दमोह में आंगनवाड़ी केंद्रों पर जल्द ही सैकड़ों आंगनवाड़ी सहायिकाओं के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने वाली

दमोह दमोह जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों पर जल्द ही सैकड़ों आंगनवाड़ी सहायिकाओं के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। दरअसल, लंबे समय से कम वेतन पर कार्यरत मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को अब अपग्रेड किया गया है। इन्हें महिला बाल विकास विभाग ने मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मुख्य आंगनवाड़ी कार्यकर्ता में तब्दील कर दिया है। सरकार के इस फैसले से दमोह की 254 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ जाएगा। उन्हें अब 6,700 रुपये से बढ़कर 13,100 रुपये मिलने लगेंगे। मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की जगह अब इन्हें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में माना जाएगा। सहायिकाओं की भर्ती प्रक्रिया दिसंबर के पहले सप्ताह से प्रारंभ होगी। खास बात यह है कि इस बार स्थानीय स्तर पर भर्ती नहीं होगी। शासन को इसकी सूचना भेजी जाएगी और वहां से पोर्टल के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया अपनाई जाएगी। दिसंबर के पहले सप्ताह में कार्यप्रणाली तैयार होगी महिला बाल विकास विभाग के सहायक संचालक संजीव मिश्रा ने बताया कि अब भोपाल से पोर्टल के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया होगी। यहां से केवल खाली पद की जानकारी मांगी जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले से जानकारी भेजी जा चुकी है। जो पुरानी मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता थीं, उन्हें अब प्रमोट करके आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बना दिया गया है। संभवतः दिसंबर के पहले सप्ताह में इसकी कार्यप्रणाली तैयार हो जाएगी और पोर्टल के माध्यम से भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाएगी। उन्होंने बताया कि पहले मिनी आंगनवाड़ी केंद्र पर केवल कार्यकर्ता होते थे, लेकिन अपग्रेड होने के बाद वहां सहायिका की नियुक्ति की जाएगी।   recent visitors 67

आंगनबाड़ी में फल-दूध न मिलने पर लिया संज्ञान, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला-बाल विकास विभाग से मांगा जवाब

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने आंगनबाड़ी में बच्चों को फल, दूध आदि नहीं दिए जाने पर स्वतः संज्ञान लिया है. मामले की जनहित याचिका के रूप में सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने कोर्ट कमिश्नरों की रिपोर्ट से सचिव महिला बाल विकास विभाग के शपथ पत्र का तुलनात्मक मिलान करने को कहा है. मामले में अगली सुनवाई 12 दिसंबर को होगी. बता दें कि दुर्ग जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को फल और दूध नहीं दिए जाने की खबर मीडिया में आई थी, जिस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज कर सुनवाई शुरू की. चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डीबी ने इसके लिए एडवोकेट अमिय कांत तिवारी , सिध्दार्थ दुबे, आशीष बेक, ईशान वर्मा को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया. कोर्ट कमिश्नरों ने इन केन्द्रों में जाकर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की. कोर्ट कमिश्नरों को सबंधित अधिकारियों ने बताया कि फल दूध की जगह पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है. रिपोर्ट आने के बाद हाईकोर्ट ने राज्य शासन के संबंधित प्राधिकारी से शपथपत्र के साथ जवाब मांगा था. मामले में राज्य के मुख्य सचिव और अन्य अफसरों को पक्षकार बनाया गया. इसके कुछ समय बाद सूरजपुर, कवर्धा और बस्तर से भी यही मामला सामने आया. इन जगहों पर जाकर भी कमिश्नरों ने निरीक्षण कर फिर अपनी रिपोर्ट तैयार की. इस बीच सचिव महिला बाल विकास ने कोर्ट में शपथपत्र प्रस्तुत किया. आज मंगलवार को चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान उपस्थित कोर्ट कमिश्नर से कोर्ट ने कहा कि वे अपनी रिपोर्ट से इस शपथपत्र को तुलना कर लें ताकि मालूम हो सके कि अदालत के आदेश का पालन हुआ है या नहीं. recent visitors 88