुंचा तब तक कैलाश भोपाल से काफी दूर निकल चुके थे। लेकिन अमित शाह का कॉल आने के तत्काल बाद वह वापस स्टेट हैंगर लौटे। इस दौरान उनकी अमित शाह से शॉर्ट मीटिंग भी हुई। बताया जा रहा है अमित शाह ने केंद्रीय राजनीति में उनसे मुलाकात कर नाराजगी की तमाम अटकलें को भी खारिज किया है और संदेश देने की कोशिश भी की है। कैलाश विजयवर्गीय को बुलाया अमित शाह मंगलवार शाम करीब 6 बजे स्टेट हैंगर पहुंचे। BJP के कार्यकर्ता उन्हें विदा करने के लिए इंतज़ार कर रहे थे। लेकिन गृह मंत्री अमित शाह जाने की बजाय VIP लाउंज में चले गए। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को ढूंढा। विजयवर्गीय, जो पहले BJP के राष्ट्रीय महासचिव भी रह चुके हैं, शाह के संगठनात्मक टीम का हिस्सा थे। जब शाह BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। अगस्त 2015 में शाह ने ही विजयवर्गीय को पश्चिम बंगाल का प्रभारी राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया था। उज्जैन के रास्ते में थे कैलाश विजयवर्गीय वहीं, जब अमित शाह का संदेश कैलाश विजयवर्गीय तक पहुंचा तो वह उज्जैन के रास्ते में थे। उन्हें एक पार्टी कार्यकर्ता की शादी में शामिल होना था। और फिर महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि का उत्सव मनाना था। वह भोपाल के बाहरी इलाके में पहुंच चुके थे। लेकिन शाह के फोन के बाद, उन्होंने अपने ड्राइवर को स्टेट हैंगर जाने का निर्देश दिया। इस बीच, शाह VIP लाउंज में विजयवर्गीय का इंतजार कर रहे थे। विजयवर्गीय के पहुंचते ही दोनों नेताओं ने लगभग 20 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत की। कैलाश विजयवर्गीय की होगी संगठन में वापसी इस मुलाकात के बाद, राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि विजयवर्गीय को प्रदेश BJP अध्यक्ष पद के लिए दावेदार माना जा रहा है। एक वरिष्ठ BJP पदाधिकारी ने बताया कि एमपी के दो नेता अमित शाह के करीबी माने जाते हैं कैलाश विजयवर्गीय और नरोत्तम मिश्रा। मिश्रा 2023 के विधानसभा चुनाव हारने के बाद से सक्रिय नहीं हैं। और विजयवर्गीय, जिन्होंने बंगाल में BJP को एक विकल्प के रूप में स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई, राज्य में वापस आकर केवल कैबिनेट मंत्री बनने से असंतुष्ट हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर अटकलें कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि अगले महीने BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होना है। क्या विजयवर्गीय प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में हैं या राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की? या फिर वह सिर्फ राजनीतिक फीडबैक ले रहे थे? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। और विजयवर्गीय भी इस बारे में कुछ नहीं कह रहे हैं। जल्द होने वाले हैं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव GIS के बाद, राज्य का अगला बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम प्रदेश BJP अध्यक्ष का चुनाव है। वर्तमान अध्यक्ष वीडी शर्मा का कार्यकाल इस महीने की शुरुआत में पूरा हो गया है। एक पार्टी पदाधिकारी ने बताया कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, जिन्हें प्रदेश अध्यक्ष चुनाव का प्रभार दिया गया है, 1 मार्च को भोपाल आ सकते हैं। वे 413 पार्टी प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। ये प्रतिनिधि ही अगले प्रदेश BJP अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति मार्च के पहले हफ्ते के अंत तक होने की उम्मीद है। कई सवाल खड़े हो रहे अचानक हुई मुलाकात ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वाकई विजयवर्गीय को कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है? क्या यह मुलाकात मध्यप्रदेश की राजनीति की दिशा बदल देगी? आने वाला समय ही इन सवालों का जवाब देगा। सरकार में शामिल होने से खुश नहीं? कथित तौर पर यह चर्चा होती है कि कैलाश विजयवर्गीय सरकार में खुद को असहज महसूस करते हैं। साथ ही कुछ चीजों को लेकर उनकी असहमति भी रहती है। यह जानकारी आलाकमान तक पहुंची थी। शायद यही वजह रही कि अमित शाह ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया है। ऐसे में अनुमान यह भी है कि उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। हालांकि कैलाश विजयवर्गीय ने इस मुलाकात पर चुप्पी साध रखी है। मुलाकात के बाद बुधवार की सुबह उन्होंने महाकाल मंदिर जाकर अपने परिवार के साथ पूजा की है। 20 मिनट तक बंद कमरे में हुई बैठक बताया जा रहा है कि जब अमित शाह ने फोन किया तो उस समय विजयवर्गीय पार्टी कार्यकर्ताओं की शादी में शामिल होने और महाकाल मंदिर में महाशिवरात्रि उत्सव में भाग लेने के लिए उज्जैन की तरफ जा रहे थे। वह भोपाल के आउटर इलाके में पहुंच चुके थे लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री का फोन आने पर उन्‍होंने अपने ड्राइवर को वापस स्टेट हैंगर की ओर जाने का आदेश दिया। सूत्रों के मुताबिक, यहां पहुंचने के बाद दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बंद कमरे में बैठक हुई। अमित शाह के फोन से राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा बता दें कि अमित शाह की एक कॉल और अचानक से हुई इस मुलाकात ने राज्‍य के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा शुरू कर दी है। सूत्र बता रहे हैं कि शाह ने खुद विजयवर्गीय को स्‍पेशली फोन कॉल किया, जिसके बाद उन्‍होंने अपनी कार वापसी दिशा में दौड़ा दी और यह मीटिंग हुई। इसके बाद चर्चा शुरू हो गई कि जीआईएस खत्म होने के बाद मध्य प्रदेश में क्‍या कोई अगला बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होने वाला है। recent visitors 91